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आज हम बात करने वाले हैं लॉ स्टूडेंट्स के
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लिए एक बहुत बड़ी और करियर चेंजिंग न्यूज़
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के बारे में। अगर आप एलएलबी स्टूडेंट हैं,
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फाइनल ईयर में हैं या फिर लॉ ग्रेजुएट
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होकर एआईबीई का वेट कर रहे हैं, तो यह
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वीडियो आपके लिए बहुत ही इंपॉर्टेंट है।
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट
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को बताया है कि अब फाइनल ईयर सेमेस्टर के
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लॉ स्टूडेंट्स एआईबी एग्जाम दे सकेंगे और
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ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन अब साल में दो
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बार कंडक्ट होगा। इस एक डिसीजन से हजारों
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लॉस्ट स्टूडेंट्स का एक पूरा साल बच सकता
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है। इस वीडियो में हम डिटेल में समझेंगे
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एआईबीई क्या होता है? पहले क्या प्रॉब्लम
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थी? सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? बीसीआई का
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नया रूल क्या है? फाइनल ईयर स्टूडेंट्स के
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लिए क्या कंडीशन है? और यह डिसीजन लॉ
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स्टूडेंट्स के फ्यूचर को कैसे इंपैक्ट
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करेगा? तो वीडियो को एंड तक देखना जरूरी
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है क्योंकि हर एक पॉइंट आपके करियर से
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डायरेक्टली कनेक्टेड है। हेलो एवरीवन, दिस
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इज अ शौबे एंड वेलकम बैक टू अनदर एपिसोड
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ऑफ़ जसपी लॉजिकल। वीडियो शुरू करने के पहले
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मैं आपको बताना चाहती हूं कि कमर्सन आपके
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लिए लॉ कोर्सेस लाया है अलग-अलग नीश के
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लिए और लॉ क्यूरेटेड नोट्स लाया है एग्जाम
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स्पेसिफिक। अगर आपको यह नोट्स और लॉ
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कोर्सेस अवेल करने हैं, तो आप हमारी
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वेबसाइट से अवेल कर सकते हैं क्वेरी ड्रॉप
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करके। या आप हमें WhatsApp पर डायरेक्टली
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मैसेज कर सकते हैं। वेबसाइट की लिंक और
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WhatsApp का नंबर डिस्क्रिप्शन में दिया
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है। जाइए जाकर चेक आउट कीजिए। नाउ विदाउट
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एनी फर्दर अडू लेट्स गेट इंटू द वीडियो।
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जानते हैं एआईबीई क्या होता है? सबसे पहले
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यह समझना जरूरी है कि एआईबीई होता क्या
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है? एआईबीई का फुल फॉर्म है ऑल इंडिया बार
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एग्जामिनेशन। यह एग्जाम बार काउंसिल ऑफ
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इंडिया कंडक्ट करता है। अगर आप इंडिया में
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कोर्ट के अंदर एडवोकेट के रूप में
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प्रैक्टिस करना चाहते हैं, तो एआईबीई
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क्लियर करना मैंडेटरी है। इस एग्जाम को
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क्लियर करने के बाद ही आपको सर्टिफिकेट ऑफ
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प्रैक्टिस मिलता है। आप लीगली कोर्ट में
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वकालत कर सकते हैं। सिर्फ एलएलबी डिग्री
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होने से काम कंप्लीट नहीं होता। एलएलबी के
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बाद एआईबीई पास करना लास्ट लीगल
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रिक्वायरमेंट होती है। इसलिए एआईबीई हर लॉ
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स्टड के लिए फाइनल गेटवे है एकेडमिक्स से
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प्रोफेशन तक। अब जानते हैं पहले प्रॉब्लम
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क्या थी। अब समझते हैं कि इशू कहां था?
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पहले रूल ये था कि सिर्फ वही स्टूडेंट्स
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एआईबी दे सकते हैं जिनकी एलएलबी डिग्री
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कंप्लीट हो चुकी हो। इसका मतलब क्या है?
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अगर आप फाइनल सेमेस्टर में हो, एग्जाम्स
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दे चुके हो, रिजल्ट्स आना बाकी हो, तो आप
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एआईबीई के लिए एलिजिबल नहीं होते थे। और
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अगर यूनिवर्सिटी का रिजल्ट लेट आया या एक
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सेमेस्टर का डिले हो गया तो आपको पूरा एक
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साल वेट करना पड़ता था नेक्स्ट एआईबीई के
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लिए। इस वजह से स्टूडेंट्स का करियर डिले
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होता था। कोर्ट प्रैक्टिस लेट स्टार्ट
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होती थी। एकेडमिक ईयर वेस्ट हो जाता था।
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इसी प्रॉब्लम को लेकर स्टूडेंट्स ने
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सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
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अब सुप्रीम कोर्ट का इंटरवेंशन इसके बारे
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में बात करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस
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इशू को बहुत सीरियसली लिया। कोर्ट ने
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ऑब्जर्व किया कि फाइनल ईयर स्टूडेंट्स का
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एक साल वेस्ट होना अनफेयर है। सिर्फ
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रिजल्ट्स डिले की वजह से करियर रोकना गलत
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है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा बार काउंसिल ऑफ
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इंडिया को ऐसे रूल्स बनाने चाहिए जिससे
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फाइनल सेमेस्टर के स्टूडेंट्स को
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अननेसेसरी डिले का सामना ना करना पड़े।
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कोर्ट ने बीसीआई को डायरेक्शन दी कि रूल्स
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फ्रेम करो। फाइनल ईयर स्टूडेंट्स को एआईबी
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का मौका दो। सिस्टम को स्टूडेंट फ्रेंडली
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बनाओ। इसके बाद बीसीआई ने रूल्स
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ड्राफ्टिंग प्रोसेस शुरू किया और फाइनली
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बीसीआई रूल्स 2026 के थ्रू सुप्रीम कोर्ट
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को इन्फॉर्म किया। अब जानते हैं बीसीआई का
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फाइनल डिसीजन क्या है? अब आते हैं सबसे
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इंपॉर्टेंट पार्ट पर। बीसीआई ने सुप्रीम
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कोर्ट को ऑफिशियली बताया है पहला बड़ा
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डिसीजन। फाइनल सेमेस्टर एलएलबी स्टूडेंट्स
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अब एआईबीई एग्जाम दे सकेंगे। इसका मतलब
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डिग्री मिलना, वेट करना जरूरी नहीं। फाइनल
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सेमेस्टर कंप्लीट कर चुके स्टूडेंट्स
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एलिजिबल होंगे। दूसरा बड़ा डिसीजन एआईबीई
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अब साल में दो बार कंडक्ट होगा। पहले
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सिर्फ एक बार होता था। अब दो बार मतलब दो
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चांसेस हर साल ये दोनों डिसीजंस मिलकर लॉ
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स्टूडेंट्स के लिए गेम चेंजर है। अब फाइनल
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सेमेस्टर स्टूडेंट्स के लिए क्या कंडीशन
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है? अब यहां एक इंपॉर्टेंट क्लेरिफिकेशन
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समझना जरूरी है। फाइनल सेमेस्टर
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स्टूडेंट्स का मतलब सिर्फ कॉलेज में पढ़ना
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नहीं। कंडीशन यह है अपने फाइनल सेमेस्टर
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के एग्जाम्स सक्सेसफुली क्लियर कर लिया
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होना चाहिए। अगर बैकलग पेंडिंग है, एग्जाम
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क्लियर नहीं हुआ, डिग्री रिक्वायरमेंट्स
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इनकंप्लीट है, तो एआईबीई का बेनिफिट नहीं
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मिलेगा। सिंपल लैंग्वेज में एकेडमिक
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एलिजिबिलिटी कंप्लीट होनी चाहिए। रिजल्ट
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अवेटेड हो सकता है फेल नहीं। अब जानते हैं
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एआईबीई साल में दो बार होने का क्या फायदा
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है। अब समझिए कि ट्वाइस अ ईयर एआईबीई
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स्टूडेंट्स के लिए क्यों इंपॉर्टेंट है।
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इससे एक अटेम्प्ट फेल होने पर 6 से 12
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महीने वेट नहीं करना पड़ेगा। स्टूडेंट्स
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जल्दी रीिअटेंट कर सकेंगे। स्ट्रेस और
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प्रेशर कम होगा और करियर प्लानिंग बेटर
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होगी। पहले एक फेलियर पूरा साल डिले कर
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देता था। अब दो चांसेस एक ही साल में। यह
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सिस्टम कंपिटिटिव एग्जाम्स जैसे ज्यादा
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प्रैक्टिकल और फेयर बनाता है। अब जानते
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हैं इस डिसीजन का इंपैक्ट। इस डिसीजन का
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इंपैक्ट बहुत बड़ा है। लॉ ग्रेजुएट्स
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जल्दी प्रैक्टिस स्टार्ट कर पाएंगे। कोर्ट
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में यंग एडवोकेट्स का एंट्री फास्ट होगा।
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लीगल प्रोफेशन ज्यादा एक्सेसिबल बनेगा।
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स्टूडेंट्स का टाइम और मेहनत दोनों बचेगा।
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यह एक स्टूडेंट सेंट्रिक रिफॉर्म है जो
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इंडियन लीगल एजुकेशन सिस्टम को मॉडर्न और
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एफिशिएंट बनाता है। अब इसके टेक अवेज़ को
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जानते हैं। कंक्लूजन बिल्कुल क्लियर है।
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बीसीएआई का यह डिसीजन लॉ स्टूडेंट्स के
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लिए एक बड़ी रिलीफ है। फाइनल सेमेस्टर
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स्टूडेंट्स को अब वेट नहीं करना पड़ेगा।
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एआईबीई दो बार होने से फेलियर का डर कम
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होगा। सुप्रीम कोर्ट का इंटरवेंशन
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स्टूडेंट्स के फेवर में रहा। अगर आप लॉ
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स्टूडेंट हैं तो प्रिपरेशन अभी से शुरू
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कीजिए। फाइनल सेमेस्टर को लाइटली मत
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लीजिए। अगर आपको यह वीडियो पसंद आए और आप
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एंड मिलते हैं नेक्स्ट वीडियो में। अनंटिल
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