Fundamental Rights Part -3 | #Parikshajn | #ParikshaJunction | #MuftShiksha | #FundamentalRights
Nov 12, 2024
The #FundamentalRights in India enshrined in part III (Article 12–35) of the #Constitution of India guarantee civil liberties such that all Indians can lead their lives in peace and harmony as citizens of #India. These rights are known as "fundamental" as they are the most essential for all-round development i.e., material, intellectual, moral and spiritual and protected by fundamental law of the land i.e. constitution. If the rights provided by Constitution especially the Fundamental rights are violated the Supreme Court and the High Courts can issue writs under Articles 32 and 226 of the Constitution, respectively, directing the State Machinery for enforcement of the fundamental rights.
These include individual rights common to most liberal democracies, such as equality before law, freedom of speech and expression, freedom of association and peaceful assembly, freedom to practice religion and the right to constitutional remedies for the protection of civil rights by means of writs such as habeas corpus. Violations of these rights result in punishments as prescribed in the #BharatiyaNyayaSanhita #BNS subject to discretion of the judiciary. The Fundamental Rights are defined as basic human freedoms where every Indian citizen has the right to enjoy for a proper and harmonious development of personality and life. These rights apply universally to all citizens of India, irrespective of their race, place of birth, religion, caste or gender. They are enforceable by the courts, subject to certain restrictions. The Rights have their origins in many sources, including England's Bill of Rights, the United States Bill of Rights and France's Declaration of the Rights of Man.
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लाइव हो
1:07
परीक्षा जंक्शन पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है आप जुड़ते चले और इस वीडियो को
1:13
जितना हो सके लाइक करें और शेयर करें आज हम हमने जो पॉलिटी की क्लास जो चल
1:20
रही है उस कड़ी में अभी फंडामेंटल लाइट चल रहा है और उस करी को आज हम लोग आगे
1:26
बढ़ाएंगे क्या करेंगे उस करी को हम लोग आज आ आगे बढ़ाएंगे और देखेंगे कि पिछले दिनों
1:33
आर्टिकल 19 तक हुआ था
1:46
आर्टिकल आर्टिकल 19 तक पहले ऑलरेडी हो चुका है आज हम लोग उस कड़ी को आगे बढ़ाते
1:53
हुए आर्टिकल 20 पर चलते हैं कि आखिर फंडामेंटल राइट में आर्टिकल 20 क्या कहता
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है ठीक है आगे
2:08
बढ़े आर्टिकल 20 आर्टिकल 20 कहता
2:17
है
2:23
अपराधों की दोष सिद्धि के संबंध में
2:33
दोष सिद्धि के संबंध
2:38
में संबंध में संरक्षण
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संरक्षण आर्टिकल 20 क्या कहता है अपराधों की दो सिद्धि के संबंध में संरक्षण अब
2:52
इसमें हमारी बात आप लोग तक पहुंच पा रही हो तो यस लिख के चैट में यस लिख के कमेंट
2:58
करें हमारी बात आप लोगों तक पहुंच रही हो तो यस लिखकर कमेंट
3:13
करें इसमें सबसे
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पहला पहला है 20 एक में भूतलक्षी
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दांयोमायकिन
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समय में कोई अपराध किया है तो वर्तमान समय में कोई ऐसी विधि है जो उस उस उनके द्वारा
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किए गए कृत्य को अपराध घोषित करती है और अगर कोई व्यक्ति वर्तमान में या कोई
4:12
व्यक्ति कोई कोई कार्य करता है और क्या वह अपराध की श्रेणी में आ रहा है अगर वह
4:18
अपराध की श्रेणी में आ रहा है तो वह दंड का भागी होगा अगर वह अपराध की श्रेणी में
4:24
नहीं आ रहा है तो दंड का भाग नहीं होगा अर्थात कोई व्यक्ति ने किसी कार्य को अगर
4:30
कोई व्यक्ति कोई कार्य करता है और इसमें राज्य पीछे जाकर कोई कानून बनाते हैं और
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उस कानून के नजरिए में वह क्या होता है वह अपराध होता है तो उसे दंड दे सकती है तो
4:45
आपराधिक कार्यों में अगर कोई अपराध है तो आपराधिक कार्यों में उसे दंड नहीं दिया जा
4:51
सकता है कि अर्थात हमने कोई अपराध किया है तो वर्तमान में वह अपराध की श्रेणी में आ
4:56
रहा है तो अपराध की श्रेणी में आ रहा है तो हम भूत लक्षी अर्थात पहले जाकर उस पर
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कानून नहीं बना सकते लेकिन यह सिविल मामलों में ये ऐसा किया जा सकता है क्या
5:07
कि सिविल मामलों में हम पीछे जाकर कानून बना सकते हैं लेकिन आपराधिक विधियों से
5:12
जुड़ा हुआ कोई मामला है उसमें हम पीछे जाकर कानून का निर्माण नहीं कर सकते तो
5:18
इसमें है कि अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है तो अपराध करने वक्त जो कानून है उसी
5:24
कानून के तहत उसे दंड दिया जाएगा ना कि नए कानून बनाकर उसे दंड का प्रावधान किया
5:30
जाएगा आर्टिकल 20 एक के तहत ये आता है आर्टिकल 20 एक के तहत यह आता है कि
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भूतलक्षी दाक विधियों से संरक्षण अर्थात अपराध करते वक्त जो कानून था जो विधि थी
5:46
उस विधि के तहत उसे दंड दिया जाएगा ना कि नए कानून बनाकर नई विधि बनाकर उसे दंडित
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किया जाएगा अब बढ़ते हैं आगे आर्टिकल 20 दो के
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तहत दोहरे दंड से संरक्षण
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दोहरे दंड से
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संरक्षण यह दोहरा दंड क्या है कि आप लोग एक फिल्म देखे होंगे अंधा
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कानून अंधा कानून में क्या होता है कि फिल्म का जो हीरो होता है उसे षड्यंत्र कर
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के किसी व्यक्ति को ऐसे जिसकी मृत्यु नहीं हुई है उसका ये मर्डर शो करके उसे दंड दे
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दिया जाता है तत्पश्चात जब वोह हीरो जेल की सजा काट के बाहर निकलता है तो व्यक्ति
6:42
जिंदा मिलता है वह क्या करता है उस व्यक्ति को पीछा करते कोर्ट में जाकर मर्डर करता है फिर वहां पर जज के जज को
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कहता है कि इसके मौत के लिए हमने तो सजा काट ली थी और इसी के तहत क्योंकि एक अपराध
6:54
के लिए एक ही बार दन दिया जा सकता है दो बार दन नहीं दिया जा सकता है जब इसकी की
6:59
सजा के हम भागीदार हो चुके जेल की सजा काट चुके तो दोरा दंड हमें क्यों तो उसी संबंध
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में है कि अगर कोई व्यक्ति एक बार कोई अपराध करता है तो एक अपराध के लिए एक ही बार दंड दिया जा सकता है दोरा दंड नहीं
7:13
दिया जा सकता अब इसे समझने का हम प्रयास करते
7:18
हैं
7:25
जैसे जैसे कोई पुलिस कर्मी
7:32
कोई पुलिस कर्मी पैसे
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लेकर पैसे लेकर किसी की हत्या करता
7:48
है किसी की हत्या करता
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है इसमें क्या होता है उस पुलिस कर्मी को सबसे पहले निलंबित किया जाता है क्या किया
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जाता है उसे निलंबित किया जाता है उसे वहां से हटा दिया जाता है जिससे निष्पक्ष
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जांच हो सके निष्पक्ष जांच हो
8:16
सके जांच हो सके सबसे पहले क्या किया जाता है निलंबित
8:23
किया जाता है
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जब विभागीय जांच के पश्चात विभागीय
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जांच के पश्चात
8:44
पश्चात यह बात सही पाई जाती है यह
8:51
बात सही पाई जाती
8:57
है तो उसे बर्खास्त कर दिया जाता
9:05
है तो उसे बर्खास्त कर दिया जाता
9:15
है यहां पर हमने क्या देखा कि सबसे पहले निष्पक्ष जांच के लिए उसे निलंबित किया
9:20
जाता है क्या किया जाता है एक बार दंड हुआ और जब उसे विभाग को य जांच के बाद यह पता
9:26
चलता है कि इसने सही में पैसे लेकर मर्डर किया है तो उसे क्या किया जाता है नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है अर्थात यहां
9:33
पर दो बार दंड हुआ तो यह प्रशासनिक दंड है प्रशासनिक दंड दो बार दिया जा सकता है यह
9:38
क्या हुआ यह प्रशासनिक दंड
9:45
है प्रशासनिक दंड है यह दो बार दिया जा सकता है इतना सारा कुछ होने के पश्चात इस
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पर कोर्ट क्या करती है न्यायालय
9:59
लेकर हत्या करने के जर्म में पैसे
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लेकर हत्या करने के जुर्म
10:15
में जुर्म में उसे जेल
10:21
भेजती उसे जेल भेज
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दि पैसे लेकर हत्या करने की जोर में न्यायालय क्या करती है उसे जेल भेजती है
10:32
यहां पर जुडिशरी जुडिशरी द्वारा कितना बार दंड दिया गया है एक बार और प्रशासन द्वारा
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उसके प्रशासनिक उसकी जो विभागीय कारवाई हुई वो कितनी बार हुई है दो बार तो विभागीय कारवाई दो बार हो सकती है तीन बार
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भी हो सकती है लेकिन जो जुडिशरी पर डिसीजन देगी जुडिशरी जो उसे दंड देगी वो सिर्फ एक
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बार होगा तो इसमें 20 20 दो में कहा गया है कि दोहरे दंड से संरक्षण अर्थात किसी
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एक अपराध के लिए दो दो बार दंड नहीं दिया जा सक सि एक बार दन दिया जा सकता है ठीक
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अब आगे बढ़ते
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हैं बीस तीन के तहत
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है अपने खिलाफ अपने
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खिलाफ गवाही देने से संरक्षण
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से संरक्षण
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अर्थात किसी व्यक्ति को आ आत्म अभिस के लिए या अपने खिलाफ साक्ष देने के लिए
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गवाही देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है किसी भी अभियुक्त
11:51
को किसी भी अभियुक्त को
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अपने
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खिलाफ गवाही देने के
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लिए बाध नहीं किया जा
12:21
सकता बाध नहीं किया जा सकता
12:30
अब इसमें अपने खिलाफ गवाही देना इस श्रेणी में क्या आता है ब्रेन
12:37
मैपिंग ब्रेन मैपिंग
12:47
पॉलीग्राफ पॉली ग्राफी यह सब आता है अपने खिलाफ गवाही देने तो ये जबरदस्ती अगर कोई
12:55
तैयार नहीं है तो यह हम जबरदस्ती नहीं करा सकते
13:00
टेस्ट डीएनए टेस्ट ये इस श्रेणी में नहीं आता है क्या
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अपने खिलाफ गवाही देने से संरक्षण तो अपने खिलाफ डीएनए टेस्ट अगर किसी का हो रहा है तो यह इस श्रेणी में नहीं आता है डीएनए
13:16
टेस्ट इस श्रेणी में नहीं आता है इस श्रेणी में आता है ब्रेन मैपिंग पॉलीग्राफ यह सब आता है अर्थात किसी के किसी भी
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अवयुक्त का हम जबरदस्ती ब्रेन मैपिंग और पॉलीग्राफ नहीं कर सकते यह आपका आर्टिकल
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तीन हुआ 20 का तीन तो इसमें 20 में हमने क्या देखा सबसे पहला कि किसी भी व्यक्ति
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को या किसी भी अभियुक्त को जो जिस वक्त वह अपराध किया उस वक्त जो विधि उपलब्ध थी या
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उपस्थित उस विधि के अनुसार उसे अनुसार उसे दंड दिया जाएगा ना कि नए कानून बनाकर नए
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कानून बनाकर हम उसे दंडित करेंगे सेकंड एक अपराध के लिए हम दो बार दंडित नहीं कर
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सकते हैं तीसरा किसी भी व्यक्ति अभियुक्त को उसके उसे अपने खिलाफ साक्ष देने के लिए
14:06
बाध्य नहीं कर सकते यह आपका आर्टिकल 20 के तहत आता है अब आते हैं आर्टिकल 21
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में आर्टिकल
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21 आर्टिकल 21 क्या कहता है प्राण और दहिक स्वतंत्रता का
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प्राण और
14:38
दहिक स्वतंत्रता का
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संरक्षण स्वतंत्रता का
14:53
संरक्षण प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण किसी भी व्यक्ति
15:00
को उसके प्राण और दहिक स्वतंत्रता से विधि
15:06
द्वारा स्थापित प्रक्रिया के माध्यम से ही वंचित किया जाएगा अन्यथा नहीं किसी भी
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व्यक्ति के किसी भी व्यक्ति
15:20
के के प्राण और
15:29
दहिक स्वतंत्रता को दहिक स्वतंत्रता
15:38
को विधि द्वारा स्थापित विधि द्वारा
15:48
स्थापित प्रक्रिया
15:56
प्रोसीजर इस्टैबलिश्ड बाय लॉ
16:09
विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया से ही वंचित किया जाएगा से
16:14
ही वंचित किया
16:23
जाएगा अर्थात यहां पर कहने का तात्पर्य यह है कि किसी भी व्यक्ति के प्र और दैहिक
16:29
स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया यह मूलत चलन है जापान और ब्रिटेन में
16:37
ब्रिटेन में और यह वर्ड जो हम लिए है यह वर्ड हमने जापान से लिया यह वर्ड हमने कहां से लिया जापान से तो यह ब्रिटेन में
16:45
उपस्थित है और जापान में उपस्थित है और संसदीय प्रणाली संसदीय प्रणाली में य उपस्थित है ठीक तो यहां पर यह कहा गया है
16:54
कि विधि अर्थात संसद जो निर्धारित कर दी उस प्रक्रिया के माध्यम से ही वह
17:01
प्रक्रिया निर्धारित कर दी अब उस प्रक्रिया के माध्यम से ही हम किसी का जान ले सकते हैं अर्थात उसके प्राण और दहिक
17:07
स्वतंत्रता से वंचित कर सकते हैं अन्यथा नहीं अब यहां पर हम मान लेते हैं कि संसद
17:14
द्वारा यह कानून बना दिया जाए संसद
17:20
द्वारा कानून क्या कि नीली आंखों वाले लोगों
17:27
को नीली आंखों वाले लोगों
17:33
को आंखों वाले लोगों को जेल में बंद कर दिया
17:39
जाए जेल में बंद कर दिया
17:49
जाए अब नीली नीली आंखों वाले लोगों को जेल में बंद कर दिया जाए या फांसी पर चढ़ा
17:56
दिया जाए ये क्या किया गया ये संसद द्वारा बना गया अर्थात प्रक्रिया किसके द्वारा
18:01
निर्धारित किया गया है संसद द्वारा तो कोर्ट यहां पर सिर्फ विधि की व्याख्या कर
18:07
सकती है कोर्ट न्यायालय यहां विधि की व्याख्या कर सकती
18:17
है विधि की व्याख्या कर सकती
18:27
है और यह जान सकती है कि यह प्रक्रिया जो य जेल
18:33
भेजा जा रहा है तो कानून जो बनाया गया उस प्रक्रिया को यह फॉलो कर रहा है या नहीं
18:38
और यह दे सकती है देख सकती
18:46
है सकति है कि प्रक्रिया को फॉलो किया जा रहा है कि
18:52
नहीं प्रक्रिया को फॉलो किया जा रहा है
19:03
जा रहा है या नहीं अर्थात इसमें की कौन सी बात छुपी हुई
19:11
है कि कोर्ट यह देख देख सकती है कि कोर्ट को यह पावर दिया गया है कि
19:18
कार्यकारी के खिलाफ अगर कोई मनमानी कार्यपालिका कोई मनमानी कर रहा है तो
19:23
कार्यपालिका के खिलाफ उसे अधिकार मिला है
19:30
कोई मनमानी तो नहीं कर रही
19:37
है तो नहीं कर रही
19:44
है विधायिका के खिलाफ नहीं विधायिका जो कानून बनाई है के खिलाफ
19:56
नहीं तो यहां पर कोर्ट क्या देख सकती है वो प्रोसीजर देख सकती है कि विधायिका दिया
20:02
विधायिका द्वारा जो चीजें जो कानून बनाए गए हैं उस चीज को कार्यपालिका फॉलो कर रही है इंप्लीमेंटेशन में फॉलो कर रही है या
20:09
नहीं अगर कार्यपालिका उसे फॉलो नहीं कर रही है तो कार्यपालिका की जांच कर सकती
20:15
कार्यपालिका को य सुप्रीम कोर्ट आदेश दे सकती है कोर्ट आदेश दे सकती है ना कि विधायिका का यहां पर कोर्ट का कि है कोर्ट
20:22
का है विधि की व्याख्या करना और ये देखना कि कार्यपालिका सही तरीके से कार्य कर रही है या नहीं और इसमें देखते हैं तत्पश्चात
20:31
19550 में गोपालन
20:38
वाद वाद में 1950 के गोपालन वाद में
20:44
सुप्रीम कोर्ट उच्चतम न्यायालय का कहना
20:52
था कि हम यह देख रहे हैं कि कार्यपालिका
21:01
मनमानी कर मनमानी तो नहीं कर रही
21:07
है नहीं कर रही है न्यायपालिका
21:18
को न्यायपालिका को विधायिका के खिलाफ
21:33
खिलाफ नहीं वरन
21:41
मनमानी कार्यपालिका के
21:47
खिलाफ कार्यपालिका के खिलाफ शक्ति मिली
21:55
है शक्ति मिली अब इसी चीज को फॉलो किया जा रहा था 1978
22:04
में मेनका गांधी का पासपोर्ट जपत कर लिया गया मेनका गांधी का पासपोर्ट जप्त कर लिया
22:19
गया मेनका गांधी वाद
22:25
में पहले क्या था प्रोसीजर स्टब बाय लॉ इसे कहां से फॉलो लिया गया था इंडिया में
22:31
इसे लिया गया था जापान से इसे ब्रिटेन भी फॉलो करता था अब यहां पर मेनका गांधीवाद
22:37
में हमारे यहां ड्यू प्रोसेस ऑफ लॉ की एंट्री होती
22:44
है ड्यू प्रोसेस ऑफ
22:52
लॉ की एंट्री होती है
23:00
अर्थात विधि की उचित प्रक्रिया विधि की उचित
23:13
प्रक्रिया पहले विधायिका जो कानून बना दे रही थी उसका न्यायालय जांच नहीं कर सकता
23:18
अर्थात वह सिर्फ न्यायपालिका को कार्यपालिका के मनमाने पन पर प्रतिबंध
23:25
लगाने का अधिकार था वहां हस्तक्षेप का अधिकार था विधायिका में हस्प अधिकार नहीं था लेकिन मेनका वाद में देखते हैं कि
23:31
सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में डू प्रोसेस ऑफ लाया विधि की उचित प्रक्रिया
23:37
कि अब न्यायालय सिर्फ कार्यपालिका के ही नहीं विधायिका को विधायिका के इंटेंशन को
23:43
भी देखेगी कि जो भी कानून बनाया जा रहा है वह तर्क संगत है कि
23:49
[संगीत] नहीं न्याय योग्य है कि नहीं पारदर्शिता है कि
24:02
नहीं तर्क संगत न्याय योग पारदर्शिता यह सारी चीजें इनमें है कि
24:10
नहीं अर्थात वह विधायिका के इंटेंशन को देखेगी कि अगर जैसे व नीली आंखों वाले
24:17
लोगों को यहां पर जेल भेज दिया जाए अर्थात यह क्या है यह तर्क संगत नहीं है क्या है
24:24
यह तर्क संगत नहीं है क्यों नीली आंखों वाले लोगों को हम जेल भेज देंगे अ तर्क संगत नहीं है न्या योग नहीं है अर्थात
24:32
उसके इंटेंशन को भी देखेगी अब न्यायालय क्या देखेगी प्रोर प्रोसीजर स्टब बाल
24:38
अर्थात प्रक्रिया को भी देखेगी उसके इंटेंशन को भी देखेगी और अब विधायिका के
24:43
मनमानी पन पर भी वह रोक लगाएगी अगर विधायिका किसी चीज की मनमानी करती है तो
24:48
वहां पर भी सुप्रीम कोर्ट रोक लगाएगी तो यहां पर सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि
24:55
मानवीय जीवन मानवीय
25:02
जीवन पशु नहीं है पशुपत नहीं होना
25:10
चाहिए नहीं होना चाहिए
25:17
बल्कि गरिमा में होना
25:23
चाहिए होना चाहिए
25:29
मानवीय जीवन पशुपत ना होकर क्या होना चाहिए गणमा अर्थात मनुष्य कोई जिए तो पूरी
25:35
गणमा के साथ जिए उस पर किसी प्रकार का प्रतिबंध या रोक नहीं होना चाहिए और जो
25:42
विधायक का कानून बना बना रही है वह रिज पूर्ण होना चाहिए न्याय पूर्ण होना चाहिए तर्क संगत होना चाहिए पूरा पारदर्शी होना
25:50
चाहिए ठीक तो यहां पर हमने देखा आर्टिकल 21 के साथ जो पहले
25:55
प्रोसीजर प्रोसीजर एस्टेब्लिश बाय
26:03
लॉ एस्टेब्लिश बाय लॉ था उसमें मेनका गांधी बाद में ड्यू
26:10
प्रोसेस ऑफ लॉ का एंट्री हुआ ड्यू प्रोसेस ऑफ
26:17
लॉ का एंट्री हुआ इस यह जापान से लिया गया था और इसे ब्रिटेन भी फॉलो करता है और इसे
26:24
अमेरिका से लिया गया अर्थात इस चीज को फलो करके सुप्रीम कोर्ट के जो पावर थे जो
26:30
अधिकार थे उसमें बढ़ोतरी हो गई फिर पशु मत जीवन ना होकर गरिमामय जीवन
26:38
है तो आर्टिकल 21 में ऐसी चीजें जोड़ी जाने लगी जो उन्हें गरिमामय जीवन देने के
26:43
लिए ग अपना योगदान करती थी जैसे
26:52
जैसे आर्टिकल 2 में जो जोड़ा गया निजता का अधिकार
26:58
निजता का अधिकार शिक्षा का
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अधिकार स्वच्छ पर्यावरण का
27:17
अधिकार स्वच्छ पर्यावरण का
27:25
अधिकार सोने का अधिकार
27:33
यह स्वामी रामदेव पर जब दिल्ली में लाठी चार्ज हुआ था उस दरमियान सुप्रीम कोर्ट का
27:39
डिसीजन था कि सोने का अधिकार भी आर्टिकल 21 में शामिल है अर्थात यह भी फंडामेंटल
27:45
राइट में आता है ठीक है तो इस तरीके से बहुत सारे ऐसे अधिकार है जिनको 20 आर्टिकल
27:51
21 से जोड़ा गया जैसे शिक्षा का अधिकार ये
27:57
आर्टिकल 21 ए में शामिल किया गया किसम 86 व अमेंडमेंट के
28:03
द्वारा अमेंड मेंट के
28:09
द्वारा जोड़ा गया के द्वारा 2002
28:15
में जोड़ा गया अब यहां पर देखते हैं कि जो मेनका वाद
28:23
आया था तो मेनका वाद में क्या था कि उनके उनके पासपोर्ट को जपत करने जपत कर लिया
28:29
गया था अर्थात उन्हें विदेश जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है तो आर्टिक 21 के तहत
28:34
क्या है कि 19 के तहत अपने देश के भीतर युक्ति प्रतिबंध घूमने प्रतिबंध य
28:41
प्रतिबंध लगा सकते हैं आर्टिकल 91 19 के तहत लेकिन 21 के तहत अगर वह विदेश जाना
28:48
चाहता है बाहर घूमना चाहता है तो प्रतिबंध नहीं लगा सकते हैं
28:55
प्रतिबंध नहीं लगा सकते
29:01
नहीं लगा सकते ठीक ये आपका आर्टिकल 21 हो गया अब
29:07
आगे बढ़ते
29:19
हैं कुछ दशाओं
29:25
में गिरफ्तारी
29:31
और निरोध से संरक्षण और निरोध
29:39
से संरक्षण यह आर्टिकल 22 में कहा गया किसम
29:45
आर्टिकल 22 में क्या कहा गया है कि कुछ दशाओं में गिरफ्तारी और निरोध से संरक्षण
29:52
इसमें क्या है सबसे पहला है कि किसी भी गर तार
29:58
व्यक्ति को किसी
30:05
भी गिरफ्तार व्यक्ति
30:11
को तुरंत उसकी गिरफ्तारी
30:24
का का का कारण जानने का अधि अ
30:32
है अधिकार है
30:40
और अपनी पसंद के पसंद
30:47
के विधि व्यवसाय से विधि व्यवसाई या वकील
31:01
विधि व्यवसाई से
31:09
सलाह किसी भी व्यक्ति को जिसका जिसकी गिरफ्तारी हुई है उसे अपनी
31:15
गिरफ्तारी का कारण जानने का अधिकार है और अपनी पसंद के विधि व्यवसाई से सलाह का अधिकार है वो अपने
31:23
विधि व्यवसाय से मिल सके उसे सलाह मशवरा कर सके ठीक इसके अलावा
31:31
जिसकी गिरफ्तारी हुई है जिनकी गिरफ्तारी हुई है गिरफ्तारी के
31:39
पश्चात गिरफ्तारी के
31:44
पश्चात 24 घंटे के
31:50
अंदर के अंदर निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित
31:56
करना होगा निकटतम मजिस्ट्रेट के
32:05
समक्ष समक्ष उपस्थित करना
32:14
हो सबसे पहले गिरफ्तार व्यक्ति का उसकी गिरफ्तारी का कारण बताना होगा गिरफ्तारी
32:21
करने के पश्चात उसे अपने वकील से सला मशवरा करने का अधिकार होगा और गिरफ्तारी
32:26
के पश्चात 24 घंटे के अंदर जो निकटतम मजिस्ट्रेट है उनके सामने उपस्थित करना होगा इसमें आने जाने का जो टाइम होता है
32:34
वह छोड़कर लेकिन अगर यह
32:39
बातें यह बातें उन पर लागू नहीं होगी यह बातें उन
32:45
पर लागू नहीं
32:52
होगी किन पर लागू नहीं होगी पहला शत्रु देश के नागरिक
33:00
शत्रु देश के नागरिक
33:06
पर दूसरा निवारक निरोध के
33:13
तहत निवारक निरोध के तहत जिनकी गिरफ्तारी हुई
33:19
तहत जिनकी गिरफ्तारी
33:25
हुई हुई हो एक शत्रु देश के नागरिक पर यह तीनों बात
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शत्रु देश के नागरिक पर लागू नहीं होगी दूसरा जिनका निवारक निरोध के तहत जिनकी गिरफ्तारी हुई हो और निवारक
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निरोध की चर्चा हमारे संविधान में की गई है दो तरह के निरोध होते हैं दो तरह के रिटेंशन होते
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हैं पहला पिटी
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पहला है
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पिटि दूसरा है
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प्रीवेंटिव नेटिव के तहत आपने जो अपराध किया है अपराध के कारण दंड के स्वरूप में
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आपको जेल में निरुद्ध किया गया दंड स्वरूप आपने जो अपराध किया है अपराध के लिए जो
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आपको सजा मिली है उस सजा के रूप में आप जेल में बंद सजा के रूप
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में रूप में जेल में
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बंदी बंदी अर्थात य अपराध के बाद का अपराध करने के बाद आपको सजा मिली है उसके तहत
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आपको पटव दोषी दोषी मानते हुए जेल में बंद रखा गया है प्रीवेंटिव निवारक प्रीवेंटिव
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डिटेंशन यह है
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डिटेंशन प्रीवेंटिव में है कि आपने अभी अपराध कोई अपराध नहीं किया है लेकिन आपसे
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अपराध होने की संभावना है उसे प्रशासन को यह लगता है कि आप कोई अपराध करने वाले हैं
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उस कारण आपको क्या कर किया जाता है डिटेन कर लिया जाता है इसमें ज प्रीवेंटिव
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डिटेंशन में 90 दिनों के अंदर चार्ज शीट फाइल करना होता
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है चार्ज शीट अगर 90 दिनों से ज्यादा चार सीट 90
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दिनों से ज्यादा अगर उसे प्रिवेंट करना है तो क्या है कि इसे एक एडवाइजरी बोर्ड होती
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है एडवाइजरी बोर्ड जिसमें हाई कोर्ट के इक्विवेलेंट
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हाई कोर्ट जज के इक्विवेलेंट तीन मेंबर होते
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हैं उनसे परमिशन लेना होता है और उनसे परमिशन के पश्चात आप मतलब इसे धीरे-धीरे
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बढ़ा के आप इसे आगे बढ़ा सकते हैं लेकिन एक बार में 90 दिनों से ज्यादा आप इसे
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नहीं रख सकते 90 दिनों से ज्यादा रखना है तो एडवाइजरी बोर्ड से आपको परमिशन लेना ही
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लेना होगा ठीक है भारत में अभी तक प्रीवेंटिव डिशन के लिए अर्थात आपने कोई अपराध नहीं किया फिर भी
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आप जेल में बंद है अर्थात आपसे अंद गवर्नमेंट को आप पर यह शक है कि हो सकता
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है कि आप कोई अपराध कर दे तो उन अपराधों को रोकने के लिए जैसे
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मिसा टाडा
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पोटा इन जैसे कानून का निर्माण किया गया
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जैसे प्रीवेंटिव
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डिटेंशन कानून का निर्माण किया
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गया कानून का निर्माण किया गया
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आर्टिकल 23 एवं 24 अगला है शोषण के विरुद्ध अधिकार
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शोशनन के विरुद्ध
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अधिकार शोषण के विरुद्ध अधिकार इसके तहत क्या
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है आर्टिकल 23 के तहत गया कहा गया
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है आर्टिकल 23 एक के तहत कहा गया है कि मानव के
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दुर्व मानव के दुर्व पार प्र रोग मानव
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के दुर्व प्र
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रोग अब मानव का दुर्व पार क्या
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है पुरुष महिला
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बच्चे इसे बलात
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श्रम या पुरुष पुरुष का पुरुष का दुर्व क्या होगा दुर्व पार का
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अर्थ होता है गलत तरीके से खरीद गलत तरीके
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से गलत तरीके से खरीद
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फरोक अब गलत तरीके से खरीद फोक में पुरुष का गलत तरीके से खरीद फक्त क्यों होगा या
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तो उससे जबरदस्ती उससे मेहनत करवाया जाएगा लेबर का काम करवाया जाएगा या स्वास्थ
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अर्थात जैसे बहुत सारे ऐसे रैकेट होते हैं जो लोग गलत व्यापार करके उनके जो अंग होते
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हैं वह अंग निकाल लेते हैं क्या करते हैं उनके अंग निकाल लेते हैं तो इसमें बलात
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श्रम या उनका गलत तरीके से यूज करना महिला का खरीद फोप मूलत किसके लिए विवृति के
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लिए बच्चे का तो इनका है बला
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सरम या अन
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कार्य तो इन सारी चीजों पर आर्टिकल 23 एक के तहत इन सारी चीजों पर रोक लगाई गई
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अर्थात पुरुष हो महिला हो बच्चे हो इनका दुर्व आप नहीं कर सकते हैं अर्थात उनका
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गलत तरीके से खरीद फरोख नहीं कर सकते इस पर रोक लगाई गई है आर्टिकल दो के तहत
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आर्टिकल 2 दो के तहत
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सार्वजनिक सेवा
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में सार्वजनिक सेवा में सेवा के
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लिए लोगों को बुलाया जा सकता
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है लोगों को बुलाया जा सकता
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है इसमें जाति
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धर्म लिंग जन्म
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स्थान के आधार
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पर भेदभाव नहीं किया
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जाएगा नहीं किया जाएगा आर्टिकल 2 दो क्या कहता है कि
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सार्वजनिक सेवा के लिए लोगों की सेवा ली जा सकती है और इसमें
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किसी भी प्रकार का जाति धर्म वंश इस आधार पर भेदभाव नहीं किया
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जाएगा आर्टिकल 24 क्या है 24
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है बालकों के नियोजन पर
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प्रतिबंध बालकों के नियोजन पर प्रतिबंध अर्थात आर्टिकल 24 के तहत बच्चों को
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बच्चों का जो नियोजन है कि कहीं काम पर लगा देना इस पर पूर्णतया रोक लगा दिया गया
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अर्थात कारखानों उद्योगों में 14 साल के बच्चों का नियोजन हम नहीं कर सकते हैं
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उद्योगों कारखानों
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इत्यादि में 14 वर्ष के बच्चों
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का के बच्चों का
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नियोजन नहीं कर सकते नहीं कर सकते हैं
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उद्योगों कारखानों इत्यादि में 14 वर्ष के बच्चों का नियोजन नहीं कर सकते हैं 2012
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में इसमें सुधार किया गया अर्थात कि अब यहां 14 की जगह 18 कर दिया गया 14 की जगह
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18 कर दिया गया कि 18 साल अर्थात 14 के बाद से क्या
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होता परमिटे बल हो जाता है लेकिन अब 18 साल तक के बच्चों को उदयोग में नहीं लगा सकते हैं कारखानों में नहीं लगा सकते हैं
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लेकिन 14 से 18 साल तक के बच्चों को 14 से 18 साल के बच्चों को गृह कार्य में गृह
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कार्य में परमिट कर सकते हैं गृह कार्य
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में परमिट है लेकिन कितना मात्र साढ़े
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घंटा साढ़े घंटा
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ही काम करवा सकते हैं ही काम करवा सकते
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हैं कि उद्योगों में कारखानों में 14 साल पहले था 2000 बाद में उसे चेंज किया गया
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और वहां पर 14 के बदले 18 कर दिया गया अर्थात उद्योगों में कारखानों में 18 साल
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के बच्चे 18 साल प्लस जो हुए उनसे ही आप काम करवा सकते हैं उससे कम के बच्चों का
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आप काम नहीं करवा सकते हैं और पहले देखा जाता था कि सड़क किनारे जो ढा वे खुले
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होते थे उसमें छोटे-छोटे बच्चे काम करते करने करते थे तो उस पर अभी देखने में आता
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है कि किसी भी ढाब में छोटे-छोटे बच्चे काम नहीं कर नहीं कर रहे हैं कारण क्या कि इस पर बैन लग गया कि अगर ढव में छोटे-छोटे
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बच्चे काम करते पाए गए तो पहले था 500 अब बढ़ा के कर दिया गया है 2 लाख कि अगर पाए
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गए तो उन पर जुर्माना किया जाएगा अगर बार-बार पाए जाते हैं तो उनको जेल भी भेजा
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जा सकता है और बचपन बचाओ आंदोलन
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बचपन बचाओ
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आंदोलन यह किसके द्वारा चलाया गया है कैलास सत्यार्थी के
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द्वारा कैलास सत्यार्थी के
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द्वारा और इनको नोबल प्राइज भी मिला है क्या मिला है
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नोबेल प्राइज तो कैलाश सत्यार्थी का मूल काम
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क्या था कि जो बच्चे उद्योगों में
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हो कारखानों में हो या चिमनी भट्ठे पर
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हो पर हो उनको वहां से मुक्ति दिलाकर
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उनको वहां से मुक्ति दिलाकर उन्हें शिक्षित करना और इसी बेहतर कार्य के लिए
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क्या हुआ कैलाश सत्यार्थी को नोबल प्राइज दिया गया यहां पर हमने आर्टिकल 2 और 24 के
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तहत क्या देखा 2 के तहत हमने देखा मानव का दर् व्यापार आर्टिकल 2 के त देखा एक के तह
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मानव का दर् व्यापार का दर्
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व्यापार और 24 के तहत हमने क्या देखा कि 14
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वर्ष से छोटे बच्चों
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बच्चों का
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उद्योगों कारखानों आदि
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में कार्ज करने पर प्रतिबंध कार्ज करने पर
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प्रतिबंध 14 वर्ष जो अब यसे बदल के कितना किया गया 18 किया गया और यहां पर मानव में
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बच्चे भी आते हैं मानव में क्या आते हैं बच्चे भी आते हैं इस कारण यहां पर मानव में इ मनुष्य व्यक्ति
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महिला बच्चे और इसमें स्पेशली आर्टिकल 24 बच्चों के लिए ही किया गया है और इसमें हम
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कहीं ना कहीं देख रहे हैं सरकार इस संदर्भ में इसे और मजबूत करने के लिए बाल संरक्षण
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अधिकार आयोग बाल संरक्षण अधिकार
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आयोग अधिकार आयोग
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आयोग बाल
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नीति इनको शिक्षा को शिक्षा पर एफेसस देने के लिए संविधान संशोधन इत्यादि किए गए
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जिससे आर्टिकल 24 को ज्यादा से ज्यादा क्या हो फ्रूटफुल बनाया जा सके आर्टिकल 24
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को ज्यादा से ज्यादा फ्रूटफुल बनाया जा सके क्योंकि अगर इस पर प्रतिबंध नहीं लगता है अगर यहां से बच्चों को मोड़कर शिक्षा
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की तरफ क्योंकि बच्चे ही देश के भविष्य हैं बच्चे ही देश के भविष्य
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हैं देश के भविष्य हैं अगर ये बच्चे यहां पर ही रह जाते हैं तो योग्य ह्यूमन
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रिसोर्सेस नहीं बन पाएंगे अगर यहां से मोड़कर उसे बेहतर शिक्षा और बेहतर स्वास्थ की सुविधा दी जाती है तो य वो देश के लिए
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बेहतर रिसोर्सेस बनते हैं ठीक और इसके लिए गवर्नमेंट अपनी तरफ से प्रयासरत है और
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प्रयासरत में क्या है कि उन कम उम्र के बच्चों पर तो पूरा काम करने प्रतिबंध लगा ही गया है साथ ही साथ उसे सशक्त करने के
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लिए बाल संरक्षण अधिकार आयोग बाल नीति यह सारी चीजें आई है और नई शिक्षा नीति में
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शिक्षा अर्थात सभी लोगों सभी लोगों तक शिक्षा की पहुच बन सके विशेषकर ऐसे तबके
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जो गरीब है तो उन लोगों तक शिक्षा की पहुंच पहुंच बन सके इसके लिए राज्य क्या
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है ज्यादा से ज्यादा जागरूक है कि छोटे-छोटे बच्चे या वैसे बच्चे अनाथ बच्चे
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उन्हें भी शिक्षा प्राप्त हो उन्हें भी बेहतर खाद्य सामग्री मिले सरकार इसके लिए
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अपनी तरफ से प्रयासरत है आज के लिए बस इतना ही श इसकी करी जारी रहेगी नेक्स्ट
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क्लास में नेक्स्ट क्लास में आपका आर्टिकल 20 ये धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार बचा
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हुआ है संस्कृति एवं शिक्षा संबंधी अधिकार बचा हुआ है ये दो अधिकार बचे हुए और उसके
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बाद रेमेडीज बचा हुआ है और फिर इस पर फंडामेंटल लाइट पर सुप्रीम कोर्ट के जो डिसीजन वगैरह है उन पर चर्चा होगी नेक्स्ट
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क्लास में और उसके बाद ये क्लास खत्म हो जाएगी उसके बाद अगले टॉपिक की तरफ हम बढ़ेंगे आज के लिए बस इतना ही जय हिंद जय
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भारत h
#Legal
#Constitutional Law & Civil Rights

