Fundamental Rights Part -4 | #Parikshajn | #ParikshaJunction | #MuftShiksha | #FundamentalRights
Nov 12, 2024
The #FundamentalRights in India enshrined in part III (Article 12–35) of the #Constitution of India guarantee civil liberties such that all Indians can lead their lives in peace and harmony as citizens of #India. These rights are known as "fundamental" as they are the most essential for all-round development i.e., material, intellectual, moral and spiritual and protected by fundamental law of the land i.e. constitution. If the rights provided by Constitution especially the Fundamental rights are violated the Supreme Court and the High Courts can issue writs under Articles 32 and 226 of the Constitution, respectively, directing the State Machinery for enforcement of the fundamental rights.
These include individual rights common to most liberal democracies, such as equality before law, freedom of speech and expression, freedom of association and peaceful assembly, freedom to practice religion and the right to constitutional remedies for the protection of civil rights by means of writs such as habeas corpus. Violations of these rights result in punishments as prescribed in the #BharatiyaNyayaSanhita #BNS subject to discretion of the judiciary. The Fundamental Rights are defined as basic human freedoms where every Indian citizen has the right to enjoy for a proper and harmonious development of personality and life. These rights apply universally to all citizens of India, irrespective of their race, place of birth, religion, caste or gender. They are enforceable by the courts, subject to certain restrictions. The Rights have their origins in many sources, including England's Bill of Rights, the United States Bill of Rights and France's Declaration of the Rights of Man. Government Exams 2024
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1:55
नमस्कार परीक्षा जंक्शन पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है हम लोग अभी पॉलिटी की
2:00
क्लास ले रहे थे पॉलिटी की क्लास में हम लोग फंडामेंटल राइट टॉपिक पर चल रहे थे और
2:05
फंडामेंटल राइट राइट में कई क्लास पिछले पिछले दिनों हो चुकी है उसी कड़ी को हम
2:11
लोग आज आगे बढ़ाएंगे आज हम लोग की शुरुआत होगी धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
2:18
धार्मिक स्वतंत्रता का
2:27
अधिकार धार्मिक
2:32
स्वतंत्रता का
2:43
अधिकार यह आपको आर्टिकल 25 से 28 तक है
2:48
आर्टिकल 25 से 28
2:53
तक अब हम लोग अभी पूरी दुनिया में धर्म को ही लेकर बहुत ज्यादा विवाद रा हुआ है धर्म
3:01
के आधार पर आपस में टकराव तो कोई भी देश धर्म के मामले पर कितना क्लियर है कितना
3:08
निष्पक्ष है इस मामले में कितना बेहतर प्रक्रिया अपनाए हुए तो उस देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को या उस देश की
3:16
संस्था को सफल होने में उतना योगदान मिलता है तो भारत में भी जब संविधान का निर्माण
3:22
हुआ और उसमें भावत भारत में भी धर्म के नाम पर बहुत ज्यादा विविधता है ड
3:28
डायवर्सिटी है अर्थात भ में बहुत सारे धर्म पाए जाते हैं तो उन धर्मों के बीच
3:33
में आपस में बेहतर सामंजस्य कैसे हो दूसरी तरफ लोग अपने इस धर्म के अधिकार का बेहतर
3:41
से बेहतर फायदा कैसे उठाए इसका प्रावधान हमारे संविधान में किया गया है तो सबसे
3:47
पहले हम चलते हैं आर्टिकल 25 के तहत कि आर्टिकल 25 क्या कहता है
3:54
आर्टिकल 25 क्या कहता है यहां आर्टिकल 25 कहता है कि हर एक
4:02
व्यक्ति को हर एक व्यक्ति
4:09
को व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता है
4:16
अंत करण की
4:24
स्वतंत्रता स्वतंत्रता है अर्थात
4:31
किसी भी धर्म को किसी भी धर्म
4:40
को मानने आचरण
4:49
करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता और प्रचार करने की स्वतंत्रता है
5:01
प्रचार करने की स्वतंत्रता है अब यहां पर है कि भारत में हर एक
5:10
व्यक्ति को अंतःकरण की स्वतंत्रता यहां पर वर्ड पर ध्यान दीजिए अंतःकरण की
5:17
स्वतंत्रता अर्थात किसीसी भी व्यक्ति धर्म को मानने आचरण करने और प्रचार करने की
5:24
स्वतंत्रता है अब इसमें हम आगे देखेंगे
5:33
कि अंतःकरण की स्वतंत्रता क्या है अंतः करण की
5:41
स्वतंत्रता की स्वतंत्रता क्या
5:47
है क्या है यह है व्यक्ति की आंतरिक
5:56
स्वतंत्रता आंतरिक स्वतंत्रता
6:01
अर्थात इसमें व्यक्ति के विवेक प्लस
6:10
व्यवहार जो उसके अंदर है उसके विवेक और व्यवहार पर बल दिया जाता है अंतःकरण की
6:18
स्वतंत्रता का अर्थ हुआ उसकी आंतरिक स्वतंत्रता अर्थात उसके विवेक और व्यवहार
6:24
विवेक अर्थात व किस धर्म को मानता है आचरण करता है और का प्रचार प्रसार करता है फिर
6:32
आगे देखते हैं कि इसमें सबसे पहला है मानना किसी धर्म को मानना मानना अर्थात
6:41
किस चीज को मानना किसे मानना तो ईश्वर को मानना ईश्वर को
6:48
मानना यहां पर आया ईश्वर अर्थात आत्मा में विश्वात्मा की अनुभूति आत्मा
6:57
में विश्वात्मा की
7:03
विश्वात्मा या परमात्मा की
7:11
अनुभूति परमात्मा की
7:16
अनुभूति भक्त एवं ईश्वर का एकाकार हो जाना भक्त
7:21
एवं ईश्वर का एकाकार हो
7:27
जाना एकाकार हो जा जाना यहां पर हमने क्या देखा मानना के तहत
7:36
ईश्वर को मानना ईश्वर में ईश्वर को जब हम मानते हैं तो अर्थात आत्मा में विश्वात्मा
7:43
या परमात्मा की अनुभूति भक्त एवं ईश्वर का एकाकार अर्थात भक्त पूर्णतया अपने आराध्य
7:51
में लीन हो गया एकाकार हो गया यह आपके मानना में आया दूसरा हो गया आचरण
8:00
आचरण अर्थात हम कैसा व्यवहार करते हैं किसके प्रति हम अपने धर्म के प्रति तो
8:07
इसमें आपको देखा जाता है कि आचरण का अर्थ हुआ कि हम
8:13
कर्मकांड कर्मकांड अर्थात यहां पर देखते हैं कि हर एक धर्मों के लोग अपने धर्म के
8:20
अनुसार उसके कुछ रिचुअल्स होते हैं उस रिचुअल्स को फॉलो करते हैं उसे करते हैं
8:25
तो यहां पर जैसे मोहन श्याम
8:31
मोहन और श्याम यह क्या करता है यह मंदिर जाता
8:36
है यह मंदिर जाता है अर्थात पूजा पाठ करता
8:42
है दूसरी तरफ देखते हैं
8:49
अफरोज यह क्या करता है यह मस्जिद जाता है यह क्या करता है मस्जिद जाकर यह नमाज
8:56
पढ़ता है तो भारतीय संविधान मोहन और श्याम
9:02
को मंदिर में जाकर पूजा पाठ करने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है क्या करता है पूजा पाठ
9:09
करने की पूर्ण स्वतंत्रता देता है दूसरी क्या मोहन और श्याम को अपने धर्म को मानने
9:15
के लिए उसके अनुसार आचरण करने के लिए कर्म कारण करने के लिए क्या है पूरी स्वतंत्रता
9:21
है तो मोहन और श्याम इस स्वतंत्रता का लाभ लेकर कहां जाते हैं मंदिर जाते हैं क्या
9:27
अपना स्पिरिचुअल ग्रोथ के लिए और वहां पर वह पूजा पाठ करते हैं इस पूजा पाठ में
9:33
किसी प्रकार का बंधन नहीं है हां दूसरी तरफ हमारे संविधान में यह भी प्रावधान
9:38
किया गया है कि जब हम आचरण करेंगे तो इसमें किसी भी प्रकार का जातिगत
9:48
या लिंग भेद लिंग भेद नहीं होगा अर्थात जाति के
9:55
आधार पर आपको मंदिर में प्रवेश करने पर किसी प्रकार की वर्जना नहीं होगी या लिंग
10:00
के आधार पर अर्थात महिला है पुरुष है इस आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा
10:06
सबको समान रूप से अपने आराध्य से मिलने का हक और अधिकार है अब इस संदर्भ में थोड़ा
10:14
चलते हैं और विस्तृत होग कि शनि सिनाच मंदिर में ये साउथ दक्षिण इंडिया में है
10:21
शनि सिचर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोग था कि वहां तक महिलाएं नहीं जा सकती
10:27
हैं तो इसमें हमारे माननीय उच्चतम न्यायालय ने क्या कहा कि आराध्य तक सबको
10:33
पहुंचने का समान हक है क्योंकि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता दी गई है उसमें हम
10:38
किसी प्रकार का भेदभाव नहीं कर सकते हैं चाहे पुरुष हो स्त्री हो सबको समान रूप से
10:44
अपने आराध्य से मिलने का हक और अधिकार है अर्थात इसमें हम लिंग के आधार पर भेदभाव
10:49
नहीं कर सकते उन्हें भी वहां पर मंदिर जाने का हक और अधिकार मिला एक और मंदिर है
10:56
वहां पर भी लिंग गत अ यह था महिलाओं पर रोग था तो वहां पर भी
11:02
माननीय सुप्रीम कोर्ट का आदेश था कि वहां पर भी लिंग जो भेदभाव हो रहा है वो नहीं
11:07
होना चाहिए अर्थात अपने आराध्य तक पहुंचने का सबको समान हक है यहां पर हमने क्या
11:13
देखा कि हमने यह देखा कि भारतीय संविधान सभी लोगों को अपने धार्मिक स्वतंत्रता का
11:21
पूरा लाभ अर्थात अपने इन अधिकारों का पूरा प्रयोग करने का प्रावधान करता है अगर
11:28
इसमें किसी प्रकार का दिक्कत है तो यहां पर सुप्रीम कोर्ट क्या करता है वहां हस्तक्षेप करके नागरिकों को अपने अधिकारों
11:35
का मुहैया करवाता है दूसरी तरफ देखते हैं अफरोज भी अपने पॉ स्पिरिचुअल ग्रोथ के लिए
11:43
क्या करता है मस्जिद जाता है और मस्जिद में जाकर अपने जो उनके धर्म से जुड़े हुए
11:48
रिचुअल्स है नमाज नमाज अदा करता है यहां पर मोहन और श्याम को मंदिर तक पहुंचने में
11:54
किसी प्रकार की दिक्कत नहीं है और अफरोज को मस्जिद तक पहुंचने पहुचने में किसी
12:00
प्रकार का दिक्कत नहीं है लेकिन आचरण में कहा गया है कि सिख धर्म
12:09
में सिख धर्म में कपान धारण
12:16
करना कृपाण धारण करना यह क्या है सिख धर्म का हिस्सा है
12:24
कृपाण धारण करना सिख धर्म का हिस्सा है सिख धर्म का क्या है हिस्सा
12:30
है लेकिन इस आधार पर जैसे झारखंड में आनंद मार्गी जो थे वो मानव खोपड़ी और कुछ
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हथियार लेकर प्रदर्शन करते थे तो उस पर रोक लगा दिया गया क्योंकि यह किसी धर्म का
12:43
हिस्सा नहीं है लेकिन सिख धर्म में कृपाण धारण करना उनके धर्म का हिस्सा है अर्थात
12:49
उनके आचरण का हिस्सा है उस पर किसी प्रकार का रोग नहीं है फिर अगला नेक्स्ट चलते हैं आगे है
12:58
प्रचार करना प्रचार में है कि अपनी धर्म अपने
13:06
धर्म के संदर्भ में लोगों को समझाना बुझाना अपने धर्म के संदर्भ में अपने धर्म
13:14
के बारे में अपने धर्म के बारे
13:23
में लोगों को समझाना बुझाना
13:31
लोगों को समझाना
13:36
बुझाना और समझाकर और समझाकर
13:44
अपने धर्म का प्रचार करना
13:50
अपने धर्म का प्रचार
13:56
करना अब यहां पर यह है कि अपने धर्म के बारे में लोगों को समझाना बुझाना हमने
14:02
किसी धर्म को माना उसे अपने आचरण में लाया फिर उस धर्म की जो अच्छाइयां है वो लोगों
14:09
के समक्ष रखना और ल अगर लोग कन्वींस होते हैं तो उस धर्म में कन्वर्ट करना लेकिन
14:15
यहां पर है कि फिर यहां पर मुद्दा आ जाता है धर्म
14:22
परिवर्तन का कि आप समझाकर बुझाकर किसी को लोभ लालच देकर अगर आपसे कोई कन्वेंस हो
14:28
जाता है लेकिन उसके बीच लोभ लालच और भय नहीं होना चाहिए आप किसी को समझा के बुझा
14:35
के और अपने धर्म का प्रचार करते हैं और फिर उसे कन्वर्ट करा लेते हैं तो अर्थात
14:41
यहां पर आप भय और लोभ लालच नहीं होना चाहिए लोभ लालच
14:49
नहीं होना चाहिए भय लोभ लालच नहीं होना चाहिए कि
14:54
अर्थात आप किसी को भय दिखा के उसे किसी दूसरे धर्म में धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं या लोभ लालच देकर उसका धर्म परिवर्तन
15:02
करवा रहे हैं तो लोभ लालच नहीं होना चाहिए भय नहीं होना चाहिए अर्थात अगर कोई अपनी
15:07
इच्छा से स्वेच्छा से अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो धर्म परिवर्तन कर सकता
15:12
है दूसरी बात धर्म व्यक्तिगत धर्म परिवर्तन व्यक्तिगत होना चाहिए धर्म
15:22
परिवर्तन व्यक्तिगत होना चाहिए व्यक्तिगत होना चाहिए सामूहिक
15:32
नहीं सामूहिक नहीं देखते हैं कि सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन होता है तो सामूहिक
15:38
रूप से धन परिवर्तन पर रोक लगाया गया है कि सामूहिक धन परिवर्तन नहीं हो सकता व्यक्तिगत रूप से अगर कोई धन परिवर्तन
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करना चाहे तो वह धर्म परिवर्तन कर सकता है अब यहां पर एक एक मुद्दा उभर के
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आया कि शादी के दरमियान की इंटर अगर कोई मैरिज होता है कि मान
16:00
लेते हैं कि लड़का लड़की अलग-अलग धर्मों के हैं तो वहां पर होता है कि धर्म परिवर्तन करके शादी कर लेना धर्म
16:09
परिवर्तन करके शादी
16:16
करना यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने लाया गया
16:22
कि धन परिवर्तन करा के शादी करने का मामला तो इस पर यह मामला अभी संवैधानिक
16:29
के सामने पड़ा हुआ है इस पर अभी कोई निर्णय नहीं आया इस पर अभी क्योंकि यह
16:35
बड़े जोरशोर से विशेषक साउथ में देखा गया कि लड़के अलग धर्म के हैं लड़कियां अलग
16:41
धर्म की है और धन परिवर्तन करने के प धन धन परिवर्तन करने के पश्चात या धन
16:47
परिवर्तन करके शादी कर रहे हैं या शादी करके धन परिवर्तन कर रहे हैं तो इस पर इस मुद्दे को सुप सुप्रीम कोर्ट लाया गया और
16:53
सुप्रीम कोर्ट ने उसे संविधानिक बेंच के पास भेज दिया गया कोई डिसीजन इस पर अभी
16:59
आया तो यह हो गया आपका आर्टिकल 25 अब चलते हैं आर्टिकल 26 की तरफ आर्टिकल 26 में
17:07
क्या दिया हुआ
17:12
है इन सारी बातों पर जो आर्टिकल 25 पर आर्टिकल 25 के बारे में जो बातें हैं इस
17:20
पर लोक व्यवस्था लोक
17:27
व्यवस्था स चार और
17:34
स्वास्थ्य स्वास्थ्य को
17:40
लेकर युक्ति युक्त प्रतिबंध लगाया जा सकता है युक्ति
17:46
युक्त प्रतिबंध लगाया जा सकता है
18:01
आर्टिकल 25 के देखता देखें कि यहां पर लोगों को जो ध धर्म की स्वतंत्रता दी गई
18:07
है किसी धर्म को मानने आचरण करने या प्रचार करने की स्वतंत्रता इस पर क्या
18:12
किया जा सकता है लोक व्यवस्था सदाचार और स्वास्थ्य को लेकर क्या है इस पर युक्ति
18:18
प्रतिबंध लगाया जा सकता है और हम हमने देखा भी है कि कोविड के दरमियान स्वास्थ्य
18:24
को आधार बनाकर इस पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगाया गया था क्यों कि कोविड एक
18:31
मतलब फैलने वाली बीमारी थी अगर इस पर रोक नहीं लगाया जाता इसको और तेजी से फैलने की
18:37
संभावना रहती तो इस आधार पर इस पर हम रोक लगा सकते
18:45
हैं आर्टिकल 26 अब आर्टिकल 26 में है कि धार्मिक
18:53
कार्यों के प्रबंधन की स्वतंत्रता धार्मिक
19:02
कार्यों के प्रबंधन की
19:07
स्वतंत्रता प्रबंधन की
19:13
स्वतंत्रता यह व्यक्ति को नहीं दिया गया या व्यक्ति आर्टिकल 26 यह व्यक्ति को नहीं
19:20
दिया गया है
19:27
को नहीं दिया गया है
19:34
बल्कि धार्मिक संप्रदाय को दिया
19:39
गया बल्कि धार्मिक संप्रदाय को दिया
19:49
गया अब इसमें मान लेते हैं कि व्यक्ति हो गया व्यक्ति
19:59
और धार्मिक
20:05
संप्रदाय व्यक्ति राम मोहन अफरोज हो
20:26
गया राम मोहन
20:34
अफरोज दूसरी तरह का धार्मिक संप्रदाय क्या हो गया राम कृष्ण
20:41
मिशन रामकृष्ण मिशन दूसरी तरफ वक
20:50
वोट इस टाइप के जो समुदाय से जुड़े हो तो इनको यह हक और अधिकार नहीं दिया गया इनको
20:58
यह हक और अधिकार नहीं दिया गया यह हक और अधिकार किसको दिया गया है यह धार्मिक संप्रदाय को दिया जो जिस उस जिस धर्म से
21:05
जुड़े हुए संगठन उस ऑर्गेनाइजेशन को दिया गया है ना कि यह व्यक्तिगत रूप से दिया
21:11
गया है और इसमें और क्या क्या बातें जोड़ी गई है कि राज इस पर किसी प्रकार का कर नहीं
21:19
लगाएगा राज इस पर किसी प्रकार का
21:31
कर नहीं लगाएगा कर नहीं लगाएगा किस पर कर नहीं लगाएगा
21:40
धार्मिक संप्रदाय पर कर नहीं लगाएगा किस पर धार्मिक संप्रदाय पर कर नहीं
21:50
लगाएगा संपत्ति के अर्जन के अर्जन
22:00
विधि के
22:06
अनुसार विधि के अनुसार उसका अधिनियम उसका
22:19
अधिनियम राज्य इस पर किसी प्रकार का कर नहीं लगाएगा संपत्ति के अर्जन पर रोक ठोक
22:25
नहीं विधि के अनुसार उसका नि अधिनियम किया जाए अर्थात तो यह सब आ गया आपका आर्टिकल
22:31
26 के तहत अब आते हैं आर्टिकल 27 आर्टिकल 27 क्या कहता
22:41
है आर्टिकल 27 कहता है कि अगर किसी व्यक्ति का आमदनी अगर कोई व्यक्ति की
22:49
आमदनी है और किसी धार्मिक संप्रदाय संदाय के संदर्भ में है
22:54
तो किसी व्यक्ति की आमदनी
23:01
किसी व्यक्ति [संगीत] की
23:09
आमदनी किसी किसी
23:20
धार्मिक विकास में व्यय होगा वह होगा
23:31
तो उस व्यक्ति के उस व्यक्ति
23:36
के आय पर किसी तरह
23:45
का का कर नहीं लगाया
23:50
जाएगा नहीं लगाया जाएगा अब यहां पर है
24:00
यहां पर कर की बात की गई है टैक्स यहां पर कर की बात की गई है टैक्स
24:07
की बात की है फ की बात नहीं की गई है फ य फी जो वसूला जाता है व सेवा के बदले होता
24:14
है सेवा के बदले कि अगर किसी धार्मिक आयोजन होता है
24:21
उस धार्मिक आयोजन में हम किसी प्रकार की सरकार से सहूलियत लेते हैं तो सरकार उस
24:27
सहूलियत के बद में हमसे कुछ पैसे ले सकती है किसके बदले में जो सरकार अपनी तरफ से
24:33
सर्विस दे रही है उस संदर्भ के बदले में और दूसरी तरफ देखते
24:38
हैं कि सरकार कभी-कभी क्या होती करती है कि जैसे हज
24:46
यात्रा हज यात्रा अब यहां पर हज यात्रा पर खर्च कर रही है तो दूसरी तरफ देख रहे हैं
24:53
अमरनाथ यात्रा अमरनाथ
24:59
यात्रा या और बहुत तरह के इस तरह के जो मामले होते हैं वो सरकार क्या करती है
25:05
सरकार ऑर्गेनाइज करती है अर्थात सब पर खर्च करती है अर्थात यहां पर सरकार राज्य
25:11
जो है राज्य सभी धर्मों को समान दृष्टि से देख रही सभी धर्मों
25:19
को समान दृष्टि से देख रही है समान दृष्टि
25:26
से देख रही है अर्थात यहां पर क्या है यहां पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है
25:33
यहां पर किसी प्रकार का भेदभाव
25:42
भेदभाव नहीं
25:56
है नमस्कार अनु नमस्कार नमस्कार गौरव वीडियो को लाइक और शेयर जरूर
26:15
करें आर्टिकल 28 करता है शिक्षण संस्थाओं के बारे
26:22
में शिक्षण संस्थाओं के बारे में
26:31
बारे में
26:38
स्वतंत्रता शिक्षण संस्थाओं के बारे में स्वतंत्रता यहां य किस आर्टिकल में इसकी चर्चा की गई है इसकी चर्चा आर्टिकल 28 में
26:46
की गई है तो 28 एक के तहत क्या क्या कहा गया है राज्य द्वारा वित्त
26:53
पोषित राज्य द्वारा वित्त पोषित
27:00
वित्त पोषित और साथ ही साथ मान्यता
27:08
प्राप्त मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों
27:18
में शिक्षण संस्थानों
27:26
में किसी प्रकार की किसी प्रकार की धार्मिक
27:38
शिक्षा धार्मिक शिक्षा नहीं दी
27:46
जाएगी अब राज्य द्वारा वित्त पोषित और मान्यता प्राप्त अर्थात जो सरकारी स्कूल
27:53
है सरकारी कॉलेज है वहां पर क्या है वहां पर धार्मिक शि नहीं दी जाएगी जो सरकारी
28:00
स्कूल है कॉलेज है वहां पर किसी भी प्रकार का धार्मिक शिक्षा नहीं दिया जाएगा दूसरा
28:07
है सरकारी स्कूल कॉलेज में सरकारी
28:15
स्कूल कॉलेज में अब दूसरा
28:25
है ट्रस्ट द्वारा
28:32
संचालित संचालित शिक्षण संस्थानों
28:41
में शिक्षण संस्थानों
28:47
में धार्मिक शिक्षा
28:53
शिक्षा दी जा सकती है दी जा सकती
28:59
अब जैसे यह ट्रस्ट द्वारा संचालित शिक्षण संस्थानों में क्या धार्मिक शिक्षा दी जा
29:07
सकती है जैसे
29:12
शिशु शिशु शिशु य आरएसएस द्वारा संचालित है
29:21
शिशु स्कूल है कुछ शिशु सरस्वती
29:28
स्कूल इसमें धार्मिक शिक्षा क्या है इसमें धार्मिक शिक्षा हम दे सकते हैं या कोई
29:33
ट्रस्ट है और ट्रस्ट जि धर्म से जुड़ा हुआ वो अपने धर्म के अकॉर्डिंग वहां पर धार्मिक शिक्षा दे सकता है ये दो के तहत
29:40
है तीन क्या कहता है राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त
29:47
है राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त
29:53
है राज उसको ऑथराइज करता है राज द्वारा मान्यता प्राप्त
30:02
है और राज्य द्वारा अनुदान प्राप्त करता है
30:09
एवं राज्य द्वारा अनुदान प्राप्त करता
30:20
है राज द्वारा अनुदान प्राप्त करता है तो यहां पर धार्मिक शिक्षा दी जा सकती
30:28
है लेकिन धार्मिक
30:33
शिक्षा धार्मिक शिक्षा पहले बच्चों की अगर बच्चे व्यस के
30:42
हैं बच्चे अगर व्यस्क हैं बच्चे अगर व्यस्क
30:50
हैं व्यस्क है तो
30:59
उनकी सहमति से उनकी सहमति
31:04
से अगर बच्चे व्यस्क नहीं है तो उनके जो गार्जियन होंगे बच्चों
31:12
के बच्चों के
31:17
संरक्षक या माता-पिता की सहमति से माता-पिता की सहमति
31:25
से इस सहमति से क्या धार्मिक शिक्षा दे सकते हैं
31:36
धार्मिक शिक्षा दे सकते
31:44
हैं तो हमने आर्टिकल 28 में क्या देखा हमने आर्टिकल 28 में देखा कि राज्य द्वारा
31:50
वित्तीय और मान्यता पर जो पूर्णतया राज्य द्वारा
31:56
जिसमें जिसकी वित्त पोषण जिसका राज्य सरकार करती है साथ ही साथ मान्यता प्राप्त
32:01
है वहां आप धार्मिक शिक्षा नहीं दे सकते हैं ट्रस्ट द्वारा जो संस्थान चलाया जा रहा है वहां पर ट्रस्ट जिस धर्म से
32:07
रिलेटेड है वहां पर धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है साथ ही जहां पर जो राज्य से मान्यता प्राप्त है और राज्य इसको कुछ
32:14
अनुदान भी देता है तो वैसे संस्थान धार्मिक शिक्षा दे सकते हैं ब सर्त कि अगर
32:20
बच्चे वयस के हैं तो बच्चे की सहमति से अगर बच्चे अवयस्क हैं व्यस्क नहीं हो पाए
32:25
तो उनके माता-पिता या संरक्षक जो उनके गार्जियन है उनके सहमति से हम उनको सारा
32:31
धार्मिक शिक्षा दे सकते हैं अगर वह सहमत नहीं है तो धार्मिक शिक्षा नहीं दे सकते ये आपका आर्टिकल 28 हो गया तो धार्मिक
32:40
शिक्षा धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार जो आर्टिकल 25 से 28 तक इसकी चर्चा की गई है
32:46
वो हमने क्या देखा कि हमने ये देखा कि 25 से 28 तक उसे हमने पढ़ लिया अब हम तुलनात्मक रूप से देखते हैं कि भारत में
32:54
जो ये इंप्लीमेंटेशन है कि यहां पर ये बहुसंख्यक बहुसंख्यक संप्रदाय के साथ-साथ
32:59
अल्पसंख्यक संप्रदाय भी अपने अधिकारों का पूर्ण उपभोग करते हैं लेकिन क्या हमारे
33:05
परोसी देशों में या एशिया के बहुत सारे देशों में देखते हैं क्या ऐसी स्थिति है तो इस मामले
33:12
में हम देखते हैं कि हमारा डेमोक्रेसी बहुत ही परिपक्व अवस्था में है हम अन्य देशों के बनित बहुत आगे हैं कि यहां
33:20
अल्पसंख्यक हो या बहुसंख्यक को व अपने धर्म का वह अपने राइट्स का पूर्ण प्रयोग
33:25
करते हैं बिना किसी लाल बिना किसी भय के अब चलते हैं
33:33
आगे आर्टिकल
33:42
29 एवं 30
33:52
संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार संस्कृति एवं
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शिक्षा संबंधी
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अधिकार संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी
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अधिकार यह मूर्तिय अल्पसंख्यकों के लिए किया गया क्या है यह अल्पसंख्यकों के लिए
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किया गया है
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अब कहा गया है कि किसी भारत में किसी भी व्यक्ति को किसी
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भी व्यक्ति को क्या अपनी
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लिपि अपनी
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लिपि अपनी भाषा
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और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार के संरक्षण
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का अधिकार
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है संस्कृति का अर्थ हुआ एक तरह से जीवन पद्धति जीवन पद्धति जीवन का
35:21
जीवन जीने के तरीके जीने के तरीके
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यहां पर भारत में किसी भी व्यक्ति को अपनी लिपि भाषा और संस्कृति के संरक्षण का
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अधिकार है अर्थात इसमें राज्य या कोई व्यक्ति हस्तक्षेप नहीं कर सकता है और
35:42
दूसरी बात कोई भी व्यक्ति किसी भी शिक्षण संस्थान में जाता
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है शिक्षण संस्थान में जाता
35:55
है में जाता है
36:00
तो उसके साथ भाषा
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धर्म जाति इत्यादि के आधार
36:16
पर इत्यादि के आधार
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पर भेदभाव नहीं किया जाएगा भेदभाव नहीं किया जाएगा
36:30
अगर कोई व्यक्ति किसी शिक्षण संस्थान में जाता है तो उस शिक्षण संस्थान में उसके
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साथ धर्म हो जाति हो मूल वंश हो किसी भी आधार पर किस उसके साथ भेदभाव नहीं किया
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जाएगा आर्टिकल 30 में
36:50
है अल्पसंख्यकों
36:55
को अल्पसंख्यक
37:00
को अपने
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शैक्षिक संस्थान की
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स्थापना एवं प्रबंधन का अधिकार एवं प्रबंधन
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का अधिकार
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अल्पसंख्यकों को अपने शैक्षिक संस्थानों की स्थापना और
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इसके स्थापना एवं प्रबंधन का अधिकार है किस किसको यह अधिकार है यह अल्पसंख्यकों
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को यह अधिकार है लेकिन सरकारी जो सरकार के जो रूल्स रेगुलेशन है उनके साथ इनका क्या
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होना चाहिए सामंजस्य होना चाहिए सामंजस्य होना चाहिए अब प्रबंधन
38:00
अब प्रबंधन तो यह तो कौन करेगा यह जो जो संस्थान खोले वह प्रबंधन करेंगे तो
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प्रबंधन तो इनको अपने कंट्रोल में रखना होगा साथ ही
38:14
साथ सरकारी नियमों से सामंजस
38:21
सरकारी नियमों से सामंजस
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आप कितने वर्कर रखते हैं यह आप कितने वर्कर रहते हैं यह आप पर
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निर्भर करता है लेकिन सरकारी नियम क्या है कि आप वर्ष किसी भी वर्कर से आ घंटे से
38:44
ज्यादा ज्यादा काम नहीं करा सकते हैं आप स्कूल खोल रहे हैं स्कूल का फी
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निर्धारित आप कर सकते हैं डोनेशन आप नहीं ले सकते हैं डोनेशन आप नहीं ले सकते हैं
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क्योंकि शिक्षा एक सेवा है ना कि शिक्षा एक व्यवसाय है शिक्षा क्या है शिक्षा एक
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सेवा है एक सेवा है सेवा है ना कि
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व्यवसाय आप यहां पर वर्कर रखते हैं फ फी आप अपना निर्धारित कर सकते हैं डोनेशन
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नहीं ले सकते हैं साथ ही आप जो वर्कर को रखते आप उनसे आठ घंटे से
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ज्यादा काम नहीं करवा सकते हैं आपका जो सेमेस्टर होगा तो सरकारी नियम के अनुसार
39:38
जो सेमेस्टर जिस टाइम में पूरा होता है जैसे सभी सं भारत में सभी संस्थानों का सेमेस्टर मार्च अप्रैल में पूरा होता है
39:45
तो आपका भी मार्च अप्रैल में पूरा होना चाहिए कि जिससे यहां से बच्चे निकलने के पश्चात वो स्वतंत्र हैं कि फिर कहां पर
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एडमिशन लेंगे ऐसा नहीं कि दूसरे जगह मार्च के दरमियान सेमेस्टर पूरा होता है तो आपके
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जून में हो तो उससे सामंजस सेमेस्टर में सामंजस होना
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चाहिए तो बहुत सारी चीजें हैं जहां पर आपको वहां पर सामंजस बनाकर चलना होता है
40:10
लेकिन प्रबंधन आप कर सकते हैं लेकिन प्रबंधन के नाम पर आप ज्यादा ती नहीं कर सकते हैं तो यह आर्टिकल 30 हो
40:21
गया आर्टिकल 31 इसे 44 में संविधान संशोधन
40:36
द्वारा द्वारा खत्म कर दिया
40:44
गया और 301 के
40:51
तहत एक कानूनी अधिकार बना दिया गया एक कानूनी
41:01
अधिकार बना दिया
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गया आर्टिकल 31 य जो संपत्ति से संबंधित अधिकार था इसे 44 में संविधान संशोधन
41:13
द्वारा क्या किया गया निश्चित कर दिया गया खत्म कर दिया गया और 300 ए में से जोड़ दिया गया और 300 ए एक कानूनी अधिकार है ना
41:20
कि हमारा व संविधानिक अधिकार है अब आते हैं आर्टिकल 32 के तहत
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आर्टिकल 32 क्या कहता है संवैधानिक उपचारों का
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अधिकार संवैधानिक
41:41
उपचारों का
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अधिकार संवैधानिक उपचारों का अधिकार तो फंडामेंटल राइट्स के तहत हमें
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जितने जितने भी राइट्स दिए गए हैं अगर उसके इंप्लीमेंटेशन क्रिया क्रियान्वयन की कोई
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गारंटी ना हो तो वह अधिकार क्या होगा वो अधिकार उस अधिकार का कोई मतलब नहीं है तो
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आर्टिकल 32 उसके क्रियान्वयन इंप्लीमेंटेशन की गारंटी देता है क्या
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करता है ये ये फंडामेंटल राइट मूल अधिकार
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के मूल अधिकार के के
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क्रियान्वयन की गारंटी देता
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है की गारंटी देता है और इसी
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कारण डॉक्टर अंबेडकर
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ने ने इसे संविधान की मूल आत्मा
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कहा संविधान की मूल आत्मा कहा
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है आत्मा कहा और संवैधानिक उपचारों के अधिकार के
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तहत कौन-कौन से अधिकार आते हैं और इस पर एक-एक करके चर्चा करेंगे कि इसके तहत अब
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कौन-कौन से अधिकार आ रहे हैं और इस पर अब एक-एक करके चर्चा करेंगे
43:43
सबसे पहला है बंदी प्रत्यक्षीकरण
43:48
बंदी प्रत्यक्षीकरण
43:57
हेवियस कॉर्पस हेवियस
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कॉर्पस हेवियस कॉर्पस या बंदी प्रत्यक्षीकरण का है अर्थ हुआ इसका
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शाब्दिक अर्थ हुआ कि स्व शरीर उसे प्रस्तुत किया जाए स्व
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शरीर प्रस्तुत किया जाए प्रस्तुत या पे किया
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जाए जब किसी व्यक्ति को अनधिकृत रूप
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से या गलत तरीके से पकड़ लिया जाता है अरेस्ट कर लिया जाता
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है तो उस संदर्भ में बंदी प्रत्यक्षीकरण जारी
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किया जाता है यह व्यक्ति के खिलाफ भी जारी किया जाता
45:00
है और राज्य के भी खिलाफ किया जाता है अब मान लेते हैं कि पुलिस ने किसी व्यक्ति को
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पकड़ लिया है और 24 घंटे के अंदर उसे पेश नहीं किया हो या किसी व्यक्ति ने किसी को
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पकड़ लिया हो य व्यक्ति और राज्य दोनों के खिलाफ यह हैय हेवियस कॉर्पस बंदी
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प्रत्यक्षीकरण किया जाता है कि 24 घंटे के अंदर उस व्यक्ति को स्व शरीर पेश किया
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जाता है और उसके बंदी पेश करने के पश्चात उस बंदी का आधार देखा जाता है कि ये जायज
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बंदी का ये आधार देखा जाता
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है कि इसे वैध तरीके से बंदी बनाया गया है या अवैध तरीके
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से इसे जो बंदी बनाया गया है उसे वैध तरीके से बनाया गया है या अवैध तरीके से
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अगर वो पाता है कि अवैध तरीके से इसे बंदी बनाया गया है तो उसे छोड़ने का आदेश देता
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है क्या अगर वैध तरीके से बंदी बनाया तो ठीक है अगर अवैध तरीके से बंदी बनाया गया
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है तो उसे क्या करता है छोड़ने का आदेश देता है छोड़ने
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का आदेश देता
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है तो बंदी प्रत्यक्षीकरण में हमने देख लिया कि अगर किसी व्यक्ति को अवैध तरीके
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से पकड़ लिया गया है तो उसे 24 घंटे के अंदर 100 शरीर प्रस्तुत किया जाए अर्थात
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मजिस्ट्रेट के सामने उसे लाया जाए यह व्यक्ति और राज दोनों के खिलाफ जारी किया
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जाता है और इसमें बंदी के क्या उसे बंदी बनाया गया है यह वैध तरीका ध तरीके से
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बनाया गया है या अवैध तरीके से अगर देखा जाता है कि अगर अवैध तरीके से बंदी बनाया
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गया है तो उसे छोड़ने का आदेश देता है यह आपका पहला हो गया बंदी प्रत्यक्षीकरण
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दूसरा है परम आदेश परमा
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आदेश
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ममस अगर कोई व्यक्ति अगर कोई व्यक्ति या
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संस्था अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का निर्वाह ना कर रहा जो अधिक जो पद उसे दिया
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गया है तो व अपने सार्वजनिक कर्तव्यों का निर्वाहन नहीं करता है तो उसे परम आदेश
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परमादेश ममस के तहत सुप्रीम कोर्ट कहती है कि आप इस पद पर है तो आप अपने पद के
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अनुरूप अपने कर्तव्यों का निर्वहन क्यों नहीं कर रहे हैं क्या यहां पर सुप्रीम कोर्ट उनसे पूछती है कि आप अपने कर्तव्यों
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का निर्वहन क्यों नहीं कर रहे हैं
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गुड नमस्ते नमस्ते
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प्रियंका जैसे परमादेश में क्या है कि सार्वजनिक
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सार्वजनिक पदों पर बैठा व्यक्ति सार्वजनिक पदों पर
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बैठा व्यक्ति
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सार्वजनिक पदों पर बैठा व्यक्ति बैठा
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व्यक्ति अपने कर्तव्यों का कर्तव्यों
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का निर्वहन जब नहीं करता
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है तो कोर्ट उसे
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अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए कहता है उसे अपने कर्तव्यों
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के निर्वहन के लिए कहता है
49:23
निर्वाहन के लिए
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कहता है
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जैसे उस समय पहले दिल्ली में बंदरों का दिल्ली में बंदरों का बहुत आतंक बढ़ गया
49:42
दिल्ली में बंदरों
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का आतंक बहुत बढ़ गया
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और यह बंदर के जो आतंक बढ़ गया था यह काम मूलत लोकल सेल्फ गवर्नमेंट की जो बॉडी
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होती है उसका काम होता है कि इन आतंक से मुक्ति दिलाना अर्थात दिल्ली में यह जो
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कार्य है वह एमसीडी का है तो सुप्रीम कोर्ट और इसी बंदरों के
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आतंक से बंदरों के अटैक से यहां पर एक उपमेय की मौत भी हो गई तो यहां पर सुप्रीम
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कोर्ट ने एमसीडी से पूछा कि आप यहां पर एक संस्था के रूप में दिल्ली के लिए कार्य कर
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रहे हैं जब आपको जो कार्य दिया गया है आप उन कार्यों को निर्वहन नहीं कर रहे उन
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कार्यों का निर्वहन नहीं कर रहे तो क्यों ना आपकी संस्था को भंग कर दिया जाए जो जिस
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कार्य हेतु आपकी आपकी संस्था को आपकी संस्था का फॉर्मेशन हुआ और आप उन कार्यों
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को नहीं कर रहे तो आपके रहने का क्या फायदा तो इसके पश्चात एमसीडी ने कारवाही किया और बंदरों के आतंक से मुक्ति दिलाए
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या ये बरसात के दिनों में देखते हैं कि नदी नाले वगैरह जो भर जाते तो इस दरमियान
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भी क्या होता है यह कार्य किसका है ये भी कार्य एमसीडी का है अर्थात तो जिन अगर कोई सार्वजनिक पद है
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उस पर कोई व्यक्ति बैठा हुआ है वो कोई भी पद जरूरी नहीं है एमसीडी कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक पद है उस पर कोई व्यक्ति बैठा
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हुआ है और वो अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रहा है तो इसी अधिकार परमादेश के
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माध्यम से परमादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट उसे अपने कर्तव्य का निर्वहन करने
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के लिए बाध्य करती है क्या उसे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने के लिए बाध्य
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करती है अब आगे बढ़ते
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हैं अगला है
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प्रतिषेध प्रोहिबिशन
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प्रोहिबिशन इसमें कोई भी न्यायिक संस्था
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हो या अर्ध
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न्याय कोई न्यायिक संस्था हो या अर्ध न्यायिक संस्था किसी मुद्दे पर किसी
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मुद्दे पर मुद्दे
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पर विचार कर रही हो किसी मुद्दे पर विचार कर रही हो और वह
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अपने क्षेत्राधिकार और सुप्रीम कोर्ट की नजर में लगता है कि अपने क्षेत्राधिकार से
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बाहर जाकर उस विचार कर रही है तो वह उसे बीच में ही रोककर उस मामले को अपने पास
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बुला सकता है क्या कर अपने पास मंगा सकता है तो किससे कोई न्यायिक या अर्ध न्यायिक
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किसी मुद्दे पर विचार कर रही हो सुन रही हो तो उस पर यह रोक लगा देता है क्या करता
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है उसे रोक लगा देता है कि आपके क्षेत्राधिकार में नहीं है आप इस पर इस पर विचार नहीं कर सकते आप इस पर कारवाई नहीं
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कर सकते दूसरा है इसमें उत्प्रेषण
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सटी सट
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रोरी और इसमें भी है कि कोई
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न्यायिक या अर्ध
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न्यायिक किसी मुद्दे
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पर पर विचार कर रही है तो उससे जो बड़ी न्यायिक संस्था है
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उससे आदेश करके कि आपके क्षेत्राधिकार में नहीं है आप इस पर विचार नहीं कर सकते तो
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दोनों में बात तो एक ही है लेकिन प्रतिषेध होता है कि जब किसी मुद्दे पर चर्चा बात
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विचार शुरू हुआ किसी मुद्दे पर विचार करना शुरू हुआ तो इसे बीच में ही रोक दिया जाता है अर्थात इसमें निर्णय तक नहीं पहुंच
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पाते हैं और उत्प्रेषण जो होता है किसी मुद्दे पर विचार करने के पश्चात निर्णय दे
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दिया गया हो और उत्प्रेषण जारी जो किया जाता है इसके निर्णय के खंडन के लिए किया
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जाता है कि निर्णय के अर्थात निर्णय दे दिया गया है और वो संस्था जो है न्यायिक अ
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न्यायिक संस्था अपने क्षेत्राधिकार से परे जाकर उस मुद्दे पर सुनवाई की है और निर्णय
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भी दे चुकी है तो उस निर्णय के खंडन के लिए उत्प्रेषण जारी किया जाता है और प्रतिषेध बीच में ही जारी किया जाता है
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दोनों में यही अंतर है अगला
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है अगला है को वारंटो अगला क्या है अगला है को वारंटो
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अबको वारंटो ऐसे व्यक्ति के खिलाफ
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ऐसे व्यक्ति के खिलाफ जारी किया जाता
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है जो सार्वजनिक जो
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कोई योग बिना योग्यता के बिना योग्यता
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के योग्यता के सार्वजनिक पद को धारण करता है सार्वजनिक
55:54
पद को धारण करता
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है अब जैसे कोई मुख्य सचिव का पद कोई सामान व्यक्ति जाकर मुख सचिव के पद पर बैठ
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जाए चकि वह आईस और पीसीएस का पद है तो वहां पर को वारंट के तत उससे पूछा जाएगा
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कि क्या औचित्य है कि आप इस पद को धारण करते अर्थात जो व्यक्ति जिस योग नहीं है
56:20
अगर उस पद को धारण कर लेता है तो वहां पर कोवा अर्थात अधिकार परीक्षा
56:28
अधिकार परीक्षा अधिकार परीक्षा वहां पर जारी किया
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जाता है तो यह आपका कांस्टीट्यूशनल रिम आर्ट 32 के तहत जो आता था वह सारा टॉपिक
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हो गया अब आगे बढ़ते हैं आर्टिकल 33 के
56:47
तहत आर्टिकल 33 आर्टिकल 33 में कहा गया है कि यहां पर
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उनका का मूल अधिकार प्रतिबंधित रहेगा मूल अधिकार प्रतिबंधित हो
57:04
जाएगा प्रतिबंधित रहेगा किसका इसमें तीन क्षेत्र है
57:12
पहला मिलिट्री और पैरा मिलिट्री
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पैरा मिलिट्री और कौन पुलिस इनके फंडामेंटल राइट पर रोक रहेगी
57:35
अगर मिलेट और परा मिल राइट का फंडामेंटल राइट का प्रयोग करने लगेंगे तो इनका जिस मोटो से जिस उद्देश्य से मिलट्री या पैरा
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मिलट्री को बनाया गया व देश पूरा नहीं हो पाएगा दूसरा है इंटेलिजेंस
57:50
में इंटेलिजेंस में जो लोग कार्य करते हैं आसूचना इकाई में उनके फंडामेंटल लाइट पर
57:57
रोक लगाई जा सकती है तीसरा जो संचार या
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कम्युनिकेशन ऑर्गेनाइजेशन जैसे संस्थान में काम करते हैं सूचना संचार क्षेत्र में
58:12
जो काम करते हैं उन पर उनके फंडामेंटल राइट पर रोक लगाई जा सकते आर्टिकल 33 कहता
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है कि मिलिट्री पैरामिलिट्री और पुलिस पुलिस लॉ एंड ऑर्डर देखती है पैरामिलिट्री
58:24
और मिलिट्री क्या देखती है तो यह मिलिट्री या पैरा मिलिट्री जहा उपद्रव होता है वहां
58:30
पर इनको डिप्लॉयड किया जाता है और मिलिट्री और पैरा मिलिट्री चकि बेहद अनुशासन का कार्य होता है
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बेहद अनुशासन का तो इन पर इंटेलिजेंस के लोग अपने
58:46
फंडामेंटल राइट का चकि य आसूचना जहां पर इंटेलिजेंस का कार्य करते अगर वो
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फंडामेंटल राइट की बात करने लगे तो वहां भी दिक्कत है और संचार तो यहां पर आर्टिकल 33 के तहत इन लोगों के
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फंडामेंटल राइट पर रोक लगाई गई है आगे देखते आर्टिकल
59:09
64 मार्शल लॉ के बारे में मार्शल लॉ अगर कहीं पर मार्शल लॉ लागू
59:19
है अगर किसी क्षेत्र में मार्शल लॉ लागू है किसी क्षेत्र में
59:28
तो वहां पर फंडामेंटल राइट पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है जैसे अफस्पा
59:36
एफ एस पीए यह मूर्तिया आपको जम्मू कश्मीर में नहीं तो
59:48
नॉर्थईस्ट और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में लागू होता है अर्थात इसकी स्थापना 1957 में हुई थी
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और 1958 में इसे लागू किया गया था कहां पर उप उपद्रव ग्रस्त क्षेत्र में
1:00:03
उपद्रव ग्रस्त क्षेत्र
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में और नागरिक प्रशासन को सहयोग करने के लिए
1:00:15
नागरिक प्रशासन को सहयोग करने के लिए
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इसके तहत क्या होता है कि किसी भी क्षेत्र में हम तलाशी ले सकते बिना वारंट के तलाशी
1:00:31
ले सकते हैं अगर हमें लक हुआ तो हम गोली भी चला सकते हैं गोली लग भी सकती है ठीक
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है किसी का बिना वारण के सर्च अभियान चला सकते हैं गोली चला सकते हैं इसके लिए हमें
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किसी न्यायालय में यह इसकी जवाबदेही या जवाब नहीं देना होगा अर्थात न्यायालय के समुख हमारा किसी प्रकार का यह जवाब देही
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नहीं होगा क्योंकि हम उपद्र क्षेत्र में समान प्रशासन को लागू करने के लिए गए तो
1:00:58
इस पर आरोप लगता है कि य मानवाधिकार का हनन करता है महिलाओं के साथ ज्यादा ती करता
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है लेकिन यह उन क्षेत्रों में जहां आतंकवाद की ज्यादा घटनाए है जहां पर लॉ
1:01:11
एंड ऑर्डर की समस्या है तो उन्ही क्षेत्रों पर बड़े विवेक सलता के साथ लगाया गया है आगे बढ़ते
1:01:18
हैं आर्टिकल 35
1:01:26
यह फंडामेंटल राइट में जो अमेंडमेंट
1:01:31
होगा अमेंडमेंट होगा उसका अधिकार संसद को दिया गया
1:01:37
है अर्थात संसद ही अमेंडमेंट करेगी इसमें राज्य को कोई अधिकार नहीं है राज्य
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को कोई अधिकार कोई
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अधिकार नहीं है ठीक
1:01:58
चलिए आज फंडामेंटल लाइट की क्लास खत्म हो गई ठीक नेक्स्ट डे अब नेक्स्ट टॉपिक पर
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चला जाएगा आज की क्लास बस यहीं पर खत्म होती है जय हिंद जय भारत
1:02:24
नमस्कार आ
#Education
#Law & Government
#Human Rights & Liberties
#Constitutional Law & Civil Rights

