Fundamental Rights | #ParikshaJunction | #MuftShiksha | #FundamentalRights #freeclasses
Nov 12, 2024
The #FundamentalRights in India enshrined in part III (Article 12–35) of the #Constitution of India guarantee civil liberties such that all Indians can lead their lives in peace and harmony as citizens of #India. These rights are known as "fundamental" as they are the most essential for all-round development i.e., material, intellectual, moral and spiritual and protected by fundamental law of the land i.e. constitution. If the rights provided by Constitution especially the Fundamental rights are violated the Supreme Court and the High Courts can issue writs under Articles 32 and 226 of the Constitution, respectively, directing the State Machinery for enforcement of the fundamental rights.
These include individual rights common to most liberal democracies, such as equality before law, freedom of speech and expression, freedom of association and peaceful assembly, freedom to practice religion and the right to constitutional remedies for the protection of civil rights by means of writs such as habeas corpus. Violations of these rights result in punishments as prescribed in the #BharatiyaNyayaSanhita #BNS subject to discretion of the judiciary. The Fundamental Rights are defined as basic human freedoms where every Indian citizen has the right to enjoy for a proper and harmonious development of personality and life. These rights apply universally to all citizens of India, irrespective of their race, place of birth, religion, caste or gender. They are enforceable by the courts, subject to certain restrictions. The Rights have their origins in many sources, including England's Bill of Rights, the United States Bill of Rights and France's Declaration of the Rights of Man. #Satta #politics #king
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0:21
आ
0:36
नमस्कार दोस्तों मैं प्रवीण कुमार सिंह परीक्षा जंक्शन पर आप लोगों का मैं स्वागत करता हूं आज हम लोग जनरल स्ट्रेटजी के करी
0:45
में हम लोग कांस्टिट्यूशन पढ़ रहे हैं और कांस्टिट्यूशन में आज का जो टॉपिक होगा वह
0:51
होगा फंडामेंटल राइट जो कि परीक्षा के दृष्टिकोण से भी बहुत महत्त्वपूर्ण है और
0:57
आपके दैनिक जीवन को जीने के दरमियान भी यह फंडामेंटल राइट की अगर आपको जानकारी है तो
1:03
वहां भी हमें बहुत सार बहुत सारी सहूलियत मिलती है इसलिए फंडामेंटल राइट बहुत ही
1:09
इंपॉर्टेंट टॉपिक है और आज हम लोग फंडामेंटल राइट अर्थात मूल अधिकार पढ़ेंगे
1:14
ठीक है चलते हैं मूल
1:23
अधिकार मूल अधिकार
1:30
फंडामेंटल
1:44
राइट मूल अधिकार को समझने से पहले हम लोग थोड़ा बैक चलते हैं पीछे चलते हैं कि
1:51
वर्तमान में भारत में एवं इसके अलावा पूरी दुनिया में बहुत सारे देशों में
1:56
डेमोक्रेसी है और डेमोक्रेसी से पहले बहुत सारे देशों में मोनार्की था अर्थात
2:03
राजतंत्र तो राजतंत्र से जो परिवर्तन होते हुए आज हम लोकतंत्र में आए तो राजतंत्र
2:10
में और लोकतंत्र में क्या अंतर है इस पर हम चर्चा करेंगे तो देखते हैं कि राजतंत्र
2:20
में और लोकतंत्र
2:27
में ये मोनार्की हुआ
2:32
और
2:39
डेमोक्रेसी मोनार्की में देखते हैं कि हम लोग सिर्फ ड्यूटी पर बल देते
2:44
थे क्या होता था कि जो राजतंत्र आत्मक व्यवस्था थी पहले
2:52
वहां पर ड्यूटी पर ज्यादा बल होता था वहां पर अधिकारों की चर्चा ना के बराबर होती थी
2:58
अर्थात सिर्फ ड्यूटी पर चर्चा होती थी डेमोक्रेसी में क्या देखते हैं यहां पर
3:04
ड्यूटी है लेकिन प्राथमिकता यहां पर क्या होगी अधिकार की राइट्स
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की अधिकार की और साथ ही साथ कर्तव्य
3:17
अर्थात ड्यूटी अंतर क्या देखते हैं कि मोनार्की
3:24
में पहले सिर्फ ड्यूटी होता था और डेमोक्रेसी में क्या देखते हैं य राइट के
3:30
साथ साथ ड्यूटी है अर्थात एक सिक्के के दो पल जहां जहां
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अधिकार है वहां वहा ड्यूटी है जहां जहां ड्यूटी है वहां वहां अधिकार अब चलते हैं
3:42
किय अधिकार आखिर होता क्या है अधिकार मूलत आपको अपने व्यक्तित्व के
3:50
विकास में जो आप अपना व्यक्तित्व का विकास करते हैं उसके लिए आवश्यक परिवेश मुहैया कराता
3:59
है उसके लिए जो है आवश्यक परिवेश महिया कराता है तो यहां पर हम देखते हैं अब आते
4:07
हैं भारत के संदर्भ में ये फंडामेंटल लाइट क्या है
4:14
कि यहां पर मौलिकता मूल को अलग कर देते हैं और अधिकार क्योंकि अधिकार आपको प्रवेश
4:20
महिया कराता है अधिकारों में भी वैसे अधिकार जिसके बिना आप अपने व्यक्तित्व का
4:28
थोड़ा भी विकास नहीं कर सकते अधिकारों में भी जो वैसे अधिकार जो प्राथमिकता रखते हैं
4:33
अर्थात वैसे अधिकार जो आपके सवा सर्वांगी
4:38
विकास में मुख्य भूमिका का निर्वाहन करता तो यहां पर चलते
4:45
हैं जैसे कोई वस्तु है या विचार है तो
4:50
वस्तु का कोई वस्तु या विचार वस्तु या
4:57
विचार वस्तु क्या है य वर्तमान आपके समक्ष फिजिकली अस्तित्व में अर्थात आपके नजर के
5:05
सामने है कि फला सामने कुर्सी पड़ी हुई है मेज पड़ी हुई है कोई भी चीज या उसका हमारे
5:12
मस्तिष्क में आइडिया होता या तो कोई वस्तु अस्तित्व में है या उसका आईडिया हमारे
5:18
दिमाग में कोई वस्तु या विचार का वह मुख्य गुण कोई वस्तु है या विचार है उसका वह
5:27
मुख्य गुण जिसके बिना उस वस्तु या विचार के अस्तित्व
5:33
की कल्पना हम नहीं कर सकते हैं वह उसकी मौलिकता है ठीक अर्थात कि वस्तु अस्तित्व
5:40
में है विचार हमारे दिमाग में है कोई वस्तु या विचार का वह मुख्य गुण जिसके
5:47
बिना हम उस वस्तु या विचार की कल्पना नहीं कर सकते हैं वही मौलिकता कहलाती
5:57
है मौलिकता अत मूल है जिसके बिना वस्तु या विचार का अस्तित्व नहीं हो सकता जैसे
6:05
उदाहरण स्वरूप हम समझने का प्रयास करते हैं उदाहरण में देखते हैं कि विवेकशील
6:17
रेलिटी विवेकशील और इंसानियत इंसानियत
6:29
शलता एवं इंसानियत यह मनुष्य का मूल गुण क्या है यह मनुष्य
6:36
का मूल गुण है मनुष्य का मूल
6:44
गुण मूल गुण अगर मनुष्य से इन दो मूल गुणों को
6:51
निकाल दिया जाए वेलता एवं इंसानियत को तो क्या मनुष्य एक अन्य प्राणी जैसे पशु जन्य
7:00
प्राणी उसमें जैसे गाय भैस या कोई भी प्राणी लेते हैं उनमें और मनुष्य में क्या
7:06
अंतर रह जाएगा जब मनुष्य उसकी विवेकशील और इंसानियत निकाल दिया जाए अर्थात मनुष्य को
7:11
मनुष्य यह विवेकशील और इंसानियत ही बनाते हैं अर्थात इसे विशिष्ट कौन बनाता है इसे
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विशिष्ट विक शलता और इंसानियत बनाता है अब आते हैं इस उदाहरण को समझते हुए मूल
7:27
अधिकार अर्थात अधिक के वैसे विशिष्ट गुण
7:32
जो अधिकारों में वैसे अधिकार जो मनुष्य के
7:38
अपने सर्वांगी विकास में अपना योगदान देता अर्थात ऐसा परिवेश उपलब्ध कराता हो जिससे
7:46
मनुष्य अपना चहुमुखी कहे या सर्वांगी विकास कहे इसके लिए परिवेश महिया कराता है तो हम
7:54
यहां पर मूल अधिकार किसे कहेंगे मूल
8:10
अधिकार वैसे
8:16
अधिकार वैसे अधिकार जो मनुष्य
8:27
को जो मनुष्य को
8:35
अपने सर्वांगीण विकास में सर्वांगीण विकास के
8:46
लिए परिवेश या पर्यावरण पर्यावरण
8:53
परिवेश या पर्यावरण
8:59
मुहैया कराता
9:06
है मूल अधिकार कहलाता है मूल
9:16
अधिकार कहलाता है अब यहां पर सर्वांगी विकास का मतलब
9:23
क्या हो सर्वांगी विकास को हम इस रूप में देते हैं देखते हैं कि उसका भौतिक विकास
9:33
हो और उसका नैतिक
9:39
विकास इस भौतिक विकास का क्या मतलब इस भौतिक विकास का मतलब है कि मनुष्य
9:47
को या व्यक्ति को अपने सामाजिक आर्थिक
9:53
राजनीतिक आयामों को प्राप्त करने में जो परिवेश या पर्या उपलब्ध कराए अर्थात य कौन
10:01
उपलब्ध कराएगा फंडामेंटल राइट तो फंडामेंटल राइट देखते हैं मनुष्य अपने सर्वांगी विकास अर्थात चहुमुखी विकास में
10:09
चाहे वह सामाजिक स्तर पर हो चाहे राजनीतिक स्तर पर हो चाहे आर्थिक स्तर पर
10:14
हो उसके विकास में यह भौतिक तत्व मुख भूमिका निभाते हैं नैतिक य आपकी य मनुष्य
10:22
की आंतरिक मनुष्य के आंतरिक गुण है इस लोक इस दुनिया में व्यवस्था बनाने में योग
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प्रदान करता है साथ ही साथ उसमें आध्यात्मिक उन्नति का
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रास्ता प्रशस्त करता है उन्नति का
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रास्ता खलता है ठीक अब यहां पर हम समझ गए कि आखिर यह
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मूल अधिकार क्या है तो भारत में यहां के लोग भारत में यहां
11:00
ऐसा परिवेश मुहैया कराना या ऐसा पर्यावरण देना जिससे व्यक्ति अपना सर्वांगी विकास
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कर सके ठीक अब हम चलते हैं कि यह आखिर य इसकी तो कभी ना कभी उत्पत्ति हुई होगी ऐसा
11:14
तो नहीं एक बार लोग को मिल गया है इसका भी क्रमश देखते हैं इसका भी विकास होता है तो
11:20
इसके विकास के देखते हैं वैश्विक परिदृश्य पर क्या हो रहा
11:30
स्तर पर अर्थात ग्लोबल लेवल
11:38
पर और दूसरी तरफ देखते हैं इंडिया के
11:47
लेवल सबसे पहले हम चर्चा करेंगे वैश्विक स्तर कि वैश्विक स्तर पर जो अधिकारों की
11:55
बात की गई यह सर्वप्रथम कब की गई लोगों को सर्वप्रथम अधिकार कैसे मिले किस रूप में
12:01
मिले तो यहां पर हम देखते हैं कि 15 जून 1215 में 15
12:10
जून 1215 में कहां पर तो ब्रिटेन
12:19
में क्या हुआ इसमें इसमें यह हुआ ब्रिटेन के राजा जॉन
12:25
थे राजा जॉन तो उनके कुछ नजदीकी जैसे यह सेंटर में य
12:32
राजा हो गए और चारों तरफ मान लेते इनकी प्रजा है तो इनके इर्दगिर्द के जो सामंत
12:37
थे तो उने उन्होंने राजा पर दबाव बढ़ाया कि ऐसा है कि आप हमें कुछ भी अधिकार
12:44
द अधिकारों के लिए उन्होंने राजा पर दबाव बनाया और राजा उस दबाव में आए और उन्होंने
12:51
अपने नजदीकी सामंतो को कुछ विशेष अधिकार दिए
13:24
उन्होंने अपने राजा पर कुछ प्रेशर दिया और राजा ने उन्हें कुछ अधिकार दिया राजा ने
13:31
जब उ उन पर अधिकार उन्हें अधिकार दिया ठीक तो यह बात धीरे-धीरे इन लोगों को भी अखने
13:38
लगे कि इन्हें अधिकार मिला है तो आखिर हमें क्यों नहीं अधिकार मिला इन्हे अधिकार
13:44
मिला तो हमें क्यों नहीं अधिकार मिला तो अब इन लोगों की भी चाहत हुई कि य अ
13:49
अधिकारों का जो दायरा है उन दायरा को बढ़ाया जाए तो देखते हैं 1688
13:56
में ब्रिटेन में ग्लोरियस रिवोल्यूशन हुआ
14:03
ग्लोरियस रिवोल्यूशन हुआ जिसमें राजा को हटाकर उनके दामाद को
14:11
वहां का राजा बना दिया गया जब चूंकि उनके दामाद को बनाया गया उनके दामाद ने एश्योर
14:17
किया था कि जब हम राजा बनेंगे तो ये अधिकारों का जो दायरा है इन अधिकारों के दायरे को हम बढ़ा देंगे तो देखते हैं कि
14:25
1689 में उन्होंने अधिकारों का दायरा बढ़ा दिया अर्थात इसे विस्तृत कर
14:33
दिया अधिकारों का
14:38
दायरा दायरा बढ़ा
14:45
दिया अब इसके बाद देखते हैं इसे मिटा देते हैं
15:15
1789 में ब्रिटेन के बाद 1789 में फ्रांस
15:25
में फ्रांस ने अपने नागरिकों को अपने नागरिकों
15:33
को अधिकार
15:38
दिया अधिकार दिया पुनः देखते हैं 1789 के पश्चात
16:04
1789 के प पश्चात 1791
16:10
में अमेरिका में भी अपने नागरिकों को राइट्स
16:20
दिए और 1791 में यह अमेरिका के मूल संविधान में राइट्स की बात नहीं की गई थी
16:27
अमेरिका के मूल संविधान में राइट्स की बात नहीं की गई थी अर्थात वहां संविधान संशोधन
16:33
करने के पश्चात वहां पर संविधान संशोधन करके वहां पर राइट्स जनता को दिया गया फिर
16:38
देखते हैं 1945 में यूएनओ के
16:46
द्वारा मानवाधिकार की बात की गई कि मानव होने के नाते सभी लोगों के कुछ
16:56
राइट्स बनते हैं और उन राइट्स से मानव को विमुख या उसे हटाया नहीं जा सकता अर्थात
17:01
मानव होने के नाते हर एक व्यक्ति का हर एक मानव का अधिकार बनता है अब आते हैं यह तो
17:08
वैश्विक परिदृश्य पर हमने देखा कि वैश्विक परिदृश्य पर राइट्स की बात कैसे चली
17:14
थी अब अब आते हैं हम इंडिया के लेवल पर इंडिया में देखते हैं कि सर्वप्रथम अन
17:23
ब्रिटिश रूल इन इंडिया अ अन ब्रिटिश रूल इन
17:32
अन ब्रिटिश रूल इन
17:37
इंडिया अन ब्रिटिश रूल इन इंडिया यह दादा भाई नरोजी द्वारा लिखा गया था इसके माध्यम
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से यह इंगित करने का प्रयास किया गया कि हमारे यहां जो शासन कर रहे हैं वह
17:50
ब्रिटिशर्स नहीं है वह अंग्रेज नहीं है अंग्रेज तो अच्छे लोग होते हैं जो ब्रिटेन
17:56
में शासन कर रहे हैं जो इंग्लैंड में शासन कर रहे हैं क्योंकि वो वहां पर जो शासन कर
18:01
रहे हैं वहां पर अपनी जनता के साथ अच्छा व्यवहार करते हैं उनको वो राइट्स दिए हुए
18:07
हैं क्योंकि हमारे यहां जो शासन कर रहे हैं तो जो वहां पर ब्रिटेन में जो व्यवहार
18:12
होता वो व्यवहार अंग्रेज हमारे साथ नहीं कर रहे हैं अर्थात ये अन ब्रिटिश है अर्थात ये अंग्रेज नहीं है अंग्रेज होते
18:18
अंग्रेज अच्छे लोग होते ये हमें राइट्स देते अर्थात ये हमारे साथ अच्छा व्यवहार करते तो सर्वप्रथम एक तरह से राइट्स की
18:25
बात न ब्रिटिश रूल इन इंडिया में आया ठीक इसके बाद देखते हैं कि
18:58
और इसके पश्चात बहुत सारे कांग्रेस के अधिवेशन हुए उन अधिवेशन में भी फंडामेंटल
19:05
राइट्स की बात की गई कि यहां के लोगों को भी कुछ राइट्स मिलना चाहिए लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया गया 1925 में देखते
19:13
हैं कि ए एनी वेसेंट द्वारा एनी वेसेंट
19:24
द्वारा राइट्स की बात की गई कि इंडिया के लोगों को भी फंडामेंटल राइट्स मिलना चाहिए
19:31
लेकिन इसे भी नहीं माना गया और देखते हैं उसके पश्चात जो एक्ट्स अधिनियम भारत में
19:36
बनाए जा रहे थे किसी में भी फंडामेंटल राइट्स की बात नहीं की और कांग्रेस द्वारा
19:43
जो भी कांग्रेस का अधिवेशन होता था उन अधिवेशन में भी फंडामेंटल राइट्स की चर्चा होती थी लेकिन इसे एक्सेप्ट नहीं किया
19:50
जाता था लेकिन लास्टली देखते हैं 1946
19:56
में पहली बार कैबिनेट मिशन द्वारा फंडामेंटल राइट्स को एक्सेप्ट किया गया
20:02
1935 का जो एक्ट आया था उसमें भी फंडामेंटल राइट को रिजेक्ट कर दिया गया था लेकिन पहली बार 1946 में कैबिनेट मिशन
20:14
द्वारा कैबिनेट मिशन
20:19
द्वारा फंडामेंटल राइट की फंडामेंटल राइट को एक्सेप्ट किया गया कि हां यहां के
20:26
लोगों को फंडामेंटल राइट्स मिलना चाहिए अब आते हैं देखते हैं कि वैश्विक स्तर पर
20:31
भी हमने देख देख लिया कि वहां राइट्स का धीरे-धीरे कैसे ग्रो होता है और इंडिया के
20:38
स्तर पर भी हमने देख दिया देख लिया कि अन ब्रिटिश रूल से ही हम देखते हैं कि जो यह बुक आई थी उसमें भी राइट्स की चर्चा की गई
20:45
भाई कि जो हमारे यहां शासन चल रहा है वो अन ब्रिटिशर्स है अर्थात ब्रिटिशर्स तो वो
20:50
है जो अपने जनता को हक और अधिकार दिए हैं उनके साथ अच्छा व्यवहार कर रहे हैं हमें यह जो वर्तमान में भारत की जो शासन
20:57
प्रणाली है वह ना हमें हक और अधिकार दे रहे हैं ना हमारे लोगों के साथ अच्छा व्यवहार कर रहे हैं फिर 18995 में देखि
21:05
तिलक द्वारा जो इंग्लैंड में स्वराज विधेयक पेश किया गया था उसमें भी राइट्स
21:11
की बात की गई और क्रम से देखते हैं कि फंडामेंटल लाइ की मांग होती रही ठीक और
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अंततः संविधान सभा द्वारा जो संविधान बनाया गया उसमें विधिवत फंडामेंटल राइट की
21:23
चर्चा की गई अब आगे बढ़ते हैं
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कि हमारे संविधान में फंडामेंटल राइट की चर्चा कैसे की गई किस रूप में की गई तो यह
21:35
भाग फंडामेंटल
21:49
राइट यह भाग जो है तीन में
21:55
है और इसकी चर्चा आर्टिकल 12 से 35 में की गई चर्चा कितने
22:03
से कितने में की गई है आर्टिकल 12 से 35 में की गई अब यहां पर हम एक एक आर्टिकल के
22:09
तहत समझने का प्रयास करेंगे कि आखिर है क्या तो आर्टिकल 12 में क्या
22:15
है आर्टिकल 12 में इसमें राज्य की परिभाषा दी
22:21
गई राज्य की परिभाषा
22:29
अब राज्य की परिभाषा क्या है तो राज्य की परिभाषा यह
22:34
है कि राज्य एक इंस्टिट्यूशन है राज्य एक
22:40
इंस्टिट्यूशन
22:50
है जो कानून बनाता है
22:59
आदेश देता
23:05
है अब हम किन किन चीजों को किनको किनको हम राज्य की परिभाषा के तहत रखेंगे तो इसके
23:13
तहत हम देखते हैं राज्य के
23:18
तहत सबसे पहले आता है भारत सरकार विधायिका भारत की विधायिका
23:30
एवं सरकार एवं
23:38
सरकार दूसरे स्तर पर देखते हैं राज्य की विधायिका
23:51
एवं
23:57
सरकार तीसरे स्तर पर देखते हैं पंचायती
24:06
राज या लोकल सेल्फ गवर्नमेंट लोकल
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सेल्फ गवर्नमेंट और चौथे में देखते हैं अदर
24:26
अथॉरिटी अदर अथॉरिटी इस अदर अथॉरिटी में कौन आते हैं इस अदर
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अथॉरिटी में वो आते हैं जो कुछ विशेष विशेषज्ञता लिए होते हैं जो कुछ
24:37
विशेषज्ञता लिए होते हैं जैसे ओएनजीसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी तो अब
24:44
है कि सरकार कानून बनाकर इनको कहती है ठीक है आपको हम यह हक और अधिकार देते हैं आप
24:50
अपने लिए कानून बनाइए और आप उसे इंप्लीमेंट करिए तो वो अपने क्षेत्रों में अपने लिए कानून भी बनाते हैं और
24:56
इंप्लीमेंट भी करते हैं लेकिन इन्ह संप्रभु शक्ति इनके पास नहीं होती इनके
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पास संप्रभु शक्ति नहीं
25:10
होती संप्रभु शक्ति नहीं
25:17
होती ठीक तो हमने क्या देखा कि राज्य की परिभाषा के तहत कौन-कौन आते हैं तो इसमें
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सर्वप्रथम भारत की विधायिका भारत की संसद एवं सरकार राज्य की विधायिका जहां
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पर यह वहां की विधायिका में जहां पर यह विधान परिषद भी है विधानसभा भी है दोनों
25:36
शामिल हो जाते हैं या जहां पर सिर्फ विधानसभा है वह एवं सरकार तीसरा है
25:42
पंचायती राज जो लोकल सेल्फ गवर्नमेंट है तो उन्हें भी अपने क्षेत्र में कानून बनाने का अधिकार है कि इंडिया में एक साथ
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तीन व्यक्ति शासन करते हैं सबसे पहले केंद्र सरकार शासन करती है राज सरकार शासन करती है और पंचायती राज भी उन पर शासन
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करती है और चौथे में जिसे विधान बनाकर यह अधिकार दे दिया गया कि आप अपने लिए कानून
26:02
बनाइए उसे इंप्लीमेंट कीजिए और जो नहीं मानते उ दंडित भी करें लेकिन इनको संप्रभु
26:08
शक्ति नहीं दिया गया ठीक अब आगे बढ़ते
26:15
हैं अब आता है आर्टिकल
26:20
13 आर्टिकल 13 में उन चीजों की चर्चा की गई है कि जो मूल अधि में अल्पी करण करते
26:29
हैं अर्थात मूल अधिकार को कम करते हैं तो जो मूल अधिकार को कम करते हैं अर्थात जिस
26:36
मात्रा तक कम करते हैं उस मात्रा तक वह कानून क्या होगा अवैध होगा
26:41
अनकंस्टीट्यूशनल होगा इलीगल होगा जैसे आर्टिकल 13 एक में कहा गया
26:49
है कि वैसे कानून जो स्वतंत्रता पूर्व से
26:55
विद्यमान वैसे कानून
27:00
वैसे कानून
27:06
जो स्वतंत्रता पूर्व
27:13
से
27:20
विद्यमान अगर इनका मूल अधिकार से टकराव होता है अगर इनका इन कानून का
27:28
मूल अधिकार से टकराव होता
27:37
है तो जिस मात्रा तक यह मूल अधिकार से टकराते हैं उस मात्रा तक यह कानून क्लिप्स
27:45
ग्रहण लग जाएगा अर्थात पूर्व के व्यवहारों के लिए तो सही है लेकिन वर्तमान में उस पर
27:50
ग्रहण लग जाएगा अर्थात उसका कोई मतलब नहीं होगा इसे कहते हैं जैसे यह स्वतंत्रता के
27:57
पूर्व का कोई कानून है ठीक य और वर्तमान में ये फंडामेंटल
28:06
राइट और फंडामेंटल राइट्स यह जो कानून बना है यह फंडामेंटल राइट से टकरा रहा
28:12
अर्थात तो ये जो टकरा रहा है तो स्वतंत्रता बाद स्वतंत्रता बाद के लिए एक
28:19
कानून क्या होगा इस पर ग्रहण लग जाएगा अर्थात इसका कोई मान्यता नहीं होगा लेकिन
28:24
स्वतंत्रता पूर्व के लिए यह मान्य होगा पहले के व्यवहारों के लिए मान्य है लेकिन वर्तमान में यह मान्य नहीं है इसे कहते
28:31
हैं ग्रहण का सिद्धांत ग्रहण का
28:42
सिद्धांत या आच्छादन का
28:52
सिद्धांत थ्योरी ऑफ
28:58
इ
29:06
क्लिप्स थ्योरी ऑफ इ क्लिप्स यह आपका आर्टिकल 13 एक हुआ अब आगे
29:15
बढ़ते हैं आर्टिकल 13 दो के
29:23
तहत वैसा कोई भी कानून जिसे संसद बनाती है
29:28
कान यह स्वतंत्रता बाद का यह क्या है य स्वतंत्रता के बाद के कानून के बारे में
29:34
कहा गया है कि वैसा कोई भी
29:42
कानून कोई भी
29:48
कानून जो स्वतंत्रता के बाद बनाया गया
29:53
है जो स्वतंत्रता के बाद बनाया गया है
30:07
अगर वह मूल अधिकार से टकराता है अगर
30:14
वह मूल अधिकार से टकराता है
30:28
अगर वह मूल अधिकार से टकराता है तो जिस मात्रा तक व
30:34
टकराएगा जिस मात्रा तक वह
30:40
टकराएगा वह
30:45
टकराएगा उस मात्रा
30:51
तक वह अवैध होगा अवैध होगा
30:59
जैसे कि भारत की संसद कोई कानून बनाती है जैसे यह कानून बनाई
31:06
ठीक और यह फंडामेंटल राइट से टकरा रही है यह पूरे के पूरे कानून य फंडामेंटल
31:14
राइट है यह फंडामेंटल राइट से टकरा रही है अर्थात यह पूरा का पूरा पार्ट क्या हो
31:21
जाएगा अवैध हो जाएगा अर्थात यह कोई कानून जो बनाया जा रहा इसका कुछ उद्देश्य भी
31:27
होगा इसका कुछ उद्देश्य भी होगा अब उद्देश्य जो
31:33
कुछ भी हो अगर मान लेते इस पूरे कानून में से यह वाला पार्ट सिफ टकरा रहा है ठीक तो
31:40
यह वाला पार्ट अवैध नहीं होगा यह वाला पार्ट भी अवैध नहीं होगा और यह वाला जो टकरा रहा है यह अवैध हो जाएगा अब इसे हटा
31:47
देने इसे हटा देने के पश्चात इस इन दोनों पार्ट के जो मंतव्य है वो अपने मंतव्य को
31:53
पूरा कर रहे हैं तो यह जारी रहेगा लेकिन अगर इसे हटा देने के बाद इनके मंत पूरे
31:59
नहीं हो रहे हैं तो पूरा का पूरा कानून ही अवैध हो जाएगा क्या होगा यह पूरा का पूरा
32:05
कानून ही अवैध हो जाएगा यह जो है स्वतंत्रता के बाद का प्रावधान है इसे कहा
32:15
गया थ्योरी ऑफ
32:24
सेवरे सेव बिलिटी
32:30
सेवरे
32:36
बिलिटी पृथक करणीय का सिद्धांत उनके संदर्भ में है अब आते हैं
32:42
133 क्या कहता
32:47
है 133 कोई भी
32:56
विधि कोई विधि हो उपविधि
33:04
हो नियम हो परंपरा
33:11
हो रूढ़ि हो कुछ भी चीज
33:19
हो अगर यह फंडामेंटल राइट से टकराता है ये
33:24
फंडामेंटल राइट से टकराता है तो जिस मात्रा तक ये टकराएगा उस मात्रा
33:30
तक ये क्या हो जाएगा अवैध हो जाएगा अर्थात यहां भी फंडामेंटल राइट को प्राथमिकता दी
33:37
गई क्याक दी गई है यहां भी फंडामेंटल राइट की फंडामेंटल राइट को प्राथमिकता दिया गया
33:43
अब उदाहरण स्वरूप इसे समझते हैं कैसे देखते हैं कि ह विशेषक हरियाणा
33:50
क्षेत्रों में वहां पर सगोत्र विवाह पर रोक लगाई गई अर्थात समगी विवाह आप नहीं कर
33:57
सकते हैं और वहां पर कुछ जो प्रेमी जोड़ होते हैं वह इन बातों को तवज्जो ना देते
34:03
हुए उन्होंने सोत्री शादी कर लिया सम गोत्री शादी करने के पश्चात क्या हुआ कि
34:09
वहां की सर्व खा पंचायत सर्व खाप
34:17
पंचायत ने अपना फैसला सुनाया कि इसे गांव से बाहर कर
34:24
दिया से बाहर अर्थात उसे गांव निकाला की सजा दे दी
34:31
क्योंकि वहां पर उस सोसाइटी में सोत्री विवाह मान्य नहीं है लेकिन उस प्रेमी जोड़
34:37
ने समतरी विवाह किया अब इस बात को लेकर जो
34:43
प्रेमी जोड़ थे वह गए सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मान्यता है
34:50
सगोत्र शादी ना करे यह मान्यता है यह रूढ़ी है यह मान्यता है रूढ़ है पहला चीज ती के
34:58
तहत आता है दूसरा किसी मुद्दे पर निर्णय सुनाना कि कोई विवाद हुआ हो निर्णय सुनाने
35:04
का अधिकार जजमेंट का अधिकार किसी सर्व पंचायत को नहीं है य वो अथॉरिटी उसके पास
35:11
नहीं है क् संविधान के दायरे के तहत वो वह मान्यता प्राप्त नहीं करता यह अधिकार
35:16
कोर्ट के पास निर्णय सुनाने का
35:23
अधिकार सुनाने का अधिकार
35:31
कोर्ट के
35:37
पास अर्थात देख हमने यहां क्या देखा दोनों दोनों माइनों में पहला किय रूढ़ है परंपरा
35:44
है और किसी के फंडामेंटल राइट पर को यह बाधित कर रहा इस कारण यह अवैध है अर्थात
35:50
सर्व खा पंचायत द्वारा जो फैसला सुनाया गया है वह अवैध है दूसरा कि इसमें उसने दो
35:55
गलती किया कि निर्णय देने की शक्ति कोर्ट के पास है ना कि सर्व खाप पंचायत के पास
36:02
तो हमने यहां क्या देखा 133 के तह कि कोई भी विधि हो उ विधि हो नियम हो रूढ़ि हो
36:07
परंपरा हो अगर वह फंडामेंटल लाइट से टकराती है तो जिस मात्रा तक व टकराए गी उस
36:14
मात्रा तक वह भी अवैध होगी यह आर्टिकल 133 के तहत अब आते
36:22
हैं 13 च
36:31
13 च के तहत कहा विधि के
36:39
अंतर्गत विधि के अंतर्गत विधि के
36:46
अंतर्गत संविधान संशोधन शामिल नहीं संविधान
36:55
संशोधन संशोधन
37:03
शामिल नहीं है अब चकि यह आर्टिकल 13 के तहत आर्टिकल
37:11
13 एक 13 दो 133 13 च अब यह 13 वाला जो पोशन है वह खत्म हो गया अब हम लोग चलते
37:18
हैं फंडामेंटल राइट की तरफ
37:24
आर्टिकल 14 से 18
37:30
राइट टू इक्वलिटी राइट
37:36
टू इक्वलिटी
37:43
आर्टिकल 14 से 18 तक हम किन चीजों की चर्चा करते हैं राइट टू इक्वलिटी अर्थात
37:48
समानता के अधिकार की बात करते हैं अब यहां पर समानता के अधिकार के तहत हम एक एक
37:54
आर्टिकल पर फिर पुन चर्चा करेंगे कि आर्टिकल 14 के तहत क्या है आर्टिकल 15 के तहत क्या है तो आते हैं आर्टिकल 14 पर हम
38:02
लोग चर्चा करते हैं आर्टिकल 14 या आर्टिकल
38:10
14 इसमें कहा गया है किसी भी व्यक्ति को किसी भी व्यक्ति को विधि के समक्ष
38:19
समानता या विधि के समान संरक्षण से वंचित नहीं किया
38:24
जाए क्या किसी भी व्यक्ति
38:34
को व्यक्ति को विधि के समक्ष
38:44
समानता अर्थात इक्वलिटी बिफोर
38:52
लॉ इक्वलिटी
38:57
बिफोर लॉ और विधि के समान
39:08
संरक्षण समान
39:14
संरक्षण इक्वल प्रोटेक्शन ऑफ लॉ इक्वल प्रोटेक्शन ऑफ लॉ
39:30
से वंचित नहीं किया जाएगा से
39:35
वंचित नहीं किया
39:40
जाए अब इनमें तीन बातें
39:47
व्यक्ति विधि के समक्ष समानता विधि के समक्ष
39:55
समानता और विधि का समान
40:00
संरक्षण तीन बातें आई व्यक्ति विधि के समक्ष समानता और विधि का समान संरक्षण यह
40:08
तीन बातें आई अब तीन इन तीन बातों को समझने का प्रयास करते
40:14
हैं सबसे पहले व्यक्ति का अर्थ
40:19
हुआ कि वो कहे चाहे भारत का नागरिक हो या कोई विदेशी व्यक्ति हो वो भारत का भी हो
40:26
सकता है कोई विदेशी भी हो सकता है व्यक्ति को यहां
40:32
पर एक कंपनी के रूप में भी हम इंगित कर सकते
40:37
हैं और दूसरी तरफ अब हम आते हैं विधि के समक्ष
40:45
समानता विधि के तहत
40:50
समानता विधि के समक्ष
41:00
समानता इक्वलिटी बिफोर
41:11
लॉ और विधि का समान
41:25
संरक्षण इक्वल प्रोटेक्शन ऑफ लॉ
41:33
इक्वल प्रोटेक्शन ऑफ
41:38
लॉ विधि के समक्ष समानता यह हम हमने ब्रिटेन से
41:47
लिया और इसका कंस विधि के समक्ष समानता रूल ऑफ
41:53
लॉ की देन है जो डायसी द्वारा दिया गया है
42:01
यह हमने विधि के समक्ष समानता हमने कहां से लिया है ब्रिटेन से लिया है किससे प्रेरित है यह डायसी से प्रेरित है और
42:09
विधि का समान संरक्षण हमने किससे लिया है यह हमने अमेरिका से
42:17
लिया और अमेरिका किससे प्रेरित है यहां पर
42:22
तो अमेरिका इस अरस्तु से प्रेरित है
42:33
यह नेगेटिव है अर्थात आपको कोई वरीयता नहीं दी
42:42
जाएगी यह पॉजिटिव
42:48
है अर्थात सबके इसमें सबके साथ समान व्यवहार
42:54
की बात की गई क्या की गई इसमें सबके साथ समान व्यवहार की बात की गई है यहां पर कहा
42:59
गया है कि समान के साथ समान व्यवहार असमानों के साथ असमान व्यवहार यहां पर
43:05
क्या है समानो के साथ समान
43:11
व्यवहार साथ समान
43:20
व्यवहार और असमानों के साथ
43:30
और समान
43:37
व्यवहार यह नेगेटिव है यह पॉजिटिव है यह सबके साथ कहता है कि हम कोई भेदभाव नहीं
43:42
करेंगे सबके साथ समानता बतंग यहां पर है समानो के साथ समान व्यवहार असमानों के साथ
43:49
असमान व्यवहार अर्थात विवेक
43:54
संगत विवेक संगत
44:02
हम भेदभाव कर सकते हैं कर
44:11
सकते तो भेद भाव का आधार क्या होगा वह रेशनल होगा कि रेशनल आधार पर हम विवेक
44:18
संगत आधार पर हम भेदभाव कर सकते यहां पर नहीं कर सकते अब यहां पर एक सवाल उठता है कि दोनों
44:27
तो एक दूसरे का विरोधाभासी है क्या है दोनों एक दूसरे का विरोधाभासी है तो इस पर
44:33
हमारे न्याय शस्त्री का कहना है कि विधि के समक्ष समानता हो
44:39
या विधि का समान संरक्षण दोनों का उद्देश क्या है समान
44:47
नय समान नय अर्थात
44:53
कॉमन जस्टिस तक पहुंचना
45:02
विधि का समान संरक्षण अगर यहां रेशनल लेवल पर हम भेदभाव नहीं करेंगे तो जो सदियों से
45:09
दबे कुचले हैं ठीक है जिनको आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला क्या होगा वो तो पिछड़े
45:15
हैं और जिनको मौका मिला अगर उनके साथ उनका रिस लगा दिया जाए तो चकि वो रिसोर्सेस से
45:22
सब दिन दूर रहे हैं वो कंपटीशन तो नहीं कर पाएंगे तो इस चकि वो भी इस व्यवस्था के
45:28
समान भागीदार बने तो इस कारण हम रेशनल लेवल पर उनको उनके साथ कुछ वरीयता बरतें
45:34
जैसे देखते हैं कि आयकर का विधि के समान संरक्षण के
45:43
तहत समान
45:52
संरक्षण विधि का समान संरक्षण के तहत देखते कि रेशनल लेवल हम क्या कर सकते हैं भेदभाव कर सकते हैं तो सबसे पहला उदाहरण
46:00
देखिए कि आयकर का स्लैब
46:05
स्लैब ऑफ इनकम
46:12
टैक्स जो बहुत कम कमाते हैं सिर्फ अपना जीवन यापन कर सकते हैं तो क्या वह इनकम
46:19
टैक्स देते हैं नहीं क्योंकि उनकी आमदनी बहुत कम है और वो उस आमदनी से वो सिर्फ
46:25
अपनी आवश्यकता को पूरा कर पाते हैं तो उनको इनकम टैक्स से मुक्ति दे दी गई है जो
46:31
अच्छा खासा कमाते हैं जो बहुत ज्यादा कमाते हैं तो इसमें क्या हुआ कि इनकम
46:37
टैक्स का स्लैप बना दिया गया कि अगर आप इतना कमाते हैं आप फ्री है इससे ज्यादा
46:42
इतना कमाते हैं तो आपको इतना टैक्स देना होगा आप बहुत ज्यादा कमाते हैं तो आपको गवर्नमेंट को इतना टैक्स होगा देना होगा
46:50
अर्थात यहां पर रेशनल के आधार पर हमने क्या देखा यहां के रेशनल के आधार पर यहां
46:55
पर डिफरेंशिएबल दूसरा देखते हैं कि कोई विकलांग
47:03
व्यक्ति जब तक उन्हें सहूलियत नहीं देंगे तो मुख्य धारा में व कैसे शामिल
47:10
हो तो विकलांग के
47:16
साथ या यहां विकलांग नहीं दिव्यांग शब्द का प्रयोग करेंगे
47:22
सॉरी दिव्यांग लोगों के साथ
47:34
फिर देखते हैं कि पहाड़ पर जो लोग रहते हैं वो जो सहूलियत होते गवर्नमेंट द्वारा
47:41
जो सहूलियत दी जाती है जो समान सहूलियत होते तो उन सहूलियत का भरपूर लाभ व नहीं
47:47
ले पाते लेकिन समाज की मुख्य धारा में शामिल करना है साथ लेकर उ बढ़ना है तो रेलिटी के
47:54
आधार पर बेचारे पीछे हैं पहाड़ों पर रहते हैं विपरीत पर हम अपने व्यक्तित्व का पूर्ण विकास नहीं कर सकते तो शिक्षा में
48:02
देखते हैं कि वैसे व्यक्ति जो यूनिवर्सिटी के बगल के रहने वाले हैं उनको वहां हॉस्टल
48:08
की सुविधा नहीं मिलती है लेकिन जो दूर से आते हैं अर्थात 100 200 किलोमीटर दूर से
48:14
आते हैं तो उन्हें क्या कि शिक्षा इन्ह भी जो बगल में रहते उन्हीं के समान शिक्षा उन्हें भी मिले उनका भी समान हक है तो
48:21
उनको क्या होता है हॉस्टल की सुविधा दिलाई जाती है
48:27
हॉस्टल की
48:32
सुविधा जिससे कि वह भी अपना पढ़ाई कर सके तो विधि का इस विधि का समान संरक्षण इससे
48:41
क्या निकलता है जो हमारे यहां आरक्षण की व्यवस्था है आरक्षण की
48:51
व्यवस्था की व्यवस्था इसका जो कांसेप्ट है वह कांसेप्ट
48:58
आपका विधि के समान संरक्षण से ही निकल के आया कु सदियों से जो पीछे रहे हैं सदियों
49:04
से जिन्ह दबाया गया है वह भी हमारे आज भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में समान हकदार बने समान भागीदार बने तो उनके लिए
49:12
कुछ तो वरीयता रखनी होगी नहीं तो उनके लिए राजतंत्र और लोकतंत्र में अंतर क्या रहेगा
49:18
अगर उन्हें भी अपेक्षा और आकांक्षा थे कि हमारे देश में हमारे देश से अंग्रेज जा
49:23
रहे हैं दूसरी बात हमारे देश में लोग लोकतंत्र आ रहा है तो उन्हें एक नई आशा की
49:29
किरण दिखी कि सदियों से जो हमारे साथ होता आया है जो नई शासन व्यवस्था आएगी यह हमारे
49:35
साथ न्याय करेगी अर्थात हमारी जो कमियां है हमारी जो मजबूरियां है वो दूर करेगी
49:42
अर्थात उनमें क्या कमियां थी क्या दिक्कतें थी ग गरीबी थी बेरोजगारी थी ठीक
49:47
है तो इन सारी समस्याओं से पहले से ही दो चार होते आ रहे थे और वर्तमान में भी
49:53
उन्हीं समस्याओं से दो चार होते रहे फिर उनके लिए राजतंत्र और लोकतंत्र में क्या अंतर रह जाता तो वह भी समान रूप से इस
50:02
व्यवस्था का भागीदार बन भाग ले इस व्यवस्था में उनका भरोसा जगा रहे बना रहे
50:07
इसके लिए हमने क्या किया इनके लिए हमने आरक्षण की व्यवस्था लाई
50:15
ठीक देखते हैं मिनर्वा मिस केस में
50:29
में रूल ऑफ लॉ
50:40
को बेसिक
50:49
स्ट्रक्चर माना गया अर्थात आर्टिकल 14 जो है इस बेसिक
50:56
स्ट्रक्चर माना गया दूसरी बात मेनका गांधी केस में इसमें
51:03
नेचुरल जस्टिस की बात की
51:08
गई नेचुरल जस्टिस की बात की
51:17
गई की गई नेचुरल जस्टिस का अर्थ होता है नैसर्गिक न्याय
51:28
यह नैसर्गिक न्याय क्या है जो न्याय पूर्ण
51:35
हो भेदभाव से परे हो परे
51:43
हो एवं पारदर्शी हो
51:48
एवं पारदर्शी हो ठीक और इसी आठ 14 में हमने देखा
52:04
है के वर्ग विधायन की बात की
52:11
गई वर्ग विधायन की बात की
52:22
गई यह वर्ग विधान क्या है
52:29
लेजिसलेशन अर्थात ये प्रयोजन मूलक ये प्रयोजन मूलक
52:37
है हम प्लान करते हैं हम क्या करते हैं प्लान करते हैं कि इस अमुक टाइप के
52:44
व्यक्ति का अमुक टाइप के व्यक्ति का इनके सामने फलाना फलाना समस्या है और इन
52:51
समस्याओं का समाधान होना चाहिए समाधान उनका हमारा प्रयोजन है इन समस्याओं का समाधान होना चाहिए
52:57
अब इस टाइप के व्यक्ति का हो सकता है कि जो हमने जो मानक बनाया हो उन मानक
53:04
में जिस क्लास को हमने रखा उसमें हो सकता सिर्फ एक जाति ही आती हो सिर्फ एक जाति ही आती
53:19
हो आती हो तो उसके लिए भी हम कानून बनाएंगे हमने
53:26
की बात नहीं की हमने एक वर्ग की बात की कि अमुक टाइप का जो व्यक्ति हो और इनके लिए
53:32
हमारा प्रयोजन है कि इन्हें भी न्याय मिले और उनके न्याय की प्राप्ति के लिए हमने कानून बनाया और उस जो जिस क्लास के बारे
53:40
में हमने यह प्रयोजन किया कि इन्ह भी न्याय प्राप्त हो अगर उस प्रयोजन में उस
53:45
क्लास में एक सिर्फ जात एक ही व्यक्ति फिट कर रहा हो या सिर्फ एक जाते ही फिट कर रहा
53:51
हो तो उनके लिए भी हम कानून बनाएंगे ठीक
53:57
आगे देखते हैं कार्यपालिका को जो कोट की
54:05
व्यवस्था को कोटे की
54:13
व्यवस्था क्योंकि यहां पर नैसर्गिक न्याय की बात की गई कि अंतिम व्यक्ति को भी ऐसा
54:21
हो इस सिस्टम में अन्याय ना हो अंतिम व्यक्ति के साथ भी अन्याय ना हो या किसी एक व्यक्ति के साथ भी अन्याय ना हो तो हो
54:28
सकता है कि इस सिस्टम में भूल चुक के कारण किसी व्यक्ति को न्याय ना मिला जैसे
54:33
उदाहरण स्वरूप जैसे कार्यपालिका को कोटे की व्यवस्था कि उदाहरण स्वरूप हम देखते
54:39
हैं कि आज से 15 साल पहले गैस सिलेंडर बड़ा मिलना बड़ा दुर्लभ होता था देखते थे
54:45
क्या कि उस जिले के प्रशासनिक अधिकारी को उस सिलेंडर अलट किया जाता कि अगर ऐसी
54:52
व्यवस्था हो जिसको एकदम अति आवश्यक हो तो वहां गुहार लगाते थे कि हमारे घर में
54:58
फलाना फंक्शन है हमें इतनी गैस की जरूरत है अर्थात उनको गैस उपलब्ध मया करा दिया
55:04
जाता कोई व्यक्ति योग्यता रखते हुए हो सकता है कि उसका कहीं एडमिशन नहीं होता हो
55:09
कोटे की व्यवस्था के त क्या होता है अर्थात समाज के अंतिम व्यक्ति को भी इस
55:15
व्यवस्था से में इस व्यवस्था में उनके साथ न्याय हो उन्हें न्याय मिले इस कारण इसे भी लाया
55:23
गया अब है कि आर्टिकल 14 पर कुछ युक्त युक्त प्रतिबंध भी लगाए
55:29
गए एब्सलूट य नहीं है अर्थात इस पर भी कुछ प्रतिबंध लगाए गया
55:41
जैसे आर्टिकल 14 से आर्टिकल 14 का अपवाद
55:56
सबसे पहला देखते हैं कि हमारे यहां के
56:06
राष्ट्रपति
56:12
उपराष्ट्रपति राज्यपाल
56:20
सांसद विधायक को
56:26
कुछ छूट दी गई है इससे छूट दी गई कुछ
56:36
छूट दूसरा देखते हैं यूएनओ का कोई कर्मचारी
56:42
हो कोई कर्मचारी
56:50
हो विदेशी राजन हो
56:59
उनको भी यह भी इनके अपवाद हुए अगला देखते
57:06
हैं आर्टिकल 153 के
57:12
तहत महिला एवं बच्चों के
57:17
महिला एवं बच्चों के
57:24
लिए वि
57:38
व्यवस्था इस तरीके से आठ की 14 में कुछ
57:44
अपवाद भी है ठीक है उन अपवाद को लेते हुए हम लोग आगे बढ़ेंगे अब आते हैं अगले अगले
57:51
टॉपिक की तरफ
58:00
अगला टॉपिक है आर्टिकल
58:11
15 आर्टिकल 15 में कहा गया है कि यहां पर
58:17
डिस्क्रिमिनेशन की बात की गई कि डिस्क्रिमिनेशन हम नहीं कर सकते हैं
58:23
आट 15 के तहत क्या कहा गया कहा गया है
58:30
कि हम जाति मूल
58:40
वंश लिंग जन्म
58:49
स्थान इत्यादि के आधार पर
58:56
आधार पर भेदभाव
59:03
नहीं कर सकते नहीं कर
59:10
सकते अब जाति
59:16
धर्म मूल वंश लिंग जन्म स्थान इत्यादि के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकते हैं अब इसमें
59:23
आर्टिकल 15 एक के तहत कहा गया है एक के त कि राज्य किसी प्रकार का राज्य किसी
59:30
प्रकार का किसी प्रकार
59:37
का इस आधार
59:44
पर भेदभाव नहीं कर
59:53
सकता ठीक राज किसी प्रकार का इस आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है यहां पर राज्य पर
1:00:01
बल दिया गया है राज्य किस प्रकार का अर्थात जाति धर्म मूल वंश लिंग जन्म स्थान
1:00:07
इत्यादि के आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता कहां नहीं कर सकता है तो सार्वजनिक
1:00:14
स्थानों पर दूसरा है यह राज्य पर यहां पर 15 ए के तहत राज्य पर बल दिया गया और 152
1:00:21
के तहत यहां पर व्यक्ति पर बल दिया गया अर्थात कोई एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के
1:00:29
साथ किसी सार्वजनिक स्थान भोजनालय हो मंदिर हो स्कूल हो या कोई ऐसा जगह जहां पर
1:00:37
सभी लोग मिलते जुलते हो वहां पर एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के साथ इस आधार पर
1:00:43
भेदभाव नहीं कर सकता अब है कि इस आधार पर भेदभाव नहीं कर सकता है तो इसका उदाहरण हम
1:00:51
देखते हैं कि हां इसका अपवाद स्थिति है
1:01:00
अपवाद कि अगर कोई व्यक्ति किसी बीमारी से संक्रमित है अगर कोई
1:01:10
व्यक्ति अगर कोई व्यक्ति किसी बीमारी
1:01:22
से संक्रमित है
1:01:29
तो उसे रोक सकते हैं उसे रोक सकते
1:01:36
हैं जैसे कि कोरोना के दरमियान हमने
1:01:42
देखा कोरोना के दरमियान
1:01:49
देखा या टीबी का कोई मरीज हो
1:01:56
ऐसी बीमारी जो इंफेक्शन आधारित हो जो संक्रमण से फैलती हो इसको भी हम रोक सकते
1:02:02
हैं सर्विक स्थानों पर इनके साथ भेदभाव किया जा सकता है रोका जा सकता क्यों उद्देश्य क्या है कि यह बीमारी तेजी से
1:02:10
पूरे वेग से आगे ना बढ़े अर्थात स्वास्थ्य को ध्यान रखा गया लेकिन अगर यह व्यक्ति
1:02:15
अपने इलाज के लिए किसी डॉक्टर के पास जाता है किसी डॉक्टर के पास जाता
1:02:24
है जाता है तो वह इसे नहीं रोक सकता तो वह
1:02:32
इसे नहीं रोक सकता क्यों क्योंकि हेल्थ स्वास्थ उसका फंडामेंटल राइट है और वोह
1:02:39
अपना इलाज होने कराने के लिए गया है स्वस्थ होने के लिए गया है और डॉक्टर का कार्य है इलाज करना ना कि भेदभाव करना तो
1:02:47
अर्थात यहां पर डॉक्टर के पास इलाज के लिए गया है तो वहां पर उसके साथ भेदभाव नहीं होगा अर्थात उसका इलाज होगा डॉक्टर उसे
1:02:53
नहीं रोक सकते उसे नहीं भगा सकते लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर अगर वह घूमता हुआ है घूमता है जिससे कि इंफेक्शन बने बढ़ने की
1:03:01
संभावना हो तो इसे रोका जा सकता है ठीक अब आगे बढ़ते
1:03:16
हैं अब आते हैं आर्टिकल 15 ती
1:03:26
इसमें गवर्नमेंट इसमें सरकार या राज्य महिला एवं बच्चों के
1:03:34
लिए एवं बच्चों के
1:03:42
लिए विशेष प्रावधान
1:03:49
करेगी विशेष प्रावधान करेगी और
1:03:56
जब इसके लिए विशेष प्रावधान करेगी तो उसे आर्टिकल 14 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा
1:04:01
इसे आर्टिकल 14
1:04:09
का का उल्लंघन
1:04:14
नहीं माना
1:04:20
जाएगा जैसे अब महिला के लिए देखते हैं अब के लिए
1:04:26
महिलाओं के लिए देखते महिला आयोग की स्थापना की
1:04:32
गई आयोग की
1:04:39
स्थापना दूसरा इनके कल्याण के लिए योजनाए चलाई गई
1:04:47
इनके कल्याण के लिए योजनाएं योजना
1:04:56
घर के
1:05:02
भीतर एवं बाहर इनकी सुरक्षा के लिए कानून लाया गया
1:05:09
है इनकी सुरक्षा के
1:05:18
लिए कानून लाया गया
1:05:24
है जैसे घर के भीतर डोमेस्टिक
1:05:34
वायलेंस डोमेस्टिक वायलेंस घर से बाहर कार्यस्थल वर्किंग
1:05:46
प्लेस वर्किंग प्लेस पर क्या दिया गया है वर्किंग प्लेस पर जैसे विशाखा केस में
1:05:52
गाइड दिया गाइड किया गया विशाखा केस
1:05:58
में गाइड किया गया
1:06:05
था अब बच्चों के लिए हम देखते हैं अब इनके लिए क्या किया गया है बाल
1:06:17
संरक्षण अधिकार
1:06:22
आयोग पहला दूसरा कल्याणकारी
1:06:31
योजना बाल श्रम नहीं करवा सकते
1:06:43
हैं और हम य जो देख रहे आट 153 के तह महिला एवं बच्चों के लिए जो विशेष
1:06:50
प्रावधान किया जा रहा है कि इनका शोषण ना हो विकास में य भागीदारी भागी क्योंकि ये
1:06:56
पूरी आबादी का 50 पर है अगर इसे अगर इसे
1:07:01
मौका दिया गया अगर और व्यवस्था में य भागीदारी करती है अर्थात इससे हमारा क्या
1:07:07
होगा इससे हमारे विकास में य अपना योगदान कर पाएंगे दूसरी बात बच्चा यह बच्चा क्या
1:07:13
है यह देश का भविष्य है अगर हम इस पर ध्यान देते तो आने वाले भविष्य पर हम
1:07:19
ध्यान दे रहे हैं और आने अगर इससे बेहतर ध्यान देते हैं तो आने वाले भविष्य में क्या होगा यह अपना देश के लिए योगदान
1:07:26
करेंगे ठीक है अर्थात मानव कैपिटल बनेंगे तो आज की क्लास यहीं तक शेष क्लास श जो
1:07:35
बातें होंगी अगले क्लास में होगी ठीक नमस्कार
#Human Rights & Liberties
#Other
#Constitutional Law & Civil Rights

