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Fundamental Rights, Directive Principles and Fundamental Duties By Praveen Sir on #ParikshaJunction
Nov 12, 2024
For the proper working of the country’s democratic system, the Constitution of India has provided specific provisions to the citizens and state. The Fundamental Rights are provided in Part III of the Constitution as the essential tool for safeguarding the rights and lives of the citizens. Part IV of the Constitution gives the #DirectivePrinciples of State policies. Provisions in this part provide the state with the directions to form policies and laws. Finally, Part IVA of the Constitution provides #FundamentalDuties for the people of India. These duties serve as a reminder for the people of their responsibilities towards the country.
Fundamental Rights
#Fundamentalrights are given in Part III of the Indian Constitution from #Articles12 to #Article35 They are an essential feature of the #IndianConstitution. These rights are necessary for the peaceful and dignified existence of the country’s citizens. The Indian Constitution that deals with the people’s fundamental rights are often described as the Magna Carta of the Indian Constitution.
Fundamental rights are called fundamental because the Constitution guarantees them as its fundamental laws. The state cannot take away these rights from any individual. That said, there can be certain limitations to these rights. The Constitution of the United States inspires the Fundamental Rights in the Indian Constitution.
The Fundamental Rights given by the Indian Constitution can be classified as:
Right to Equality
The Fundamental Rights from Articles 14 to 18 deal with the right to equality. These rights ensure that everyone is treated equally without discrimination and equal employment opportunities.
Right to Freedom / #righttofreedom
The rights from Articles 19 to 22 touch upon the concept of the right to freedom. Provisions in these articles deal with different kinds of personal freedom, choices, and dignity.
Article 19 gives the freedom of six rights that include the right to free speech and expression, freedom of assembly, freedom of forming an association, freedom of movement, freedom of residence, and freedom of choosing any profession.
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अच्छा ठीक है
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नमस्कार दोस्तों परीक्षा जंक्शन प्लेटफार्म पर आप लोगों का बहुत-बहुत स्वागत है इस वीडियो को लाइक करें शेयर
0:56
करें जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके अपने दोस्तों के बीच शेयर करें और क्लास से डायरेक्ट जुड़े ठीक अभी हम लोग पॉलिटी की
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क्लास अभी चल रही है और जिस कड़ी में पिछले दिनों फंडामेंटल लाइट हो चुका है आज हम लोग डीपीएसपी अर्थात ड डायरेक्टिव
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प्रिंसिपल ऑफ स्टेट पॉलिसी आज पढ़ेंगे और इसका और आज इसी संदर्भ में देखते हैं कि
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डीपीएसपी में क्याक है लोग इसका या स्टेट हमें इसके तहत क्या-क्या लाभ देता है लोग
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भारत के नागरिक इसका लाभ लेकर क्या-क्या करते हैं तो आते हैं आज डीपीएसपी के बारे
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में जानते हैं डीपी
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एसपी डायरेक्टिव प्रिंसिपल ऑफ स्टेट पॉलिसी यह भाग चार में पार्ट फोर
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में पार्ट फोर में है और यह
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आर्टिकल 36 से 51 तक यह पार्ट फोर में है और
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आर्टिकल 36 से 51 तक है 36 से 51 तक किसकी
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बात की गई है डीपीएसपी की बात की गई है थोड़ा इसके बैकग्राउंड में चले जब भारत
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आजाद हुआ था और जब संविधान निर्माण की प्रक्रिया चल रही थी तो उस पर एक तेज
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बहादुर सप कमेटी की स्थापना की गई थी कि भारत के नागरिकों को कौन-कौन से अधिकार
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दिए जाए तो तेज बहादुर सप्रू ने इस से चकि
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डीपीएसपी भी फंडामेंटल राइट का ही पार्ट था तो लेकिन उन्होंने इसे दो पार्ट में
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बांट दिया एक जो तुरंत इफोर्स किया
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जाए तुरंत इफोर्स किया जाए एक बाद में राज्यों की इच्छा पर दे दिया गया और दूसरा
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पहला तुरंत इफोर्स किया जाए दूसरा कि राज्यों की इच्छा पर छोड़ दिया गया
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राज्यों की इच्छा पर राज्यों की इच्छा पर क्यों छोड़ा
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गया कि अगर हम सारे राइट्स को तुरंत इफोर्स कर देंगे तो उन राइट्स को इफोर्स
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करने के लिए बहुत सारे रिसोर्सेस की जरूरत पड़ेगी अगर इफोर्स करते हैं क्रियान्वित
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करते हैं तो क्रियान्वयन के लिए बहुत सारे रिसोर्सेस की जरूरत थी और भारत तुरंत आजाद
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ही हुआ था वो गरीबी से बेकारी से बीमारी से इससे तो जूझ ही रहा था और नवजात
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लोकतंत्र था उस लोकतंत्र के तहत हम अपने नागरिकों को बहुत सारे अधिकार दे रहे थे
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जिससे वह अपना सर्वांगी संपूर्ण विकास कर सके तो इस राइट्स के तहत अगर हम पूरा
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अधिकार देते तो पूरे अधिकार को इंप्लीमेंट करने के लिए जितने रिसोर्सेस की जरूरत थी
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उतना हम नहीं कर पाते यह हमारे पास रिसोर्सेस नहीं थे तो इसे दो पार्ट में तोड़ दिया गया कि कुछ अधिकार को तुरंत
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उपलब्ध कराया जाए कुछ अधिकार को तुरंत उपलब्ध कराया जाए
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कुछ अधिकार
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को तुरंत क्योंकि कुछ अधिकार को इंप्लीमेंट
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करने के लिए हमारे पास रिसोर्सेस थे बाकी बाद में राज्यों की अर्थात राज्य जैसे
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जैसे सक्षम होता जाएगा राज्य के पास जैसे जैसे रिसोर्सेस बढ़ते जाएंगे वैसे वैसे
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राज्य क्या करेगा अ अधिकारों को भी इंप्लीमेंट करते जाएगा अन अधिकारों को
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भी अन अधिकारों को भी को
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भी इंप्लीमेंट करते जाएगा
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इंप्लीमेंट करते जाएगा
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अब तेज बहार सपू का ये कहना था इसके पश्चात संविधान सभा के जो सलाहकार थे बी
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एन रा उन्होंने भी संविधान सभा को यह सलाह दिया कि जो राइट्स है राइट्स को दो
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पार्ट्स में तोड़ दिया जाए एक पार्ट्स को तुरंत इंप्लीमेंट किया जाए और एक पार्ट को
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राज्यों की इच्छा पर छोड़ दिया जाए क्योंकि एक बार भी सारे प सारे राइट्स को
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इंप्लीमेंट करेंगे तो हमें उस इंप्लीमेंटेशन के लिए जो रिसोर्सेस जो
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इंस्ट्रूमेंट की जरूरत थी वो चीज हमारे पास उपलब्ध नहीं थी तो संविधान सभा के
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सलाहकार बी एन राव ने संविधान सभा को जो सलाह दिया कि इसे दो पार्ट में बांट दिया
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जाए एक फंडामेंटल राइट के रूप में इसे तुरंत लागू किया जाए और एक डीपीएसपी के रूप में इसमें राज्य जो सक्षम होते जाएगा
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त्यों त्यों वह इसे अप विधि बनाने के दरमियान इन चीजों को लागू करते जाएगा
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संविधान सभा ने बीएन राव की सलाह को मान लिया और इसे संविधान में जगह दिया तो हमने
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इसका इतिहास जान लिया ठीक दूसरी तरफ देखते हैं कि डीपीएसपी की प्रेरणा हमें कहां से
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मिली इसकी प्रेरणा हमें कहां से मिली तो इसकी प्रेरणा हमें आयरिश संविधान
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से मिली आयरिश संविधान से
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मिली अर्थात हमने डीपीएसपी को हमने डीपीएसपी को आयरलैंड के संविधान से लिया
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हालांकि इसकी छाप 1935 के एक्ट में भी है लेकिन हमने इसे कहां से लिया आयरलैंड के
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संविधान से लिया तो डीपीएसपी की चर्चा किस आर्टिकल के तहत की गई है आर्टिकल 36 से 51
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तक अब हम लोग एक एक करके देखेंगे कि आर्टिकल 36 में क्या है आर्टिकल 37 में
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क्या है और उसका देखते चलते हैं और उन चीजों को समझते चलते हैं कि आखिर संविधान
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सभा ने किसकिस आर्टिकल में किन किन चीजों का प्रावधान किया था आगे बढ़ते हैं
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गुड इवनिंग गुड इवनिंग
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प्रियंका आते हैं आर्टिकल 36 के
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तहत आर्टिकल 36 इसमें राज्य की परिभाषा दी
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गई राज्य स्टेट की परिभाषा दी
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गई की परिभाषा अब राज्य किसे कहते
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हैं राज्य किसे कहते हैं आर्टिकल 36 के तहत राज्य की परिभाषा दी गया तो राज्य
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कहते किसे हैं जो हमें ऑर्डर देता है जो
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हमें ऑर्डर देता है ऑर्डर देता
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है भारतीय संविधान के तहत किन किन इंस्टिट्यूट अर्थात राज्य एक ऐसा
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इंस्टिट्यूशन है जो हमें ऑर्डर देता है तो कांस्टिट्यूशन के अकॉर्डिंग हमारे संविधान
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में किन किन इंस्टिट्यूशन को राज्य का दर्जा दिया गया है तो इसके तहत देखते हैं
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हम [संगीत] कि इंडियन पार्लियामेंट इंडियन
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पार्लियामेंट स्टेट लेजिस्लेटर
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स्टेट
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लेजिसलेच्योर
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अदर अथॉरिटी
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अब यहां पर इंडियन पार्लियामेंट के तहत देखते हैं कि इंडियन पार्लियामेंट क्या करता है कानून का निर्माण करता है कानून
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का निर्माण करने के बाद एग्जीक्यूटिव क्या करती है उसे इंप्लीमेंट करती है तो यहां
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पर इंडियन पार्लियामेंट एंड एक्जीक्यूटिव को स्टेट का दर्जा दिया गया है दूसरी तरफ राज्यों के लेजिस्लेटर को जो कानूनों का
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निर्माण करती है और वहां की एक्यूट उ से इंप्लीमेंट करती है तो स्टेट ले स्टेट
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लेजिस्लेटर को दिया गया है तीसरा है लोकल सेल्फ गवर्नमेंट इंडिया के इंडिया में एक
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साथ हमारे हमारे ऊपर तीन संस्थाएं शासन करती है सनल की स्टेट की एवं लोकल पंचायती
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राज तो पंचायती राज को भी अपने क्षेत्राधिकार में कानून बनाने का और कानून को इंप्लीमेंट करने का हक और अधिकार
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कांस्टिट्यूशन ने दिया है यह भी स्टेट के लेवल में आती है और कुछ ऐसी संस्थाएं होती
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है कुछ ऐसे ऑर्गेनाइजेशन होते हैं जो स्पेशलाइज होते हैं तो पार्लियामेंट क्या करती है
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एक कच्चा खाका बनाकर उन्हें कहती आप अपने क्षेत्राधिकार में खुद कानून का निर्माण
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कीजिए उसे इंप्लीमेंट कीजिए अर्थात स्टेट का दर्जा उन्हें भी मिलता है लेकिन
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संप्रभु शक्ति अर्थात सोटी का वह प्रयोग नहीं कर सकते तो इसमें अन अदर अथॉरिटी में
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आप उदाहरण ले सकते हैं एयरपोर्ट अथॉरिटी
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एयरपोर्ट एयरपोर्ट अथॉरिटी
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ये एनी अदर अथॉरिटी में आया इसे भी स्टेट का दर्जा मिला हुआ है तो आर्टिकल 36 के
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तहत राज्य स्टेट का डेफिनेशन दिया गया है डेफिनेशन के तहत हमने देखा कि चार मसे
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इंस्टिट्यूशन हैं जिनको स्टेट का दर्जा दिया गया है कौन-कौन है इंडियन पार्लियामेंट स्टेट लेजिस्लेटर लोकल सेल्फ
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गवर्नमेंट एंड एनी अदर अथॉरिटी अन्य प्राधिकारी अर्थात जिन्हें हमारे
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पार्लियामेंट ने जिनको एक कच्चा खाका बनाकर कहा कि आप अपने क्षेत्राधिकार में
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कानून का कानून बनाइए उसे इंप्लीमेंट भी करिए लेकिन आप संप्रभु शक्ति का प्रयोग
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नहीं कर सकते हैं अब आगे बढ़ते हैं आर्ट की 37 की
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तरफ आर्टिकल
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37 आर्टिकल 37 में कहा गया है कि डीपीएसपी को
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डीपीएसपी को इंप्लीमेंट करने के लिए क्या इंप्लीमेंट करने के लिए राज्य बाध्य नहीं
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है यहां पर इसे इंप्लीमेंट करने के लिए
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इंप्लीमेंट करने के
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लिए राज बाध्य
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नहीं है दूसरा इसमें न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर
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सकती अर्थात न्यायालय इसे चाहे कि हम इफोर्स करवा दे तो इस न्यायालय को हक और अधिकार कांस्टिट्यूशन ने नहीं दिया है तो
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इसमें न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकती
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न्यायालय हस्तक्षेप
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नहीं कर सकती
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तीसरा राज्य जज सक्षम होता जाएगा अर्थात राज के पास सक्षम का मतलब कि उनके पास जो
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जो रिसोर्सेस बढ़ते जाएंगे ों तो क्या करेगा विधि निर्माण के दरमियान जो
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डीपीएसवी में जिन चीजों की चर्चा की गई है तो विधि निर्माण के दरमियान उन चीजों को उसमें शामिल करते जाएगा क्या करेगा कि
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राज्य जब सक्षम हो जाएगा राज्य अपनी सक्षम के
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अनुसार अपने सक्षम के
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अनुसार अनुसार विधि बनाने के
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दरमियान विधि बनाने के
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दरमियान दरमियान डीपीएसपी में उल्लेखित
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डीपीएसपी में उल्लेखित तत्त्वों को शामिल करता जाएगा
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तत्वों को
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शामिल करता जाएगा ठीक आर्टिकल 37 के तहत क्या है
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राज्य बाध्य नहीं है न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता रा तीसरा कि राज
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जोज अच्छी स्थिति में आता जाएगा जो जो सक्षम होता जाएगा त्यों त्य व विधि विधि
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बनाने के या विधि निर्माण के दरमियान इन चीजों को उसमें शामिल करता जाएगा यह आपका
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आर्टिकल 37 कहता है आर्टिकल 38 क्या कहता
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है आर्टिकल
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38 आर्टिकल 38 कहता है कि लोक
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कल्याण लोक कल्याणकारी राज्य बनने के लिए या लोक कल्याण कार्य करने के लिए राज्य
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क्या करेगा एक सामाजिक व्यवस्था बनाएगा
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राज्य लोक
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कल्याण करने के लिए के लिए
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एक सामाजिक व्यवस्था
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बनाएगा एक सामाजिक व्यवस्था
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बनाएगा जो लोगों
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के सामाजिक
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आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय को राजनैतिक न्याय
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को को प्राप्त करने
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में करने में सहयोग प्रदान करेगा
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सहयोग प्रदान करेगा
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स्टेट स्टेट का उद्देश्य डीपीएसपी के तहत क्या है राज्य का उद्देश्य है कि लोक
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कल्याणकारी कार्यों को बढ़ावा देना जिससे यहां की जनता को अपने सर्वांगी विकास में
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सहूलियत मिले ठीक है तो इसके लिए राज्य एक सोशल सिस्टम डेवलप करेगा एक सामाजिक
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व्यवस्था बनाएगा जिस व्यवस्था के तहत रह के जनता अपना सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक
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न्याय को प्राप्त करेगा ये सामाजिक आर्थिक एवं राजनीतिक न्याय क्या है अब इसे समझने
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का प्रयास करते हैं सामाजिक
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आर्थिक एवं राजनीतिक सामाजिक स्तर पर क्या देखते हैं
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सामाजिक स्तर पर देखते हैं कि भेदभाव बहुत जरूर बहुत ज्यादा होता है भेदभाव
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भेदभाव तो राज्य क्या करेगा इस भेदभाव का अभाव
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अर्थात भेदभाव को दूर करने का प्रयास करेगा क्या करेगा राज भेदभाव को दूर करने
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का प्रयास करेगा अर्थात भेदभाव का अभाव जैसे प्रवेश बनाने का प्रयास करेगा अर्थात
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इसे दूर करने का प्रयास करेगा दूर करने का प्रयास
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करेगा जब भेदभाव का अभाव होगा तभी सभी लोग समरसता के आधार पर रह सकते हैं भ्रातृत्व
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के आधार पर रह सकते हैं प्रेम पूर्ण रह सकते हैं जब तक ऊंच नीच का समाज में ऊच
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नीच का भेदभाव कायम रहेगा तब तक क्या समाज प्रगति कर सकता है नहीं समाज प्रगति नहीं
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करेगा ऐसी स्थिति में समाज प्रगति नहीं करेगा तो सामाजिक रूप से जो भेदभाव है तो
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राज्य यह प्रयास करेगा कि उस सामाजिक परिस्थितियों में जो भेदभाव है उनके
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भेदभाव वाले तत्वों को ही खत्म कर दे अर्थात यहां पर जो भेदभाव है इसे दूर करने
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का प्रयास करेगा अब देखते हैं आर्थिक न्याय कैसे मिलेगा अर्थात दो लोगों के
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मध्य आर्थिक स्तर पर अमीरी और गरीबी होती है अमीरी और गरीबी अब जैसे कि करप्शन
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करप्शन के क्या कारण क्या होता है कि कुछ लोग ऐसे पदों पर बैठे होते हैं और उन पदों
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पर बैठते उसका बेजा इस्तेमाल करते करते हुए क्या करते हैं कि कार्य करने के ववज
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में कार्य करने केवज में गलत तरीके से पैसे लेते हैं अर्थात करप्शन तो करप्शन के
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माध्यम से क्या होता है करप्शन के माध्यम से उनके पास बेपनाह दौलत हो जाती है ठीक
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है तो समाज में वसे उन चीजों को दूर करने का प्रयास करेगा राज्य जिनके आधार पर
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लोगों के बीच आर्थिक असमानता होती है ठीक है गलत पैसों के पर रोक टोक लगाएगी ठीक है
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तो यहां पर सरकार क्या करेगी राज्य को ही रिप्रेजेंट सरकार करती है तो राज्य क्या
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करेगी आर्थिक असमानता को दूर करने का प्रयास करेगी
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आर्थिक असमानता
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को दूर करने का प्रयास
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करें अब आगे बढ़ते हैं राजति न्याय
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राजनीतिक न्याय में क्या है राजनीतिक न्याय में है कि भारत का कोई भी
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नागरिक सार्वजनिक जीवन के सार्वजनिक जीवन में जो शासन संचालन करने की जो विधा है
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उसमें भाग लेना शासन संचालन में
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शासन संचालन में भागीदार
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होना भागीदार होना अर्थात शासन संचालन में एक वोटर की भी
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भूमिका होती है या आप चुनाव में वोट दे रहे हो या किसी चुनाव में किसी पद के लिए
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आप चुनाव लड़ रहे हो तो इनके लिए अर्थात इंडिया का कोई भी व्यक्ति इन पदों के लिए
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एलिजिबल होगा ऐसी परिस्थितियों का निर्माण कौन करेगी राज्य करेगी अर्थात किसी भी
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पद अर्थात राजनीतिक स्तर पर
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स्तर पर समानता लाना राजनीतिक स्तर पर समानता
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लाना आर्टिकल 38 के तहत जो बातें की गई उस
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बातों के लिए क्या है कि राज लोक कल्याण करने के लिए एक व्यवस्था एक सामाजिक
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व्यवस्था बनाए ठीक है जिस व्यवस्था के तहत जिस परिवेश के तहत लोग रहते हुए क्या
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करेंगे सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय को प्राप्त करेंगे सामाजिक स्तर पर भेदभाव
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दूर करेंगे आर्थिक और समानता को दूर करेंगे राजनीतिक समानता अर्थात यहां का
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कोई भी व्यक्ति किसी पद के लिए चुनाव लड़ सकता है वोट देने का अधिकार अर्थात सभी ज
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एक अमीर को भी एक ही वोट देने का अधिकार है और एक गरीब को भी एक वोट देने का अधिकार क्या भारत में जैसे उद्योगपति चाहे
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वह रतन टाटा हो या अंबानी हो या अडानी हो उनको भी एक ही देने का अधिकार है और जो
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हमारे यहां के सबसे गरीब है उन्हें भी एक वोट देने का अधिकार है अर्थात यहां पर हम
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देखें क्या कि हमारे कांस्टिट्यूशन में यह प्रावधान किया गया कि आपको अमीरी गरीबी के
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आधार पर आपके साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं बढता जाएगा अर्थात राजनीतिक रूप से
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जिसे अमीर है उससे आप कम नहीं अर्थात सभी समान है तो आर्टिकल 38 को हम लोगों ने समझ
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लिया अब आगे बढ़ते हैं
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39 ए समान
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न्याय एवं निशुल्क
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निशुल्क विधिक सहायता
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विधिक सहायता आर्टिकल 39 ए के तहत कहा गया है कि
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समान न्याय एवं निशुल्क विधिक सहायता अर्थात हमारे देश में समान न्याय अर्थात
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न्याय तक सभी की समान पहुंच है अर्थात ऐसा नहीं है कि जुडिशरी या न्यायालय किसी के
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से साथ भेदभाव बरती है सभी को न्यायालय तक जाने का हक और अधिकार है अब सभी को
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न्यायालय तक यह मान लेते हैं न्यायालय न्यायालय
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है अब इस न्यायालय तक ये जनता है ये जनता है अब इस जनता इस इस जनता को
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न्यायालय तक जाने का हक है और अधिकार है अब हो सकता है कि जनता में कोई अमीर हो
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कोई गरीब हो कोई पढ़ा लिखा हो कोई कम पढ़ मतलब कोई अशिक्षित हो कोई ज्यादा पढ़ा लिखा हो तो यहां पर सभी जनता को न्यायालय
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तक समान पहुंच होनी चाहिए सबको समान रूप से वहां पर जाने का हक और अधिकार है लेकिन
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समस्या क्या आती है कि अशिक्षा के कारण लोगों में जागरूकता की कमी है जागरूकता
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में कमी के कारण वह अपने हक और अधिकार को जान नहीं पाते और नहीं जान पाने के कारण
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वह अपने हक और अधिकार नहीं ले पाते हैं तो सरकार ने सभी के लिए समान न्याय अर्थात
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अमीर लोग पढ़े लिखे लोग तो वहां पहुंच जाते हैं अपने हक और अधिकार के लिए मान लेते हैं जिनको यह प्रोसेसिंग मालूम नहीं
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है जो अशिक्षित है जो गरीब है किसी कारणवश न्यायालय तक नहीं पहुंच पाते हैं उनके लिए
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सरकार ने क्या किया निशुल्क अर्थात जो सक्षम है वो न्यायालय तक पहुंच रहे हैं
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लेकिन जो असम है वो भी उनको भी समान न्याय चाहिए अर्थात न्यायालय तक उनकी समान पहुंच
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होनी चाहिए तो उनको भी यहां पर पहुंचना चाहिए इसके लिए इस गवर्नमेंट ने क्या
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सरकार ने क्या की निशुल्क विधिक सहायता का प्रावधान किया निशुल्क अर्थात आपको कोई
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खर्च नहीं फिर भी इसमें कमी रह जाती है अर्थात जागरूकता में कमी के कारण डर या भय
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या किसी भी कारण से तो स्टेट ने क्या किया पीई जुडिशरी ने क्या किया
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पीआईएल का इनोवेशन हुआ इंडिया में पब्लिक
24:49
इंटरेस्ट लिटिगेशन अर्थात जो न्याय पाने से दूर है तो वो डायरेक्ट न्यायालय में
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पीआईएल के माध्यम से याचिका कर सकते हैं अगर कोई व्यक्ति इसमें सक्षम नहीं है तो
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पीआईएल जुडिशरी इसको एक न्यूज़पेपर के माध्यम से खुद संज्ञान ले सकती है या
25:09
दूसरा कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति के लिए न्यायालय के समक्ष न्याय की मांग कर सकता है तो यहां पर हमने क्या देखा समान न्याय
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एवं निशुल्क विधिक सहायता अर्थात स्टेट इस तरीके का प्रयास करता है कि सबके लिए
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न्याय सबको न्याय मिले और न्याय तक सबकी समान पहुंच हो
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अब इसमें आगे देखते हैं आगे कहा गया है राज लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए
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सार्व सार्वजनिक धन का स्वामित्व तथा नियंत्रण सार्वजनिक बी में
25:45
है सार्वजनिक सार्वजनिक
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धन का स्वामित्व
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एवं नियंत्रण इस तरीके से
26:09
करेगा इस तरीके से
26:15
करेगा के सार्वजनिक
26:22
सार्वजनिक हितो की प्राप्ति हो सके हितों की
26:30
प्राप्ति हो
26:36
सके अब सार्वजनिक धन का स्वामित्व एवं नियंत्रण राज्य इस तरीके से करेगा कि उस
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पैसे का या उस धन का सार्वजनिक हित या समान जनता के हित में ज्यादा से ज्यादा
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यूज हो सके अर्थात ज्यादा से ज्यादा उस पैसे का लोक कल्याण हो सके ज्यादा से
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ज्यादा हमारे देश की जनता उसका लाभ ले सके इसका मंतव्य यह है कहना सी में है धन
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के सी में कहा गया है धन के वितरण से
27:13
संबंधित धन के वितरण से संबंधित बात की गई है कि किस तरीके से धन का वितरण होना
27:21
चाहिए किस तरीके से धन का वितरण होना चाहिए तो यहां पर है कि पहले इसका एक ही
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जगह पर केंद्रन नहीं होना चाहिए एक ही जगह जगह संकेंद्रण नहीं होना
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चाहिए संकेंद्रण नहीं होना चाहिए नहीं होना
27:44
चाहिए अर्थात क्या होना चाहिए धन का समान वितरण होना चाहिए समान
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वितरण समान वितरण अर्थात राज्य यह प्रयास करेगा राज्य
27:58
यह प्रयास करेगा कि संपत्ति का एक ही जगह संकेंद्रण होने से बचे अर्थात एक जगह
28:06
संकें होने के ब उसका क्या हो उसका समान रूप से लोगों के बीच वितरण हो एक जगह
28:12
संकेंद्रण पर य रोक लगाता है अब बढ़ते हैं अगले आर्टिकल की
28:20
तरफ आर्टिकल 4 आर्टिकल 40 किससे संबंधित है आर्टिकल 40
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पंचायती राज से संबंधित है किससे संबंधित है पंचायती राज
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से पंचायती
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राज अब यह हमारे यहां इसको जो प इसका जो इंप्लीमेंट इंप्लीमेंटेशन हुआ था वो 93
28:47
एवं 94 संविधान संशोधन के माध्यम से इसको अस्तित्व में ला गया इसको पावर में लाया
28:53
गया किस किसके माध्यम से 3 एंड
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94 अमेंडमेंट के माध्यम से अमेंडमेंट के माध्यम
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से माध्यम से लाया
29:16
गया थोड़ी देर पहले हम क्या कह रहे थे कि हमारे ऊपर एक ही साथ दुनिया का यह विशिष्ट
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भारत दुनिया का विशिष्ट उदाहरण है जहां पर एक ही साथ हमारे यहां तीन गवर्नमेंट या
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तीन स्टेट शासन करती है सभी तीनों को संविधान से शक्तियां मिली हुई है पहला
29:36
सेंट्रल गवर्नमेंट दूसरा स्टेट गवर्नमेंट तीसरा लोकल सेल्फ गवर्नमेंट ठीक अब यहां पर देखते हैं कि 33
29:44
एवं 94 संविधान संशोधन के माध्यम से इसको अस्तित्व में लाया गया इसका लाभ क्या
29:51
मिला तो बेसिक लेवल पे डेमोक्रेसी को मजबूत करने में सहायता मिली क्या बेसिक
29:59
लेवल
30:05
पे पर डेमोक्रेसी
30:13
को मजबूत करने में सहायता मिली मजबूत करने
30:21
में करने में सहायता मिली
30:29
ठीक बेसिक लेवल पर अर्थात देखते हैं कि भारत में क्या है भारत में बहुत ही भारत
30:36
बहुत ही डायवर्सिफाई विविधता वाला देश है तो जब हमारे यहां स्वतंत्रता प्राप्ति के
30:42
पश्चात डेमोक्रेसी को अपनाया गया तो डेमोक्रेसी में जैसे चुनाव जीतना तो चुनाव
30:47
जीतना इसमें समीकरण बनने लगे जाति के धर्म के क्षेत्र के भाषा के तो वैसी जातियां
30:53
ऐसे ऐसे समुदाय जो बहुत ही कम मात्रा में
30:58
तो उनको बहत स्तर पर डायरेक्ट सत्ता में भागीदारी का मौका नहीं मिल पाता तो त्रिमल
31:05
सर अत अर्थात बेसिक लेवल पर जो पंचायती राज है जहां पर मान लेते हैं वार्ड के जो
31:11
सदस्य होते हैं 100 घरों पर 50 घरों पर वार्ड के सदस्य होते हैं उन परिस्थितियों में इनको शासन में भागीदारी का जिनकी
31:18
आबादी कम है उन्हें भी शासन में आवा शासन भाग लेने का मौका मिला शासन में भाग लेकर
31:26
अपनी समस्याओं को खुद सुलझा ने का उनको मौका मिला पहले वह समस्या के समाधान के लिए
31:32
क्या स्टेट की तरफ देखते हैं अब शासन संचालन में बेसिक लेवल से लेकर सेंट्रल लेवल तक डेमोक्रेट तो व शासन संचालन भाग
31:40
लेकर अपनी समस्याओ को खुद सुलझाने लगे और विशेषक यहां पर वैसे लोग वसे वकर सेक्शन
31:48
जो सदियों से यहां पर दवे कुचले थे उनके लिए यहां पर आरक्षण का भी प्रावधान किया
31:54
गया क्या आरक्षण का प्रावधान
32:01
प्रावधान अर्थात अगर उनमें इनोवेशन नहीं है उन्हें
32:07
एक एक परसेंटेज उन्हें दिया गया इतने परसेंट पर फलाने सेक्शन के लिए सीट रिजर्व
32:12
है इसमें आप आइए इसके तहत आप आइए और शासन में प्रत्यक्ष भागीदारी कीजिए और आपकी जो
32:18
मूल समस्या है आप अपने अनुसार उन समस्याओं का समाधान करें तो आर्टिकल 40 के तहत हमने
32:25
क्या देखा आर्टिकल 40 के तहत हमने पंचायती राज देखा पंचायती राज ने क्या किया हमारे यहां
32:32
डेमोक्रेसी को और मजबूती प्रदान किया इसके तहत वीकर सेक्शन को शासन के संचालन में
32:41
डायरेक्ट भागीदारी का मौका मिला वकर सेक्शन में कौन एसटी एससी एसटी ओबीसी आपके
32:48
यह हो गए महिला महिलाओं को कई राज्यों में % आरक्षण है कि उनकी डायरेक्ट भागीदारी
32:54
शासन में डायरेक्ट भागीदारी हो तो इस तरीके से देखें कि हमने आर्टिकल 40 के तहत
33:00
क्या किया अपने यहां डेमोक्रेसी को और मजबूती प्रदान किया और उस मजबूती के साथ
33:06
हम आज आगे भी बढ़ रहे हैं आगे बढ़ते हैं आर्टिकल 41 की
33:13
तरफ आर्टिकल 41 आर्टिकल 41 क्या कहता है आर्टिकल 41 यह
33:20
कहता है कुछ दशाओं में कुछ दशाओं
33:26
में कुछ दशाओं में
33:34
काम शिक्षा एवं लोक सहायता
33:42
एवं लोक सहायता लोक
33:48
सहायता पाने का
33:54
अधिकार अब कुछ दशा में
34:00
काम शिक्षा एवं लोक सहायता अब यहां पर देखते हैं सबसे पहले काम की चर्चा करते
34:12
हैं हमारे देश में कुछ योग्य व्यक्ति है पढ़े लिखे शिक्षित है उन्हें भी उतनी ही
34:19
जरूरत है काम की जितना जो अशिक्षित लोग है उनके लिए तो यहां पर गवर्नमेंट क्या करती
34:25
वैकेंसी निकालती वैकेंसी निकालती ठीक है इस वैकेंसी के माध्यम से शिक्षित लोगों कुछ लोगों को
34:31
रोजगार मिलता है लेकिन जो योग अर्थात जो जिन्होने शिक्षा किसी कारण शिक्षा प्राप्त
34:38
नहीं कर सके क्या गवर्नमेंट उन्हें छोड़ देती है नहीं उनके लिए अब शिक्षित लोगों के लिए विज्ञापन निकालती
34:45
है अब इनके लिए मनरेगा है मनरेगा के माध्यम से इनको काम दिया
34:52
जाता है क्या मनरेगा के तहत इनको काम दिया जाता है शिक्षित लोगों को विज्ञापन रेलवे
34:57
की भर्ती बैंकों की भर्ती फलानी भर्ती विज्ञापन निकला शिक्षित लोग उसमें भाग लिए
35:04
भाग लेकर अपनी योग्यता के अनुसार अपनी नौकरी को प्राप्त की लेकिन जो अशिक्षित है अयोग्य है गवर्नमेंट या स्टेट उन्हें भी
35:11
नहीं छोड़ देती है अर्थात उनके लिए भी उनके अकॉर्डिंग काम लाती है जैसे मनरेगा
35:17
जो अशिक्षित है पढ़ाई लिखाई नहीं कर पाए या नौकरी प्राप्त करने में सक्षम नहीं है
35:22
तो उनके लिए है शिक्षा
35:31
अब आप देखते होंगे कि स्टेट अपनी तरफ से भरपूर प्रयास करती है कि उनके सभी नागरिक
35:38
शिक्षित हो योग्य बने इसके लिए शुरुआती स्तर से ही शिक्षा के लिए प्रावधान करती
35:44
शिक्षा के लिए क्या करती है सर्व शिक्षा अभियान चलाया गया है सर्व शिक्षा
35:54
अभियान अब इसके पश्चात जब आप चाहते हैं कि बेसिक एजुकेशन के अलावे आप हायर एजुकेशन
36:02
में आप जाना चाहते हैं तो हायर एजुकेशन के लिए भी स्टेट क्या करती है कि उसके लिए आपको एजुकेशन लोन देती है
36:12
एजुकेशन लोन देती है जिससे एजुकेशन प्राप्त करने के पश्चात आप कमा के उस लोन
36:19
को पुनः चुका सके अगला है लोक सहायता अगला है लोक
36:27
सहायता लोक
36:35
सहायता प्राप्त करना अब लोक सहायता के तहत देखते हैं कि
36:44
स्टेट उन लोगों के लिए राज्य उन लोगों के लिए सहायता भी प्रदान करता है जिन्हें कोई
36:50
आसरा नहीं होता है जिन्ह कोई सहायक नहीं होता जैसे वृद्धावस्था पेंशन
36:58
वृद्धावस्था पेंशन जो 60 साल प्लस के लोग हो गए जो 60
37:07
साल प्लस के लोग हो गए उन्हें गवर्नमेंट क्या करती है वृद्धावस्था पेंशन देती
37:13
है विधवा पेंशन विधवा
37:21
पेंशन अगर किसी घर का कमाव पुत मर जाता है और उसकी वाइफ है तो उन्हें उसे विधवा
37:29
पेंशन दिया जाता है अर्थात लोक सहायता उन्हें तो इसके तहत हम देखते हैं कि बहुत
37:35
तरह की जो बहुत तरह का स्टेट अपने तरफ से लोक सहायता करता है अर्थात अपने नागरिकों
37:41
को वृद्धावस्था पेंशन हुआ विधवा पेंशन हुआ इस तरह के बहुत सारे ऐसे ऐसी चीजें हैं
37:48
जिसे स्टेट अपने नागरिकों को व्यक्तियों को देता है अब अगला आर्टिकल की तरफ चलते
37:54
हैं अगले आर्टिकल में क्या कहा गया है
38:01
आर्टिकल आर्टिकल
38:09
42 कार्यों
38:15
की न्याय
38:20
संगत दशा कार्यों की न्याय संगत दशा
38:30
और प्रसुति सहायता
38:41
सहायता अब देखते हैं आर्टिकल 42 में कहा गया कार्यों की न्याय संगत दशा स्टेट आपसे काम करवाता है या कोई भी
38:49
आप काम करते हैं स्टेट क्या करता है वहां पर कुछ कानून बनाता है क्या करता है कानून
38:55
बनाता है कि व उस का को करते हुए आप सही स्थिति में है कि नहीं सहज है कि नहीं है
39:02
जैसे उदाहरण स्वरूप मान लेते हैं कि दिल्ली में एमसीडी द्वारा एमसीडी
39:08
द्वारा नाले की सफाई की जाती है नाले की सफाई की जाती
39:15
है अब नाले की सफाई में पहले क्या होता था कि व्यक्ति को डायरेक्ट नाली में उतार
39:22
दिया जाता है तो क्या उसमें कभी क्या होता था कि उस नाली में उतर के पश्चात वहां के
39:29
बहुत सारी जो विषैली गैसे होती थी गैस के कारण घुटने से मौत हो जाती थी अब क्या है
39:35
कि नाले की सफाई के दरमियान आप ऐसे नहीं को किसी व्यक्ति को नाली में उतार सकते उससे कीट पहनाकर अर्थात सुरक्षा कवच पहना
39:43
के ही आप उतार सकते हैं बिना हेलमेट के नहीं उतार सकते हैं हेलमेट सुरक्षा कवच के
39:49
साथ आपको उतारना होगा जिससे कार्यों की न्याय संगत दशा का पता
39:56
चल सके कार्यों की न्याय संगत दशा का पता चल सके
40:02
या बड़े बड़े देखते हैं कि लोहे की फैक्ट्री होती है तो वहां पर क्या होता है
40:07
टोपी को हेलमेट को अनिवार्य कर दिया जाता है बड़े
40:13
बड़े बड़े बड़े कारखानों
40:18
में खानों में हेलमेट को
40:35
अनिवार्य कर दिया जाता
40:42
है क्यों क् लोहे की फैक्ट्री में काम कर रहा है कहां से क्या गिरे तो इसके लिए
40:49
सुरक्षा जरूरी है अर्थात कार्यों की न्याय संगत दशा वहां पर भी फिर आगे है प्रसूति
40:55
सहायता प्रसुति सहायता में देखते हैं कि
41:00
गवर्नमेंट की स्टेट की तरफ से आशा बहु का इंतजाम किया जाता है आशा
41:10
बहु अगर वर्किंग वूमेन है अगर वर्किंग वमन है तो 26 26
41:17
वीक या सप्ताह कि उसे छुट्टी दी जाती है अर्थात
41:25
गवर्नमेंट स्टेट अपने तरफ से उसे पूर्ण सहायता देती है और न्याय
41:31
संगत से पूर्ण प्रसुति सहायता में उनको सहायता आशा बहु का
41:37
इंतजाम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
41:43
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आशा
41:51
बहु 26 सप्ताह तक उसे अगर वो वर्किंग वूमेन है तो विथ पे ऐसा नहीं है कि उसे जब
41:58
तक वो छुट्टी पर है त तब तक उसे शैली नहीं नहीं मिलेगी विथ पे उसको छुट्टी
42:05
मिलेगी ठीक तो हमने आर्टिकल 42 के तहत क्या देखा कार्यों की न्याय संगत दशा और
42:11
प्रस्तुति सहायता और इसके तहत इसके पश्चात आर्टिकल
42:16
43 आता है 43 के
42:22
तहत आर्टिकल 43
42:30
कर्मकार के लिए के
42:36
लिए निर्वाह योग्य
42:43
योग्य मजदूरी एवं कुटर
42:50
उद्योग कुटर
42:55
उद्योग अब यहां पर जो कर्मकार के लिए निर्वाह योग्य
43:02
मजदूरी कर्मकार के लिए निर्वाह योग मजदूरी अगर कोई कर्मकार कोई कार्य कर रहा है अगर
43:09
कोई मजदूर कोई कार्य कर रहा है तो उससे इतना जरूर मिलना चाहिए जिससे उसका बेहतर
43:15
तरीके से निर्वहन हो जाए अर्थात उसका शोषण नहीं होना चाहिए इसके लिए हमने क्या देखा
43:22
इसके लिए बजाता उनका एक अलग विभाग होता है उनके
43:27
यूनियन होते हैं क्या करते हैं उनके यूनियन कि मजदूरों का शोषण ना हो सके ठीक
43:32
विभाग क्या देखता है वो ऑथराइज करता है आगे देखते हैं कुटर उद्योग क्योंकि भारत
43:39
में रिसोर्सेस की कमी थी बड़े-बड़े उद्योग थे लेकिन उस लेवल पर उद्योग नहीं थे जिससे
43:45
सभी लोगों को वहां पर काम मिल जाए हमारे पास उतने रिसोर्सेस नहीं थे या इतने
43:51
बड़े-बड़े उद्योग धंधे नहीं थे जिसमें इंडिया के सभी लोगों को रोजगार मिल जाए तो गवर्नमेंट ने स्टेट ने अपने तरफ से क्या
43:58
हुआ कुटीर उद्योग को बढ़ावा दिया कुटीर उद्योग को क्या दिया राज्य ने इसे बढ़ावा दिया
44:07
इसे बढ़ावा दिया देखते हैं बढ़ावा दिया कुट उद को
44:14
बढ़ावा देने के लिए क्या किया इसके लिए ऋण का प्रावधान किया क्या
44:20
किया ऋण का प्रावधान किया
44:28
प्रशिक्षण की व्यवस्था की प्रशिक्षण की व्यवस्था
44:35
दिया साथ ही साथ अगर कुटी उद्योग को एस्टेब्लिश किया गया है उसके लिए
44:40
गवर्नमेंट क्या कर रही है इनके लिए मंडी का भी प्रावधान कर रही है जिससे इनके
44:46
निर्मित माल बिक सके मंडी का प्रावधान मंडी का
44:56
प्रावधान गवर्नमेंट अपने हम क्या हम क्या देख रहे हैं डीपीएसवी में कि गवर्नमेंट भी
45:01
अपने तरफ से प्रयासरत है क्या कि डीपीएसपी को हम विधि बनाने के दरमियान किस तरीके से
45:08
उसे इंप्लीमेंट करें और हमने यह देखा है कि गवर्नमेंट अपनी तरफ से प्रयास कर रही
45:13
है जंजं स्टेट सक्षम होता जा रहा है त्य स्टेट क्या कर रहा है इसके लिए प्रयास
45:19
करता जा रहा है अब आते हैं अगले आर्टिकल की
45:24
तरफ आर्टिकल 4
45:32
ो आर्टिकल 44 समान सिविल
45:38
संहिता समान सिविल
45:49
संहिता समान सिविल संहिता और इसकी बार-बार जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी कहा जा रहा है
45:56
अब बहुत लोग लोग द्वारा इस डिमांड भी किया जा रहा है कि इसको इंप्लीमेंट किया जाए अर्थात इसे व्यवहार में लाया जाए तो बहुत
46:03
लोग इसके समर्थक है और बहुत सारे लोग इसके विरोधी भी है समर्थक क्यों है विरोधी
46:09
क्यों है इस पर चर्चा कि भारत में क्या है संसदीय लोकतंत्र
46:14
है संसदीय
46:21
लोकतंत्र शासन के संचालन में सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है शासन के संचालन
46:27
सभी लोगों का सहयोग आवश्यक है अब शासन अलग लोगों अलग-अलग लोगों के अलग-अलग नियम
46:34
कानून बनाए तो यह लोकतंत्र के समानता के सिद्धांत खिलाफ क्या कि अगर यहां
46:42
पर हमारे यहां संसदीय लोकतंत्र है हमारे यहां लोकतंत्र अर्थात लोकतंत्र ही
46:48
इक्वलिटी पर आधारित होता है यह समानता पर आधारित होता है लेकिन यहां पर अलग अलग समुदाय के लोग
46:57
अलग अलग रूल से व शासित हो तो यह समानता के खिलाफ है अर्थात हम ऐसा कोई विधि क्यों
47:03
नहीं बनाते हैं जो सभी लोग को एक समान शासित करें सभी लोग को क्या करें एक समान
47:09
शासित करें तो इसका बहुत सारे लोग विरोध भी करते हैं इसका बहुत सारे लोग विरोध भी
47:15
करते हैं विशेषकर अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा एवं आदिवासियों द्वारा जैसे इसे
47:21
समझने का प्रयास करते हैं यह सिविल संहिता मूर्तिया
47:27
शादी से तलाक से संपत्ति से जुड़ा मामला
47:34
है इन शादी से तलाक से और संपत्ति से ड़ जुड़ा मामला है अब इसमें अल्पसंख्यक
47:41
समुदाय विशेषक मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना है कि हम मुस्लिम लॉ से शासित होते
47:47
हैं ना कि सामान्य कानून से अदर लोग सामान्य कानून से संचालित होते हैं अब वह कहते हैं कि हम
47:55
मुस्लिम लॉ से संचालित होते हैं हम सिविल संहिता को नहीं माने अगर
48:01
गवर्नमेंट यह कानून बना दे कि एक व्यक्ति एक ही साधक एक
48:08
व्यक्ति एक व्यक्ति एक
48:13
साधी एक व्यक्ति एक शादी अब अगर कानून ऐसा बनता है तो इसका
48:20
क्या होगा कि बहुत बहुत सारे ऐ समुदाय हैं जहां पर एक व्यक्ति चारचार शादी करते हैं
48:26
पांच पाच शादी करते अब जैसे मुस्लिमों में विशेषकर मुस्लिमों में
48:32
कहा गया कि उन्हें धर्म इसकी अनुमति देता है कि एक साथ चार शादी कर सके ठीक है वहां
48:38
पर मुस्लिम लॉ भी इसकी अनुमति देता है अब देखते हैं दूसरी तरफ आदिवासियों में कि आप
48:44
जैसे चले जाए नीलगिरी की पहाड़ी पर जैसे टोडा है अब टोडा जनजाति अब एक महिला वहां
48:50
पाच शादी करती अर्थात वहां पर जेंडर इंडेक्स इतना जेंडर इंडेक्स कारण है और की
48:56
अपनी जो परंपरा है कि अगर किसी घर में बड़े बड़े भाई की शादी हुई है तो बड़े भाई
49:02
की शादी तो अन्य भाई भी उनकी उनके पति होंगे अर्थात एक महिला एक साथ में पांच
49:09
पांच लोगों से शादी कर कर सकती है क्या यहां एक व्यक्ति एक शादी का वहां विरोध हुआ कि नहीं हुआ अब है बहुत सारी ऐसी
49:17
परंपराएं हैं अगर समान सिविल संहिता को इंप्लीमेंट कर दिया जाए तो उनकी परंपराओं
49:24
से टकराव होता है तो परंपराओं से तकरार होता है तो
49:31
चूंकि आर्टिकल 29 और 30 में अल्पसंख्यकों के लिए प्रावधान किया गया है कि वह अपना
49:37
भाषा लिपि परंपरा को अपना बचाए रखें तो इस आधार को कहते हैं कि हमारा यह अधिकार है
49:44
हमारा यह राइट है आप हमारे राइट्स को छीन नहीं सकते तो अब इसके लिए क्या किया
49:50
जाए तो इसके लिए हम कुछ क्या कर सकते हैं एक सिर्फ जागरूकता अभी हम इसे सीमित
49:57
संहिता को कभी भी क्योंकि हमारा देश एक उदार लोकतंत्र को अपना हमारे देश ने उदार
50:02
लोकतंत्र को अपनाया है जहां पर सहिष्णुता है जहां पर डायवर्सिटी है सभी एक दूसरे को
50:08
साथ लेकर चलते हैं तो कभी भी इसे इंप्लीमेंट हम जबरदस्ती नहीं करें क्या
50:13
करेंगे जागरूकता फैलाने का प्रयास करेंगे क्या जागरूकता फैलाने का प्रयास करें
50:20
शिक्षा के माध्यम से हो सकता है कुछ टाइम और लगे हम इसमें किसी प्रकार की जल्दबाजी
50:25
नहीं करें और जब सभी पक्षों से एक राय बन जाए कि हां अब इसके लिए हम तैयार है तब
50:32
इसे लागू करना चाहिए ठीक है आगे बढ़े अब आते हैं आर्टिकल 4 45 के तहत 45
50:41
क्या कहता है आर्टिकल
50:52
45 आर्टिकल 45
50:58
6 वर्ष से
51:04
कम आयु
51:11
अर्थात शैशवावस्था
51:19
की देखभाल छ वर्ष से कम आयु अर्थात शैशवावस्था
51:26
की देखभाल यह कौन करेगा यह कौन करेगा यह राज्य
51:35
करेगा तो देखभाल दो लेवल पर एक स्वास्थ के लेवल
51:41
पर दूसरा शिक्षा के लेवल पर हम यहां पर क्या देखते हैं स्टेट ने
51:48
क्या किया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
52:02
टीकाकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टीकाकरण अभियान जो बच्चों को दिया जाता है साथ ही जो 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं
52:11
उनके शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी चलाई गई क्या चलाई गई है
52:17
आंगनवाड़ी तो यहां पर हमने क्या देखा आर्ट 45 के तहत कहा गया है 6 वर्ष से कम आयु के
52:23
बच्चों के लिए राज उसके स्वास्थ्य एवं शिक्षा के लिए व्यवस्था करेगा स्वास्थ्य की देखभाल के
52:30
लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र टीकाकरण यह स्टेट चलाती है छोटे बच्चों के लिए साथ ही
52:37
उनकी शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी कार्यक्रम चलाया गया है जहां पर जाकर बच्चे तीन साल के बच्चे वहां पर जाकर बैठ सके सीख सके
52:44
शुरुआत से ही गवर्नमेंट क्या कर रही शुरुआत से ही स्टेट इसके लिए भी प्रावधान कर रही है तो यहां पर हमने क्या देखा
52:52
आर्टिकल 45 के तहत
52:58
कि 6 वर्ष से कम के आयु के बच्चों के लिए स्टेट कारज कर रहा है अब चलते हैं 46 के
53:05
लिए 46 आर्टिकल 46
53:11
यह एससी एसटी
53:17
ओबीसी के लिए है शिक्षा और अर्थ
53:24
संबंधी अर्थ
53:29
आर्टिकल 46 क्या करता है अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछा वर्ग के
53:36
लिए शिक्षा एवं अर्थ संबंधी प्रावधान की बात करता है तो हमने इसके लिए क्या किया
53:41
है संविधान संशोधन के माध्यम से आर्टिकल 154 के
53:49
तहत और 155 के तहत शिक्षा के क्षेत्र में एससी एसटी
53:56
ओबीसी के लिए हमने प्रावधान किया इनको इनको आरक्षण की व्यवस्था दी गई जिससे यह
54:02
भी शिक्षा में इनकी भी समान रूप से पहुंच हो सके आर्टिकल 164 के
54:10
तहत नौकरी अवसर की समानता के तहत नौकरियों में भी इनके लिए हमने आरक्षण का प्रावधान
54:17
किया है आर्टिकल 46 किससे रिलेटेड है एससी एसटी एवं ओबीसी के शिक्षा एवं अर्थ संबंधी
54:23
विकास के लिए यहां पर भी इसके अलावा यहां पर शिक्षा में तो हमने
54:30
किया ही किया है इस अर्थ संबंधी विकास के लिए सरकार अगर कोई योजना चलाती है चाहे वह
54:37
ऋण संबंधी हो या मतलब लोन या ऋण के संबंधित हो तो एससी एसटी ओबीसी को इसमें
54:43
प्राथमिकता दी जाती है क्या एससी एसटी ओबीसी को प्राथमिकता दी जाती है इसमें भारी उनको छूट भी दिया जाता है तो सरकार
54:51
इसके लिए भी प्रावधान कर रही है क्या कर रही है सरकार फॉर आर्टिकल 46 के तहत उनके
54:57
लिए प्रावधान कर रही
55:02
है आर्टिकल
55:09
47 पोषाहार
55:14
स्तर
55:19
अतर जीवन स्तर को
55:27
ऊंचा करना एवं
55:33
स्वास्थ एवं स्वास्थ तो आर्टिकल 47 के तहत क्या है
55:40
प पोषाहार स्तर जीवन स्तर एवं लोक
55:45
स्वास्थ्य में लोक स्वास्थ्य में एव स्वास्थ के स्तर में सुधार करना क्या करना
55:53
इन सारी चीजों में सुधार करना सुधार करना अब हम यहां पर क्या देखते हैं
56:01
हमारे यहां एक पोषण अभियान चलाया गया पोषण एक योजना है अभियान है यह चलाया
56:11
गया जीवन स्तर जीवन स्तर का हमारा जीवन स्तर किस कैसे ऊपर होगा जब हमें बेहतर
56:19
खाना मिले अर्थात मेरा स्वास्थ्य अच्छा रहे हमारी मानसिक अर्थात हम बेहतर शिक्षित
56:25
हो तो शिक्षा के लिए भी गवर्नमेंट प्रयास कर रही है आप पोषाहार स्तर के लिए भी
56:30
प्रयास कर रही है और पोषाहार स्तर अर्थात स्वास्थ्य भी बेहतर हो इसके लिए स्वास्थ्य
56:36
के स्तर पर भी सरकार गवर्नमेंट क्या करी जैसे आयुष्मान योजना आयुष्मान योजना है
56:42
आयुष्मान योजनाए या स्वास्थ्य के स्तर पर देखते हैं कि बड़े-बड़े हॉस्पिटल खोले जा रहे हैं गांव कूचे तक में भी हॉस्पिटल खले
56:49
खोले जा रहे हैं वहां पर बेड की व्यवस्था की जा रही है अर्थात लोगों को ग्रामीण लोगों को भी सुदूर क्षेत्र में ना जाना
56:55
पड़े उनको स्वास्थ की सहूलियत हो सके उन्हीं के गांव में या दो किलोमीटर के दायरे में ही
57:02
उनको यह सहूलियत मिल जाए तो आर्टिकल 47 के तहत हम देखते हैं पोषाहार स्तर जीवन स्तर
57:08
को ऊंचा करना एवं स्वास्थ की देखभाल इसके भी स्तर को ऊंचा करना या इसमें सुधार करना
57:15
की इसकी बात की गई है और इसके तहत देखते हैं स्टेट अपने स्तर से विभिन्न योजनाएं
57:21
लेकर आती है उसे इंप्लीमेंट भी करती है लोग उसका लाभ भी लाभ भी ले रहे हैं और
57:30
किनका प्रियंका ओके
57:35
ओके गुड आफ्टरनून गुड
57:44
आफ्टरनून आर्टिकल 48 यह है
57:52
कृषि एवं पशुपालन
57:59
पशुपालन कृषि एवं पशुपालन अब कृषि क्या
58:04
है यह कृषि क्या है आर्टिकल 48 के तहत
58:09
कृषि एवं पशुपालन में को बेहतर करने की बात की गई इनको बेहतर करने की बात की
58:17
गई बेहतर अब हम देखते हैं कि भारत एक कृषि
58:23
प्रधान देश है क्या है भारत एक कृषि प्रधान देश देश है आखिर यह कृषि क्या
58:28
है हमें अपने दैनिक कार्यों को करने के लिए ऊर्जा की जरूरत है ऊर्जा हमें फूड से
58:34
अर्थात खाने से मिलता है यह खाना हम कहां से पाते हैं यह जो उत्पादन होता है तो
58:40
वैसे उत्पादन जो प्राकृतिक रूप से जिनका उत्पादन होता
58:45
हो और जिनको हम एज फूड की तरह हम अपने को प्राप्त करते हैं अपने दैनिक कार्यों को
58:52
करने के लिए वो कृषि की श्रेणी में आते हैं यह प्राथमिक उत्पादन भारत इस मामले
58:57
में कृषि प्रधान देश है अर्थात यहां की ज्यादातर आबादी कृषि में लगी हुई है तो
59:02
चूंकि अभी तक हम परंपरागत तरीके से कृषि करते थे तो हमारी आबादी का पेट भरता था
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पहले आजादी से पहले हमारे यहां सूखा अकाल यह सभी होता था अर्थात उस वक्त हमारा कृषि
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बहुत डेवलप नहीं था कृषि में हरित क्रांति हुई हरित क्रांति के कारण उसमें उत्पादन
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बढ़ा लेकिन हमारी जनसंख्या भी दूसरी तरफ देखते हैं हमारी जनसंख्या भी बढ़ती जा रही
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है जनसंख्या का पेट कब भरेगा जब हमारे कृषि के लेवल में भी उत्पादन में भी बिना
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किसी नुकसान के बिना किसी पर्यावरण नुकसान के हमारा उत्पादन बेहतर होता जाए इसके लिए
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प्रयास क्या करेगा इसके लिए स्टेट अपने तरफ से सपोर्ट करता है सहयोग करता है ठीक
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एवं पशुपालन पशुपालन के स्तर पर भी देखते हैं
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कि जो गाय भैंस बकरी भेर इन सब मामले में
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भी गवर्नमेंट प्रमोट करती है पशुपालन की बेहतर ब्रीड के साथ कि गाय पालन आप करते
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हैं लेकिन बेहतर ब्रीड के साथ कि ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो ज्यादा से ज्यादा
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किसानों को लाभ हो और इसी में संविधान संशोधन करके
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48 को जोड़ा गया जो पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा
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था पर्यावरण
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संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण एवं वन
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एवं वन्य जीवों का संरक्षण वन जीवों
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का संरक्षण अब पर्यावरण संरक्षण को लेकर
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देखते हैं सिर्फ भारत ही जागरूक नहीं है पर्यावरण संरक्षण को लेकर सिर्फ भारत ही
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जागरूक नहीं है पूरे वैश्विक स्तर पर में जागरूकता भारत भी इसमें कदम से कदम मिलाकर
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अपना सहयोग प्रदान कर रहा है तो पर्यावरण संरक्षण यह 197 72 स्टॉक होम सम्मेलन से
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शुरू हुआ अब देखते हैं वन एवं वन जीवों का संरक्षण वैसे जीव जो लुप्त प्राय होने की
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स्थिति में तो 1972 से देखते हैं सरिस्का ये सब जो बाघ अभियान थे उनका का क्या किया
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उनको बनाया जाने लगा लुप्त जीवों के संरक्षण का प्रयास किया गया पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या हुआ इंडिया में
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एनजीटी की स्थापना हुई एनजीटी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल अर्थात
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इसके लिए हमने एक अलग न्यायालय ही बना दिया कि पर्यावरण का हम क्विक तरीके से हम
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संरक्षण कैसे कर सके इनके मामलों को हम क् कारवाई या इसकी तुरंत सुनवाई हम कैसे करें
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इसके लिए हमने एनजीटी का टी को बनाया इसके तहत हम देखते हैं कि
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बहुत सारे हम अभयारण्य को बनाए जहां वन्य जीवों का संरक्षण हो सके इसके लिए हमने
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कानूनों का निर्माण किया तो हम इस मामले में भी एक्टिव है और सरकार इस संदर्भ में
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भी एक्टिव है और इसके लिए सरकार अपने स्तर से प्रयास भी कर रही है आर्टिकल 4 48 में
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हमने क्या देखा कृषि एवं पशुपालन 48 को में हमने क्या देखा
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पर्यावरण संरक्षण वन एवं वन जीवों का कृषि एवं पशुपालन के तहत देखते हैं कि इस
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मामले में विशेषकर पंजाब और हरियाणा के किसान बहुत आगे रहे हैं चाहे वह पशुपालन
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के स्तर पर हो चाहे कृषि के स्तर पर हो यहां के किसान क्या है इसका इस पूरे भारत
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में इन दो राज्यों के किसान सबसे आगे रहे और इसमें देखते हैं कि पशुपालन के क्षेत्र में पंजाब में तो एक तरह से क्रांति ही है
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विशेषकर गाय पालने के संदर्भ में अब आगे बढ़ते हैं आर्टिकल 49 क्या कहता है
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आर्टिकल 49 कहता है
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आर्टिकल 49
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राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों
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राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों
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स्थानों एवं वस्तुओं का वस्तुओं
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का
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संरक्षण राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों स्थानों एवं वस्तुओं का संरक्षण इस मामले
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में हम देखते हैं कि भारत सरकार क्या करती है स्वतंत्र से पहले ही हमारे यहां
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आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया एएसआई का गठन हुआ था यह स्वतंत्रता से पूर्व की ही
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बात है तो विशेषक राष्ट्रीय महत्व को ऐसे जो बहुत पुराने पुराने स्मारक है स्थान है
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या कोई वस्तु है उसका संरक्षण कौन करती एएसआई करती है जो ही एएसआई को पता चलता है
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कि यह इतना पुराना है तो यह तुरंत वहां पर पहुंच के उसे अपने अंडर ले लेती है जिससे
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कि उसे संरक्षित किया जा सके क्या जिससे कि उसे रक्षित किया जा
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सके आर्टिकल 50 यह क्या करता
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है कार्यपालिका एवं
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विधायिका कार्यपालिका एवं विधायिका
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में पृथक
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करण अर्थात हमारे यहां कार्यपालिका एवं विधायिका का पृथक
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करण और अगला है आर्टिकल 51
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अंतरराष्ट्रीय
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शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना
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को बढ़ावा देना ठीक ये आर्टिकल 51 में है
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अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना यह आपका डीपीएसवी टॉपिक यहीं
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पर खत्म हुआ है अब फंडामेंटल ड्यूटीज है जिनकी संख्या 11 है उनकी चर्चा हम नेक्स्ट
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क्लास में करेंगे आज के लिए क्लास बस यहीं पर खत्म होती है जय हिंद जय भारत नमस्कार
#Education
#Government
#Legal

