0:14
जबलपुर के रांची थाना अंतर्गत ट्रेन
0:16
दुर्घटना से मृत युवक की शिनाख्त ना होने
0:19
पर जब लावारिस की स्थिति में उसका अंतिम
0:22
संस्कार करने की प्रक्रिया पुलिस द्वारा
0:24
कराई जा रही थी तभी अचानक मौके पर मृतक के
0:27
परिजन जा पहुंचे। पुलिस से प्राप्त
0:29
जानकारी के अनुसार उन्हें सूचना मिली कि
0:32
एक व्यक्ति की ट्रेन की पत्ती के पास लाश
0:34
पड़ी हुई है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव
0:37
की पंचनामा कार्यवाही की। जैसे ही पुलिस
0:40
कार्यवाही करने के बाद शव को लावारिस
0:43
स्थिति में अंतिम संस्कार करवाने पहुंची।
0:45
तभी अचानक रांची निवासी मृतक के परिजन आ
0:53
राज थाने संपर्क क्रमांक 51 2025 नवंबर तक
0:58
पटेल रामलाल पटेल 40 साल से ट्रेन घटना से
1:10
दौरान उसकी जो है नहीं हो पाई थी प्रयास
1:17
बाद परिजन द्वारा पहचान
1:35
परिजनों ने बताया कि मृतक का नाम संतोष
1:37
पटेल है जो खमापुर क्षेत्र के गोपाल होटल
1:40
के पीछे रहते हैं। पूर्व में भी अक्सर
1:42
रात-रात भर कहीं चले जाते थे। घटना वाले
1:46
दिन विवेक घर से बिना बताए निकल गए थे।
1:48
जैसे ही उन्हें WhatsApp और Facebook के
1:51
माध्यम से सूचना मिली तो उन्होंने तत्काल
1:53
पहचान करते हुए मृतक को पहचान लिया।
1:56
बहरहाल पुलिस द्वारा शव मृतक के परिजनों
1:59
को सौंपते हुए अग्रिम कार्यवाही की गई।
2:03
इनका नाम संतोष पटेल है।
2:05
धमापुर के रहवासी हैं। गोपाल होटल के आगे
2:10
ये घर से मतलब यूं ही ऐसे निकल गए कामवाम
2:15
बच्चों को अपने स्कूल छोड़े और फिर जो भी
2:17
हो मतलब गए हैं घूमने।
2:20
इसके बाद हम लोगों ने ध्यान नहीं दिया कि
2:22
भाई अभी तो कामवाम पे गए होंगे।
2:25
और उसके बाद जब रात हो गई नहीं आए तो यहां
2:29
कि कहां गए हैं। कई बार काम पे चले जाते
2:31
हैं और फिर गाड़ियों से आते नहीं है। रात
2:32
में 12 1:00 बजे आते हैं।
2:34
नहीं आए तो अभी तक कभी ऐसा कुछ हुआ नहीं
2:36
तो किसी को कुछ लगा नहीं। बस हो गया।
2:38
सुबहरे ये हुआ कि किसी ने खबर दी Facebook
2:43
तो सुबह हुई तो ये हुई कि अपनी फोटो डाली
2:46
जाए। भाई आए नहीं क्या हुआ? Facebook
2:48
द्वारा पता चला कि मतलब कहीं कुछ अनहोनी
2:51
हुई है। तो मतलब थाने हम लोग गए। वहां
2:56
जाके आप पता कर लो। तो हम लोग थाने गए तो
2:58
मतलब वहां स्पष्टीकरण हुआ कि यह ऐसासा हुआ
3:02
है। वहां जाकर हम लोगों को पता चला कि वो
3:05
हमारे ही जीजा थे। मतलब हमारे ही परिवार