Governments around the world are being driven by propaganda. A government whose propaganda cell is weak loses its popularity among the people. In this propaganda campaign, besides journalists, writers are also bought for a few bucks. Punjabi poets have also interpreted these governments. We find this very ugly. Writers should write on the voice of their conscience instead of being part of any propaganda.
#Dr.Amjad Bhatti,
#Propaganda Poetry,
#Poets Punjabi
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झाल
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हुआ है
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कि डॉक्टर अमजद अली व टीवी देखना है मौजूद
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के साथ आगरा में हमारा आज का मौजूद पंजाबी
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में प्रोपोगंडा शायरी ओं
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है अंग्रेजों की स्माइल दुश्मन पॉलिसियों
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के वायरस और बतौर of clans में आ आ
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है जिसके साथ किसानों के खेत मजदूर हो
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मेहनतकशों पर धर्म निभाने और निचले दर्जे
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के लोगों पर पड़े सिर्फ दो तब कहां रहते
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थे जिनकी हालत में उस दौर में भी कोई फर्क
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ना या एक नवाबों जागीरदारों राजाओं
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महाराजाओं बावजूद यह है कि इन से सियासी
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और इंतजामी ताकतवर छीन ले गई थी मगर यह
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दबकर फिर भी अंग्रेजों का नमक खाद और
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मेहनतकशों की दावत पर मौत हो रही कर रहा
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था और दूसरा तरीका था ताज होगा यह
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अंग्रेजों का एजेंट कहना ज्यादा मुनासिब
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है
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कि इस तबके की जिंदगी बेरूनी सरमायादारों
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की लूट खसूट पर उस तो आप थी नतीजतन यह तक
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आश्रम आया था और कारोबार रहा था बड़े समय
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है ताकत जिसको शाली से यह तबका ज़िंदगी
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गुज़ार रहे थे इसमें गरीब को पर मासूमों
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का खून शामिल था तभी तो आज गरीबों बेकस की
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हालत कुछ इस तरह बनी हुई है यह एक सिलसिला
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अंग्रेज गौर से चलता आ पाया यह समझदारों
1:31
के हवाले से बात कर रहा हूं
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कि आज लोकतंत्र की वह है रोक नहीं सकते
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हसनी सकते एक दूजे देख दिल दिया गल्ला एक
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दूजे उधर नहीं सकते आधे लोकी प्यार दे
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किने तरह आए नहीं बूते पर पानी बगदाणा
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पानी पीते सपा दिशु कर सपा नू मारे तो
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पहला पानी नाले अपनी नमस्कार पत्नी सकें
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जो एनर्जी चांद आए कर नहीं सकते
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कि आज लोगों की ऐसी हालत हो चुकी है कि
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नाम और रोक सकते हैं वरना हम स्नान का
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मुहूर्त है दिल की बातें एक दूसरे को नहीं
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बता पाते लोग प्यार के प्यासे हैं दरवाजों
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के क्रीम बहते पानी पर सांपों का कब्जा है
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यह सांपों को मारने से पहले ही अपनी मशीन
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पर नहीं सकते और जो अंकल जी चाहता है उस
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पर अमल नहीं कर सकते आप भी की शुरुआत और
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प्रशासन की जड़ें यूं तो मुगल दौड़ से
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पीछे तक जाती हैं मगर आम तौर पर इसका आवास
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अंग्रेज़ों से किया जाता है जगदीश जी अब
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कल के वक्त बर्तन भी सत्कार फसलें की
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तैयारी में लगे हुए थे इसलिए रोजमर्रा की
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चीजों को तैयारी उनके लिए मुमकिन आए
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पैदावार के खिलाफ को हिंदुस्तानी कारखानों
2:44
में कुर्क करने की कोशिश की हकीकत तो यह
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है कि इस जाम से यंगरीन अगर और जो हमसे
2:51
कि हिंदुस्तान के सजावटी तबके को बहुत
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फायदा हुआ जंग से पहले कारोबार में मंदी
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का रुझान था मसलन पाचक माफी की संगत में
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मछुआरों के ढेर लगे हुए थे जंग शुरू होते
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ही हुकूमत की तरफ से बड़े पैमाने पर अवैध
3:06
वसूली हुए और स्ट्राइक सुविधा यूथ जल्द ही
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प्रॉब्लम हो गई थी
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कि यह मैं यहां के पाचन वापसी की बात करो
3:15
हिंदुस्तानी देसी तारों की खुशहाली का यह
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दौर कहने की जरूरत के तो कारखाने असली बना
3:21
रहे थे इसलिए लोगों की अब खाने-पीने की और
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पहनने की शुरुआत हिंदुस्तानी कारण उन्हें
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पूरा करने की कोशिश की तो देशी राज्यों की
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खुशहाली का यह दौर उन पर खुशाली का दौर
3:32
आया लेकिन यह दारू ज्यादा देर न जान सका
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जानकर खत्म होने पर मुकामी सत्कार तबके को
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यह फ़िक्र ला हुई कि अंग्रेज उनके कारोबार
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का बेड़ा गर्क कर दें लिहाजा संस्कार तब
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के हिंदू और मुसलमान इसमें कोई फर्क नहीं
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है मजदूर मुक्त और तक चीन की तहरीर को
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भूलकर अंग्रेजों के खिलाफ विशेष ध्यान में
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मसरूफ होंगे यह जाहिर होता है कि हमें
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पाकिस्तान से पहले संस्कारों की इन
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भावनाओं के पीछे वर्षीय एक शादी वह हकदार
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थे आम आदमी को इस बगावत में शामिल करने के
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लिए जज्बाती सतह पर
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है उसको अपनी तरफ जोड़ा गया वैसे तो
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मुकामी संतों की हिफाजत के लिए मतलब का
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सहारा लिया गया और जहां मजहब फायदेमंद
4:15
होता था वह अंग्रेज को लुटेरा और जो आलम
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कहकर जिद्दोजहद का पैगाम दिया गया अ
4:22
ए नाटक के जरिए लोगों को की तरह है तो
4:24
हमने अहम का जो पैगाम दिया गया उसके पीछे
4:26
सरमायादारों और मुफ्त प्रश्नों के आपने
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मुफ्त इस पहलू से देखिए तो अंग्रेजों के
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खिलाफ सियासी जिद्दोजहद एक खास तबके ने
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अपने वफादारों के पीसेस के लिए सूखी यानि
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संगीतकारों ने अपनी फैक्ट्री और कारखाने
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और जगजीत गैरों ने अपनी जमीनों के तापस के
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लिए अवाम को जिद्दोजहद का पैगाम दिया
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लिहाजा कि हमें पाकिस्तान से पहले यह बात
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की तहरीक और अवाम को अनिल जी द जियब के
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लिए उबारने वाली शायरी को इस साल तक इंसान
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दो चाहिए तो कह सकते हैं कि इसके जरिए
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किसी अदरक गुड्डन से भरपूर जहमत समाज में
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हलचल पैदा हुई मगर इसका फायदा स्पेशली तप
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के हाथ में कुंतल हो जाने के लिए यह इंसान
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हो शायरी नहीं रहता बल्कि के प्रभाव गंदा
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शायरी की जेल में आ जाती है 12 साल कि
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हमें पाकिस्तान से पहले और बाद की सियासी
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समाज और वशिष्ट जी
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फैंस को अदब के जरिए समझने की जरूरत है
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तो क्या हम कुछ मिसालें पेश करेंगे इसमें
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अमल के हवाले से बात की गई है कि कम करो
5:34
मेहनत करो हमारे शायद दिन रात लगे हुए थे
5:37
वहीं मेहनत करो मेहनत करो हम हल्दी
5:39
दुनियां विच अलग आर्य आधारित नहीं ऑल की
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बीच दूरियां देखे थे प्रतिशत नहीं लाल
5:46
भैरव के देहल बन जाए फेरों का कोई अपने
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जोगा जो नहीं नहीं होते जोगा कोई नाल जय
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मूर्ख देवदास प्राप्त की कारा करें जो तो
5:56
अकल करण तो पगला ना कोई चारा करें मिल्क
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पाउडर 1 कटोरी चावल उधम देवगुण दादा कॉल
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कीजिए कोई दुआ मंगे कि नहीं सुविधा कूदा
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था
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यो यो हनी अमल की दुनिया में सुस्ती करना
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मेहनत करने वालों का तरीका करने दे नमक शक
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का दुनिया में कोई मुकाम नहीं बिछ के साथ
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बेसिक शक्ति बढ़ सकता है जो अपनी फिक्र
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नहीं करता उसकी फिकर और कौन कर सकता है जो
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शरीर स्वस्थ हो उसकी अल्लाह ताला क्या मदद
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करेगा जो शख्स अल्लाह ताला पर तो अकल करता
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है लेकिन खुद कोई अमल नहीं करता कभी कभार
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अल्लाह ताला मेहनत का फल देता है लेकिन
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अगर बेअमल दुआ करें तो अल्लाह नहीं सुनता
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ए गर्ल नंबर का ना आवे खेता में इस
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हरियाली अमला वाला सूरज डूबता पकड़ाए
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फैसला अ
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को मजबूत करने से खेतों में हरियाली नहीं
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आती थी मेहनत व मलवाला सूरज चढ़ेगा तक
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फसलें पक लैंग्वेजेस
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है 1958 ढाए गए थे जिन्हें की गाय को हिला
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नहीं दुनिया में उसे ही सुख मिला जिसने जो
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रब से काम लिया चल अभी कि चलना ही जिंदगी
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दादू जाना खिलौना मत है चलो कि चलना ही है
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जिंदगी दर्द जाना खिलौना मौत है चलना है
7:22
ज़िंदगी इसका किलो कि ले आई और अश्वत्थामा
7:25
रूप थल कटे वधू के वृध्दि मंजर देखा आंवला
7:30
कुछ चलोगे चलना ही जिंदगी का दूसरा नाम है
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तो बस चलना ही जिंदगी का नाम है चलते रहो
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जिंदगी का सफर तय होता है आगे बढ़ो आगे
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बढ़ने से जल्द
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इस प्रकार आप लाभ पहुंचेगा
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हैं तहरीक को अमल की शायरी का एक पहलू तो
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यह है कि ग्रहण कब का आपने इसका भरपूर
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फायदा अपने खाते में डाला वह अवाम को इस
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बात पर खेल करते हैं कि अगर लोग काम काज
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नहीं करेंगे तो अ कुंती मशीनरी किस तरह
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चलेगी अलग वह इस किस्म के हालात पैदा नहीं
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करते वह आपको यह चाहिए था कि वह अब आपको
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काम करेंगे दूसरे कुछ करेंगे हालांकि होना
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तो यह चाहिए था कि वह ऐसे हालात पैदा करते
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हैं कि सही मायनों में बेरोजगारी का
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खात्मा हो सके शायद ऐसा करना भी नहीं
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चाहते क्योंकि वह जानते हैं कि बेरोजगारों
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की तादाद बढ़ने से कम कीमत पर मजदूर मिल
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जाते हैं यानी कि जब बेरोजगारी ज्यादा
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होगी तो हर कोई थोड़ी कीमत पर भी आ जाएगा
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इसीलिए ब्राउन तब तक जान-बूझकर बेरोजगारी
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पैदा करता है नतीजतन बेरोजगारों में कम
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कीमत पर मजदूरी करने का मुकाबला शुरू हो
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जाता है उन महीनों की मेहनत और सिलाई वतन
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का स्पेशल करना आसान हो जाता है इस मंदिर
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में जिन पंजाबी शायरों ने जिद्दोजहद करने
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पर दोस्तों दिया है
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कि अगर इसके साथ-साथ उन्होंने uma shree
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में मौजूद नाइंसाफी और गुलामी को तकलीफ की
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सतह पर भी महसूस किया है लहसनिया के सारे
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प्रभु घंटे की नजर हो गए तब कार्तिकेय की
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जो आलम को तो के सामने घुटने टेकने की
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बजाय बेकार स्वर्ग मजबूर लोगों के लिए
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इज्जत का प्रभाव उनकी शायरी का बुनियादी
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नुक्ता है पंजाब एक शहर का यह क्या
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खूबसूरत शेर हैं अगर आप भी सुन लें पवार
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लिखवाकर डिपेंड लोचन गधे रहना तोड़ते रहना
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यार दियां रामावतार चेते रखना उन्नत सर्वे
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लोकतंत्र बजे जिम देवजी साधे गए तेनजिंग
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ने जमीन होते डिग्री खेल खत्म व्याख्या
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अपनी असली पैर रखकर चौपला हथियार सीखते
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हुए घोटालों का उन्नयन कार्यक्रम जारी की
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खातिर अपनी आंखों का बीज गेट बैक टो स्राव
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तेज एक लाभ पा
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में बहुत सी पेड़ छाती विच यार दा ख्याल
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मांगों को लेकर आंधी सी पर कव्वाली का
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ग्रेडिंग ना पर कव्वाली खाकर डिपेंड लोचन
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गाय तोड़ दे रहे हैं यहीं बेबस होकर किसी
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की आगे गिर पड़ने से बेहतर इंसान कामयाबी
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की जान आप सफ़र जारी रखें चलने वालों के
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रास्ते में उन लोगों को याद रखना कि ने
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जीते जीत जला दिया गया और जिन्होंने ज़मीन
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पर गिर पड़ी पहलुओं को पैगाम दिया यह अपनी
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असली लिए थैंक ऊ रख यार उठा लो मुहर लगे
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होठों से उन्होंने इनकार का हुक्म जारी
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किया और अपनी आंखें बंद करके आगे चलेंगे
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इस रास्ते पर तन्हाई का एहसास बहुत ज्यादा
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था दर्द दोस्त की याद की तरह दिल में
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लहराता था लेकिन बेबस होकर गिर पड़ने से
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चलते रहना बेहतर है
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है तो हमारा इस मौजूद के हवाले से सिर्फ
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यह कहना था कि सिर्फ आंखें बंद करके ऐसे
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ही नहीं के हुक्मरान टो लेने का कि मेहनत
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करो मेहनत कर दे रे कर दे और वह मेहनत
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पुष्पकर मशक्कत में तबदील हो गई और आपको
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इसमें नमक का माप जाना मेरा मेहनत और
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मशक्कत में यही फर्क है कि मेहनत ने इंसान
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अपनी जो उसने गुजरात की होती है उसका उसको
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पूरा मुआवजा मिलता है लेकिन पोषक तत्व यह
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होता है दो वक्त की रोटी देखकर शाम को
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कांटेस्ट से बांध दिया जाए और सुबह फिर
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उसको चांटा मारकर उठा लिया जाए कि वो
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हमारे लिए काम करो ऐसी बड़ा पुण्यशाली है
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ऐसी इंसान दोस्ती शायरी नहीं है बल्कि यह
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इंसान दुश्मन शायरी है जिसमें ऐसे ही
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आंखें बंद करके आप यूज करें बड़ी मोहब्बत
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है थोड़ा प्रिय है पड़ा व है यह काम करें
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वह काम करें काम जरूर करें लेकिन आंखें
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खुली रखें कि मेहनत और मशक्कत में फर्क
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करें और
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हैं जिन्हें अगाती से काम करें
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कि आपका बहुत शुक्रिया सामने की करें और
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लगभग को थामने की करने की तरह देखते वक्त
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अदा
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हुआ है
11:50
अजय को
#Human Rights & Liberties
#Other
#War & Conflict

