Chandragupta Maurya was a powerful Indian emperor and founder of the Maurya Empire. It was he who first united all of the kingdoms into one larger whole, which came to be known as the Maurya Empire in 318 BCE.
#चाणक्य ने दिए जीवन जीने के पांच मूल मंत्र Chandragupta Maurya Life Story
#Biography of Chanakya Part 1 - Statesman, philosopher, professor & PM of Mauryan King Chandragupta
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0:02
[संगीत]
0:09
आप हमारे रक्षा मंत्री सत्ता और आप हैं महाराज virochak महाराज
0:19
[संगीत]
0:29
चंद्रगुप्त और महाराज ब्यूरो चेक की मैत्री [संगीत]
0:35
हमारे जैन समाज के भविष्य का निर्माण ही करेगी आप दोनों मिलकर अजय हो गए मंत्री महोदय
0:44
इसीलिए मेरी इच्छाएं और अटल
0:51
मेरा एक सुझाव है महाराज berochak और चंद्रगुप्त हमारे बनाए
0:58
साम्राज्य के संयुक्त शासक हूं एक सिंहासन पर दो राजा नहीं virochak तुम
1:06
आधे साम्राज्य का शासन करोगे पश्चिम में सिंधु नात से लेकर दक्षिण के गुर्जर देश
1:13
की suvarnshikta नदी के तट तक और पूर्व में प्रयाग तक और चंद्रगुप्त त्रिवेणी
1:21
संगम से लेकर प्राच्य प्रदेश मगध विधेय और गंगा के उत्तर में बेस अंग और कामरूप देश
1:30
का शासन करेगा हमारा क्या स्वतंत्र राज होगा
1:35
तुम दोनों का पाटलिपुत्र में संयुक्त राज्य अभिषेक होगा पर अपने अपने प्रदेशों
1:42
में स्वायत्त सम्राट रहोगे संरक्षण और विदेशी आक्रमण की स्थिति में
1:48
दोनों एक साथ कम करेंगे पर अन्य विषयों पर अपना अपना निर्णय स्वयं लोग जैसी आपकी
1:56
आज्ञा गुरुदेव तो ठीक है हम अपने इस निर्णय को अनुबंध में बदल लें कहीं से कोई
2:04
शुभ समाचार नहीं मिल रहा है प्रभाव किन्हे हमें चार ओर से घर लिया है
2:16
तुमने सुना और का पुत्र virochak
2:21
चंद्रगुप्त सजा मिला है
2:33
[संगीत]
2:42
इन्होंने कभी हमारे खिलाफ को कुचल के रख दिया था [संगीत]
3:01
सुरक्षित [संगीत]
3:12
जो भी कर है महाराज उसकी बात करना बेकार पिता नहीं है तो क्या हुआ
3:18
[संगीत]
3:43
ताकि औरत हिम्मत ना हरे स्वामी हम लोग शत्रु को हराकर ही रहेंगे
3:49
[संगीत]
3:56
हो तुम कुछ समझ में नहीं आता करें
4:02
[संगीत]
4:17
आर्मी पूर्णिमा के दिन नगर में सर्व धर्म सम्मेलन की बात का रहे द का रहे द की स्वच्छ महाराज को चाहिए की वह
4:24
बौद्ध मत का समर्थन करें [संगीत]
4:32
यह लोग चाहते हैं की इस वर्ष जो प्रतिनिधि भेजा जाए वो बौद्ध हो
4:39
और उससे क्या होगा वनिक संघ [संगीत]
4:47
खरीद सकते हैं मैंने यह भी कहा की मदद के स्टूडियो को
4:53
ग्रहण लग रहा है बदला यह ग्रहण कैसे तले आने वाले संकट में वे लोग आपके लिए क्या
5:00
कुछ करेंगे [संगीत]
5:10
तुम तुम सच्चे अर्थों में
5:17
[संगीत] ठीक है
5:23
बहुत गया के समस्त श्रेष्ठ नागरिकों को सूचना दे दो [संगीत]
5:28
इस पूर्णिमा को जो धर्म सम्मेलन होगा उसमें मगर सम्राट का जो भी प्रतिनिधि होगा
5:37
वही बहुत मतानी आई होगा [संगीत]
5:50
कितनी मुद्राएं देता है [संगीत]
6:11
धीरे-धीरे हर वृत्त पर क्रम से अधिकार जमाते हुए केंद्र की ओर बढ़ो
6:19
नहीं नहीं चंद्रगुप्त एक आए केंद्र को हस्तगत
6:26
नहीं कर सकते बाहरी किनारो को तोड़ो
6:36
और फिर मध्य में पहुंचा बाहरी व्रत पर नियंत्रण pachakne के बाद
6:42
फिर केंद्र पाटलिपुत्र
6:48
सम्राट मैं फिर प्रार्थना करता हूं आपको राजधानी छोड़ देनी चाहिए
6:54
अगर हम राजधानी में राज महल में सुरक्षित नहीं है तो फिर कहां सुरक्षित रह पाएंगे
7:12
[संगीत]
7:19
रक्षा करूंगा बस मुझे उतना अधिकार दी थी
7:27
[संगीत]
7:38
[संगीत]
7:46
[संगीत] हमें भी बचा सके
7:53
[संगीत] महाराष्ट्र के बड़े बेटे मलय केतु चंद्रगुप्त के शत्रु और हमारे मित्र अमन
8:00
के पास संदेश भेज चुके हैं आप उनके यहां सुरक्षित रहे [संगीत]
8:16
आप राजधानी के सर्वोच्च शासक रहेंगे फिराक संगठन
8:30
[संगीत]
8:45
[संगीत]
8:53
तेरे [संगीत]
8:59
सम्राट [हंसी]
9:19
[संगीत]
9:32
आपकी हत्या का पता लेकर रहूंगा चाणक्य विश्व गुप्त को जिसने निस्ता दिखाई
9:38
दूंगा विश्व गुप्त और चंद्रगुप्त का रथ पीकर ही
9:45
मेरा खड़क शांत होगा समर की
9:52
सेवा करता रहूंगा [संगीत] आप ही मेरे लिए सम्राट हैं
9:58
[संगीत]
10:04
हमें फौरन प्रहार करना होगा महाराज सम्राट नंद की हत्या को लेकर पंजाब में
10:09
रोष है इसलिए हम उसका सहयोगी का सकते हैं विलंब हो जाने से चंद्रगुप्त को अपने को
10:15
स्टार करने का अवसर मिल जाएगा अक्षय हमारे मैन में आता है यदि हम साम्राज्य
10:22
सुभाष्टनी से विवाह कर लेते हैं [संगीत] तो मगध के सिंहासन पर हमारा अधिकार माना जाएगा
10:28
[संगीत]
10:35
प्रतीक्षा जाए [संगीत] हम चाहते हैं आप उनसे बातचीत करें और
10:40
उन्हें विवाह के लिए राजी करें [संगीत]
10:51
[संगीत]
10:57
[संगीत] शक्ति को बढ़ाने की राजनीति में ना कोई
11:03
शत्रु होता है ना मित्र प्रश्न अपनी सुविधा है और हमारी सुविधा यह
11:08
है की छात्र उसकी मैत्री का क्या मूल्य चुकाना होगा
11:15
चाणक्य से मिले प्रदेश से कुछ अधिक विभाग आप उन्हें समझा दें की व्याप के साथ
11:20
रहेंगे तो सच्ची समानता के अधिकारी होंगे और चंद्रगुप्त के साथ रहेंगे तो सेवा उत्पन्न के रहना पड़ेगा
11:28
[संगीत] हमें सोचना होगा नहीं महाराज सोचने के लिए
11:34
अधिक समय नहीं है आप चाणक्य से बदला लेने के लिए कितने mutaawle हैं हम जानते हैं चाणक्य धूर्त
11:41
में अपना सनी नहीं रखता की तरह नहीं बदलता है छोटे से छोटे अवसर
11:46
का पूरा पूरा लाभ उठाता है मैं उसे कोई भी अवसर नहीं देना चाहता हूं
11:51
[संगीत]
11:58
फिल्म कर दिया अब कैसे राज्याभिषेक से कुछ पहले
12:03
एक तोरण बार अचानक महाराज के हाथी पर गिरा और वह तत्काल सुधार गए और
12:10
महाराज विष्णु गुप्त ने जांच करने का आदेश मंत्री सकता और को दिया है और जांच का
12:16
परिणाम तोरण द्वार बनाने वाले कास्ट का आदमी स्वीकार किया है की द्वारका टूटना
12:23
केवल दुर्घटना मात्रा नहीं थी महाराज virochak की हत्या का षड्यंत्र रक्षा
12:28
द्वारा रचाया गया [संगीत]
12:38
हम उसे मौत के घाट उतार कर हम लेंगे चाहे हमें ब्रह्म हत्याकांड लगे
12:44
पाटलिपुत्र के बड़े चौंक में सूरी पर चढ़ाया जाएगा चंद्रगुप्त
12:51
नैतिकता के बचकानी कल्पना के लिए राजनीति में कोई स्थान नहीं है समझे किंतु गुरुदेव [संगीत]
13:02
संयुक्त राज्य अभिषेक एक जन्म था देखो विराज अराजकता को निमंत्रण देता है कौन सा
13:10
निर्णय कौन करेगा यही सोचने में राजदूत था इसलिए virochak को मरना ही था ये भी आपने
13:16
लिखा है
13:22
देखो चंद्रगुप्त आज नहीं तो कल amaat रक्षा रमन लेके तू
13:28
उसे बहला फुसलाकर अपनी ओर कर लेते और वो तेरे खिलाफ खड़ा हो जाता
13:34
राज्य की सुरक्षा के दृष्टि से उसकी मृत्यु अटल है
13:43
आपकी राजनीति में मनुष्य के लिए कोई स्थान नहीं है गुरुदेव
13:48
आप मनुष्य को मात्रक दांत का खिलौना समझते हैं साम्राज्य किसी भी मनुष्य की तुलना में
13:57
अधिक बड़ा है चंद्रगुप्त चाहे वो मनुष्य कितना ही महान क्यों ना हो
14:04
बेटी यदि हम आपके रक्षा का सहयोग एन मिलता [संगीत]
14:20
फिर भी चंद्रगुप्त मौर्य के रक्षा मंत्री केवल पुत्री से मिलने की सहयोग की भीख
14:25
नहीं मांगते कैसे आना हुआ मैं तुम्हारे लिए सम्राट की ओर से संदेश
14:37
[संगीत]
14:44
मेरे साथ वो मुझे समझते क्या है [संगीत]
14:57
क्या यह भी चाणक्य की कोई डांडिया चाल है
15:04
[संगीत]
15:18
गुरुदेव
15:39
क्या अब तक मैं उल्टे खड़े में पानी भरने की चेष्टा कर रहा था
15:48
क्या तू हमारा लक्ष्य नष्ट करवाइए
15:58
गुरुदेव
16:05
मैंने आपकी हर शिक्षा को निर्विवाद ग्रहण किया
16:13
गया दी मैंने मैन ली जब की मैं उसे विवाह के बिल्कुल विरुद्ध था मैं सुहासिनी को
16:18
नंद के चंगुल से बचाना चाहता था आपने माना कर दिया नंदकुमार डालने की मेरी जरा भी इच्छा नहीं
16:25
थी और गुरुदेव आपने उसकी हत्या करवा दी रोचक के साथ किए गए अनुबंध का मैं आदर
16:32
करना चाहता था पर आपने उसे भी समाप्त कर दिया और आज ये तू सम्राट बन्ना चाहता
16:38
मत भूल अपने पवन पर चल के शिक्षा पाने आया था मेरे पास आया था
16:46
परंतु गुरुदेव आपने गुरु होकर भी मुझे यह नहीं बताया की चंद्रगुप्त तू अपनी एक भी
16:53
इच्छा पुरी नहीं कर पाएगा अगर खोलकर कभी किसी के साथ सुख दुख की
17:00
बातें नहीं कर पाएगा गुरुदेव गुरुदेव आपने मुझे जीवन दिया है जो मात्रक पशु का होता
17:07
है
17:13
सम्राट के भाग्य में यही लिखा होता है
17:19
की सम्राट बनने की यात्रा पर या उसे यात्रा की समाप्ति पर तो सुख पाएगा मैंने
17:26
तुझे महानता का आश्वासन दिया एक विशाल समाज के नेतृत्व का आश्वासन दिया और वह
17:33
तुझे निभाना होगा चाहे उसे निभाते निभाते मेरे प्राण चले जाएं
17:38
क्यों चले जाएं क्यों मैं आपका सख्त सरकार करने के लिए अपने आप को खो डन
17:45
क्षमा करें गुरुदेव आपने जाना ही नहीं की मनुष्य क्या होता है
17:56
आपको छूकर कठोर शिलाखंड बना दिया आने वाली हर वस्तु को रोंगटे kuchalte
18:15
हुए कितना आसान होगा मेरा क्रोध करना
18:23
रूथ कर तेरा राज त्याग कर चले जाना
18:31
कितना सहज होगा तब तुम्हारा विनाश के गर्त में गिरना और गम
18:40
हो जाना मुझे क्या मुझे तुमसे क्या चाहिए
18:46
[संगीत]
18:58
पर मैं ऐसा नहीं करूंगा मैंने हवा में घोड़े दौड़ना नहीं सिखा है
19:05
चंद्रगुप्त तुझे दंड देने
19:10
को बर्बाद नहीं होने दे सकता इसीलिए मैं यहां हूं और रहूंगा तुम चाहो
19:18
[संगीत] या आश्चर्य कुछ समय पहले मेरे पिता ठीक
19:25
ऐसा ही संदेश चंद्रगुप्त की ओर से ले द और आप का रहे हैं की महाराज मेल के तुम
19:32
मुझसे विवाह की कामना रखते हैं मैं अचानक ही सबके आकर्षण की वस्तु बन गई
19:38
हूं [संगीत] आप उसे पर इसी दृष्टि से विचार करें
19:47
[संगीत]
20:00
अब मेरी समझ में नहीं आता मैं क्या बदला लूं इससे बदला लूं
20:07
होगा भी क्या बदला लेकर हम और लहू बहाने से क्या फायदा
20:14
सब कुछ निरर्थक ही तो है बेकार है [संगीत]
20:32
फिर आप किसी के पति कोई दायित्व नहीं रह गया है मैं निर्णय ले चुकी हूं
20:39
[संगीत] बनते आंसू लाल के आश्रम में जाऊंगी
20:44
[प्रशंसा] शायद वही मुझे शांति मिल सके [संगीत]
21:08
[संगीत] ओम शरण साम्राज्य का स्वागत है
21:15
स्वास्थ्य
21:42
और फिर बेचैन होने से मिलता थी क्या [संगीत]
21:53
राजनीति और शक्ति के स्पर्धा में रुचि नहीं लेता था
22:11
हूं
22:19
[संगीत]
22:27
स्वागत सम्राट [संगीत]
22:38
करते हैं
22:45
[संगीत] हम आपके आशंकाएं मिटाने के लक्ष्य स्वयं
22:52
उपस्थित हुए हैं सम्राट आपने गणराज्य को नष्ट कर दिया
22:58
[संगीत] हम आपकी इस नीति को समझने में असमर्थ है
23:07
हमें लगता है की गणराज्य के दिन अब लग चुके हैं कहीं भी देखें शक्तिशाली केंद्र
23:13
वाले samrajyon की आवश्यकता ही प्रतीत होती है हमको भी साम्राज्य की आवश्यकता है
23:18
साम्राज्य में पूर्ण गौरव का सके
23:24
[संगीत]
23:30
आपकी बात पर विश्वास नहीं कर का रहा किंतु फिर भी अनुग्रहित हूं की सम्राट
23:36
स्वयं आश्वासन देने के लिए हमारा मैन साफ है
23:41
एक प्रयोग के रूप में हम आपको सहयोग देंगे पौधों का आपसे कोई विरोध नहीं होगा
23:48
[संगीत]
24:02
हान वेट करना चाहेंगे
24:08
[संगीत]
24:21
[प्रशंसा]
24:29
[संगीत]
24:35
क्या सम्राट वैन में bhatkakar सहयोग से यहां पहुंचे हैं [संगीत]
24:43
कई बातें ऐसी होती हैं जिस पर मनुष्य का बस नहीं चल पता [संगीत]
24:55
नहीं चल पाया virochak की हत्या पर नहीं चल पाया
25:00
गणराज्य के विनाश पर नहीं चल पाया उनका
25:10
इसमें उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं
25:16
उपस्थित कर देते हैं यह निस्वार्थ भविष्य नशा हो जाता है उन्हें संसार का कल्याण
25:23
करने का [संगीत]
25:29
इसीलिए ना शंकाएं प्लेट हैं ना कुछ [संगीत]
25:37
जीवन पढ़ती को बदल दिया है आपका समाप्त कर दिया है अब वो स्वतंत्रता
25:45
की सास नहीं ले पाएगा अब तू इच्छा से कुछ
25:56
नहीं है सारी बातें बेकार है जबकि राजनीति में मेरा कोई विश्वास ही नहीं रहेगा
26:03
[संगीत]
26:09
[संगीत]
26:15
तुम्हारा संदेश प्रेम का संदेश नहीं था सम्राट का आदेश था
26:21
उपासना करती तो और क्या करती [संगीत]
26:32
[संगीत] है
26:47
सत्ता शक्ति नियंत्रण एक छात्र साम्राज्य
26:54
सत्य है चंद्रगुप्त इनसे अधिक जीवन में कुछ है
27:01
[संगीत]
27:08
[संगीत]
27:28
तुमने यह समारोह की तैयारी क्यों रुकवा दी
27:34
यह तो मंत्रिमंडल के अधिकार क्षेत्र में क्षमा करें गुरुदेव मुझे लगा की समा
27:39
रो नहीं है
27:45
जो राजा के नियंत्रण में चलता है दूसरा जो राजा के मंत्री चलते हैं और तीसरा दोनों
27:51
मिलकर तुम्हारा राज्य तंत्र दूसरे प्रकार का है और वो मंत्रियों के नियंत्रण में चलता है अब बताओ तुमने मंत्रिमंडल का
27:57
निर्णय क्यों बदला मैंने मंत्रिमंडल को सूचना दे दी है
28:02
और आपको सूचना देने में यहां आया हूं सारे देश में
28:09
कलिंग तक लोग भूखे मार रहे हैं उधर रक्षा इसका फायदा उठाने की कोशिश कर
28:15
रहा है उसने मलय केतु के साथ मिलकर गठबंधन कर लिया है अनेक गण राजा महाराजा यहां तक
28:21
की कुछ मेरे अपने संबंधी भी उनसे जा मिले हैं ये सब मिलकर parkli पुत्र की ओर कुछ करने
28:26
वाले हैं
28:32
ऐसे स्थिति में समारोह कैसे मनाया जा सकता है
28:37
यदि समारोह रद्द कर दिया गया तो प्रजा के मनोबल को धक्का पहुंचेगी तुम जैसा की संकट
28:45
की बात कर रहे हो वह और विकराल हो जाएगा नागरिकों को लगेगा की तुम संकट से ही नहीं
28:51
पर ए जाए परंतु मुझे ऐसा लगा
28:57
तुमने मुझसे क्यों नहीं पूछा
29:13
हम सम्राट हैं हमें प्रजा का सोचना पड़ता है
29:19
उनके कासन का उनके संकटों का तो अब सम्राट
29:26
और मंत्रियों से अलग रहकर निर्णय करेंगे उनके मंत्रणा की आपको आवश्यकता नहीं
29:34
लोकप्रियता ही आपको मंत्रणा देगी क्यों साधारण नागरिक की राय लेकर चलेंगे आप
29:40
चंद्रगुप्त लोकप्रियता का सत्ता खेल है और कुछ नहीं
29:45
क्या आपकी व्यवस्था में साधारण नागरिक का कोई स्थान नहीं
29:50
क्या उसे हमेशा गुलाम का जीवन ही जीना होगा
29:55
हिंदुस्तान नागरिक को लगातार समझाना पड़ता है नियंत्रण रखना पड़ता है इसी उद्देश्य
30:02
से मंत्रिमंडल ने निश्चित नियम और अधिनियम बनाएं ताकि एक अचार संहिता बने भूल गए नगर
30:09
को स्वच्छ रखने तक के लिए हमें शारीरिक और आर्थिक दंड विधान बनाने पड़े [संगीत]
30:15
तुम सम्राट जैसा आचरण नहीं कर सकते तो मत करो
30:26
[संगीत]
30:37
मौर्य शासन के साथ आपके सहयोग का प्रयोग कैसा चल रहा है भंते अभी तक तो शंकर के कामकाज में सम्राट ने
30:45
कोई हस्तक्षेप नहीं किया है
30:53
इस सेप का समय मिला होगा ना ही अफसर के आक्रमण कब है भी मामूली तो नहीं है
31:01
संभव है आपकी कथन में तर्क हो किंतु मुझे पता चला है की अरे चाणक्य धार्मिक विषयों
31:06
में तटस्थता की नीति रखते हैं
31:12
क्या यह बुलाया जा सकता है की वह कुटिल ब्राह्मण वैदिक
31:18
vaidikon और varmaashtam धर्म की शक्ति को बढ़ाना चाहता
31:24
हूं अब सुरक्षित नहीं है ऐसा क्रोध ऐसा क्रोध
31:33
का भंडार है सत्ता की दौड़ में भाग लेना संघ का कार्य
31:39
नहीं तो राजनीति का खेल खेल रहे हैं बनते रक्षा और चाणक्य के संघर्ष में आप जो
31:46
तटस्थता दिखा रहे हैं वह भी राजनीति का एक अंग है
31:55
किंतु यह मत भूलो क्या आध्यात्मिक शक्ति शाश्वत है सनातन है लौकिक शक्ति नश्वर है
32:02
क्षण
32:27
आपका लक्ष्य पत्नी पुत्र
32:32
[संगीत] समाप्त हो गया
32:43
जा चुका है यह तुम्हें जानना चाहिए
32:49
हो पर ए जाए
33:53
नंद वंश का शासन समाप्त हो चुका है vanshtak उठ गया है तुम्हारा विद्रोह भी
33:59
कुचल दिया गया है आज चंद्रगुप्त सम्राट और वह तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहा है मैंने
34:06
साम्राज्य सुभाष सैनी को वचन दिया था की बदला लेकर रहूंगा मैं पाटलिपुत्र नहीं जाऊंगा मृतक को और सन्यासियों के प्रति
34:13
निष्ठा निर्थक है मैन लो तुम चंद्रगुप्त को मगध के राज के
34:20
यहां से हटाने में सफल भी हो जाओ तो भी उसे यहां से बताओगे नंद का कोई
34:25
उत्तराधिकारी शेष नहीं और सुहासिनी बौद्ध बन चुकी है पर क्या इसका अर्थ यह तो नहीं
34:31
की मैं चंद्रगुप्त की सेवा करूं
34:45
तुम्हारे मगध के प्रति कोई निशानी वाद विवाद में भला आपसे कौन जीत सकता आचार्य
34:51
चाणक्य मैं कोई विद्वान aacharit होने प्रश्न विवाद में पराजित करने का नहीं मैं
34:58
तुम्हें तुम्हारा कर्तव्य पथ दिखा रहा हूं तुम नेक कार्य कुशल हो पर तुम्हारी क्षमता
35:03
को निष्ठा को कभी अवसर मिला निष्ठा पुरस्कार की भीख नहीं जाती मैं भी मानता
35:09
हूं नहीं चाहती पर तुम क्या यह नहीं मानोगे की कोई भी राज्य केवल मात्रा केवल
35:14
पर नहीं चल सकता राज्य के अधिपति को भी सक्षम और न्याय होना चाहिए और नंद वैसा
35:20
नहीं समाज को मैं तो कहूंगा पूरे जम्मू द्वीप
35:28
को तुम्हारे तुम्हारे प्रतिभा की सेवाओं की आवश्यकता है
35:33
एक स्वप्न को जीवित रखना है हमारे
35:40
[प्रशंसा]
35:47
[संगीत]
36:03
शासन स्थापित हो चुका का चुका [संगीत]
36:15
अत्यंत कार्य कुशल ईमानदार निष्ठा
36:20
रक्षा मंत्री बहुत वर्षों पहले मैंने एक शपथ ली थी आज
36:28
उसे शपथ से मुक्त होता आप सबके सामने मैं अपनी शिखा को फिर से
36:38
बनता सम्राट [संगीत]
36:50
आप अभी कैसे जा सकते हैं सम्राट
36:56
आचार्य का तो कम ही है अध्ययन करना और अध्ययन करना अब आप मुझे मुक्त करें
37:03
[संगीत]
37:13
[संगीत]
37:19
मेरा एक ही कार्य समस्त prajajan को यह आश्वासन लेना है की
37:27
मौर्य साम्राज्य में सबको स्वतंत्रता और समानता प्राप्त है चाहे वह वैदिक हो बहुत
37:34
हो जय हो शंकर हो चाहे वो चारबाग पंथी हो पहले यह कार्य पूरा करूंगा
37:42
उसके पक्ष अपना ग्रंथ पूरा करने में [संगीत]
37:53
[संगीत]
38:14
कैसा था वो साम्राज्य से 321 बरस पहले बना
38:19
था वो साम्राज्य जो लगभग समूचे भारत में और उत्तर में दूर काबुल तक फैला हुआ था
38:27
जहां तक ऊपरी सतह का सवाल है वह हर तरह से
38:32
एक तंत्र था यानी तानाशाही जैसे की
38:37
ज्यादातर साम्राज्य रहे हैं और आज भी हैं मगर काशन शहरों और गांव की स्टार पर
38:49
चुने हुए बुजुर्ग स्थानीय कारोबार संभालते द और स्थानीय स्वतंत्रता की
38:57
जाती थी और शायद ही कोई शासक होता था जो उसमें दखल दाजी करता था फिर भी
39:05
केंद्रीय सरकार की तरह तरह की गतिविधियां और असर होती थी और व्यापक
39:13
का लीजिए की मौर्य साम्राज्य कुछ बातों में आज की tanashahiyon की याद दिलाता है
39:22
इस तरह भारत का पहला साम्राज्य अस्तित्व में आया जैन परंपराओं से पता चलता है की
39:29
चंद्रगुप्त के शासनकाल में भयानक अकाल पड़ा था जिसे देखकर चंद्रगुप्त के मैन में
39:34
संन्यास लेने का विचार प्रबल हो उठा उसने जैन धर्म की दीक्षा ली और दक्षिण में
39:41
शहडोल बोला जाने का निश्चय किया तुम बिना सूचना दिया है हो चंद्रगुप्त
39:48
परंतु सुबह अवसर पर आए हो आज अर्थशास्त्र की रचना पुरी हुई
40:04
गुरुदेव मैं आपसे विचार विनय करने आया हूं मैं जानता हूं
40:20
यही ना आचार्य आपने कैसे जाना तुम्हें आश्चर्य क्यों हो
40:27
रहा है मेरे आसपास का घटित होता है मैं सदैव जानने का प्रयत्न करता हूं परंतु
40:34
चंद्रगुप्त तुम निजी मुक्ति के पीछे दौड़ रहे हो
40:40
इस संस्कृति के रस लिया समाज की मुक्ति की ओर से तुमने आंखें मुंड
40:47
ली ठीक है जैसा चाहे करो
40:53
मैं कौन होता हूं एक सन्यासी को उसके चुने मार्ग से लौटने का प्रयास करने वाला
41:10
पुत्र जाऊं बिंदुसार के प्रशासन को दिशा डन और फिर
41:17
लौटकर यहां चंद्रगुप्त मा
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बिंदुसार के देखभाल करूंगा मेरी मुक्ति तुम्हारी मुक्ति जैसी नहीं
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मेरे मुक्ति समाज के मुक्ति में इस सभ्यता की मुक्ति में
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[संगीत]
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छा या [संगीत]
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[संगीत]
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[संगीत]
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तुम भी आखिर
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सकता नहीं दे सके इतना सा आनंद
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[संगीत] इतना सोचा था की चलेंगे संग संग पर केवल
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दुख पाया कैसी नियति हमारी जिसको यह भाया
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सन्नाटे के कितने सारे बूढ़े हैं मैंने धीरज के कच्चे धागे में
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पर अब क्या उसका आज तुम्हें मैं देख रही हूं श्रवण वेश में
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पंत अलग [संगीत]
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थी लेकिन जैसे मैंने पाया आनंद कर्तव्य अलग लेकिन फिर भी हम जैसे संग संग
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[संगीत] अपने मकसद को हासिल करने के लिए चाणक्य
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भले ही बेईमान और जीत रहा हो लेकिन वह यह कभी नहीं भुला की अकलमंद दुश्मन को कुचलना
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के बजाय दोस्ती करके जितना बेहतर होता है
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इसलिए यह कहानी होती है और अंत में एक मजबूत राज्य की
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एनआईबी डाली जाती लिखे हुए इतिहास में पहली बार हम पाते हैं
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एक विशाल केंद्र कृत राज्य पैदा हुआ
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[संगीत]

