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Prarthi by Sukanta | কবিতা - প্রার্থী | কবি - সুকান্ত ভট্টাচার্য | আবৃত্তি - সেলিনা জাহান
Apr 1, 2025
কবিতা - প্রার্থী
কবি - সুকান্ত ভট্টাচার্য
আবৃত্তি - সেলিনা জাহান
Kobita - Prarthi
Kobi - Sukanta Bhattacharya
Abritti - Selina Jahan
Copyright - www.bangla-kobita.com
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सूरज हिम शीतल सु दीर्घ रात तुमार
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थाकी जमन प्रतीक्षा थाकी कृषक चंचल चोख
0:22
धान काट रोमांचक दिन गुर
0:25
जन हे सूरज तुम तो जानो आ रम काप कतो
0:32
अ सरात खक लिए एक टु काप का े कटे हम
0:41
सकाल एक ु रु एक ु सोर चे मने दामी र हमद
0:56
तुजे रे ता आ दियो आ उप दियो रास्ता धार
1:03
उलंग लेटा के हे सूर तुम ता दि तु
1:30
आज किंतु हम तुमर अ कपण उत्ता