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आज हम बात करने वाले हैं एक इंपॉर्टेंट और
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लैंडमार्क ऑर्डर की जो बॉम्बे हाई कोर्ट
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ने दिया है जो डायरेक्टली पब्लिक सेफ्टी,
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पैरेंटल रिस्पांसिबिलिटी, पुलिस
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अकाउंटेबिलिटी और कॉन्स्टिट्यूशनल पावर्स
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ऑफ हाई कोर्ट से जुड़ा हुआ है। अगर आप या
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आपके बच्चे मकर संक्रांति के टाइम नायलन
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मांझे से पतंग उड़ाते हुए पकड़े गए तो
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₹5,000 का फाइन और अगर कोई वेंडर नायलॉन
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मांझा बेचते हुए मिला तो 2.5 लाख का फाइन।
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यह सिर्फ वार्निंग नहीं है। यह
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एनफोर्सिएबल जुडिशियल ऑर्डर है। आज के
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वीडियो में हम कवर करेंगे कोर्ट ने ऑर्डर
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क्यों दिया? लीगल पावर का सोर्स क्या है?
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पेरेंट्स को लायबल क्यों बनाया गया? पुलिस
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ऑफिसर्स पर एक्शन का प्रोविजन और उसका
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कॉन्स्टिट्यूशनल इंपैक्ट। हेलो एवरीवन,
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दिस इज अ चौबे एंड वेलकम बैक टू अनदर
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एपिसोड ऑफ़ जसप्री लॉजिकल। वीडियो शुरू
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करने के पहले मैं आपको बताना चाहती हूं कि
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कमर्शियन आपके लिए लॉ कोर्सेज लाया है
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अलग-अलग नीश के लिए और आपके लिए लॉ
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क्यूरेटेड नोट्स लाया है। अगर आपको यह
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कोर्सेज और नोट्स अेल करने हैं तो आप
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हमारी वेबसाइट पे क्वेरी ड्रॉप कर सकते
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हैं या आप हमें डायरेक्टली WhatsApp मैसेज
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कर सकते हैं। वेबसाइट की लिंक और WhatsApp
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नंबर डिस्क्रिप्शन में दी है। जाइए जाके
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चेक आउट कीजिए। एंड नाउ विदाउट एनी फदर
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अडू लेट्स गेट इनू द वीडियो।
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केस के बैकग्राउंड को जानते हैं। यह केस
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कोई नॉर्मल पीआईएल नहीं था। इसका नाम है
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कोर्ट ऑन इट्स ओन मोशन वर्सेस स्टेट ऑफ
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महाराष्ट्र दैट इज सुओमोटो। सुओमोटो का
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मतलब है हाई कोर्ट ने खुद इनिशिएटिव लिया
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बिना किसी प्राइवेट पिटिशनर के। कोर्ट ने
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देखा हर साल नायलैंड मांझी से डेथ्स हो
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रही है। पेडिस्ट्रंस, बकर्स, बर्ड्स सब
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अफेक्टेड। न्यूज़पेपर्स अवेयरनेस, कैंपेन,
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बैंड्स सब फेल हो चुके थे। कोर्ट ने कहा
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डिस्पाइट रिपीटेड वार्निंग्स देयर इज़
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एब्सोलुटली नो चेंज इन बिहेवियर। इसलिए
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कोर्ट ने डिसाइड किया डिटरेंस इज द ओनली
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स्यूशन। अब जानते हैं नायलन मांझा क्या है
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और यह इललीगल क्यों है? नायलन मांजा ग्लास
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कोटेड, प्लास्टिक बेस्ड, नॉन
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बायोडिग्रेडेबल और स्टील वायर जैसे शार्प
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है। इससे गले कट होने से इंस्टेंट डेथ,
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परमानेंट डिसेबिलिटी, बर्ड्स की मास
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किलिंग होती है। यह ऑलरेडी बैंड है।
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एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन लॉस के अंडर,
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म्युनिसिपल रेगुलेशंस के अंडर, वाइल्ड
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लाइफफ़ प्रोटेक्शन नॉर्म्स के अंडर और
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प्रॉब्लम लॉ का नहीं था। प्रॉब्लम
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एनफोर्समेंट का था। हाई कोर्ट की की
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डायरेक्शंस क्या है? हम यह जानते हैं।
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कोर्ट ने क्लियर और स्ट्रिक्ट डायरेक्शंस
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दी। फाइन ऑन इंडिविजुअल्स अगर कोई
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इंडिविजुअल नायलैंडन मांझे से पतंग उड़ाता
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हुआ पकड़ा गया उस पे 25,000 का फाइन
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पड़ेगा। दूसरा फाइन ऑन माइनर्स अगर माइनर
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पतंग उड़ा रहे हैं। इस केस में पेरेंट्स
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से फाइन रिकवर होगा। कोर्ट्स ने बोला
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पेरेंट्स हैव अ लीगल एंड मोरल ड्यूटी टू
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टीच रिस्पांसिबल बिहेवियर। यह बहुत
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इंपॉर्टेंट ऑब्जरवेशन है। पैरेंटल
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लायबिलिटी का जुडिशियल रिकॉग्निशन। तीसरा
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फाइन ऑन वेंडर्स। अगर कोई वेंडर नयलैंडन
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मांझा स्टॉक करता है, बेचता है या स्टोर
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करता है, 2.5 लाख फाइन। नो एक्सक्यूज़ेस,
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नो फर्स्ट वार्निंग्स। अब जानते हैं
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पेरेंट्स को लायबल क्यों बनाया गया है।
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कोर्ट ने यहां साइकोलॉजिकल और लीगल
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रीजनिंग दिया। जजेस ने कहा चिल्ड्रन
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बिहेवियर पेरेंट्स से सीखता है। अगर
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पेरेंट्स अवेयर नहीं करते तो नेग्लिजेंस
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है। सोसाइटी का बर्डन कोर्ट टोलरेट नहीं
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करेगी। यह कांसेप्ट है डॉक्ट्राइन ऑफ़
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पैरेंटल रिस्पांसिबिलिटी। इंडियन कोर्ट्स
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रेयरली इसको ओपनली आर्टिकुलेट करते हैं।
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इस ऑर्डर ने एक नया बेंचमार्क सेट किया
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है। अब इस केस में पब्लिक वेलफेयर फंड का
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एंगल है जो काफी इंपॉर्टेंट है। कोर्ट ने
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ऑर्डर दिया पब्लिक वेलफेयर फंड ओपन किया
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जाए। क्यूआर कोड सर्कुलेट हो। फाइन का
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पैसा डायरेक्ट फंड में जाए। इसका पर्पस है
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नायलन मांझा विक्टिम्स का ट्रीटमेंट।
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यह फाइन पनिशमेंट नहीं रिस्टोरेटिव जस्टिस
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मॉडल है। अब रिकवरी एज लैंड रेवेन्यू के
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एंगल को जानते हैं। अगर कोई फाइन नहीं भर
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सकता ऑफिसर मेमो इशू करेगा 15 दिन का टाइम
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उसके बाद लैंड रेवेन्यू रिकवरी एक्ट के
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अंडर रिकवरी मतलब अटैचमेंट रिकवरी
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प्रोसीडिंग्स ड्यू प्रसेस फॉललोड यह ऑर्डर
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टूथलेस नहीं है। पुलिस अकाउंटेबिलिटी यह
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एक गेम चेंजर एंगल है। सबसे स्ट्रांग
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पार्ट यही है। अगर कोई अनटूवर्ड इंसिडेंट
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होता है, कमिश्नर, एसपी नोटिस इशू करेगा,
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कंसर्नड पुलिस ऑफिसर से एक्सप्लेनेशन
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मांगा जाएगा। व्हाई एक्शन शुड नॉट बी टेकन
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अगेंस्ट यू? मतलब प्रीरिलिक्शन ऑफ़ ड्यूटी,
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कंटेंप्ट एक्सपोज़र, डिपार्टमेंटल एक्शन यह
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सब पॉसिबल है। पुलिस अब बोल नहीं सकती,
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पतंग तो सब उड़ा रहे हैं। इस ऑर्डर की
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कॉन्स्टिट्यूशनल एंड लीगल सिग्निफिकेंस को
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जानते हैं। यह ऑर्डर इंपॉर्टेंट क्यों है?
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क्योंकि आर्टिकल 21 राइट टू लाइफ आर्टिकल
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48 एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन आर्टिकल 226
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हाई कोर्ट्स वाइड पावर्स कोर्ट ने लॉ
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बनाया नहीं लॉ एनफोर्स करने का मैकेनिज्म
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क्रिएट किया दिस इज जुडिशियल क्रिएटिविटी
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विद इन कॉन्स्टिट्यूशनल लिमिट्स बॉम्बे
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हाईकोर्ट का मैसेज क्लियर है अवेयरनेस से
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काम नहीं चल रहा बैंड्स पेपर पर ही रह गए
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तो अब फाइनशियल डिटरेंस प्लस
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अकाउंटेबिलिटी आएगी। यह ऑर्डर सिर्फ
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महाराष्ट्र के लिए नहीं है। यह ऑर्डर सारे
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हाई कोर्ट्स के लिए एक वैल्यू प्रिसिडेंस
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सेट करता है। अगर आपको यह वीडियो पसंद आई
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और आप चाहते हैं मैं और ऐसी वीडियोस बनाऊं
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तो कमेंट करें, लाइक करें, शेयर करें एंड
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कीप वाचिंग जसप्री लॉजिक।