Salient Features of Indian Constitution | #ParikshaJunction | #MuftShiksha | Part 4
Nov 12, 2024
Part 1: https://youtu.be/cOel4QMFBWo
Part 2: https://youtu.be/lHj3uyV3rpo
Part 3: https://youtu.be/Ft5gofyAsc0
Part 4: https://youtu.be/j9iHJy3qGpw
✔️ Salient Features of Indian Constitution
#salientfeaturesofindianconstitution Features of #ConstitutionofIndia : The #IndianConstitution opens with a preamble. The Constitution’s aims, goals, and fundamental precepts are outlined in the Preamble. These goals, which follow from the Preamble, have directly and indirectly influenced the Constitution’s key elements.
According to the nation’s requirements, our Constitution has incorporated the best elements of most major international constitutions. Despite including elements from nearly every Constitution in the world, India’s Constitution stands out from those of other nations due to a number of key characteristics...
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नमस्कार सभी को इस प्लेटफॉर्म पर सभी का हार्दिक स्वागत है और जैसे कि परीक्षा जंक्शन के इस प्लेटफॉर्म पर हम डेली
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पॉलिटिक के लेक्चर की बात करते हैं और हिस्ट्री की लेक्चर की बात करते हैं तो आज
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पॉलिटी के में साइलेंट फीचर्स ऑफ द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन की हम बात करेंगे और आज पार्ट फोर है तो घबराने वाली कोई बात नहीं
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है क्योंकि पार्ट थर्ड कंप्लीट हो चुका है जिसने भी कल का लेक्चर देखा होगा सभी ने
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पता होगा कि हम लेक्चर थर्ड में कहीं हद तक कांस्टिट्यूशन में फीचर्स में उस पॉइंट
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की तरफ आ गए थे जहां पे हम समाप्ति की बात करते हैं तो आज थ्री पॉइंट्स की हम बात करेंगे पार्ट फोर में और आगे चलेंगे इस
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इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन की तरफ देखो ये कॉन्स्टिट्यूशन के ऊपर एक थोट कल चैप्टर लास्ट है इसके अलावा जब हम कल लेक्चर
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स्टार्ट करेंगे तो आर्टिकल एक से स्टार्ट करेंगे जैसे कि इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन में मैंने आपको बताया था 25 पार्ट्स में
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डिवाइड है उसके अलावा यहां पर 12 शेड्यूल है और 395 आर्टिकल है तो इन पूरा मिला के
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देखें तो ये पूरा कांस्टिट्यूशन है जिसमें गवर्नमेंट का गवर्नेंस गवर्नमेंट का सिस्टम आपकी पॉलिटिकल सिस्टम कास्टि जम
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सबकी बात करेंगे कि कैसे यहां पर रिजर्वेशन को लेके भी काफी इशू रहता है कुछ रिजर्वेशन को लेके काफी सेंसिटिव
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मुद्दा है पॉलिटी एक ऐसा सब्जेक्ट है जो आपको ये बताएगा कि मैंने कल ऐसे एग्जांपल सेट किया था आपको एक कि आपके सामने या
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आपके पड़ोस में आपकी सोसाइटी में कोई ठेले लगाने वाला है ठेली लगाने वाला है वो बेचारा अपना रोजगार कमाता है डेली की इनकम
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कमाता है ताकि उसका घर चल सके लेकिन गवर्नमेंट नहीं तो सरकार के जो कर्मचारी
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हैं वह किसी ना किसी तरीके से अत्याचार करते हैं और अत्याचार इस प्रकार करते हैं कि उसकी रोजी रोटी तक चली जाती है तो क्या
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उस ठेली वाले को यह संविधान की समझ होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए क्योंकि पढ़ा
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लिखा व्यक्ति संविधान को जानता है आपने एक मूवी देखी होगी भीमराव अंबेडकर की एक मूवी थी मूवी का नाम मुझे एजेक्ट याद नहीं आ
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रहा उस दलित महिला के ऊपर जो अत्याचार किया जाता है वो किस प्रकार किया जाता है
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पुलिस के द्वारा यानी यह पुलिस का थर्ड डिग्री इस्तेमाल है क्या है थर्ड डिग्री इस्तेमाल तो संविधान हमको क्या करता है
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संविधान कोई हमको कुछ लोगों ने कहा कि संविधान हमको केवल दबा रहा है या संविधान
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हमको प्रेशराइज कर रहा है ऐसा कुछ भी नहीं है क्योंकि संविधान हमको सिर्फ इस भारत में नहीं अब पूरे अपी तो पूरे देश में अपी
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तो पूरे विश्व में हमको रहना सिखाता है हमको तरीके सिखाता है हमको सलीके सिखाता
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है तो संविधान को पढ़ने से पहले आपको संविधान की समझ होनी चाहिए और संविधान का
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तो आपको पता होना चाहिए कि कांस्टिट्यूशन की इंपॉर्टेंस कितनी है हमारी लाइफ में
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चलिए तो आज स्टार्ट करते हैं संविधान की विशेषताएं जैसा मैं बता रहा था और उसमें
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थ्री पॉइंट्स की हम बात करेंगे तो सभी डालेंगे संविधान की
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विशेषताएं संविधान की विशेषताएं और देखिए घबराने वाली कोई बात नहीं है थोड़ा सा
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लेंथी चैप्टर हो सकता है मैं मानता हूं और आज ही इसका का लास्ट डे है तो आज अच्छे से
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पढ़ लेते हैं एक बार इसको कि किस तरीके से हमारी विशेषताएं काम कर रही
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है आज मैं तीन फीचर्स की बात करूंगा केवल और तीन फीचर्स आपको यह बताए देंगे कि
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संविधान की विशेषताएं फिर आप एक बार शुरू से याद कीजिएगा कि सर ने शुरुआत में सबसे
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पहले क्या कराया था सबसे पहले मैंने ल सबसे लंबा लिखित संविधान कराया था उसके
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बाद मैंने कठोर और नरम की बात की थी कि हमारा संविधान कठोर कैसे है और सॉफ्ट कैसे
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ये दो तरीके काम कर रहे थे उसके बाद मैंने एकात्मक और संघात्मक कराया था फिर संसदीय
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प्रणाली कराई थी फिर मैंने आपातकालीन प्रावधान कराया था फिर मैंने फंडामेंटल राइट्स कराए थे फिर फंडामेंटल ड्यूटीज
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कराई थी ये सारे फीचर्स हैं और ये अपने आप में एक चैप्टर भी है ये सारे आप चैप्टर
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पढ़ने वाले हो यानी हम फंडामेंटल ड्यूटीज और फंडामेंटल ड्यूटी लगभग कांस्टिट्यूशन की थोट कल पार्ट को पढ़ते हैं और उसके साथ
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हम आर्टिकल को भी पढ़ा जाता है तो चलिए आज मैं सबसे पहले एक फीचर्स की बात करूंगा जो
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फीचर्स आपके सामने आने वाला है उसको गौर से देखिएगा एक
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बार देखिए तो संविधान की विशेषताओं में पहला फीचर्स मैं आपके सामने लिख रहा हूं
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यह है हमारी एकल नागरिकता एकल नागरिकता यानी सिंगल
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सिटीजनशिप और सिंगल सिटीजनशिप हमको यह बताएगी कि भारत में किस प्रकार की
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नागरिकता का प्रावधान है और आप किस तरीके से उस नागरिकता का फायदा उठा सकते हो ठीक
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है सेकंड फीचर्स की हम बात करते हैं सेकंड फीचर्स आपके सामने होगा फंडामेंटल
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ड्यूटीज फंडामेंटल ड्यूटीज यानी मूल कर्तव्य या उनको मौलिक कर्तव्य भी बोल
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सकते हैं इसके अलावा नेक्स्ट फीचर होगा आपके सामने सहकारी समिति कोऑपरेटिव
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कमिटीज सहकारी समिति कुछ लोग कहते हैं कि संविधान सर
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बहुत बड़ा है इसको कैसे याद करना है कैसे ट्रिक बतानी है देखो पहले आपको बता दूं मैं यहां पर रटा नहीं नहीं आया आपको मैं
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संविधान को रटा नहीं सकता क्योंकि इसमें ना मेरा अपमान है ना आपका अपमान है इसमें
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संविधान का अपमान है क्योंकि संविधान को अदि मैं ट्रिक से याद कराऊंगा या ट्रिक से रटांगा कुछ ट्रिक्स हैं जिनको मैं बताऊंगा
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अभी लेकिन सारा संविधान ट्रिक से पढ़ाना इंपॉसिबल माना जाता है और आप नहीं पढ़ा सकते कांस्टीट्यूशन एक कांसेप्चुअल
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सब्जेक्ट है जैसे कि अब मैं तीन फीचर्स की बात करूंगा आज आपके सामने इनकी डेफिनेशंस इनकी कांसेप्ट तो आप सभी को पता चल जाएगा
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कि ट्रिक काम नहीं कर सकती आप ट्रिक कितना कर लोगे यूपीएससी आईएएस की हम बात करें
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आईएएस के एग्जाम में यदि आप बैठे हो और प्री प्रीलिम्स आप दे रहे हो तो आप यह
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अपने आप पर विश्वास करके मत बैठना कि मुझे ट्रिक याद है तो मैं प्रिलिम्स क्वालीफाई कर जाऊंगा इंपॉसिबल आप ट्रिक आपकी धरी की
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धरी रह जाएंगी और और आप आपसे कोई आगे निकल जाएगा जो कांसेप्ट की लड़ाई लड़ रहा है वो
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आपसे निकल जाएगा और आप वहीं की वहीं रह जाओगे ट्रिक कब तक कर लोगे एक दिन दो दिन तीन दिन चार दिन एक हफ्ते के बाद आपको यह
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लगेगा कि ट्रिक तो किसी काम की ही नहीं है क्योंकि एक ट्रिक के बेसिस क्वेश्चन को आप एक ही जगह लागू कर सकते हो बाकी जगह आप
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यदि मैंने क्वेश्चन थोड़ा बहुत भी घुमा दिया ना तो आप उस ट्रिक को लागू नहीं कर सकते और ट्रिकों की सबसे बड़ी कमी यह होती
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है कि उसे कहां लागू करना है आपको यही नहीं पता होता लेकिन आजकल कुछ टीचर हैं जो ट्रिक से पढ़ाते भी हैं मैं उनकी बुराई
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नहीं कर रहा लेकिन फिर भी ट्रिक से ना पढ़ाकर कांसेप्ट तरीके से पढ़ाए जाए तो शायद बच्चा आज नहीं तो कब हमेशा जब तक वह
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पढ़ेगा तब तक उससे चीजें याद रहेंगी तो सिंगल सिटीजनशिप की मैं बात करूंगा आज एकल नागरिकता आप सभी को पता है
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जब हमारा कांस्टिट्यूशन बना था 1949 में 26 नवंबर 26 डे नवंबर 1949 को जब संविधान
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बना था तो उस हमारे संविधान में दो प्रकार के सिस्टम को एक्सेप्ट किया गया था एक तो
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था फेडरल सिस्टम और एक था एकात्मक जैसे यूनियन सिस्टम कहते हैं तो फेडरल एंड
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यूनियन सिस्टम संघीय जो व्यवस्था थी हमारे संविधान की वो यह कहती है
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कि यानी शक्तियों का बंटवारा यानी डिवाइड ऑफ द पावर पे काम करेगा हमारा संविधान
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जैसा कि मैंने कल बताया भी था कि राज्य सरकार राज्य स्तर पर काम कर रही है और केंद्र सरकार जो है वो केंद्रीय स्तर पर
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काम कर रही है और से शेड्यूल ऑफ द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन यह कहता है कि हमारे संविधान में कि सातवी अनुसूची में तीन
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विषयों का वर्णन दिया गया है पहला है संघ सूची दूसरा है राज्य सूची और तीसरा है
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कंकड लिस्ट यानी समवर्ती सूची समवर्ती सूची य वह सूची होती है जिस पर दोनों सरकारें कानून बना सकती है अपनी सहमति से
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जैसे कि न्यू एजुकेशन पॉलिसी 2020 यह एक ऐसा सब्जेक्ट है जो समवर्ती सूची का विषय
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है क्योंकि एजुकेशन अभी कुछ राज्य लड़ाई लड़ रहे हैं कि शिक्षा को स्टेट का विषय
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बनाया जाए ना कि कंकड लिस्ट का लेकिन केंद्र सरकार इस पर भी अड़ गई है केंद्र सरकार ने बोला है कि ऐसा नहीं हो सकता और
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जबकि मुख्यमंत्रियों का भी कहना है कि चीफ मिनिस्टर कह रहे हैं कि आप शिक्षा को स्टेट लिस्ट का विषय बना दीजिए क्यों बना
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दीजिए क्योंकि राज्य का मुख्यमंत्री ये जानता है कि स्टेट की एजुकेशन कैसी होनी
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चाहिए लोकल लैंग्वेज में होनी चाहिए या ट्रेडिशनल लैंग्वेज में होनी चाहिए या ऑफिशियल लैंग्वेज में होनी चाहिए क्योंकि
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वहां के रहने वाले लोग ही बता सकते हैं अब मैंने बताया था कि हमारे सि इंडिया के
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कॉन्स्टिट्यूशन सिस्टम में दो सिस्टम काम करते हैं पहला है फेडरल और दूसरा है एकात्मक लेकिन हमारे संविधान ने
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हमेशा सिंगल सिटीजनशिप को ही एक्सेप्ट किया है आप मुझे बताइए यदि कोई व्यक्ति आज
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राजस्थान से बिलोंग करता है कोई व्यक्ति आज महाराष्ट्र से बिलोंग करता है तो मैं उससे यह पूछूं कि आपकी सिटीजनशिप कहां की
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है तो सबसे पहले वो ये बोलेगा कि मैं भारत का नागरिक हूं वो यह नहीं बोलेगा कि मैं
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महाराष्ट्र का नागरिक हूं एग्री हो सभी आप यानी आज मेरे यदि वॉलेट में पॉकेट में जो
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भी आइडेंटिटी कार्ड पड़ा हुआ है वह आधार कार्ड है आधार कार्ड जो है यह मुझे
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वेरीफाई करता है कि मैं इंडिया का यानी भारत का नागरिक हूं सिटीजनशिप ऑफ इंडिया
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भारत की नागरिकता मेरे पास है यह मुझे प्रूफ का एक प्रमाण है एक सर्टिफिकेट है
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लेकिन आपने कभी यह नहीं सुना होगा कि मेरे पास महाराष्ट्र का भी है मेरे पास राजस्थान का भी है मेरे पास तमिलनाडु का
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भी है मेरे पास केरल का भी है मेरे पास गोवा का है मेरे पास जम्मू कश्मीर का
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लद्दाख का भी है ऐसा आपने कभी नहीं सुना होगा चाहे आप कश्मीर से कन्याकुमारी जाएं और चाहे आप गुजरात से अरुणाचल की तरफ जाए
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तो यह साबित करता है हमारा संविधान कि हमारे भारतीय संविधान में सिंगल सिटीजनशिप
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को एक्सेप्ट किया गया है स्वीकार किया गया है और सिंगल सिटीजनशिप की अवधारणा को
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ब्रिटेन के संविधान से अलिखित संविधान कहते हैं अनरिटन कांस्टिट्यूशन कहा जाता है वहां से इसको लिया गया है तो लिख सकते
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हैं आप कि भारतीय संविधान में इंडियन कांस्टिट्यूशन
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में या इन द इंडियन कांस्टिट्यूशन भारतीय संविधान
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में संघीय व्यवस्था फेडरल
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सिस्टम संघीय व्यवस्था लागू होने के बावजूद भी लागू होने के बावजूद
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भी लागू होने के बावजूद भी हमारे संविधान ने एकल नागरिकता को स्वीकार किया है हमारे
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संविधान ने
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एकल नागरिकता को स्वीकार किया
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है ना कि दौरी नागरिकता को ना कि डल सिटीजनशिप को
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ना कि दोहरी
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नागरिकता जैसे कोई व्यक्ति जैसे कि मैं राजस्थान से बिलोंग करता हूं यदि कोई यदि मेरा कलीग है वह महाराष्ट्र से बिलोंग
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करता है तो मैटर यह नहीं करता कि वह महाराष्ट्र से है मैं राजस्थान से हूं वह तो केवल आपकी पहचान है कि आपका वर्थ प्लेस
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क्या है ठीक है आप किस वंश से आते हो वह केवल पहचान है मैं केवल उसके तौर पर यह
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पूछ स कि आप कहां से बिलोंग करते हो तो मेरा कलीग मुझसे बोलेगा कि मैं महाराष्ट्र से बिलोंग करता हूं और मैं पुणे से आता
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हूं पुणे में मेरा वर्थ प्लेस है और मैं महाराष्ट्र से हूं तो यह केवल पहचान है अब
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मैं उससे यह नहीं पूछूंगा कि आप महाराष्ट्र का आइडेंटिटी कार्ड है क्या नहीं इससे यह साबित नहीं होता कि आप भारत
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की नागरिकता को सिद्ध करने में लगे हो चलिए ना कि दोहरी नागरिकता और सिंगल
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सिटीजनशिप लिख सकते हैं आप कि इस कांसेप्ट को यानी इस अवधारणा
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को इस अवधारणा को ब्रिटेन के कांस्टिट्यूशन से लिया गया है ब्रिटेन के
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संविधान से लिया गया है ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है एक
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बार एसएससी के जुलाई वाले एग्जाम में एसएससी सीजीएल के जुलाई वाले एग्जाम में
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ये क्वेश्चन पूछा गया था और ये इस तरीके से पूछा गया था कि सि भारतीय संविधान की
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सिंगल सिटीजनशिप के अवधारणा को यानी एकल नागरिकता की अवधारणा को किस विश्व के किस
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देश के संविधान से लिया गया है ऑप्शन ए ब्रिटेन ऑप्शन बी यूएस ऑप्शन सी कनाडा
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ऑप्शन डी रशिया तो आपका आंसर होना चाहिए था ब्रिटेन और कुछ लोगों ने ठीक भी किया
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कुछ लोगों ने गलत भी किया अब देखो जो डब्बा डोल है जो मूर्ख है आप उनको कितना
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भी पढ़ा लो उनका कुछ नहीं होना लेकिन जिन लोगों ने एक बार पढ़ लिया या वास्तव में
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कुछ चाहते हैं वो अपनी लाइफ से तो उनको एक बार पढ़ाना ही काफी होता है हां रिवीजन
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कराने की जिम्मेदारी टीचर की होती है लेकिन आपकी जिम्मेदारी भी बनती है कि एक बार रिवीजन कराए हुए चैप्टर का आप रिवीजन
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बार-बार करें ताकि आपको यह बेनिफिट मिल सके टीचर केवल एक बार रिवीजन करा सकता है
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आप सोच रहे हो कि टीचर आपके पीछे पीछे चलता रहे वो कभी नहीं हो सकता केवल गाइडेंस के तौर पर हम खड़े हैं और हमेशा
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खड़े रहेंगे आपके लिए तो यह कांसेप्ट था इस कांसेप्ट को याद रखना और सबसे बड़ा है कि यूपीएससी वालों
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के लिए क्वेश्चन जीएस ट में कैसे आ सकता है यह क्वेश्चन तो आएगा एसएससी में और एसएससी में इससे ज्यादा नहीं पूछेगा वह
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लेकिन यूपीएससी आईएएस के लिए वह क्या पूछ सकता है मैं एक बार क्वेश्चन पढ़ के सुना देता हूं
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देखिए क्वेश्चन पूछेगा कि भारतीय संविधान में सिंगल सिटीजनशिप का कांसेप्ट यानी एकर
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नागरिकता की जो अवधारणा है यह कहां तक भारत की अखंड और भारत की बंधुता को साबित कर सकती है
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यानी यह क्वेश्चन आएगा या आप कहां तक सहमत है कि भारत की अखंडता भारत की सिंगल
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सिटीजनशिप पर निर्भर करती है कृपया 50 शब्दों में आंसर लिखिए 15 अंक यानी 15
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नंबर का आपका क्वेश्चन होगा 50 शब्द आपको दिए जाएंगे और क्वेश्चन मैंने आपको बता दिए आप मुझे बताइए कि यदि हमारे इंडिया
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में सिंगल सीट सिंगल सिटीजनशिप काम कर रही है तो आप यह कैसे कह सकते हैं कि भारत
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हमारा एक सोवन है इंटीग्रिटी है कैसे कह सकते हैं य डेमोक्रेटिक है या रिपब्लिक है
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बताइए आप कैसे साबित करोगे इस चीज को एक बार सोचिए जरा और यह बताइए मुझे या यदि
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मैं लेक्चर के जब मैं ू पर डाला जाएगा लेक्चर तो आपको आप एक कमेंट करना होगा
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आपको बताना होगा कि किस तरीके से यह मैं क्वेश्चन पूछ रहा हूं और आपका आंसर किस तरीके से आना चाहिए हमारे इंडिया में आज
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सिंगल सिटीजनशिप काम कर रही है तो मैं यह कैसे साबित करूंगा कि भारत हमारा अखंड है
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इसको कोई नहीं तोड़ सकता देखिए इसके लिए छोटा सा कांसेप्ट काम करता
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है इसको मैं बता दूं एक बार और यह कांसेप्ट कहता है कि हमारे भारतीय संविधान
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की सिंगल सिटीजनशिप इसका अर्थ है कि भारत एक है
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यानी भारत एक है आप जो महाराष्ट्र जो राजस्थान तमिलनाडु करते रहते हैं ना ये
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एक्चुअली ये अलग-अलग भारत नहीं है मैं मानता हूं कि कास्टम का डिफरेंस हो सकता है मैं मान सकता हूं कि रिलीजन लोग
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वाइज डायवर्सिटी है कोई हिंदू है तो कोई मुसलमान है तो कोई ईसाई है सब तरीके किसी
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का जन्म कहीं हुआ तो किसी का जन्म कहीं और हुआ है लेकिन है तो वह भारत में ही है ना
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तो कहने का मतलब यह हुआ मेरा कि एकल
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नागरिकता एकल नागरिकता यह सिद्ध करती है यह प्रूफ करती है
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यह सिद्ध करती है
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कि कि भारत एक अखंड देश है भारत एक अखंड देश
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है और इस अखंड देश के सभी नागरिक चाहे जिनका जन्म कहीं और हुआ हो लेकिन वह भारत
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से ही आते हैं अखंड देश
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है और सभी व्यक्ति और सभी व्यक्ति बिना किसी भेदभाव
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के और सभी व्यक्ति बिना किसी भेदभाव
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के बिना किसी भेदभाव के भारत के नागरिक
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है जैसे कि आज आपकी दुबई की फ्लाइट है आप दिल्ली के आईजीआई से यानी इंदिरा गांधी
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इंटरनेशनल एयरपोर्ट से यहां से टेक ऑफ हुए और दुबई में सीधा लैंड हुए ठीक है दुबई के
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एयरपोर्ट पर जब आप जाते हैं अपना पासपोर्ट दिखाते हैं तो वहां पर यह लिखा नहीं होता
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कि आप मुंबई आप कहां से आए यह तो आपको पता है उनको पता ही होता है वो चेक भी करते
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हैं लेकिन आपने ये नहीं लिखा होता कि आपकी जाति है आपका धर्म है अच्छा ठीक है अच्छा
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भारत के आप हिंदू हो तो ठीक है आपकी एंट्री पहले हो सकती है अच्छा आप भारत के मुसलमान हो तो ठीक है आपकी एंट्री बाद में
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होगी ऐसा कोई सिस्टम नहीं हो बस डिपेंड करता है कि आप किस देश के हो
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यानी आप भारत के हो तो इससे ज्यादा एक्सप्लेनेशन इसका नहीं हो सकता और जो मैंने आपको बता दिया अब आते हैं फंडामेंटल
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ड्यूटीज शायद मैंने फंडामेंटल राइट्स करा दिए थे राइट जो संविधान के भाग तीन में और
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अनुच्छेद आते हैं 12 से लेकर 35 में अब बात करते हैं ड्यूटीज
17:53
की मूल कर्तव्य स मेरे हिसाब से ड्यूटी
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होगा जब लोग सुबह उठकर ऑफिस जाते हैं तो सबसे पहले यह कहते हैं कि ड्यूटी जाना
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है य ड्यूटी शब्द है क्या क्या आपको किसी भी चीज से बंड कर रहा है य क्या आपको जाना
18:11
ही है नहीं गए तो फिर या तो पाप पाप लग जाएगा या फिर आपकी नौकरी जा सकती है
18:17
ड्यूटी जा सकती है या फिर आपको निकाल दिया जाएगा तीन क्राइटेरिया हो सकते हैं हमारे
18:23
पास चलो ठीक है इसके ऊपर बात करते हैं देखो पहले हम ड्यूटी की बात करते हैं
18:29
ड्यूटी का मतलब एक रिस्पांसिबिलिटी हो तो ज्यादा अच्छा रहता है मेरे हिब से क्योंकि
18:34
ड्यूटी को जब तक आप ड्यूटी ही मानोगे तब तक वह शायद रिस्पांसिबिलिटी बन नहीं सकती
18:40
लेकिन हां जिस दिन आपने ड्यूटी को अपनी रिस्पांसिबिलिटी मान लिया उस दिन आप यह
18:45
समझ लीजिएगा कि उस दिन आप ड्यूटी वो ड्यूटी नहीं रहेगी फिर वो रिस्पांसिबिलिटी
18:51
रहेगी और जिस दिन आप उस जिम्मेदारी को नहीं करोगे आपको अंदर ही अंदर बहुत कुछ बुरा भी लगेगा और संविधान यही कहता
18:59
कि आप इसे ड्यूटी मत मानिए और मैं इसे ड्यूटी कहकर बच्चों को पढ़ाता भी नहीं हूं मैं इसे केवल यही कहकर पढ़ाता हूं कि आपकी
19:06
फंडामेंटल रिस्पांसिबिलिटी है यानी जिम्मेदारी है आपको करनी है यदि आप नहीं
19:12
करते हो तो कहीं हद तक आप अपने आप को बुरा पाते हो अपने आप को बुरा महसूस कराते हो
19:18
कैसे देखिए तो हमारे संविधान में मूल कर्तव्यों की जो जगह है वो एक्चुअली में
19:24
जब मूल संविधान 1949 में बना था तब उस समय इसकी जगह नहीं थी लेकिन फॉर्मर प्राइम
19:32
मिनिस्टर इंदिरा गांधी जो भारत की प्रधानमंत्री रही उन्होंने 42
19:37
कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट ऑफ 194 6 में इसको क्या
19:44
किया इसको जोड़ दिया गया 76 में इसको जोड़ा संविधान में लेकिन इसको संवैधानिक
19:51
नहीं बनाया क्यों नहीं बनाया इसके ऊपर भी रीजन है तो पहले इसकी जगह लिख लेते हैं कि
19:56
इसकी जगह है क्या तो इसका अर्थ लिखें पहले सभी इसका मीनिंग क्या हो सकता
20:02
है लेख संविधान के अनुसार संविधान के
20:12
अनुसार संविधान के अनुसार मूल
20:21
कर्तव्य देश की देश की एक वह जिम्मेदारी है
20:29
देश की एक वह जिम्मेदारी है रिस्पांसिबिलिटी है जिसे पूरा करना हर व्यक्ति का कर्तव्य
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है जिम्मेदारी है जिसे पूरा करना जिसे पूर्ण करना हर व्यक्ति का
20:47
दायित्व है जिसे पूर्ण करना प्रत्येक व्यक्ति
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का दायित्व
21:03
प्रत्येक व्यक्ति का एक दायित्व है यह तो हुआ मूल कर्तव्य का डेफिनेशन अब इसको
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इंदिरा गांधी सरकार ने जोड़ा गया था 42 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट ऑफ 1976 में जिस
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समय देश में इमरजेंसी लागू थी जिसको मिनी कॉन्स्टिट्यूशन भी कहा जाता
21:23
है लघु संविधान भी कहा जाता है इसको क्योंकि इंदिरा गांधी ने इस कांस्टिट्यूशन
21:28
अमेंडमेंट के माध्यम से संविधान में सबसे ज्यादा अमेंडमेंट किए थे इसलिए तो ये छोटा
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संविधान बन गया बड़े संविधान का छोटा रूप लघु संविधान जिसको कहा जाता है मिनी
21:41
कॉन्स्टिट्यूशन मिनी कांस्टिट्यूशन
21:48
तो सभी यहां तक सहमत है आप चलिए मैंने कल एक चलो छोटा सा अटके हटके
21:56
बात कर लेते हैं मैंने कल एक स्टोरी डाली थी तो बच्चों को काफी पसंद भी आई वो
22:02
स्टोरी आपको सुना देता हूं एक बार अ अपने स्टा प एक स्टोरी डाली थी मैंने और हम
22:08
डालते रहते हैं मतलब हमारे अंदर वो है कि जहां भी हम कुछ सोचते हैं वो हम डाल देते
22:14
हैं आप अभी सरकारी नौकरी की तैयारी में लगे हुए हैं या कोई भी आज का युवा हर अपने
22:22
करियर को पाने में लगा हुआ है चाहे वो डांसिंग से रिलेटेड हो चाहे वो एक्टिंग करियर हो चाहे वो एजुकेशन फील्ड में किसी
22:29
हद तक जाना हो या सरकारी नौकरी की तैयारी की बात हो किसी भी तरीके का कोई भी युवा
22:34
आज क्या किसी स्टार्टअप को लेके कोई अपना प्लान बना रहा हो क्योंकि सारे प्लान 22
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साल की उम्र से बन जाते हैं या 21 साल की उम्र से हर व्यक्ति ये डिसाइड कर लेता है कि मुझे क्या करना है बिजनेस करना है या
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फिर मुझे कोई स्टार्टअप छोटा-मोटा स्टार्टअप करना है या फिर मुझे कोई नौकरी करनी है चाहे प्राइवेट हो चाहे सरकारी हो
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या मुझे एक्टिंग में जाना है या मुझे बॉलीवुड में जाना है या मुझे स्पोर्ट्स में जाना है व सारी अपने क्राइटेरिया बना
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लेता है हर व्यक्ति अपने हिसाब से या मुझे टीचिंग प्रोफेशन में जाना है तो कुल मिलाकर जब युवा अपनी एक उम्र किसी चीज को
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पाने के लिए खर्च कर देता है तो उस पाई हुई चीज वाली व्यक्ति ने एक महसूस उस लमहे
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में यह महसूस किया और उसने बात कही बड़ी सुंदर सी बात बात थी कि जिंदगी
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जलाई है अपनी इस कदर जिंदगी जलाई है कुछ इस कदर अपनी कि अब राख पर बहस कैसी धुए पर
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तराज कैसा तो शायद इतना पढ़ने के बावजूद जब आप किसी करियर में किसी एक ऑप्शन को
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चूज कर लेते हैं और उसे पा लेते हैं तो आपको उस लमहे में यानी फुर्सत के लम्हो
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में यह एहसास होता है कि अपनी जवानी की एक उम्र मैंने खर्च
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की है किसी चीज पर और आखिर में फिर यह बात अपने मुंह सेब निकलती है तो फिर बहस नहीं
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होती और ना ही तराज होता है बस आदमी करते ही जाता है और करते करते उसका बुढ़ापा
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जाता है तो खैर बहुत अच्छी बात थी शायर जो
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थे ऐसी बातें आपको शद मोटिवेट भी कर सकती हैं लेकिन कुछ बधू भी है तो उनको
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डिमोटिवेट भी कर सकता है कि सर करना ही क्या क्या करेंगे यही तो उम्र होती है
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एंजॉय करने की और आप इसमें पूरा खपाने की बात कर रहे हैं अरे छोड़ो एंजॉय करने दो
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खैर अपना अपना पॉइंट ऑफ व्यू है मैं किसी को क्यों दखल इस चीज में भाई क्या मैं किसी से क्यों बोलू कि आप मेहनत करिए एक
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बार बोला जा सकता है प्रैक्टिकल हूं तो ज्यादा एग्जांपल दे सकता हूं यदि इमोशनल
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होकर बताऊंगा तो थोड़ा सा बहक जाऊंगा इतना ही कर सकता हूं मेरे पास तो यही ऑप्शन है
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लेकिन यदि सामने वाला नहीं मानता है तो फिर ज्यादा से फोर्स नहीं करना चाहिए चलिए खैर बहुत अच्छे लेकिन आप सभी
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लेक्चर लेते रहे अपना और जो भी आपका सपना है ड्रीम है गोल है जो आपने सेट कर रखा है
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उसको हर संभव तरीके से पाने की कोशिश करिए पहले ठीक है चाणक्य भी कहते हैं कि साम
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दाम दंड भेद यानी चार तरीके हैं जिससे आप
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अपनी हर सोची हुई चीज को पा सकते हो लेकिन एक बहुत बड़े विचारक हुए और उन्होंने एक
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बात कही हर एक व्यक्ति इस दुनिया का हर एक व्यक्ति जो वह चाहे वह कर सकता है ऐसा
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संभव नहीं है यदि आज मैं ये चाहूं कि मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाऊं तो मैं नहीं बन सकता
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कभी बताइए बन सकता हूं क्या आप एक बार सोच के देखिए यदि मैं
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चाहता हूं कि मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनू तो अकॉर्डिंग टू कांस्टिट्यूशन की भी बात कर लेते हैं और प्रैक्टिकल की भी बात
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कर लेते हैं कांस्टिट्यूशन तो यह कहता है कि भैया आप भारत के अमेरिका के ना
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राष्ट्रपति नहीं बन सकते कभी क्यों नहीं बन सकते क्योंकि मेरा जन्म अमेरिका में नहीं हुआ है
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अब बोलोगे सर यह कैसी बात कर रहे हो लेकिन आप तो विश्व के भाग हो एक नागरिक हो फर्क
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ये नहीं पड़ता अमेरिका का संविधान यह कहता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति वही व्यक्ति बन सकता है जिसका जन्म अमेरिका में हो लोग
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बनके दिखा दो चैलेंज करता हूं सभी को कि जो व्यक्ति भारत के नागरिक हैं वह अमेरिका के
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राष्ट्रपति बनक बता दे नहीं बन सकते आप जिसका जन्म अमेरिका में हुआ अब बोलोगे सर
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बराक ओबामा कैसे बने देखो बराक ओबामा कैसे बने वो एक अफ्रीकन अमेरिकन सिटीजनशिप के
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हैं अब बोलोगे अफ्रीकन कैसे आया जब अफ्रीका अंग्रेजों का गुलाम था तो उस समय अंग्रेज बराक ओबामा के
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फैमिली मेंबर्स को दास बनाकर अमेरिका में लेकर आए थे जब तक ओबामा का जन्म नहीं हुआ
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था और जब उनके माता-पिता अफ्रिका से दास बनकर अमेरिका में आ गए थे तभी ही अमेरिका
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की सर जमीन पर ओबामा का जन्म हुआ था तो इसलिए ओबामा एक मात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो
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अफ्रीकन अमेरिकन ब्लैक प्रेसिडेंट रहे हैं अमेरिका के उनका जन्म भी अमेरिका में ही
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हुआ है और अमेरिकन कांस्टिट्यूशन यह कहता है कि अमेरिका का राष्ट्रपति वही व्यक्ति
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बन सकता है या तो जिसने लॉ की पढ़ाई की हो या जो तीनों सेनाओं में से किसी एक सेवा
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में उसने अपनी ड्यूटी ी चाहे वो एयरफोर्स का हो चाहे वो नेवी का हो और चाहे वो
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आर्मी का हो तो हर व्यक्ति सब कुछ नहीं कर
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सकता तो 42 में जोड़ा गया था ड्यूटीज इसका अर्थ आप सभी को पता चल गया है और दूसरी
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बात इंदिरा गांधी सरकार में एक फॉरेन मिनिस्टर थे जिनका नाम था स्वर्ण
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सिंह इंदिरा गांधी ने अपने विदेश मंत्री स्वर्ण सिंह को यह ड्यूटी सौंपी और कहा कि
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मिनिस्टर साहब आप एक ऐसा चैप्टर बनाइए हमारे संविधान में जो लोगों को हमेशा यह
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याद दिलाता रहे कि देश की भी कुछ जिम्मेदारियां हैं जिन्हें पूर्ण करना हर
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व्यक्ति का दायित्व है हर व्यक्ति की रिस्पांसिबिलिटी है तो स्वर्ण सिंह समिति
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ने जिनके नाम पर य कमेटी बनाई गई उनका नाम था स्वर्ण सिंह समिति और स्वर्ण सिंह
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समिति की सिफारिश के आधार पर उनकी कान्फ्रेंस के आधार पर इसके 42
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कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट ऑफ 1976 में इसको जोड़ा गया तो आप लिख सकते हैं कि स्वर्ण
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सि समिति स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के
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आधार पर स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के आधार
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पर की सिफारिश के आधार
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पर स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के आधार पर इसे
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संविधान के भाग चार में संविधान का भाग 4 ए संविधान का
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भाग 4 ए तथा अनुच्छेद 51 ए जोड़ा
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गया तथा अनुच्छेद 51
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ए और 10 मूल कर जोड़े गए 10 मूल कर्तव्य
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जोड़े
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गए यानी हमारे जब संविधान बना था तो उस संविधान बनने के समय 1949 के संविधान में
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मूल कर्तव्य नहीं थे आप सभी को याद रखना है 1949 में यह नहीं थे लेकिन आज के
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संविधान में यह है और यह कब से है 19 76 से यह बिलोंग करते हैं 1976 से पहले मूल
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कर्तव्य हमारे संविधान में मौजूद नहीं थे तो आपसे क्वेश्चन कहां कहा से बन सकता है
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एक बार देख लेते हैं किसकी समिति की सिफारिश के आधार पर जोड़े गए स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश के आधार पर एक यह पूछा
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जाएगा संविधान के किस भाग में आते हैं एक यह पूछा जाएगा कौन सा अनुच्छेद आता है एक यह पूछा
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जाएगा और कितने ड्यूटी जोड़ी गई 10 मल कर्तव्य जोड़े गए थे हालांकि इंदिरा गांधी
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ने हालांकि स्वर्ण सिंह समिति ने आठ की बात की थी लेकिन इंदिरा गांधी तो थी अपनी मन की मालिक उन्होंने 10 कर दिए और किस
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संवैधानिक संशोधन से जोड़े गए एक यह क्वेश्चन आ सकता है उसके बाद क्वेश्चन यहां से आएगा कि कहां से लिए गए ब्रिटेन
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से लिए गए एक यह क्वेश्चन बन सकता है यहां से और उसके बाद बस यही बनेगा ठीक है और यूपीएससी
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वालों के लिए यहां से वो आंसर हिंट ले सकते हैं यह हिंट है फर
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यूपीएससी क्योंकि मीनिंग तो पूछा जा सकता है ना तो इसका मतलब यह है कि यहां से हिंट
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है यूपीएससी के आंसर राइटिंग की बाकी का जो पूरा मैटर है वो एक कॉमन मैटर है ठीक
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है तो अब बात करते हैं नेक्स्ट अच्छा यह बताइए मूल कर्तव्यों की हम बात कर रहे थे
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तो 10 मूल कर्तव्य जोड़े थे उस समय लेकिन आज कितने मूल कर्तव्य है हमारे यहां पे 11
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अब सर य 11 में कौन सा आ गया अटल बिहारी वाप गवर्नमेंट ने 86 कांस्टिट्यूशन
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अमेंडमेंट 2002 के माध्यम से एक और मूल कर्तव्य जोड़ा जिसका नाम था क्या था राइट
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टू एजुकेशन यानी 86 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट 2002 अटल बिहारी वाजपेई सरकार में किया
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गया यह संवैधानिक संशोधन कहता है कि छ से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क
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यानी शिक्षा दी जाएगी फ्री एजुकेशन टू ऑल
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सिस एंड 14 जज ऑफ चिल्ड्रन ओके तो लिख दीजिए
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आप पेज प लड़ के लिख सकते हैं चलो जगह तो बची नहीं है वैसे अब मूल कर्तव्य में आप
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यह भी ऐड कर देना मूल कर्तव्य लिखेंगे इंदिरा गांधी काल
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में इंदिरा गांधी काल में इंदिरा गांधी शासन
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में 10 मूल 10 मूल
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कर्तव्य जोड़े गए थे 10 मूल कर्तव्य जोड़े गए थे
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लेकिन लेकिन 86 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट ऑफ
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2002 में हमारे भारत के पूर्व और भारत रत्न
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प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेई और 86 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट
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2002 में अटल
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वाजपेई अटल वाजपेई जी ने अटल वाजपेई जी
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ने संविधान के भाग चर ए में संविधान
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के भाग 4 ए में एक और मूल कर्तव्य
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जोड़ा एक और मूल कर्तव्य
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जोड़ा एक और मूल कर्तव्य जोड़ा
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अर्थात अर्थात अब मूल कर्तव्यों की
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संख्या अर्थात अब मूल कर्तव्यों की
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संख्या 11 है कितनी है 11 तो एक बात याद रखना इस पर आप नोट डाउन भी कर सकते हो कि
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हमारे ड्यूटीज की संख्या कितनी है 11 उसके बात करें और कब जोड़ा गया था 86
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कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट अब इसको मैं शॉर्ट में लिखता हूं तो ऐसे
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लिखूंगा मूल कर्तव्य उसमें आएगा आपका
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86 कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट 2002 और यह किसम किया गया था यह किया गया
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था अटल बिहारी वाजपई सरकार में तो आप लिख सकते हैं कि हमारे प्राइम मिनिस्टर रहे थे
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अटल बिहारी
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वाजपेई अटल बिहारी वाजपेई उन्होंने क्या अमेंडमेंट जोड़ा था इसमें एक अमेंडमेंट था
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जिसका नाम था छ से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को वर्ष तक के
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सभी बच्चों को मुफ्त
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शिक्षा मुफ्त शिक्षा को अनिवार्य बनाया
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गया को अनिवार्य बनाया गया और आपको बता
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दूं यह हमारा एक फंडामेंटल राइट्स भी है तो लिख सकते हैं कि यह एक मूल अधिकार भी
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है यह एक मूल
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अधिकार भी है और किसमें आता है यह अभी भी स्थिति में देखें तो आर्टिकल 21 ए में
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आर्टिकल 21 ए में आता है समझे चलिए तो यह चीज थी मूल कर्तव्यों में अब टोटल मूल
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कर्तव्य देखें तो कितने हो गए 11 टोटल 11 बानी 12 ना न ना एक ज्यादा और
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ना एक कम चलिए तो अब चलते हैं लास्ट पॉइंट की तरफ और य चैप्टर आप फिनिश करते
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हैं लिख दीजिए कोऑपरेटिव कमिटीज सहकारी
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समितियां मुझे आप एक चीज बताएंगे कि आज हमारे भारत में कोऑपरेटिव कमिटीज का जो
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यूनियन मिनिस्टर है उनका नाम क्या है यानी आज हमारे भारत में सहकारी समितियों का देखरेख उनका
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संचालन उनका ऑपरेट ऑपरेट कौन करता है उनका नाम बता सकते हैं आप
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सभी कमेंट में देखिए सहकारी समितियों की देखरेख कौन करता है कोऑपरेटिव
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कमिटीज भारत के गृह मंत्री भारत के होम
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अफेयर्स मिनिस्टर अमित शाह सहकारी समितियों की देखरेख करते हैं यानी व
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सहकारिता मंत्री भी है कभी आपने न्यूज चैनल में देखा होगा जब अमित शाह स्पीच देते हैं तो उनके नीचे नेम प्लेट पर क्या
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लिखा आता है यूनियन ऑफ होम अफेयर्स एंड कोऑपरेटिव
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कमिटीज क्या लिखा आता है यूनियन होम मिनिस्टर ऑफ होम अफेयर्स एंड कोऑपरेटिव
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कमिटी यानी वह भारत के गृह मंत्री भी है तो भारत के सहकारिता मंत्री भी है जिनका
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नाम है अमित शाह तो सहकारी समितियों की बात करते हैं सहकारी समितियां देखो जैसे कि आपने
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कभी देखा होगा आप सभी दिल्ली से हैं तो अच्छी बात है और किसी जिले से भी है तो और
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अच्छी बात है मब है तो भारत से ही है सारे हां तो कुल मिलाकर बात यह है कि जब भी आपने अपने
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डिस्ट्रिक्ट में आजकल डेरी प्रोडक्ट को लेकर बहुत ज्यादा चीजें चल रही है जैसे कि
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डेरी प्रोडक्ट की बात करते हैं आप कभी दिल्ली में है तो दिल्ली शॉप पर जाते हैं और वहां कहते हैं कि भाई एक मिल्क का
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पैकेट दे दो या एक छाज का पैकेट दे दो यह सारे डेरी प्रोडक्ट है या घी का पैकेट दे
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दो या दही का पैकेट दे दो तो कुल मिलाकर जब आप मिल्क का एक पैकेट खरीदते हो आध ट
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का या एक लीटर का ठीक है तो उस पर कोई कंपनी का नाम लिखा आता है जैसे कि अमोल का
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नाम जैसे कि जयपुर में राजस्थान में चलती है सरस दिल्ली में मेरे हिसाब से अभी जहां
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तक मुझे पता चला है अमूल ज्यादा जहा चलता है तो यह क्या है यह डेरी कंपनी है और यह
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डेरी कंपनी क्या करती है कोऑपरेटिव कमिटीज का काम कर रही है जैसे कि मान लो बिस्किट
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बनाने की कोई कंपनी है जैसे कि पाले जीी ले लेते हैं चलो तो पाले जीी क्या है एक कोऑपरेटिव कमिटी है जैसे कि आंगनवाड़ी है
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आंगनवाड़ी क्या करता है जो निर्धन महिलाएं होती हैं या तो वो प्रेगनेंट है गर्भवती
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है तो इस तरीके की कुछ हेल्प कर देता है क्या पैसे की हेल्प कर देगा या कुछ
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प्रोटीन जो प्रोटीन मील होते हैं उनकी हेल्प कर देगा कुछ ऐसी बात है तो सहकारी
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समितियों का काम होता है कि समाज में यानी हमारी सोसाइटी में संसाधनों रिसोर्सेस को
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अवेलेबल कराना ज्यादा से ज्यादा रिसोर्सेस अवेलेबल कराती है और ये ये सहकारी
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समितियां लोगों की भलाई के बारे में ज्यादा सोचती है इनका काम होता है कि
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गवर्नमेंट इनको फंड करती है और उसी फंड से आपको सर्विस देते हैं और उन्हीं आपके
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पैसों से ये फिर टैक्स चुकाते हैं तो कोऑपरेटिव कमिटी हमारे इंडिया में एक बड़ी
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सीरीज के तौर पर काम कर रही है समझ गए इसका मैंने आपको लाइव एग्जांपल भी दे दिया है अमूल प्रोडक्ट हुए या फिर पाली जीी
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वाला कोई बिस्किट का पैकेट हुआ या फिर जयपुर से या राजस्थान से बात करें जितना मैं रह चुका हूं तो वहां पर मैंने सरस का
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देखा था सरस डेरी प्रोडक्ट बिकता है वहां पर ठीक है और वहां पर लिखा होता है कि
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जयपुर जैसे मैंने देखा जयपुर दुग्ध जिला सहकारी
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समिति ठीक है इस प्रकार से वहां के ककल चलते हैं वहां के ककल मिल्क की सप्लाई
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करते हैं ऐसी कुछ बातें हैं तो सहकारी समिति तो लिखेंगे
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इसे कांस्टिट्यूशन में यानी संविधान में
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संविधान में इन्हें 97 कॉन्स्टिट्यूशन
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अमेंडमेंट 2011 97 कॉन्स्टिट्यूशन अमेंडमेंट
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2011 में में संवैधानिक दर्जा दिया गया पहले
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इनको संवैधानिक दर्जा नहीं था 2011 से पहले संवैधानिक दर्जा दिया
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गया दर्जा दिया गया और आज यह संविधान के भाग किसम मिलती
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हैं संविधान के एक नए भाग में संविधान के
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एक नए भाग में कौन सा ना बी में जोड़ा
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गया ना बी में जोड़ा
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गया अच्छा ना ए में क्या आता है ना ए में आता है
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लोकल गवर्नमेंट मैंने कल बताया था आपको सॉरी परसों बताया था कि 73 और 74
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कांस्टिट्यूशन अमेंडमेंट ऑफ 1992 यह कहता है कि हमने लोकल सेल्फ गवर्नमेंट बॉडी को
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एक संवैधानिक दर्जा दे दिया है और आज वह कांस्टिट्यूशन के पार्ट नाइन और ना ए में
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उनको जोड़ा गया है तो नाइन में आता है रूलर गवर्नमेंट क्या आती है रूलर
41:23
गवर्नमेंट जिसे सरपंच आप कहते हो ठीक है और पंचायत समिति आप कहते हो पंचायत कमेटी जो
41:31
सरपंच की बात करते हो वो रूरल गवर्नमेंट का हिस्सा है और जो संविधान के पार्ट नाना में आता है एक बात होती है ना ए की बात
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जिसे 74 अमेंडमेंट से जोड़ा गया था 1992 में और आज हमारी संविधान की 12थ शेड्यूल
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में इसको शामिल किया गया है तो जो ना ए है यह अर्बन गवर्नमेंट की बात करता है जैसे
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कि कलेक्टर की बात करता है जो आप इसे आईएएस कहते हैं कलेक्टर ये अर्बन गवर्नमेंट का हिस्सा है चेयरमैन
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ओके चलिए तो ना बी में जोड़ा गया और आर्टिकल की हम बात करेंगे तो आर्टिकल लिख
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सकते हैं आप इसका आर्टिकल आता है 243 ज ए से लेके 243 जटी तक आता है 243 ज से लेकर
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243 जटी तक आता है यह आर्टिकल आपके सामने है और और कोपरेटिव कमेटी केवल हमें
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संविधान के इसी भाग में नहीं मिलते देखने को यह संविधान के भाग तीन में भी मिलते हैं मूल अधिकार
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भाग तीन में मिलते हैं और आर्टिकल आपके सामने होगा 191 जीी जब मैं आपको पढ़ाऊंगा तब इसका
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एक्सप्लेनेशन और अच्छे से करूंगा सहकारी समितियां संविधान का भाग तीन भी पढ़ाऊंगा संविधान का भाग नाइन भी पढ़ाऊंगा तो
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आर्टिकल 19 वजी और यह संविधान के भाग चार में भी मिलती है जिसे आप डीपीएसपी कहते
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हो और आर्टिकल आपके सामने है 43 सी में जाके देख लीजिएगा 43 सी
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आर्टिकल 191 जीी और 243 ज एच से लेकर 243 जटी यह पूरा
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सहकारी समितियों का संवैधानिक भाग है कांस्टिट्यूशन पार्ट्स कह सकते हैं इसको
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या डिवाइड कह सकते हैं चलिए तो कोऑपरेटिव कमिटी क्या काम करती है यह समाज में
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रिसोर्सेस अवेलेबल कराती है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उसका बेनिफिट उठा सके जैसे
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कि डेरी प्रोडक्ट्स और भी और भी हो सकते हैं जैसे कि मान लो किसी ने एजुकेशन को लेकर फंड करना है अब
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एजुकेशन है अब मान लो एक स्कूल चल रहा है एक स्कूल है दसवीं क्लास तक के बच्चे पढ़ रहे हैं जैसे कि मिडडे मील स्कूलों में
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बच्चों को भोजन खिला दिया जैसे कि आज चावल बनने वाले हैं भोजन में तो किसी व्यक्ति
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ने फंड किया और उससे चावल बनाए गए सभी बच्चों के लिए मतलब हर दोपहर 12 बजे जो
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मिड्डी मील वाली स्कीम जो है वो कोऑपरेटिव कमिटीज में आती है
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ओके चलिए तो तीनों फीचर्स आपके हो चुके हैं आप सभी याद रखना और रिवीजन के तौर पर
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मैं आपको बता दूं कि हमारे कांस्टिट्यूशन के जो क्रिटिसिजम है यानी आलोचक करता है
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उन्होंने हमेशा संविधान का आलोचना ही की है जैसे कि श्री एन निवासन हुए श्री एन
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निवासन यह कहते हैं कि हमारा संविधान जो है यह 1935 का एक कार्बन कॉपी है कुछ लोग
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इसे हच पोच का कांस्टिट्यूशन भी कहते हैं और कुछ लोग इसे एडवोकेट्स हेवन के नाम से
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भी जानते हैं पैराडाइस के भी नाम से जानते हैं वकीलों का स्वर्ग और इस कथन को कहने
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वाले कौन थे कांस्टिट्यूशन इज एडवोकेट पैराडाइज वह यह कहते हैं इनका
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नाम है सर आइवर जेनिंग्स चलिए तो यह चैप्टर अब फिनिश होता है और फीचर्स अब
44:50
कंप्लीट हो चुके हैं आपके ठीक है और पीडीएफ को प्राप्त करने के लिए पीडीएफ को लेने के
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लिए आप परीक्षा जंक्शन के जितने भी प् सोशल प्लेटफार्म है चाहे वो लिंकडन है
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चाहे वो फ है चाहे वो ा है चाहे वो ू है सभी पर जाकर फॉलो कर ले ताकि पीडीएफ आपको
45:09
बाकायदा मिल सके लेक्चर के साथ तो कि लेक्चर को लेने से ज्यादा बेहतर है उसकी
45:16
पीडीएफ को ले लेना मतलब लेक्चर भी लेना है लेक्चर लेने के बाद तब आपको पीडीएफ
45:22
ऑटोमेटिक वहां मिल जाएगी तो चलिए फिर मिलते हैं आपसे
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