Union Territory - Related Articles, Constitutional Provisions, Associated Concerns संघ राज्य क्षेत्र
Nov 12, 2024
India is a Union of states and the Part I of the Indian Constitution deals with Union and its territory. Articles 1- 4 in Part I includes laws related to union of states and laws related to the establishment of the union. It also deals with laws to create, rename and alter borders of states within the union of India. A recent example of this can be seen in the creation of Jammu & Kashmir and Ladakh which involved changing their status within the Union of India.
Recent Update on Union And Its Territories
In 2019, the Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu (Union Territories Merger) Bill, 2019 was tabled in Lok Sabha.
The Bill calls for the Union Territories (UTs) of Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu to be merged into a single UT. The Bill modifies the First Schedule to incorporate the areas of two UTs:
1. Dadra and Nagar Haveli and
2. Daman and Diu.
The combined area would be known as Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu. This will take effect on the date specified by the central government.
About the Union and its Territory [ #UnionTerritory ]
The concept of the #Union and its #Territory refers to the political and geographical boundaries of a sovereign nation. In the context of India, it signifies the territorial extent and administrative divisions of the country. Here is an explanation of the Union and its Territory in simple terms:
The Union refers to the entire country of India as a unified entity. It represents the collective identity and sovereignty of the nation. The Union is responsible for the governance and administration of the country as a whole. The President of India is the head of the Union and exercises executive powers on behalf of the Union government.
The territory of India encompasses the geographical area over which the Union exercises its authority and jurisdiction. It includes the states, union territories, and any other areas that may be acquired or merged with the country. The territory of India is divided into states and union territories for administrative purposes.
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बो
0:38
नमस्कार मैं प्रवीण कुमार परीक्षा जंक्शन पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत करता हूं
0:43
आज हम लोगों का टॉपिक होगा संघ एवं इसके राज्य क्षेत्र यूनियन एंड इट्स टेरिटरी
0:49
इसे शुरू करने से पहले हम लोग कुछ चीज जान लेते हैं यहां पर आप लोगों के लिए जैसे एसएससी
0:59
जिसमें एमटीएस सीएचएसएल सीजीएल जीडी सीपीओ बैंकिंग रेलवे पुलिस इन सारे कंपटीशन की
1:07
तैयारी कराई जाएगी ठीक है और यह सारा का सारा निशुल्क होगा फ्री होगा इस कारण और
1:13
यहां पर जितने भी टीचर जुड़े हुए हैं सभी वेल एक्सपीरियंस टीचर है और आप लोग जुड़िए
1:20
और यहां पर आप हम लोगों से जुड़ सकते हैं और इसका लाभ ले सकते हैं
1:26
और यह जितने भी यहां पर चीजें पढ़ाई जाएगी व सारा का सारा टेलीग्राम पर आपको उपलब्ध
1:31
रहेगा आप जाकर वहां पर देख सकते हैं अब चलते हैं आज के टॉपिक
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पर आज का टॉपिक है यूनियन एंड इट्स
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टेरिटरी यूनियन
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एंड इट्स टेरिटरी
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संघ एवं इसके राज्य क्षेत्र
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एवं इसके राज्य
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क्षेत्र यह पॉलिटी की क्लास है और पॉलिटी की क्लास में हम लोग आज पढ़ेंगे संघ एवं
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इसके राज्य क्षेत्र यह भाग एक में आता है
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और इसे हम आर्टिकल एक से चार तक पढ़ते हैं आर्टिकल न टू फर तक पढ़ते हैं अब आगे
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बढ़ते
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हैं आर्टिकल वन क्या कहता है इंडिया ट इज
2:52
भारत इंडिया ट इज भारत
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भारत शल बी यूनियन ऑफ
3:11
स्टेट यूनियन ऑफ
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स्टेट आर्टिकल वन क्या कहता है
3:23
इंडिया ट इज भारत शल बी यूनियन ऑफ स्टेट
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भारत इंडिया जो कि भारत है राज्यों का संघ होगा क्या होगा राज्यों का संघ होगा इससे
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दो बातें उभर के आती है एक यहां का
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नाम इससे उभर के आता है
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नेम और दूसरा यहां का सिस्टर
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सिस्टम इससे दो बातें उभर के आती है क्या इंडिया दैट इज भारत इससे यह पता चलता
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है यहां पर ए छोड़ गया था इंडिया दैट इज भारत शल भी यूनियन ऑफ स्टेट
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यहां पर इंडिया दैट इज भारत इससे शो होता है कि यहां का नाम क्या है यहां का नाम है
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इंडिया जब संविधान सभा का गठन हुआ जब संविधान निर्माण की प्रक्रिया चली तो यहां
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के नाम पर चला कि आखिर यहां का नाम क्या रखा जाए तो कुछ लोग भारत पर सहमत थे और
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कुछ लोग इंडिया पर सहमत थे अर्थात एक एक नाम पर पूर्ण सहमति नहीं थी जैसे की
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इंडिया के साउथ के जो लोग थे वो इंडिया से सहमत थे और नॉर्थ के लोग भारत से सहमत थे
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तो संविधान सभा ने क्या किया कि दोनों नामों को एक्सेप्ट कर लिया इस कारण यहां
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पर लिखा गया कि इंडिया ट इज भारत ठीक और दूसरा है यूनियन ऑफ स्टेट राज्यों का संघ
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होगा इससे पता चलता है कि हमारे यहां की राज पद्धति क्या है हमारे यहां की राज
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पद्धति क्या है और इस संदर्भ
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में बी आर अंबेडकर का कहना है कि भारत में जो राज्यों का निर्माण हुआ है तो यह किसी
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समझौते का परिणाम नहीं है अर्थात हमारे यहां विनाशी राज्यों
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का विनाशी राज्यों
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का अविनाशी संघ
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अविनाशी संघ की बात की गई
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है अर्थात हमारे यहां जो संघ है वह ज्यादा मजबूत है अविनाशी है ठीक और जबकि अमेरिका
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में संघीय राज्य की परिकल्पना की गई है और वहां पर है कि अविनाशी राज्यों का अविनाशी
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संघ अविनाशी राज्यों
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का अविनाशी राज्य का अविनाशी
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संघ अर्थात जो अमेरिका में संघ का जो निर्माण हुआ है वह एक एग्रीमेंट के तहत
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हुआ है और पैक्ट के तहत हुआ है लेकिन भारत में जो संघ का निर्माण हुआ है वह किसी
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पैक्ट के तहत नहीं हुआ है तो यहां पर विनाशी राज्यों को अर्थात हम एक राज्य को
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तोड़कर दो राज्य बना सकते हैं जबकि अमेरिका में हम ऐसा नहीं कर सकते हैं ठीक है तो इसी कारण भारत में कहा गया है कि
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विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ और अविनाशी और अमेरिका के बारे में यूएसए के बारे में
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कहा गया है कि वहां संघीय राज की परिकल्पना की गई है हमारे यहां राज्यों का
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संघ है और वहां पर संघीय राज की परिकल्पना की गई है और वहां वहां के बारे में कहा
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गया है कि अविनाशी राज्यों का अविनाशी
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संघ अब आगे बढ़ते हैं कि आर्टिकल टू में में क्या
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है आर्टिकल टू में संघ एवं इट्स टेरिटरी
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के तहत यह देखा गया है कि इसमें तीन चीजें शामिल है सबसे
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पहला राज्य
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क्षेत्र दूसरा ये आर्टिकल
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यह चर्चा राज्यों का संघ
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में राज्यों के संघ में के संघ में क्या-क्या शामिल है इसमें
8:22
देखते हैं राज्य
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क्षेत्र द दरा संघ राज्य
8:33
क्षेत्र संघ राज्य क्षेत्र
8:39
तीसरा वैसे क्षेत्र वैसे
8:48
क्षेत्र जिनका
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सरकार अधिग्रहण करने वाली हो
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अधिग्रहण करने वाली
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हो पहला जो है यह शक्ति के विभाजन
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में यहां पर बराबर का हकदार है संघ राज्य क्षेत्र सीधे केंद्र के अधीन
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आता है दूसरा ऐसा क्षेत्र जिसे केंद्र सरकार अभी अधिग्रहण करने वाली हो जिसे
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अपने में शामिल ने वाली हो वैसे क्षेत्रों पर भी केंद्र का अधिपत्य केंद्र वहां भी
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रूल करती है यहां पर राज्य रूल करती है यह अधिकार संविधान से दिया गया है यहां पर
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केंद्र केंद्र राज्य करती है यहां पर भी केंद्र राज्य करती है अब आते हैं आर्टिकल
9:46
टू के तहत आर्टिकल
9:54
ट आर्टिकल टू में चर्चा की गई है वैसे राज
10:00
जिनका नए
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राज्यों का अधिग्रहण
10:13
या
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स्थापना इसका मतलब यह हुआ वैसे राज्य या वैसे क्षेत्र जो अभी भारत सरकार
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या संघ राज संघ राज क्षेत्र के अधीन नहीं आता हो या भारत सरकार के बाहर की बात हो
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और उन्हें अपने में शामिल करना अर्थात संघ राज क्षेत्र का बाहर का हो उसे अब संगरा
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क्षेत्र में शामिल करना हो जैसे
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सिक्किम यह क्या था पहले य स्वतंत्र राज्य था स्वतंत्र राज्य
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था और आजादी के पश्चात भारत सरकार का इसके
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साथ विदेश के संदर्भ में रक्षा के संदर्भ में और संचार के
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संदर्भ में समझौता हुआ अर्थात तीन संदर्भ में की भारत सरकार इन मामलो पर इसे मदद
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करेगी और सिक्किम के जो राजा थे वह चोग्याल
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थे और चोग्याल का कहना था इनके बारे में एक कहानी है
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कि इनका किसी विदेशी महिला से अफेयर था और यह चाहते थे और इन लोग का झुकाव चाइना की
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तरफ ज्यादा हुआ करता था जबकि वहां की जनता का झुकाव भारत की तरफ था अब जब इन पर दबाव
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बना कि इन्ह चाइना में शामिल होना चाहते हैं या भारत में शामिल होना चाहते हैं
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क्योंकि इनका झुका चाइना की तरफ ज्यादा था अब जनता के सामने विकल्प था कि चाइना के
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नेतृत्व में जाकर वहां पर अपनी स्वतंत्रता को बाधित करता है या भारत के लोकतंत्र में शामिल होकर अपनी
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स्वतंत्रता को और बढ़ाता है तो उनकी जनता की जो आकांक्षा थी वह भारत के सपोर्ट में
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थी अर्थात वह अपना लोकतांत्रिक विकास चाहते थे तो वहां की सिक्किम की जनता के
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दबाव में आकर अंतत इसे झुकना पड़ा और जनता की आकांक्षा के अनुरूप यह भारत में मिल
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गए भारत में मिल गए
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और इसे एक नए राज्य का दर्जा दिया गया तो आर्टिकल थ के तहत है कि वैसे राज्य जो
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भारत में शामिल नहीं है उसे और नए राज्यों की स्थापना करना वहां पर इसका प्रावधान
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किया गया है ठीक आगे बढ़ते
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हैं अब आते हैं आर्टिकल थ के
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तह आर्टिकल थ जो है वह नए राज्यों की स्थापना के संदर्भ में है
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नए राज्यों
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की स्थापना के संदर्भ में
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है अर्थात भारत सरकार नए राज्यों की स्थापना
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करती है इसके लिए दो राज्यों के क्षेत्रों को मिलाकर यह दो राज्य है उनके दो
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क्षेत्रों को मिलाकर एक नए राज्य का निर्माण कर सकती है
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नए राज्यों का निर्माण
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या इसे दो भाग में बांटकर दो राज्यों का निर्माण कर सकती
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है निर्माण राज्यों के सीमा में परिवर्तन कर
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सकती है सीमाओं में परिवर्तन
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नाम में
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परिवर्तन चूंकि यह नए राज्यों की स्थापना जो होगी तो भारत संघ में जो पहले से ही
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शामिल है उनके संदर्भ में और आर्टिकल टू के तहत था जो भारत संघ में शामिल नहीं है और जो शामिल होना चाहता है तो यह नए
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राज्यों का निर्माण कर सकता है अर्थात दो राज्यों के सीमाओं में परिवर्तन करके वहां से दो राज्यों के कुछ कुछ क्षेत्रों को
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तोड़कर एक तीसरा राज्य बना देना या किसी राज्य को दो भागों में तोड़ देना जैसे
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झारखंड का निर्माण हुआ कि बिहार के एक क्षेत्र को तोड़ के वहां पर झारखंड का निर्माण हुआ या उत्तराखंड का निर्माण हुआ
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या छत्तीसगढ़ का निर्माण हुआ दो राज्यों का निर्माण अब सीमा में भी परिवर्तन कर
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सकती है नाम में परिवर्तन कर सकती है ठीक है अब है कि इसका प्रोसेस क्या है तो इसका
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प्रो प्र है कि इस संदर्भ में जो कोई भी कानून
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बनेगा तो सबसे पहले उस पर राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक है राष्ट्रपति
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की सहमति
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आवश्यक सर्वप्रथम विधेयक राष्ट्रपति के समक्ष पेश किया जाएगा राष्ट्रपति उसको
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क्या करेंगे तो जिन राज्यों को जिन राज से नए राज्य का निर्माण करना है उन राज्यों
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की सहमति के लिए भेज देंगे उन राज्यों
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की सहमति के लिए भेज
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देंगे भेज देंगे जिन राज्यों से निर्माण किया जाना है जिन राज्यों
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से निर्माण
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किया जाना
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है प्रियंका कुमारी नमस्ते नमस्ते अनुभवी नमस्कार
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नमस्कार नमस्कार धन्यवाद और जिन राज्यों उन राज्य जिन
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राज्यों को विभाजन करके उन राज्यों की सहमति के लिए भेजा विधेयक को वहां भेजता
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भेज दिया जाता है जिन राज्यों का जिन राज्यों से एक नए राज्य का निर्माण किया जाना है और एक लिमिट एक सीमित समय सीमा के
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तहत उन राज्यों पर अपनी सहमति या असहमति व्यक्त किया जाता है और उस सहमति या
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असहमति से राष्ट्रपति हमारी संसद को कोई लेना देना नहीं है ठीक है तो सिर्फ उनका
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मंतव्य जाना जाता है फिर उसके पश्चात संसद में उसे पेश किया जाता
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है और संसद की मोहर लगने के साथ ही अर्थात साधन विधेयक के माध्यम से ही मोहर लगने के
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साथ ही नए राज्यों का निर्माण हो जाता है ठीक नए राज्यों का निर्माण का प्रक्रिया
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क्या है कि सर्वप्रथम जो विधेयक है वह संसद में सर्वप्रथम नहीं भेज जाता उस पर
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सर्वप्रथम राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक है राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है
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राष्ट्रपति उस विधेयक को राज्य की सहमति के लिए भेज देते हैं अर्थात उस पर राज्य
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की राय लेना कि राज्य क्या चाहता है हालांकि राज्य इस पर सहमत हो या असहमत हो
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इससे राष्ट्रपति जी को या हमारे संसद को उससे कोई लेना देना अंततः संसद का जो मत है वह व्यता रखता है और राज्यों की सहमति
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या असहमति के पश्चात उसे संसद में प्रस्तुत किया जाता है और संसद से पास होते होने के साथ उसम मोहर लग जाती है
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अर्थात नए राज्यों का निर्माण हो जाता है नए राज्यों
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का का निर्माण हो जाता है
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ठीक अब आगे बढ़ते
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हैं आर्टिकल फोर में
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है कि आर्टिकल टू या आर्टिकल थ की जो कोई भी बात होगी
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ठीक है आर्टिकल टू और आर्टिकल थ्री की जो कोई भी बात होगी वह साधन विधेयक के माध्यम
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से
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होगा इसके लिए विशेष संविधान संशोधन करने की जरूरत या
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आवश्यकता नहीं है इसके साथ ही अगर मान लेते हैं कि कोई सीमाई राज्य है जैसे
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बांग्लादेश के साथ हमारे जमीनों की अदला बदली हुई थी तो इसके भी हम यह काम भी
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कार्यपालिका के द्वारा या साधन विधेयक के द्वारा किया जा सकता है और इसके लिए भी
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हमें संविधान संशोधन की आवश्यकता नहीं है और हां ब सर्त कि हम अपना जमीन किसी और को
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ना सौंप रहे हो अदला बदली कर सकते हैं विवाद का समाधान कर सकते हैं एक पक्ष
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सिर्फ हम अपना जमीन ना दे ठीक अब आगे बढ़ते हैं
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केंद्र शासित
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प्रदेश प्रदेश एवं राज्यों का
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उद्भव एवं राज्यों
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का उद्भव तो आजादी के बाद देखते हैं कि जब एकीकरण
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की प्रक्रिया चल रही थी तो उस उस वक्त दो टाइप के क्षेत्र थे एक ब्रिटिश
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प्रोविंस ब्रिटिश
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प्रोविंस यहां पर सीधे अंग्रेज शासन करते थे
20:30
यहां पर सीधे अंग्रेज शासन करते थे और
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दूसरा देसी रियासत देसी रियासत में क्या था कि
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ब्रिटिश प्रमो चता ब्रिटिश परमो चता के
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अधीन के अधीन राजा शासन करता
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था राजा शासन करता था अर्थात सुप्रीम बॉस जो होते थे वह
21:10
अंग्रेज होते थे और उनके अधीन राजा शासन करता था तो आजादी के बाद जब एकीकरण की
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प्रक्रिया शुरू हुई उस वक्त हमारे यहां 500 62 के अप्रॉक्स में रियासतें थी
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जिनका एकीकरण किया जाना था तो सरदार सरदार वल्लभ भाई के पटेल के नेतृत्व में एकएक
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करके सारे रियासतों का एकीकरण कर लिया गया जितने भी रियासतें थी सबका एकीकरण कर लिया
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गया सिवाय हैदराबाद
21:45
हैदराबाद जूनागढ़ और
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कश्मीर अब हैदराबाद
21:59
से जब भारत सरकार की बात चल रही थी तो यह हैदराबाद इसका झुकाव पाकिस्तान हैदराबाद
22:04
के निजाम का झुकाव पाकिस्तान की तरफ था और यह अपने को एक तरफ से प्रयास कर रहा था कि हम अपने को स्वतंत्र रखें जब भारत सरकार
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का दबाव बड़ तो हैदराबाद के निजाम जो उनके सेना थी उनको रजाकार कहा जाता था तो
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रजाकार ने वहां के वहां की जो जनता थी और वहां की जनता चाहती थी कि हम लोकतंत्र के
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तहत आए अधीन आए और हम भारत में शामिल हो तो यहां की 80 प्र जो जनता थी वो हिंदू थी
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यहां के नवाब जो थे वो मुस्लिम थे और यहां के लोगों ने इनके खिलाफ विद्रोह कर दिया
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तो उस विद्रोह को दबाने के लिए उन्होंने क्या किया जो रजाकार थे अर्थात इनकी जो मिलिशिया थी इनकी जो आर्मी थी उसके माध्यम
22:45
से उस पर अत्याचार शुरू किए तो त तत्पश्चात भारत सरकार ने यहां पर
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हस्तक्षेप किया हस्तक्षेप के तहत पुलिस कार्रवाई के माध्यम से पहले नवाब को पकड़ा
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गया और नवाब को पकड़ने के पश्चात पुलिस कारवाई के माध्यम से इसे भारत में इसका
23:01
एकीकरण किया गया दूसरा जूनागढ़ जूनागढ़ में भी सेम स्थिति थी तो यहां पर क्या हुआ
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कि यहां की भी जनता चाहती थी कि हम भारत में शामिल हो और इनका जूनागढ़ जो गुजरात
23:17
का एक पार्ट होता था तो और यहां के नवाब का झुकाव पाकिस्तान की तरफ था जब यहां पर
23:22
पुलिस कारवाई की गई जब यहां पर आर्मी भेजी गई तो यहां का जो नवाब था वो प्लेन से भाग
23:29
गया पाकिस्तान चूंकि यहां के हैदराबाद ने विलय पत्र पर साइन कर दिया पुलिस कारवाई
23:34
में चूंकि यहां के नवाब चले गए पाकिस्तान तो आखिर ऑथराइज होकर हम अथॉरिटी किससे ले
23:42
तो हमने यहां पर जनमत संग्रह करवा और जनमत संग्रह के पश्चात जूनागढ़ भारत में मिल
23:47
गया अब आते हैं कश्मीर में कश्मीर का भी प्रयास था कि हम भारत और
23:55
पाकिस्तान से स्वतंत्र रहे और भारत एवं पाकिस्तान से स्वतंत्र हैं और
24:01
इसी की आर में पाकिस्तान ने क्या किया वहां के कलियों जो वहां के आर्मी थी कलियों के वेश में कश्मीर पर अटैक जम्मू
24:09
कश्मीर पर अटैक कर दिया अटैक कर दिया तो यहां के राजा त्रा इमाम संदेश भेजे और
24:14
वहां की जनता भी कलियों के अटैक के कारण पाकिस्तान के विरोध में चली गई तो राजा ने
24:21
भारत के साथ विलय पर पर विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया इस माध्यम से कश्मीर का
24:26
भी भारत में विलय हो गया देखते हैं क्या कि जो तीन तीन रियासतें थी हैदराबाद
24:31
जूनागढ़ और कश्मीर एकएक करके क्या हुआ इनका भारत स भारत के साथ इनका एकीकरण हो गया अब इतना
24:41
होने के पश्चात अभी तो तक तो था कि हमने रियासतों का एकीकरण कर लिया लेकिन यह सभी
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सुव्यवस्थित नहीं था क्या था यह सुव्यवस्थित नहीं था एक सरकार को चलाने के
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लिए एक सुव्यवस्थित राज्य चाहिए तो सुव्यवस्थित करने के लिए कि अब था विशेषक साउथ से भाषा के आधार पर
25:03
राज्यों का डिमांड शुरू हुआ भाषा के आधार पर जब राज्यों का निमान शुरू हुआ तो
25:09
सर्वप्रथम
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सरकार ने जो इलाहाबाद के हाई कोर्ट के जज
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रिटायर्ड अवकाश प्राप्त जज थे न्यायाधीश थे एस के दर
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एस के धर के नेतृत्व में चार
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सदस्य एक कमेटी का निर्माण किया कि जो देखेगी कि राज्यों का निर्माण कैसे किया
25:41
जाए क्या इसमें भाषा को आधार बनाया जाए क्या भाषा को आधार बनाया
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जाए भाषा को
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आधार बनाया जाए
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तो एसके दर ने इन बातों को भाषा को आधार बनाया जाए तो इन बातों को एसके दर की जो
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कमेटी बनी थी उन्होंने रिजेक्ट कर दिया रिजेक्ट कर दिया रिजेक्ट कर दिया
26:14
रिजेक्ट करने के पश्चात जो भाषा के आधार पर राज्यों का डिमांड कर रहे थे कि भाषा के आधार पर हमें राज्यों का हमें राज्य का
26:22
निर्माण किया जाए उन लोगों ने क्या किया अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया इसके पश्चात इस सरकार ने कमेटी बनाई थी अब
26:29
कांग्रेस ने कमेटी बनाई
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जेवीपी जवाहरलाल नेहरू वल्लभ भाई पटेल और पट्टा भी सितार
26:43
मैया तो इन्होंने भी इसका अध्ययन किया कि क्या भाषा के आधार पर राज्यों का निर्माण
26:49
किया जाए कांग्रेस ने भी इन्होंने भी भाषाई प्रांत आयोग का गठन किया था यहां भी भाषाई प्रांत आयोग का गठन हुआ सर्वप्रथम
26:56
यहां पर संविधान सभा के जो अध्यक्ष थे राज डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने उन्होंने एसके
27:01
धर के नेतृत्व में बनाया यहां पर कांग्रेस ने जेबीबी कमेटी का गठन किया इन्होंने भी
27:07
भाषा के आधार पर राज्यों के गठन का विरोध किया अर्थात इन्होंने भी रिजेक्ट कर
27:15
दिया जब इन्होंने रिजेक्ट किया तो मद्रास राज्य में
27:20
पटी रामलू के नेतृत्व में आमर अंस था क्या कि हमें एक अलग राज्य मिलना चाहिए तो
27:27
उन्होंने 56 के लगातार अंसन के बाद
27:36
प को श्री
27:44
रामलो इनकी मृत्यु हो जाती है और इनकी मृत्यु के पश्चात क्या होता है
27:52
कि इनकी मृत्यु के पश्चात विरोध की जो भावना थी और भर जाती
27:58
है इस विरोध की भावना को रोकने के लिए
28:06
अक्टूबर 1953 में आंध्र प्रदेश का गठन कर दिया जाता
28:18
है अक्टूबर 1953 में आंध्र प्रदेश का गठन कर दिया जाता है अब हम इस पर विचार करें
28:25
कि क्या भाषा के आधार पर राज्यों का गठन किया जाना चाहिए अब अगर देखते हैं कि भाषा
28:32
के अगर सिर्फ भाषा को आधार बनाया जाए तो भारत में हजारों भाषा चलती है तो ऐसे में
28:38
सभी अपना हित पूरा करने के लिए इंटरेस्ट फुलफिल करने के लिए क्या करेगा बाकी ठीक है भाषा के आधार पर राज्य जब बनता है तो
28:45
हमें एक अलग राज्य दे दिया जाना चाहिए जैसे नॉर्थ ईस्ट में चलते हैं तो वहां पर जितने भी ट्राइब्स हैं उनका जैसे अलग-अलग
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पहाड़ पर अलग-अलग भाषा चलती है ठीक है तो अगर भाषा तो ना जाने कितने राज्य बन
28:57
जाएंगे तो सिर्फ अ भाषा के आधार परत राज्यों का निर्माण नहीं होना चाहिए यहां
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पर देखते हैं कि आं जोपट सराम श्री रामुलू की जो मृत्यु होती है तो वहां पर दबाब में
29:09
केंद्र सरकार ने क्या किया कि आंध्र प्रदेश का गठन कर दिया और गठन ज्य ही
29:15
आंध्रा का गठन होता है त्यों ही बहुत सारे राज्य भाषा के आधार पर कहते हैं कि हमें
29:22
भी अलग राज्य का दर्जा मिले हमें भी अलग राज्य बनाया जाना अर्थात नए राज्यों का डिमांड बढ़ जाता है
29:30
तो इन चीजों की समीक्षा के लिए कि आखिर नए राज्यों का निमा निर्माण कैसे किया जाए तो
29:36
1953 में फजल
29:45
अली फजल अली आयोग
29:52
बना इसके जो सदस्य थे वो थे
30:00
हृदय नाथ कुंजर और
30:06
के एम
30:14
पनिक तो 1953 में कि क्या राज्यों के निर्माण का बेस क्या होना चाहिए सिर्फ
30:20
भाषा को आधार बनाया जाए बनाया जाए या इसमें और भी चीजें शामिल की जाए तो इसके
30:26
लिए फजल अली आयोग का गठन कि गया और इसमें दो सदस्य और हृदयनाथ कुंजर और के एम पनिक
30:33
तो इन्होंने 1955 में अपना रिपोर्ट प्रस्तुत
30:39
किया रिपोर्ट सौंप
30:44
दिया और इस इन्होंने अपने रिपोर्ट में बोला कि नए राज्यों के निर्माण में भाषा
30:51
एक आधार हो सकता है नए राज्यों के निर्माण में जब हम कई उसमें डायमेंशन रखेंगे तो
30:56
उसमें एक डायमेंशन भाषा लैंग्वेज हो सकता है लेकिन सिर्फ भाषा के आधार पर नए
31:01
राज्यों का निर्माण नहीं होना चाहिए इन्होंने भाषा को एक आधार
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माना भाषा को एक आधार
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माना परंतु मुख्य आधार नहीं
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माना मुख्य आधार नहीं
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माना आखिर जो फजल अली आयोग था तो उनके नजरिए में नए राज्यों का जो निर्माण होगा
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उनमें हम किन किन बातों का ध्यान रखेंगे जिससे नए राज्य नए राज्यों के निर्माण का आधार बने तो उसमें उन्होंने सर्वप्रथम
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बताया कि देश की एकता एवं
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अखंडता देश की एकता
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एवं
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अखंडता दूसरा
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आर्थिक वित्तीय एवं प्रशासनिक
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कारण तीसरा और चौथा
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भाषा एवं संस्कृति की
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एकरूपता की एकरूपता चौथा योजनाओं
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का बहतर क्रियान्वयन बेहतर
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न वियान अब इसमें देखते हैं कि जब नए राज्यों का निर्माण होगा तो उसमें
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सर्वप्रथम हम ध्यान रखेंगे कि देश की एकता एवं अखंडता इससे बाधित तो नहीं हो रही है
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सर्वप्रथम इसका ध्यान रखें सेकंड उसके वित्तीय आर्थिक वित्तीय और प्रशासनिक कारण
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अब देखते हैं कि हम नए राज्यों का निर्माण तो कर दे रहे हैं नए राज्यों की निर्माण करने के पश्चात राज्य को चलाने के लिए भी
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आवश्यक खर्चे होते हैं क्या नए राज्यों के गठन के पश्चात क्या नए
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राज्य उन वित्तीय जो उन पर दबाव बनेगा क्या उसको वहन करने में व सक्षम है उनके
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आय के स्रोत हैं क्या पूर्णतया दूसरे पर पर निर्भर होंगे इस इन चीजों का भी देख
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ध्यान देना होगा और प्रशासनिक कारण अब प्रशासनिक कारण में देखते हैं कि जब
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छत्तीसगढ़ का गठन हुआ जब वहां पर नक्सली समस्याए बढ़ने लगी तो एक तक दिया जाता था
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कि नक्सलियों से लड़ने के लिए सरकार के पास जो आवश्यक रिसोर्सेस हो चाहिए थे वह
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कम पड़ रहा था तो ऐसा क्या था जब मध्य प्रदेश में वह शामिल था उस वक्त वहां पर नक्सलवाद इतना नहीं पड़ा चूंकि जब वो सब
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यूनाइट थे तो जितने रिसोर्सेस थे तो नक्सली के खिलाफ वो सारे रिसोर्सेस का वो
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यूज करते थे जिससे नक्सलियों का जो प्रभाव था वो नहीं बढ़ पा रहा था जब छत्तीसगढ़ बट
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के अलग हो गया तो संसाधनों का भी बटवारा हुआ तो जो संसाधन छत्तीसगढ़ को मिले थे वो
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संसाधन पर्याप्त नहीं थे उन नक्सलियों को रोकने में कहीं ना कहीं हम क क्या दे देखा कि प्रशासनिक कारण भी होना चाहिए कि आप
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सक्षम हो नई चुनौतियों से लड़ने के लिए तीसरा भाषा एवं संस्कृति की एकरूपता भाषा
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को भी एक आधार यहां पर माना जा सकता है मुख्य आधार नहीं एक आधार माना माना जा सकता है और संस्कृति की एकरूपता कि भारत
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में बहुत सी ऐसी संस्कृतियों हैं जिसको जिसके संरक्षण की आवश्यकता है अगर इस आधार
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पर राज्यों का निर्माण होता है तो उसमें हमारे यहां संस्कृति हो सकता है संस्कृतियों का संरक्षण हो जैसे फूलों की
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घाटी जैसे फूलों की
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घाटी और चौथा योजनाओं का क्रियान्वयन देखते हैं अब योजनाओं का बेहतर क्रिया अब
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यहां पर उदाहरण स्वरूप हम लेते हैं कि जो उत्तराखंड का निर्माण हुआ उत्तराखंड के
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निर्माण के पीछे कौन से तर्क दिए जा सकते हैं तो उत्तराखंड के पीछ
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देश की एकता एवं अखंडता अर्थात राष्ट्रीय
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सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा दूसरा योजनाओं का बेहतर
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क्रियान्वयन यह दो तर्क उत्तराखंड के निर्माण में सहायक जैसे जब उत्तराखंड
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उत्तर प्रदेश में शामिल था तो केंद्र सरकार से जो भी फंडिंग होती थी तो उनका
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क्या होता था कि उत्तराखंड के क्षेत्र में उनका बहुत ज्यादा ये यूज नहीं हो पाता था
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वह पूरे के पूरे उत्तर प्रदेश में बढ जाता था तो चूंकि उत्तराखंड से सीमा किनकी लगती
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है वहां पर चाइना के माध्यम से हम हमें बहुत बड़ा थ्रेट है तो जो सीमाई क्षेत्र
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था उसका बहुत ज्यादा विकास नहीं हुआ क्योंकि उन्हें पर्याप्त फंडिंग नहीं मिलती थी दूसरी बात कि उत्तराखंड एक
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पहाड़ी इलाका है अब पहाड़ी इलाका के कारण कि अब जैसे हम मनरेगा है तो मनरेगा में
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मेनल वर्किंग पर ज्यादा जोर दिया जाता है अर्थात कुदाल का खुरपी का इन को प्रयोग का
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क्या वहां पर हम मनरेगा को यूज करेंगे तो क्या उत्तराखंड में वो सक्सेस होगा नहीं
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हो पाएगा वहां पर हमें किस चीज की जरूरत है तकनीक की तकनीक की जरूरत है कहां पर उत्तराखंड
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में तो वहां पर अब उत्तराखंड का विकास करना है तो उत्तराखंड के लिहाज से हमें वहां पर प्लानिंग करनी होगी ठीक है अगर हम
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पूरे पूरे बहुत बड़े एरिया पूरे उत्तर प्रदेश के संदर्भ में अगर विचार करते तो बहुत छोटा एरिया उत्तराखंड हो जाता हमारा
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ध्यान उस तरफ ना जाता उस तरफ ध्यान नहीं जाता उसका जो विकास होना चाहिए था वह विकास नहीं हो पाता अब है कि हम उनको
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टारगेट करके क्या करेंगे उनको टारगेट करके अर्थात उनके अकॉर्डिंग हम योजनाओं का निर्माण करेंगे और उसे इंप्लीमेंट करेंगे
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और चकि व अंतरराष्ट्रीय सीमा बनती है तो वहा पर
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बेहतर फंडिंग करके हम अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत कर सकते हैं
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ठीक तो फजल अली ने इन चार तर्कों का आधार दिया कि इन चार तर्कों के आधार पर नए
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राज्यों का निर्माण होना चाहिए इस आधार पर उन्होंने उनकी अनुशंसा
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पर फजल अली की अनुशंसा पर
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14 राज्य और छ केंद्र शासित प्रदेश का
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निर्माण प्रदेश का
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निर्माण कर दिया
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गया क्या कि जब फजल अली ने अनुशंसा की उस अनु के आधार पर सरकार ने 14 राज्य और छह
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केंद्र शासित प्रदेश का निर्माण कर दिया गया वर्तमान में कितना है तो देखते हैं कि
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सर सबसे पहले आंध्र प्रदेश बना आंध्र प्रदेश
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बना उसके बाद महाराष्ट्र बना गुजरात
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बना नागालैंड बना यह शुरुआत के चार है लास्ट के चार दे
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देखते हैं
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छत्तीसगढ़ उत्तराखंड
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झारखंड और तेलंगाना इन चार राज्यों का निर्माण हुआ
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वर्तमान में कितने राज्य हैं वर्तमान
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में 28 राज्य हैं क्योंकि पहले 29 राज्य हुआ करता था जिसमें
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से जम्मू कश्मीर को हटा दीजिए और वर्तमान में आठ केंद्र शासित प्रदेश है आठ केंद्र
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शासित प्रदेश है इसमें से जम्मू
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कश्मीर इसमें विधानसभा होगी
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और दूसरा है लद्दाख यहां पर विधानसभा नहीं हो ये दो नए हैं ये दो नए जुड़े हैं वर्तमान में 28
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राज्य और आठ केंद्र शासित प्रदेश
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हैं अब आते हैं
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कि नए राज्यों का निर्माण डिमांड तो हो रहा है नए राज्यों का डिमांड कहां-कहां हो
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रहा है नए राज्यों का का
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डिमांड यह कहां-कहां हो रहा है तो हम बिहार में देखते
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हैं मिथिलांचल की मांग
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भोजपुर की
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मांग एमपी और
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राजस्थान दोनों के कुछ क्षेत्र को जोड़कर मालवा मालवा की
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मांग यूपी से पूर्वांचल की मांग अर्थात ऐसा अंतहीन है कि जहां से नए
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राज्यों की डिमांड आती जा रही है क्या इसे फुलफिल कर दिया जाना चाहिए तो सि नए
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राज्यों का निर्माण होता है तो नए राज्यों का निर्माण हम अपने प्रशासनिक लिहाज से अपने विकास के लिहाज से बहुत सारे
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डायमेंशन को सोचते हुए तब करते हैं अगर अब जैसे पहले राज्यों का तर्क होता था कि अगर
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हमें अलग कर दिया जाए जाएगा तो हम बेहतर विकास करेंगे तो हम देखते हैं कि जैसे
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उत्तराखंड का तो बटवारे के बाद अलग तो हो गए लेकिन बंटवारे के पश्चात हम देखते हैं
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कि निर्माण के पश्चात जो जिस इच्छा से व अलग हुए वह इच्छाएं पूरी तो नहीं हुई
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लेकिन कुछ समस्याए जरूर पर उत्पन्न हो गई जैसे रिसोर्सेस का
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बंटवारा राजनीतिक अ स्थायित्व
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राजनीतिक अ स्थायित्व
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दूसरा कि जिन रिसोर्सेस का हम यूज राज्यों के विकास में करते थे उस उसका
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यूज कहां होने लगा नए सचिवालय का
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निर्माण अब नेचुरल नेचुरल रिसोर्सेस है अब जैसे प्रकृति की जो देन है जैसे नदियां
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नदियां तो कई राज्य होकर बढ़ती है और वर्तमान में ही देखते हैं कि बहुत सारे राज्यों के मध्य में नदी जल नदी जल को
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लेकर विवाद है तो जितना हम ज्यादा राज्यों का निर्माण करेंगे तो नदी जल को लेकर भी
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विवाद बढ़ेगा नदी जल विवाद ऐसे बहुत सारे
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छोटे-छोटे कारण है जो ठीक है कि हम अपनी समस्या के समाधान के लिए आगे बढ़ते हैं हम नए राज्यों हमारी आकांक्षा होती है इच्छा
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होती है कि नए राज्यों का हमारा निर्माण होगा तो हमारी जो फलानी ये जो जो मूल समस्या है इन समस्याओं का हम समाधान कर
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लेंगे लेकिन उन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ बहुत सारी समस्या अपने आप उठ खड़ी
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होती है तो इसका समाधान किस रूप में किया जाए तो हम इसका समाधान देखते हैं कि बहुत
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सारे राज्यों के निर्माण से क्या यह हमारे राष्ट्रीय हित में जाएगा देखते हैं कि
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बहुत सारे राज्यों के निर्माण के बदले हम क्या करें लोकल सेल्फ गवर्नमेंट अर्थात पंचायती राज को मजबूत
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करें पंचायती राज को मजबूत
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करें जिससे लोकल लेवल पर जो समस्याएं हैं उनका समाधान हो सके और लोकल लेवल के जो
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पब्लिक है उनका सत्ता के साथ जुड़ाव महसूस हो सके उनकी समस्याओं का समाधान हो सके आज
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की क्लास बस इतना ही छो छोटा सा टॉपिक था संघ एवं इसके राज्य क्षेत्र आज यह हो गया
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नेक्स्ट क्लास में हम लोग इंपॉर्टेंट टॉपिक फंडामेंटल लाइट से शुरुआत करेंगे आज बस इतना ही नमस्कार
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राज्य के विकास कर उसका
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[संगीत]
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