Directive Principles of State Policy (DPSPs) Article 36-51 | Indian Constitution | Part 4
Nov 12, 2024
Part 1 : https://youtube.com/live/IwLfn47CivM
Part 2 : https://youtube.com/live/Tdgiq5NnxQc
Part 3 : https://youtube.com/live/Tdgiq5NnxQc
Part 3 : https://youtu.be/rI81W20z2x4
The Directive Principles of State Policy (#DPSPs) are a set of guidelines that the central and state governments of India must consider when formulating laws and policies. These principles are found in Part IV of the Indian Constitution, Articles 36–51.
The DPSPs are intended to help create social and economic conditions that allow all citizens to live well. They are a comprehensive socio-economic and political program that aims to establish social and economic democracy in the country.
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नमस्कार सभी को कल एक बच्चे का मैसेज आया य पर मैं उसका भी एक बार जिक्र कर देता
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हूं सभी के लिए क्योंकि जब कोई भी बच्चा मुझसे कोई परेशान होकर मैसेज करता है या
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कोई सजेशंस मुझे दे रहा है तो मेरी जिम्मेदारी है एस अ टीचर कि मैं आप सभी के
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सामने उस चीज को रखूं और रखना मेरी सबसे पहली प्राथमिकता है बच्चों चलिए तो व है
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जैसे कि कुछ मुझसे इंग्लिश की टर्मिनोलॉजी को लेकर बात की गई थी बिल्कुल
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लेक्चर जैसा कि हम आज ये चैप्टर से पहले जो भी लेक्चर थे हमारे वो हम सब बायल कर
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रहे थे लेकिन मुझे भी नहीं पता चला कि मैं एक लैंग्वेज पर कैसे आ गया यानी यानी इस
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डीपीएसपी को मैंने प्रॉपर तरी में हिंदी में पढ़ाया प्रॉपर तरीके से हिंदी में पढ़ाया तो कुछ इंग्लिश मीडियम वाले बच्चे
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थोड़ा इशू कर गए थे इशू की बात भी नहीं है उनका सोचना भी समझना बिल्कुल सही है मैं
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उनका समर्थन करता हूं तो कल र रजनी नाम का जो लड़के थे उन्होंने मुझे कमेंट किया और
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उन्होंने मुझे बताया कि सर इंग्लिश की टर्म का प्र प्रयोग करें हिंदी से हमें कोई परेशानी भी नहीं है मैं उस बच्चे का
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बहुत पूरी तर समर्थन करता हूं मैं खुश भी हूं कि उसने अपना ओपिनियन रखा तो हम कल उस
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कमेंट की रिप्लाई देकर भी आए व बच्चा संतुष्ट भी हुआ और और भी उन्होंने कुछ
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बहुत बहुत कुछ बोला जो हम उस बात का भी समर्थन करते हैं कि मैंने किसी भी इंटरव्यूअर की मर्ता और उसके मजाक की हंसी
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नहीं उड़ाई थी मैं एक्चुअली में आपको आईना दिखा रहा था क्योंकि मेरी इतनी हिम्मत
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नहीं नहीं है कि मैं किसी की मूर्खता की हंसी उड़ाऊ बिल्कुल नहीं है क्योंकि एस अ ह्यूमन एस अ टीचर यह मेरे हक में नहीं है
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कि मैं दूसरे की आलोचना करू या मैं दूसरे टीचर की आलोचना करूं मैं किसी भी टीचर को क्रिटिसाइज नहीं कर सकता बिकॉज यह मेरी
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रिस्पांसिबिलिटी है और यही मेरी जिम्मेदारी है तो चलिए तो सबसे पहली बात
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मैं क्लियर कर दूं मैं किसी भी टीचर की आलोचना नहीं कर रहा था वहां मैं तो केवल सामने वाले को वो आईना दिखा रहा था जो वो
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नहीं देखना चाहता था खैर कोई नहीं सभी डालेंगे इंडियन प और स्टार्ट करते
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हैं इंडियन पॉलिटी यानी भारतीय राज व्यवस्था ये राज
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हमारे घरों में बड़े बूढ़े कहते थे बेटा राज पाठ राज पाठ राज पाठ यह राज पाठ कहीं
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सुना सुना सा लग रहा है दादिया कहती थी जब राजा रानियों की कहानी सुनाते थे हमको तो
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वो क्या कहती थी कि बेटा एक राजा था एक रानी थी अब राजा बूढ़ा हो गया तो राजा ने
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अपना राजपाट छोड़ दिया यानी वह अपने बेटे को दे गया तो राज पाठ का मतलब क्या होता
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है राजपाट का मतलब होता है हमारा प्रशासन हमारी राज्य व्यवस्था हमारा
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एडमिनिस्ट्रेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी हमारी सरकार जो हमारे लिए एडमिनिस्ट्रेटिव करती है एडमिनिस्ट्रेटिव स्कीम लाती है वह सब
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क्या है वो प्रशासन है वो राजपाट है तो राजपाट से ही मुझे मिला राज्य व्यवस्था तो
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चलिए यहां पर डाल देंगे हम एक बार भारतीय राज्य व्यवस्था आज का लेक्चर इंग्लिश में
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भी रहेगा हिंदी में भी रहेगा आप बेफिक्र रहे भारतीय राज्य
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व्यवस्था चलिए तो आज इतना इंटरेस्टिंग चैप्टर है इतने सॉरी चैप्टर तो डीपीएसपी
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हमारा लेकिन टॉपिक की हम बात करते हैं तो पहले आर्टिकल्स करा देते हैं क्योंकि आर्टिकल्स के बाद
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इन चैप्टर में आपको इतना मजा आने वाला है आज आप बोलोगे कि वाह सर क्या बात मतलब
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आपने एक्सप्लेन किया तो कितना अच्छे से किया यही तो मैं चाहता हूं तो देखिए
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भारतीय राज्य व्यवस्था में हम कल शायद 44 तक करा चुके थे यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड और ये आपके लिए खुशखबरी है हम दिवाली के बाद
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यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड पर एक अलग लेक्चर बनाने वाले हैं जो कि सबसे उदा लेक्चर
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होगा और धासू लेक्चर होगा वो यानी उसमें आपको सारा ये पता चलेगा बच्चों कि हमारे
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भारत में यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेके कितनी किनी फाइट्स की गई है कितने कितने कॉन्फ्लेट हुए हैं हमारे ठीक है और कैसे
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कैसे आज तक ये जारी है आज तक य शांत नहीं हुई आग य आज भी भारत में हमारी यूनिफॉर्म
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सिविल कोर्ट को लेकर आग जारी है और यह कब बुझेगी आग क्या आपके दिमाग में कभी
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क्वेश्चन आया कि सर यह जो पॉलिटिकल लड़ाइयां होती हैं पॉलिटिकल और उसके बाद जनता और सरकार के बीच में लड़ाइयां होती
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हैं धर्म और धर्मों में टकराव हो जाता है जातिया आपस में लड़ जाती है सर इसका हल कब
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निकलेगा हमारे भारत में अब यह बताए तो वहां पे हम ये बताएंगे सारा कुछ यहां पे
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नहीं तो 44 आप सभी ने पढ़ा यूनिफॉर्म सिविल कोर्ड के बारे में लेकिन अब हम
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आर्टिकल 45 की बात करना चाहते हैं और हिंदी में कहते हैं अनुच्छेद तो आर्टिकल
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45 ये कहता है जैसे आगे चल रहे हैं हमने कंटेंट की तरफ तो आर्टिकल 45 का मतलब है
4:50
कि 86 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट देखो बच्चों
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पहले ये आर्टिकल हमारे 1949 के मूल संविधान में मौजूद नहीं था तो सबसे पहला
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पॉइंट तो हम य रख लेते हैं इससे बड़ी बात है कि 1949
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के यानी 1949
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के 1949 के संविधान में 1949 के संविधान
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में अनुच्छेद 45 बिल्कुल नहीं था अनुच्छेद 45
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बिल्कुल नहीं था अब बोलोगे कि सर जब था ही नहीं तो फिर
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कैसे इसको अरेंज किया गया देखो मैं बताऊ 8वा संविधान संशोधन अधिनियम 22 के माध्यम
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से इसको ज्यादा इफेक्टिव बनाया गया ठीक है या फिर यह कह सकते हैं कि सर यह डीपीएसपी
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में मौजूद तो था लेकिन इतना इफेक्टिव नहीं था तो आप इस लाइन को एक बार हटा दीजिए
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ताकि चीज और एक्सलेन हो सके आपके लिए चलिए तो हम यह कह सकते हैं कि जब यदि
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जब आर्टिकल की डेफिनेशन मेरे सामने आती है कि जब और क्या कहते
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हैं राज्य का यह कर्तव्य होगा राज्य का यह प्रयास
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होगा प्रयास होगा कि राज्य छ से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चे
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यानी या एज की बात कर रहा हूं मैं एज की बात कर रहा हूं तो छह से लेकर 12 वर्ष तक
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के बच्चे ठीक है यानी बच्चे ही होते हैं लगभग मैचोर भी नहीं होते छ से लेकर 12 वर्ष तक का बच्चा कितना होता है या 14
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वर्ष तक क ले तो छ से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जाएगी ये
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आर्टिकल 45 कह रहा था लेकिन जब ये आर्टिकल हमारे सामने आया मुझे पढ़ने को मिला जब
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मैंने इसको पहली बार पढ़ा था ना आर्टिकल को तो मुझे बड़ा अच्छा लगा मुझे बड़ा सुंदर लगा तो बहुत अच्छी बात है कि छह से
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ले 14 वर्ष तक के बच्चों को हम फ्री एजुकेशन दे पाएंगे लेकिन जैसे ही मैंने मुझे पता चला कि डीपीएसपी तो गैर
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न्यायोचित है कल को यदि सरकार तो पहले लिख लेते हैं कि राज्य का
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प्रयास होगा कि राज्य कैसे 14 वर्ष तक के
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बच्चे 14 वर्ष तक के बच्चे बच्चों को निशुल्क शिक्षा और निशुल्क शिक्षा आप
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मुझे बताइए क्या हमारा परीक्षा जंक्शन आज इस प्लेटफार्म के माध्यम से इस उद्देश्य
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को पूरा नहीं कर रहा है क्या इस पर्पस को हम कंपीट नहीं कर पा रहे क्या आज भी तो
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परीक्षा जंक्शन एक ऐसा इंस्टिट्यूट है एक ऐसा प्लेटफार्म है जिसके माध्यम से हम
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आपको फ्री एजुकेशन दे रहे हैं फ्री एजुकेशन दे रहे हैं बिल्कुल यहां कोई चार्जेस नहीं है बताइए अब तक हमने किसी से
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भी चार्ज लिया कभी बोला कभी आपसे कभी नहीं बोला यानी पूरा कंटेंट आपको फ्री में
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पहुंचा रहे हैं समझ गए ना तो इसका मतलब हमने कोई चार्ज अब तक लिया ही नहीं है और
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आप सभी को पता है कि परीक्षा जंक्शन और सबसे बड़ी बात जो हमारा मुफ्त शिक्षा नाम
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से जो ऐप है हमारा जो मुफ्त शिक्षा नाम से जो एप्लीकेशन है ना वो एकेडमिक बच्चों के
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लिए है सबसे बड़ी बात देखो यानी एकेडमिक बच्चों के लिए भी हम मुफ्त एजुकेशन दे रहे हैं फ्री एजुकेशन दे रहे हैं तो कुल मिला
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के यानी सरकार की एम तो हम ही पूरा कर रहे हैं सरकार भी कर रही है मैं ये नहीं कह
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रहा सरकार नहीं कर रही सरकार कर रही है लेकिन सरकार के साथ-साथ हमारी भी हमारे जिम्मेदार नागरिक के होने की जिम्मेदारी
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बनती है कि हम ऐसा करें तो राज्य का प्रयास होगा कि राज्य छ से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान
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करें निशुल्क शिक्षा प्रदान
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करें प्रदान करें यानी उनको
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दे चलिए तो समझे आप तो छ से लेकर 14 वर्ष तक
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के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करें देखिए मुझे एक चीज समझ में आई जब मैं ये आर्टिकल पढ़ रहा था तो मैंने ही बड़े गौर
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से देखा ठीक है और मैंने जब इसे गौर से देखा तो मैंने सोचा यार कि डीपीएसपी तो
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नॉन जस्टिस बल नेचर का है भाई डीपीएसपी तो गैर न्यायोचित है और जब डीपीएसपी गैर न्यायोचित है तो मुझे एक चीज बताइए कि नॉन
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जस्टिस बल नेचर का जो भी एलिमेंट होता है क्या वो कानूनी रूप से बाध्य होता है क्या
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नहीं होता वो तो नैतिक रूप से बाध्य होता है कानूनी रूप से बाध्यता का मतलब है लीगल कंपल्स
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क्या है लीगल कंपल्शन यानी संविधान में कानूनी बाध्यता या लीगल कंपल्शन उसको कहते
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हैं जो सरकार को चाहते या ना चाहते हुए भी वो चीज लागू करनी पड़ती है उसे कहते हैं
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लीगल कंपल्शन लेकिन एक होता है मोरल कंपलशन मोरल कंपलशन का मतलब होता है आप
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चाहे करो चाहे ना करो यानी सरकार के चाहने या ना चाहने पर ही पूरी बात निर्भर होती
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है उ बोलते हैं मोरल कंपल्शन और एक होता है लीगल कंपल्शन जैसे कि आपके घर में आपके
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पिताजी बोलते हैं कि रात के 9:00 बजे से पहले घर में एंट्री हो जानी चाहिए मुझे
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किसी भी तरीके की कोई कंप्लेंट नहीं है तो इसका मतलब है कि आपके पिताजी ने आपसे बोल दिया तो ये अब मोरल कंपल्शन नहीं है ये
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लीगल कंपल्शन है आपके घर का ये कानून है कि 9 बजे बाद घर से कोई भी मेंबर बाहर
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नहीं रहेगा लेकिन मोरल कंपलशन क्या है जैसे कि आप पिकनिक प जा रहे हैं आपने बोला
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कि पापा मैं पिकनिक प जा रहा हूं दोस्तों के साथ मुझे चार दिन लग जाएंगे और मान लो
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गलती से यह हुआ गलती नहीं आपको अच्छा लगा वो प्लेस तो आपने एक दिन एक्सटेंड और कर दिया आपने बोला कि मैं एक दिन यार कोई
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दिक्कत नहीं है एक दिन और एक्सटेंड कर देते घूम लेंगे मैं पापा को बोल दूंगा तो आपने फोन करके बोला कि पिताजी हम एक दिन
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और यहां पर स्टे करेंगे और घूमेंगे इस प्लेस को तो प्लीज इजाजत दे दीजिए तो ये होता है मोरल कंपलशन जब आप कहीं बाहर जाते
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हो बोलक जाते हो तो आना ना आना आपके हाथ में है लेकिन आप ऐसे इफॉर्म कर दो लेकिन
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लीगल कंपलशन है कि आप यदि शहर के अंदर हो तो शहर के अंदर आप किसी के नहीं रहोगे 9
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बजे से पहले घर के अंदर प्रवेश करना जरूरी आपके चाहने ना चाहने से कुछ नहीं हो तो
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कुल मिला केर मुझे समझ में आ गया तो यहां पर एक विवाद हुआ यहां पर क्या विवाद होता
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है देखिए यहां पर एक मैटर होता है और मैटर क्या होता है एक बार देख लेते
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हैं विवाद ये हुआ मैटर यह हुआ कि एक्चुअली में जब संविधान में आर्टिकल अनुच्छेद 45
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हमारा संविधान का अनुच्छेद 45 ये कहता है कि 6 से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों को फ्री एजुकेशन दे दो लेकिन अब बेचारे बच्चे
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जो हैं बेचारी हमारी जनता वो क्या करें क्योंकि डीपीएसपी में आता है 45 और
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डीपीएसपी कैसा है नॉन जस्टिस बल है और जब डीपीएसपी नॉन जस्टिस बल है तो बेचारी जनता
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केवल सरकार की चाहत और ना चाहत पटकी है कक सरकार चाहेगी तो करेगी नहीं चाहेगी तो वो
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नहीं करेगी अब ऐसा क्या करें तो 66 संविधान संशोधन अधिनियम 2002 अटल बिहारी
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वाजपेई सरकार ने इस अनुच्छेद 45 को यहां तो रहने ही दिया लेकिन इसको संविधान के
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भाग तीन अनुच्छेद 211a में लाकर रख दिया और कहा कि आज से यह फंडामेंटल राइट भी है
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यानी हमारे संविधान का मूल अधिकार भी है और मूल अधिकार हमारे भारतीय सं संविधान का
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एक लीगल कंपल्शन है जबकि डीपीएसपी हमारे संविधान का एक मोरल कंपलशन है
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बोलते नैतिक बाध्यता इसका मतलब विवाद यह हुआ कि संविधान के भाग चार में रहने के
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कारण संविधान के भाग चार
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में होने के कारण होने के
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कारण होने के कारण यह गैर न्यायोचित प्रकृति का था
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य गैर न्यायोचित प्रकृति का था गैर न्यायोचित प्रकृति का
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था लेकिन गैर नचत प्रकृति का था यानी सरकार की चाहत और सरकार की ना चाहत पर
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क्या डिपेंड था आर्टिकल था व चाहे तो फी एजुकेशन दे नहीं चाहे तो मत दे जनता तो
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कोर्ट में जा ही नहीं सकती है हा
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लेकिन लेकिन अटल बिहारी वाजपेई हमारे पूर्व
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प्रधानमंत्री अटल बिहारी
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वाजपेई अटल बिहारी वाजपेई जी ने वाजपेई जी ने 8वा संविधान संशोधन
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अधिनियम 2002 2002
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के माध्यम से माध्यम से
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इसे सम भाग चार के साथ भाग चार के साथ संविधान के भाग तीन
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में भी शामिल कर दिया साथ भाग तीन में भी भाग तीन में
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भी तीन में भी अनुच्छेद 21 ए में 21 ए में क्या कर दिया
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शामिल कर दिया यानी कुल मिलाकर मुझे बात समझ में आ गई है
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कि मैं क्या कहना चाह अब मुझे बताइए कि आर्टिकल 45 जो है यह दो तरीके से काम कर
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रहा है एक तो काम कर रहा है मोरल कंपलशन
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पर यानी नैतिक बाध्यता पर काम कर रहा है और एक यह काम कर रहा है आज लीगल
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कंपलशन यानी यह काम कर रहा है कानूनी बाध्यता प भी काम कर रहा है और कानूनी
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बाध्यता कहां मिलेगी उसको कानूनी बाध्यता मिलेगी इसको हमारे आर्टिकल 21 ए की
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तरफ और 21 ए आर्टिकल को क्या क्या क्या कहा जाता है इसे कहते हैं राइट टू
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एजुकेशन सभी को पता है कि शिक्षा का अधिकार शिक्षा का
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अधिकार कौन सा अधिनियम है आपका ये अधिनियम है राइट टू एजुकेशन आर्टिकल 21 ए और यह
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संविधान के भाग तीन में आता है ये संविधान के भाग तीन में आता है और सबसे बड़ी बात
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मोरल कंपलशन का मतलब है कि ये आर्टिकल 45 में आता है सरकार चाहे तो लागू करेगी नहीं
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तो नहीं लागू करेगी लेकिन अब यह सवाल नहीं उठता है क्योंकि ये हमारे संविधान के भाग
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तीन में आ गया है अब सरकार चाहे या ना चाहे ै से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों को
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सरकारी स्कूलों में फ्री एजुकेशन लेने से कोई नहीं रोक सकता है
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शिक्षा का अधिकार हो गया और आपको पता है कि एक एक्ट काम करता है हमारे पास शिक्षा का अधिकार अधिनियम
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2009 शिक्षा का अधिकार अधिनियम शिक्षा का
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अधिकार अधिनियम 2009 जिसको शॉर्ट में कहते हैं
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आरटीई आरटीई 2009 कहा जाता है आप सभी बली
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माती सहमत हो गए इस चीज से बहुत अच्छे तो यह है हमारा पूरा फ्लो फ्लो चार्ट इसको हम
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अच्छे से समझ सकते हैं लेकिन ये नैतिक बाध्यता है और नैतिक बाध्यता आप सभी को पता है ये आती है संविधान के भाग चार में
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किसमें आती है ये चार में आती है तो समझ गए ना अब कोई चिंता की बात तो नहीं है
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यहां या अब भी कोई सम चीज समझ में नहीं आ रही हो मुंह बना के बैठे हो आंखें भी ऊपर
16:51
नीचे हो रही हो तुम्हारी शायद ऐसा भी हो सकता है क्योंकि एक्सप्रेशंस देखो जब हम ऑफलाइन बैच में होते हैं तो जब जिसको समझ
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में नहीं आता है तो लड़कियों के एक्सप्रेशंस ऐसे होते हैं कि लड़कियां जब लड़की कोग ऑफलाइन बचेस में किसी की हिम्मत
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नहीं होती है कुछ लोगों की होती है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनको समझ में तो नहीं आ रहा है लेकिन वोह हाथ भी हैंड
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ड्रेस नहीं करें तो लड़कियों का एक पहचान है जिनको समझ में नहीं आ रहा है मैं उनको कैसे पहचानता हूं व आंखें इधर उधर करने लग
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जाती है सबसे बड़ी बात और लड़के का एक्सप्रेशन होता है कि वो दूसरे लड़के से
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पूछने लग जाता है क्योंकि लड़कियां कभी भी नहीं पूछती लड़कियों का एक्सप्रेशन होता है वो
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देखेंगे तो गौर से लेकिन कैसे उनका एक्सप्रेशन होता है कि वो अपनी आंखों को
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घुमाने लग जाती यानी कुल मिला के स्टूडेंट के शकल पर के फेस पर ये दिख जाता है कि इस
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बच्चे को मुझे इतना अनुभव तो हो गया है कि मैं किसी बच्चे को उठ उठ खड़ा करके ये पूछ
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सकता हूं कि आपको समझ में नहीं आ रहा था राइट तो वो बोलेगा हां यही हो रहा था खैर
17:55
तो इस मिला के फ्लो चार्ट आपके सामने आ चुका है विवाद मैंने बता दिया था लेकिन अब
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इस विवाद के ऊपर थोड़ी बाद में चर्चा करेंगे लेकिन हम आर्टिकल 46 की तरफ चलते हैं और इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हैं तो
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चलिए आर्टिकल
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46 देखिए सभी डालेंगे
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अनुच्छेद या आर्टिकल आर्टिकल कौन सा है
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46 और 46 आर्टिकल कैसे काम करेगा इसको भी
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जरा देखो यह कह रहा है कि राज्य यह प्रयास
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करेगा कि राज्य की जिम्मेदारी है और राज्य
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जिम्मेदारी निभाता है या नहीं निभाता है वो राज्य पर छोड़ दो तुम तुम्ह चिंता करने
19:03
की बात नहीं है व राज्य पर छोड़ दो लेकिन आप बोलोगे सर राज्य पर तो हमने क्या क्या
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नहीं छोड़ रखा लेकिन हो तो कुछ नहीं रहा हो तो कुछ भी नहीं रहा लेकिन देखो सरकार
19:17
अपने स्तर पर काम करती है आप सभी को पता है हमारे भारत में हमारे भारत की
19:22
डेमोक्रेसी में केवल आपके पास जिसम मैं भी शामिल हूं आपके पास केवल एक ही पावर है और
19:30
वह पावर है केवल राइट टू वोट करने क्या मैं गलत कह रहा हूं क्या यानी
19:36
आपको केवल मतदान करने का अधिकार है राइट टू वोट जो आप आर्टिकल 326 पढ़ते हो ठीक है
19:42
अनुच्छेद में पढ़ते हो 326 आर्टिकल 326 क्योंकि 324 में इलेक्शन कमीशन आता है समझ
19:49
गए ना अब 326 के तहत जब आप किसी भी कैंडिडेट को वोट डालने जाते हो तो वो आपका
19:55
एक लास्ट पावर होती है और लोकतंत्र कहा जाता है कि सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथों
20:01
में है सर्वोच्च शक्ति जनता के हाथों में है लेकिन किसी ने गौर किया कि हमारे भारत
20:07
में एक इनडायरेक्ट डेमोक्रेसी काम करती कौन सी इनडायरेक्ट य इनडायरेक्ट डेमोक्रेसी का
20:13
मतलब होता है जैसे मैं पहले बता भी चुका हूं इनडायरेक्ट डेमोक्रेसी का मतलब होता है कि हमारे भारत में एक ऐसा लोकतंत्र
20:22
जिसमें सर्वोच्च शक्ति तो जनता के हाथों में होगी लेकिन उस शक्ति का इस्तेमाल जनता
20:29
द्वारा चुना गया प्रतिनिधि ही करेगा यानी सबसे सबसे बड़ी सत्ता सबसे
20:37
बड़ी पावर तो जनता के हाथों में होती है बट लेकिन उस शक्ति का इस्तेमाल कभी आप
20:44
नहीं कर सकते यानी आपके द्वारा चुना गया प्रतिनिधि यानी इलेक्टेड बाय द पीपल यानी
20:51
हु कैंडिडेट इलेक्टेड बाय द पीपल उसको वही लोग करेंगे जो आपने चुने हैं
20:59
यानी आपको पता है स्विटजरलैंड कैसा देश है स्विटजरलैंड एक डेमोक्रेटिक कंट्री है और
21:04
स्विटजरलैंड डेमोक्रेटिक कंट्री कैसी है वहां पर डायरेक्ट डेमोक्रेसी काम करती और डायरेक्ट डेमोक्रेसी का मतलब होता है कि
21:11
जो भी वहां पर कानून बनेगा वह जनता की सहमति से बनता यानी स्विटजरलैंड की सरकार
21:17
वहा की जनता से वहा की जनता से बिना पूछे
21:22
कोई भी कानून नहीं बनाए लेकिन भारत में क्या है भारत में जस्ट इसका उल्टा है
21:27
क्योंकि भारत में जनता से पूछा नहीं जाता कि आपको यह कानून पसंद है या नहीं पसंद
21:34
यानी सरकार चाहती है हा सरकार यह देख लेती है कि कितने लोगों का रेशो इसमें समर्थन
21:39
में है और कितने लोगों का रेशो आज समर्थन में नहीं है जितने ज्यादा लोगों का समर्थन
21:45
होता है उस कानून पर वह कानून सरकार के द्वारा लागू कर दिया जाता है ठीक है और
21:50
हां यदि ज्यादा लोगों का समर्थन ऐसा है कि इसे लागू नहीं होने दिया जाए जैसे कि तीन कृषि कानून जो तीन एग्रीकल्चर थे फार्मिंग
21:59
लॉ आए थे तीन किसान कानून आए थे वो तीनों मोदी सरकार को निरस्त करने पड़े क्यों करने पड़े क्योंकि हमारे भारत में
22:05
प्रोटेस्ट को लेकर बहुत ज्यादा उग्रवादी बढ़ गए थे और वहां पर मैं आपको बता दूं उन
22:12
किसानों में देखो किसान थे मैं मानता हूं लेकिन हमारे भारत का इतिहास रहा है कि
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क्रांतियों से प्रोटेस्ट से इन आंदोलनों से देश के विभाजन की भी नौबत आ गई है अब
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मुझे बताइए ऐसे कोई भी भारत में ऐसा कोई आंदोलन र हो जिससे उग्रवादी पंथ नहीं
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निकले आप आजादी से पहले और आजादी के बाद दोनों को मिलाकर क हमेशा याद रखना जब भी
22:40
कोई उपद्रव भारत में होता है तो कोई ना कोई दल या कोई ना कोई व्यक्ति मौका परस्त
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आदमी हो मैं किसान कानून का आलोचना नहीं करता
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मैं किसानों का पूरा समर्थन करता हूं उनके मैं साथ हूं उनकी डिमांड जो भी थी वो
22:58
अच्छी थी बुरी थी मुझे नहीं पता लेकिन जितना मैंने कृषि कानून को पढ़ा उतना मैंने उसको समर्थन किया क्योंकि वास्तव
23:06
में कृष कानून बहुत अच्छा था बहुत अच्छा था सच में क्योंकि मैंने
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इसको पढ़ा पूरे तरीके से डीप महसूस किया पूरे भारत में मैंने केरल की एमएसपी को भी
23:17
देखा जब मैंने कृषि कानून को पढ़ा लेकिन वही वाली बात है कि सरकार तो बहुत कुछ
23:22
करती है जनता चाहती है कुछ नहीं खैर आर्टिकल 40 की तरफ चलते हैं तो लेख सरकार
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का ये प्रयास होगा सरकार
23:33
का यह प्रयास है या प्रयास मतलब कर्तव्य कह दो सरकार का यह प्रयास
23:43
और कर्तव्य होगा कि सरकार का यह प्रयास और कर्तव्य होगा
23:51
कि होगा की
23:56
सरकार अनुसूचित
24:02
जाति एवं एवं
24:08
जनजाति यानी शेड्यूल कास्ट एंड शेड्यूल ट्राइब सरकार अनुसूचित जाति एवं
24:18
जनजाति के सामाजिक एवं आर्थिक प्रोत्साहन को
24:24
सामाजिक एवं आर्थिक प्रोत्साहन
24:32
आर्थिक प्रोत्साहन को बढ़ावा
24:38
देगी को बढ़ावा देगी
24:44
एवं एवं शोषण से सुरक्षा करेगी एवं शोषण से
24:52
सुरक्षा करेगी यानी कुल मिलाकर ये कहना चाह रहा है
24:59
बच्चों कि सरकार का यह प्रयास होगा कि सरकार शेड्यूल कास्ट एंड शेड्यूल ट्राइब
25:05
में आने वा इस कैटेगरी में आने वाले जितने भी लोग हैं क्योंकि आपको पता है आज के
25:10
हमारे भारत में अदि मैं दलित समुदाय की बात करता हूं तो दलित समुदाय जो एक्चुअली में दलित है जो शोषण से ग्रस्त है आज
25:17
जिनका एक्सप्लोइटेशन भारी मात्रा में हो रहा है किसी ना किसी तरीके से किसी के साथ आर्थिक शोषण हो रहा है तो किसी के साथ
25:23
राजनीतिक शोषण हो रहा है तो किसी के साथ सामाजिक शोषण हो रहा है आज हमारे भारत में
25:29
ऐसा कोई भी ऐसा दलित नहीं होगा जिसके साथ किसी भी प्रकार का एक शोषण नहीं होरहा ये हकीकत है आज आप कहीं भी देख लो यदि मैं
25:37
तमिलनाडु के बाली गोंडापुर गांव की बात करता हूं तो वहां पर एक दलित व्यक्ति से इसलिए पानी मना पुए से पानी भरने के लिए
25:44
मना कर दिया गया क्योंकि बिकॉज वो दलित था तो ये गलत है हमारा तो यह हमारी आइडल जीी
25:50
है ये गलत है क्योंकि आज भी हमारे भारत में कई एससी और एसटी कम्युनिटी में आने
25:57
वाले ऐसी कई जातियां उपजातियां हैं जो आज शोषण से घिरी हुई है आप अपने चारों तरफ
26:03
देख लेते हो उसे पूरा भारत समझ लेते हो में आपका ही गलतफहमी है इसमें भारत की
26:09
गलतफहमी नहीं है कोई यानी आपने अपनी सोसाइटी में चार पांच घर देख लिए चार पांच
26:15
घरों को देख के बोला अरे यार कितना तो पैसा है इनके पास ऐसे नहीं होता बच्चों
26:21
यानी आपकी सोसाइटी में लगभग से लगभग मान लो 500 घर होंगे बड़ी कॉलोनी है तो हज मान
26:26
लेते हैं यार हज घर होंगे ना अब हजार घरों में से आपने 600 ऐसे लोग देखे जो दलित हैं
26:32
लेकिन फिर भी अच्छी में रह रहे हैं उनका अच्छा घर है गाड़ी है बंगला है सब कुछ है
26:37
मान लो आईएस भी अधिकारी भी है दलित तो तो इसका मतलब यह नहीं है कि आपने पूरे भारत
26:43
की स्थिति को जान लिया बल्कि आज आपने छत्तीसगढ़ में नक्सल को देखा है क्या कभी
26:49
झारखंड की तरफ जाइए छत्तीसगढ़ की तरफ जाइए उड़ीसा की तरफ जाइए पश्चिम बंगाल जाइए भाई
26:55
एमपी में जाइए वहां देखिए जंगलों में लोग आज भी लकड़ियों से रोटी सेख रहे हैं तो क्या
27:03
उनको भूल गए आप लोग उनको शहर में इसलिए नहीं आने देते उनको शहरों में नौकरी इसलिए
27:09
नहीं मिलती बिकॉज वो दलित है वो पिछड़ी जाती है से तो उनके साथ तो गलत ही हो रहा है ना
27:16
एक्चुअली में इसलिए यानी आज अपने आसपास की स्थिति को देख के किसी भी फैसले के अंत
27:22
काम परद मत पहुंच जाइए उसको गौर करिए कि आज मेरी कॉलोनी में 500 घर हैं और मान लो
27:29
250 250 घर ऐसे हैं जो अच्छी स्थिति में है और 250 घर ऐसे हैं जो ठीक ठाक स्थिति
27:35
में है लेकिन आज भी हमारे भारत में ऐसी एससी और एसटी कम्युनिटी में आने वाले ऐसे
27:41
कई लोग हो सकते हैं जो आज भी शिकार है जिनका सवण वर्ग के लोग जिनका
27:47
शोषण भरपूर तरीके से जिनको कहते ना हमारे घरों में बड़े-बड़े जब महिलाएं कहती थी कि
27:54
छक दिया छक दिया का मतलब होता है उसको मौका ही दिया यही तो कहानी समझ में नहीं आती आज
28:02
इसलिए सरकार क्या करती है इनको एक्सप्लोइटेशन से बचाती है शेड्यूल कास्ट
28:07
एंड शेड्यूल ट्राइब ओके तो सरकार यह एफर्ट करती है सरकार यह ड्यूटी अपनी निभाती है
28:13
कि वो शेड्यूल कास्ट एंड शेड्यूल ट्राइब को सामाजिक और आर्थिक यानी सोशली और
28:20
इकोनॉमिकली दोनों तरीके से अप्रिशिएट करें समझे उसके बाद बढ़ावा
28:26
देगी उनको एप्रिसिएशन करेगी और एक्सप्लोइटेशन से बचाएगी तो कुल मिलाकर
28:32
आपको समझ में आ जाए आज हमारे दलित की बात करें तो दलित आप पता है हमारे दलितों के
28:37
साथ तीन तरीके से शोषण होता कैसे होता है तीन तरीकों से यि दलितों के साथ हम बात करते हैं तो तीन तरीकों से शोषण हो सकता
28:43
है पहला हो सकता है सामाजिक शोषण और सामाजिक शोषण का मतलब होता
28:49
है कि धर्म जाति लिंग वेशभूषा जन्म स्थान
28:55
मूल वंश के आधार पर भेदभाव हो रहा है यानी तुमने एक व्यक्ति से नाम पूछा नाम बताया
29:01
अच्छा दलितो ये कुल मिलाकर क्या हो रहा है और दलितों में आज ऐसी कम्युनिटी है
29:08
जिनकी महिलाओं की तो पुरुषों से ज्यादा बत्तर स्थिति है भाई हमारे नॉर्मल लोगों नॉर्मल कम्युनिटी
29:16
की बात करें एक ऊंचे स्तर की बात करें वहा महिलाओं को इतनी आजादी तक नहीं है आप सोचो
29:22
दलितो की महिलाओं को कितनी आजादी होगी भाई इस बात प तो और कुछ लोग तो इस बात पर
29:29
उग्रवादी हो जाते हैं कि दलितों को आरक्षण मिल रहा है दलितो को ये मिल रहा है अरे भाई आप एक बार सोचिए ना उनको क्यों मिल
29:37
रहा है यानी एक कहावत है कि 3000 सालों से 3000 सालों से जब दलितों का शोषण हो रहा
29:45
था दलितों का शोषण हो रहा था तब दलितों ने उ तक नहीं किया
29:51
था लेकिन आज 708 सालों से जब दलितों को रिजर्वेशन मिल रहा है आरक्षण मिल रहा है
29:58
लेकिन आरक्षण मिल रहा है तो कई लोगों के आग लगी यह गलत है हां मैं इस बात का समर्थन
30:05
जरूर करता हूं कि कुछ दलित ऐसे हैं जिनको आरक्षण नहीं मिलना चाहिए लेकिन जो वास्तव
30:11
में अभी सुप्रीम कोर्ट ने जो एससी एसटी में सब क्लासिफिकेशन किया था व बिल्कुल सही फैसला है सरकार का सॉरी सुप्रीम कोर्ट
30:18
का क्योंकि हां ऐसी पिछली जातियों को आरक्षण मिलना चाहिए मैं इसका समर्थन कर
30:24
क्योंकि आरक्षण का कोई भी नुकसान या कोई फायदा तो जरूर देखना चाहिए कि कहां आरक्षण
30:29
का नुकसान हो रहा है और कहां आरक्षण का फायदा हो ऐसे नहीं है कि जिनको लाभ मिल
30:34
रहा है उन्हीं को लाभ मिलता चला जाए मैं इस बात का भी समर्थन नहीं करता जिनको लाभ
30:39
बिल्कुल नहीं मिल रहा है उनको बिल्कुल ना मिले मैं इस बात का भी समर्थन नहीं समझे
30:46
ना इतना सा है मैं आरक्षण के खिलाफ नहीं हूं लेकिन आरक्षण की सब क्लासि कटेगरी
30:52
करता हूं और ये होना भी चाहिए था कि आज हमारे भारत में ऐसी कई जातियां है शेड्यूल
30:58
कास्ट और शेड्यूल ट्राइम में जो आज भी उनको लाभ नहीं पहुंच रहा है सरकार और न्यायालय से मेरी अपील है कि प्लीज उनको
31:04
लाभ पहुंचाए उनको बड़े स्तर तक लाइए और उनको सरकारी नौकरियों में और र एजुकेशन
31:11
में रिजर्वेशन तो अब हम बात करते हैं
31:16
आगे 4 हो गया आपका अब आते हैं 47 की
31:24
तर आर्टिकल 47 की तरफ हम चलते हैं बच्चों
31:29
47 य कहता है कि नशीले पदार्थ अरे वाह आज का सबसे बड़ा मुद्दा यही
31:37
है नशीले पदार्थ आर्टिकल 47 कह रहा है हा मैं यह समझा रहा था आपको सॉरी दलितों के
31:43
साथ तीन तरीके से शोषण हो सकता है सामाजिक शोषण दूसरा आता है आर्थिक
31:53
शोषण और तीसरा आता है राजनीतिक शोषण
32:01
अरे आज तो सोच बदल लो हमारे भारत की राष्ट्रपति एक दलित महिला है भाई साहब
32:09
द्रौपदी मुरमू पता है आपको रामनाथ कोविंद इस इनसे
32:14
पहले जो राष्ट्रपति थे व भी दलित थे और यह भी दलित है यानी हमारे भारत की पहली महिला
32:20
दलित राष्ट्रपति आदिवासी य आदिवासी कह सकता हूं दलित से भी मतलब बहुत निचली जाति से आ
32:29
मुरम इतना बड़ा भारत का य गर्वा वित चेहरा है हमारे लिए कि नरेंद्र मोदी जी ने केवल
32:35
उनका ही चयन किया और यह प्रूफ कर दिया कि हम हमारी सरकार किसी भी तरीके का भेदभाव
32:42
बर्दास्त नहीं करेगी जनता सुन लीजिए तो यह था तीन तरीके शोषण होता है
32:50
उसके बाद आर्टिकल 47 की तरफ बढ़ते हैं 47 आपके लिए इंपोर्टेंट हो सकता है
32:55
चलिए यह तो है ही इंपोर्टेंट है इनको 47 को मैं कितना भी पढ़ा दूं करना तुम्हें
33:01
वही है जो तुम्हारी मन की है कितना भी पढ़ा दूं ठीक है लेकिन कुछ
33:09
बच्चों को करना वही है जो उनको करना चाहिए और कि नहीं करना चाहिए तो इसका तो सवाल ही
33:15
पैदा नहीं होता कहीं तो कहीं सवाल ही पैदा नहीं होता व तो केवल यही चीज तो देख रहे हैं अब
33:25
देखो कैसे देख रहे हैं एक बार ये भी डिस्कस कर ले तो राज्य का यह प्रयास है भाई साहब और
33:31
राज्य का ड्यूटी है कर्तव्य है राज्य नशीले पदार्थ महात्मा गांधी जी पूरे
33:38
समर्थन में थे इस भाई साब य गांधीवादी आडलज पर आधारित है गांधी जी हमेशा चाहते
33:43
थे ऐसी चीजों को बंद करवाओ क्योंकि गांधी जी नशे के समर्थन में बिल्कुल नहीं थे व
33:50
कहते थे कि नशीली दवाओं एवं मादक पदार्थों जैसे शराब धूम्रपान
33:58
शराब सिगरेट पीड़ और ड्रग्स ऐसे और नशीले पदार्थों की तस्करी
34:06
को रोका जा सके राज्य तो यह प्रयास कर सकता है लेकिन मैं आपको बता दूं जैसे कि इसमें भी कई सारे फैक्ट है देख राज्य का
34:14
यह कर्तव्य है राज्य का यह कर्तव्य है
34:23
कि राज्य का ड्यूटी है कि राज्य
34:28
नशीली दवाओं नशीली दवाओं
34:35
एवं मादक पदार्थों एवं मादक
34:42
पदार्थों एवं मादक
34:47
पदार्थों जैसे मादक पदार्थों जैसे
34:54
शराब शराब
35:01
सिगरेट समझे
35:06
ड्रक्स ड्रक्स मतलब नशी दबाव में आता है ड्रक्स
35:13
और पीढ़ जैसे
35:22
पदार्थों की बिक्री को पदार्थों की बिक्री यानी उसकी सेल को बिक्री
35:32
को विनियमित करे रेगुलेट करे विनियमित करे
35:38
रेगुलेट करे तो कुल मिलाकर मैं ये कहना चाह रहा हूं कि राज्य का यह प्रयास होता है आर्टिकल 47 में कि नशीली दवाओं यानी जो
35:46
हमारे जो नशी की दवाइया होती है ड्रक्स है अफीम है चरस है गजा है और इंजेक्शंस हुए
35:53
आप देखते हैं फिल्मों में यार तो कौन सी फिल्म आई थी वो कबीर सिंह कबीर सिंह की
35:58
फिल्म में क्या हो रहा था आपने देखा नहीं कबीर सिंह की फिल्म में अ सभी ने देखा
36:04
सारा यूथ देख रहा था और भाई साब मूवी में बड़ा ही धमाल हो गया धमाल क्यों हो गया
36:09
क्योंकि ऐसी ऐसी चीज आती है पता नहीं युवा क्यों अट्रैक्ट हो जाता है मुझे समझ में यह नहीं आता मलब इंजेक्शन मतलब उसने इ
36:18
जैसे मैं भी कता ऐसी बात नहीं मैं भी शामिल हूं मूवी देखने में जब मैं गया था मवी देखने सोचा ट्रेलर बहुत अच्छा है चलते
36:25
एक बार देखने और एक्चुअली में साउथ का साउथ की मूवी थी पहले फ ये एक्चुअली बॉलीवुड में रिमे तो मैं देख रहा था मूवी
36:32
को और मूवी देखते देखते मुझे एहसास हुआ कि जैसे ही जैसे उसम बताया गया है जब एक्टर
36:40
जो रोल थे रोलिंग एक्टर जब उसम अपने हाथों में इंजेक्शन पुट करते हैं पुश करते हैं
36:45
तो पूरा वो एकदम नशा जसे ड्रग होता है तो पूरा नशा ठीक है ऐसा कुछ था ठीक है दो दिन
36:52
तक होश ही नहीं था दो दिन तक होश कहां रहेगा भाई इतना बुरा नशा है दो दिन तक हो
36:58
जैसे ही उसने इंजेक्शन लगाया पूरा सिनेमा हॉल ह करने लगा सोच रहे हो क्या है मैं
37:04
वहां बैठे बैठे पूरी साइकोलॉजी समझ गया मु से माल की कुछ थे 10 20 पर मैं समझ गया मैं पक्के
37:12
उ इसी कैटेगरी में से पीछे हु कर रहे हैं ना ये सिनेमा हॉल में बैठकर जैसे ही एक्टर ने इंजेक्शन
37:19
लगाया ना वैसे ही हु करने लग मेरे लगा भा वही वही उसी कैटेगरी के लोग है जो पीछे हु
37:25
कर रहे हैं इसका मतलब म य हुआ कि आज हमारे जो देश में ऐसी मविया बन रही है उनका
37:33
युवाओं को भारी समर्थन मिल रहा है इसलिए ऐसी मयों को देख देख कर युवा पीछे नहीं
37:39
बल्कि आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है नशे की तरफ और नशे की लत में पूरी तरह बर्बाद
37:44
हो चुका देखो मैं आपको बता दूं हकीकत बता दू ओशो की विचारधारा से मैं बहुत प्रभावित
37:50
हूं ओशो को मैं कई हद तक मानता हूं और मानता रहूंगा ओशो कहते हैं नशा बुरी बात
37:56
नहीं है आप शराब पीजिए आप सिगरेट पीजिए आप कुछ भी पूछिए ओशो की बात कर रहा हूं नशा बुरी बात
38:05
नहीं लेकिन नशे को उसकी लत लगा देना नशे को उसकी लत लगा देना ही सबसे बुरी बात
38:13
यानी जब जब इंसान को नशे की लत लगी है इंसान ने अपने आप को
38:18
खत्म क्योंकि इंसान के लिए नशा बनाया है मानता हूं कि दुनिया में जो चीज बनी है वो
38:24
कि किसी उद्देश्य के क्योंकि बिना उद्देश्य के कोई भी चीज हमारे पृथ्वी मंडल
38:30
में एजिस्ट कर ही नहीं सकती लेकिन नशे को नशे की तरह इस्तेमाल करें तो ज्यादा बेहतर
38:36
रहे लेकिन नशे को लत बना ले मैं प्रमोट नहीं कर रहा जो लोग नहीं करते हैं मैं ये नहीं कह रहा कि आप भी करिए जो लोग नहीं
38:43
करते हैं ठीक है लेकिन जो आज नशी की लत में है मैं उनसे यह कहना चाहता
38:49
हूं छोड़ना नहीं है लेकिन नशे की लत को बदल दें ये लत इंसान को खत्म करती है इसे
38:56
कहते हैं धीमा जहर धीमे जड से ज्यादा मैं सेर कहना इसलिए सरकार तो कभी ऐसा प्रयास
39:04
नहीं करेगी मैं आपको हकीकत बता द लेकिन आज बिहार में आप सभी को पता है बिहार में
39:09
दारू जो है शराब जो है व ब बंद है बिल्कुल शराब की एंट्री बंद है लेकिन फिर भी शराब
39:15
बिक रही है आपको भी पता है मुझे भी पता है मैं क्यों ही ज्यादा सच्चाई खोलू किसी की
39:22
तो शराब बिक रही है वहां पर ल से बिक रही है लोग पी रहे हैं बिहार में मजदूर भर के
39:27
वर्ग के लोग ज्यादा हैं उनको तो रात में चाहिए चाहिए क्योंकि जब तक रात में मिलेगी नहीं तो सुबह काम कैसे होगा ऐसे लोग इसलिए
39:35
मैं कहना चाहता हूं कि राज्य की सबसे बड़ी कमाई नशी दवाओं से होग लेकिन इसमें एक
39:41
अपवाद भी है यह अपवाद यह कहना चाहता है
39:46
अपवाद देखें इसमें अपवाद यह कहता है कि वे नशीली दवाएं यानी राज्य केवल नशीली दवाओं
39:54
का प्रयोग जैसे ड्रग्स का प्रयोग केवल चिकित्सा हेतु दवाइयों में ही करेगा बस
40:00
इतना है यानी नशीली दवाओं को लेकर जैसे मैं बात करता हूं ड्रग्स की ठीक है य ड्रग
40:07
ले सकते हैं इसमें तो यह एक ऐसी दवा है जिसका प्रयोग मेडिकल में भी किया जाता है
40:13
किसमें मेडिकल ट्रीटमेंट में भी किया जाता है इसका प्रयोग यसे ड्रग
40:24
से जैसे ड्रग्स हुआ इसका प्रयोग किसम कर स सकते हम मेडिकल में य किया जाता है
40:31
ना जब ऑपरेशन होता है सर्जरी होती है किसी भी तरीका की या ब्रेन सर्जरी कुछ कोई भी
40:37
प्रकार का ऑपरेशन होता है जब डॉक्टर चीर फाड़ करता है तो वो आपकी आंखों के सामने तो करेगा नहीं क्या करता है एक इंजेक्शन
40:43
भरके लाता है तुरंत आपके यहां पे या इस तुरंत पुश करता है आपके सीधे बिल्कुल अटैक
40:50
करती है यहां पर और सीधे आपको विदन 10 सेकंड के अंदर आपको होश भी नहीं होता कि
40:56
वो डॉक्टर आपके क्या करता है जब डॉक्टर पेट का ऑपरेशन करता है तो
41:02
पेट को फाड़े बात है पेट को फाड़ने के लिए आप में इतनी हिम्मत नहीं है कि आप अपनी
41:07
लाइव आंखों से देख पाए व आप मर जाओगे भाई साहब मर जाओगे यदि आपने लाइव आंखों से
41:14
अपना ऑपरेशन देख लिया इसलिए डॉक्टर आपको ड्रग्स जैसे मॉर्फिन क्या देता है मॉर्फिन
41:20
मेडिकल में आज सबसे बड़ा ड्रग इस्तेमाल होता है व है मॉर्फिन
41:28
आज हमारे मेडिकल में सबसे ज्यादा जो इस्तेमाल होता है वो मॉर्फिन है क्या है
41:34
मॉर्फिन क्या कह रहा हैय कलर कह रहा है क्या कलर कर देते हैं बहुत अच्छे ये क्या है मॉर्फिन आज
41:42
हमारे मेडिकल में जो भी इस्तेमाल हो रहा है ये सब मॉर्फिन मॉर्फिन एकदम क्या करता है ठंडक पहुंचाता है बिकॉज मैं भी सर्जरी
41:50
से गुजर हूं इसलिए बता रहा हूं मैं लेता बेता नहीं हूं भाई ब सोच लेना कहीं तु हां
41:55
तो दूर है हम से भगवान करे इनसे दूरी रहे हमेशा और दूर हैनसे बहुत अच्छे चलो जितना
42:03
बचा जा सके बचिए सरकार आपको पता है हमारे कोविड में यानी कोविड-19 में सभी को पता
42:10
है कि हमारे यूपी ने उत्तर प्रदेश ने कितनी कमाई की थी इनकी उत्तर प्रदेश ने
42:16
कोविड में जब शराब के ठेके खोल दिए गए थे तो पहले दिन शराब के ठेके जब खुले थे सोशल
42:23
डिस्टेंसिंग के साथ मास्क के साथ तो है उत्तर प्रदेश की पहले दिन की कमाई कितनी
42:30
थी 300 करोड़ कितनी 300 करोड़ रुपए की भाई साहब जो लोग कहते थे ना कि कोविड में पैसा
42:37
नहीं है हमारे पास कोविड में मर रहे हैं हम महंगाई है भाई साहब जो लोग यह लोग बोल
42:44
रहे थे कि हमारे पास पैसा नहीं है हमारी बैंक के अकाउंट खत्म हो गए हैं सरकार कब
42:49
तक खोलेगी सरकार कब तक रोजगार लाएगी भैया यह पैसा कहां से आया उत्तर प्रदेश
42:57
300 करोड़ की एक दिन की कमाई है सर आपकी यह पैसा कहां से आया है कोई खेती कर रहे थे पैसों की जब पेड़
43:05
के पत्तियों के रूप में लटक रहे थे पैसे आपके कहां थे यह पैसे कहां से निकले जब दारू शराब पीने का टाइम आया तो फिर पैसे
43:12
कहां से आ गए यूपी में 300 करोड़ और यह जनता की जेब से निकला गया पैसा
43:18
है र कोई नहीं ने हकीकत बतानी थी और हकीकत बता दी
43:25
आपको चलिए राज्य प्रयास समझ गए चलिए यानी राज्य सरकार चाहे तो शराब के ठेकों को बंद
43:33
कर सकती है इस पर आप यह नहीं बोल सकते कि भैया नहीं मेरा तो अधिकार है व्यापार और
43:39
विवृति करने का गलती से भी इसको संविधान के अनुच्छेद 19 व जी की तरफ
43:47
मत डाल देना आपसे मेरी प्रार्थना है हमेशा आपसे मेरी प्रार्थना है क कत मत डाल देना
43:53
यं मत कह देना सर 191 जी है मैं तो व्यापार करू मैं तो अपना धंधा करूंगा मुझे कोई नहीं
44:01
रोक सकता अ भाई कोई नहीं रोक सकता मानता हूं मैं लेकिन शराब के धंधे को कहना शराब
44:08
का धंधा होना या फिर किसी भी महिला के साथ देह व्यापार
44:14
करना यह व्यापार में नहीं आते शराब का धंधा हुआ नशीली दवाओं का धंधा हुआ या फिर
44:20
देह व्यापार करना ठीक है महिलाओं को और बुजुर्गों को खरीदना और बेचना य में नहीं
44:27
आते तो इसलिए शराब का धंधा भी एक व्यापार नहीं हो सकता इसलिए सरकार जब चाहे आर्टिकल
44:33
47 के अकॉर्डिंग नशीली दवाओं केवल मेडिकल ट्रीटमेंट को छोड़कर बाकी सब पर बैन लगा
44:39
सकती है आर्टिकल 48 की तरफ चलते हैं फटाफट
44:44
से अनुच्छेद 48 क्या कहता है अब देखिए अनुच्छेद 48 यह कहता है कि सरकार यह
44:51
प्रयास करेगी प्रयास नहीं यह तो अब एक्ट भी बन चुका है ये तो एक्ट भी है और एक्ट
44:58
क्या है जैसे पर्यावरण की सुरक्षा पर्यावरण में समृद्धि तथा वन एवं वन्य
45:07
जीवों की सुरक्षा करेगी तो आर्टिकल 48 में डायरेक्ट लिख लीजिए
45:13
आप पर्यावरण की संवृद्धि पर्यावरण की संवृद्धि
45:20
एवं पर्यावरण की समृद्धि एवं वन एवं
45:28
वन्य जीवों की सुरक्षा नव वन्य जीवों की सुरक्षा बस शर्ट में लिख लो कोई बड़ी बात
45:35
नहीं है इसमें आप लिख सकते तो पर्यावरण की संधि एवं वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा
45:40
करना यह सरकार का प्रयास रहता है और आपको पता है कि आज हमारे भारत में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 काम करता
45:51
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 काम करता है उसके
45:59
बाद आज हमारे भारत में वन एवं वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम 1972 काम करता से कहते
46:06
हैं वन एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम वन एवं वन्यजीव संरक्षण
46:12
अधिनियम संरक्षण अधिनियम यह कौन सा काम करता है 1972 काम करता तो आज हमारे भारत
46:20
में जैसे कि टाइगर प्रोजेक्ट की हम बात कर लेते हैं तो टाइगर प्रोजेक्ट इसी का हिस्सा है
46:28
ओके तो टाइगर प्रोजेक्ट क्या है इसी का ही हिस्सा है ओके चलिए बहुत अच्छे आप समझ गए उसके
46:38
बाद आर्टिकल 49 की बात कर लेते हैं आर्टिकल 49 यह कहता है राज्य का यह
46:47
कर्तव्य होगा या राज्य का य ड्यूटी होगा या राज्य का यह प्रयास होगा कि राज्य
46:53
राष्ट्रीय महत्व के स्मारक या नेशनल इंपॉर्टेंस यानी नेशनल इंपॉर्टेंस ऑफ नेशनल
47:00
मॉन्यूमेंट्स यानी राष्ट्रीय महत्व के जो स्मारक है या नेशनल मॉन्यूमेंट्स ऑफ द
47:06
नेशनल इंपॉर्टेंस राष्ट्रीय महत्व के स्मार्क जैसे कि आप दिल्ली से हैं तो लाल
47:12
किला क्या है लाल किला है आगरा में तो ताज महल है ठीक है और दिल्ली में और बात करें
47:19
कुतुब मीनार लाल किला जैसे और कई सारे मंदिर भी हो सकते हैं इसमें प्राचीन मंदिर
47:25
हुए ठीक है यानी ऐसी ऐसी कई सारी चीजों को जैसे कि आप जयपुर से हैं तो आपने देखा
47:30
होगा नाहरगढ़ का किला ठीक है अजायब घर चिड़िया घर यानी राष्ट्रीय महत्व की जितने
47:36
भी स्मारक हैं राष्ट्रीय महत्व के जितने भी चिन्ह है उनका संरक्षण करने की
47:41
जिम्मेदारी सरकार की होती है और सरकार चाहे तो वहां पर आप सभी को पता है जब आप
47:47
कहीं भी म्यूजियम में जाते होंगे तो म्यूजियम में लिखा होता होगा कि किसी भी वस्तु को छूना मना है अर्थात छुआ तो
47:54
पेनल्टी दर्ज कराइए यानी र 500 हजर अलग-अलग जगह के के से अलग-अलग होती तो कुल
48:01
मिलाकर कहना चाह रहा है कि सरकार सरकार का यह प्रयास होता है सरकार
48:09
का यह प्रयास होता है सरकार का यह प्रयास होता है कि
48:18
सरकार सरकार राष्ट्रीय महत्व के स्मारक नेशनल मॉन्यूमेंट्स ऑफ नेशनल इंपोर्टेंस
48:25
राष्ट्रीय सरकार
48:31
राष्ट्रीय महत्व के राष्ट्रीय
48:38
स्मारक जैसे जैसे क्या जैसे
48:47
बन जैसे बन हो सकते हैं बन हु जैसे अजायबघर
48:56
जैसे अजायब घर हो गया म्यूजियम हो गया आपका ठीक है जैसे वन है अजायब घर है और
49:02
क्या हो सकता है दुर्ग यानी फोर्ट हो सकता है आपका कोई
49:08
फोर्ट है कोई म्यूजियम है फॉरेस्ट है यह सारे हैं आप इसमें म्यूजियम भी लिख सकते
49:14
हैं म्यूजियम है या फिर फॉरेस्ट है या फोर्ट है समझ गए चलिए
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या कोई लेक हो सकती है ऐसी बात में नहीं है लेख है हम भी कह सकते हैं तो राष्ट्रीय महत्व
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के स्मारक है सारे ठीक है या फिर कोई महल हो सकता है चलिए तो ये आपके राष्ट्रीय
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महत्व के स्मारक है इनकी सुरक्षा करती है राष्ट्रीय महत्व के स्मारक राष्ट्रीय स्मारकों
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का संवर्धन संवर्धन एवं संरक्षण करना यानी
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उन्ह प्रोटेक्ट करना या कंजर्वेशन
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करना चलिए उसके बाद मैं आपसे बात कर ना चाहता हूं नेक्स्ट जैसे कि आर्टिकल 50
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क्या कहता है आर्टिकल 50 का ये कहना है आर्टिकल 50 का कहना है कि न्यायपालिका का
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कार्यपालिका से प्रथक्करण आप सभी को पता है कि आज हमारे भारत का संविधान जिसे बहुत अद्भुत संविधान कहा
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जाता है जिसे बहुत नवीन विशेषता वाला संविधान कहा जाता है ठीक है कई लोगों ने इसे आत्मा की उपाधि भी दी है तो कुल
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मिलाकर कई लोग इसे मूल दर्शन की उपाधि देते हैं कई लोग इसे राजनीतिक दर्शन भी कहते हैं ठीक है और कुछ लोग इसे कानूनी
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दस्तावेज भी तो कुल मिलाकर हमारे संविधान की अद्भुत विशेषताओं के साथ एक सबसे बड़ी विशेषता भी यही है कि हमारी आज
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कार्यपालिका यानी सरकार और न्यायपालिका यानी जुडिशरी यानी एग्जीक्यूटिव एंड
50:40
जुडिशरी दोनों सेपरेट काम करती हैं जिसे बोलते हैं कार्यपालिका का न्यायपालिका से प्रथक्करण
50:46
ठीक है यानी सेपरेशन फ्रॉम एग्जीक्यूटिव टू जुडिशरी
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ओके तो आप लिख सकते हैं नेक्स्ट आर्टिकल अनुच्छेद 50 कहता है
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आपसे कार्यपालिका का यानी सेपरेशन फ्रॉम या सेपरेट्स एग्जीक्यूटिव फ्रॉम टू
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जुडिशरी जो भी है आप लिख दीजिए कि कार्यपालिका
51:13
का कार्यपालिका का न्यायपालिका से
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प्रत न्यायपालिका से सेपरेशन प्रकरण मुझे एक चीज बताइए आप इसका सबसे
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बड़ा एग्जांपल मैं बता दूं क्या है बताइए सबसे बड़ा एग्जांपल है कि आज जब हमारे
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सुप्रीम कोर्ट यानी जजेस ऑफ द सुप्रीम कोर्ट एंड जजेस ऑफ द हाई कोर्ट का जब अपॉइंटमेंट होता है वाई प्रेसिडेंट के
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द्वारा तो राष्ट्रपति यानी किसी भी सुप्रीम कोर्ट के जजों की और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति
51:45
के वक्त सरकार से सलाह नहीं ली जाती आज हमारे सुप्रीम कोर्ट के नए चीफ जस्टिस ऑफ
51:52
इंडिया बनने वाले हैं 11 नवंबर को जिनका नाम है संजीव खन्ना जो कि रिलेस करेंगे
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किसको डी वाई चंद्र चूर्ण तो डी वाई चंद्र चूर्ण को जो रिप्लेस करने जा रहे हैं संजीव खन्ना जोक सुप्रीम नेक्स्ट सीजीआई
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है नेक्स्ट चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ओके संजीव खन्ना जिस माध्यम से चुने गए हैं
52:11
उसमें सरकार का कोई भी हाथ नहीं है आपको बता दूं एक बार हुआ था एक बार कार्यपालिका
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और न्यायपालिका का सेपरेशन हट गया था दोनों मिल गई थी इंदिरा गांधी के समय इमरजेंसी इसमें डी वाई चंद्र चू जी के
52:22
पिताजी को महत्व दिया गया था आपको पता है डी वाई चंद्र चू जी के पिताजी जी भी चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रह चुके इंदिरा गांधी के
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समय और डी वाई चंद्र चण जी के जो पिताजी थे ठीक है जब वो चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बने
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थे जबकि उनकी कैपेबिलिटी थी नहीं लेकिन फिर भी इंदिरा गांधी सरकार ने उन्हीं को बनाया हमेशा आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट
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में जो सीजीआई बनता है वो सीनियरिटी लेवल प बनता है किस पे बनता है सीनियरिटी लेवल पे कि सबसे जो वरिष्ठ न्यायाधीश होगा वही
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सुप्रीम कोर्ट का सीजीआई ठीक है इंदिरा गांधी ने इस परंपरा को तोड़ा और इंदिरा गांधी ने ही सीजीआई की नियुक्ति की थी मैं
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आपको बता दूं ऐसा कभी नहीं हुआ इतिहास में हमारे लेकिन एक बार भारत में हुआ और प्रधानमंत्री कार्यपालिका का वास्तविक
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कार्यपालिका का अध्यक्ष आपको बता दूं राष्ट्रपति नाम मात्र का होता है लेकिन वास्तविक कार्यपालिका का अध्यक्ष कौन होता
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है प्रधानमंत्री और प्रधानमंत्री सीजीआई की नियुक्ति नहीं कर सकता इसे कहते हैं
53:18
कॉलेजियम प्रोसेस यानी हमारे जजेस ऑफ द सुप्रीम कोर्ट एंड जजेस ऑफ द हाई कोर्ट कॉलेजियन प्रोसेस से चुने जाते हैं या तो
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जज से ली जाती है या राष्ट्रपति उसमें किसी भी प्रकार का कोई भी सरकार का आदमी
53:32
नहीं बैठ सकता समझ गए ना चलिए तो यह सेपरेशन पावर याद रखना एक बार एक है आपका
53:38
आर्टिकल 51 चक लास्ट है फिनिश करते हैं इसको आर्टिकल 51 यह कहता है आर्टिकल 51 क्या कहता है 51 का यह कहना
53:48
है कि राज्य का प्रयास रहेगा या राज्य का कर्तव्य रहेगा कि राज्य अंतरराष्ट्रीय
53:53
सुरक्षा की संवृद्धि उस की शांति उसको बढ़ावा देने का प्रयास करे तो लिख दे कि
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राज्य राज्य अंतरराष्ट्रीय राज्य अंतरराष्ट्रीय
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अंतरराष्ट्रीय शांति
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एवं सुरक्षा को बढ़ावा
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देगा ठीक है तो चलिए समय ज्यादा हो है मुझे लगता है अब हमें निकलना भी चाहिए या
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नहीं चलना चाहिए निकलना नहीं मतलब इन द सेंस हिस्ट्री लेंगे क्लास आपकी हिस्ट्री की क्लास होगी तो चलिए बेटा अब हम मिलते
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हैं आपसे नेक्स्ट लेक्चर में जोक हिस्ट्री का लेक्चर आज ही होगा आपका तो सभी को मेरा
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नमस्कार आपको कैसा लगा आज का लेक्चर चलिए तो आर्टिकल 51 तक हो गए हैं आपके हालांकि
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डीपीएसपी बहुत चीज बाकी भी रह जाती है अभी वो केवल एक डिबेट का मुद्दा हो सकता है कि
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आपके फैक्ट तो हो गए सारे आज जैसे कि चंपा कम दरा केस एक टॉपिक चलता है बहुत फेमस
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डीपीएसपी में कि कॉन्फ्लेट बिटवीन या कॉन्फ्लेट या डिस्प्यूट कह सकते
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हैं डिस्प्यूट बिटवीन डायरेक्टिव प्रिंसिपल ऑफ स्टेट पॉलिसी एंड फंडामेंटल यानी मूल अधिकार और
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राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के बीच में टकराव विवाद कोलेशन क्या बोल सकते हैं
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इसको क्लैप्स तो क्लैप्स बिटवीन डीपीएसपी एंड फंडामेंटल राइट ऐसे भी कुछ बोल सकते
55:23
हैं इसमें टॉपिक काम करता है इसमें चार केस काम करते हैं चंपा गम दौरान केस 1951
55:28
फि एक काम करता है गोलकनाथ केस 1967 फि एक काम करता है केशवानंद भारतीय केस 1973 फिर
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एक और काम करता है मिनर्वा मिल्स मामला मैं आपको बता दूं मिनर्वा मिल्स
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मामला 1980 केवल इतना कहता है कि डीपीएसपी और मूल
55:47
अधिकार हमारे संविधान का भाग तीन और संविधान के भाग चार एक ही रस के दो पहिए
55:52
रस क्या हुआ संविधान पहिए कौन बने पहिए कौन है प कौन है एक तो डीपीएसपी है और एक आपका
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मूल एक ही रथ के दो पय कौन है जि हमारे ग्रेनल ने की मूल आत्मा ऐसे नहीं
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बोला ऐसे मिलाकर कुछ केसेस हुए इस टकराव हुआ हालांकि टकराव को लेकर आप इतना समझिए
56:14
बस कि सरकार कभी मूल अध सरकार कभी ऐसा
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नहीं कर सकती सरकार डीपीएसपी को लागू करने के लिए मूल अधिकारों के मूल ढांचे को ही चेंज
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सरकार के बस की बात नहीं सरकार ऐसा नहीं कर सकती जब तक देश लोकतांत्रिक
56:32
लोकतांत्रिक गणतंत्र हट गया भैया बात की बात जानो ले अब तक य सुप्रीम कोर्ट का
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जजमेंट है सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट य कहता है केशव भारतीय केस भी कहता है उसके अलावा
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केशवानंद भारतीय केस के अलावा गोलकनाथ केस भी है गोलकनाथ केस तो साफ साफ कहता है कि
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सुप्रीम की सरकार डीपीएसपी को लागू करने के लिए मूल
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अधिकार के मूल ढांचे में किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं कर सकती मूल ढांचे में संशोधन कर सकती है लेकिन ऊपर ऊपर से मूल
57:02
ढांचे से नहीं यानी मूल अधिकार और डीपीएसपी की तुलना में मूल अधिकार प्रभावी
57:07
माने जाएंगे ये चंपा कम दौरान केस में बोला चलिए यह कुछ जजमेंट थे जजमेंट आपके
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लिए बस स्टेटमेंट के तौर पर बता दिए एक ही रत के दो पहिए कि सुप्रीम कोर्ट का कौन सा जजमेंट मिनर्वा मिल्स मामला 1980
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का मूल अधिकार के मूल ढांचे में छेड़छाड़ नहीं होगी यह केशवानंद भारतीय केस
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197 एक था आपका गोलकनाथ केस ऑफ 1967 यह केस कहता है कि डीपीएसपी को लागू करने के
57:34
लिए मूल अधिकार में संशोधन नहीं किया जा सकता ये गोलकनाथ केस था
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19 पंजाब जो गोलकनाथ वर्सेस स्टेट ऑफ पंजाब था उसके बाद था आपका चंपाका राइजन
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केस 1950 उसमें बताया गया कि मूल अधिकार और डीपीएसपी की तुलना में मूल अधिकार प्रभावी माने जाएंगे बजाय डीपीएस चलिए अब
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ये टकराव भी खत्म हो गया आपका और इसे कहते हैं अ क्लैप्स ंग कहते हैं कोलप्पन या
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क्लैप्स ंग बिटवीन डीपीएसपी एंड फंडामेंटल राइट चलिए तो फिर मिलते हैं आपसे चलिए
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नमस्कार सभी को जय हिंद जय भारत
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[संगीत]
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[संगीत]
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