Labour Laws & Industrial Relations, Mumbai University LL.B New Syllabus #law #educational #legal
Dec 14, 2025
Mumbai University's new LLB syllabus, under the CBCS pattern (since 2022-23), integrates labour laws across the 3-year and 5-year courses, focusing on core acts (like Factories Act, Industrial Disputes Act, Minimum Wages Act, etc.) and recent labour codes (Code on Wages, Code on Industrial Relations, Code on Social Security, Code on Occupational Safety) with emphasis on social justice, worker welfare, and evolving legal frameworks. You'll study Labour Law-I (often in Sem 1/2) and Labour Law-II (Sem 5/6), covering foundational principles, dispute resolution, and specific protections like gratuity, bonus, and child labour, often alongside case studies and practical aspects.
Key Labour Laws & Concepts Covered:
Foundational Laws: Factories Act, Industrial Disputes Act, Payment of Wages Act, Minimum Wages Act, Trade Unions Act, Payment of Bonus Act, Gratuity Act.
New Labour Codes (Post-2020): Expect integration of the four new codes, replacing older laws, focusing on:
Code on Wages, 2019: Minimum wages, timely payment.
Code on Industrial Relations, 2020: Trade unions, collective bargaining, strikes, layoffs.
Code on Social Security, 2020: Social insurance, ESI, PF, gratuity.
Code on Occupational Safety, Health & Working Conditions, 2020: Factory safety, hygiene, welfare.
Labour Administration: Role of labour courts, tribunals, conciliation officers, Inspectorate.
Social Justice: Full employment, equal pay, child labour abolition, worker housing, social security.
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तो आज की वीडियो या लेक्चर मुझे कहना चाहिए यह ऑन डिमांड है क्योंकि आप सब ने
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कहा कि वैभव भाई यह लेक्चर आप न्यू लेबर लॉस पे लीजिए बिकॉज़ मुंबई यूनिवर्सिटी के
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जो एलएलबी के सिलेबस है उसमें ये लेबर लॉ टू ऐसा सब्जेक्ट आया है। फाइव ईयर वालों
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को भी लेबर लॉ है एंड ये न्यू लेबर लॉज़ हैं। सो इसका इंटीग्रेशन क्या है? बहुत
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इंपॉर्टेंट है। तो एज़ यूजुअल हमारे नोट्स रेडी हैं और बिना किसी वक्त की बर्बादी के
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हम शुरू करते हैं। पहले हम ये देखेंगे कौन से मेजर क्वेश्चंस हैं, कौन से इंपॉर्टेंट
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क्वेश्चंस हैं। इसी के साथ में कौन से ऐसे क्वेश्चंस हैं जिसका सबसे ज्यादा वेटेज
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है। एंड वेटेज के साथ में अगेन एज़ आई ऑलवेज से कि कितने मार्क्स के क्वेश्चन के
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लिए कितने पेजेस आप फिल करेंगे। सो दैट शुड बी सफिशिएंट। अगेन मैं यह कभी भी नहीं कहता कि इतने ही लिखना बट इट शुड बी
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सफिशिएंट एंड हाउ शुड बी योर स्टाइल एंड पैटर्न ऑफ राइटिंग।
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तो आज हम लेबर लॉ पे लेक्चर शुरू करते हैं। नहीं तो फिर से आप बोलेंगे वैभव भाई ने पूरी बात बताई नहीं। बिना किसी वक्त की
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बर्बादी के शुरू करते हैं आज का वीडियो।
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सो लेबर लॉ में अभी हम पहले उसी क्वेश्चन से शुरू करेंगे जैसा हम करते आ रहे हैं।
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लास्ट लेक्चर्स में भी हमने यही किया था। वो आंसर पे पहले फोकस करेंगे जो आप एज एन एक्सटेंशन हर किसी के साथ प्लग इन कर सकते
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हो। हर किसी के साथ आप उसको कनेक्टिंग आंसर की तरह यूज़ कर सकते हो ताकि तुम्हारे पेजेस भर जाएं और तुम्हें कुछ मार्क्स और
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मिल जाएं। ठीक है? सो आइडियली जो पैटर्न मैं फॉलो करता था वो ये है कि जब हम आंसर
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लिखते हैं मेन ओके फॉर एग्जांपल अगर आपको पूछा गया है ओएसएच कोड के बारे में बताइए
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या वर्किंग कंडीशंस के बारे में बताइए तो मैं पहले वर्किंग कंडीशंस लिख दूंगा उसके बाद जो प्लग इन आंसर है उससे लिखूंगा या
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यू कैन गो दी एब्सोल्यूट ऑोजिट वे डिपेंड्स ऑन यू बट मेन क्वेश्चन जो पूछा है वो आंसर तो आना ही चाहिए ऐसे मत सोचना
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कि एक्सटेंशन वाला आंसर हम पहले लिख देंगे और फिर बाद में हम मेन आंसर लिखेंगे तो नहीं आपको मार्क्स नहीं मिलने वाले या अगर
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मिलेंगे तो भी वो थोड़े बख्शीश के मिल जाएंगे मेहरबानी करके थोड़े बहुत जो है वो। ऑलराइट। फर्स्ट क्वेश्चन है व्हाट आर द
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ऑब्जेक्टिव्स एंड सेलियंट फीचर्स ऑन द कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020? दो मेन कोड्स हैं कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी एंड नंबर टू
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इज़ योर ओएसएच कोड यानी ऑक्यूुपेशनल सेफ्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड 2020। नाउ
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इसमें आपको कंफ्यूज बिल्कुल भी होना नहीं है। अगर आपने गलती से कोड ऑन सोशल
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सिक्योरिटी के पॉइंट्स लिख दिए ओएसएच में गलत हो जाएगा। ठीक है? क्योंकि ये दो
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अलग-अलग कोड्स हैं। इसमें बिल्कुल भी कंफ्यूज मत होना। सो ऑब्जेक्टिव्स क्या है
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इसके? पहले कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी क्या होता है? हमने डिस्कस किया हुआ है। नौ एक्ट्स को कंसोलिडेट करके इरेडिकेट करके
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नहीं कंसोलिडेट करके एक नया कोड बनाया गया जिसे कहा गया कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी।
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पहले मैटरनिटी बेनिफिट अलग था। फिर आपका अह प्रोविडेंट फंड की बात अलग थी।
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इंश्योरेंस की बात अलग थी। एंप्लई वेलफेयर स्कीम्स अलग थी। तो अब क्या किया? उसने सबको कंस वो नाइन एक्ट्स को कंसोलिडेट
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करके कोर ऑन सोशल सिक्योरिटी बनाया गया। अब इसके चार प्राइमरी ऑब्जेक्टिव्स हैं।
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पहला ऑब्जेक्टिव जो है सिंपलीफिकेशन एंड कोडिफिकेशन। कंसोलिडेशन। आई एम सॉरी। सो सिंपलीफिकेशन एंड कंसोलिडेशन मतलब क्या?
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ऑब्वियसली इतने सारे एक्ट्स की क्या जरूरत है? उसे सबको एक कॉमन अंब्रेला के नीचे ले आए। और इसको क्या किया? सारे एकिस्टिंग
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सोशल सिक्योरिटी लॉज़ को सिंगल फ्रेमवर्क के अंदर बिठा दिया। इससे क्या हुआ? यूनिफॉर्मिटी हो गई। यानी कि जितने मुंह
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उतनी बातें वाला सीन ही नहीं है। यूनिफॉर्मिटी एस्टैब्लिश हो गई। और जब यूनिफॉर्मिटी एस्टैब्लिश हो गई तो क्या
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हुआ? एक ईज़ ऑफ़ कंप्लायंस हो गया एंप्लयर्स के लिए एंड एक्सेसिबिलिटी बन गई एंप्लाइजज़
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के लिए। यानी कि अब एंप्लयरस को अलग-अलग अलग-अलग एक्ट्स के अंडर में सेपरेटली जाने
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की कोई जरूरत नहीं है। कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी विल टेक केयर ऑफ एवरीथिंग। तो एंप्लाइजज़ के लिए भी बेटर है क्योंकि
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उन्हें इजी एक्सेस है, ईज़मेंट ऑफ़ एक्सेस है। एंप्लयर्स के लिए बेटर है। क्यों? क्योंकि कंप्लायंस करना बहुत आसान हो गया
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है। तो पहला ऑब्जेक्टिव है सिंपलीफिकेशन एंड कंसोलिडेशन। सेकंड है एक्सटेंशन ऑफ़
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सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स। देखो पहले गिग वर्कर्स, प्लेटफार्म वर्कर्स एंड आपके
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अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स जो ये हैं ये कभी भी पहले एक ही इसमें आते नहीं थे। यानी कि
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ये कवर नहीं हो रहे थे। इनका जो डेफिनेशन है वो कवर नहीं हो रहा था। अब इन्हें इंक्लूड कर दिया गया है। अब ये बहुत
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कंफ्यूजन होता है कि प्लेटफार्म वर्कर्स और गिग वर्कर्स में डिफरेंस क्या है? यह बहुत लोग पूछते हैं। आप Google करोगे तभी
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भी आपको शायद ही समझ में आए। एंड टू बी ऑनेस्ट यह सही भी है। रीज़न बीइंग क्योंकि
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वह दोनों एक दूसरे को ओवरलैप करते हैं। तो बताई यह वही बात हो गई लेफ्ट हैंड ज्यादाेंट है या राइट हैंड ज्यादाेंट है।
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भाई दोनों के अपने-अपने काम है। बट है दोनों हाथी। सिमिलरली गिग वर्कर एंड
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प्लेटफार्म वर्कर बाय एंडार्ज एक ही बात है। लेकिन गिग वर्कर का मतलब होता है वो
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जो ट्रेडिशनल एंप्लयर एंप्लई रिलेशनशिप के बाहर आते हैं। ओके? फॉर एग्जांपल इसमें
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फ्रीलांस वर्कर भी इंक्लूड हो सकता है। कॉन्ट्रक्चुअल वर्कर्स भी इंक्लूड हो सकते हैं। प्लेटफार्म वर्कर तो 100% जो डिजिटल
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प्लेटफॉर्म्स के थ्रू हैं। एग्जांपल Ola, Uber ड्राइवर्स, Amazon, Zeptotो,
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ब्लिंकेट डिलीवरी एजेंट्स या आपके Sविg, Zomato वाले ये सब लोग क्या होते हैं? प्लेटफार्म वर्कर्स के अंडर आते हैं। अब
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इन्हें गिग वर्कर्स भी कह सकते हैं इन सर्टेन केसेस। अनऑर्गेनाइज़्ड वर्कर्स।
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अनऑर्गेनाइड वर्कर्स हम सभी को पता है जैसे आपके स्ट्रीट वेंडर्स होते हैं। राइट? इवन काफी केसेस में जो आपके अ
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कंस्ट्रक्शन वर्कर्स होते हैं ये भी अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स में काफी हद तक गिने जाते हैं। सो ये भी अब अंडर दी को ऑन
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सोशल सिक्योरिटी 2020 के अंदर ये आ गए हैं। यानी कि क्या हो गया है? पहले ये इनवॉल्वड नहीं थे। इंक्लूडेड नहीं अब
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इन्हें भी एक मान्यता दे दी है, एक रिकॉग्निशन दे दी है। सो इनके लिए भी अब प्रोविज़ंस हो गए हैं। तो एक्सटेंशन ऑफ़
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सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स इनको भी दे दिया गया है। फिर थर्ड आता है इंप्रूवमेंट
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इन सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन। अब इसका सिंपल मतलब क्या है? कि भाई जितनी भी
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सोशल सिक्योरिटी की स्कीम्स बनाई जा रही हैं, क्या उन्हें इंप्लीमेंट ठीक से किया जा रहा है या नहीं? वो बात यहां पे की गई
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है। ठीक है? तो उसके इंप्रूवमेंट की एनश्योरिंग एडमिनिस्ट्रेशन व्हिच इज
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एफिशिएंट और फिर भाई ट्रांसपेरेंसी बनी रहनी चाहिए। अकाउंटेबिलिटी बनी रहनी
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चाहिए। एफिशिएंसी बनी रहनी चाहिए सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशंस की। ऑलराइट। कौन
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सी-कौ सी ऑर्गेनाइजेशंस हैं? कौन सी-कौन सी बॉडीज है? ये अभी ये सब हम आगे करेंगे। आपका ईपीएफओ आता है, ईएसआईसी आता है, सोशल
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सिक्योरिटी बोर्ड है, नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड है, स्टेट अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी बोर्ड है। ये
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सारी चीजें हम इसे आगे करेंगे। तो चार मेन इसके ऑब्जेक्टिव्स हमने करे। सिंपलीफिकेशन
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एंड कंसोलिडेशन, एक्सटेंशन ऑफ़ सोशल सिक्योरिटी बेनिफिट्स, इंप्रूवमेंट इन सोशल सिक्योरिटी
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एडमिनिस्ट्रेशन एंड वर्कर राइट्स को प्रोटेक्ट करना। अब यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है। इतना दिमाग तो खुद ही चला
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सकते हो कि वर्कर के राइट्स को प्रोटेक्ट करने का मतलब क्या है? किसी भी टाइप के सोशल सिक्योरिटी
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बेनिफिट्स अगर उन तक नहीं पहुंच रहे हैं एंड दे आर एलिजिबल फॉर इट तो पहुंचने चाहिए। उनके राइट्स एंड इंटरेस्ट को क्या
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करना है? प्रोटेक्ट करना है। उनका एक्सप्लइटेशन नहीं होना चाहिए या कोई भी अनलॉफुल एक्टिविटी उनके साथ नहीं होनी
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चाहिए। तो ये चार इसके क्या हो गए? इसके आप कह सकते हैं ऑब्जेक्टिव्स हो गए। अब हम
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आते हैं सेलियंट फीचर्स क्या है? देखो सेलियंट फीचर्स चाहे कोई भी सब्जेक्ट हो, कॉन्ट्रैक्ट लॉ हो, फैमिली लॉ हो या चाहे
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आपका लेबर लॉ हो, पब्लिक इंटरनेशनल लॉ हो, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ हो डेफिनेशन से ही
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आपके सेलियंट फीचर आ जाते हैं। सबसे पहले अभी जितना हमने करा आप उसी में
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से अपने मन सेलियंट फीचर्स निकाल सकते हो। जैसे यूनिवर्सली एप्लीकेबल है। हां, तो
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यूनिवर्सली एप्लीकेबल है। फिर उसके बाद में भाई इसमें हमने क्या करा? ये यूनिफाइड
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लेजिसलेशन है। मतलब क्या? नाइन एकिस्टिंग सोशल सिक्योरिटी लॉज़ को हमने क्या करा? हमने कंसोलिडेट करके एक अंब्रेला के नीचे
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हम उससे ले आए। दैट कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी 2020। इसी के साथ सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशंस आ गई। जैसे ये
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भी एक फीचर है। जैसे कौन सी? एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन, एंप्लाइजज़
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स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ये सारी चीजें इसमें इनकॉर्पोरेट हो चुकी हैं। तो क्या आ गया? ये सारे सोशल सिक्योरिटी
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ऑर्गेनाइजेशंस यहां पे आ गए। फिर प्रॉफिटेबिलिटी ऑफ़ बेनिफिट्स यानी कि जो
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बेनिफिट्स दिए जाते हैं वो किस वे में बेनिफिशरीज़ के लिए प्रॉफिटेबल है उनके लिए क्या प्रोविज़ंस है? ये भी एक सीजन फीचर
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इंक्लूड होता है। भाई एक डिजिटलाइजेशन हो चुकी है। यानी सब कुछ वर्चुअली एक्सेसिबल
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है। सो यू डोंट लिटरली हैव टू नाउ फिजिकली गो एंड डू थिंग्स। क्योंकि इट्स न्यू
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जनरेशन न्यू टेक गेट टेकवी। ठीक है? फिर आता है ग्रीवियंस रिड्रेसल मैकेनिज्म।
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मतलब क्या? किसी भी टाइप की ग्रीवेंस पहले बहुत सारे फॉर्मेलिटीज करने पड़ते थे। इस
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डिपार्टमेंट से उस डिपार्टमेंट में जाओ। कुछ आपका एंप्लयर रिॉल्व करेगा। कुछ आपको ट्रेड यूनियन के पास पहले जाना पड़ता था।
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वो भी नहीं कर पाएंगे। तब जाओ भाई एप्रोप्रियट अथॉरिटीज़ के पास। अब यूनिवर्सल ग्रीवियंस रड्रेस मैकेनिज्म है।
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एंड बहुत स्पीडस्ट प्रोसेससेस होते हैं। टाइम नहीं लगता। एंड काफी सारे वेलफेयर
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प्रोविज़ंस भी हैं। सो ये कुछ सेलियंट फीचर्स हैं। अब आप बोलोगे वैभव भाई सेलियंट फीचर्स का एक नंबर बता दो कितने
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होने चाहिए। ऐसा कुछ नहीं है। भाई जितने मन में आ रहे हैं उतने लिखते जाओ। ऑलराइट।
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ये आपको पूरी छूट है। सो हमने ऑब्जेक्टिव्स करे। हमने सेलियंट फीचर्स करें। अब सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशंस
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प्लीज ध्यान से ये आंसर सुनना। मतलब अलग से क्वेश्चन इस पर आ सकता है। हर
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एक ऑर्गेनाइजेशन पर शॉर्ट नोट्स यानी छह मार्क का क्वेश्चन तो आ ही सकता है या सिचुएशन बेस में पूछा जा सकता है। प्लीज
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ध्यान दो। सोशल सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशनंस पहली है एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड
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ऑर्गेनाइजेशन जिसे कहते हैं ईपीएफओ। अब ये ईपीएफओ है क्या? ऑब्वियसली ये तीन चीजों
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का ध्यान रखती है एंप्लाइजज़ के पेंशन की, उनके प्रोविडेंट फंड की और डिपॉजिट लिंक
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इंश्योरेंस डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम
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इंश्योरेंस सिर्फ मत लिख के आना। रॉन्ग हो जाएगा पूरा। तो तीन चीज प्रोविडेंट फंड
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स्कीम, पेंशन स्कीम और डिपॉजिटेड लिंक
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इंश्योरेंस स्कीम। ठीक है? क्या इंश्योर करता है? सिंपल इंश्योर करता है क्या? कि भाई एम्प्लाइजस को उनके प्रोविडेंट फंड
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ठीक से मिल रहे हैं। पेंशन ठीक से मिल रही है। उनके इंश्योरेंस बेनिफिट उनको टाइमली और एफिशिएंट मैनर में मिल रहे हैं कि
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नहीं? ये काम है ईपीएफओ का देखना। फिर हम आ जाते हैं उसके फंक्शनंस पे। क्या
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फंक्शनंस हैं? अब इसमें कॉमन सेंस ही लगा लो। अभी हमने करा कि वो क्या-क्या करती है। तो फंक्शनंस उसमें से ही आ गए। क्या
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भाई? हर एक ऑर्गेनाइजेशन में या हर एक स्कीम के लिए कुछ कंट्रीब्यूशनंस होते हैं। जैसे एंप्लाइजस प्रोविडेंट फंड में
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एंप्लयर और एंप्लई दोनों को 121% का कंट्रीब्यूशन करना पड़ता है। किसका? 12%
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एंप्लई के बेसिक वेजेस का, डियरनेस अलाउंस का और रिटेनिंग अलाउंस का। तो 12 12%
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एंप्लयर भी करता है और 12% एंप्लई के एंड से भी होता है। तो वो ध्यान रखती है एपीएफओ। ईपीएफओ कि ये कंट्रीब्यूशंस हो भी
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रहे हैं कि नहीं हो रहे हैं। सेकंडली भाई किसी भी टाइप का विथड्रॉल है, लोनस हैं या
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कोई भी एडवांसेस हैं जो आपने प्रोविडेंट फंड में से निकाले हैं एंप्लई के तो उसका भी एक ट्रैक रखना। उसका भी एक फैसिलिटेशन
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रखना कि वो इजीली उसको कर सकें। ऑलराइट। और ऑब्वियसली कंप्लायंस ठीक से हो रहा है कि नहीं हो
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रहा एंप्लयर के एंड से, एंप्लई के एंड से ये सब चीजें भी ध्यान रखना। ईपीएफओ का काम है प्रोविडेंट फंड पेंशन और डिपॉजिट
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लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम के मामले में। अब आगे बढ़ते हैं। अब आगे आता है एंप्लाइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन यानी कि
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ईएसआईसी। ईएसआईसी का क्या काम है? इंश्योरेंस है तो आपको इंश्योरेंस किन-किन
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चीजों में मिलती है? भाई किसी भी टाइप के कैश बेनिफिट्स, मेडिकल बेनिफिट्स, मैटरनिटी बेनिफिट्स, डिसेबिलिटी बेनिफिट्स
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या डिपेंडेंट बेनिफिट्स। अब ये मेटरनिटी समझ आया, कैश समझ आया, मेडिकल समझ में आ गया, डिसेबिलिटी समझ में आ गया। डिपेंडेंट
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बेनिफिट्स क्या होता है? तो आगे हम करेंगे। या डिपेंडेंट्स उन लोगों को कहा जाता है जो एंप्लई की वेजेस या सैलरी पे
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डिपेंडेंट है। जैसे एंप्लई के बच्चे, उनकी वाइफ या उनके हस्बैंड, उनके एजेड
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पेरेंट्स, उनके कुछ ऐसे सिबलिंग्स जो शायद फिजिकली डिसेबल्ड है या कुछ सरकमस्ट्ससेस
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में शायद नहीं अर्न कर रहे हैं तो वो उन पे डिपेंडेंट हैं। अनमैरिड डॉटर्स इन सर्टेन केसेस वो भी इसमें आती हैं। माइनर
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चिल्ड्रन वो भी इसमें आते हैं। ऑलराइट? तो उन्हें डिपेंडेंट्स कहा जाता है। कोई भी ऐसा व्यक्ति जो एंप्लई के इनकम पे
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डिपेंडेंट है फॉर देयर लिविंग उसे डिपेंडेंट्स कहा जाता है। तो उनके भी बेनिफिट्स को ध्यान रखना ईएसआईसी का काम
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है। लेकिन ये सबको मिलता है क्या? सबको नहीं मिलता। किसको मिलता है? आगे करेंगे थोड़ा पेशेंस रखो। तो इसके अगेन इसके क्या
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फंक्शनंस हैं? ऑब्वियसली कंट्रीब्यूशनंस कलेक्ट करना। जिस जो कंट्रीब्यूशनंस करने हैं तो ईएसआईसी में 3.25% कंट्रीब्यूशन
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होता है एंप्लयर के एंड से। 0.75 होता है एंप्लई के एंड से। एंप्लयर सवा5% करेगा और
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0.75 एंप्लई करता है। ऑलराइट टोटल 4% का इसमें कंट्रीब्यूशन होता है। फिर किसी भी
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टाइप के मेडिकल कैश बेनिफिट्स को क्या करना? प्रोवाइड करना, उसे फैसिलिटेट करना।
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कोई भी हॉस्पिटल्स हैं, डिस्पेंसरीज हैं उनको एडमिनिस्टर करना जो इस टाइप के
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बेनिफिट्स को देने में हेल्प करती हैं या जो लिस्टेड हैं। एंड ऑब्वियसली
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इंस्पेक्शंस करते रहना। पीरियडिकल इंस्पेक्शंस बहुत जरूरी है। क्यों? ये चेक करने के लिए कि कंप्लायंस हो भी रहा है कि
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नहीं हो रहा है। जैसे तुम अभी चेक कर रहे हो ना तुम्हें कितना आता है कि नहीं आता
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है। कितना बंटाधार है एग्जाम्स के लिए। पढ़ लो सुधर जा रहे हो। एक दिन पहले एग्जाम के बैठे हो पढ़ने और समझने के लिए।
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ठीक है? तो ऐसे ये कंप्लायंस करते हैं। फिर आता है नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड।
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अब नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड क्या है? देखो नेशनल सोशल सिक्योरिटी का बोर्ड उसका काम एक ही है। मेजरली भाई जितनी भी
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पॉलिसीज हैं, स्कीम्स हैं वो सजेस्ट करना क्या-क्या नई स्कीम्स आनी चाहिए। ओके?
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किस-किस टाइप के प्रोग्राम्स आने चाहिए अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स के लिए, गिग वर्कर्स के लिए, प्लेटफार्म वर्कर्स के
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लिए और बाकी के जो लेबरर्स हैं, वर्कर्स हैं उनके लिए। तो वो सेंट्रल गवर्नमेंट को एडवाइस करती है। सेंट्रल क्यों? क्योंकि
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ये नेशनल सोशल सिक्योरिटी की बोर्ड की हम बात कर रहे हैं। तो सेंट्रल गवर्नमेंट को एडवाइस करती है किस टाइप की सूटेबल
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स्कीम्स आनी चाहिए। किस टाइप के डिफरेंट कैटेगरी के वर्कर्स के लिए वो स्कीम्स एप्लीकेबल होनी चाहिए और फिर इसको मॉनिटर
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करना कि चलो स्कीम तो हमने बना दी। अब वो इंप्लीमेंट भी हो रहा है या वो नहीं हो
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रहा है। सी इवन दिस इज़ वेरीेंट। क्योंकि सिर्फ स्कीम बनाने से ब्लूप्रिंटिंग हो गई, प्लानिंग हो गई लेकिन एग्जीक्यूट हो
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रहा है क्या? एग्जीक्यूशन इज़ अ टोटली डिफरेंट बॉल गेम। तो एग्जीक्यूट हो रहा है कि नहीं ये देखना भी किसका काम है? इन्हीं
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का काम है। आगे इनका काम क्या है भाई? किसी भी टाइप की अवेयरनेस को प्रमोट करना रिगार्डिंग व्हाट? सोशल सिक्योरिटी। ठीक
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है? ह्यूमन राइट्स वगैरह नहीं सोशल सिक्योरिटी की अवेयरनेस स्प्रेड करना अमंग हुूम? दी अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर प्रिमरली।
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ऑलराइट। सो ये सब कुछ इसके काम है। तो इस आंसर में हमने क्या करा? पहले ऑब्जेक्टिव्स करे। ऑब्जेक्टिव्स हमने
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कितने करे? चार ऑब्जेक्टिव्स करे। किसके? जो हमारे यह कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी है
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उसके और फिर हमने कैरेक्टरिस्टिक्स करी। कैरेक्टरिस्टिक्स करने के बाद हमने ऑर्गेनाइजेशंस करी। कौन-कौन सी
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ऑर्गेनाइजेशंस हैं? नंबर वन हमने करा एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन, एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन। फिर
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हमने करा नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड। अब इसमें और एक चीज आती है जैसे हम कहते हैं
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स्टेट अनऑर्गेनाइज्ड वर्कर्स सोशल सिक्योरिटी बोर्ड।
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अब यह क्या करती है? सिंपल जो नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड सेंट्रल गवर्नमेंट के
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साथ कर रही है, नेशनल लेवल पर कर रही है, ये वही सब काम स्टेट लेवल पे करती है लेमन टर्म्स में। ठीक है? पॉलिसीज वगैरह सजेस्ट
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करना, एडवाइस करना, उनको इंप्लीमेंट कराना और एडमिनिस्टर करना कि सब कुछ हो रहा है ठीक से या नहीं। ऑलराइट। सो इस आंसर में
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इतना ही है। इसमें आप इसको कितना भी किसी भी आंसर के साथ अपेंड कर सकते हो। जब तक
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आंसर इज रेलेवेंट टू कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी। ओएसएच में मत डाल के आना।
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ऑक्यूपेशनल हेल्थ, सेफ्टी वर्किंग कंडीशंस कोड के अंडर उसके रिल्ट कोई आंसर है तो वहां मत घुसड़ के आना इसको। दोनों अलग-अलग
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कोड्स हैं। ऑलराइट। अब बढ़ते हैं अगले क्वेश्चन की तरफ। अब एक बड़ा ही छोटा सा
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क्वेश्चन आता है कि भैया सोशल सिक्योरिटी को लेके ऑफेंसेस और पेनल्टीज क्या हो सकती
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हैं? और इसमें सबकी हालत खराब होती है। मुझे नहीं समझ आता क्यों? क्योंकि ले दे के तीन ही टाइप के ऑफेंसेस इसमें होते
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हैं। तो इसको प्लीज थोड़ा आराम से समझ लो। ठीक है? आंसर छोटा है इसे लंबा करने के
17:06
लिए। या तो आप प्रीवियस आंसर अपेंड कर सकते हैं या अभी आगे जो हम आंसर्स करेंगे उसमें से व्हाटएवर यू फील दैट इज़ रेलेवेंट
17:12
यू कैन यूज़ इट। सबसे पहले ऑफेंस क्या होती है? नॉन पेमेंट ऑफ कंट्रीबशंस। हमें जैसे
17:18
पता है कि जो एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड है उसके लिए 121% का कंट्रीब्यूशन एंप्लयर और
17:25
एंप्लई के एंड से होता है। ईएसआईसी के लिए 3.25 0.75 है। ऑलराइट। अब मान लेते हैं
17:31
कोई ये कंट्रीब्यूशनंस नहीं कर रहा। नॉन पेमेंट ऑफ़ कॉनंट्रीब्यूशन है तब क्या हो सकता है? तो दैट इज़ एन ऑफेंस। क्यों?
17:36
क्यों? क्योंकि ऐसा कोई फेलियर होता है एंप्लयरर्स या इंडिविजुअल्स के थ्रू कि भाई आपने टाइमली कंट्रीब्यूशन नहीं किए
17:42
हैं या आपके एक्यूरेट कंट्रीब्यूशन नहीं है सोशल सिक्योरिटी लॉ सोशल सिक्योरिटी
17:47
स्कीम्स में जो लॉ के थ्रू मैंडेटेड है। तो आपको बाय डिफॉल्ट पेनल्टी तो लगेगी।
17:53
आपको फाइन तो लगना ही लगना है। ऑलराइट। तो ऐसे जो डिफॉल्टिंग एंटिटीज होती है उनको
18:00
मॉनिटरी पेनल्टी लगती है बेस्ड ऑन दी अमाउंट ऑफ कंट्रीब्यूशन एंड द टाइम ऑफ डिले।
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कि कितने टाइम से कितने ड्यूरेशन से नॉन पेमेंट हुआ है। सो दिस इज वेरीेंट। फिर उस
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पर इंटरेस्ट भी चार्ज होता है। अभी भी आप कंटिन्यू कर रहे हो, नई पेमेंट कर रहे हो, नई कंट्रीब्यूशन कर रहे हो। तो क्या हो
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जाता है? एडिशनल इंटरेस्ट मे बी लिवाइड ऑन ओवरड्यू कंट्रीब्यूशंस टू व्हाट कंपनसेेट
18:23
फॉर दी डिलेड पेमेंट्स। यह भी बहुतेंट है। तो, पहला क्या लगता है? फाइन लग जाते हैं। इंटरेस्ट चार्ज होता है ओवरड्यू पे और फिर
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लीगल एक्शन ले सकते हैं। अगर फिर भी नॉन कंप्लायंस है। इतना होने के बाद भी अगर
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कोई तुम्हारी तरह ढीट है। ठीक है? तुम हो ये इस तरीके के एक्सप्रेशन मत दो। हो तुम
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ढीट। ठीक है? तो अगर कोई इतना ढीट है कि भाई फाइन डाल दिया, पेनल्टीज उस पे अप्लाई
18:48
कर दी, इंटरेस्ट भी डाल दिया। फिर भी मैं तो नहीं सुनूंगा।
18:54
लीगल एक्शन हो जाता है नॉन कंप्लायंस के लिए। तो लीगल प्रोसीडिंग हो सकती है। कोर्ट्स के ऑर्डर उनके अगेंस्ट में पास हो
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सकते हैं और इनफोर्समेंट मेजर्स उनके अगेंस्ट ट्रिगर हो सकते हैं। टू रिकवर दी आउटस्टैंडिंग कंट्रीबशंस। ये एक टाइप का
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ऑफेंस था क्या? नॉन पेमेंट ऑफ कंट्रीब्यूशन। सेकंड ऑफेंस क्या है? फ्रॉडलेंट क्लेम्स या मिसयूज़ ऑफ़
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बेनिफिट्स। मतलब क्या हो गया इसका? सिंपल सी बात है। अगर किसी ने कोई फॉल्स क्लेम्स
19:18
करे या मिसलीडिंग इनेशन दी। इन बेनिफिट्स का नाजायज़ फायदा उठाने के लिए या अगर
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कंट्रीब्यूशंस हुए हैं और फिर क्या किया? वह कॉन्ट्रिबशंस का मिस एप्रोप्रिएशन किया
19:30
है। वो फंड्स का मिस एप्रोप्रिएशन किया है। मतलब क्या? स्कीम में उसको यूज़ नहीं किया है। लेकिन क्या किया है? कहीं और
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अपने बेनिफिट के लिए पर्सनल बेनिफिट के लिए एंप्लयर उसको यूज़ कर रहे हैं। दैट इज़ नोन ऐज़ अ मिस एप्रोप्रिएशन ऑफ़ दी फंड्स।
19:44
तो क्या हो जाता है? ऐसे टाइम में प्लीज अंडरस्टैंड इट इज नो लगर अ पेनल्टी और
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इंटरेस्ट तक की बात नहीं है। दिस इज अ क्रिमिनल ऑफेंस। क्यों? क्योंकि हम पे
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मिसरप्रेजेंटेशन है व्हिच इज़ समवेयर लाइकली रेलेवेंट टू फ्रॉड और मिसयूज़ ऑफ़
20:01
बेनिफिट्स है। यानी फ्रॉडेंट एक्टिविटी है। तो जब ये सारी चीज़ होती है, यह क्रिमिनल एक ब्रीच है। एक टाइप का
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क्रिमिनल ऑफेंस हो जाता है। तो, ऑफेंडर्स को क्या होगा? दे विल बी क्रिमिनली प्रोसक्यूटेड एंड अपार्ट फ्रॉम बीइंग
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क्रिमिनली प्रोसक्यूटेड। उनको इंप्रज़मेंट भी हो सकती है एंड फाइन भी एप्लीकेबल होता है। ऑब्वियसली क्योंकि फिर क्या होगा? अब
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आपने कंट्रीब्यूशनंस तो करे नहीं है या उसका मिस एप्रोप्रिएशन किया तो क्या हो गया? सीधी सी बात है। वो भी तो नॉन पेमेंट
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में आ जाएगा। तो पेनल्टी पड़ जाती है। ये सारी चीजें होती हैं। अब अगर ऐसा लगता है
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कि आप गिल्टी हो। ऐसा कोई भी एंप्लयर गिल्टी होता है, कन्विक्टेड हो जाता है तो उसको रीपेमेंट के लिए मजबूर करेंगे। यानी
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क्या हो जाएगा? इंडिविजुअल्स नाउ हु आर फाउंड गिल्टी ऑफ़ व्हाट फ्रॉड दे विल बी
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रिक्वायर्ड टू रीपे। जितना मिस एप्रोप्रिएशन किया दे विल बी रिक्वायर्ड टू रीपे रॉन्गफुली ऑब्टेंड
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बेनिफिट्स। मतलब कोई इंडिविजुअल है जिसने अपनी मिसरिप्रेजेंटेशन करी। फॉल्स इनेशन दी
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उसको बेनिफिट्स मिले। चाहे वो कैश बेनिफिट्स है कोई भी बेनिफिट्स है उसको रीप करना पड़ेगा। अलोंग विद पेनल्टीज़ एंड
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इंटरेस्ट चार्ज्ड। सो ऐसे नहीं है। अब आप बोलोगे हां तो भाई किसी ने अगर मान लो कोई मैटरनिटी बेनिफिट्स लिए हैं नॉट इन कैश।
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तो हां तो भाई फिर भी पेनल्टीज तो है ही फाइन तो है ही। ऑब्वियसली वो सर्विस को रिटर्न नहीं कर सकता लेकिन देयर आर अदर
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वेज़ ऑफ़ रिपेंडिंग। देयर आर अदर वेज़ ऑफ़ रीपेमेंट। सो दीज़ आर सर्टेन थिंग्स। सो सेकंड टाइप की क्या यहां पे ऑफेंस हो गया?
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फ्रॉडेंट क्लेम्स और मिसयूज़ ऑफ़ बेनिफिट्स। थर्ड इज़ नॉन कंप्लायंस विद रिपोर्टिंग एंड
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डॉक्यूमेंटेशन। बहुत सिंपल है। इसका मतलब क्या है भाई? एंप्लयर ने या उस
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एस्टैब्लिशमेंट ने एक्यूरेट रिपोर्ट्स मेंटेन करी नहीं है। और एक्यूरेट रिपोर्ट्स ना मेंटेन करने के साथ प्रॉपर
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रिकॉर्ड्स भी मेंटेन नहीं करें। तो ऑब्वियसली दैट्स अ नॉन कंप्लायंस। क्योंकि फिर ट्रैक कहां से रखेंगे? सो जब ऐसे कोई
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ट्रैक्स नहीं रखे जाते तो कंप्लायंस ऑर्डर इशू किया जाता है और कहा जाता है कि भाई
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ऑफेंडर्स जो भी होते हैं उन्हें कहा जाता है कि आप जो है रिपोर्टिंग एरर्स को रेक्टिफाई करो जो भी मिसिंग डॉक्यूमेंटेशन
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है वो सबमिट करो और रेगुलेटरी रिक्वायरमेंट्स के साथ कंप्ल्लाई करो। दिस इज़ अ मैंडेट
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उसके बिना काम नहीं चल सकता है। कोई भी इस टाइप का अगर एरर करता है और इसको
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डेलीबेटली मतलब बहुत ज्यादा आलस है और डेलीबेटली उसको क्या करना है? नॉन कंप्लायंस करते जा रहा है तो
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एडमिनिस्ट्रेटिव पेनल्टीसेस लग जाती हैं। तो तीन टाइप के इसमें मेन ऑफेंसेस हैं। क्या अगर के नॉन पेमेंट ऑफ कंट्रीब्यूशंस
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हैं? अगर कोई भी फ्रॉडेंट क्लेम है या मिसयूज़ ऑफ़ बेनिफिट्स हैं। एंड अगर नॉन
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कंप्लायंस है किसके साथ? रिपोर्टिंग एंड डॉक्यूमेंटेशन के साथ। तो ये आंसर इतना सा ही है। इसमें कंफ्यूज मत होना। एंड मोर
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ओवर ये तीन पॉइंट भी अगर आपने याद कर लिए तब भी बहुत है। क्यों? सिंपली बिकॉज़ इसके
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अंडर के आंसर्स तो आप अपने खुद के कॉमन सेंस से भी लिख सकते हो। अब अगर कॉमन सेंस नहीं है तो उसका मैं कुछ नहीं कर सकता। इट
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इज़ एस सिंपल एज दैट। ठीक है? बढ़ते हैं अगले क्वेश्चन की तरफ। अब एक बहुतेंट क्वेश्चन ये आता है और इसमें सब लोग
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कंफ्यूज होते हैं। मुझे नहीं पता क्यों? क्योंकि ये बहुत बेसिक है। ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हेल्थ वर्किंग कंडीशंस कोड 2020 के
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अंडर क्या-क्या आता है। ऑलराइट। व्हाट इज ओएसएच कोड? सो वेरी सिंपल। यह क्वेश्चन को
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आप बहुत तरीके से लिख सकते हो। इसके आंसर को बहुत तरीके से लिख सकते हो। लेकिन ओएसएच कोड जो बना था वो बहुत सिंपल है।
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भाई क्या-क्या मेजर्स एंड प्रैक्टिससेस इंप्लीमेंट होती है किसी भी एस्टैब्लिशमेंट में इन ऑर्डर टू अवॉइड
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एक्सीडेंट्स, इंजरीज इन हेल्थ हज़ार्ड्स। क्योंकि ऑक्यूुपेशनल, सेफ्टी, हेल्थ, वर्किंग कंडीशंस की बात है। तो अब ये जो
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तीन है आप इसको पकड़ो। ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वॉकिंग कंडीशंस। और इन तीनों के
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नीचे चार-चार पॉइंट्स हैं। बेसिक है। ऑक्यूपेशनल सेफ्टी को इंश्योर करने के लिए क्या लगेगा? पहले तो आपके अपने यहां जो
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सेफ्टी पॉलिसीज है वो बनाई जाती है। यानी सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को हर एस्टैब्लिशमेंट सेट करती है। यह एंप्लयरर्स की
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रिस्पांसिबिलिटी है टू एस्टैब्लिश सेफ्टी स्टैंडर्ड्स विद इन द एस्टैब्लिशमेंट।
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ठीक है? इसे अपने हिसाब से आप इबोरेट कर सकते हैं। सेकंड जब हमने सेफ्टी
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स्टैंडर्ड्स को इंश्योर करा फिर हम सेफ्टी इक्विपमेंट्स भी तो प्रोवाइड करेंगे। जो फैक्ट्री वर्कर्स हैं या जो ऐसी
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इंडस्ट्रीज में काम करते हैं उनके लिए सेफ्टी इक्विपमेंट्स जैसे हेलमेट, गगल्स,
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हारनेस, गिय्स ऑलराइट। ग्लव्स ये सब प्रोवाइड करना पड़ता है। एंड दैट टू ऑफर
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सर्टेन ग्रेड एंड क्वालिटी। जो भी उस पर्टिकुलर नेचर ऑफ वर्क के लिए रिक्वायर्ड
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है उस लेवल का उस क्वालिटी का कंप्लायंस होना चाहिए इन इक्विपमेंट्स के साथ। अब
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आपने सेफ्टी स्टैंडर्ड्स बता दिए, सेफ्टी गिय्स दे दिए यानी इक्विपमेंट्स दे दिए तो उसको यूज़ करने की ट्रेनिंग भी देनी पड़ेगी।
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तो सेफ्टी ट्रेनिंग। तो ट्रेनिंग किसके लिए प्रोवाइड की जाती है? पहले तो भाई
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प्रोटोकॉल्स के साथ कंपल् करना है वर्कर्स को इक्विपमेंट्स को सही तरीके से कैसे यूज़
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करना है? और अगर कोई इमरजेंसी सिचुएशन आती है तो उन इमरजेंसी सिचुएशनंस में कैसे रिसोंड करना है रिएक्ट नहीं ये सब की क्या
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दी जाती है ट्रेनिंग दी जाती है तो हमने सेफ्टी स्टैंडर्ड सेट करे सेफ्टी इक्विपमेंट्स प्रोवाइड करे ट्रेनिंग
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प्रोवाइड करी और फोर्थ एंड मोस्टेंट अब ये तीनों ठीक से हो रहा है कि नहीं हो रहा है इसके लिए कंप्लायंस या इंस्पेक्शंस के
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थ्रू चेक करना पड़ेगा कि कंप्लायंस हो रहा है कि नहीं टाइमली ट्रेनिंग दी जा रही है कि नहीं कोई इक्विपमेंट्स हैं क्या
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जिन्हें चेंज करना है सारे वर्कर्स प्रोटोकॉल्स को फॉलो करते हैं या नहीं
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करते हैं। यह आपका ऑक्यूपेशनल सेफ्टी है। फिर आते हैं ऑक्यूपेशनल हेल्थ में। तो
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पहले हेल्थ असेसमेंट क्या हेल्थ असेसमेंट करना है? वेरी सिंपल।
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भाई किसी भी वर्कर को किसी भी टाइप का कोई प्री एकिस्टिंग ऑक्यूपेशनल डिजीज तो नहीं है या कोई और टाइप का हेल्थ कॉम्प्लिकेशन
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तो नहीं है। उसे भी रिपोर्ट करना पड़ता है। रिकॉर्ड में लेना पड़ता है। हेल्थ
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असेसमेंट करने के बाद में हमें यह देखना पड़ता है उसी हेल्थ असेसमेंट में कि क्या
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उसे कोई ऑक्यूपेशनल हेल्थ रिस्क है प्री एकिस्टिंग और अगर है तो ऐसे पोटेंशियल
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हेल्थ इश्यूज को उन्हें पहले ही एड्रेस करना पड़ेगा। वो यह इनेशन छुपा नहीं सकते।
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इसके बाद एक बार आपने असेसमेंट कर ली तो आपको हेल्थ केयर फैसिलिटीज एज एंप्लॉयर प्रोवाइड करनी पड़ेगी। यानी कि क्या
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मेडिकल एग्जामिनेशंस टाइमली आप करवाइए, वैक्सीनेशंस प्रोवाइड कराइए अगर जरूरत है और हेल्थ सर्विज आप अपने एंप्लाइजस के लिए
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प्रोवाइड करवाइए। जनरली जो फैक्ट्रीज होती है जहां पे बहुत ज्यादा ऐश होता है, स्मोक
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होता है। ठीक है? वहां पे यह बहुत ज्यादा जरूरी होती है। क्यों? नहीं तो फिर एंप्लाइजज़ को एज्मा का प्रॉब्लम हो जाएगा।
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तो उन्हें मास्क भी देने पड़ते हैं। हेल्थ केयर फैसिलिटीज प्रोवाइड करवानी पड़ती है। देखो कोविड के टाइम तो मेडिकल फैसिलिटीज
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में बहुत ज्यादा हो गया था। ऑलराइट। तो हेल्थ असेसमेंट के बाद हेल्थ केयर फैसिलिटीज देनी पड़ती हैं। फिर आता है
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इर्कोनॉमिक्स। अब अर्कोनॉमिक्स क्या होता है? ऑर्गनॉमिक्स बहुत सिंपल सी बहुत सिंपल
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सी चीज है। मेरे एस्टैब्लिशमेंट का इंफ्रास्ट्रक्चर उस वे में बना होना चाहिए
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कि किसी भी वर्कर को फिजिकल डिस्ट्रेस नहीं है। ओके? अगर अब जैसे मैं चेयर पर बैठा हूं एक
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टेबल है तो वो ऐसे नहीं बनी हो कि लिखने के समय या रिकॉर्डिंग करने के समय या कुछ
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और काम करने के समय मुझे बॉडीली डिस्ट्रेस एक्सपीरियंस हो। यानी कि क्या आई हैव टू
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एनश्योर दैट दी इंफ्रा डज नॉट कॉज एनी मस्कुलोस्केलेटन
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डिसऑर्डर। हां भाई पढ़ के बोलना पड़ा। मस्कुलोस्केलेटन पढ़ के बोलना पड़ा।
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लॉयर हैं हम। है ना? मेडिकल प्रोफेशनल नहीं है। यह सब शब्द हमारे लिए भी नए हैं।
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चलता है। फिजिकल डिस्ट्रेस बोला था ना पहले उससे काम चलाओ। तुम भी कोई
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मस्कुलोस्केलेटन लिख के आने वाले नहीं हो। ठीक है? एनीवे। सो
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किसी भी ऐसे टाइप का हमें मस्कुलोस्केलेटन डिसऑर्डर नहीं हो।
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ध्यान रखना पड़ता है। तो उसको कहते हैं ऑर्गोनॉमिकली हमारा इंफ्रा डेवलप्ड है। ऑलराइट। सो दैट इज व्हाट अर्कोनॉमिक्स इज
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अबाउट। तो हेल्थ असेसमेंट, हेल्थ केयर फैसिलिटी, इर्कोनॉमिक्स का ध्यान रखना पड़ता है। एंड मेंटल हेल्थ का भी अब मैं
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इंडस्ट्री का नाम नहीं लूंगा लेकिन बहुत बैंड बजी हुई है लोगों की। हर महीने कुछ ना कुछ होता है। काउंसलिंग
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सेशंस, कॉर्पोरेट ट्रेनिंग, कॉर्पोरेट कोऑर्डिनेशन के लिए, फैमिली एनवायरमेंट
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बनाने की कोशिश, रिट्रीट्स पे जाना, रिसोर्ट्स में जाना जो भी है। मेंटल स्ट्रेस नहीं हो तो स्ट्रेस
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मैनेजमेंट प्रोग्राम्स, जब काउंसलिंग चाहिए तो हमने काउंसलिंग प्रोवाइड कराई। हमने सही अप्रोच के बारे में बताया। ये सब
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एंप्लाइजज़ के मेंटल हेल्थ के लिए बहुत बेटर है। अब क्यों करना है ये सब? ताकि दोनों चीज़ हो। एक तो एंप्लाइजज़ का ओवरऑल
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वेलफ़ेयर वेल बीइंग एंड काम एफिशिएंटली होना चाहिए। सिर्फ काम डोंकी वर्क नहीं
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कराना एफिशिएंटली खुशी-खुशी काम करवाना है। ओके? दैट इज़ व्हाट इज़ द ऑब्जेक्टिव ऑफ़
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ओएसएच। एंप्लाइजज़ की ओवरऑल वेल बीइंग एंड वर्किंग एफिशिएंटली। ऑलराइट। तो ये
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ऑक्युपेशनल हेल्थ के अंडर आ गया। अब हम वर्किंग कंडीशंस की बात करते हैं। वर्किंग कंडीशन बाय द टर्म वी कैन से किस हालात
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में किस सरकम किस-किस किस टाइप का एनवायरमेंट है एस्टैब्लिशमेंट में। तो वर्किंग कंडीशंस में क्या-क्या चीजें आ
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जाती हैं? सबसे पहले तो आ जाता है वर्किंग आवर्स।
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जरूरी है। ये एनश्योर करना पड़ता है कि रीज़नेबल वर्किंग आवर्स हो। सब लोग यू नो
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उस कैटेगरी में से नहीं आ जाए कि 72 आवर्स खींच रहे हैं।
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सूटेबल वर्किंग आवर्स होने चाहिए। ठीक है? एंड सूटेबल वर्किंग आवर्स के साथ भाई
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रेस्ट लेने के लिए ब्रेक्स दो। राइट? लीफ पॉलिसीज होनी चाहिए। क्यों? ताकि किसी को फटीग नहीं हो। किसी का बर्न आउट नहीं हो
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जाए। आजकल तो 2530 साल के लोगों का बर्न आउट हो रहा है। शर्म करो यार। ठीक है? तो
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अपनी ड्यूटी करते-करते किसी का फटीग बर्न आउट नहीं हो। तो वर्किंग आवर्स डिफाइन करना बहुत जरूरी है। इवन फॉर फीमेल
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एंप्लाइजज़ लेटा नाइट शिफ्ट्स में जो काम करती हैं उनके लिए वर्किंग आवर्स सिक्योरिटीज़ ये सब प्रोवाइड करना बहुत
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ज्यादा जरूरी है। तो वर्किंग आवर्स सेकंड इज़ हेल्थ एंड हाइजीन एंड सैनिटेशन। बहुत मेंटेन करना इंपॉर्टेंट है। भले ही तुम
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नहाते नहीं हो। भले ही तुम्हारा खुद का हाइजीन हो और सैनिटेशन गड्ढा खोद के नीचे शुतुरमुर्ग की तरह। डज नॉट मैटर एंप्लई की
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तो भी रिस्पांसिबिलिटी है कि कम से कम वहां पे हाइजीन एंड सैनिटेशन वो बना के रखें ताकि उसकी वजह से आपको कोई इशू नहीं
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हो। कोई आपको ऑक्यूपेशनल डिजीज नहीं हो जाए। कोई स्किन एलर्जीज़ नहीं हो जाए या कोई रेस्पिरेटरी प्रॉब्लम्स नहीं हो जाए।
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एंड टेंपरेचर एंड वेंटिलेशन मेंटेन करके करना इंपॉर्टेंट है। क्यों? भाई सूटेबल
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टेंपरेचर होना चाहिए। वेंटिलेशन होना चाहिए। क्यों? ताकि सफोकेशन नहीं हो। है
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ना? कोई क्लॉस्टोफ्रोबिक हो जाएगा तो मर ही जाएगा। तो प्रॉपर वेंटिलेशन एंड प्रॉपर
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टेंपरेचर होना चाहिए। सूटेबल टेंपरेचर होना चाहिए काम करने के लिए। एंड बाकी जो एडिकेट फैसिलिटीज़ है जैसे कैंटीन,
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ड्रिंकिंग वाटर फैसिलिटीज़, क्लीन एंड हाइजीनिक रेस्ट रूम्स एंड स्पेसिफिक
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अरेंजमेंट्स इन द रेस्ट्स फॉर फीमेल्स। जैसे कि जो सैनेरी पैड्स का डिस्पेंसर होता है। ये सारी चीजें जो है अगेन दिस
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कम्स अंडर इकोनॉमिक्स एंड अदर थिंग्स। ये सब फैसिलिटीज प्रोवाइड करना भी मैंडेटरी है एक तरीके से लॉ में। ऑलराइट। सो चार
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चीजें ऑब्जेक्टिव में आती है ओएसएच कोड के। जैसे मैंने बोला ओवरऑल वेल बीइंग ऑफ द
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एंप्लाइजज़, रिस्क असेसमेंट एंड रिस्क मैनेजमेंट, लीगल कंप्लायंस एंड
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प्रोडक्टिविटी एंड एफिशिएंसी ऑफ़ एंप्लाइजज़। ऑलराइट। सो, हमने क्या-क्या करा? ओएसएच के अंडर में क्या-क्या चीज़ आती
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हैं? ऑक्युपेशनल सेफ्टी के अंडर चार चीज़ अह सेफ्टी स्टैंडर्ड्स एस्टैब्लिश करना,
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सेफ्टी इक्विपमेंट्स देना, ट्रेनिंग देना और इंस्पेक्शंस करना कि कंप्लायंस हो रहा है कि नहीं। वैसे ही ऑक्यूपेशनल हेल्थ के
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अंडर चार चीज हेल्थ असेसमेंट करना, हेल्थ केयर फैसिलिटी प्रोवाइड करना, इकोनॉमिकली अपने इंफ्रा को डेवलप करना। एंड चौथा किसी
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भी टाइप के हमें मेंटल हेल्थ इशूज़ नहीं हो एंप्लाइजज़ को यह एश्योर करना। वर्किंग
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कंडीशंस के अंडर अगेन चार चीज़ें। सबसे पहला वर्किंग आवर्स डिफाइंड होने चाहिए।
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कन्वीनिएंट होने चाहिए। भाई ब्रेक्स टाइम पे दो लीव्स के लिए यू नो ईज़मेंट होनी
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चाहिए। हाइजीन एंड सैनिटेशन मेंटेन करना। टेंपरेचर एंड वेंटिलेशन अच्छा होना चाहिए।
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एंड फोर्थ एंड मोस्टेंट अदर फैसिलिटीज़ लाइक कैंटीन, रेस्ट रूम्स, ड्रिंकिंग वाटर
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फैसिलिटीज़ एक्सट्रा एक्सट्रा। तो इसके ऑब्जेक्टिव्स क्या है? चार। एमंप्लई का
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वेल बीइंग, लीगल कंप्लायंस, रिस्क असेसमेंट एंड मैनेजमेंट एंड ओवरऑल प्रोडक्टिविटी एंड एफिशिएंसी।
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अब इस आंसर में अगर तुम नर के बच्चों ने गड़बड़ करी, ठीक है? इतना सिंपल है। तो इसे
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वापस देख लो लेकिन गड़बड़ मत करो। है ना? आगे बढ़ते हैं। अब देखो और एक बहुत ही
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इंपॉर्टेंट क्वेश्चन आता है। और यह जो क्वेश्चन है ना ये कंपनसेशंस को लेके है कि जब कंपनसेशन का टॉपिक आता है तो उसमें
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एंप्लयर की लायबिलिटीज़ क्या-क्या है? कौन सी टाइप की इंजरीज़ होती हैं? कौन से टाइप की डिसेबिलिटीज़ होती हैं? उसमें कंपनसेशन
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कब एंप्लयर देगा? उसकी लायबिलिटीज़ क्या-क्या है? तो सबसे पहले तो हम इसमें
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मैं जैसे आंसर को एक्सटेंड करने के लिए सजेस्ट करूंगा। पहले तो एंप्लई, एंप्लयर
33:28
और डिपेंडेंट्स एंड डिसेबिलिटीज का डेफिनेशन लिख दो। तो एंप्लई कौन है? हमको
33:33
पता है एक पर्टिकुलर टास्क, काम, ड्यूटी या कोई भी सर्विस प्रोवाइड करने के लिए
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जिसे हायर किया जाता है कॉन्ट्रक्चुअल बेसिस पे या परमानेंट बेसिस पे उसे हम एंप्लई कहते हैं। कौन हायर करता है?
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एंप्लॉयर हायर करता है। और ये जो एंप्लयर है वो कौन है? जो ऐसे किसी एंप्लयर को हायर कर रहा है। किसी एंप्लई को हायर कर
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रहा है अपने इस्टैब्लिशमेंट के लिए। ओके? अब डिपेंडेंट्स कौन है? देखो हमने पहले भी
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लेक्चर में करा है डिपेंडेंस वो है जो एंप्लई की इनकम पे डिपेंडेंट है फॉर देयर
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ओन लाइवलीहुड फॉर देयर ओन लिविंग जैसे स्पाउसेस हो सकते हैं हस्बैंड या वाइफ
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माइनर बच्चे हो सकते हैं जो 18 के नीचे हैं अनमैरिड डॉटर्स हो सकती हैं सिबलिंग्स
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हो सकते हैं अंडर सर्टेन कंडीशंस एजड पेरेंट्स हो सकते हैं कोई भी डिपेंडेंट हो सकता है ऑलराइट सो
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अब डिसेबिलमेंट का क्या मतलब होता है डिसेबलमेंट का मतलब होता है किसी भी
34:24
फिजिकल या मेंटल इनकपेसिटी को डिसेबलमेंट कहते हैं। दैट रिजल्ट्स फ्रॉम एन
34:30
एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी और ऑक्यूुपेशनल डिजीज। एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी
34:37
ऑक्यूपेशनल डिजीज से किसी भी टाइप की आपको फिजिकल या मेंटल इनकैपेसिटी कॉज होती है।
34:42
जिसकी वजह से आपकी अर्निंग्स या आपकी वेजेस या आपकी सैलरी पे इंपैक्ट आता है। उसको हम कहते हैं डिसेबिलिटी।
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ठीक है? इसमें हार्ट ब्रेक कवर नहीं होता। वैसे मतलब अगर वर्क प्लेस में आपकी कोई माशुका
34:56
या महबूबा है जिसने आपको डंप कर दिया हो बिकॉज़ यू डिर्व्ड इट वो कवर नहीं होता। वो
35:01
ऑक्युपेशनल डिजीज में नहीं आएगा। नहीं सॉरी।
35:07
सो अब टाइप्स ऑफ़ डिसेबिलमेंट क्या होते हैं? टाइप्स ऑफ डिसेबिलमेंट। अब ये थोड़ा
35:13
कॉम्प्लिकेटेड साउंड करेगा। है नहीं। पहला होता है परमानेंट टोटल डिसेबिलिटी।
35:20
मतलब क्या? परमानेंट टोटल डिसेबिलिटी का मतलब होता है लाइफ टाइम इनेबिलिटी टू
35:27
वर्क। मेरे हाथ कट जाना। ठीक है? एक मिनट। मेरे क्यों कटेंगे यार? दुश्मन के हाथ कट
35:34
जाना। ऑलराइट। तो वो परमानेंट है ना। अब वो रिस्ट में हाथ तो वापस नहीं आएंगे। दैट इज़ अ
35:41
परमानेंट डिसेबिलिटी एंड अ टोटल डिसेबिलिटी। टोटल क्यों? क्योंकि अब हाथों
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से तो कोई काम हो ही नहीं सकता। तो वो टोटल है टोटली इनकैपसिटेट हो गया परमानेंटली अब लाइफ टाइम में वो उस टाइम
35:54
का उस टाइप का उस नेचर का काम कभी नहीं कर सकता परमानेंट टोटल डिसेबिलिटी है
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इररिकवरेबल फिर होती है टेंपरेरी टोटल डिसेबिलिटी हाथ
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का टूट जाना एग्जांपल फ्रैक्चर हो गया टोटल डिसेबिलिटी है ना हाथ तो टोटली काम
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नहीं करेगा नहीं करने वाला है टोटल या दोनों हाथ टूट गए भाई टोटल डिसेबलमेंट है
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लेकिन टेंपरेरी रिकवर हो जाएंगे भाई। परमानेंट नहीं है। रिकवर हो जाएंगे। ठीक
36:22
है? दैट इज़ टेंपरेरी टोटल डिसेबलमेंट। ये समझ आया? परमानेंट एंड टोटल सॉरी परमानेंट
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एंड टेंपरेरी टोटल डिसेबिलमेंट। अब आगे आते हैं हम पार्शियल डिसेबलमेंट में।
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जैसे परमानेंट टोटल डिसेबिलमेंट है वैसे ही परमानेंट पार्शियल डिसेबलमेंट है।
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परमानेंट पार्शियल डिसेबिलमेंट मतलब क्या होती है? अ लेट्स से फॉर एग्जांपल मेरा
36:47
कोई बॉडी पार्ट है या कुछ मेंटल डिसऑर्डर हो गया कुछ भी मुझे डिसेबिलिटी हो गई बट
36:54
वो टोटल डिसेबिलिटी नहीं है पार्शियल डिसेबिलिटी है मतलब मैं काम कर सकता हूं बट अब उतने अच्छे से नहीं कर सकता फॉर
37:01
एग्जांपल लेट्स से मेरा ड्राइविंग का काम है या लेट्स से के मैं एक ज्वेलर के यहां
37:07
ज्वेलरी बनाता हूं मैं क्राफ्ट्समैन हूं मैं गोल्ड्स तो हूं या क्राफ्ट्समैन हूं और लेट्स से मुझे एग्जांपल दे रहा हूं
37:13
डोंट टेक इट लिटरली लेट्स परमानेंटली मुझे पार्शियल कैटक्ट हो गया।
37:18
अब मेरा विज़न उतना क्लियर नहीं है और वो रिकवर भी नहीं हो सकता। एग्जांपल
37:24
तो दैट विल बी नोन एज परमानेंट पार्शियल डिसेबिलिटी। मतलब क्या? पार्शियल डिस मैं
37:31
काम कर सकता हूं बट अब उतने अच्छे से नहीं कर सकता। कर सकता हूं लेकिन उतने अच्छे से नहीं।
37:36
इसका मतलब क्या हो गया? परमानेंट पार्शियल डिसेबलमेंट तभी मानी जाती है जब उसकी वजह से
37:44
आपकी इनकम पर कोई इंपैक्ट आए। डिसेबलमेंट कोई भी हो इनकम पर इंपैक्ट आना चाहिए।
37:50
क्योंकि अगर इंपैक्ट इनकम पे इंपैक्ट नहीं है तो वो डिसेबिलिटी काउंट ही कैसे हो रही है? मतलब काम तो कर ही सकते हो। डिसेबल
37:55
नहीं होगा। सो दिस इज़ परमानेंट पार्शियल डिसेबिलमेंट। और टेंपरेरी पार्शियल
38:01
डिसेबलमेंट जैसा हुआ है कैटक्ट हुआ लेकिन रिकवर हो जाएंगे अपन। वो क्यरेबल है। तो
38:07
इसको कहते हैं टेंपरेरी पार्शियल डिसेबिलमेंट। वेरी सिंपल। ऑलराइट। तो ये चार टाइप है परमानेंट टोटल डिसेबलमेंट
38:15
टेंपरेरी टोटल डिसेबिलमेंट परमानेंट पार्शियल डिसेबलमेंट टेंपरेरी पार्शियल डिसेबलमेंट एज़ सिंपल एज़ दैट अब इसमें भी
38:22
टाइप्स ऑफ़ इंजरीज़ हैं। ये तो डिसेबलमेंट्स थी। इंजरीज़ दो टाइप की होती है। एक होती है शेड्यूल्ड, एक होती है नॉन शेड्यूल्ड।
38:29
मेहरबानी करके दोनों हाथों से साष्टांग दंडवत करते हुए मैं एक बात बोल रहा हूं।
38:34
प्लीज घिनौने आंसर्स मत लिखना कि शेड्यूल्ड इंजरीज वो होती हैं जो
38:41
शेड्यूल्ड होती है। इस दिन पे होगी
38:46
मतलब तुम लॉ तक पहुंचे तुमने यार तुमने
38:51
12वीं पास कैसे करी यार? मजाक नहीं कर रहा हूं। मैंने देखे हैं ऐसे आंसर्स। मैंने
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देखे हैं ऐसे आंसर्स। लोग लिख के आते हैं। शेड्यूल्ड इंजरीज आर दोज़ इंजरीज व्हिच आर शेड्यूल्ड टू हैपन। अरे उसको
39:04
डेलीबेट है ये। पागलवागल है क्या? एक ही टाइप की शेड्यूल्ड इंजरी हो सकती है जिसे
39:11
कहते हैं शादी। ओके। दैट्स इट। दैट्स इट। और कोई शेड्यूल्ड इंजरी हो नहीं सकती।
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ये एडिटर ये काट देना। ये पता नहीं दंगे। ये काट देना इसको।
39:26
एनीवे। सो ये होती है शेड्यूल्ड इंजरीज और नॉन
39:31
शेड्यूल्ड इंजरीज। यानी कि वो जो लिस्टेड है यानी लॉस ऑफ लिम्स
39:37
लॉस ऑफ यू नो लिम्स आइसाइट इयरिंग इनको कहा जाता है शेड्यूल्ड इंजरीज जो बेसिकली
39:45
लिस्टेड है कहीं ना कहीं शेड्यूल्ड हैं। तो उसमें क्या होता है वो डायरेक्टली प्रोपोर्शननेट होता है आपका कितना आपका
39:51
कितना परसेंटेज है कितना लेवल ऑफ़ आपका लॉस है उस हिसाब से आपको कंपनसेेट किया जाता है। फिर होती है नॉन शेड्यूल। नॉन शेड्यूल
39:58
इंजरीज यानी कि क्या वो टाइप की इंजरीज जिसके लिए फर्दर मेडिकल असेसमेंट की जरूरत
40:03
है एंड देन डिसाइड होता है आपको कंपनसेेट कैसे किया जाएगा या कितना किया जाएगा एज सिंपल एज दिस दिस इज़ शेड्यूल्ड एंड नॉन
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शेड्यूल्ड इंजरीज अब भाई साहब कंपनसेशन मिलेगा कब तो हमने कंपनसेशन पहले ही बात
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की थी किसी भी टाइप की डिसेबलमेंट होती है जिससे आपकी इनकम्स पे आपके वेजेस पे इंपैक्ट आता है तो उसके लिए आपको कंपनसेशन
40:25
मिलता है अच्छा डेथ के लिए भी कंपनसेशन मिलता है। लेकिन कब? जब एंप्लॉयमेंट
40:30
रिलेटेड वर्क की वजह से या ऑक्यूपेशनल डिजीज की वजह से आपकी डेथ हो गई हो। तो
40:36
ऐसी कोई इंजरी होती है तो आपके जो डिपेंडेंट्स होते हैं उनको कंपनसेशन मिलता
40:42
है। दे आर एंटाइटल्ड टू गेट कंपनसेशन। और इस टाइप का कंपनसेशन डेथ के केस में कैसे
40:48
कैलकुलेट करते हैं? बेस्ड ऑन दी एंप्लाइजज़ मंथली वेज एंड एज। मंथली वेज उसको कितनी
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मिल रही थी? और जब वो गुजरे उस टाइम पे उनकी ऐज क्या थी एट द टाइम ऑफ़ डेथ। फिर
41:00
परमानेंट टोटल डिसेबिलमेंट अगर हो जाएगी तो ऐसे एंप्लाइजज़ को हु हैव सफर्ड
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परमानेंट टोटल डिसेबिलमेंट। उनको कैसे एंटाइटलमेंट मिलती है? दे आर एंटाइटल्ड टू कंपनसेशन कैलकुलेटेड अगेन सेम उनके मंथली
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वेज पे और उनकी एज इस वक्त क्या है? परमानेंट पार्शियल डिसेबलमेंट अगर होती है
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तो भाई इट इज़ डिटरमाइंड बाय दी परसेंटेज ऑफ लॉस ऑफ अर्निंग कैपेसिटी। क्योंकि
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परमानेंट पार्शियल है ना तो परमानेंट तो है ही रिकवर होगा नहीं तो कितना रिडक्शन हुआ आपके अर्निंग में उसके ग्राउंड पर
41:30
कैलकुलेट की जाती है और अगर टेंपरेरी डिसेबलमेंट है चाहे परमानेंट हो या पार्शियल हो सॉरी टोटल हो या पार्शियल हो
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सो टेंपरेरी डिसेबिलमेंट होती है अगर टोटल या पार्शियल तो आपको मंथली पेमेंट मिलती
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है व्हिच इज़ इक्विवेलेंट टू अ सर्टन परसेंटेज ऑफ़ योर वेजेस इट इज़ एज़ सिंपल एज
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दिस इसमें कुछ ज्यादा एज सच कोई रॉकेट साइंस वाली बात है नहीं ऑलराइट सो इस
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तरीके से जो होता आपको कंपनसेट किया जाता है। अब इसके साथ एडिशनली आपको मेडिकल
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एक्सपेंसेस मिल सकते हैं। जब किसी भी टाइप की इंजरीज़ हुई है व्हिच द एंप्लई हैज़
42:03
सस्टेंड बाय यू नो अ सम ऑक्यूपेशन और वर्क
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रिलेटेड इंजरी तो उसको मेडिकल केयर मेडिकल एक्सपेंसेस मिलते हैं और रिहबिलिटेशन
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अलाउंसेस भी दिए जाते हैं। अब इसमें एंप्लयर की लायबिलिटी क्या है? एंप्लयर कब देगा? तो भाई देखो एंप्लयर पहली बात सिर्फ
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तब देगा जब एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी है और किसको देगा अगर वो उसका एंप्लई है तो
42:30
ठीक है ऑक्यूपेशनल डिजीज है ऑक्यूपेशन की वजह से उसको डिजीज हुई है तो देगा और अगर
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डेथ हो जाती है ऑक्यूपेशन या एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी की वजह से तो एक्सीडेंटल
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इंजरीज होती है एंप्लॉयमेंट रिलेटेड तब देगा और इसमें नो फ़ॉल्ट लायबिलिटी नो फ़ॉल्ट लायबिलिटी का मतलब क्या है फर्क
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फर्क नहीं पड़ता कि एंप्लयर पर्सनली लायबल है कि नहीं उस इंजरी के लिए। अगर वर्क रिलेटेड या एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी है
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तो 100% उसको देना ही पड़ेगा। आप एक तरीके से समझ लो ये एक तरीके से ये एब्सोल्यूट
43:03
लायबिलिटी टाइप्स हो जाता है। देना ही पड़ेगा। नो फॉर लायबल देना ही पड़ेगा आपको। क्योंकि आपके एस्टैब्लिशमेंट या
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आपके यहां काम करने की वजह से उसको कोई दिक्कत हुई है। ठीक है? लेकिन अब एक बात और होती है एक्सेप्शनंस क्या है?
43:15
कुछ एक्सेप्शनंस भी तो होते हैं कि किस केस में एंप्लई सॉरी एंप्लयर नहीं देगा
43:20
कंपनसेशन। पहली बात अगर एंप्लयर एंप्लई जो है अगर उसने प्रोटोकॉल्स फॉलो
43:28
नहीं करे हैं, डिसओबिडियंस दिखाई है और उसकी वजह से उसको इंजरी हुई है तो वो नहीं बोल सकता कि मेरे को वर्क रिलेटेड इंजरी
43:36
हो गया, ऑक्यूपेशनल वो डिजीज डिजीज हो गया है। ग्लव्स पहनने के लिए बोले थे। ग्लव्स नहीं
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पहने। आपने गरमा गरम कांच उठाया आपके हाथ में मोल्टन ग्लास गिरा पास थ्रू हो गया तो
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उसको ऑक्यूपेशनल या यू नो एंप्लॉयमेंट इंजरी नहीं बोलेंगे यू डिड नॉट मेंटेन
43:58
सेफ्टी एस पर दी प्रोटोकॉल्स तो जब एंप्लई के एंड से विलफुल डिसओबिडियंस है या
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प्रोटोकॉल्स फॉलो नहीं करता है सेकंड अगर एंप्लई इनटॉक्सिकेशन में है एट वर्क प्लेस
44:10
सी दैट इज़ आल्सो अंडर दी यू नो एंबिट ऑफ नॉट फॉलोइंग दी प्रोटोकॉल्स तभी भी
44:16
कंपनसेशन देने के लिए एंप्लयर लायबल नहीं है। अनदर पॉइंट हियर व्हिच इज़ मोस्टेंट कि लेट्स से
44:23
अगर वो विलफुली अपने मर्जी से डेलीबेरेटली खुद को इंजर
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करता है। अब अब कौन पागल है जो डेलीबेटली खुद को इंजर करेगा? करते हैं भाई। आभार आशिक कर सकते हैं। तो ये क्यों नहीं कर
44:34
सकते? जैसे हमने पहले करा था जब आपको बेनिफिट्स चाहिए। कई लोग होते हैं जो करते
44:41
हैं भाई कैश बेनिफिट मिलेगा ना इंजरी होगी कर लेते हैं होते हैं डेड डेविल जैसे तभी भी एंप्लयर की कोई लायबिलिटी नहीं है आपको
44:48
कंपनसेेट करने के लिए और भाई जब नॉन एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी हुई है कहीं
44:55
बाहर आपको इंजरी हुई है या आपके अपने कांड करने की वजह से आपको इंजरी हुई है तो भी
45:02
एंप्लयर लायबल नहीं है टू कंपनसेेट यू तो यह बड़ा ही बेसिक साह यू नो आंसर है और
45:09
इसमें दो केस लॉज़ बहुत इंपॉर्टेंट है। पहले तो दैट इज़ लक्ष्मीबाई आत्माराम वर्सेस बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट ये 1954 का
45:16
केस था। इसमें यह सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एंप्लॉयर इज़ लायबल टू पे कंपनसेशन इफ इंजरी अराइज़ज़ आउट ऑफ एंड इन द कोर्स ऑफ़
45:24
एंप्लॉयमेंट। सेकंड मैकेनॉन मैकिंजी वर्सेस अह इब्राहिम मोहम्मद इज़ाक दैट इज़
45:30
1970 का यह केस था। इसमें भी ये क्लेरिफिकेशन दी थी कि अगर एक्सीडेंट होता
45:37
है वर्क प्लेस के बाहर एंड इफ इट इज़ कनेक्टेड टू एंप्लॉयमेंट ड्यूटीज तो भी
45:42
एंप्लयर लायबल है। मतलब समझे एम एस्टैब्लिशमेंट के बाहर है लेकिन एंप्लॉयमेंट रिलेटेड ड्यूटी पे ही ऑन
45:48
ड्यूटी है वो एंप्लॉयमेंट रिलेटेड काम करने जा रहा है तो भी किसकी एंप्लॉयर की
45:54
ड्यूटी है उसको लायबिलिटी उसको पे करना। दैट इज़ अ कैजुअल कनेक्शन बिटवीन द एंप्लॉयमेंट एंड द इंजरी। ऑलराइट बहुत
46:01
बेसिक सा आंसर है करके जाना तो पहले एंप्लई एंप्लयर और डिपेंडेंट्स का इसमें
46:07
डेफिनेशन हमने दे दिया फिर हमने टाइप्स ऑफ क्या बता दी डिसेबिलिटी
46:12
परमानेंट टोटल डिसेबिलमेंट टेंपरेरी टोटल डिसेबिलमेंट परमानेंट पार्शियल डिसेबलमेंट टेंपरेरी पार्शियल
46:20
डिसेबिलमेंट शेड्यूल्ड नॉन शेड्यूल्ड इंजरीज के बारे में बता दिया एंप्लयर कब कब लायबल है और उसके एक्सेप्शनंस क्या है
46:27
कैसे-कैसे टाइम पे उसको मिल जाएगी कंपन कंपसेशन डिसेबलमेंट के टाइम मिल जाएगी। मोस्टली परमानेंट टोटल या परमानेंट
46:33
पार्शियल में मिलती है। टेंपरेरी में मंथली उसको कंपनसेशन मिलेगा बेस्ड ऑन दी
46:38
ऑन अ सर्टेन परसेंटेज ऑफ़ इट्स मंथली वेज जो भी एंप्लई की होगी। एंड डेथ के टाइम पे
46:44
अगर एंप्लॉयमेंट रिलेटेड डेथ हो जाती है। एंप्लॉयमेंट रिलेटेड वर्क से डेथ हो जाती है तब कंपनसेशन मिलेगा। ऑलराइट। सो दीज़ आर
46:52
सम बेसिक थिंग्स। अब आगे चलते हैं नेक्स्ट क्वेश्चन। देखो एक बड़ा ही तगड़ा क्वेश्चन सामने आ गया। आंखों के एकदम आंखें चुंधहा
46:58
गई मेरी बिल्कुल आंसर डोड़े पांडरे साले ये क्वेश्चन इतना जरूरी है। व्हाट आर द
47:07
प्रोविज़ंस अंडर दी मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट?
47:13
अब मैटरनिटी बेनिफिट्स क्या-क्या होते हैं? बहुत आसान है। इसमें बहुत सारे
47:19
फिगर्स हैं जो आपको याद करने पड़ेंगे। लेकिन बहुत आसान है। और सच्ची बता रहा
47:25
हूं। अगर के ये आंसर आपने पॉइंटर्स में लिखा ना तीन पेज तो ऐसे भर जाएंगे आपके
47:32
इतना आसान है ये मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट तो मैटरनिटी बेनिफिट के अंडर कवर
47:38
क्या-क्या होता है सबसे पहले ये किस पे एप्लीकेबल है कौन सी एस्टैब्लिशमेंट्स पे एप्लीकेबल है देखो जहां भी 10 या 10 से
47:47
ज्यादा एंप्लाइजज़ हैं वहां पे मैटरनिटी बेनिफिट दी जा सकती है ऑलराइट अब फटाफट ये
47:52
फिगर्स याद करो मैं आपको बहुत बेसिक बेसिक बता रहा हूं
47:58
कौन से एंप्लाइजज़ इसके लिए एलिजिबल है। अब मत बोलना फीमेल्स
48:03
फीमेल्स तो बट कौन सी फीमेल्स? ऑलराइट दोज़ फीमेल्स हु हैव कंप्लीटेड एटलीस्ट 80 डज़
48:12
ऑफ़ वर्क कंटीन्यूअस सर्विस 12 इन 12 मंथ्स प्रिसीडेड टू द
48:20
एक्सपेक्टेड डेट ऑफ़ डिलीवरी। समझ आया? हु हैव कंप्लीटेड 80 डेज ऑफ कंटीन्यूअस
48:27
सर्विस विद इन 12 मंथ्स प्रिसीडेंट टू दी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी यानी
48:34
एक्सपेक्टेड डेट ऑफ डिलीवरी के पहले एक साल में पिछले एक साल में एटलीस्ट 80 डेज
48:40
की कंटीन्यूअस सर्विस की है सिर्फ वही एलिजिबल है। ऐसा इसमें लिखा है। ऑलराइट।
48:47
अब क्या-क्या मैटरनिटी बेनिफिट्स मिलते हैं? सबसे पहले तो फर्स्ट टू चिल्ड्रन के
48:53
लिए किसके लिए? फर्स्ट टू चिल्ड्रन के लिए ऐसी लेडीज को 26 वीक्स की पेड लीव मिलती
49:00
है। कितनी? 26 वीक्स की पेड लीव। अब भैया दो से ज्यादा बच्चे हो गए। तीन चार बच्चे
49:06
हैं तो तो सब्सक्वेंट जो चिल्ड्रन है यानी कि थर्ड, फोर्थ या उसके बाद भी उसके लिए
49:12
12 वीक्स की पेड लीफ मिलेगी। पहले दो के लिए 26 हफ्ते उसके बाद सब्सक्वशेंट के लिए
49:18
12 वीक्स की पेड लीव इतना क्लियर है बहुत सिंपल है। 26 वीक्स 12 वीक्स अब 12 वीक्स
49:25
का और भी प्रोविजन है। लेट्स से आपने चाइल्ड अडॉप्ट करा है बिलो दी एज ऑफ़ थ्री
49:30
मंथ्स तभी भी आपको 12 वीक्स की लीव मिलेगी। और अगर आप कमिशनिंग मदर हैं यानी
49:38
कि सरोगसी सेरेगसी पता है ना कमिशनिंग मदर्स। ऑलराइट। तो भी 12 वीक्स की आपको
49:45
लीव मिलेगी। तो तीन केस में 12 वीक्स की लीव मिलती है। किस-किस में? सब्सिक्वेंट
49:50
चिल्ड्रन। दूसरे बच्चे के बाद तीसरा, चौथा, पांचवा होता है तो 12 वीक्स की पेड लीव, अडॉप्शन ऑफ़ अ चाइल्ड हु इज़ लेस देन द
49:56
एज ऑफ़ थ्री मंथ्स तब 12 हफ्ते की। और अगर आप कमिशनिशनिंग मदर हैं तब 12 हफ्ते की। ऑलराइट। जो भी सरगेसी मदर्स होती हैं उनको
50:03
12 हफ्ते की लीव मिलती है। ओके? अब ये 12 हफ्ते, 26 हफ्ते, 12 हफ्ते वाला क्लियर हो
50:10
गया। अब लेट्स से अगर के मिसकैरज हो जाता है अनफॉर्चुनेटली
50:16
मिसकैरज यानी कि यू नो किसी भी तरीके से हिंदी में कहा जाए तो जब बच्चा गिर जाता
50:24
है गोद गिर जाती है। ऐसे कहा जाता है मिसकैरज हो गया तब ऐसे टाइम पे वुमेन
50:29
एंप्लाइजज़ को सिक्स वीक्स की पेड लीव मिलना कंपलसरी है। मैंडेट है। मिसकैरज में
50:35
सिक्स वीक्स की पेड लीव मिलती है। अगर आपके एंप्लयर ने आपको प्रीनेटल या
50:41
पोस्टनेटल केयर नहीं दी है। प्रीनेटल प्रीनेटल यानी डिलीवरी के पहले या डिलीवरी
50:47
के बाद कोई भी एडिशनल केयर नहीं दी है। तो ऐसी फीमेल्स एडिशनल मेडिकल बोनस के लिए भी
50:52
एंटाइटल्ड होती हैं। ऑलराइट। नाउ लेट्स से प्रेगनेंसी रिलेटेड इलनेस
50:59
अगर किसी को हुई यानी कोई बीमारी हो गई प्रेगनेंसी रिलेटेड। अब प्रेगनेंसी रिलेटेड बीमारी मतलब जब आप प्रेग्नेंट हो
51:05
सिर्फ तब नहीं प्रेगनेंसी में अगर आपकी मिसकैरज होती है तब अगर के आपका अगर
51:12
प्रीमेच्योर बर्थ होता है तब डिलीवरी के टाइम पे या ट्यूबिकॉमी ऑपरेशन होता है इसमें से कुछ भी हो यानी प्रेगनेंसी से
51:18
रिलेटेड कुछ भी चीज हुई जिससे आप बीमार हो गए हो तो आपको 1 महीने की एडिशनल पेड लीव
51:25
मिल सकती है। ओके यह समझ में आया 26 हफ्ते 12 हफ्ते में तीन
51:31
सिनेरियोस ओके सिक्स वीक्स मिसकैरज के लिए। अब सिक्स वीक्स और एक चीज में आता
51:36
है। जब डिलीवरी हो जाती है, जब डिलीवरी होती है, इमीडिएट सिक्स वीक्स के लिए आप
51:42
अपनी एंप्लॉयमेंट कोई भी एंप्लयर आपको एंप्लॉयमेंट रिज्यूम करने के लिए नहीं बोल सकता। इमीडिएटली विद इन सिक्स मंथ्स ऑफ़
51:49
डिलीवरी। सिक्स वीक्स ऑफ़ डिलीवरी आई एम सॉरी। ऑलराइट। तो कभी भी इमीडिएटली क्या
51:55
नहीं होती? एंप्लॉयमेंट रिज्यूम नहीं होती है। लेकिन यह 26 हफ्ते की जो छुट्टी है, 12 हफ्ते की
52:02
छुट्टी कैलकुलेट कब से होगी? सिंपल है। आप जब एप्लीकेशन देते हो, जब आप नोटिस ऑफ़ लीव
52:08
देते हो, तब से 26 वीक से या 12 वीक्स कैलकुलेट होना शुरू हो जाएगा। अच्छा नर्सिंग ब्रेक्स देना भी इंपॉर्टेंट है।
52:14
मैंडेटरी है। यानी कि क्या जब आपको रेगुलर ब्रेक्स मिलते हैं तो जब तक आपका बच्चा 15
52:20
महीने का नहीं हो जाता तो आपको नर्सिंग ब्रेक्स भी मिलते हैं। उसके लिए भी आप एंटाइटल्ड हो। नेचुरली हो और क्रश
52:27
फैसिलिटीज़ क्रश फैसिलिटीज़ यानी कि क्या एक तरीके से समझ जाइए डे केयर टाइप होता है।
52:32
बड़ी-बड़ी एमएसीज़ जो होती है ना वहां पे अच्छा लेकिन क्रश फैसिलिटीज़ मैंडेटरी है जहां 50 या 50 से ज्यादा एम्प्लई
52:38
एम्प्लाइज़ हैं। तो क्या होता है? जैसे आप सुबह ऑफिस आ रही हैं। मदर्स ऑफिस आ रही हैं तो अपने बच्चे को क्रश फैसिलिटी में
52:45
आपने छोड़ा ऑफिस में ही। आप अपना काम कर रहे हो। जाने के टाइम बच्चा ले गए अपने साथ। ऑलराइट। क्रश फैसिलिटीज़ में वुमेन को
52:52
चार बार एक दिन में विजिट करने का यह ऑप्शन होता है कि आप चार बार जाके यू कैन कीप अ चेक ऑन योर चाइल्ड। ओके? यह
53:00
इंपॉर्टेंट है। एंड 50 या 50 से ज्यादा एंप्लाइजज़ होती हैं। ऐसी फैसिलिटीज़ में एंप्लॉयर्स मस्ट प्रोवाइड विद अ क्रश
53:06
फैसिलिटी। अब प्रेगनेंसी या मैटरनिटी में क्या-क्या अलाउड नहीं है? पहली बात कोई भी एंप्लयर
53:13
डिस्क्रिमिनेट नहीं कर सकता बेस्ड ऑन मैटरनिटी लीव्स। आपको कभी भी डिसमिसल नहीं
53:20
दे सकते। आपको निकाल नहीं सकते जॉब से। अब देखो रियलिस्टिक सिनेरियो क्या मैं उसमें नहीं जा रहा लेकिन आपको निकाल नहीं सकते
53:26
बाय लॉ। ठीक है? कई बार ऐसा होता है जो रियलिस्टिक सिनेरियोस हैं वहां कहते हैं सामने से कि यार आप खुद ही रेज़िग्नेशन दे
53:34
दो। ऑलराइट क्योंकि 26 हफ्ते की बात है। बट बाय लॉ दे कैन नॉट डू ऑल ऑफ़ दिस। थर्ड
53:39
आपका अगर प्रमोशन होना है तो प्रमोशन रोक नहीं सकते ओनली ऑन द ग्राउंड ऑफ़ कि भाई ये तो मैटरनिटी लीव पे जा रहे हैं। ठीक है?
53:46
तो ये सब चीजें हैं जो नहीं कर सकता एंप्लयर आपके साथ। ऑलराइट? तो बड़ा सिंपल
53:53
सा आंसर है मैटरनिटी बेनिफिट का। क्या पहले तो 10 या 10 से ज्यादा जिस कंपनी में
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जिस एस्टैब्लिशमेंट में एंप्लाइजज़ हैं वहां पे ये एप्लीकेबल होता है और कौन सी
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वुमेन एंप्लाइजज़ को? जिन्होंने एटलीस्ट 80 डज़ ऑफ़ कंटीन्यूअस सर्विस डिलीवर की है विद
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इन 12 मंथ्स प्रेसिडेंट टू दी एक्सपेक्टेड डेट ऑफ़ डिलीवरी। फर्स्ट टू चाइल्ड के लिए
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26 वीक्स ऑफ़ पेड लीव है। सब्सिक्वेंट के लिए 12 वीक्स ऑफ़ पेड लीव है। अडॉप्शन ऑफ़ चाइल्ड अगर होता है 3 महीने से नीचे की ऐज
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का तो वापस 12 वीक्स। और अगर आप कमिशनिंग मदर है यानी इन केस ऑफ़ सिरगसी तभी भी 12 वीक्स है। मिसकैरज होता है तो सिक्स वीक्स
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की लीव मिल जाती है। और आपको इमीडिएटली आफ्टर डिलीवरी सिक्स वीक्स तक एंप्लयर काम
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रिज्यूम करने के लिए नहीं कह सकता। अगर प्रीनेटल पोस्ट नेटल केयर नहीं प्रोवाइड की है एंप्लयर के एंड से तो आपको एडिशनल
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मेडिकल बोनस दिया जा सकता है या मिलता ही है। एंड इसके साथ में 50 या 50 से ज्यादा
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अगर एंप्लाइजज़ हैं तो क्रश फैसिलिटीज़ देना एंप्लयर्स के लिए मस्ट है। इसी के साथ में
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कोई भी इलनेस अगर हो जाती है प्रेगनेंसी रिलेटेड तो वन मंथ की एडिशनल पेड लीव के
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लिए आप अप्लाई कर सकते हो। 26 वीक या 12 वी लीव की 12 वीक्स की लीव कब एप्लीकेबल
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होती है? फ्रॉम द डे व्हेन यू गिव द नोटिस ऑफ़ लीव। ऑलराइट। आपके अगेंस्ट प्रेगनेंसी
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की वजह से या मैटरनिटी लीव की वजह से डिस्क्रिमिनेशन आपके साथ नहीं किया जा सकता। प्रमोशन को नहीं रोका जा सकता। आपको
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कभी भी डिसमिस नहीं किया जा सकता। सिंपल सा आंसर है। गोंधड़ करके मत आना। इसमें ये
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कुछ-कुछ टाइमलाइंस हैं। बस ये याद रखो। बहुत सिंपल और बढ़िया आंसर है। अब दूसरे
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क्वेश्चन की तरफ बढ़ते हैं। अब यह कई लोगों ने क्वेश्चन पूछा था कि वैभव भाई ज़रा आप हमें अ जो कंट्रीब्यूशन रेट्स हैं
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यानी कि ईपीएफ में, एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड स्कीम में, अ इंश्योरेंस स्कीम में
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यानी कि एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस स्कीम में, ईएसआईएस और जो हमारे बाकी के
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कंट्रीब्यूशंस हैं ग्रेजुटी वगैरह उसमें आप प्लीज बताइए। तो मैं इन सबको क्लब करके बता रहा हूं। शॉर्ट नोट्स आए इसमें देखो
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इंडिविजुअल शॉर्ट नोट्स आ सकते हैं। तो मैं बता देता हूं। देखो जो एंप्लॉयमेंट एंप्लाइजज़ प्रोविडेंट फंड है उसमें पहली
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बात तो ये किसको एप्लीकेबल होता है? जिस ऑर्गेनाइजेशन में जिस एस्टैब्लिशमेंट में 20 या 20 से ज्यादा एंप्लाइजज़ हैं सिर्फ
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वही इसमें एलिजिबल होते हैं। ये सारे एंप्लाइजज़ पे एप्लीकेबल होता है ऐसी
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ऑर्गेनाइजेशन के। और 12% का जो है इसमें कंट्रीब्यूशन करना पड़ता है। 12% ऑफ दी
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एंप्लाइजस बेसिक वेज डियरनेस अलाउंस जिसे हम डीए कहते हैं। एंड आल्सो ऑफ योर
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रिटेनिंग अलाउंस। ऑलराइट लोग रिटेनिंग अलाउंस भूल जाते हैं बट रिटेनिंग अलाउंस याद रखना। तो ये तीन चीजों का 12%। ओके?
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कौन करता है 12% का कंट्रीब्यूशन? भाई दोनों करेंगे। एंप्लयर भी करेगा, एंप्लई भी करेगा। ठीक है? अब ईपीएफ में कवर
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क्या-क्या होता है? प्रोविडेंट फंड स्कीम कवर होती है, पेंशन स्कीम कवर होती है और डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम भी कवर
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होती है। ठीक है? तो बस इतना सा है इसमें। इसमें ज्यादा कुछ दिमाग नहीं लगाना है।
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शॉर्ट नोट्स इसमें आप आगे अपना कंटिन्यू कर सकते हो। अब हम आते हैं अ इसको हम कब
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हम इसको विथड्रॉ कर सकते हैं? तो विथड्रॉल के लिए एक तो रिटायरमेंट पे विथड्रॉल आप कर सकते हो अपनी ईपीएफ अकाउंट से। यानी कि
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जब आप रिटायर हो रहे हो, आप रेज़िग्नेशन दे रहे हो या आप सुपर एनुएशन की ऐज को रीच कर चुके हो यानी जिसके बाद आप काम नहीं कर
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सकते तब आप इसको विथड्रॉ कर सकते हो या ईपीएफ में से फंड्स को पार्शियली विथड्रॉ कर सकते हैं। किस काम के लिए? भाई अगर
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आपको होम लोन चुकाना है तो रीपेमेंट ऑफ़ होम लोन, मैरिज ऑफ़ चिल्ड्रन या खुद की
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शादी के लिए भी एजुकेशन फॉर ऑफ़ चिल्ड्रन या कोई मेडिकल इमरजेंसी घर में आ गई। उसके
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लिए या अगर आप 2 महीने या 2 महीने से ज्यादा टाइम के लिए अनइंप्लॉयड हो तभी भी
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आप पार्शियल विथड्रॉल्स कर सकते हैं। तो इतना ही है ईपीएफ में। ऑलराइट। अब हम आते
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हैं एंप्लई स्टेट इंश्योरेंस स्कीम में ईएसआईएस। तो ईएसआईएस के लिए कौन-कौन
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एलिजिबल है? देखो वही ऑर्गेनाइजेशंस एलिजिबल है जिसमें 10 या 10 से ज्यादा एंप्लाइजज़ हैं। लेकिन यहां पे एक सर्टन
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कैप है। यहां सारे एंप्लाइजज़ एलिजिबल नहीं होते हैं। अ एज़ पर व्हाट इज़ रिटन सी ये
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सिर्फ उन्हीं एंप्लाइजज़ को कवर करता है जिनकी मैक्सिमम जो वेज है, मैक्सिमम जो सैलरी है वो 21,000 है पर मंथ। सिर्फ वही
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इसमें कवर होते हैं। क्योंकि जहां तक मुझे लगता है ये शायद इस लॉजिक से किया हुआ है कि जो लोग थोड़ा जिन्हें जो थोड़ा कम अर्न
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करते हैं तो उन्हीं के लिए ये इंश्योरेंस स्कीम अवेलेबल होनी चाहिए क्योंकि बाकी लोग अफोर्ड कर पाए। पता नहीं ऐसा मुझे
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लगता है ये मेरा इंटरप्रिटेशन है। एंड हियर आई वुड लव टू बी इनकरेक्ट। नहीं तो
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बहुत प्रपोशियस हो जाएगा। तो यहां पे एंप्लयर कंट्रीब्यूशन और एंप्लई कंट्रीब्यूशन क्या होता है? एंप्लयर
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कंट्रीब्यूशन होता है 3.25% ऑफ़ दी एंप्लाइजज़ वेजेस सवा5% और एंप्लई
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कंट्रीब्यूशन सिर्फ 0.75% 0.75% होता है। ठीक है? अब यहां पे देखो जो ईएसआईएस है
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उसमें आपको कैश बेनिफिट्स मिलते हैं। मेटरनिटी बेनिफिट्स मिलते हैं। आपको मेडिकल बेनिफिट्स मिलते हैं। आपको
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डिसेबिलिटी बेनिफिट्स मिलते हैं। डिपेंडेंट्स को बेनिफिट्स मिलता है। तो यहां पे बेनिफिट्स क्या-क्या है? मेडिकल बेनिफिट्स दिए जाते हैं। डिपेंडेंट्स को
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यानी कि क्या? हॉस्पिटलाइजेशन है, आउटपेशेंट ट्रीटमेंट है, स्पेशलिस्ट सर्विज आपको मिलती हैं। मेडिकल
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इन्वेस्टिगेशंस होती हैं। तो ये सारे बेनिफिट्स मेडिकल बेनिफिट्स के अंडर कवर होता है ईएसआईएस में। सिकनेस बेनिफिट्स
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कैश कंपनसेशन मिलता है। लेकिन कब तक? देखो सर्टिफाइड सिकनेस अगर है तो कैश कंपनसेशन
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मिलता है अप टू 91 डज़ इन टू क्सक्यूटिव बेनिफिट पीरियड्स। अप टू 91 डेज इन टू
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क्सक्यूटिव बेनिफिट पीरियड्स। ऑलराइट। इसी के साथ में मैटरनिटी बेनिफिट्स अभी हमने
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करा था। मैटरनिटी बेनिफिट्स क्या-क्या होते हैं? तो आप लिख सकते हो। डिसेबल डिसेबलमेंट बेनिफिट्स भी हमने करें। वो भी
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इसी में कवर होता है। डिपेंडेंट बेनिफिट क्या होता है? अगेन हम कर चुके हैं। अगर इन केस आपकी डेथ हो जाती है। किसी की डेथ
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हो जाती है एंप्लॉयमेंट रिलेटेड इंजरी से तो उसके फ्यूनरल एक्सपेंसेस भी होते हैं। टोटल कवर नहीं होते। लमसम अमाउंट दिया
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जाता है और अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस भी देते हैं। ओके? लेकिन अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस में
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कैश बेनिफिट देते हैं कब तक? जब तक ड्यूरिंग द पीरियड ऑफ़ इनवॉलंटरी अनइंप्लॉयमेंट इनवॉलंटरी वंटरी नहीं
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इनवॉलंटरी अनइंप्लॉयमेंट ड्यू टू क्लोज़र ऑफ़ एस्टैब्लिशमेंट यानी कि एस्टैब्लिशमेंट बंद हो गई है। रिट्रेंचमेंट हो गई है।
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मतलब जरूरत नहीं है उतने लोगों की। अब तो आपको रिट्रेंच कर दिया, निकाल दिया गया है। परमानेंट इनवैलिडिटी अराइजिंग आउट ऑफ
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नॉन एंप्लॉयमेंट इंजरी। ऐसी चीजों में क्या होता है? अनइंप्लॉयमेंट अलाउंस दिए जाते हैं। तो
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इतना सा ही है ईएसआईएस में। ग्रेचुटी अब यहां थोड़ा मैथमेटिक्स आएगा। आई नो यू हेट
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इट बट स्टिल। अब ग्रेचुटी पेमेंट ऑफ़ ग्रेचुटी एक्ट 1972
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के अंडर आता है। तो ग्रेजुटी कैसे दी जाती है? ग्रेजुएटी के लिए अगेन जहां पे भी भाई
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10 या 10 से ज्यादा एंप्लाइजज़ होते हैं। ऐसी ऑर्गेनाइजेशन एलिजिबल है ग्रेचुटी देने के लिए। इसमें सिर्फ वही एंप्लाइजज़
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एलिजिबल है जिन्होंने मिनिमम फाइव इयर्स ऑफ कंटीन्यूअस सर्विस ऑफर करी है, कंप्लीट
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करी है एक ऑर्गेनाइजेशन में। मिनिमम फाइव इयर्स ऑफ़ कंटीन्यूअस सर्विस। ऑलराइट। तो
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इसमें कैलकुलेशन कैसे होता है? और पहली बात ग्रेचुटी है क्या यार? ग्रेजुटी एक
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तरीके से एक मॉनिटरी एकनॉलेजमेंट है टू दी एंप्लाइजज़ फॉर दिस सर्विस। एक तरीके से आप
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समझिए उनके लिए एक रिटायरमेंट का रिटायरमेंट के लिए और उनकी रिटायरमेंट लाइफ के लिए एक फाइनेंसियल सपोर्ट जैसा हो
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जाता है। ग्रेजुटी का जो कैलकुलेशन है इट इज़ लास्ट
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ड्रॉन सैलरी मल्टीप्लाई बाय 15
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/ 26 मल्टीप्लाई बाय योर नंबर ऑफ इयर्स ऑफ
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सर्विस। ठीक है? क्या लास्ट ड्रॉन सैलरी यानी आपकी
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लेटेस्ट सैलरी जो आपने ड्रॉ की थी मल्टीप्लाई बाय 15/ 26 * बाय नंबर ऑफ
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इयर्स ऑफ़ सर्विस। इतना ही है। उसके बेसिस पे ग्रेजुटी कैलकुलेट होती है। अभी एक
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मिसकंसेप्शन था लोगों को। उन्होंने कहा भाई ग्रेजुटी जो है वो 20 लाख से ज्यादा नहीं हो सकती। क्यों? हो सकती है। करेक्ट
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चीज यह है 20 लाख से ज्यादा की अगर आपको ग्रेचुटी मिलेगी तो वह टैक्सेबल होती है।
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20 लाख से नीचे की जो होती है वो नॉन टैक्सेबल होती है। बट 20 लाख से ऊपर की ग्रेचुटी मिली। भाई जिसके उतने नंबर ऑफ
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इयर्स ऑफ़ सर्विस है या उतनी मोटी सैलरी है 20 लाख के ऊपर जा रहा है तो क्या वो लेगा नहीं? 100% लेगा। लेकिन 20 लै के ऊपर जो
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होती है वो नॉन वो टैक्सेबल होती है। 20 लै के नीचे इज़ नॉन टैक्सेबल। इतना सही है।
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ठीक है? अब ग्रेचुटी कब-कब मिल सकती है? देखो, पहले तो जब आपने वंटरी रेज़िग्नेशन दे दिया तब आपको ग्रेचुटी मिल सकती है।
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नंबर वन अगर आपकी डिसेबलमेंट हो जाती है या डेथ हो जाती है अनफॉर्चूनेटली तब आपके
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जो नॉमिनीज़ हैं, लीगल एयर्स हैं उनको ग्रेचुटी का अमाउंट मिल जाएगा। और इसमें
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नॉमिनी बनाना जरूरी है। तो अगर आपकी डेथ होती है इन केस ऑफ़ डेथ तो पूरा ग्रेचुटी का अमाउंट नॉमिनीज़ को चला जाता है। लेकिन
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ग्रेचुटी फोरफीट भी की जा सकती है। यानी कैंसिल भी कर सकते हैं। कब? जब आप निहायत बदतमीज किस्म के इंसान हो जो आप हो तो
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यहां पे आपकी ग्रेचुिटी कैंसिल हो सकती है यानी कि फॉरफिट की जा सकती है। अगर आपका मिसकंडक्ट है या आपने कोई राइटियस
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राइटस यानी कि आरआई ओ वो राइटियसनेस नहीं राइटस यानी दंगे फसाद वाला कुछ काम कर
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दिया या डिसऑर्डरली कंडक्ट किया तो आपकी ग्रेचुटी कैंसिल हो सकती है। इतना सा ही
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है। ज्यादा लोड लेना नहीं। सो, यह थे कुछ बहुत ही इंपॉर्टेंट एंड हेवीली वेटेज वाले
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क्वेश्चंस लेबर लॉ में। एंड प्लीज काम शांत दिमाग से आप सब एग्जाम दीजिए। काम से
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काम करो। ठीक है? अ सी 13 एंड 15 मार्क्स के जो क्वेश्चंस होते हैं जिसे कहते हैं
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आंसर इन ब्रीफ। मैं यह रेकमेंड करूंगा कि उसमें जब आप यूनिवर्सिटी एग्जाम्स दे रहे
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हैं तो प्लीज सिक्स टू सेवन पेजेस आप लिखिए आइडियली क्योंकि उतना वैसे भी देखो
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उतना लेंथ चला जाता है। वैसे तो जितना लिखो उतना कम ही है लेकिन सिक्स टू सेवन इज़ आइडियल बिकॉज़ ऐसा भी नहीं हो कि आप
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बहुत ज्यादा लिख रहे हैं और आपका टाइम कम पड़ जाए आपको बाकी के क्वेश्चंस को अटेम्प्ट करने में क्योंकि 2 1/2 घंटे का
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ही टाइम होता है। सो छह से सात पेजेस आप लिख सकते हैं ईजीली लिख सकते हैं। मैं सजेस्ट करूंगा पॉइंटर्स के फ़ॉर्मेट में आप
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लिखिए और यह इंपॉर्टेंट फ़िगर्स एंड सेक्शंस ज़रूर लिखिएगा। उसी पे मार्क्स
1:04:36
ज़्यादा मिलते हैं। ऑलराइट? क्योंकि आप लॉ स्टूडेंट्स हैं ले मैन की तरह से कॉन्सेप्ट्स मत लिखिए। इट इज़ एक्सपेक्टेड
1:04:42
दैट यू राइट दीज़ सेक्शंस। एंड द रेलेवेंट प्रोविज़ंस एंड दीज़ फिगर्स। ऑलराइट? नाउ जो
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शॉर्ट नोट्स होते हैं, सिक्स मार्क्स के क्वेश्चंस होते हैं, सिचुएशन बेस्ड या शॉर्ट नोट्स, उसके लिए दो से चार पेज आप
1:04:57
भर सकते हो। तो दैट इज़ सब्जेक्टिवली डिपेंडेंट ऑन यू एंड आंसर इन वन सेंटेंस
1:05:02
तो पता ही है। मुझे बताने की जरूरत नहीं है। तो यही सारी चीजें हैं। सो दैट वाज़ ऑल
1:05:08
फॉर लेबर लॉ। नाउ इफ यू वांट टू बी एन एक्सपर्ट इन दीज़ लेबर, ट्रेड और कमर्शियल
1:05:15
लॉज़ और इंटरनेशनल कमर्शियल लॉज़ चेक आउट कमर्सन की वेबसाइट। भाई बहुत ही ज्यादा
1:05:21
ब्रिलियंट कोर्सर्सेस हमने डिजाइन करे हैं जो इंडिया में फर्स्ट एवर कोर्सर्सेस हैं। हमने ऐसे मिनी कोर्सर्सेस भी निकाले हैं।
1:05:27
और अगर आपको ज्यादा आलस आ रहा है पूरे कोर्सर्सेस करने में तो आप डीआईवाई कोर्स का ऑप्शन भी अवेल कर सकते हो। क्योंकि
1:05:33
डीआईवाई कोर्सर्सेस में आपको एक ऑप्शन ये मिलता है कि भले ही 10 अलग-अलग कोर्सर्सेस हैं और आपको कुछ-कुछ मॉड्यूल सबके पसंद आ
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रहे हैं। तो उसको क्लब करके आप अपना खुद का एक नया सर्टिफिकेशन या डिप्लोमा कोर्स
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बना सकते हो। तो चेक आउट कमर्स ऑन का वेबसाइट फॉर सच कोर्सेज। सो दैट आप एक नीश
1:05:50
में एक्सपर्टीज अपनी बना सको। और आजकल नीश एक्सपर्टीज होना, स्पेशलाइजेशन होना बहुत जरूरी है। क्योंकि कुछ लोग होते हैं
1:05:58
जिन्हें एक जनरलिस्ट या जनरल लॉयर ही बनना होता है। कुछ लोग होते हैं जिन्हें स्पेशलाइज्ड लॉयर होना होता है। तो ये आप
1:06:03
पे डिपेंड करता है। कॉमर्स सयन तो दोनों को खुले हाथों से स्वागत करता है। आइए
1:06:09
अपना कोर्स डिजाइन कर लो या तो प्री एकिस्टिंग कोर्सेस में से आप चूज़ कर सकते हैं। और अगर आपको हमारे ये नोट्स चाहिए
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कमसियन के हमने बड़े ही पॉइंटर वाइज ये सारे आंसर्स को हमने लिखा है ताकि आप
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क्विकली इन आंसर्स को एग्जाम के पहले रेफर कर सकें फटाक से पढ़ सकें। मैंने अपने
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एग्जाम्स के टाइम पे बड़े यूज़ किए हैं एंड कई लोगों ने पूछा भी है। तो यू कैन रीच आउट टू अस फॉर दीज़ नोट्स। हमारे वेबसाइट
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पे एक कांटेक्ट अस का सेक्शन है। वहां पे आपको डिटेल्स मिल जाएंगी। आपको कांटेक्ट नंबर मिल जाएगा। जस्ट ड्रॉप इन अ WhatsApp
1:06:44
और यू मे डायरेक्टली ड्रॉप इन एन ईमेल टू अस। सर्टेनली वी विल टेल यू व्हाट आर दी प्राइसेस फॉर द नोट्स। एंड फॉर द कोर्सेज
1:06:52
एज वेल। ज्यादा टेंशन मत लेना। भाई पॉकेट फ्रेंडली कोर्सेज भी हैं और कंप्लीट
1:06:57
कोर्सेज भी हैं। इसीलिए दिमाग में लोड मत लो। सोचने से कुछ नहीं होता। एक्शन करने
1:07:04
से होता है। गो टू द कमर्स ऑयन वेबसाइट। चेक फॉर दीज़ कोर्सेज। चेक फॉर दीज़ नोट्स।
1:07:10
एंड यू कैन ड्रॉप अस एन ईमेल। और WhatsApp एनीडे एनी टाइम 24/7 बस कॉल मत करना 24/7
1:07:20
ठीक है क्योंकि कॉल करने के जो आवर्स हैं यूजुअली वो हम बिनेस आवर्स में यानी कि
1:07:26
फ्रॉम मॉर्निंग 9 ओ क्लॉक टू इवनिंग 5 या 6 ओ क्लॉक आप बिंदास कॉल करिए कोई टेंशन नहीं है। वी आर हियर टू असिस्ट यू। वी आर
1:07:34
योर लॉजिकल बॉडीज। सो फील फ्री टू रीच आउट टू अस एंड सब्सक्राइब टू जस्ट बी लॉजिकल।
1:07:41
हिट द बेल आइकॉन फॉर मोर नोटिफिकेशंस एंड पढ़ लो शर्म करो पढ़ लो और यह वीडियो उन
1:07:47
लोगों के साथ जाकर शेयर करो लेक्चर उन लोगों के साथ शेयर करो जिनके फेल होने के आसार ज्यादा है। ठीक है? जाओ भागो, पढ़ो
1:07:55
यार। टेक केयर। हैव अ गुड डे। गुड बाय।

