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आज हम बात करने जा रहे हैं एक लैंडमार्क
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सुप्रीम कोर्ट जजमेंट की जो सिर्फ टाइगर
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ग्लोबल या Flipkart तक लिमिटेड नहीं है
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बल्कि इंडिया के फॉरेन इन्वेस्टमेंट
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इकोसिस्टम टैक्स ट्रीटीज और ऑफोर्ड
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स्ट्रक्चर्स के फ्यूचर को रिीडफाइन कर
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सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने डिसाइड किया है
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कि टाइगर ग्लोबल के Flipkart एग्जिट से
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हुआ कैपिटल गेन इंडिया में टैक्सेबल है।
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चाहे इंडिया मॉरिशियस टैक्स ट्री मौजूद
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हो। इस जजमेंट ने दिल्ली हाई कोर्ट के
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2024 के डिसीजन को ओवरटर्न कर दिया है और
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जनरल एंटी अवॉयडेंस रूल यानी जीएआर को
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थ्री से ऊपर रख दिया है। हेलो एवरीवन, दिस
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इज़ अण्य चौबे एंड वेलकम बैक टू अनदर
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एपिसोड ऑफ़ जस्टी लॉजिकल। वीडियो शुरू करने
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के पहले मैं आपको बताना चाहती हूं कि
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कमर्सियन आपके लिए लॉ नोट्स लाया है एंड
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लॉ कोर्सेस लाया है अलग-अलग नीश के लिए।
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अगर आपको यह कोर्सेज और नोट्स अवेल करने
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हैं तो आप हमारे वेबसाइट से अवेल कर सकते
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हैं एक क्वेरी ड्रॉप करके या फिर आप हमें
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डायरेक्टली WhatsApp मैसेज कर सकते हैं।
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वेबसाइट की लिंक और WhatsApp का नंबर
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डिस्क्रिप्शन में दिया है। जाइए जाके चेक
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आउट कीजिए। एंड नाउ विदाउट एनी फर्दर डू
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लेट्स गेट इंटू द वीडियो।
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केस के बैकग्राउंड को जानते हैं। टाइगर
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ग्लोबल और Flipkart एग्जिट। यह केस अराइज़
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होता है 2018 में जब Walmart ने Flipkart
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का मेजॉरिटी स्टेक एक्वायर किया। इस डील
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के थ्रू T ग्लोबल ने Flipkart से एग्जिट
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किया और डॉलर 2 बिलियन से ज्यादा का गेन
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करा। लेकिन यहां एक इंपॉर्टेंट बात है। TG
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ग्लोबल ने डायरेक्टली किसी इंडियन कंपनी
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के शेयर्स नहीं बेचे। इंस्टेड उनका
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स्ट्रक्चर कुछ इस तरह था। टाइगर ग्लोबल के
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तीन मॉरिशियस बेस्ड एंटटीज ये एंटिटीज
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Flipkart सिंगापुर के शेयर्स होल्ड करती
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थी और Flipkart सिंगापुर इंडिया के
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ऑपरेटिंग कंपनीज़ को ओन करती थी। मतलब
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टेक्निकली सेल हुआ सिंगापुर कंपनी का शेयर
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लेकिन वैल्यू ऑलमोस्ट एंटायरली इंडियन
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इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा यह एक
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इनडायरेक्ट ट्रांसफर ऑफ इंडियन एसेट्स है।
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इसलिए कैपिटल ग टैक्स इंडिया में लगेगा।
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अब इंडिया मॉरिशस टैक्स ट्रीटी और टाइगर
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ग्लोबल का डिफेंस जानते हैं। टाइगर ग्लोबल
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का प्राइमरी डिफेंस था इंडिया मॉरिशियस
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डबल टैक्स अवॉयडेंस एग्रीमेंट व्हिच इज
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डीटीए। इस ट्रीटी के अंडर कैपिटल गेंस
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मॉरीशियस में टैक्सेबल होते थे। इंडिया को
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टैक्स करने का राइट नहीं होता। टाइगर
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ग्लोबल ने यह भी आर्ग्यू किया कि उसके पास
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वैलिड टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट्स है।
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शेयर्स 1 अप्रैल 2017 से पहले एक्वायर किए
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गए थे। इसलिए गेंस ग्रैंडफादर्ड है।
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ग्रैंडफादरिंग का मतलब है पुराने
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इन्वेस्टमेंट्स को नए टैक्स रूल्स से
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प्रोटेक्शन मिलना। अब टैक्स डिपार्टमेंट
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के कोर आर्गुमेंट को जानते हैं। इनकम
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टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा मॉरीशियस
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एंटिटीज सिर्फ पेपर एंटिटीज है। वहां रियल
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डिसीजन मेकिंग, कंट्रोल या कमर्शियल
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एक्टिविटी नहीं है। एक्चुअल कंट्रोल
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यूनाइटेड स्टेट्स से एक्सरसाइज हो रहा था।
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स्पेशली चार्ल्स पी कॉलमन टाइगर ग्लोबल के
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फाउंडर के थ्रू। डिपार्टमेंट का केस था।
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यह एंटिटीज कड्यूट या सी थ्रू एंटिटीज है।
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इनका पर्पस सिर्फ इंडियन टैक्स अवॉइड करना
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था। इसलिए ट्रीटी बेनिफिट डिनाई होना
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चाहिए। जीएआर अप्लाई होना चाहिए।
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अब अथॉरिटी फॉर एडवांस रूलिंग वर्सेस
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दिल्ली हाई कोर्ट समझते हैं। अथॉरिटी फॉर
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एडवांस रूलिंग्स एआर ने पहले ही टाइगर
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ग्लोबल के खिलाफ डिसीजन दिया था।
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एआर ने कहा मॉरीशस एंटिटीज के पास हेड एंड
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ब्रेन मॉरीशियस में नहीं है। स्ट्रक्चर
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प्रमाफिसाई टैक्स अवॉयडेंस लगता है। लेकिन
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अगस्त 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने एआर का
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डिसीजन ओवरटर्न कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा
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वैलिड टीआरसी मिल जाने के बाद ट्रीटी
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बेनिफिट ऑटोमेटिक है। इन्वेस्टमेंट लॉन्ग
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टर्म था। कमर्शियल सब्सटेंस प्रेजेंट था
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और जीएआर ट्रीटी को ओवराइड नहीं कर सकता।
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इस डिसीजन के बाद टैक्स डिपार्टमेंट
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सुप्रीम कोर्ट चला गया। अब सुप्रीम कोर्ट
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के फाइनल वर्डिक्ट को जानते हैं। सुप्रीम
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कोर्ट की डिवीजन बेंच जस्टिस जेबी परदवाल
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और जस्टिस आर महादेवन ने दिल्ली हाई कोर्ट
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के रीजनिंग को कैटेगरीली रिजेक्ट कर दिया।
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कोर्ट ने कहा ट्रीटी प्रोटेक्शन ऑटोमेटिक
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नहीं होता। सिर्फ टीआरसी दिखाना काफी नहीं
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है। अगर एंटिटी टैक्स अवॉयडेंस के लिए
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इंटरपोज की गई हो, इंक्वायरी हो सकती है।
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कोर्ट का एग्जैक्ट ऑब्जरवेशन यह था। मेर
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होल्डिंग ऑफ अ टीआरसी कैन नॉट बाय इटसेल्फ
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प्रिवेंट एन इंक्वायरी इफ द एंटिटी इज अ
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डिवाइस टू अवॉयड टैक्स। सुप्रीम कोर्ट ने
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यह भी क्लेरिफाई किया ग्रैंडफादरिंग
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प्रोटेक्शन एब्सोल्यूट नहीं है। अगर
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एग्जिट ट्रांजैक्शन इमपरमिसिबल टैक्स
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अवॉयडेंस का पार्ट है। प्रोटेक्शन नहीं
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मिलेगी। कोर्ट ने कहा रेलेवेंट यह नहीं है
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शेयर्स कब खरीदे गए? रेलेवेंट यह है 2018
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का ट्रांजैक्शन मेनली टैक्स बेनिफिट के
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लिए स्ट्रक्चरर्ड था या नहीं?
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जीएआर वर्सेस टैक्स ट्रीटीज के लीगल
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टर्निंग पॉइंट को समझते हैं। एक बहुत
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क्रिटिकल लीगल इशू था। क्या जीएआर टैक्स
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ट्रीटी को ओवराइड कर सकता है? सुप्रीम
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कोर्ट ने क्लियरली कहा पार्लियामेंट ने
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इनकम टैक्स एक्ट के थ्रू अलव किया है।
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ट्रीटीज सब्जेक्ट टू जी डबल एआर है और
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टैक्स सोनिटी इकोनॉमिक इंडिपेंडेंस का कोर
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एलिमेंट है। जस्टिस परदेवाल ने कनकरिंग
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ओपिनियन में कहा टैक्स ट्रीटीज का मिसयज
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करके नेशनल टैक्स बेस अंडरमाइन नहीं किया
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जा सकता। इन्वेस्टर्स के लिए इसका क्या
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मतलब है? इस जजमेंट के बाद मॉरीशियस रूट
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पर सीरियस री एग्जामिनेशन होगा। पीआरसीस
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का वेट डाइल्यूट हो गया है। कमर्शियल
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सब्सटेंस टेस्ट डिसाइसिव फैक्टर बन चुका
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है। पास्ट और ऑनगोइंग एमएनए ट्रांजैक्शंस
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पर लिटिगेशन बन सकती है।
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टैक्स इंश्योरेंस और रिस्ट्रक्चरिंग
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स्ट्रेटजीस पर डायरेक्ट इंपैक्ट पड़ेगा।
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यह जजमेंट एक क्लियर सिग्नल है। फॉर्म
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नहीं सब्सटेंस मैटर करेगा और ट्रीटी
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शॉपिंग का एक एरा खत्म हो रहा है। अगर
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आपको यह डिटेल लीगल ब्रेकडाउन पसंद आया हो
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वीडियो को लाइक करें, चैनल को सब्सक्राइब
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करें और कमेंट्स में बताइए आप इस जजमेंट
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को कैसे देखते हैं। मिलते हैं नेक्स्ट
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वीडियो में। अनंटिल देन कीप वाचिंग जस्ट