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Irrationally Yours (Dan Ariely) एक powerful किताब है जो बताती है कि हम इंसान अपनी जिंदगी में छोटे-छोटे decisions कैसे गलत लेते हैं — और फिर उन्हीं गलतियों को justify भी करते हैं।
इस हिंदी ऑडियोबुक सार में आप सीखेंगे:
✨ क्यों हमारा दिमाग तर्कहीन फैसले लेता है
✨ हम खुद को सबसे ज़्यादा कैसे धोखा देते हैं
✨ छोटी आदतें हमारी पूरी life कैसे बदल देती हैं
✨ क्यों emotions logic को हरा देते हैं
✨ और कैसे awareness आपकी life को instantly improve कर सकती है
अगर आप समझना चाहते हैं कि:
✔ आपका दिमाग गलतियाँ कैसे repeat करता है
✔ आप दूसरों और खुद को कैसे गलत judge करते हैं
✔ आप अपने जीवन में clarity और control कैसे ला सकते हैं
✔ और कैसे छोटी-छोटी psychological tricks आपकी पूरी life बदल सकती हैं…
तो यह वीडियो आपके लिए है।
यह किताब Think Better Hindi की ऑडियंस के लिए perfect है — simple, relatable, और practical।
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हम इंसान हमेशा लॉजिकल नहीं होते।
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लेकिन हमारी बेवकूफियां भी प्रेडिक्टेबल होती है। टेन एरे दुनिया के सबसे बड़े
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बिहेवियर साइंटिस्ट में से एक है। उनकी किताब इररेशनली योर्स हमें सिखाती है कि
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इंसान गलती कैसे करता है, क्यों करता है, कैसे रोक सकता है और अपनी जिंदगी कैसे
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बेहतर कर सकता है। वह कहते हैं, हमारे डिसीजंस इररेशनल होते हैं। लेकिन हर बार
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एक ही तरह से इररेशनल होते हैं और यही बात हमें उन्हें सुधारने में मदद करती है। इस
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पार्ट में हम सीखेंगे इंसान क्यों गलत डिसीजंस लेता है। हम दूसरों से ज्यादा खुद
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को कैसे धोखा देते हैं? इमोशंस कैसे लॉजिक पर हावी हो जाते हैं? छोटी गलतियां हमारी
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जिंदगी पर बड़ा असर क्यों डालती हैं? और डन एरियली का फनिएस्ट लेकिन मोस्ट
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एक्यूरेट मैसेज लेसन वन इंसान लॉजिकल नहीं
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इमोशनल डिसीजन मेकर है। हम सोचते हैं कि मैं समझदारी से डिसीजंस लेता हूं। मुझे
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कोई बेवकूफ नहीं बना सकता। मैं लोगों से ज्यादा इंटेलिजेंट हूं। पर ऑथर बताते हैं
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हम पहले इमोशन से डिसाइड करते हैं। फिर उस इमोशन को जस्टिफाई करने के लिए लॉजिक
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तलाशते हैं। एग्जांपल सेल में देखो 50% ऑफ
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देखकर आप पैसे बचाने नहीं खर्च करने जाते हैं। फूड ऑर्डर करते समय आप हेल्थ नहीं
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क्रेविंग चुनते हैं। रिलेशनशिप में आप लॉजिक नहीं फीलिंग फॉलो करते हैं। 10 कहते
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हैं इमोशन इज द ड्राइवर। लॉजिक पीछे बैठा हुआ सहयात्री है। यानी डिसीजन स्टीयरिंग
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हमेशा भावनाएं चलाती हैं। लेसन टू हम खुद को सबसे ज्यादा धोखा देते हैं। यह किताब
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का सबसे ऑनेस्ट ट्रुथ है। ह्यूमंस लाइ टू देमसेल्व्स मोर देन दे लाइ टू अदर्स।
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कैसे? कल से वर्कआउट शुरू करूंगा। एक्चुअल नहीं होगा। बस यह एक स्लाइस खा लेता हूं।
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एक्चुअल दो और खा लूंगी। मैं 5 मिनट में उठ जाऊंगा। एक्चुअल 20 मिनट का स्नूस। वो
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मुझे इग्नोर कर रहा है इसलिए मैं भी इग्नोर करूंगा। एक्चुअल आप हर्ट हो रहे
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हो। ऑथर कहते हैं हमारे एक्सक्यूसेस सबसे बड़े थीव्स हैं। वे हमारा समय और फ्यूचर
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दोनों चुरा लेते हैं। लेसन थ्री छोटी बातों का असर बड़ा क्यों होता है? हम
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सोचते हैं छोटी-छोटी गलतियों से क्या फर्क पड़ता है? लेकिन बिहेवियरल साइंस कहती है
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छोटी आदतें बड़ी डायरेक्शन बनाती हैं। छोटे डिसीजंस लाइफ का पूरा पैटर्न बनाते
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हैं। रोज 10 मिनट मोबाइल स्क्रोल साल में 60 घंटे बर्बाद। रोज एक छोटी अनहेल्ी
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चॉइस। महीनों में मूड एनर्जी खराब। रोज
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थोड़ा प्रोक्रेस्टिनेशन, साल में बड़े गोल्स डिले। ऑथर कहते हैं स्मॉल इरेशनल
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चॉइसेस बिकम बिग लाइफ आउटकम्स। इसीलिए छोटी बातों को लाइटली मत लो। यही आपकी
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जिंदगी की दिशा तय करती है। लेसन फोर फ्री शब्द हमारी बुद्धि गायब कर देता है।
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सबसे मजेदार एक्सपेरिमेंट जब दो चीजें हो। ऑप्शन ए कीमत ₹20 ऑप्शन बी कीमत ₹ फ्री
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95% लोग फ्री वाला ऑप्शन चुनेंगे। चाहे वह बेकार ही क्यों ना हो। व्हाई? जीरो कॉस्ट
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मतलब जीरो रेजिस्टेंस। जीरो रिस्क मतलब हाई एक्साइटमेंट। 10 कहते हैं फ्री इज नॉट
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अ प्राइस। फ्री इज एन इमोशन। इसका मतलब लोग फ्री सेमिनार में जाएंगे लेकिन
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सीखेंगे नहीं। फ्री आइटम रख लेंगे लेकिन उपयोग नहीं करेंगे। फ्री एप्स डाउनलोड
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करेंगे लेकिन प्रोडक्टिव नहीं होंगे। फ्री मतलब इरेशनल ट्रैप। लेसन फाइव गलत डिसीजन
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लेने के बाद हम उसे डिफेंड करते हैं। इंसान को अपनी मिस्टेक्स स्वीकार करना
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मुश्किल लगता है। क्यों? क्योंकि हमारा ईगो कहता है मैं गलत हो ही नहीं सकता।
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एग्जांपल गलत रिलेशनशिप में रहना शायद सुधार हो जाएगा। गलत परचेस कर लेना। फिर
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भी अच्छा ही है। गलत दोस्त चुन लेना। मेरी चॉइस गलत नहीं हो सकती। डेन कहते हैं हम
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गलती करते हैं। फिर उस गलती को बचाने में लग जाते हैं। इससे हम गलत रास्ते पर और
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आगे निकल जाते हैं। लेसन सिक्स सोशल प्रेशर आपके डिसीजंस चला रहा है। हम सोचते
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हैं कि हम इंडिपेंडेंट थिंकर्स हैं। लेकिन एक्सपेरिमेंट्स बताते हैं लोगों का
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बिहेवियर, आपका बिहेवियर। लोगों की पसंद, आपकी पसंद, लोगों की डायरेक्शन, आपकी
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डायरेक्शन। एग्जांपल अगर आप देखते हैं कि पूरा ग्रुप फोन पर है। आप भी फोन उठाएंगे।
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सभी एक डिश ऑर्डर कर रहे हैं। आप भी वही ऑर्डर करेंगे। सभी कुछ ट्रेंड फॉलो कर रहे
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हैं। आप भी अनकॉन्शियसली ज्वॉइ कर लेते हैं। डेन कहते हैं आप अकेले निर्णय नहीं
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लेते। आपके आसपास लोग आपके दिमाग को चलाते हैं। इसलिए सही लोगों के बीच रहना
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क्रिटिकल है। लेसन सेवन हमारी मेमोरी भी रैशन नहीं है। हम मानते हैं कि हम चीजें
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परफेक्ट याद रखते हैं। लेकिन सत्य मेमोरी एक कहानी है। रियलिटी नहीं। हम अक्सर
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अनकंफर्टेबल चीजें भूल जाते हैं। फेवरेट चीजें बढ़ा चढ़ाकर याद करते हैं। अपनी
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गलतियों को सॉफ्ट वर्जन में याद करते हैं। दूसरों की गलतियों को स्ट्रांग वर्जन में
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रखते हैं। डेन कहते हैं कामयाब जिंदगी के लिए आपको अपनी मेमोरी नहीं अपनी ऑनेस्टी
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को ट्रेन करना होगा। लेसन एट हम तब तक सीखते नहीं जब तक पेनफुल कॉन्सिक्वेंस ना
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मिले। क्यों? क्योंकि इंसान फ्यूचर के पेन को हल्का मानता है। प्रेजेंट कंफर्ट को
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ज्यादा वैल्यू देता है। एग्जांपल आज एक्सरसाइज नहीं की। कोई पनिशमेंट नहीं। आज
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हेल्दी नहीं खाया। कोई पनिशमेंट नहीं। आज डिस्ट्रैक्शन मेड टाइम वेस्ट किया।
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इमीडिएट हार्म नहीं। इसीलिए हम वही रिपीट करते हैं। देन का मोटिवेशनल मैसेज अगर आप
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फ्यूचर का पेन महसूस करना सीख लें तो आप आज सही चॉइससेस लेने लगेंगे।
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लेसन नाइन सॉलशंस सिंपल होते हैं लेकिन हम कॉम्प्लिकेटेड ढूंढते हैं। देन कहते हैं
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ह्यूमन माइंड सॉलशंस नहीं ढूंढता। ड्रामा ढूंढता है। इसलिए प्रॉब्लम छोटी होती है।
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समाधान हम बड़ा ढूंढते हैं। डिसिप्लिन सिंपल होता है। हम फैंसी टेक्निक्स ढूंढते
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हैं। हैप्पीनेस सिंपल चीजों में है। हम जीवन में बड़ी चीजें तलाशते हैं। सिंपल इज
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पावरफुल लेकिन माइंड सिंपल को सीरियस नहीं मानता। लेसन 10 अगर आप अपनी इररेशनलिटीज
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को पहचान लें तो लाइफ आसान हो जाएगी। 10 कहते हैं अपने ट्रैप्स पहचानो। अपनी
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मिस्टेक्स एक्सेप्ट करो। अपने इमोशंस ऑब्जर्व करो। अपने बायसेस समझो क्योंकि
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सेल्फ अवेयरनेस इज द क्योर फॉर इररेशनल बिहेवियर। अगर आप जान जाओ कि आप कब कहां
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क्यों गलत डिसीजन लेते हो तो आपकी आधी प्रॉब्लम्स वहीं खत्म हो जाएंगी। इस
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हिस्से में हमने काफी सारी चीजें सीखी। अब चलते हैं अगले हिस्से की तरफ। इंसानी
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दिमाग की छुपी हुई गलतियां और उन्हें ठीक करने के आसान तरीके। डेन कहते हैं हम इंसान गलतियां इसलिए नहीं
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करते कि हम बेवकूफ हैं बल्कि इसलिए करते हैं क्योंकि हम इंसान हैं। इस भाग में हम
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उन मेंटल ट्रैप्स के बारे में सीखेंगे जो चुपचाप हमारी रोजमर्रा की लाइफ बर्बाद कर
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देते हैं और साथ ही सीखेंगे कि उन्हें कैसे कंट्रोल में लाया जाए।
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लेसन वन द एंकरिंग ट्रैप दिमाग को पहला नंबर हमेशा याद रहता है। बहुत सिंपल
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एग्जांपल अगर आप दुकानदार से पूछे यह शर्ट कितने की है? वह बोले ₹2000 फिर बोले
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लेकिन आपके लिए ₹12000 आपको लगेगा यार बढ़िया डील है। लेकिन यह वही शर्ट हो सकती
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है जो असल में ₹600 की है। क्यों? क्योंकि दिमाग पहली बार सुने गए बड़े नंबर में
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एंकर हो जाता है। डिन कहते हैं पहला नंबर, पहली कीमत, पहला इंप्रेशन यह आपकी पूरी
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जजमेंट को कंट्रोल करते हैं। कैसे बचें? हर कंपैरिजन खुद करो। पहला नंबर सिर्फ
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रेफरेंस समझो। डिसीजन लेते समय 2 मिनट रुक कर सोचो। यह छोटी सी प्रैक्टिस आपको गलत
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डील से बचा सकती है। लेसन टू चॉइस ओवरलोड हमें कंफ्यूज्ड कर देता है। जब बहुत
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ज्यादा ऑप्शंस हो तो इंसान बेहतर चॉइस नहीं करता बल्कि अवॉइड कर देता है।
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एग्जांपल Netflix 5000 मूवीस रिजल्ट आप कंफ्यूज्ड होकर मोबाइल्स स्क्रॉल कर देते
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हो। मार्केट में बी शैंपू रिजल्ट आप वही पुराना खरीद लेते हो। चॉइस ओवरलोड हमें
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तीन नुकसान देता है। पहला डिसीजन डिले दूसरा स्ट्रेस तीसरा गिल्ट कि शायद कोई और
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चॉइस बेटर होती। स्यूशन अपने ऑप्शंस को कम करो। सिर्फ दो-तीन बेस्ट ऑप्शंस रखो।
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परफेक्ट चॉइस का बोझ मत लो। 10 कहते हैं परफेक्ट चॉइस खोजने में लाइफ वेस्ट हो
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जाती है। गुड इनफ चॉइसेस लाइफ बदल देती है। लेसन थ्री हम आज के कंफर्ट को भविष्य
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से ज्यादा वैल्यू देते हैं। इसका नाम है प्रेजेंट बायस। एग्जांपल कल से जिम
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जाऊंगा। आज बस 10 मिनट और मोबाइल थोड़ा सो लेता हूं। बाद में काम कर लूंगा। दिमाग
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हमेशा चाहता है आज का आराम, आज का मजा, आज की सुविधा लेकिन सच, आज की छोटी-छोटी
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गलतियां कल की बड़ी-बड़ी समस्याएं बन जाती हैं। स्यूशन अपने कामों को 5 मिनट रूल में
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बांट दो। यानी सिर्फ 5 मिनट शुरू करो। आगे मोमेंटम खुद बनेगा। बड़े गोल्स को छोटे
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स्टेप्स में बांट दो। डिसिप्लिन कोई चॉइस नहीं डिफॉल्ट सेटिंग बना दो। लेसन फोर लॉस
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एवशन हम हर हार से ज्यादा डरते हैं। जीत से खुश
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नहीं होते। बिहेवियरल साइंस कहती है एक सरप्राइज मिलने से जितनी खुशी मिलती है,
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उससे दोगना दर्द लॉस होने पर मिलता है। एग्जांपल किसी फ्रेंड से ₹500 मिलने की
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खुशी वर्सेस ₹500 खोने का दर्द। खोने का दर्द हमेशा बड़ा होगा। इस डर की वजह से हम
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न्यू अपॉर्चुनिटीज अवॉइड करते हैं। हम रिस्क नहीं लेते। हम अनकंफर्टेबल ग्रोथ
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नहीं चुनते। हम स्टक लाइफ में फंसे रहते हैं। देन कहते हैं अगर आप लाइफ में ग्रो
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करना चाहते हैं तो आपको लॉस के डर से बिगर ड्रीम चुनना होगा। स्यूशन हर डिसीजन में
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पूछो। वर्स्ट केस क्या है? ज्यादातर समय वर्स्ट केस इतना डरावना नहीं होता जितना
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दिमाग सोचता है। ग्रोथ को लॉस नहीं इन्वेस्टमेंट मानो। लेसन नंबर फाइव द
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एंडोरमेंट इफेक्ट जो हमारा है उसे हम ज्यादा कीमती मानते हैं। एग्जांपल आपकी
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पुरानी टीशर्ट आपके लिए बहुत वैलुएबल दूसरों के लिए कंप्लीटली नॉर्मल। आपका
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पुराना फोन। आप कहेंगे यह तो बढ़िया चल रहा है। बायर कहेगा भाई 5 साल पुराना है।
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यह इफेक्ट हमें इमोशनल बनाता है और प्रैक्टिकल डिसीजंस से दूर कर देता है।
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स्यूशन खुद से पूछो। अगर यह चीज मेरी ना होती तो मैं इसे खरीदना चाहता। अगर आंसर
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नो हो तो आप इसे अननेसेसरी वैल्यू दे रहे हो। लेसन सिक्स हम दूसरों के लिए ज्यादा
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अच्छे होते हैं। खुद के लिए नहीं। देन कहते हैं हम दूसरों को ग्रेट एडवाइस
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देते हैं। लेकिन खुद फॉलो नहीं करते। क्यों? क्योंकि दूसरों के लिए एडवाइस देते
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समय हम इमोशनल नहीं होते। लेकिन अपने केस में ईगो, फियर, इमोशन, होप्स, एक्सक्यूसेस
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सब एक्टिवेट हो जाते हैं। सॉल्यूशन खुद को अपने जैसा नहीं किसी दूसरे इंसान की तरह
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सलाह दो। यह टेक्निक सुपर इफेक्टिव है। खुद को लिखकर एडवाइस देना दिमाग क्लियर हो
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जाता है। लेसन नंबर सेवन द ई इफेक्ट। खुद की बनाई चीजें परफेक्ट लगती हैं। देन
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बताते हैं अगर आपने कोई फर्नीचर खुद जोड़ा वह आपको अत्यंत अच्छा लगेगा भले ही उसमें
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हल्की सी कमी हो। अगर आपने कोई प्रोजेक्ट बनाया आप उसे एक्सीलेंट मानेंगे। लेकिन
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बाकी लोग उसे एवरेज समझ सकते हैं। यानी हम अपने एफर्ट को ओवरवैल्यू करते हैं। लाइफ
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में इनका नुकसान हम गलत प्रोजेक्ट्स छोड़ते नहीं। गलत रिलेशनशिप्स पकड़ कर
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बैठे रहते हैं। आउटडेटेड आइडियाज छोड़ते नहीं। अपने काम की कमियां नहीं देखते।
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स्यूशन तीसरे व्यक्ति का ऑनेस्ट फीडबैक लो। अपने काम को आउटसाइड पर्सेक्टिव से
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देखो। कभी-कभी एक्सेप्ट करो। मेबी यह परफेक्ट नहीं है। लेसन एट द सं कॉस्ट
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पॉलिसी। पहले किए खर्च की वजह से हम गलत रास्ते पर टिके रहते हैं। सबसे डेंजरस
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ट्रैप एग्जांपल मूवी बोरिंग है फिर भी पूरी देखते हैं सोच कर टिकट का पैसा दिया
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है। रिलेशनशिप गलत है फिर भी छोड़ते नहीं सोचकर इतना टाइम दिया है। बिजनेस
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स्ट्रेटजी फ्लॉप है। फिर भी बदलते नहीं। सोच कर इतना पैसा लगाया है। देन कहते हैं
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जो खर्च हो चुका है वह वापस नहीं आएगा। लेकिन आप अपनी फ्यूचर कॉस्ट बचा सकते हैं।
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सलूशन हर बार पूछो अगर मैंने अभी तक इसमें टाइम पैसा नहीं लगाया होता तो क्या मैं
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इसे फिर भी चुनता? अगर आल्सो नो तो तुरंत
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एग्जिट करो। लेसन नंबर नाइन दिमाग को क्लेरिटी चाहिए लेकिन हम सब कुछ
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कॉम्प्लिकेटेड बना देते हैं। व्हाई? क्योंकि सिंपलीसिटी में ईगो को फन नहीं
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मिलता। एग्जांपल वेट लॉस सिंपल है। कम खाओ, सही खाओ, चलो पर हम फैंसी डाइट्स,
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एक्सपेंसिव जिम, कॉम्प्लिकेटेड रूटीनंस इन पर डिपेंड हो जाते हैं। 10 का लेसन, सिंपल
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प्रॉब्लम्स के सिंपल सॉलशंस होते हैं। सॉल्यूशन, 80% एफर्ट, सिंपल स्टेप्स पर
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दो। 20% फैंसी आइडियाज पर। खुद को डेली पूछो। क्या मैं चीजें अननेसेसरी टफ बना
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रहा हूं? लेसन नंबर 10 दिमाग फ्यूचर को बहुत गलत जज करता है और इसी वजह से हम गलत
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लोगों पर ट्रस्ट करते हैं। गलत जॉब्स में स्टक रहते हैं। गलत गोल्स चस करते हैं और
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गलत परचेजेस करते हैं। हम सोचते हैं यह करने से मुझे हैप्पीनेस मिलेगी। लेकिन
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मंथ्स लेटर हमें महसूस होता है कि हमें वह खुशी नहीं मिलती। देन कहते हैं हमारा
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दिमाग खुशी की प्रेडिक्शन करने में बेहद कमजोर है। स्यूशन बड़े डिसीजंस से पहले
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खुद को 24 घंटे दो। इमोशनल डिसीजंस कभी सेम डे मत लो। पास्ट एक्सपीरियंस देखकर
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फ्यूचर प्रेडिक्शन करो। क्या इससे मुझे 6 महीने बाद भी खुशी मिलेगी? पूछो।
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अभी तक हमने सीखा एंकरिंग हमें मैनपुलेट करता है। ज्यादा ऑप्शंस मतलब कंफ्यूजन। आज
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का कंफर्ट मतलब फ्यूचर की बर्बादी। लॉस का डर हमें रोकता है। हम अपनी चीजों को
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ओवरवैल्यू करते हैं। दूसरों के अच्छे एडवाइस देना आसान। खुद को मुश्किल। अपने
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एफर्ट को एओवरवेल करना एक ट्रैप है। सन कॉस्ट हमें गलत रास्ते पर रखता है और
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सिंपल सशंस हमेशा पावरफुल होते हैं। हमारा दिमाग फ्यूचर हैप्पीनेस प्रेडिक्ट नहीं कर
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पाता। दोस्तों अब चलते हैं पार्ट थ्री की तरफ
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जिसमें हम बात करेंगे इंसानी दिमाग के छुपे हुए बिहेवियरल पैटर्न्स की जो हमारी जिंदगी को सीक्रेटली कंट्रोल करते हैं। अब
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तक हमने सीखा कि दिमाग किस तरह गलतियां रिपीट करता है और हम कैसे उनसे बच सकते
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हैं। इस पार्ट थ्री में डेन बताते हैं हम स्ट्रेस में क्यों गलत डिसीजंस लेते हैं।
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हम खुद को कैसे मैनपुलेट करते हैं? हमारे रिश्ते, पैसा और अटेंशन कैसे प्रभाव में
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आते हैं और हम खुद को बेहतर वर्जन कैसे बना सकते हैं। यह भाग बहुत प्रैक्टिकल है।
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लेसन वन स्ट्रेस और फियर आपकी सोच को नैरो कर देते हैं। जब भी इंसान डरता है या
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स्ट्रेस्ड होता है तो उसका दिमाग टनल मोड में चला जाता है। क्या होता है? आप सिर्फ
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इमीडिएट समस्या देखते हो। आप लॉन्ग टर्म पिक्चर खो देते हो। आप गलत लोगों पर भरोसा
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कर लेते हो। आप गलत चॉइससेस टेक कर लेते हो। एग्जांपल स्ट्रेस में लोग इमोशनल
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खरीदारी करते हैं। स्ट्रेस में लोग गलत वर्ड्स बोल देते हैं। स्ट्रेस में लोग
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जल्दी-जल्दी डिसीजंस ले लेते हैं। देन कहते हैं फियर मेक्स द ब्रेन स्टूपिड।
18:49
सॉल्यूशन स्ट्रेस वाला डिसीजन कभी उसी समय मत लो। 10 डीप ब्रेथ्स दिमाग का रिसेट बटन
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है। डिसीजन डिले मतलब बेटर डिसीजन। लेसन
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नंबर टू विल पावर एक बैटरी है। और यह दिन
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में भर में खत्म हो जाती है। बहुत डीप कांसेप्ट। हम सोचते हैं आई विल कंट्रोल
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मायसेल्फ होल डे। लेकिन डेन बताते हैं विल पावर लिमिटेड होती है या हर डिसीजंस में
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खर्च होती जाती है। इसलिए सुबह डिसिप्लिन आसान होता है। रात में डिसिप्लिन टूट जाता
19:30
है। एग्जांपल सुबह हेल्दी खा लेते हैं। रात को क्रेविंग कंट्रोल नहीं होती। सुबह
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फोन से दूर रह सकते हैं। रात को स्क्रोलिंग चालू हो जाती है। स्यूशन
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इंपॉर्टेंट डिसीजंस सुबह लो। हार्ड काम सुबह कर लो। रात के समय लक्ष्यों पर भरोसा
19:50
मत करो। लेसन नंबर थ्री हम मोरल डिसीजंस को भी इमोशन के आधार पर लेते हैं। हम
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सोचते हैं कि हम हमेशा एथिकल चॉइसेस लेते हैं। लेकिन डेन के स्टडीज बताते हैं कि
20:04
मोरल बिहेवियर, इमोशंस से ड्रवन होता है। गिल्ट, शेम, प्राइड, फियर, सोशल अप्रूवल।
20:12
एग्जांपल आप किसी को चैरिटी इसलिए देते हो क्योंकि आपको अच्छा महसूस होता है ना कि
20:18
इसलिए कि वह पैसे सबसे ज्यादा नीडेड है। आप किसी को सच इसलिए बताते हो क्योंकि
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आपको गिल्ट अच्छा नहीं लगता। मीनिंग हम मोरल दिखते हैं। लेकिन अंदर डीप इमोशनल
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होते हैं। सॉल्यूशन ऑनेस्ट चॉइससेस के पीछे कारण समझो। सोशल अप्रूवल से खुद को
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दूर करो। कैसे देखूंगा से ज्यादा क्या सही है पर ध्यान दो लेसन नंबर फोर पैसा हमें
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ज्यादा इमोशनल बनाता है सबसे शॉकिंग फाइंडिंग्स देन बताते हैं पैसे की बात आते
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ही इंसान ज्यादा डिसओनेस्ट हो जाता है पैसा देखकर इंसान का बिहेवियर बदल जाता है
21:00
पैसा दिमाग में ग्रीड मोड एक्टिवेट करता है एग्जांपल कोई फ्री में मदद करे तो खुशी
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वही काम पेड हो जाए तो टेंशन दोस्त से उधार लिया पैसा ऑकवर्डनेस सेम अमाउंट
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गिफ्ट में दिया जाए तो खुशी मनी डिस्टोर्ट्स इमोशंस स्यूशन फाइनेंशियल
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डिसीजंस 24 घंटे की दूरी से लो कभी भी एक्सट्रीम इमोशंस में पैसे से जुड़े
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डिसीजंस मत लो पैसे को गोल मत बनाओ इसे एक टूल समझो
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लेसन फाइव सोशल कंपैरिजन हमारी खुशी छीन लेता हैं। हम तब तक खुश रहते हैं जब तक हम
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खुद की तुलना दूसरों से नहीं करते। देन बताते हैं कंपैरिजन डिस्ट्रॉय हैप्पीनेस।
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यह जेलसी, एंगर, डिसपॉइंटमेंट पैदा करता है और वर्स्ट यह हमें अपने गोल से भटका
21:55
देता है। एग्जांपल्स आपका फोन अच्छा है। पर पास वाले का एक मॉडल नया है। तो दुख
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आपकी जॉब ठीक है। पर किसी ने न्यू ऑफर लिया। दुख आपका घर ठीक है पर किसी दोस्त
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ने नया ले लिया तो दुख यानी आपकी खुशी आपकी नहीं दूसरों की है स्यूशन अपनी तुलना
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सिर्फ कल वाले अपने आप से करो दूसरों की सफलता इंस्पिरेशन बनाओ कंपटीशन नहीं सोशल
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मीडिया स्क्रॉल कम करो लेसन नंबर सिक्स गिफ्ट्स और रिवार्ड्स बिहेवियर बदलते हैं।
22:31
यह कांसेप्ट रिलेशनशिप्स में बहुत काम आता है। देन बताते हैं लोग आपको ज्यादा वैल्यू
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देते हैं जब वे एफर्ट इन्वेस्ट करते हैं या आपके लिए सैक्रिफाइस करते हैं।
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एग्जांपल अगर कोई दोस्त आपकी मदद करता है वह आपका ज्यादा वैल्यू देगा क्योंकि उसने
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एफर्ट लगाया उसे कहते हैं पेन फ्रैंकलिन इफेक्ट। क्यों? क्योंकि दिमाग कहता है
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मैंने एफर्ट किया है। इसलिए यह व्यक्ति वैलएबल होना चाहिए। आप इस प्रिंसिपल को
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यूज कर सकते हो। लोगों से छोटे फेवर्स मांगो। वे आपके करीब महसूस करेंगे। रिश्ते
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स्ट्रांग होंगे। लेसन सेवन। हम दूसरों के बिहेवियर को गलत समझते हैं। इसका नाम है
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फंडामेंटल एट्रिब्यूशन एरर। हम सोचते हैं अगर कोई रूट बिहेव करे वो खराब इंसान है।
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अगर कोई चीट करे वो डिसऑनेस्ट है। अगर कोई हेल्प ना करे वह सेल्फिश है। लेकिन
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रियलिटी हो सकता है वह स्ट्रेस में हो। हो सकता है वह चोटल हो। हो सकता है उसे समय
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नहीं हो। हो सकता है उसका दिन खराब हो। डेन कहते हैं हम दूसरों के बिहेवियर को
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कररेक्टर से जोड़ते हैं। पर अपने बिहेवियर को परिस्थिति से जस्टिफाई करते हैं।
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स्यूशन लोगों के लिए थोड़ा कंपैशन रखो। एजमशन कम करो। पूछो क्या सब ठीक है? यह
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रिलेशनशिप्स को बहुत बेहतर बना देता है। लेसन एट इमोशंस की वजह से हम अपने
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सिद्धांत तोड़ देते हैं। डेन कहते हैं हम जानते हैं कि डिले गलत है। हम जानते हैं
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कि ल गलत है। हम जानते हैं कि टपर गलत है। फिर भी हम करते हैं। क्यों? क्योंकि उस
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समय इमोशन ओवरपावर कर देता है। स्यूशन जब भी इंटेंस इमोशन हो तो पॉज का रूल लागू
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करो। डिसीजन बाद में लो। फाइव सेकंड पॉज कई बड़ी गलतियां रोक देता है। लेसन नाइन
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पीपल चीट ओनली टिल द पॉइंट दे स्टिल सी देमसेल्व्स एस गुड। हम चीट करते हैं लेकिन
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इतने कि हमें गिल्ट ना लगे। एग्जांपल 5 मिनट देर होना एक्सेप्टेबल। ₹1 रखना
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एक्सेप्टेबल। थोड़ा कॉपिंग करना एक्सेप्टेबल। हम खुद को कहते हैं मैं बुरा
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इंसान नहीं हूं। बस छोटी गलती है। पेन कहते हैं हमारी ऑनेस्टी भी लिमिटेड है।
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स्यूशन खुद के साथ जीरो कॉम्प्रोमाइज रूल रखो। छोटी चीटिंग भी मत करो। आपके
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कैरेक्टर का फाउंडेशन वही है। लेसन नंबर 10 हम जिंदगी में क्लेरिटी नहीं चाहते
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क्योंकि क्लेरिटी रिस्पांसिबिलिटी मांगती है। मोस्ट पावरफुल इनसाइट डेन कहते हैं
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इंसान कंफ्यूजन में कंफर्टेबल है क्योंकि कंफ्यूजन में रिस्पांसिबिलिटी नहीं होती।
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एग्जांपल मुझे पता नहीं क्या करूं। मुझे समझ नहीं आता सही रास्ता क्या है। मुझे
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नहीं पता रिश्ते का क्या फ्यूचर है। यह सब एक्सक्यूसेस हैं जो हमें अनकंफर्टेबल
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डिसीजंस से बचाते हैं। स्यूशन स्पष्टता चूज़ करो। अपने आप से सच्चाई बोलो।
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अनकंफर्टेबल सवाल पूछो। क्लेरिटी मतलब ग्रोथ और कंफ्यूजन मतलब स्टैग्नेशन।
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अब चलते हैं लास्ट पार्ट की तरफ। पार्ट फोर। हमारी इररेशनलिटी को समझकर जीवन को बेहतर
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कैसे बनाया जाए। इस अंतिम भाग में हम जानेंगे कैसे थोड़ी अवेयरनेस आपकी जिंदगी
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बदल सकती है। कैसे रिश्ते, पैसा, करियर और हैप्पीनेस को बेहतर बनाया जा सकता है।
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कैसे डेन के मॉडल से आप अपनी डेली लाइफ में क्लेरिटी और कंट्रोल ला सकते हैं। यह
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भाग सबसे प्रैक्टिकल और लाइफ चेंजिंग है। लेसन नंबर वन अवेयरनेस मतलब सुपर पावर।
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देन कहते हैं इरशनैलिटी। कोई कमजोरी नहीं है। वीकनेस तब है जब आप अपनी इररेशनलिटी
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को पहचानते नहीं। मीनिंग हम सब गलतियां करते हैं। मगर जो इंसान अपनी गलतियां देख
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लेता है वह दूसरों से 10 कदम आगे निकल जाता है। अवेयरनेस आपको यह देती है दिशा।
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क्लेरिटी, कंट्रोल, इमोशनल, स्टेबिलिटी, बैटल डिसीजंस। स्यूशन दिन में एक बार खुद
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से पूछो। आज मैंने कौन सी छोटी इररेशनल मिस्टेक की आपकी सेल्फ इंप्रूवमेंट खुद
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शुरू हो जाएगी। लेसन टू डिफॉल्ट सेटिंग्स आपकी जिंदगी चलाते हैं। डेन बताते हैं
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हमारी जिंदगी का 70 से 80% हिस्सा हमारे डिफॉल्ट बिहेवियर से चलता है। सुबह उठकर
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फोन पकड़ना, खाना, स्ट्रेस में खाना, छोटा काम डिले करना, छोटी बातें ओवरथिंक करना,
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छोटी चीजें ओवरथिंक करना, पैसे गलत जगह खर्च करना। अगर डिफॉल्ट गलत है लाइफ गलत
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होती है। अगर डिफॉल्ट सही है लाइफ बढ़िया होती है। स्यूशन अपने पांच डेली डिफॉल्ट
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हैबिट्स चुनो और उन्हें सही डिफॉल्ट में बदलो। एग्जांपल सुबह फोन नहीं 10 डीप
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ब्रेथ्स। रात को स्क्रोलिंग नहीं 20 मिनट रीडिंग। प्लानिंग रात में नहीं सुबह फ्रेश
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माइंड में। अननेसेसरी कंपैरिजंस नहीं ग्रेटीट्यूड। यह छोटे डिफॉल्ट्स लाइफ का
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पूरा ट्रैक बदल देते हैं। लेसन नंबर थ्री हमारे रिश्ते लॉजिक से नहीं साइकोलॉजी से
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चलते हैं। देन रिलेशनशिप साइकोलॉजी के एक्सपर्ट भी हैं। वे कहते हैं रिलेशनशिप्स
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आर नॉट लॉजिकल इक्वेशंस। दे आर इमोशनल एक्सपेरिमेंट्स। मीनिंग आपका परफेक्ट
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पार्टनर नहीं। आप भी परफेक्ट नहीं लेकिन रिलेशनशिप चलता है। जब दोनों साइकोलॉजी
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समझ लें। कॉमन इररेशनल पैटर्न्स। हम अपने पार्टनर से ज्यादा अपेक्षाएं रखते हैं। हम
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छोटी बातों पर हर्ट हो जाते हैं। हम अपनी गलती स्वीकार नहीं करते। हम कंपैरिजन करते
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हैं। हम अस्यूम करते हैं। हम कम्युनिकेशन अवॉइड करते हैं। स्यूशन थैंक्स ज्यादा
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करो। कंप्लेन कम करो। अस्यूम बिल्कुल मत करो। इमोशंस को वर्ड्स में एक्सप्रेस करो।
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छोटे फेवर्स एक्सचेंज करो। मोहब्बत को मेंटेनेंस चाहिए। ऑटोमेटिक नहीं चलता। देन
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कहते हैं हेल्दी रिलेशनशिप्स हैपन बाय डिज़ नॉट बाय एक्सीडेंट। लेसन नंबर फोर
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मोटिवेशन एक मिथ है। सिस्टम्स ही काम करते हैं। हम सोचते हैं जब मोटिवेशन आएगी तब
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काम शुरू करूंगा। लेकिन देन कहते हैं मोटिवेशन अनरिलायबल है। सिस्टम्स रिलायबल
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है। एग्जांपल जिम जाने की मोटिवेशन नहीं आएगी। लेकिन अगर आप जिम बैग पहले रात को
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रख दें सुबह जाना आसान हो जाएगा। स्टडी करने का मन नहीं होगा। लेकिन अगर आप सिर्फ
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5 मिनट रूल लगा दें माइंड एक्शन में आ जाएगा। सेविंग्स का मन नहीं होता। लेकिन
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ऑटोमेटिक डिडक्शन लगा दो सेविंग शुरू हो जाएगी। मीनिंग बिहेवियर चेंज इमोशंस से
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नहीं सिस्टम्स से होता है। लेसन फाइव लोग कई बार आपकी बात नहीं सुनेंगे लेकिन आपकी
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एनर्जी हमेशा महसूस करेंगे। साइकोलॉजी का रूल वर्ड्स इन फॉर्म एनर्जी ट्रांसफॉर्म्स
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देन बताते हैं लोग आपकी बात से नहीं आपके टोन से प्रभावित होते हैं। लोग आपके सलाह
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से नहीं आपकी प्रेजेंस से कंफर्ट पाते हैं। लोग आपकी नॉलेज नहीं याद रखते। आपकी
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वाइब याद रखते हैं। इसलिए आप जिस एनर्जी में रहेंगे वही एनर्जी आप दूसरे में
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फैलाएंगे। एग्जांपल आप शांत होंगे लोग खुलेंगे। आप इरिटेट होंगे माहौल खराब। आप
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एक्साइटेड होंगे, लोग मोटिवेटेड, आप एंग्री होंगे, लोग डिफेंसिव, कंक्लूजन
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बिफोर चेंजिंग अदर्स, फिक्स योर एनर्जी फर्स्ट। लेसन सिक्स। हमारी हैप्पीनेस तीन
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हिस्सों में बनती है। डेन हैप्पीनेस को तीन कैटेगरीज में बांटते हैं। पहला
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इंस्टेंट हैप्पीनेस। चॉकलेट, मूवीज या स्क्रोलिंग। जल्दी आती है। जल्दी खत्म हो
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जाती है। लॉन्ग टर्म वॉल्यूम नहीं। दूसरा अचीवमेंट हैप्पीनेस। गोल्स, सक्सेस,
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रिवार्ड्स, स्लो हैप्पीनेस, स्ट्रांग हैप्पीनेस, प्राउड फीलिंग देती है। थर्ड
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मीनिंग हैप्पीनेस, फैमिली, पर्पस, फेथ, सर्विस, डीपेस्ट हैप्पीनेस, लॉन्ग
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लास्टिंग, लाइफ चेंजिंग। मोस्ट पीपल सिर्फ फर्स्ट लेवल में फंसे रहते हैं। और इसलिए
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खाली महसूस होती है। लाइफ कैन का सजेशन,
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अपनी लाइफ में तीन लेयर्स रखो। मीनिंग वाली चीजें ज्यादा करो। लेसन सेवन आपके
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एनवायरमेंट से आपका दिमाग शेप होता है। आपका एनवायरमेंट आपकी हैबिट्स बनाता है।
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आपकी सोच बदलता है। आपकी एनर्जी सेट करता है। आपके फ्यूचर को डिसाइड करता है।
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एग्जांपल अगर आसपास नेगेटिव लोग हैं तो आप एंगस हो जाओगे। अगर आसपास एंबिशियस लोग
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हैं तो आप ग्रो करोगे। अगर आसपास डिस्ट्रैक्शंस है तो आप प्रोग्रेस नहीं करोगे। स्यूशन अपने एनवायरमेंट को रिीज़ाइन
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करो। डिस्ट्रैक्शंस हटाओ। पॉजिटिव टूल्स बढ़ाओ। सही लोगों के पीछे रहो। लेसन नंबर
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एट प्रोडक्टिविटी मतलब एनर्जी मैनेजमेंट। टाइम मैनेजमेंट
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नहीं। 10 बताते हैं इंपॉर्टेंट चीजें ज्यादा टाइम नहीं मांगती। सिर्फ टाइम और
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सही एनर्जी मांगती है। मीनिंग आप लो एनर्जी में इंपॉर्टेंट वर्क नहीं कर सकते।
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आप हाई एनर्जी में यूजर्स स्क्रॉलिंग नहीं करनी चाहिए। स्यूशन अपना हाई एनर्जी टाइम
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आइडेंटिफाई करो। उसी समय अपना सबसे इंपॉर्टेंट काम करो। लो एनर्जी टाइम हल्के
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कामों में इस्तेमाल करो। दिस इज लाइफ चेंजिंग। लेसन नंबर नाइन। आपके आइडेंटिटी
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आपकी हैबिट्स से बनती है। ड्रीम्स से नहीं। डेन कहते हैं आप वो नहीं जो आप
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सोचते हैं। आप वो हैं जो आप डेली करते हैं। एग्जांपल रोज पढ़ते हो तो आप रीडर
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हैं। रोज चलते हो तो आप फिट। रोज बचत करते हो तो आप डिसिप्लिन। रोज काम करते हो तो
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आप अचीवर। आइडेंटिटी चेंज मतलब हैबिट चेंज। हैबिट चेंज मतलब फॉर फ्यूचर चेंज।
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स्यूशन। अपने आपको न्यू आइडेंटिटी दो। जैसे आई एम अ डिसिप्लिन पर्सन। आई एम अ
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हेल्दी पर्सन। आई एम अ फोकस्ड पर्सन। फिर वही एक्शंस रिपीट करो। लेसन नंबर 10
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इमोशनल ऑनेस्टी आपकी जिंदगी ट्रांसफॉर्म कर देती है। देन का सबसे बड़ा मैसेज आज
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अपनी जिंदगी में ऑनेस्टी के 10% भी बढ़ा लो। लाइफ क्वालिटी 100% बढ़ जाएगी।
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ऑनेस्टी मतलब खुद से सच्चाई। अपनी फीलिंग्स एक्सेप्ट करना। अपनी गलती मानना,
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सही बोलना, फेक इमेज ना बनाना, दूसरों को सच कहना, इमोशनल ऑनेस्टी मतलब मेंटल
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फ्रीडम। इस पूरे ऑडियो बुक में हमने सीखा हम गलतियां क्यों करते हैं? कैसे खुद को धोखा
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देते हैं? कैसे स्माइल चॉइसेस लाइफ बदल देती है। कैसे सोशल प्रेशर डिसीजंस चलाते
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हैं। कैसे इमोशंस लॉजिक हरा देते हैं। कैसे अवेयरनेस हमें पावर देती है। कैसे
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हैबिट्स आइडेंटिटी बनाती है। कैसे रिलेशनशिप्स साइकोलॉजी से चलते हैं। कैसे
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सिस्टम्स मोटिवेशन से बेहतर है। और सबसे जरूरी हमारी इररेशनलिटी ही हमारी ग्रोथ का
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रास्ता है। अगर हम इसे समझ लें। डेन का अंतिम संदेश अपनी कमजोरियों से लड़ो मत।
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उन्हें समझो समझोगे तो बदलोगे। धन्यवाद।
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