Right to Disconnect Bill 2025: Pros, Cons & your excuses! #legal #news #law #trending #breakingnews
Dec 27, 2025
India's proposed Right to Disconnect Bill, 2025 aims to legally protect employees from work-related digital communication after hours, allowing them to refuse calls/emails without penalty, preventing burnout, and establishing an Employees' Welfare Authority to manage digital boundaries and enforce overtime/emergency protocols, fostering better work-life balance.
Key Highlights of the Bill:
Right to Refuse: Employees aren't obligated to answer work emails or calls after their official workday, holidays, or during breaks.
No Disciplinary Action: Employers are banned from penalizing or taking adverse action against employees for disconnecting.
Employees' Welfare Authority: Establishes a body to oversee implementation and handle related matters.
Addresses "Always-On" Culture: Aims to combat stress, sleep deprivation, and digital fatigue from constant connectivity.
Mutual Agreements: Mandates agreements on emergency contact protocols between employers and employees.
Scope: Applies to roles where digital work extends beyond official hours, covering companies and societies.
This bill seeks to legally define and safeguard work-life balance in the digital age, promoting healthier work environments and reducing burnout by setting clear boundaries for communication.
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Email: [email protected]
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मेरे पागलों आज का हमारा बहुत ही चहिता
0:03
सबसे अजीज टॉपिक है। दैट इज राइट टू
0:05
डिस्कनेक्ट बिल 2025 यह इंडिया के वर्क
0:08
लाइफ बैलेंस में जो नया चैप्टर शुरू किया
0:10
है बहुत ही बढ़िया क्योंकि तुम सब तो
0:15
बावरे थे ही काम काम ये अब थोड़ा लगाम
0:20
कसने का समय आ गया है। तो बिना किसी वक्त
0:22
की बर्बादी के शुरू करते हैं। लेट्स
0:24
अंडरस्टैंड एवरीथिंग अबाउट दिस राइट टू
0:27
डिस्कनेक्ट बिल 2025। जल्दी शुरू करते
0:29
हैं।
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सो बेसिकली आज के डिजिटल एरा में हम सब एक
0:37
चीज फील जरूर करते हैं। भाई ऑफिस कब खत्म
0:41
होता है? पर्सनल लाइफ कब शुरू होती है? यह
0:43
पता ही नहीं चलता। ठीक है? अब तुम्हारा
0:46
ऑफिस तो 24/7 चलता ही रहेगा क्योंकि हो
0:51
सकता है तुम्हें अपनी बंदी में इंटरेस्ट
0:52
ना हो। खैर इसको काट देना भाई। ठीक है?
0:55
मोबाइल, लैपटॉप, WhatsApp, ईमेल, ZM या
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Microsoft टीम्स ये एंप्लाइजज़ प्रैक्टिकली
1:01
24/7 डिजिटली अवेलेबल रहते हैं। ऑफिस के
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वर्किंग आवर्स खत्म होने के बाद भी
1:08
वर्चुअल कॉल्स अटेंड करना, ईमेल्स का
1:11
रिप्लाई देना, बॉस के फोन कॉल उठा लेना,
1:13
वीकेंड या हॉली डे पर अर्जेंट काम करना,
1:16
ये सब चलता रहता है।
1:19
लेकिन तुम इतने बिजी हो नहीं जितना तुम
1:22
दिखाते हो। ठीक है? ये मैं थोड़ा यहां पे
1:24
एक एक मेरी हम्ल रिक्वेस्ट गुजारिश है ये
1:27
दोगलापन अपना बंद कर दो भाई फालतू भंड के
1:29
ड्रामे हैं ये ठीक है तुम्हें बस उसे
1:31
अवॉइड करना है तुम्हें बस उसे इग्नोर करना
1:33
है वरना ब्रह्मांड में जितना तुम दिखाते
1:36
हो ना उतनी तुम्हारी चार पुश्तें बिजी
1:38
नहीं रही है ठीक है तो ये ये डोंट ट्राई
1:41
टू एक्सक्यूज एनीवन ऑन दिस या ये मत कहने
1:45
बैठना कि ओ लेकिन मैं काम किसके लिए करता
1:47
हूं घर परिवार के लिए ही तो करता हूं मैं
1:50
हट एनीवे तो यह सब इतना कॉमन हो गया है कि
1:55
लोगों ने इसे नॉर्मल मान लिया। यह न्यू
1:57
नॉर्मल बन गया। और इस कल्चर को कहते हैं
2:00
ऑलवेज ऑन वर्क कल्चर। तो ऑलवेज ऑन कल्चर
2:04
का इंपैक्ट क्या है? ये सिर्फ काम का इशू
2:08
नहीं है। बल्कि वर्क लाइफ बैलेंस खराब हो
2:11
जाता है। मेंटल हेल्थ अफेक्ट हो जाती है।
2:13
तुम तो वैसे ही पैदाइशी पागल हो। स्ट्रेस,
2:16
बर्न आउट और एंजायटी से बढ़ती है। पर्सनल
2:19
रिलेशनशिप और फैमिली टाइम सफर होता है।
2:21
लेकिन तुम्हें इससे क्या मतलब है? है ना?
2:23
तुम तो भाई अपने अलग से कहीं के
2:27
वल्लावल्ला तुम कर रहे हो।
2:30
इसी प्रॉब्लम को एड्रेस करने के लिए
2:32
इंडिया में अब राइट टू डिस्कनेक्ट जैसा
2:35
कासेप्ट आ रहा है। इस पर लॉ बनने की कोशिश
2:38
हो रही है। देखो ये केरला से शुरुआत इसकी
2:41
हुई है। अब नेशनल लेवल तक बात चली है।
2:43
सबसे पहले केरला गवर्नमेंट ने प्राइवेट
2:46
सेक्टर एंप्लाइजस के लिए राइट टू
2:47
डिस्कनेक्ट बिल इंट्रोड्यूस किया। अब तुम
2:50
100% लिटरेसी और ये सब मत लेके आना इसमें।
2:52
ठीक है? ये अलग चीज है। और अब
2:56
5 दिसंबर 2025 लोकसभा में एक प्राइवेट
3:00
मेंबर्स बिल इंट्रोड्यूस हुआ है जो है
3:02
अपना ये राइट टू डिस्कनेक्ट बिल। इस बिल
3:05
का ऐ है पूरे इंडिया के एम्प्लाइजस को कवर
3:07
करना। एंप्लाइजज़ को लीगली ये राइट देना कि
3:11
वो वर्किंग आवर्स के बाद काम से
3:13
डिस्कनेक्ट कर सकें। इसका मतलब अब तुम्हें
3:17
अपनी श्रीमती के सामने बहाने मारने से
3:20
पहले 10 बार सोचना पड़ेगा। जागो नालायकों
3:23
जागो
3:27
खैर हो जाता है कभी-कभी एनीवे तो बिल का
3:31
कोर ऑब्जेक्टिव क्या है देखो बिल का मेन
3:32
गोल है एम्प्लाइजस को ये राइट देना कि वो
3:35
ऑफिस आवर्स के बाद हॉलिडज के दिन पे वर्क
3:37
रिलेटेड कॉल्स ईमेल्स और मैसेजेस इग्नोर
3:40
कर सकें और उनको रिप्लाई करने के लिए
3:42
फोर्स ना किया जाए। इस बिल के थ्रू
3:45
एंप्लाइज वेलफेयर अथॉरिटी बनाने का
3:48
प्रपोजल है। एक प्रॉपर स्टटरी फ्रेमवर्क
3:51
लाने की कोशिश है। और ग्लोबल कॉन्टेक्स्ट
3:53
में बात करें तो इंडिया अकेला नहीं है। ये
3:55
कांसेप्ट कोई नया नहीं आया। ये ऑलरेडी
3:57
काफी कंट्रीज जैसे फ्रांस, बेल्जियम,
3:59
आयरलैंड, ऑस्ट्रेलिया ये सब में राइट टू
4:01
डिस्कनेक्ट लॉज़ एक्सिस्ट करते हैं। अब
4:03
इंडिया भी इस ग्लोबल ट्रेंड को फॉलो करते
4:05
हुए वर्क प्लेस रिफॉर्म्स एक्सप्लोर कर
4:07
रहा है। अब अगर हम कॉन्स्टिट्यूशनल एंगल
4:10
से बात करें यानी आर्टिकल 21 की
4:12
पर्टिकुलरली अगर मैं बात करूं। तो यह बिल
4:15
सिर्फ लेबर लॉ रिफॉर्म नहीं है। इसको एक
4:19
फंडामेंटल ह्यूमन राइट के एंगल से देखा जा
4:22
रहा है। जैसे राइट टू लाइफ विद डिग्निटी
4:24
हमारा है आर्टिकल 21। अब मतलब क्या? इंसान
4:27
सिर्फ एंप्लई नहीं है। उसकी पर्सनल लाइफ
4:29
भी है, मेंटल पीस भी है और डिग्निटी भी
4:32
उतनी ही इंपॉर्टेंट है। हां, यह इंजरी हुई
4:36
थी। लगा है मुझे। सोचोगे ये क्या करके
4:38
बैठा हूं। ठीक है? एनीवे।
4:41
अब की प्रोविजंस ऑफ राइट टू डिस्कनेक्ट
4:43
बिल की अगर हम बात करें डिटेल की डिटेल
4:46
में अगर इसके हम जाए तो एप्लीकेबिलिटी के
4:48
नजरिए से अगर देखें तो यह बिल किस पर
4:49
अप्लाई होता है? देखो ये बिल अप्लाई होता
4:51
है हर एंप्लई पर। चाहे वो कंपनी में काम
4:53
करता हो या किसी सोसाइटी के साथ एसोसिएटेड
4:56
हो। स्पेशल फोकस उन रोल्स पर है जहां
4:59
एंप्लाइजस को ऑफिस आवर्स के बाद भी डिजिटल
5:02
काम से ब्रेक नहीं मिलता। इन शॉर्ट जहां
5:05
पर ईमेल्स, कॉल्स, मैसेजेस ऑफिस के बाद भी
5:07
कंटिन्यू रहते हैं। यह खास करके कुछ
5:10
सेक्टर्स हैं जैसे मीडिया सेक्टर है, आईटी
5:12
सेक्टर है। ये सब में कंसटेंसी सेक्टर्स
5:14
हो गए। ये सब में चलता रहता है। ठीक है?
5:16
मैं नहीं कह रहा। सिर्फ यही सेक्टर्स हैं।
5:19
वरना अभी बात का पतंगड़ बनाना शुरू कर
5:21
दोगे। बिग बॉस नहीं है ये। एग्जांपल दिया
5:24
है। और अगर तुम्हारी ऑफिस इनमें नहीं आती
5:26
है तो कांग्रेचुलेशंस। ठीक है? राइट टू
5:29
डिस्कनेक्ट का मतलब क्या है? बिल के
5:31
अकॉर्डिंग एंप्लयर एंप्लई को वर्किंग
5:33
आवर्स के बाद कांटेक्ट जो है मतलब यह
5:36
कांटेक्ट कर सकता है। लेकिन एंप्लाइजज़ पर
5:38
रिप्लाई देना कंपलसरी नहीं होगा। इसका यह
5:42
मतलब है। एंप्लई कॉल उठाने से मना कर सकता
5:45
है। ईमेल या मैसेज का रिप्लाई ना देने का
5:48
राइट उसको है। अगर चाहे तो नहीं देगा। इस
5:51
प्रोविज़न का ऐ है एंप्लाइजज़ को लीगली
5:53
प्रोटेक्ट करना ताकि वो ऑफिस के बाद
5:55
प्रोफेशनल एक्टिविटीज से स्टेन कर सके। अब
5:59
डिसिप्लिनरी एक्शन से प्रोटेक्शन की जब हम
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बात करते हैं तो ये बिल क्लियरली बोलता है
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अगर एंप्लई अपना राइट टू डिस्कनेक्ट यूज़
6:06
करता है और वर्किंग आवर्स के बाद कॉल
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मैसेज का रिप्लाई नहीं करता तो एंप्लयर
6:11
कोई डिसिप्लिनरी एक्शन नहीं ले सकता उस पे
6:13
मतलब पनिशमेंट हरेसमेंट इनडायरेक्ट प्रेशर
6:16
सब प्रोहिबिटेड है। एंप्लाइजज़ वेलफेयर
6:19
अथॉरिटी का जो कॉन्स्टिट्यूशन है, बिल का
6:22
एक बहुत इंपॉर्टेंट फीचर है। ठीक है? ये
6:24
वेलफेयर अथॉरिटी इस अथॉरिटी का काम होगा
6:26
कि एंप्लई वेलफेयर प्रमोट करना नेशन वाइड
6:30
जो आउट ऑफ वर्क फ्रेमवर्क है उसको डेवलप
6:32
करना अथॉरिटी एक चार्टर ड्राफ्ट करेगी
6:35
जिसमें एंप्लयर एंप्लई के बीच टर्म्स एंड
6:38
कंडीशंस डिफाइंड होगी। इस चार्टर को
6:40
अथॉरिटी के कॉन्स्टिट्यूशन के एक साल के
6:43
अंदर फाइनलाइज करना होगा। गवर्नमेंट का
6:46
एडिशनल जो रिस्पांसिबिलिटी है वो है कि
6:49
देखो बिल गवर्नमेंट पर भी कुछ
6:51
रिस्पांसिबिलिटीज तो डालती है। जैसे एक
6:53
कॉम्प्रहेंसिव बेसलाइन स्टडी करना ये डेटा
6:56
कलेक्ट करना कि एंप्लाइजज़ ऑफिस आवर्स के
6:59
बाद डिजिटल डिवाइसेस कैसे यूज़ कर रहे हैं।
7:02
इससे गवर्नमेंट वर्क प्लेस प्रैक्टिससेस
7:04
मॉनिटर करेगी और फ्यूचर पॉलिसी गाइडेंस
7:07
देगी। जहां तक बात है इंडिविजुअल चार्टर्स
7:10
कंपनी पॉलिसीज की हर कंपनी या सोसाइटी
7:13
जिसमें 10 या 10 से ज्यादा एंप्लाइजस हैं
7:16
आइडियली समझ लो 10 से ज्यादा एंप्लाइजस
7:18
जिसमें है उनको अपनी इंडिविजुअल चार्टर
7:21
पॉलिसी बनानी होगी ये पॉलिसी एंप्लाइज
7:24
यूनियन रिप्रेजेंटेटिव्स के साथ कंसल्टेशन
7:26
के बाद बनेगी पॉलिसी में क्या-क्या कवर
7:28
होगा तो भाई डिटेल्ड आउट ऑफ वर्क आवर्स
7:31
डिफरेंट वर्क कल्चर के नीड्स इंडस्ट्री
7:33
प्रैक्टिस क्या है कब और कैसे एंप्लई से
7:36
कांटेक्ट किया जा सकता है हॉलिडेज और
7:37
एक्सेंपशनंस की क्या बात है? एंप्लई का
7:40
क्लियर राइट होगा। म्यूचुअली एग्रीड
7:43
वर्किंग आवर्स के बाहर कांटेक्ट ना किया
7:46
जाए। रिमोट वर्कर्स वर्क फ्रॉम होम या
7:50
टेली वर्किंग एंप्लाइजस के लिए भी स्पेशल
7:53
पॉलिसीज मैंडेटरी होंगी। अब ओवरटाइ पेमेंट
7:57
का प्रोविजन अगर हम इस एस्पेक्ट पे बात
7:59
करते हैं तो अगर एंप्लई अपनी मर्जी से
8:03
वर्किंग आवर्स के बाद काम करता है तो उसको
8:05
नॉर्मल वेज रेट पे ओवरटाइम पे मिलेगा।
8:09
नाचो शौक से नाचो। इस एंटाइटलमेंट से
8:12
एंप्लई को किसी भी सिचुएशन में डिप्र्राइव
8:14
नहीं किया जा सकता।
8:17
अभी तक तो यही बात हो रही है। ठीक है?
8:20
वरना
8:22
दूर के ढोल सुहाने हैं। मैंने कुछ नहीं
8:25
कहा।
8:26
एंप्लई वेलफेयर कमिटीज एंड डिजिटल डिटॉक्स
8:30
की बात करें तो हर ऑर्गेनाइजेशन को एंप्लई
8:32
वेलफेयर कमिटी बनाना होगा। इस कमिटी का
8:34
रोल ये है कि एंप्लयर एंप्लई नेगोशिएशन
8:37
में सपोर्ट आउटसाइड वर्किंग आवर्स के
8:39
टर्म्स डिस्कस करना। ठीक है? और जहां पे
8:42
हम एडिशनल वेलफेयर मेजर्स की अगर बात करें
8:44
तो बिल्ड रेकमेंड करता है डिजिटल टूल्स के
8:48
रिस्पांसिबल यूजेज पर अवेयरनेस सेशंस
8:51
गवर्नमेंट स्पों्सर्ड काउंसलिंग सर्विज
8:53
डिजिटल डिटॉक्स सेंटर्स सेटअप करना एनुअल
8:56
रिपोर्ट सबमिट करना स्ट्रिक्ट प्यूनिव
8:59
मेजर्स ठीक है ये सारी चीजें अब अगर
9:02
पेनल्टीज की बात करें तो काफी स्ट्रिक्ट
9:03
प्रोविज़ंस है। अगर चार्टर में आउट ऑफ वर्क
9:06
कंडीशंस मेंशन नहीं किए गए या बिल के
9:09
प्रोविजंस फॉलो नहीं की गई तो
9:11
ऑर्गेनाइजेशन को 1% ऑफ टोटल एंप्लई
9:13
रेमुनरेशन पेनल्टी देनी पड़ेगी। ये
9:15
पेनल्टी काफी हैवी स्ट्रिंजेंट डेटरेंट
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मानी जा रही है। ठीक है? अब अगर
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प्रैक्टिकल कंसर्न से हम बात करें तो ये
9:25
बिल अभी सिर्फ लोकसभा में इंट्रोड्यूस हुआ
9:27
है। लॉ बनने से पहले काफी चेंजेस आ सकते
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हैं इसमें। पोटेंशियल तो बहुत स्ट्रांग है
9:32
लेकिन प्रैक्टिकल इम इंप्लीमेंटेशन जो है
9:34
उसमें गैप्स है। देखो अगर इंडस्ट्री वाइज
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एक्सक्लूजंस
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की बात करें मिसिंग है। बिल साइलेंट है।
9:41
हेल्थ केयर, आईटी, आईटीईएस, लीगल
9:43
प्रोविज़ंस, मीडिया, जर्नलिज्म, इमरजेंसी
9:46
सर्विज जैसे सेक्टर्स ठीक है? 24/7 काम
9:49
मांगते हैं। टाइम सेंसिटिव होते हैं। यहां
9:52
ब्लैंकेट इंप्लीमेंटेशन पॉसिबल ही नहीं
9:55
है। ठीक है? मैनेजेरियल और सुपरवाइज़री
9:58
स्टाफ के एक्सक्लूजंस भी क्लियरली डिफाइंड
10:01
नहीं है। मिनिमम एंप्लई थ्रेशहोल्ड का भी
10:04
इशू है। वेस्टर्न कंट्रीज में क्लियर
10:06
थ्रेशहोल्ड है। फ्रांस में 50 से ज्यादा
10:08
एंप्लाइजज़ हैं होंगे तब। बेल्जियम में 20
10:10
से ज्यादा एंप्लाइजज़, ऑस्ट्रेलिया में 15
10:12
से ज्यादा एंप्लई इंडिया के बिल में
10:13
ऑर्गेनाइजेशन साइज का प्रॉपर डिस्टिंशन
10:16
नहीं है। स्मॉल ऑर्गेनाइजेशंस के लिए लीन
10:19
टीम्स होती हैं। फ्लेक्सिबिलिटी जरूरी
10:20
होती है। सिर्फ पॉलिसी ड्राफ्टिंग के लिए
10:23
थ्रेशहोल्ड रखना सफिशिएंट नहीं होगा। अब
10:25
केरला बिल वर्सेस सेंट्रल बिल के आस्पेक्ट
10:27
में भी देखो तो केरला बिल एंप्लयर या उसके
10:30
डेलीगेट्स का मेंशन करता है। सेंट्रल बिल
10:32
सिर्फ एंप्लयर तक लिमिटेड है। इससे
10:35
रिप्रेजेंटेटिव्स के थ्रू हैरेसमेंट लूप
10:38
होल बन सकता है। और डिसिप्लिनरी एक्शन का
10:40
वेट डेफिनेशन है। केरला बिल क्लियरली
10:43
बताता है डिसमिसल डिमोशन बेनिफिट रिड्यूस
10:46
करना, ट्रेनिंग डिनाई करना। जहां सेंट्रल
10:49
बिल की बात करें तो डिसिप्लिनरी एक्शन का
10:50
स्कोप क्लियर नहीं है। ओवरटाइम पेमेंट
10:53
इनकंसिस्टेंसी भी है। जैसे देखो
10:55
एग्जिस्टिंग लेबर लॉ जो है वो ओवरटाइम
10:57
बोलता है ट्वाइस द नॉर्मल वेज रेट। इस बिल
10:59
में ओवरटाइम इज़ इक्वल टू नॉर्मल वेज रेट।
11:01
ये कंट्राडिक्शन कंफ्यूजन लीगल
11:04
डिस्प्यूट्स क्रिएट करेगा। हमारी माने तो
11:07
पेनल्टी अमाउंट का प्रैक्टिकिटी इशू क्या
11:10
है यहां पे? 1% ऑफ टोटल रेमुनरेशन बोला
11:13
भाई साहब काफी हाई है। एस्पेशली एमएसएमईस
11:15
के लिए तो बहुत ज्यादा मिसिंग प्रोसीजरल
11:18
क्लेरिटी यहां पे बहुत है। बिल साइलेंट
11:20
है। किन चीजों पे? नेगोशिएशन का प्रोसेस
11:22
कैसा रहेगा? ग्रीवेंस रिड्रेसल क्या
11:24
रहेगा? रिटालिएशन
11:26
यू नो कंप्लेंट्स का क्या है? मल्टीटाइम
11:28
ज़ोन वर्क फ़ोर्स का क्या है? स्टेट वाइज़
11:30
एक्सेंपशन का क्या है? ये सब क्लेरिटी के
11:32
बिना इंप्लीमेंटेशन इसका होना मुश्किल हो
11:35
जाएगा। तो फाइनल अगर हम बात करें तो बिल
11:37
का इंटेंशन पॉजिटिव है। एंप्लई सेंट्रिक
11:40
है। मॉडर्न वर्क स्पेस के लिए बहुत जरूरी
11:42
है। लेकिन इफेक्टिव इंप्लीमेंटेशन के लिए
11:44
प्रैक्टिकल गैप्स फिल करना भी उतना ही
11:46
आवश्यक है। अगर सही तरह से रिफाइन किया
11:50
गया ये इंडिया के लेबर लॉज़ में लैंडमार्क
11:53
रिफॉर्म बन सकता है। लेकिन
11:56
जिसका काम उसी को साजे और करे तो ओपिनियन
11:59
बाजे। तो अब आपको इसके बारे में क्या लगता
12:02
है? कमेंट सेक्शन में बताओ और कमर्शियन की
12:06
वेबसाइट विजिट करो ताकि आपको ऐसे ही
12:09
रिफॉर्म्स लॉस और पॉलिसी डेवलपमेंट में
12:11
अगर स्पेशलाइजेशन करनी है तो उसके लिए भाई
12:14
साहब हमारे कोर्सेस अवेलेबल हैं। जाइए
12:16
वहां अपना मत्थ टेकिए। वैसे भी सोशल
12:19
मीडिया पे दिन में 10 बार पीटते हो बिना
12:21
किसी मतलब के। तो यहां मत्थ टेक लो। कुछ
12:23
तुम्हारे भी काम आ जाए, कुछ हमारे भी काम
12:25
आ जाए। ठीक है? ध्यान रखो और यह वीडियो
12:28
उसके साथ शेयर करो जिसे यह सब जानने की
12:30
बहुत ज्यादा जरूरत है। ताकि थोड़ी चैन की
12:33
आह वो भर सके। हैव अ गुड डे टेक केयर एंड
12:36
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