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आज हम बात करने वाले हैं एक एक्स्ट्रा
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ऑर्डिनरी सीरियस कॉन्स्टिट्यूशनल
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कंफ्रंटेशन की जहां सुप्रीम कोर्ट ऑफ
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इंडिया ने खुद कहा है कि अगर यह इशू को
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रॉल्व नहीं किया गया तो एक स्टेट में
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लॉलेसनेस का सिचुएशन पैदा हो सकता है। यह
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केस सिर्फ ईडी रेड का नहीं है। यह केस है
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सेंट्रल एजेंसीज की इंडिपेंडेंस का, स्टेट
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इंटरफेरेंस का और कोर्ट प्रोसीडिंग्स को
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डिसरप्ट करने का एलगेशन। और एक बहुत-ब
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डिस्टर्बिंग सवाल। क्या कोर्ट जंतरमंतर बन
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सकता है? हेलो एवरीवन, दिस इज अ ट्रॉबे
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एंड वेलकम बैक टू अनदर एपिसोड ऑफ़ जस्टी
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लॉजिकल। वीडियो शुरू करने के पहले मैं
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आपको बताना चाहती हूं कि कमर्स यन आपके
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लिए लॉ कोर्सेस लाया है अलग-अलग नीश के
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लिए एंड आपके लिए एग्जाम रेडी लॉ
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क्यूरेटेड नोट्स लाया है। अगर आपको यह
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कोर्सर्सेस और नोट्स एक्सेस करने हैं तो
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आप हमारी वेबसाइट पे जाके चेक आउट कर सकते
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हैं और एक क्वेरी ड्रॉप कर सकते हैं या आप
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हमें डायरेक्टली WhatsApp पे मैसेज कर
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सकते हैं। वेबसाइट का लिंक और WhatsApp
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नंबर डिस्क्रिप्शन में दिया है। जाइए जाके
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चेक आउट कीजिए। नाउ विदाउट एनी फदर डू
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लेट्स गेट इन टू द वीडियो।
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केस के बैकग्राउंड को जानते हैं। 8 जनवरी
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2026 को एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट ईडी ने
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प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के
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सेक्शन 17 के तहत इंडियन पॉलिटिकल एक्शन
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कमिटी व्हिच इज़ आईपैक के कोलकाता ऑफिस में
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सर्च ऑपरेशन कंडक्ट किया। आईपैक एक
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पॉलिटिकल कंसल्टेशन फर्म है जो ऑल इंडिया
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ट्रिनमोल कांग्रेस के लिए काम करता है।
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ईडी का कहना है उनके पास क्रेडिबल
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इंक्रिमिनेटिंग मटेरियल था। सर्च लॉफुली
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ऑथराइज्ड थी। लोकल पुलिस को प्रायर इनेशन
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दी गई थी। अब इस केस के एलिज्ड स्टेट
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इंटरफेरेंस के बारे में बात करते हैं। ईडी
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के मुताबिक वेस्ट बंगाल चीफ मिनिस्टर ममता
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बनर्जी, स्टेट डीजीपी राजीव कुमार,
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कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा
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और अन्य सीनियर पुलिस ऑफिसर्स सर्च साइट
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पर पहुंचे। एलगेशंस ये है ईडी की सर्च
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ऑब्स्ट्रक्ट की गई। फाइल्स और
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इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस वहां से ले गए। ईडी
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ऑफिसर्स को स्टटरी पावर्स एक्सरसाइज करने
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से रोका गया। इसके बाद वेस्ट बंगाल पुलिस
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ने तीन एफआईआर रजिस्टर की। यह एफआईआर्स
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ईडी ऑफिसर्स के खिलाफ थी। यहीं से
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डिस्प्यूट कॉन्स्टिट्यूशनल लेवल पर पहुंच
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गया। नाउ ईडी अप्रोचेसक हाई कोर्ट। ईडी
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पहलेक हाई कोर्ट गई। 9 जनवरी 2026 को ईडी
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की प्लीज लिस्टेड थी। लेकिन हियरिंग हो ही
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नहीं पाई। क्यों? क्योंकि कोर्ट रूम में
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सीवियर कमोशन लार्ज नंबर ऑफ एडवोकेट्स एंड
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पर्संस थे। सिचुएशन इतनी सीरियस हो गई कि
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हाई कोर्ट ने खुद हियरिंग एडजॉर्न कर दी।
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अब इसके बाद ईडी डायरेक्टली सुप्रीम कोर्ट
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पहुंची आर्टिकल 32 के तहत बेंच थी जस्टिस
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प्रशांत कुमार वर्मा एंड जस्टिस विपिन एम
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पंचोली सॉललिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार
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मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया प्रायर
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टू द जनवरी न हियरिंग टीएमसी के लीगल सेल
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ने WhatsApp मैसेजेस सर्कुलेट किए जिसमें
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लोगों को हाई कोर्ट आने को कहा गया एसजी
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ने कहा कम एवरीवन जैसे मैसेजेस सर्कुलेट
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हुए। बसेस और व्हीकल्स अरेंज किए गए। लोग
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जानबूझकर कोर्ट रूम में आए। एसजी का
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स्ट्रांग स्टेटमेंट। दिस इज व्हाट हैपेंस
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व्हेन मोक्रेसी रिप्लेसेस डेमोक्रेसी। इस
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पर जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा का शार्प
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रिमार्क था। कम एवरीवन। एज इफ इट इज
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कोर्ट ने यह भी कहा इंटेंशनल हो या
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अनइटेंशनल। हाई कोर्ट ने खुद कमोशन
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रिकॉर्ड किया है। कोर्ट प्रोसीडिंग्स का
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डिसरप्ट होना एक्सट्रीमली डिस्टर्बिंग है।
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जस्टिस मिश्रा ने कहा टुमारो इट कैन हैपन
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इन एनी अदर हाई कोर्ट आल्सो। दिस कैन नॉट
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बी अलाउड टू बिकम अ रेगुलर फीचर। अब लाइव
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टेलीकास्ट एंड माइक म्यूटिंग एलगेशंस की
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बात करते हैं। एसजी तुषार मेहता ने यह भी
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बताया हियरिंग लाइव टेलीकास्ट हो रही थी।
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ईडी के एएसजी एसवी राजू वर्चुअल अपीयरेंस
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में थे। माइक बार-बार म्यूट हो रहा था।
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ईडी को आर्गुमेंट्स रखने में डिफिकल्टी
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हुई। जस्टिस मिश्रा ने क्लेरिफाई किया
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माइक का कंट्रोल कोर्ट के पास होता है। अब
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आगे सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? अगली
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हियरिंग में एएसजी एसवी राजू ने अटर्नमेंट
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मांगा। हाई कोर्ट ने टीएमसी की पिटीशन
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सुनी। केस डिस्पोज कर दिया। ईडी के
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स्टेटमेंट के बेसिस पर कि कोई सीजर नहीं
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हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे एपिसोड को
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डिस्टर्बिंग कहा। अब सुप्रीम कोर्ट के
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इंट्रीम ऑर्डर्स जानते हैं। सुप्रीम कोर्ट
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ने सबसे पहले नोटिस इशू किया स्टेट ऑफ
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वेस्ट बंगाल ममता बनर्जी, डीजीपी राजीव
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कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर, डिपुटी
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कमिश्नर प्रिया बत्रा रॉय। तीन एफआईआर्स
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पर कंप्लीट स्टे, वेस्ट बंगाल पुलिस के
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अगेंस्ट ईडी ऑफिसर्स के एफआईआर स्टेड,
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तीसरा एविडेंस प्रिजर्वेशन, सीसीटीवी
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फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस। जनवरी 8 के
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सर्च से रिलेटेड सारी डिजिटल मटेरियल
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प्रिजर्व करने का आर्डर। नेक्स्ट इयरिंग
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है 3 फरवरी 2026 को। सुप्रीम कोर्ट के कुछ
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कोर कंसर्न्स थे उसे जानते हैं। कोर्ट का
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क्लियर मैसेज सेंट्रल एजेंसीज इलेक्शन
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एक्टिविटीज इंटरफेयर नहीं कर सकती। लेकिन
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अगर इन्वेस्टिगेशन बोनाफाइड है तो पार्टी
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एक्टिविटी का शील्ड यूज करके लॉफुल
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इन्वेस्टिगेशन नहीं रोका जा सकता। कोर्ट
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ने वर्न किया इफ सच इशूज़ रिमेन अनडिसाइडेड
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इट विल लीड टू लॉलेसनेस इन वन और द अदर
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स्टेट। नाउ लेट अस अंडरस्टैंड व्हाई दिस
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मैटर्स। यह केस डिसाइड करेगा क्या स्टेट
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मशीनरी सेंट्रल प्रोब्स को ब्लॉक कर सकती
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है? क्या कोर्ट प्रोसीडिंग्स को मॉब
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प्रेशर से डिसरप्ट किया जा सकता है? और
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सबसे इंपॉर्टेंट रूल ऑफ लॉ जिंदा रहेगा या
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पॉलिटिकल कन्वीनियंस के नीचे दब जाएगा। यह
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सिर्फ एक लीगल केस नहीं यह इंडियन
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कॉन्स्टिट्यूशनल डेमोक्रेसी का स्ट्रेस
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टेस्ट है। तो अगर आपको यह डिटेल ब्रेकडाउन
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पसंद आया हो तो लाइक करें, शेयर और
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सब्सक्राइब जरूर करें। कमेंट में लिखिए
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क्या स्टेट गवर्नमेंट्स को सेंट्रल
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एजेंसीज के काम में इंटरफेयर करना चाहिए?
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मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो। अनंटिल देन कीप
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वाचिंग जस्ट बी लॉजिकल।