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Legal Language & Interpretation of Statutes: Semester 1 LL.B Examination Mumbai University
Jan 9, 2026
Mumbai University's 3-Year LLB Semester 1 Legal Language covers core legal concepts (Law, Justice, Right, Duty, etc.), grammar, comprehension, legal maxims, and legislative material, focusing heavily on Interpretation of Statutes (IOS) rules like Noscitur a Sociis, Ejusdem Generis, Heydon's Rule, and key cases to understand legislative intent, using resources like AIR Manual and gazettes to interpret laws.
Key Components of the Syllabus:
Legal Concepts & Grammar: Basics of legal terms (Law, Justice, Right, Duty, etc.), grammar, punctuation, and communication skills.
Legal Maxims: Latin maxims providing rules for interpretation (e.g., Noscitur a Sociis, Ejusdem Generis).
Interpretation of Statutes (IOS):
Aids to Interpretation: Internal (Preamble, Title, Section) and External (Legislative History, Reports).
Rules of Interpretation: Literal Rule, Golden Rule, Mischief Rule (Heydon's Rule), Harmonious Construction.
Maxims in Practice: Applying maxims like Ejusdem Generis, Noscitur a Sociis, Pari Materia.
Legislative Material: Understanding parts of an Act (Short Title, Long Title, Date of Assent, Schedules, Marginal Notes).
Judicial Material: Precedent, Ratio Decidendi, and study of important cases.
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सभी का बहुत-बहुत स्वागत और आपको जैसे समझ आ ही गया होगा आज हम लीगल लैंग्वेज
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कासेप्ट्स मैक्सिमम्स की बात करने जा रहे हैं। इससे पहले मैं शुरू करूं। मैं एक चीज
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आप सभी के साथ शेयर कर देना चाहता हूं कि आप में से कई लोगों ने टॉमसन की वेबसाइट
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के थ्रू हमें कांटेक्ट करा और आप लोगों ने इंक्वायरीज करी थी के वैभव भाई हमें नोट्स
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कैसे मिल सकते हैं और कुछ लोगों की ये भी इच्छा थी कि मैं पर्सनली उनके सेशंस
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कंडक्ट करूं। कुछ काइंड ऑफ टशंस वर्चुअल लेक्चर्स फॉर एग्जाम प्रिपरेशन जो आपके
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सेमेस्टर वन आ रहे हैं एंड सब्सिक्वेंट एग्जाम्स के लिए। तो हां जी हम वो सर्विसेस ऑफर करते हैं और सर्टेनली आप
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हमें रीच आउट कर सकते हो नोट्स के लिए या कोई भी कोर्स के लिए या किसी भी टाइप के ऐसे असिस्टेंस के लिए गाइडेंस के लिए सो
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वी आर ऑलवेज देयर फॉर यू प्लीज हेजिटेट मत करो या तुम हेज़िटेट करते हो हमें अच्छा नहीं लगता बिंदास पूछो एंड और एक बात बोल
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देना चाहता हूं पैसे की टेंशन लेने की कोई जरूरत नहीं है ठीक है जितना हो सके हम
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कस्टमाइजेशन पे चलेंगे ठीक है नॉट वन मे वन मेडिस कैन नॉट क्योर ऑल हम वो फिलॉसोफी
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में बिलीव करते हैं। तो आप इंक्वायरी डालिए फिर वी विल सी हाउ थिंग्स गो ऑन। डोंट वरी अबाउट इट। हम आप ही के असिस्टेंस
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के लिए यहां बैठे हैं। ओके? अब शुरू करते हैं हमारा लीगल लैंग्वेज। अ फर्स्ट
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सेमेस्टर में एलएलबी थ्री इयर्स हो या फाइव इयर्स का हो। देखो ये इंपॉर्टेंट सब्जेक्ट है। और इसमें क्या इंपॉर्टेंट
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लीगल कॉन्सेप्ट्स हैं? क्या मैगज़ंस हैं? ये आपको आना बहुत जरूरी है। क्योंकि यह लाइफ लॉन्ग आपको काम आएगा लीगल प्रोफेशन
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में। तो बिना किसी वक्त की बर्बादी के आज के स्यापे के संग शुरू करते हैं।
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बंधुओं सबसे पहले मैं आपको ये बताना चाहता हूं कि इसमें कांसेप्ट्स बहुत सारे हैं। और सारे
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कांसेप्ट्स इंपॉर्टेंट है। क्योंकि कभी ये टू मार्क्स के लिए आ सकता है, कभी छह के लिए, कभी 13 के लिए। कुछ को 15 10 ये सब
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भी इस टाइप के भी मार्किंग मिलती हैं। रिस्पेक्टिव और सब्जेक्टिव क्वेश्चन पेपर सेट्स पर होता है ये। लेकिन आज जो हम कर
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रहे हैं वो बेसिक कांसेप्ट्स हम पहले क्लियर कर रहे हैं ताकि एग्जाम के लिए आप प्रिपेयर हो जाएं।
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सबसे पहले लगभग 38 टू 40 कांसेप्ट्स हैं। हम उसको देखेंगे और फिर हम लीगल मैगजीन की
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ओर चलेंगे और उसके बाद इंटरप्रिटेशन ऑफ़ स्टट्यूट्स। तो आप प्लीज इसको अच्छे तरीके से प्रिपेयर
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करिएगा और कुछ भी अगर नहीं समझे वीडियो वापस देखो नहीं तो बंदा हाजिर है कॉल
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घुमाओ मैसेज कर लो वी आर देयर फॉर योर असिस्टेंस ओनली बट बाद में ये मत कहना
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वैभव भाई ने बताया नहीं ठीक है पहले आता है लॉ लीगल कांसेप्ट्स की श्रेणी
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में लॉ क्या है देखो मुझे ऑस्टिन का डेफिनेशन इसमें सबसे ज्यादा पसंद है। सबसे बढ़िया, सबसे सुलभ, सबसे ज्यादा सिंपल
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डेफिनेशन देने वाला ये प्राणी है। ठीक है? क्या है? लॉ का डेफिनेशन ऑस्टेन ने क्या
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दिया? लॉ इज़ द कमांड इशूड बाय द सोवरन पावर। या हम इसको पॉपुलरली बोलते थे लॉ लॉ
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इज़ द कमांड ऑफ द सोवरन। वेरी सिंपल। ठीक है? लेकिन, कभी-कभी दूसरे तरीके से पूछते
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हैं कि भाई, ब्लैकस्टोन ने क्या बताया? पूछो। द लॉ इन इट्स जनरल एंड कॉम्प्रिहेंसिव सेंस सिग्निफाइज़ अ रूल ऑफ़
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एक्शन एंड इज़ अप्लाइड इनडिसक्रिमिनेटली टू ऑल काइंड्स ऑफ़ एक्शन वेदर एनिमेट और
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इनएनिमेट रैशन और इररशनल ये सब है। सैलमंडन का भी बारे में पूछता है कि सैलमंडन ने लॉ को कैसे डिफाइन करा है? तो
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लॉ कंसिस्ट ऑफ रूल्स रिकग्नाइज़ एंड एक्टेड ऑन इन कोर्ट ऑफ़ जस्टिस। सिंपल है। देखो जब
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हम लॉ की बात कर रहे हैं तो लॉ दो सेंसेस में होता है। एब्स्ट्रैक्ट सेंस और कॉन्क्रीट सेंस स्ट्रिक्ट सेंस। मतलब
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क्या? लॉ का सिस्टम सिस्टम ऑफ लॉ इन इंस्टेंस ऑफ लॉ तो भाई लॉ ऑफ कॉन्ट्रैक्ट
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लॉ ऑफ़ डेफिनेशन कई सारी चीजें इसमें आ जाएगी। लेकिन लॉ डिफाइन करने के लिए ये सब सिंपल-सिंपल डेफिनेशंस हैं। ठीक है? इतना
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ही है। प्रिंसिपल्स कई सारे हैं। लॉ का जो रीज़न आता है, जो प्रिंसिपल्स आते
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हैं, दैट कैन बी डिस्कवर्ड बाय द रीज़न ऑफ़ मैनकाइंड। या हम उसको डिवाइन लॉ भी कहते
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हैं। बहुत सीधी सीधी सी बात है। कई ऐसे बिलीव करते हैं कि कानून जो है वो भगवान
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ने हम पर इंपोज किया हुआ है। ठीक है? इसके
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लिए थॉमस एक्वनिस्ट ने कहा था लॉ इज द कमांड ऑफ़ द हायर गॉड।
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तो ये सब कुछ चीजें हैं जो लॉ के कांसेप्ट में क्लियर होती है। अब आते हैं कस्टम किसे कहा जाता है? कस्टम का मतलब एक तरीके
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का हैबिचुअल बिहेवियर है या एक तरीके का कोर्स ऑफ़ एक्शन है या फिर हम कहें कि एक कोड ऑफ़ कंडक्ट है जिसको प्रैक्टिस किया
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जाता है, फॉलो किया जाता है बहुत ही मेमोरेबल टाइम से। मतलब याद नहीं रख पाओ इतना पुराना।
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कोई ये कम्युनिटी कर सकती है, कुछ सेट ऑफ लोग कर सकते हैं। तो लॉ बेस्ड ऑन कस्टम इस नोन एस कस्टमरी
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लॉ। जिस कस्टम्स के बेसिस पे कोई लॉ को बनाया जाए, फॉर्मुलेट किया जाए, उसे कहा जाता है कस्टमरी लॉ। बहुत सिंपल है। सबसे
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इंपॉर्टेंट प्राइमरी सोर्सेस ऑफ लॉ ही कस्टमरी लॉ है।
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और कस्टम होता क्या है? बेसिकली किसी कम्युनिटी का एक ग्रुप ऑफ पीपल का पर्टिकुलर ट्रेडिशन है।
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जो ह्यूमन कंडक्ट को गवर्न करता है। तो कस्टम इज द रूल ऑफ़ कंडक्ट और वायलेशन
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सॉरी और एक्शन वंटरीली एंड यूनिफॉर्मली ऑब्जर्व बाय पीपल। बहुत इंपॉर्टेंट है।
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किसी ने फोर्स नहीं किया है। आपके ऊपर ही है। आपका वंटरी एक्शन है। और यूनिफॉर्मली उस ग्रुप ऑफ पीपल, उस सेट ऑफ पीपल, उस
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कम्युनिटी ने उसको अडॉप किया। यूनिफॉर्मली एक करेगा, एक नहीं चलेगा। मेजॉरिटी करनी
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चाहिए। इसके लिए वैलिड कस्टम के कुछ ग्राउंड्स
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होते हैं। और वैलिड कस्टम माने क्या? वैलिड कस्टम का मतलब होता है वह कस्टम
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जिसको लॉ की श्रेणी में डाला जा सकता है। कब किसी कस्टम को लॉ की तरह रिकग्नाइज
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किया जाएगा? यानी कोर्ट के थ्रू रिकग्नाइज किया जाएगा। पहले लॉ इमोरेबल टाइम से होना चाहिए। वो सॉरी कस्टम इमोरेबल टाइम से
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होना चाहिए। कस्टम कंटीन्यूअस होना चाहिए। मतलब कस्टम ऐसे नहीं पहले चला बंद हुआ फिर
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चला फिर बंद हुआ। नहीं कंटीन्यूअस सर्टेनिटी होनी चाहिए उसकी। वेग नहीं हो
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सकता। पर्टिकुलर स्पेसिफिक सर्टेन रीज़नेबल होना चाहिए। करंट करंट
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कॉन्स्टिट्यूशन के या करंट लॉस के साथ कॉन्फ्लिक्ट में नहीं आना चाहिए। मोरल होना चाहिए। स्टटरी लॉ के अगेंस्ट ना हो।
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पब्लिक पॉलिसी के अगेंस्ट ना हो। जब ये चीजें मीट हो जाती है। ये सारे कंडीशंस
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मेट होते हैं। तब जाके कस्टम कस्टमरी लॉ बन जाता है। यानी वो लॉ जो कस्टम से आया
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है। अब जस्टिस क्या है? लॉ इज वन ऑफ द मीन्स टू अचीव जस्टिस। यानी
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इंसाफ। कानून उसका एक तरीका है।
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जस्टिस क्या है? जस्टिस जब लॉ को हम अप्लाई करते हैं तो जब लॉ को अप्लाई करने
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से जो आउटकम मिलता है, जो रिजल्ट मिलता है, दैट इज जस्टिस। सो जस्टिस इज़ नथिंग बट
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द आउटकम और द रिजल्ट ऑफ द एप्लीकेशन ऑफ़ लॉ।
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लॉ का एंड गोल ही जस्टिस है। जस्टिस नहीं मिलेगा तो लॉ का मतलब ही क्या
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हुआ? लेकिन जस्टिस दो क्लासेस में डिवाइडेड है। करेक्टिव जस्टिस और डिस्ट्रीब्यूटिव जस्टिस। करेक्टिव जस्टिस
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क्या होता है? जिन लोगों के पहले राइट्स को इनफ्रिंस कर
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दिया गया हो पीपल हु आर डिप्र्राइव्ड ऑफ देयर राइट्स उनको रिस्टोर करना। वो राइट्स को रिस्टोर करना वो बेनिफिट्स देना,
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फैसिलिटीज देना। बहुत सिंपल सी बात है। पास्ट में जो रोंग हुआ उसको करेक्ट कर देना।
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जिनके राइट्स वायलेट हुए उनको वापस उनके राइट्स रिस्टोर करके देना।
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यह होता है करेक्ट जस्टिस। कोई ऐसी बेनिफिट, कोई ऐसी फैसिलिटी बाय द
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रिजर्वेशन टू द फिल द रिच हु मेयरली बिलोंग टू द बैकवर्ड क्लासेस वुड बी मॉकरी ऑफ़ जस्टिस।
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लेकिन ये आज कहां अप्लाई होता है? कहां नहीं होता? ये आप मुझसे ज्यादा बड़े बलवान है समझने में। तो ये हो गया करेक्टिव
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जस्टिस। डिस्ट्रीब्यूटिव जस्टिस का क्या मतलब है? डिस्ट्रीब्यूटिव जस्टिस का मतलब होता है इक्विटेबल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ
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राइट्स बिटवीन वेरियस सेक्शंस ऑफ द पीपल अकॉर्डिंग टू देयर नीड्स।
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लोगों की जरूरत के हिसाब से उनमें क्या करना?
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इक्वली राइट्स का डिस्ट्रीब्यूशन करना। ये होता है डिस्ट्रीब्यूट। तो करेक्टिव एंड डिस्ट्रीब्यूटिव। अब राइट्स होते क्या है?
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चौथा कांसेप्ट ऑफ लॉ है। राइट सॉरी चौथा कांसेप्ट है लीगल लैंग्वेज में। राइट क्या
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है? राइट या लीगल राइट कहा जाए। एक इंटरेस्ट
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है जो रूल ऑफ लॉ में रेग्नाइज भी है, प्रेडिक्टेड भी है। वेयर देयर इज़ अ राइट
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देयर इज़ आल्सो अ रेमेडी। ओबीसीबी रेमेडी कोई भी इंटरेस्ट
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जहां पे मतलब वो ड्यूटी है डिलीवर करना। और अगर उसको नहीं किया गया तो आपका लीगल
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रोंग हो जाएगा। यह राइट होता है। एक जन के पास अगर राइट है तो दूसरे के पास
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ऑब्लिगेशन है। दूसरा ऑब्लिगेटेड है। उसको परफॉर्म करने के लिए ड्यूटी है। एक जगह राइट है तो उसके अगेंस्ट में उसके सॉरी
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उसके पैरेलल में ड्यूटी भी खड़ी है। सिंपल है। अब काइंड्स ऑफ राइट्स क्या-क्या
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होते हैं? फंडामेंटल राइट होता है, लीगल राइट होता है, प्राइमरी सेकेंडरी राइट होते हैं। राइट एंड रम होता है, राइट एंड
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पर्सोनम होता है। फंडामेंटल राइट्स यानी क्या? राइट टू लाइफ एंड पर्सनल लिबर्टी
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फंडामेंटल राइट है। फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड एक्सप्रेशन फंडामेंटल राइट है। फंडामेंटली
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लॉ में बोला गया है भाई साहब। तो मुझे राइट है क्योंकि कानून ने मुझे
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मेरे संविधान ने मुझे वह अधिकार दिया है। कॉन्स्टिट्यूशनल राइट है मेरा। फंडामेंटल राइट है। उसके साथ छेड़खान नहीं हो सकती।
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लीगल राइट्स इक्वलिटी का मुझे लीगल राइट है। आप उसको इनफ्लुएंस करोगे तो वायलेशन होगा।
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राइट एंड रम राइट एंड पर्सनल राइट एंड रम मतलब रेम को समझ लो कम्युनिटी लोग राइट
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एंड रम। राइट एंड पर्सन है मतलब पर्सनल
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प्रोपराइटरी राइट्स हैं पर्सनल राइट्स भी है तो काफी टाइप के राइट्स भी है अब ड्यूटीज क्या होती है पांचवा कांसेप्ट
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ड्यूटी मतलब एक ऐसा एक्शन जो सामने वाले का ऑब्लिगेशन है परफॉर्म करना इट इज़ एन
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एक्ट अगर उसको नहीं परफॉर्म किया तो क्या दी
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नॉन परफॉर्मेंस ऑफ व्हिच विल बी राइट्स एंड ड्यूटीज आर कोरिलेटिव टू ईच अदर
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मतलब क्या हो गया मतलब व्हनेवर देयर एक्सिस्ट राइट इन वन पर्सन देर आल्सो
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रेस्ट अ करेस्पोंडिंग ड्यूटी अपॉन द अदर मेरा राइट है इक्वलिटी तो सामने वाले का
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ड्यूटी है मुझे इक्वली ट्रीट करना आप समझे मेरा राइट है कि मैं पीसफुल लाइफ एक अच्छी
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लाइफ डिर्व करता हूं मैं पीस एग्जांपल मेरा राइट टू जस्टिस है तो कोर्ट की ड्यूटी है जस्टिस देना
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सिंपल बात है। मेरा राइट है सेफ्टी
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तो सामने वाली की बस ड्राइवर की ड्यूटी है मुझे सेफली कम्यूट कराना। ये सब
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बेसिक-बेसिक है। ये मैं बहुत लेमन एग्जांपल दे रहा हूं ताकि आपको समझ आ जाए। तो
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बात घूम फिर के उतनी सी है। अब ड्यूटी क्या है?
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एग्जैक्टली अगर बोला जाए लीगल ड्यूटी और मोरल ड्यूटी में डिफरेंस लोग बहुत कंफ्यूज करते हैं। लीगल ड्यूटी क्या है? लीगल
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ड्यूटी वो ड्यूटी है जो अगर आपने नहीं परफॉर्म करी तो वो आपका वायलेशन ऑफ लॉ और मोरल ड्यूटी जैसे गरीब को दान देना मोरल
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ड्यूटी भाई किसी जरूरतमंद की मदद करो। मैं नहीं करूंगा तो क्या मैंने कोई लॉ तोड़ा? नहीं तोड़ा ना मेरी मर्जी है। तो वो मोरल
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ड्यूटी के अंडर आता है। लीगल ड्यूटी एनवायरमेंट को नुकसान नहीं करो। और अगर
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आपने किया एनवायरमेंट प्रोटेक्ट करो। नहीं किया गंदगी करी ऑब्वियसली आपने लीगल रोंग किया तो लीगल ड्यूटी और मोरल ड्यूटी में
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ये दो चीजें होती है लीगल ड्यूटी अगर नहीं करोगे सिंपल है पनिशेबल बाय लॉ है सिंपल
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मोरल ड्यूटी के लिए ऐसा कुछ नहीं है अब रोंग क्या होता है छठवा कांसेप्ट
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वायलेशन ऑफ अ लीगल राइट इज रोंग सिंपल कोई भी रोंगफुल एक्ट कोई भी इललीगल एक्ट
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रूल ऑफ राइट या जस्टिस के अगेंस्ट किया हुआ काम इसमें भी मोरल रोंग होता है। लीगल रोंग होता है। सेम लॉजिक सेम कासेप्ट
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ज्यादा उसमें घुसना नहीं। सेम लॉजिक सेम कासेप्ट सिविल रोंग क्रिमिनल रोंग क्या होता है? जब लीगल रोंग है, लीगल रोंग की
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श्रेणी में सिविल रोंग होता है, क्रिमिनल रोंग होता है। सिविल रोंग सिविल कोर्ट में एक्शनबल है। और क्रिमिनल
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कोर्ट में क्रिमिनल रोंग है। सिविल रोंग होता है तो कंपनसेशन मिलता है। क्रिमिनल रोंग होता है तो पनिशमेंट और इंप्रज़मेंट
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और फाइन पड़ जाता है। सिंपल सी बात है। अब सातवां कांसेप्ट है रेमेडी। रेमेडी
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किसको कहते हैं? तो लॉ प्रोवाइड्स अ रेमेडी किसके लिए? जहां पे भी वायलेशन ऑफ़
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राइट है तो ओबी जस भी रेमेडीियम।
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जहां राइट है वहां रेमेडी होनी ही होनी है। आपका राइट वायलेट होगा तो उसको जो आपको दिया जाता है उसको क्या बोलते हैं?
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रेमेडी। क्या अवेलेबल है तेरे पास? जब मेरा राइट वायलेट हो गया।
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तो फॉर द रिड्रेसल फॉर द पर्पस ऑफ़ रिड्रेसल टू द एग्रीव्ड पर्सन। क्या देती
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है? कोर्ट ऑफ़ लॉ रेमेडी देती है। और जुडिशियल रेमेडी क्या है? अवार्ड देगी डैमेजेस के लिए। अवार्डिंग ऑफ़ डैमेजेस
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होगा। इंजक्शन प्रोवाइड करेगी। स्पेसिफिक परफॉर्मेंस देगी कॉन्ट्रैक्ट के लिए। ये सारी चीजें क्या होती है? आपके रेमेडीज
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होते हैं। कई केसेस में एक साथ ज्यादा रेमेडी आप नहीं ले सकते हो। हमने किया हुआ है।
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फिर होता है फैक्ट। आठवां कासेप्ट फैक्ट का क्या मतलब है? फैक्ट मतलब सिंपल। एक्चुअली क्या हुआ था? रियलिटी क्या है?
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सच्चाई क्या है? जिसके बेसिस पे
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क्या हो सके हमारा केस आगे चल सके? जस्टिस मिलने में आसानी हो जाए। व्हिच इज़ प्रूव्ड
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और डिस्रूव्ड विथ द हेल्प ऑफ़ रीडिंग एविडेंस। फैक्ट का मतलब इसके लिए जो एक्चुअली एकिस्टेंस और नॉन एकिस्टेंस ऑफ़
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वन थिंग और सरकमस्टेंस यानी एक इवेंट के अकरेंस में एक्चुअली क्या-क्या हुआ?
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रियलिटी में क्या-क्या हुआ? एक्शंस एंड रियलिटी इज़ अ फैक्ट। नौवा कासेप्ट पर्सन अब पर्सन क्या है?
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लीगली पर्सन का वही मतलब होता है जिसमें राइट्स और ड्यूटीज दोनों डाले जा सके।
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एनिमल्स के राइट्स हैं, ड्यूटीज नहीं है क्योंकि उनमें समझने की क्षमता नहीं है। कैपेसिटी एंड कैपेबिलिटी टू थिंक एब्सेंट
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है। हेंस दे कैन नॉट बी रेग्नाइज एस एस लीगल पर्संस। पर्संस
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क्योंकि राइट्स तो है उनके ड्यूटीज नहीं हो सकती। कैसे करोगे?
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सिंपल बात है। इतना सा ज्यादा इसमें मत तुम भसड़ में मत
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घुसो। सिंपल आंसर्स दो। ठीक है? अब पर्सन
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भी दो टाइप के होते हैं। नेचुरल पर्सन होता है, लीगल पर्सन होता है। ये क्या बात हो गई? ह्यूमन बीइंग हो आप। हम इंसान के
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बच्चे हैं। तो हम नेचुरली कौन हो गए? नेचुरली हम पर्सन हो गए। सिंपल सी बात है। जो बाय नेचर क्रिएटेड है। नेचर ने जिसको
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क्रिएट किया हुआ है वो नेचुरल पर्सन हो गए। और लीगल पर्सन भाई आर्टिफिशियल पर्सन
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भी हो सकते हैं जिसको लॉ ने रिकॉग्नाइज किया हो। जैसे कंपनी कंपनी एक आर्टिफिशियल पर्सन है। ये आप लोगों को मालूम होना
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चाहिए अभी तक। तो उसको क्या बोलेंगे? वो लीगल पर्सन है। वो नेचुरल पर्सन नहीं है।
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उसका बर्थ नहीं हुआ है। उसका फॉर्मेशन होता है। लेकिन उसको लीगल रेग्निशन है एज अ पर्सन एस एन आर्टिफिशियल पर्सन।
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तो उनकी भी राइट्स एंड ड्यूटीज है परफॉर्म करने की। इसके लिए वो पर्सन के डेफिनेशन
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में है। फिर आता है ऑफेंस। अब ऑफेंस का क्या मतलब है? वेरी सिंपल ऑफेंस
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का मतलब बहुत बहुत सिंपल है। कोई एक्ट या ओिशन व्हिच इज प्रोहिबिटेड बाय लॉ
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चाहे क्रिमिनल लॉ या कोई भी और लो कोई भी और ले लो कोई फर्क नहीं पड़ता। कोई एक्ट
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करना या कोई एक्ट ना करना जो लॉ में परमिसिबल नहीं है वो ऑफेंस हो गया।
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और सारे क्रिमिनल रोंग ऑफेंसेस है। व्हनेवर देयर इज अ वायलेशन या नॉन
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ऑब्जर्वेंस हो, डिसओबिडियंस हो, डिसरगार्ड हो लॉ का या किसी राइट का वैसे को हम
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ऑफेंस कहते हैं। सिंपल है। अब स्टेट क्या होता है? अब स्टेट आप समझते हो कि अरे वो
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जैसे महाराष्ट्र स्टेट है। जैसे हां भाई वो स्टेट है ही लेकिन एक्चुअली स्टेट का क्या मतलब है? पॉलिटिकल सोसाइटी या
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कम्युनिटी। इसके लिए नेशंस को भी स्टेट कहा जाता है। वेरी सिंपल।
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इंटरनेशनल लॉ पढ़ोगे तो इंटरनेशनल लॉ में तो बहुत ज्यादा कभी हम यह कंट्री, नेशन ये सब बहुत कम यूज़ करते हैं। स्टेट्स, द
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स्टेट ऑफ इंडिया, इन द स्टेट ऑफ यूके इन द स्टेट ऑफ
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यूएसए कुछ भी बोलो एस पर योर द स्टेट्स लॉ सिंपल।
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पॉलिटिकल सोसाइटी या कम्युनिटी पर्टिकुलर टाइप की सोसाइटी या कम्युनिटी
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जहां पर लोग रहते हैं पर्टिकुलर टेरिटरी जहां पे लोग रहते हैं व्हिच इज़ गवर्न बाय विल ऑफ एन इंडिविजुअल पर्सन या पॉलिटिकल
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सुपीरियर जैसे यूके में अभी भी वही महारानी है ठीक है ऐसी कई सारी जगह तो
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वहां पे उसको भी हम स्टेट बोलेंगे सिंपल बात हो गई ठीक है प्लेंट प्लेंट क्या है
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रिटन स्टेटमेंट मेंट जिसके बिहाफ पे प्लेंटिफ क्या करता है? कोर्ट की असिस्टेंस मांगता है ताकि उसको रिलीफ
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प्रोवाइड की जाए। रिटन स्टेटमेंट इन व्हिच प्लेेंट सीक्स द हेल्प ऑफ कोर्ट एड ऑन
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असिस्टेंस ऑफ़ कोर्ट फॉर ग्रांटिंग हिम रिलीफ। प्लेंट के बिना आपका प्लेंट क्या
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है? इट्स इंस्टीट्यूशन ऑफ़ सूट में पहले प्लेंट ही होता है। सीपीसी में सबसे
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ज्यादा अब सीपीसी की अलग से हमने वीडियो बनाई है। जाके पढ़ लो वहां पे देख लो। तो प्लेटिफ क्या करता है? अपना कॉज ऑफ़
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एक्शन लिखेगा। सारे नेसेसरी पर्टिकुलर भरेगा उसमें। ठीक है? मेमोरेंडम क्या
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करेगा? सबमिट करेगा कोर्ट को। सारे फैक्ट्स लिखेगा। केस में क्या हुआ? क्यों आया? भाई हमारे पास तेरे कौन से राइट्स
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वायलेट हो गए? कौन सा कॉन्ट्रैक्ट ब्रीच हुआ? ठीक है? और फिर वो पे प्लेंट के बेसिस पे कमीशन ऑफ़ सूट या इंस्टीट्यूशन ऑफ़
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सूट होता है। और इसी को हम प्लेेंट कहते हैं। सिंपल सी बात।
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तो हम उसमें रिलीफ मांगते हैं। कॉज ऑफ़ एक्शन लिखते हैं। जुरिसडिक्शनल अथॉरिटी लिखते हैं।
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प्लेंट फॉर डिपेंडेंट के इंफॉर्मेशन लिखते हैं। डिटेल्स डालते हैं। स्टेटमेंट ऑफ फैक्ट्स डालते हैं। इशूज़ क्या है? वह
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डालते हैं। सब चीजें होती है। कंप्लेंट हो गया। कंप्लेंट क्या है?
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कंप्लेंट आपके क्रिमिनल प्रोसीजर्स में होती है। वो भी एलगेशन है कि भाई किसी ने
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मेरे साथ गलत किया। तो एलगेशन ऑफ़ कमीशन ऑफ़ रोंग इज़ रेज़्ड। इट
19:05
इज़ अ कंप्लेंट। और जो ऐसा एलगेशन लगाता है ओरल या रिटन वे में उसको कंप्लेनेंट कहते
19:10
हैं। प्लेंट करने वाले को प्लेंटिफ कहा जाता है। तो कंप्लेन अबाउट एन ऑफेंस कहां ट्रबल है?
19:18
कहां पर ट्राई होगी वो? बीएएसएस
19:23
क्रिमिनल प्रोसीजर्स के अंडर ही आएगा। तो कंप्लेंट क्या है? कोई भी ऐसा एलगेशन जो
19:28
ओरली या राइटिंग में किया फॉर द पर्पस ऑफ टेकिंग एक्शन अंडर द रेवेंट लॉ अगेंस्ट पर्सन। सिंपल।
19:36
पहले तो इसके रिक्वट्स है समझ लो इसको ओरल या रिटन एलगेशन होना चाहिए।
19:41
सम पर्सन किसी के अगेंस्ट होना चाहिए। चाहे वो नोन हो अननोन हो। उसने ऑफेंस
19:47
क्रिएट किया है। उसने ऑफेंस कमिट किया है। इट मस्ट बी मेड वि द ऑब्जेक्ट टू टेक एन
19:53
एक्शन अगेंस्ट द कंसर्न पर्सन। मतलब क्या? उस इंसान के अगेंस्ट में हमने एक्शन लिया
20:00
है। मैजिस्ट्रेट को वो कंप्लेन की हुई है। मतलब बहरहाल आप जाओगे पुलिस स्टेशन में
20:06
कहीं पे भी बट अल्टीमेटली उसी के पास पहुंचनी है। ठीक है? इतनी सी चीज है कंप्लेंट। और सूट
20:12
क्या है? सूट का मतलब सिंपल सी बात है। सूट जो होता है वो एक सिविल कोर्ट में हो
20:17
जाता है। किसके लिए? ताकि सिविल रेमेडी मिले। और सूट कैसे होगा? इंस्टीट्यूशन ऑफ़
20:22
सूट के लिए प्लेेंट लगता है। लीगल प्रोसीडिंग है सूट। उसके उसके बेसिस पे सारा मैटर एडजुडिकेट होता है। एक बंदा
20:30
करेगा दूसरे के अगेंस्ट पेंटिफ करेगा। डिफेंडेंट के अगेंस्ट सिंपल है।
20:35
एफिडेविट एफिडेविट समझ लो एक टाइप की ओथ है। एक टाइप का डिक्लेरेशन है। एक टाइप का
20:41
स्टेटमेंट है। अगर आपने झूठी एफिडेविट करी। एफिडेविट इन
20:46
श ये बताता है मैं ये ये मैं एक तरीके का डिक्लेरेशन कर रहा हूं। मैं एक टाइप की होते रह रहा हूं और सब सच होना चाहिए। यह
20:52
सच है। उसी मतलब इन श जो मैं यह कह रहा हूं जो लिख रहा हूं वो सब सच है। ट्रू टू द नेचर
20:58
और अगर वो झूठ हुआ तो आपको पता नहीं बहुत भारी सीरियस कॉन्सक्वेंसेस होते हैं। भयंकर कतई भीषण
21:06
सिंपल बात एफिडेविट एक रिटन स्टेटमेंट होता है
21:12
डेपोनेंट का क्योंकि उसको डिपॉजिट किया जाता है। एक ओत होती है जो किसी मैजिस्ट्रेट या कोर्ट के पहले अफर्म की
21:18
जाती है कि भाई साहब मैंने यह किया ऐसे किया वैसे किया इट कुड बी एनी डिक्लेरेशन
21:23
और ऑथर अब जजमेंट क्या होता है बहुत सिंपल सी बात है जुडिशियल डिटरमिनेशन या डिसीजन ऑफ
21:31
कोर्ट सिंपल उसको जजमेंट बोलते हैं एक मैटर के एडजुडिकेशन में एक पूरे मैटर को
21:36
सुनने के बाद सिविल हो क्रिमिनल हो जैसा भी हो फाइनल डिसीजन ऑफ़ कोर्ट क्या है फाइनल ऑर्डर क्या है फाइनल चीज़ सॉरी फाइनल
21:43
ऑर्डर तो मुझे मुझे नहीं कहना चाहिए। उसको डिग्री हो जाएगी। फाइनल डिसीजन कोर्ट का क्या है? उसको हम जजमेंट कहते हैं।
21:51
कोई भी एक्यूज़्ड पर्सन है उसको वो गिल्टी है, इनोसेंट है क्या? उसको हम जजमेंट कहते हैं। सिंपल सी बात है। तो जजमेंट
22:01
द टर्म इटसेल्फ इंक्लूड्स और इट इज़ सिनोनिमस विद टर्म्स। जैसे डिसीजन, ऑर्डर,
22:06
अवार्ड डिग्री सिनोनिमस साउंड करता है। ऑर्डर्स जनरली जो होते हैं वो
22:12
ट्रिब्यूनल्स देती है। आर्बिट्रेशन में ऑर्डर्स होते हैं। सॉरी अवार्ड्स होते हैं। डिग्री फाइनल ऑर्डर को डिग्री कहा
22:19
जाता है इन जनरल। बट कई टाइप की डिग्रीज़ भी होती है। अब अपील क्या है? अपील इज़ अ
22:26
रेमेडी टू द पर्स। अभी सिंपल है यार। एक केस हुआ उसमें जजमेंट आई। जजमेंट मेरे
22:32
अगेंस्ट में हो गई। तो मैं अपील में जा रहा हूं। यानी मैं हायर कोर्ट के पास जा रहा हूं। मैं अपलेट कोर्ट के पास जा रहा
22:38
हूं। क्यों? आप इस मैटर को प्लीज वापस सुनो। क्योंकि मेरे हिसाब से जस्टिस नहीं
22:43
हुई है। मेरे हिसाब से चीजें सही नहीं हुई है। तो जुडिशियल एग्जामिनेशन ऑफ द डिसीजन बाय
22:50
अ हायर कोर्ट। किसका डिसीजन? किसका जुडिशियल डिसीजन? भाई साहब इनफीरियर कोर्ट का, लोअर कोर्ट का, सबोर्डिनेट कोर्ट का।
22:58
इसको कहा जाता है अपील। उसका भी स्पेसिफिक टाइम लिमिट है। 30 दिन का, 60 दिन का, 90
23:03
दिन का स्पेसिफिक टाइम लिमिट है। लिमिटेशन पीरियड है। यह सब कवर्ड है। लिमिटेशन एक्ट
23:09
पढ़ो। सब है उसमें। बहुत जरूरी है सब आपको पढ़ना।
23:15
तो एपिलेट कोर्ट जिसके सामने मैंने अपील किया है वो क्या-क्या ऑर्डर पास कर सकती है?
23:22
भाई जो आर्डर लोअर कोर्ट का है उसको रिवर्स कर देगी मॉडिफाई कर देगी आर्डर को
23:27
या डिसमिस कर देगी अपील को कि बकवास है अपील हम तो नहीं मानते
23:34
फिर आता है रिव्यू रिव्यू क्या है जब सेम जज
23:41
उसी जज है उसने ऑर्डर पास किया सेम जज के सामने जब रिव्यु एप्लीकेशन करते वही जज
23:48
वही कोर्ट उसी मैटर को वापस री एग्जाम काम करेगी सर्टेन सरकमस्ट्ससेस में उसको कहा
23:54
जाता है रिव्यू। एप्लीकेशन ऑफ़ रिव्यु किया जाता है। जब एप्लीकेशन को एडमिट किया जाता
24:01
है तो अगर कोई डिस्कवरी है, कोई नया एविडेंस है या कोई ऐसा फैक्ट है जो भाई आर्गुमेंट के टाइम पे नहीं प्रेजेंट होता
24:07
तो वापस उसको जजमेंट को हम रिव्यु करेंगे। बट वही जज करेगा वही कोर्ट करेगी।
24:13
और अगर वह अवेलेबल नहीं है जज देन
24:19
फिर वो दूसरा जज करता है। उसके भी क्राइटेरिया है वो अगर आपको चाहिए ठीक से समझना है तो भाई हमारे सीबीसी के लेक्चर
24:26
में वो सब दिया हुआ है। आप जाके वो समझ सकते हो। और भी हमारे बाकी सेशंस हैं कवर्ड। सब में आपको इसके आंसर्स मिल
24:33
जाएंगे। अब रिवीजन क्या है? अपील क्या? रिव्यू
24:38
क्या? अब रिवीजन क्या होता है? रिवीजन मतलब क्या? हायर कोर्ट
24:44
जब देखो एक सिंपल सी बात समझाता हूं। यह भी आपके मोस्टली सीपीसी के अंडर ही सारी चीजें होती हैं। रिवीजन हमेशा हायर कोर्ट
24:51
करती है। ठीक है? तो द हायर कोर्ट में कॉल फॉर द रिकॉर्ड ऑफ़ एनी केस व्हिच हैज़ बीन
24:57
डिसाइडेड बाय द कोर्ट सबोर्डिनेट या सबोर्डिनेट कोर्ट को। मैं अपील में नहीं गया हूं। मैं रिवीजन में गया हूं। मैंने
25:04
अपील नहीं किया। लोअर कोर्ट ने जजमेंट पास किया। मैं उसके अपील में नहीं आया हूं। मैं रिवीजन में आया हूं।
25:10
अब इसके भी तीन केसेस है जहां रिवजन हो सकता है। पहले लोअर कोर्ट ने वो जुरिसडिक्शन नहीं एक्सरसाइज करा जो उसमें
25:18
इन्वेस्टेड था उसने वो करा जो उसमें इन्वेस्टेड है ही नहीं। यानी कि क्या मैं कह सकता हूं काइंड ऑफ़ अल्ट्रावेयर? यस
25:24
100% काइंड ऑफ़ अल्ट्रावायर या जो उसमें इन्वेस्टेड था वो उसने किया ही नहीं। एक्स्ट्रा तो नहीं किया बट जो था
25:31
वो भी नहीं किया। अथर उन लोगों ने इललीगल जुरिसडिक्शन या
25:36
मटेरियल इर्रेगुलरिटी मोस्टली लोग यही बोलते हैं कि भाई साहब हम रिवीजन में इसलिए है क्योंकि मटेरियल इर्रेगुलरिटी
25:42
है। मटेरियल फैक्ट्स कंसीडर नहीं किए लोअर कोर्ट ने। तो हाई कोर्ट क्या करेगा? हाई कोर्ट अगर उसको ठीक लगता है तो हाई कोर्ट
25:48
क्या करेगा? चेक करेगा और जरूरत लगेगी। रिवाइज करेगा ऑर्डर को। सिंपल बात है।
25:55
अब रेफरेंस सबोर्डिनेट कोर्ट कई बार कई केसेस में हाई
26:01
कोर्ट का ओपिनियन चाहती है। ये जनरली वो केसेस होते हैं या जब लॉ के ऊपर कोई
26:07
क्वेश्चन आ जाता है और जहां पे उसको लगता है मुझे हाई कोर्ट का इसके ऊपर ओपिनियन चाहिए। तब यहां पे रेफरेंस के लिए
26:12
सबोर्डिनेट कोर्ट हायर कोर्ट के पास जाती है। लेकिन वो कुछ केसेस होते हैं। या तो पहले हायर कोर्ट ने उसके ऊपर या सुप्रीम
26:19
कोर्ट ने उसके ऊपर कोई किसी टाइप का अपना डिसीजन दिया ना हो।
26:24
जब तक ओपिनियन नहीं आएगा तब तक लोअर कोर्ट आगे बढ़ ही नहीं सकती उस मैटर के साथ। ऐसी कुछ चीजें उसमें पहले अचीव करनी
26:31
इंपॉर्टेंट है। फिर ही आप रेफरेंस में जा सकते हो। और हाई कोर्ट की मर्जी है। हाई कोर्ट अगर
26:38
चाहे तो उसको आंसर करेगी नहीं तो रिजेक्ट कर देगी। जब हाई कोर्ट अपना ओपिनियन देगी उसके बाद क्या होगा? अच्छा पहली बात तो
26:46
एप्लीकेशन इसका भाई पार्टी भी कर सकती है के कोर्ट को बोल सकते हैं हायर कोर्ट का ओपिनियन हाई कोर्ट अपने खुद के बेसिस पे
26:52
कर सकता है। अपने इंडिपेंडेंस पे फ्री विल पे भी मांग सकता है ओपिनियन। बाकी सॉरी
26:57
सबोर्डिनेट कोर्ट अपने फ्री पर भी मान सकता है हायर कोर्ट से तो हायर कोर्ट फिर जब उसको हाई कोर्ट जब उसको आंसर करती है
27:04
तो फिर उसको रिकॉर्ड में लिया जाता है एंड देन यू प्रोसीडेड विथ द कोर्ट विथ द केस सिंपल एज दैट उसको रेफरेंस कहते हैं।
27:11
प्लीज रेफरेंस को एमकेस क्यूरे से कंफ्यूज मत करना। एमकेस क्यूरे इज़ द फ्रेंड ऑफ़ कोर्ट। वहां आप कोर्ट का हेल्प नहीं ले
27:17
रहे हो। वहां एक इंडिविजुअल एक्सपर्ट का भी आप हेल्प ले सकते हो। लेकिन एमकस क्यूरे का रेफरेंस से कोई लेना
27:23
देना नहीं है। यह दो बहुत अलग कासेप्ट है।
27:29
अब हम आगे चलते हैं। रिट्स रिट क्या रहता है? आर्टिकल 226
27:37
इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन का है। उठा के पढ़ो। हाई कोर्ट में रिट्स जा सकती है। रिट्स के
27:43
32 भी है आर्टिकल। नो डाउट। रिट्स है क्या?
27:48
एक बहुत वाइड कांसेप्ट है जो सुप्रीम कोर्ट और हायर कोर्ट उसको एक्सरसाइज करते
27:54
हैं। फंडामेंटल राइट्स जहां इनफ्रेंस हो रहे हैं तो उसको इनफोर्स करने के लिए
28:01
तो पांच टाइप के राइट्स हैं। हेवियस कॉरपस पहला हेवियस कॉरपस मतलब क्या है? अगर किसी
28:07
भी पर्सन को अनलॉफुली डिटेन करा है मालफाइड डिटेंशन है उसका या जब एक इंसान
28:13
को विदाउट जुरिसडिक्शन डिटेन कर लिया जाता है यानी अनलॉफुली तो क्या होता है हेवियस कॉरपस का रेट इशू होता है तो कहा जाता है
28:21
हेवियस कॉरपस मतलब जिसको आपने अनलॉफुल कस्टडी में रखा है उसको अभी का अभी तुरंत
28:29
तत्काल प्रभाव से उसको एट द अरर्लियस्ट कोर्ट में लाके प्रेजेंट किया जाए यह स्कप
28:35
सेकंड रेट ऑफ मेंडेडमस मैंडेडमस मतलब क्या? कमांड वी कमांड इसका क्या मतलब होता है? कब इशू किया जाता है? जब अ पर्सन हु
28:43
इज़ रिक्वायर्ड अंडर लॉ टू परफॉर्म अ स्पेसिफिक ड्यूटी। किसी अथॉरिटी को कहना यह काम करो।
28:52
रेट ऑफ़ कंडम। फिर आता है रेट ऑफ़ सर्चरी। अब रेट ऑफ़ सर्चरी क्या है?
28:59
टू कीप जुडिशियल बॉडी एंड एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिबन विद इन लिमिट्स व्हेन एन इनफीरियर
29:05
कोर्ट टेक्स अप फॉर हियरिंग अ मैटर ओवर वि इट हैज़ नो जुरिसडिक्शन अल्ट्रावायर
29:13
सिंपल सी बात है तब यहां पे ऐसी चीजों में सुपीरियर कोर्ट क्या करेगी रेट ऑफ सर्चरी
29:19
करेगी तो हो जाएगा सेट असाइड हो जाएगा ऐसा डिसीजन क्योंकि जुरडिक्शन में नहीं है फिर
29:26
प्रोहिबिशन प्रोहिबिशन का मतलब क्या? रेट ऑफ
29:32
प्रोहिबिशन और सोशरी उनके बहुत सिमिलर कैरेक्टरिस्टिक्स होते हैं। प्रोहिबिशन मतलब रोको किसी चीज को।
29:40
सिंपल सी बात है। और फिर रिट ऑफ को वारंटो। रिट ऑफ को वारंटो मतलब किस
29:47
अथॉरिटी से तेरी अथॉरिटी दिखा पहले। किसी ने रोंगफुली या अनलॉफुली किसी चीज का
29:54
पोजीशन लिया है। किसी या ऑफिस में कोई चेयर अस्यूम की है या इललीगली उसने कुछ काम किया कोई अथॉरिटी ने
30:01
तो बोलेंगे दिखा तेरे पास अथॉरिटी है क्या? सिमिलरली रेट ऑफ सर्च ऑलरेडी इज़ टू
30:08
सर्टिफाई। वही वाली सिंपल चीज है। अब स्टे ऑर्डर स्टे ऑर्डर क्या होता है?
30:15
सिंपल सी बात है। स्टे आर्डर का मतलब होता है कोई एक ऐसा आर्डर किसी कोर्ट से जहां पर किसी चीज पे
30:24
स्टे लगाया जा रहा है। यानी स्टॉप लगाया जा रहा है। किसी एक प्रोसीडिंग स्टॉप एनी प्रोसीडिंग बाय व्हिच द एप्लीेंट इज़
30:29
एग्रीव्ड। सिंपल एस दैट। तो एप्लीकेशन ऑफ़ स्टेमस बी अकंपनीड वि द
30:36
मेन एप्लीकेशन। सीरियस इनजस्टिस अगर होती है किसी को किसी
30:44
एग्रीव्ड एपिकेंट को बाय इंप्लीमेंटेशन ऑफ सच ऑर्डर और सच प्रोसीडिंग तो वहां पे
30:50
स्टे ऑर्डर कोर्ट लगा देती है बाकी किसी को भी सीरियस इनजस्टिस नहीं हो
30:56
इंजंक्शन क्या है समझ लो यह भी कोर्ट देती है सब कोर्ट ही
31:02
करती है तो यह भी कोर्ट ऑर्डर करती है किसी को रोकना कोई काम करने से या किसी को
31:07
कहना कोई काम करने के लिए टू डू और रिफ्रेम फ्रॉम डूइंग अ पर्टिकुलर एक्ट इंजक्शन। अब इसमें भी बहुत होता है।
31:14
टेंपरेरी इंजक्शन होता है, परपचुअल इंजक्शन होता है, मैंडेटरी इंजक्शन होता है, इंटरलकटरी इंजक्शन होता है। बहुत सारी
31:23
चीजें आपका परमानेंट इंजक्शन तो जो फाइनल डिग्री के साथ मिलता है उसी को कि क्या करना है
31:28
या क्या नहीं करना है। एस सिंपल एज दैट। टेंपरेरी जब तक फाइनल ऑर्डर आ नहीं रहा तब
31:34
तक। अब आ जाओ एडज्जमेंट पे। एड्जमेंट क्या चीज होती है? भाई सिंपल सी बात है। जब कोई
31:40
सूट या कोई केस है किसी कोर्ट के सामने तो कोर्ट उसको क्या कर सकती है? उसको एडजन कर
31:47
देती है अगली डेट तक। तो एड्जमेंट एक एक्ट ऑफ कोर्ट है बाय वि द मैटर बिफोर इट इज
31:52
पोस्टपोंड। पोस्टपोन करना किसी मैटर को अगली डेट के सिंपल और उसके कोई उसके कई
31:58
सारे रीज़ हो सकते हैं। फिर कॉज ऑफ़ एक्शन 25वा यहां पे हम कासेप्ट कर रहे हैं।
32:06
वो सेट ऑफ फैक्ट्स या वो पर्टिकुलर फैक्ट जिसके बेसिस पे एक बंदे ने क्या करा है?
32:11
किसी इंसान ने क्या करा है? सूट फाइल करा है। या किसी अगेंस्ट किसी के अगेंस्ट में
32:17
रिलीफ मांगा हुआ है। उसको कहा जाता है कॉज ऑफ एक्शन। भाई किस किस प्रबंधन से तुम
32:23
यहां आए हो? क्यों आए हो यहां पर? कॉज ऑफ एक्शन आपको
32:30
आपका लोकल स्टैंड आई भी देता है। 26 इज़ इशू। इशू क्या होता है?
32:40
जिन फैक्ट्स को एलीज किया गया है एक पार्टी ने या और
32:47
यू नो आई कैन से एंड इट इज़ इदर डिनाइड और एडमिटेड बाय अनदर पार्टी।
32:52
तो इश्यूज बन जाते हैं। इसने बोला इसने ऐसासा किया। मैंने बोला नहीं किया।
32:58
तो स्टेटमेंट ऑफ क्लेम जब प्लेटफ फाइल करता है उसके बाद रिटन स्टेटमेंट डिफेंडेंट देता है। यानी कि आंसर उसको
33:04
करता है तो फ्रेमिंग ऑफ इश्यूज हो जाते हैं। फ्रेमिंग ऑफ इशज़ यानी कि क्या? मेन इस केस में मुद्दे क्या-क्या है? मेन
33:10
प्रॉब्लम क्या-क्या है? इश्यूज क्या-क्या है? सिंपल प्रॉब्लम क्या है? मटेरियल और इंपॉर्टेंट पॉइंट होते हैं किसी भी केस
33:16
में कि हमको आंसर क्या करना है इस केस में? किस पे कोर्ट को डिसीजन देना है?
33:23
वैसे ही है चार्ज। एक्यूज़ेशन ऑफ़ एन ऑफेंस।
33:28
सिंपल सी बात है। क्या-क्या इसके ऊपर आरोप लगाए गए हैं। क्या-क्या एक्यूज़ेशंस है?
33:35
उसको चार्ज कहा जाता है। चार्जशीट रिकॉर्ड हो जाती है। और चार्जशीट रिकॉर्ड हो के
33:41
मजिस्ट्रेट के पास जाती है। फिर उसके ऊपर तो पूरा मुकदमा है ही। चलो पूरा केस है। वैसे ही होता है बेल। और बेल भी
33:48
एंटीिसिपेटरी बेल होती है या आपकी रेगुलर बेल होती है या डिफॉल्ट बेल होती है। बहुत टाइप की बेल होती है। तो बेल मतलब क्या?
33:56
किसी अरेस्टेड या डिटेन पर्सन को रिलीज करना, छोड़ना, फ्री करना उसको बेल कहते
34:03
हैं। एंटीिसिपेटरी बेल। मतलब आपको एंटीिसिपेशन है कि मैं किसी ऐसे कॉग्निजबल
34:09
ऑफेंस के अंडर में मेरे को पुलिस अरेस्ट कर सकती है। मैंने पहले ही अपना एंटीिसिपेटरी बिल ले ली। अब आप मुझको टच
34:15
नहीं कर सकते हो। कॉग्निजबल ऑफेंस में पुलिस को कोई गरज
34:21
नहीं है अरेस्ट वारंट की एनसी में नॉन कॉग्निजबल ऑफेंस में समझ रहे हो ऐसे ही
34:29
एक्स पार्ट एक्स पार्ट मैं बहुत सिंपल भाषा में समझाता हूं जब कोई प्रोसीडिंग चल रही होती है और जब सामने वाला आदमी आता
34:36
नहीं है एग्जांपल डिफेंडेंट आता नहीं है एब्सेंट रहता है ठीक है बहुत सारे नोटिस
34:41
भेजे नहीं आया प्रोसीडिंग अटेंड नहीं करी तो एक ही के
34:47
यानी फिर उसको इग्नोर कर दिया जाएगा। एक्स पार्टी डिक्री हो जाएगी। यानी कि हमने उसको बोला था। यह अपनी सफाई देने, अपने
34:53
आंसर्स देने, अपने आपको अपना केस समझने सुनने आया नहीं। अब एक पार्टी के ही सिर्फ
34:59
एक पार्टी के बेसिस पे एक पार्टी के सबमिशन के बेसिस पे हम अवार्ड सॉरी ऑर्डर पास कर रहे हैं क्योंकि दूसरा तो आ नहीं
35:05
रहा। सिंपल सी बात है। ठीक है? इसको हम कहते हैं एक्स पार्ट
35:11
डिग्री। डिस्चार्ज
35:18
परमिशन ऑफ क्राइम जब होता है और जब उसको इन्वेस्ट उसको इन्वेस्टिगेट करने की दृष्टि से अगर हम देखें पुलिस ऑफिसर को
35:26
प्रोसीजर्स फॉलो करने पड़ते हैं क्रिमिनल प्रोसीजर्स के एंबिट में और ऐसी जब
35:33
इन्वेस्टिगेशन हो जाती है तो जो मैजिस्ट्रेट है वो प्रीलिमिनरी
35:39
इंक्वायरी करेगा। ठीक है? कैसे कि भाई रिपोर्ट जो सबमिट की है जो भी है वो
35:45
जेन्युइन है कि नहीं है? अगर कोई प्राइमाफेसी एविडेंस एकिस्ट नहीं करता या
35:51
प्राइमाफेसी एविडेंस है नहीं, कोई वैलिड एविडेंस नहीं है अक्यूज़ के अगेंस्ट में तो मैजिस्ट्रेट क्या करेगा? अक्यूज़ को रिलीज़
35:57
कर देगा। इस रिलीज़ को डिस्चार्ज कहा जाता है। और जब वारंट हो कोई एविडेंस नहीं है,
36:04
सफिशिएंट नहीं है, एलगेशन या एक्यूज़ेशन प्रूफ करने के लिए तो डिस्चार्ज हो जाएगा।
36:10
सिंपल। इक्वेटल जब जो क्रिमिनल कोर्ट होती है ठीक है जो
36:17
भी क्रिमिनल कोर्ट होगी तो कोई क्रिमिनल प्रोसीडिंग में जब वो डिसीजन देती है ठीक
36:22
है जब अक्यूज़्ड के ऊपर चार्जेस लगते हैं कि इसने ये किया इसने वो किया इसने फला किया ढिमका किया एक्वेटल का मतलब होता है
36:30
कि भाई सिंपल है आपने सारी चीजें लगाई आपने सारा मेरे पे इल्जाम लगाया लेकिन आप
36:36
प्रूफ कर पाए चार्जेस अगेंस्ट द पर्सन आर नॉट प्रूव प्रूव्ड बियों्ड रीज़नेबल डाउट द एक्यूज़ इज़
36:43
सेड टू बी एक्वेटेड फ्रॉम द चार्जेस और एलगेशन अगेंस्ट या तो कन्विक्ट होता है या एक्विट होता है। तो प्रूव नहीं कर पा रहे
36:49
हो उन एलगेशंस को इक्वेटल हो जाएगा। कन्विक्शन उसी का ऑोजिट प्रूव हो गया। कन्विक्ट हो गया। सिंपल इतना ही है। इससे
36:54
ज्यादा तो कुछ दिमाग लगाने की जरूरत ही नहीं है।
37:00
जो भी क्रिमिनल कोर्ट में आप सामने जो भी अक्यूज़्ड है उसके ऊपर जो चार्जेस है वो
37:05
चार्जेस प्रूव हो रहे हैं। तो वो कन्विक्ट हो गया। एविडेंस है सब प्रूव हो रहा है तो
37:11
कन्विक्ट हो गया इंप्रजनमेंट हो जाएगी उसको या फाइन हो जाएगी या दोनों हो जाएगा सिंपल है
37:17
अब लीगल एयर लीगल एयर कौन होते हैं सिंपल है लेट्स से कोई बंदा इंटरस्टेट मर गया
37:23
इंटरस्ट मर गया मतलब बिना विल बनाए कोई मर जाता है कोई गुजर जाता है ठीक है सीजेस टू
37:29
एकिस्ट उसकी प्रॉपर्टी का क्या होगा तो उसकी प्रॉपर्टी कुछ रिलेशंस या रिलेटिव्स
37:35
में डिस्ट्रीब्यूट हो जाएगी यह पर्सनल लॉस के ऊपर डिपेंड करता है। हिंदूस के अलग है,
37:41
मुस्लिम्स के, क्रिश्चियंस के अलग है, पारसीज के अलग हैं। सिंपल सी बात है।
37:46
ठीक है? और हिंदू में जैनीज़, महाराष्ट्रियंस, सनातनीज, पंजाबी सारे लोग
37:52
सरदार सब बात है। बुद्धिस्ट वगैरह तो लीगल एयर उनका कौन होगा? जैसे हिंदू
37:58
सक्सेशन एक्ट और अगर हम ये देखें तो क्या हो जाता है? हस्बैंड अगर इंटरस्ट गुजर गया
38:05
है तो क्या होगा? बच्चों को प्रॉपर्टी नहीं मिलेगी। पहले वाइफ को मिलेगी। फिर बच्चों को मिलेगी। वाइफ गुजर जाएगी। फिर
38:12
उसके मां गई या बच्चों को मिलेगा। सिंपल सिंपल सी बातें ये है।
38:17
एज सिंपल एस तो उनको लीगल एयर कहा जाता है। ठीक है? अब लीगल एयर पहली बात तो जिनको
38:26
एंटाइटलमेंट है प्रॉपर्टी इनहेरिट करने की, किसी डिसीज्ड पर्सन की और लीगल एयर क्या कर सकते हैं? लीगल रिप्रेजेंटेशन भी
38:33
कर सकते हैं। इसी चीज को लीगल रिप्रेजेंटेटिव में भी हम काउंट करेंगे। जो 34 कांसेप्ट है। 34वा
38:40
कासेप्ट है अपना। क्या? लीगल रिप्रेजेंटेटिव मतलब क्या? एक ऐसा इंसान, एक ऐसा इंडिविजुअल हु इन लॉ रिप्रेजेंट्स
38:48
द एस्टेट ऑफ़ अ डिसीज्ड पर्सन एंड इंक्लूड एनी पर्सन हु इंटरमिड्स वि दी एस्टेट ऑफ द
38:55
डिसीज। सिंपल कुछ नहीं है इसमें। एक मरे हुए इंसान को लीगली आगे कौन
39:02
रिप्रेजेंट कर रहा है? वह लीगल रिप्रेजेंटेटिव हो गया। सिंपल सी बात है।
39:08
इसमें कौन ज्यादा नहीं है। पावर ऑफ़ अटरनी। पावर ऑफ़ एटर्नी मतलब क्या स्पेसिफिक पर्सन
39:13
को किसी एक्ट के लिए या किसी प्रॉपर्टी के लिए हम लोग कुछ पावर्स देते हैं ना तो
39:20
उसको पावर ऑफ़ अटर्नी कहा जाता है। फॉर्मल डॉक्यूमेंट होता है। पहली बात तो पावर ऑफ़ अटर्नी जिससे एक अथॉरिटी दी जाती है एक
39:26
एजेंट को या एक पर्टिकुलर इंडिविजुअल को कोई एक एक्ट करने के लिए कोई एक प्रॉपर्टी
39:31
को पोज़ेस करने के लिए उसके रिलेटेड डिसीजंस लेने के लिए उसको हम पावर ऑफ़ अटर्नी कहते हैं। इंटरनेशनल लॉ।
39:38
इंटरनेशनल लॉ का मतलब ही यह है वो रूल्स जो सोवरन स्टेट्स के रिलेशंस और कंडक्ट को
39:43
गवर्न करते हैं। उसको उसको इंटरनेशनल लॉ कहा जाता है। इंटरनेशनल लॉ पब्लिक
39:49
इंटरनेशनल लॉ के लिए भी हमने अलग से वीडियो बनाई है। उसको भी जाके देख लेना अगर उसको डिटेल समझना है तो वो भी एग्जाम्स में आता है।
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सो द रूल्स द सेट ऑफ़ रूल्स एंड रेगुलेशंस व्हिच गवर्न्स द रिलेशन एंड कंडक्ट बिटवीन
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सोवरन स्टेट्स इंटरनेशनल लॉ। सिंपल पब्लिक इंटरनेशनल लॉ होता है। प्राइवेट इंटरनेशनल
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प्राइवेट इंटरनेशनल लॉ क्या हो गया? सिंपल सी बात है। आपने एक कंट्री के साथ कॉन्ट्रैक्ट करा हुआ है या एक यहां की
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कंपनी ने वहां की कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है। तो वो भी प्राइवेट इंटरनेशनल लॉ में आता है जो कॉन्ट्रैक्ट बेस्ड है। पब्लिक इंटरनेशनल
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लॉ भाई मुझे राइट टू इक्वलिटी है तो वो यहां नहीं हर कंट्री में है। फ्रीडम ऑफ़
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स्पीच एंड चलो वो छोड़ दो। लेट्स से मुझे लाइफ एंड लिबर्टी है तो यहां नहीं है।
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इंटरनेशनलली भी है ना। बाहर जाऊंगा तो नहीं होगा। पब्लिक इंटरनेशनल लॉ मोस्टली मोस्टली मैं कह रहा हूं वो टाइप के लॉज़
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होते हैं जिसमें किसी कंट्री से मुझे परमिशन लेने की जरूरत नहीं। मैं बाय बर्थ ह्यूमन हूं तो मेरे अंदर कुछ राइट्स
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वेस्टेड है। सिंपल वैसे ही होता है आर्बिट्रेशन। अब
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आबिट्रेशन का क्या मतलब होता है? ये लिटिगेशन नहीं होता। दो लोगों के बीच में या ज्यादा लोगों के बीच में कोई कोई
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डिस्प्यूट हो गया तो थर्ड न्यूट्रल पर्सन जो आबिट्रेटर होता है वह डिसीजन देता है। इसको आप कॉज जुडिशियल एक तरीके से समझ
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सकते हो। तो यहां पे क्या होगा? सिंपल है। आर्बिट्रेटर होता है कम और सिंगल सिंगल
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पैनल सिंगल बेंच आर्बिट्रेटर हो सकता है। बेंच तो नहीं होती लेकिन सिंगल आर्बिट्रेटर या थ्री आर्बिट्रेटर बेंच हो
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सकती है। थ्री आर्बिट्रेटर का पैनल हो सकता है। ट्रिब्यूनल हो सकता है। ये भी आप कह सकते हो। लेकिन आर्बिट्रेशन में अवार्ड
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पास होता है, ऑर्डर पास नहीं होता, वह बाइंडिंग होता है। यह याद रखना। आर्बिट्रेशन में जो भी अवार्ड पास होगा वो
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बाइंडिंग होगा। हम लोग जब इंटरनेशनल लॉ में प्रैक्टिस करते हैं तो आर्बिट्रेशन ही मैक्सिमम होता
41:34
है। आप समझ लो 90% आर्बिट्रेशन ही होता है। ठीक है? लिटिगेशन में मैटर जल्दी से
41:39
ज्यादा नहीं है। अपील में चला गया अलग बात है। तो फर्स्ट कोर्ट ऑफ़ अपील जो भी है वहां जाएगा। अगर आर्बिट्रेशन से के अवार्ड
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से आप खुश नहीं हो तो नेचुरली वहां जाएगा। फिर यही चीज होती है जुरिसडिक्शन।
41:50
अब जुरिसडिक्शन क्या हो जाता है? मतलब किसी भी कोर्ट का पावर कोई एक पर्टिकुलर
41:55
केस उसके पास आया तो जिस अथॉरिटी से वो उसको उस केस को ट्राई कर सकती है, डिसाइड कर सकती है, उसके ऊपर जजमेंट दे सकती है,
42:01
उसको उस कोर्ट का जुरिसडिक्शन बोलते हैं। अब इसमें भी टेरिटोरियल जुरिडिक्शन होती है, पेनरी जुरिसडिक्शन होती है, सब्जेक्ट
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मैटर जुरिसडिक्शन होती है। बहुत टाइप की जुरिसिक्शन है।
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सिमिलरली क्यूरेमस क्यूरे मतलब सिंपल भाषा में फ्रेंड ऑफ कोर्ट।
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मतलब क्या वह भी एक एडवोकेट ही होता है। मेंबर ऑफ़ बार होता है जो कोर्ट को असिस्ट
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करता है सर्टेन मैटर्स पे जब कोर्ट को लगे जरूरत है सबरीमाला के मैटर में लगा था
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ठीक है जिसकी उस पे स्पेशलिटी है उस इन टाइप के मैटर्स पे स्पेशलिटी होगी ठीक है
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एग्जांपल अगर कोई पिटीशन आया मेडिकल लॉ इंजीनियरिंग के हिसाब से ठीक है तो हो
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सकता है एमएस क्यूरी कोर्ट अपॉइंट करेगी एमएस कि आर्ग्यू करो उनके इंटरेस्ट में कि वो स्टूडेंट्स के इंटरेस्ट उसमें सिंपल सी
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बात है। होता है। ये भी इंपार्शियली होते हैं वैसे। ठीक है? तो ये 39 कांसेप्ट्स
43:00
हैं। ये 39 के 39 कांसेप्ट्स बहुत ज्यादा इंपॉर्टेंट है और आपको पता होने चाहिए।
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ठीक है? अब हम आगे चलते हैं। लीगल मैक्सिमम्स।
43:11
ये लीगल मैक्सिमम्स बहुत इंपॉर्टेंट है। लिटरली कोर्ट में यूज़ होते हैं। प्लीज ध्यान देना।
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आज हम करने वाले हैं टोटल 15 लीगल मैगजीन जो इंपॉर्टेंट है। आपके सिलेबस का पार्ट
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है। पहला एक्ट इज देन एम एनी फैसिट इंजुरियम। मतलब क्या? एक्ट ऑफ गॉड कॉजेस
43:30
लीगल इंजरी टू नो वन। मतलब जब कोई ऐसा इवेंट हुआ है जो इफेक्ट
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ऑफ़ नेचर है यानी कि सुनामी अर्थक्वेक जो भी हो गया। जहां पे ह्यूमन इंटरवेंशन नहीं है, ह्यूमन ने कुछ नहीं किया है, उसको
43:42
एक्ट ऑफ़ गॉड कहते हैं। तो, एक्ट ऑफ़ गॉड के लिए नो वन इज़ नो वन इज़ रिस्पांसिबल।
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क्योंकि वो इनहेविटेबल है। उसको अवॉयड ही नहीं कर सकते। हम कैसे अवॉइड कर लेंगे उसको? इसके लिए एक्ट ऑफ़ गॉड कोई लीगल
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इंजरी क्रिएट ही नहीं कर सकता। क्योंकि वो किसी के बस में ही नहीं है। किसी के हाथ में ही नहीं है। तो यानी उसके लिए आप
44:00
कोर्ट में नहीं जा सकते हो। एक्ट ऑफ गड हो गया। मेरे को इससे डैमेज क्लेम करके दो। ऐसा नहीं होता।
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सेकंड सेस पॉपुलर एस सुप्रीमलेक्स सेलस पॉपुल
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सुप्रीमलेक्स का मतलब क्या होता है इन सिंपल टर्म्स वेलफेयर ऑफ द पीपल इज द
44:18
सुप्रीम लॉ जिसमें लोगों का हित है वही सुप्रीम लॉ है सेलोस पपुली सुप्रीम्स फिर
44:26
नेमो तनतूर सेसम एक्यूसरे इसका क्या मतलब है
44:33
नो मैन हैस द राइट नो मैन है टू हिमसेल्फ
44:38
सिंपल है रफली इसका यही मतलब होता है हमारे राइट हमको आप हमको हमारे अगेंस्ट
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में आप यूज़ नहीं कर सकते मेरे चैट्स को मेरे अगेंस्ट यूज़ करना है अब अब ये तुम रिलेशनशिप में लग जाओगे फिर मेरे मेरे कहे
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शब्दों को मेरे अगेंस्ट यूज़ नहीं कर सकते हो लेकिन वही होता है ये हमारे जब दिल्ली में सीएम साहब ने भी
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ये किया था जब उनको बोला था आपका फोन अनलॉक करके दीजिए आपके चैट्स हमको बताइए तो उन्होंने
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यही बोला था कि मेरी चीजों को मेरे अगेंस्ट आप यूज़
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नहीं कर सकते। नेमोदरस एपिसम एक नहीं कर सकते आप। फिर
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लेगिस पोस्ट प्रायरस प्रायरस कंस्ट्रनस कॉन्ट्रियास अब्रोगेंट लेगिस पोस्ट
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प्रायरस प्रायरस कॉन्टरियास अब्रोगेंट मतलब क्या लेटर लॉस एब्रोगेट अर्लियर
45:35
कॉन्टस मतलब क्या हो गया जहां दो लॉ या लीगल इंस्ट्रूमेंट कॉन्फ्लिक्ट करते हैं
45:42
तो एक अडॉप कर लेना चाहिए
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और लेटर लॉसोगेट अरियर वंस यह समझाने की जरूरत नहीं है। लेटर लॉसोगेट
45:55
कॉन्ट्ररी वंस ये बोलने की जरूरत नहीं है। ये तो समझ में आना चाहिए आप लोगों को।
46:00
सिंपल फंडा है। नोवा कॉन्स्टिट्यूटो फ्यूथस फोरमाम
46:07
इंपोनेरे डेथ नॉन ब्रथिस। ये ठीक है यार ये सब मुझे पता है ये हॉगवर्ड्स के स्प्स
46:14
की तरह लग रहा है। ये हमको भी दिक्कत होती है पढ़ने में क्योंकि ये सारे के सारे हम लोग यूज़ करते नहीं है। ठीक है? अब इसका
46:21
मतलब क्या है? अ न्यू लॉ ऑ टू इंपोज फॉर्म ऑन व्हाट इज टू फॉलो नॉट ऑन नॉट ऑन द
46:27
पास्ट। यानी कि फ्यूचर के लिए बनता है। पास्ट के लिए नहीं। जब लॉज़ बनते हैं तो वो
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आगे के लिए बनते हैं। पास्ट के लिए नहीं। प्रोस्पेक्टिव होते हैं। रेट्रोस्पेक्टिव नहीं। ठीक है? सिंपल सी बात है।
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नोसरेसोसिस। नोसरेसोसिस का सिंपल मतलब होता है
46:44
मीनिंग ऑफ एन अनक्लियर एंड और ए्बगस वर्ड शुड बी डिटरमाइंड बाय कंसीडरिंग वर्ड्स
46:50
विथ व्हिच इट इज़ असोसिएटेड। सिंपल है। जैसे हम कहते हैं ना अ मैन इज़ नोन बाय द
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कंपनी ही कीप्स। वर्ड इज़ नोन बाय द कंपनी कीप्स। उसका मतलब क्या है? उसका इंटरप्रिटेशन कैसे होगा? किस कॉन्टेक्स्ट
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में उसको बोला गया? तो वो वर्ड्स को कैसे कंसीडर करेंगे? किस कॉन्टेक्स्ट में ये एसोसिएटेड है? नोसेस रिसोर्सेस
47:11
एक्सप्रेसिव यूनिस एस एक्सक्लूसिव ऑलरेस्ट मतलब क्या? एक्सप्रेशन ऑफ़ वन थिंग इज द
47:17
एक्सक्लूजन ऑफ़ अदर। सिंपल सी बात है।
47:22
कॉमन लॉ प्रिंसिपल है। कॉमन लॉ प्रिंसिपल है।
47:28
अगर एक चीज है, एक चीज एक्सप्रेशन ऑफ़ वन थिंग इज़ द एक्सक्लूजन ऑफ़ अदर।
47:35
आम भाषा में बोलूं बहुत ही आम भाषा में
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स्कूल में वीकेंड पे छुट्टी है। यानी कि वीक डे में छुट्टी नहीं है। एक आम भाषा
47:47
में बहुत बहुत सिंपल एग्जांपल मैं बता रहा हूं। एक्सप्रेशन वन इज़ ऑफ़ वन थिंग इज़
47:53
एक्सक्लूजन ऑफ़ द अदर। ऐसे आप समझ सकते हो। बेसिक विजब नॉन देंथ जरा सबत मतलब क्या? लॉ
48:02
असिस्ट ओनली दोज़ हु आर विजिलेंट नॉट दोज़ हु स्लीप ओवर देयर राइट्स। मतलब क्या? जो अपने खुद के राइट्स पे सो रहा है।
48:08
लिमिटेशन पीरियड चला गया। अब जाएंगे उठ के हम 10 साल बाद नहीं चले गए। आपको विजिलेंट रहना पड़ेगा। अपने लॉज़ को राइट्स को
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एक्सरसाइज़ करने के लिए। लॉ डज़ नॉट हेल्प दोज़ हु स्लीप ओवर देयर राइट। सिंपल
48:21
गॉड हैव इनिशियो नॉन वैलिड इन ट्रक टपोरस नॉन कॉन्वलिसिस्ट। मतलब क्या? इट इज़ अ
48:29
लैटिन फ्रेज़ व्हिच मींस क्या? व्हाट इज नॉट वैलिड इन द बिगिनिंग डस नॉट बिकम वैलिड बाय टाइम। आज जो इललीगल है कल भी
48:35
इललीगल ही रहेगा। कल वैलिड नहीं हो जाएगा मेरे भाई। सिंपल सी चीज। ठीक है? किसी
48:41
अंडर एज किसी लेट्स से किसी माइनर ने कॉन्ट्रैक्ट साइन
48:46
करा तो वो 18 का होने के बाद नहीं बोलेगा। हां तब साइन कोई नहीं। अभी तो 18 हो ना तो वायलेंट हो गया ना। नहीं ऐसा नहीं होगा।
48:53
न्यूलिस टोमदोम कपेरे पोतेस दे इंजुरियासुआ प्रोपिया मतलब क्या? नो वन कैन डिराइव एन
48:59
एडवांटेज फ्रॉम हज़ ओन रोंग। ठीक है? नो वन कैन डिराइव एन एडवांटेज फ्रॉम हज़ ओन
49:05
रॉन्ग। इतना ही। ठीक है? अब जनरल प्रिंसिपल्स ऑफ़ गुड फेथ के अंदर ही आता है। ठीक है? ससा
49:13
रेशियो ने लेगिस ससात इ्सालेक्स। मतलब क्या? रीज़ ऑफ़ द सोल ऑफ़ लॉ। रीज़न इज़ द सोल
49:19
ऑफ़ लॉ एंड व्हेन द रीज़ ऑफ़ एनी पर्टिकुलर लॉ सीज़ सो डस द लॉ इटसेल्फ। मतलब क्या?
49:26
रैशन किसी भी लॉ का सोल है। एक बार वो रीजन
49:31
खत्म हो गया तो लॉ भी खत्म हो गया। सिंपल एक्ट एक्सरियो इंडिकांत इंटीरियर सीता
49:39
मतलब सिंपल है। आपके बाहर के एक्शन आपके अंदर का इंटेंशन बताता है। ठीक है? सीधी-सीधी बात है। जैसी हरकतें करोगे, वह
49:46
आपको वह आपका वह आपका इंटीरियर सीक्रेता यानी कि अंदर का सीक्रेट अंदर का इंटेंशन बता देंगे। ठीक है?
49:53
डोमस सुआ सीके एस तसीम रेफ मतलब क्या
50:01
एव्री मैनस हाउस इज़ ह सेफेस्ट रिफ्यूज एव्री मैनस हाउस इज़ ह कैसल ये इतना ही ये
50:08
लास्ट का लाइन याद रखना मार्क्स मिल जाएंगे एव्री मैनस हाउस इज़ हज़ कैसल या उसका सेफेस्ट रिफ्यूज मार्क्स मिल जाएंगे
50:14
मतलब ठीक से लिखोगे तो ठीक है और ये तो भाई ठीक ही है नेमो एस हियर इज़ विवस मतलब
50:22
बेसिकली पर्संस एयर कैन बी असर्ट ओनली एट द टाइम ऑफ़ हज़ डेथ। मतलब उसके एयर का
50:28
एक्चुअल पिक्चर कब आता है? जब वह खुद मर जाए। उसके पहले नहीं आएगा। ठीक है? इग्नोरेंसिया फैक्ट एक्सक्यूज़
50:34
इग्नोरेंसिया लेक्स नॉन एक्सक्यूज़। मतलब एक बार इग्नोरेंस ऑफ़ फैक्ट चल जाएगा। इग्नोरेंस ऑफ़ लॉ नहीं चलेगा। तो अ सिंपल
50:42
सी बात इसमें ये है कि इग्नोरेंस ऑफ़ फैक्ट कैन स्टिल बी कंसीडर्ड इग्नोरेंस ऑफ़ लॉ। कैन नॉट। देयर इज़ नो एक्सक्यूज़ फॉर
50:48
इग्नोरेंस ऑफ़ लॉ। ठीक है? और इसमें और एक चीज ये हो जाती है। ठीक है? इग्नोरेंस ऑफ़
50:54
फैक्ट इज़ एन एक्सक्यूज। ठीक है? बट लॉ का ऑब्वियसली नहीं चलने वाला है।
51:02
ठीक है? तो बाय एंडलार्ज मैगज़िंस और कांसेप्ट्स ये हैं। अभी हम बढ़ते हैं आगे
51:07
के कांसेप्ट्स की तरफ। अभी इंटरप्रिटेशन ऑफ़ स्टट्यूट्स क्या है? उसको भी एक बार समझ लेते हैं। तो अब जब हम कर रहे हैं
51:14
इंटरप्रिटेशन ऑफ़ स्टट्यूट सबसे पहले इंटरप्रिटेशन क्या है? वह समझना बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर आपको इंटरप्रिटेशन
51:21
नहीं पता तो दिक्कत हो जाएगी। लेजिस्लेचर जब लॉ बनाती है तो स्पेसिफिक इंटेंशन से
51:28
बनाती है। ठीक है? तो वही इंटेंशन को रिकॉग्नाइज करना ये जुडिशरी का काम है।
51:35
ऑलराइट। किसी भी चीज में एक पर्टिकुलर चीज का एक एक्ट का किसी भी चीज का मीनिंग
51:40
इंटरप्रेट किस-किस कॉन्टेक्स्ट में किस-किस वे में होता है, इसको हम इंटरप्रिटेशन कहते हैं। ठीक है? किसी भी
51:46
चीज को इंटरप्रेट करना, एक्सप्लेन करना, ट्रांस ट्रांसलेट करना, एक्सप्लेन ट्रांसलेट करने को इंटरप्रिटेशन कहते हैं।
51:54
अब इंटरप्रिटेशन कब होता है? जब
52:00
लैंग्वेज किसी प्रोविजन का लैंग्वेज ए्बिगस हो। क्लियर नहीं है लॉ किसके लिए बनाया गया था? यह क्लियर नहीं है। कोई एक
52:07
ऐसा प्रोविजन है जिसके दो या दो से ज्यादा मीनिंग हो सकते हैं। ठीक है?
52:12
जहां दो या दो से ज्यादा व्यूज हैं एक ही प्रोविजन के और तुम बोलोगे क्या बेवकूफी की बात है? लॉ तो पर्टिकुलर होता है ना
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ऐसा लॉ पर्टिकुलर होता है मेरे भाई अगर ये सच होता तो केस लॉज़ नहीं होते क्योंकि केस
52:25
लॉज़ है ही इंटरप्रिटेशन पे कि इसको इस वे में अरे छोड़ो यार 226 और 32 का कितना 32
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फिर भी ठीक है 226 का कितना ब्रॉड इंटरप्रिटेशन है आप क्या बात कर रहे हो
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इंटरप्रिटेशन का कोई भी कॉन्टेक्स्ट हो सकता कितने भी हो सकते हैं इसके लिए इंपॉर्टेंट है क्योंकि कॉम्प्लेक्स टास्क
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है लॉ को इंटरप्रेट करना बहुत कॉम्प्ल कॉम्प्लिकेटेड टास्क होता है। हजार मीनिंग उसके लग सकते हैं। और जब तक वो लॉ के साथ
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कॉन्फ्लिक्ट में नहीं है, तब तक वो वैलिड है। तो, इसके लिए ये चीज़ होती है। लेकिन अभी हम यहां प्राइमरी एंड सेकेंडरी रूल्स
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ऑफ़ इंटरप्रिटेशन करेंगे। प्राइमरी रूल में क्या-क्या आता है? रूल ऑफ़ स्ट्रिक्ट इंटरप्रिटेशन, लिबरल इंटरप्रिटेशन, लेटरल
53:04
लेटरल रूल, गोल्डन रूल, मिसिफ रूल ये सब हम करेंगे। हारमोनियस कंस्ट्रक्शन। ठीक है? और सेकेंडरी रूल्स हम करेंगे। सबसे
53:11
पहले तो रूल ऑफ़ स्ट्रिक्ट इंटरप्रिटेशन क्या है? जनरली रूल ऑफ स्ट्रिक्ट ये जो स्ट्रिक्ट
53:17
कंस्ट्रक्शन है इसको इंटर क्रिमिनल लेजिसलेशन को इंटरप्रेट करने के लिए काफी हद तक यूज़ किया जाता है। ठीक है?
53:25
ये बहुत फेवरेबल होता है डिफेंडेंट को मतलब काफी हद तक। लिटरल रूल, लिबरल रूल ये
53:32
लिबरल इंटरप्रिटेशन क्या है? लिटरल रूल का मतलब क्या? जो कोर्ट है, कोर्ट को वही
53:38
कंसीडर करना पड़ेगा। ठीक है? व्हाट द लॉ मेकर्स आर ट्राइंग टू से नॉट व्हाट दे
53:45
माइट मीन जो लिखा है वही वर्ड्स ऑफ स्टट्यूट अगर क्लियर है अन्बिगस
53:52
नहीं है लैंग्वेज प्लेन है मतलब क्या हो गया लिटरल मीनिंग में सिर्फ वर्ड्स को कंसीडर करेंगे लिटरली कंसीडर करेंगे अपना
53:59
दिमाग लगाना अपने इंटरप्रिटेशन लगाना नहीं
54:04
कोई और दूसरे वर्ड्स कोई और उसमें दूसरा एंगल या सोच नहीं ऐड कर सकते कोई मॉडिफिकेशन नहीं कर सकते
54:10
सिंपल सी बात है। ये हो गया लिटरल इंटरप्रिटेशन। ठीक है? बहुत सिंपल सी बात है।
54:18
अब गोल्डन रूल ऑफ़ इंटरप्रिटेशन आता है। भाई साहब गोल्डन रूल ऑफ़ इंटरप्रिटेशन क्या है?
54:25
इसमें वर्ड्स यूज्ड इन अ स्टट्यूट जो रूल है दैट गिव्स द वर्ड्स यूज़्ड इन
54:32
स्टट्यूट देयर ऑर्डिनरी मीनिंग। बट इफ दैट ऑर्डिनरी मीनिंग एंड्स अप गिविंग एन अब्स
54:37
रिजल्ट व्हिच इज नॉट अकॉर्डिंग टू द इंटेंट ऑफ द लेजिस्लेचर तो जज क्या कर सकता है उसको मीनिंग दे सकता है जो
54:43
स्टट्यूट के वे में रैशन हो बहुत सिंपल
54:49
देखो ये कब होता है ये क्यों होता है जब
54:55
स्टट्यूट कैन रेमेडी द वीकनेस दैट इट वाज़ मेड टू क्योर सिंपल दो केसेस पकड़ लो आप
55:04
इफ द वर्ड इज होमोग्राफ समझते हैं अगर शब्द है होमोग्राफ ठीक है दो मीनिंग है
55:10
अगर उसके दो मीनिंग है होमोग्राफ के ठीक है तो जो सूटेबल होगा वो लेंगे उस केस में
55:16
जो सूटेबल होगा उस मैटर में जो सूटेबल होगा उसको कंसीडर करेंगे और अगर उस शब्द
55:21
का एक ही मीनिंग है तो उसको कंप्लीटली डिफरेंट मीनिंग दिया जा सकता है समझा दो
55:28
वर्ड वर्ड के दो मीनिंग है तो जो सूटेबल है वो लेंगे एक ही मीनिंग है तो उसकोलीट ली डिफरेंट मीनिंग दिया जा सकता है। जज कर
55:34
सकता है। वो गोल्डन रूल ऑफ़ इंटरप्रिटेशन है। सिंपल सी बात है। ठीक है।
55:44
यहां पे ग्रे वर्सेस पीएसएन का ले। चलो ठीक है।
55:52
यहां पर अब मैं आपको यहां पर एक मिसिफ रूल करके मिसिफ रूल भी बड़ा जबरदस्त है।
55:58
मिसिफ रूल एक ऐसा प्रिंसिपल है जिसको एक ऑब्वियसली स्टरी इंटरप्रिटेशन में यूज़
56:04
करेंगे व्हिच स्टेट्स व्हाट? कोर्ट शुड फर्स्ट एग्जाम द इंटेंशन ऑफ़ द लेजिस्लेचर।
56:10
जजेस को पहले ये ढूंढना पड़ेगा कि भाई स्टट्यूट में डिफेक्ट क्या और फिर रेमेडी
56:15
उसको फिक्स करने के लिए लगाओ। हेड्स केस है। लैंडमार्क केस था के मिस्ट्री रूल कब
56:22
आएगा? ठीक है? मिस्ट्री रूल के क्या है? ठीक है?
56:27
तो हुआ क्या था? ऑटरी कॉलेज एक रिलीजियस कॉलेज था। उसने तो दे गव टेनेंसी इन अ यू
56:35
नो इन अ मैनर टू अ मैन नेम्ड वेयर एंड हज़ सनंस वॉर एंड हज़ सनंस। सॉरी। सो, दैट अ
56:41
टेनेंसी वाज़ गिवेन इन अकॉर्डेंस विथ द कॉपीहोल्ड। अ कॉपी होल्ड वाज़ फॉर्म ऑफ़ लैंड होल्डिंग इन व्हिच द लैंड वाज़ सेट टू
56:48
बी हेल्ड अकॉर्डिंग टू द विल ऑफ़ द लॉर्ड एंड कस्टम्स ऑफ़ द मैनर। ठीक है? दैट द
56:54
कॉपी होल्ड गिवेन टू द गिवन टू वॉर्स वाज़ पार्ट ऑफ़ पार्सल दैट द पार्सल वाज़ देन लीज़
57:00
टू अ मैन नेम्ड हिडन। लेस देन अ ईयर द कॉलेज वाज़ डिसोल्वड अलोंग
57:05
विद ऑल अदर रिलीजियस कॉलेजेस बिकॉज़ ऑफ़ द लॉ दैट पार्लियामेंट इनक्टेड। द लॉ
57:10
पार्लियामेंट इनेक्टेड हैड अ प्रोविज़ व्हिच केप्ट इनफोर्स द लीज़ दैट वाज़ ग्रांटेड मोर देन अ ईयर बिफोर दमेंट ऑफ़ द
57:18
एक्ट। तो इसमें क्या हुआ? लीज़ ग्रांटेड थी जो वॉर को वाज़ हेल्ड वैलिड बट द लीज़
57:25
ग्रांटेड टू हिडन वाज़ अवॉयडेड। क्योंकि वो एक साल पहले का नहीं था। सिंपल सा बात है।
57:30
ठीक है? तो ये मिसफ रूट है। इतना सिंपल सा है ये।
57:36
अब हारमोनियस कंस्ट्रक्शन अच्छा हारमोनियस कंस्ट्रक्शन की क्या बात है यहां पर
57:43
द रूल इज यूज्ड व्हेन देयर आर टू स्टट्यूट्स आर पार्ट ऑफ अ स्टट्यूट व्हिच हैव अ कॉन्फ्लिक्ट
57:50
तो इंटरप्रिटेशन व्हिच इज़ कंसिस्टेंट किसके साथ सारे प्रोविज़ंस के साथ एंड
57:55
आल्सो इन अकॉर्डेंस विथ द इंटेंट ऑफ़ लेजिस्लेचर उसको अडॉप्ट करते हैं हारमोनियस कंस्ट्रक्शन
58:02
व्हेयर द कंस्ट्रक्शन लीड्स टू दी रिपेंजेंसी सी द रिपेंडेंसी शुड नॉट बी यूज़्ड एंड द
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स्टट्यूट शुड नॉट बी शुड बी रेड एज अ होल। सिंपल है। गोल क्या है? गोल शुड बी टू मेक
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द लॉ होल एंड कंसिस्टेंट। दो या दो से ज्यादा स्टट्यूट्स रहेंगे। वो हार्मोनाइज़ करेंगे। ये रूल्स उसको हार्मोनाइज़ कराते
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हैं। प्रोविज़ ऑफ़ वन स्टट्यूट कैन नॉट डिफिट द यूज़ ऑफ़ अनदर स्टट्यूट। कंस्ट्रक्शन व्हिच रेड्यूसेस वन पार्ट ऑफ़
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द स्टट्यूट टू नथिंग इज़ नॉट कंसीडर्ड एज़ हारमोनियस। सिंपल सा बात है। ठीक है? तो
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यह चीज हो जाती है। पहला कुछ रूल्स है फॉर हारमोनियस कंस्ट्रक्शन।
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पहला कोर्ट शुड अवॉयड अ कॉन्फ्लिक्ट बिटवीन प्रोविज़ंस। प्रोविज़न शुड बी इंटरप्रेटेड टू क्रिएट हार्मोनी। सेकंड
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प्रोविज़ंस ऑफ़ वन सेक्शन कैन नॉट बी यूज़्ड टू डिफेक्ट दी प्रोविज़ंस ऑफ़ अदर सेक्शन।
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इट इज़ इंपॉसिबल टू रिकंसाइल द डिफरेंस बिटवीन द प्रोविज़ंस।
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देन दे शुड बी कंस्ट्रक्टेड इन अ सच अ वे दैट द इफेक्ट इज गिवन टू बोर्ड दी प्रोविज़
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वेरी सिंपल कोर्ट मस्ट कीप इन माइंड दैट इफ द कंस्ट्रक्शन मेक्स द अदर स्टट्यूट
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मीनिंगलेस और डेड देन इट इट इज़ नॉट हार्मोन हार्मोनियस मतलब सबका भला सिंपल
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ठीक है अब बेनिफिशियल कंस्ट्रक्शन क्या है
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कुछ लॉज़ ऐसे होते हैं जो स्पेसिफिकली बेनिफिट के लिए बनाए जाते हैं सर्टेन सेक्शन ऑफ़ सोसाइटी के लिए ही जैसे
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कंज्यूमर प्रोटेक्शन है या सर्टन ग्रुप ऑफ़ पीपल कंज्यूमर प्रोटेक्शन है, इंडस्ट्रियल डिस्प्यूट है, जुनाइल जस्टिस है, फैक्ट्रीज़ एक्ट है। समझ रहे हो? ये सब चीज़
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हो गई। इसी में अगर हम आगे चल तो नसत रिसोर्सेस
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हम डिस्कस कर चुके हैं। क्या होता है? तो वो उसी में लिख देना। नसेल रिसोर्सेज। ठीक है? अब इंटरनल एड्स इंटरनल एड्स वो एड्स
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होते हैं व्हिच आर फर्स्ट रेफर्ड टू फॉर इंटरप्रिटेटिंग अ स्टैट्स। जैसे प्रएमबल
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एक्ट का प्रएमबल टाइटल मतलब पर्पस ऑफ द एक्ट क्या है? हेडिंग चैप्टर की हेडिंग
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मार्जिनल नोट्स जो दिए जाते हैं पंकुएशन इन द प्रोविज़ंस ऑफ द एक्ट इलस्ट्रेशनंस
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डेफिनेशंस ये सब क्या है? ये ये प्राइमरी है। ये इंटरनल एड्स है। और एक्सटर्नल एड
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मतलब क्या हो गया? जब इंटरनल एड सफिशिएंट नहीं है तब एक्सटर्नल मतलब भाई स्टेटमेंट
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ऑब्जेक्ट स्टेटमेंट ऑफ ऑब्जेक्ट क्या है? रीज़ ऑफ बिल क्यों लाए हो यह बिल? स्टेटमेंट क्या है? कमेंट्री क्या है इस
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पर लॉ की? डिक्शनरी पढ़ेंगे। उस एक्ट के इनक्टमेंट में सरकमस्ट्ससेस
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क्या थे? वो देखेंगे। ठीक है? रेफरेंस करेंगे। कमिटीज को
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बोलेंगे रेफर करो, रिपोर्ट्स करो। हिस्ट्री पढ़ेंगे उस एक्ट की उठा के। पॉलिटिकल, सोशल इकोनमिक डेवलपमेंट उसके
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अराउंड क्या होगा? ये सबके बेसिस पे भी इंटरप्रिटेशन होता है। सिंपल है।
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अब इसी में आगे हमारे पास में आ जाते हैं टैक्सिंग स्टट्यूट। अब टैक्सिंग स्टट्यूट्स क्या होते हैं? सिंपल सी बात
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है। कॉनसेप्ट ऑफ टैक्स हैज़ बीन पीथली
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डिस्क्राइब्ड एज अ कंपलसरी एक्सैक्शन ऑफ द मनी फॉर पब्लिक पर्पससेस।
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ठीक है? तो एक्सप्रेशन द एक्सप्रेशन इंटरप्रिटेशन
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कंस्ट्रक्शन आर जनरली अंडरस्टुड सिनोनिमस इवन दो जरिसेंशियली बोथ डिस्टिंक्ट दे आर
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आर डिस्टिंक्ट ठीक है तो सिंपल सी बात है एक अच्छा
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डिस्क्रिप्शन है फ्रॉम द पॉइंट ऑफ़ व्यू ऑफ़ पॉलिटिकल साइंस एंड इकोनमी लेकिन देयर आर बेसिक एस्पेक्ट्स ऑफ़ द प्रोसेस
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तो रूल फॉर इंटरप्रिटेशन ऑफ़ टैक्स लॉज़ आर टू सम एक्सटेंट डिफरेंट देन द जनरल
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प्रिंसिपल ऑफ़ इंटरप्रिटेशन ऑफ़ कॉमन लॉ। ठीक है? ये सारी चीजें इसमें आ जाती है।
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तो हमने इसमें वही लगाना है कंस्ट्रक्शन क्या है? इंटरप्रिटेशन क्या है? ये सारी चीजें आ जाएंगी।
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ठीक है? ज्यादा इसमें दिमाग लगाना नहीं। और मैं एक बात पहले ही क्लियर कर दूं आप लोग को। जो चीज़ आपको ध्यान आती है लिखो।
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जो नहीं आती है मत लिखो। गलत मत लिख के आओ। ठीक है? मैं इतना ही बोलूंगा। कभी भी
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गलत कुछ मत लिख के आना। अटेमप्ट करने की पूरी-पूरी ट्राई करो लेकिन बकवास लिख के
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मत आओ। ठीक है? बहुत इंपॉर्टेंट है ये। ये
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ध्यान रखना। इन चीजों को तो बहुत ज्यादा ध्यान रखना। ठीक है? सो बेसिक बेसिक जो
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इंटरप्रिटेशन ऑफ़ स्टट्यूट्स है वो अपना ये है। अब इसमें लेजिसलेटिव लैंग्वेज,
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लेजिसलेटिव इंटेंट अपन ने करा। मीनिंग क्या होता है? नेसेसिटी क्या है? ये सब चीज़ हमने अभी पढ़ी हुई है ही। ठीक है?
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इंटरप्रिटेशन क्यों किया जाता है? हमने वह भी अच्छे से डिस्कस करा कि इंटरप्रिटेशन क्यों करते हैं? एड्स क्या होती है? हमने
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वह भी करा। लिटरल इंटरप्रिटेशन क्या है? गोल्डन रूल ऑफ इंटरप्रिटेशन क्या है? मिसिफ रूल क्या है? देखो गोल्डन रूल को
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ब्रिटिश रूल भी कहते हैं। ठीक है? किसी वर्ड के नॉर्मल या वर्ड के नॉर्मल मीनिंग
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से डिवाइड करके डिपार्ट करके हम दूसरे मीनिंग में जा सकते हैं। उसका ब्रॉडर इंटरप्रिटेशन करने के लिए वो गोल्डन रूल
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हो गया। और मिसफ रूल का क्या मतलब है? लेजिस्लेटर का इंटेंट पता करना,
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मच और डिफेक्ट दोनों देखना। सिंपल सी बात है। ठीक है? ज्यादा इसमें कुछ है नहीं। जब
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मटेरियल वर्ड्स ठीक है? व्हेन द मटेरियल वर्ड्स आर कैपेबल ऑफ़ बेरिंग टू और मोर कंस्ट्रक्शंस, द मोस्ट फर्मली एस्टैब्लिश
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कंस्ट्रक्शन ऑफ़ सच वर्ड्स। कंसीडर करने हमने बहुत अच्छे से किया है। जज इसको
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अप्लाई कर सकता है जब स्टचटरी इंटरप्रिटेशन की बात हो इन ऑर्डर टू डिस्कवर पार्लियामेंट सेंटेंशन इंटेंशन
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लेजिस्लेचर का इंटेंशन हिडन केस हमने करा ही था। ठीक है?
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बहुत सिंपल है। हारमोनियस कंस्ट्रक्शन क्या है? हमने वो भी कर लिया। अच्छा रीज़नेबल कंस्ट्रक्शन हर स्टट्यूट का एक
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पर्पस होता है। एक ऑब्जेक्टिव होता है। अगर लिटरल मीनिंग कोलाइड करता है रीज़न फॉर एनमेंट्स और स्टट्यूट के। ठीक है? देन द
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इंटेंशन ऑफ़ द लॉ शुड बी टेकन अप। हर चीज में इंटेंशन बहुतेंट है। तो इंटेंशन ऑफ़ द लॉ शुड बी टेकन अप। सो दैट द एक्चुअल
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मीनिंग ऑफ़ द स्टट्यूट कैन बी प्रॉपर्ली अंडरस्टुड। ये रीज़नेबल कंस्ट्रक्शन है।
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वेरी सिंपल। ठीक है? बेनिफिशियल कंस्ट्रक्शन भी हमने अच्छे से किया है। ठीक है? अब एजेस देम
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जेरिस। ये भी मैं आपको एक शॉर्ट में बता देता हूं। मतलब ऑफ द सेम काइंड इन नेचर।
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व्हेन अ लिस्ट ऑफ टू और मोर स्पेसिफिक डिस्क्रिप्टर्स आर फॉललोड बाय मोर जनरल
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डिस्क्रिप्टर्स द अदरवाइज वाइड मीनिंग ऑफ द जनरल डिस्क्रिप्शन मस्ट बी रिस्ट्रिक्टेड टू द सेम क्लास इफ एनी ऑफ़ द
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स्पेसिफिक वर्ड्स दैट प्रिसीड देम सिंपल
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इस रूल में एक स्पेसिफिक वर्ड क्लास या स्पीशीज़ को क्या किया जाता है? मेंशन करना जरूरी होता है ताकि पूरा स्टट्यूड उसके
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अराउंड घूमे। और स्टट्यूड विल बी ओनली मेंट फॉर दी स्पेसिफिक वर्ड्स वेरी सिंपल।
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ठीक है? नसथरोसोर्सेस हम कर चुके हैं। अब इसमें अगर आपको कोई पर्टिकुलर डाउट्स हो,
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क्वेरीज हो तो प्लीज आप लोग कमेंट सेक्शन में वो पूछ सकते हो। गलत मत करके आना।
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नहीं समझ रहा है वापस पूछो। और कमर्सन की वेबसाइट पे हमारा नंबर दिया
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हुआ है। ईमेल आईडी दिया हुआ है। वहां पे रीच आउट कर सकते हो। अगर आप चाहते हो इन पर्सन सेशंस लिए जाए। हम वो भी करने को
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रेडी है। नोट्स चाहिए वो भी देने को रेडी है। ऑब्वियसली अगेंस्ट अ प्राइस अ कंसीडरेशन
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फ्री में नहीं। ठीक है? जाओ पढ़ो। बेस्ट ऑफ लक। ये उनको शेयर करो जिनके फेल होने के
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आसार ज्यादा है या जिनको अभी भी तकलीफ आ रही है का्सप्ट्स को समझने में। हैव अ गुड डे। सब्सक्राइब टू जस लॉजिकल एंड स्टे
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ट्यून।

