Islam is the only religion in the world addressed to people all over the world. Islam is a modern religion and fourteen hundred years later it is still guiding millions of people today. Islam is the only religion that has encouraged people from all over the world to come together on a single platform so that humanity can move forward.
#Dr. Amjad Bhatti YT
#World's Major Religions
#World's Biggest Religions
Show More Show Less View Video Transcript
0:00
झाल
0:04
अजय को
0:06
हुआ है
0:12
झाल
0:17
को विस्मिल्लाह रहमान वहीं डॉक्टर अमजद
0:21
अली भट्टी
0:22
कि एक नए मोदी के साथ आखिर में हमारा आज
0:26
का मौजूद दुनिया के बड़े शहर सीरीज में
0:29
इस्लाम के हवाले से हैं
0:35
कि इस्लाम से काजल दुनिया में जितने भी
0:37
मजा है दूसरे वह एक कौम के साथ में सोचते
0:40
किसी दूसरे को इसमें शामिल होने की इजाजत
0:44
नहीं थी जैसे यह उदित और इसाई एक मजहब
0:49
में बनी इस्राइल के लिए मखसूस हो चुका था
0:52
तब तक टेस्ट रानियों का मतलब करार पाया
0:55
कन्फ्यूशंस और लौंग से के अकार को चीनियों
0:58
ने अपने लिए मखसूस समझा हिंदू मत बहुत
1:01
महत्व जांगनाथ हिंदुस्तानियों के लिए राहत
1:04
आयुक्त बने रहे अपने ही मजा है अब
1:06
ज्यादातर जादू तूने और तो हम प्रति किरदार
1:10
में फंसे रहे दुनिया की को में बातचीत के
1:15
मुताबिक का प्लेटफॉर्म कि अदम मौजूदगी के
1:18
बावजूद तबाही और बर्बादी के दाने पर पहुंच
1:21
चुकी थी कि
1:25
कि यह वह वक्त था जब दुनिया की मुद्रा
1:28
वाला मजा है अपना हक की की पैगाम भूल चुके
1:31
थे और जब मजहब का हुलिया बिगाड़ जाए तो वह
1:35
इंसानियत के लिए फायदे की बजाय नुकसान का
1:38
वायरस बन जाता है और राय आलम ने ऐसी विद
1:41
पैदा हो चुकी थी जो बाहरी फंसा दो इंतजार
1:45
का वायरस बन रही थी चार जाना मतलब प्रति
1:49
और मुलाकात बस्ती का दौरा था मालो दौलत की
1:53
मोहब्बत को लोगों को अपना इमान समझ बैठे
1:56
थे इन हालात में इस्लाम दुनिया भर के
1:59
किसानों के लिए बखूबी तो भाईचारे और सुलझा
2:02
हुआ उनका पालम जी बेगा लेकर आए इस्लाम के
2:07
लोग भी मैंने इस्लाम की के हैं
2:10
कि यह जिंदगी के हर पहलू पर एक बात से
2:12
मुकर नजर रखने वाला तीन है यों इस्लाम का
2:16
तिलक इंसानी जिंदगी की मजमूई सूरत हार से
2:20
बड़ा गहरा है
2:21
कि यह कैसा निशान है याद है जिसकी बुनियाद
2:24
वाला इंसान इकतार पर कायम है
2:28
है इसका एक लाइन राम मुसाफिर अदल व इंसाफ़
2:32
वक्त और भाई जाए जैसे बुनियादी उसूलों पर
2:35
उस्तुवार है इस्लाम की एक खूबी यह भी है
2:39
कि वह इंसान को अच्छे अमाल करने के लिए यह
2:42
तो जहर की तरह काम करता है इस्लाम की
2:45
निगाह में इंसान के अशरफुल मखलूकात होने
2:48
का दारोमदार था उसके अच्छे और नए कमाल पर
2:51
है इस्लाम में अल्लाह इंसानी मुख्यत के
2:55
रसूल के लिए इबादत का एक मौसम ने दाम
2:58
मौजूद है जिस पर अमल की पैरा होकर इंसान
3:01
दुनिया भी और ऊपर भी कामयाबी या सहित कर
3:05
सकता है यो इंसान को इंसानियत के मुकामो
3:09
मरतबा से रूस नाश कर आने का नाम इस्लाम है
3:13
कि इस्लाम का पैगाम दरअसल इंसान को जमीन
3:16
से उठाकर आसमान तक ले जाना और उसकी
3:19
जिस्मानी कमजोरियों को दूर करके उसे
3:22
मलाइका के मुकाम तक ले जाना है दूसरी जाना
3:27
दौरे हाजि़र की मगर भी तहजीब इंसान की
3:30
रूहानी तरक्की की गाय नहीं है
3:33
और कुछ कहना है कि माधुरी के भूलें ने
3:36
इंसान की शक्शियत को कुचल कर रख दिया है
3:40
इंसान खुदा के सामने अपने आप को कुर्बान
3:43
करने पर मजबूर कर दिया गया है और साथ ही
3:48
महक इंसान को इंतहाई मजबूर करते हैं कि वह
3:51
अपने इरादे को बेबस समझें जब खुदाई राधे
3:55
से उसका था का बल को तो वह अपने इरादे को
3:58
विदेशी अब समझे मगर भी तहजीब का यह भी
4:01
कहना है कि मुजाहिद ने इंसान को मजबूर कर
4:05
दिया है कि वह हर चीज रब से आज भी और मिनट
4:09
तो समाजक से मांगे यू मगर भी तहजीब और
4:12
इंसान दोस्ती का फर्ज पा दिशा परेशानियां
4:15
के सुनाने से ही मजबूत फलसफों की मुहाल पद
4:19
करता चला आया है वजह और इंसान दोस्ती वाली
4:23
तहसील का मकसद इंसान की अजमत और निजावत को
4:26
बहाल करना है अगर इस्लाम का जिक्र करें तो
4:30
सूरत एल्बम्स प्ले कर दो
4:32
कि हम समझते हैं कि इस्लामी तालीमात में
4:35
इंसान की कायनात में मौजूदगी को अहमियत आ
4:38
सकें इंसान पैदाइशी तौर पर हंस मत और
4:41
बुलंदी के साथ नया व्रत ए इलाही पर फेमस
4:44
हुआ है जिसे खुदा ने अपने हाथों से बनाया
4:47
है और उसमें अपनी रूप होंगी है
4:49
झाला ने इंसान ने अपनी सफलत का पक्ष रखा
4:53
है और तसली की अवधि में इस लाइन से उसकी
4:56
फितरत में मदद करती हैं इससे खबर हम
5:00
दुनिया के मुखतलिब मिला है वह अकाउंट में
5:02
इंसान दोस्ती के हवाले से उनका जायजा ले
5:05
चुके हैं अपने पूरी सीरीज की है जिसमें
5:08
हमने दुनिया के
5:11
कि बड़े-बड़े मुजाहिद का ज़िक्र किया है
5:14
कि दुनिया के हर बड़े मजहब में इंसान की
5:17
अहमियत को तस्लीम किया गया है और साथ ही
5:20
आलावा शक्ति तंजीम के लिए हकूके इंसानी का
5:24
तहफ़्फ़ुज़ भी किया गया है क्योंकि याद
5:27
रखे इंसान दोस्ती का फलसफा इंसान को ही हर
5:30
चीज की दुनिया भर में वर मांगता है इसलिए
5:32
हम पहले इस्लामी तालीमात में इंसान की
5:36
अहमियत और उसकी कतरों कीमत का अध्ययन
5:39
करेंगे और फिर इंसानी अपूर्व के बारे में
5:42
बहस करेंगे अ
5:44
कि क़ुरआने मजीद के मुताबक इंसान को नहाए
5:47
कुंतावाला यार पर तकलीफ किया गया है उसे
5:51
जहर अवैध पातन की तमाम खूबियों पर
5:54
सलाहियतों से नवाजा गया है क्योंकि इंसान
5:59
अल्लाह की फ़ितरत पर पैदा किया गया है
6:01
इसलिए वह पैदाइशी तौर पर मेक और साले है
6:05
अलबत्ता कभी-कभी शैतान उस पर ढाल पाया
6:09
जाता है और वह वक्त निकालकर उसकी बात मान
6:12
लेता है मगर यह सूरतेहाल मुस्तकबिल नहीं
6:15
रहती मौका मिलते ही वह दोबारा हैवानी और
6:19
शिवानी तकाजों पर कब पा लेता है इस्लाम
6:24
में इंसान इसाइयत और हिंदू मत की तरह
6:26
पैदाइशी गुनाहगार नहीं महापौर उसे एक
6:30
मखसूस जिंदगी अदा करता है इंसान एक ऐसे
6:34
माहौल में पैदा होता है जहां मुख़ालिफ़ों
6:36
मुंह फालतू बातें पूरी ताकत से आगे पीछे
6:40
होती हैं
6:41
में इंसान अपनी अक्ल के बलबूते पर मुफ्त
6:44
तो वह क्यों से फायदा असल करता है और
6:46
मुख्य मुद्दों का मुकाबला करता है तो
6:49
लताला ने इंसान को जमीन पर अपना खलीफा
6:53
बनाकर भेजा है अजमत ए आदम के जीवन में
6:57
चंद्र पुरानी याद के हवाले मलाई जाऊं
7:01
में तर्जुमा पर हमने आदम की औलाद को इस
7:04
धरती और हमने उनको कुछ की और दरिया में
7:08
सवार किया और नफीस में फीस चीज़ें उनको
7:11
अता फरमाए पर हमने उनको अपनी बहुत सी
7:14
मखलूक पर फॉर की अति निकट जगह पुराने पाप
7:18
में शामिल है तरफ महक कि हमने इंसान को
7:22
बहुत खूबसूरत सांचे में डाला है फिर उनमें
7:25
जो बूढ़ा हो जाता है हम्म उसको पति की
7:28
हालत वालों से भी 75 कर देते हैं
7:32
है लेकिन जो लोग मान लें और अच्छे काम किए
7:35
तो उनके लिए इस क्रश वाला है जो कभी
7:38
मूर्खता ना वह का
7:41
मैं एक और जगह शांति रब्बानी है तर्जुमा
7:44
अल्लाह के नजदीक तुम सब में बड़ा इज्जत
7:47
वाला वही है जो सबसे ज्यादा पर है इस
7:50
प्रकार है
7:53
ए टेक्निकल नक्षत्र मानते हैं तर्जुमा
7:57
अल्लाह ऐसा है जिसने आसमानों को और जमीन
8:00
को पैदा किया और आसमान से पानी योनी वर्षा
8:04
या फिर उसने पानी से फलों की किस्म से
8:07
तुम्हारे लिए रिमूव कर दिया और तुम्हारे
8:10
नपा के वास्ते कश्ती और जहाज को उस शक्कर
8:13
बनाया ताकि वह खुदा के मुद्रित दरिया में
8:18
चले और तुम्हारे नपा के वास्ते लहरों को
8:21
अपने कुदरत का असर अब बनाया और तुम्हारे
8:25
वास्ते
8:27
मैं और तुम्हारे पापा के वास्ते सूरज और
8:30
चांद को अपनी कुदरत का न शहर बनाया जो
8:33
हमेशा चलते ही रहते हैं और तुम्हारे नपा
8:37
के वास्ते रात और दिन को अपनी कुदरत का
8:40
मुखर बनाया और जो चीज तुम ने मांगी तुमको
8:44
हर चीज दी और अल्लाह ताला की नेमतें अगर
8:48
शुमार करने लगो तो शुमार में नहीं ला सकते
8:51
मगर सच यह है कि आदमी बहुत ही बेनिफिशियल
8:55
ही नाशुक्रा है
9:00
कि इन तमाम पुरानी याद के मुताबिक यहां से
9:02
पता चलता है कि इंसानी जिंदगी इत्तेफाक की
9:05
हाथ से का नतीजा नहीं बल्कि इसकी तकलीफ
9:09
कला के इरादे से और बाकायदा मंसूबा बंदी
9:12
के तहत हुई है उजाला ने इंसान को जिंदगी
9:15
और इंसानियत जैसे अजीम तोहफों से नवाजने
9:19
के साथ जमीनी मखलूकात और कायनात की
9:22
बेशुमार अशरफ पर कुदरत पक्षी है अल्लाह ने
9:26
इंसान को बेपनाह सलाहियतें और ताकतें यह
9:30
था कि हैं देवता वसायल पर कब्जा था किया
9:34
जिनसे वह जमीनी काम ले सकता है और तकरीर
9:38
बीपी खुदा इंसान का तार अपने नायक के तौर
9:42
पर कराता है जो आसमान पर ज्वेलर्स और हम
9:45
यह तो जानते फिर आपको इसका इन आप में
9:48
हासिल है इंसान को दुनिया में उसी में से
9:51
हिस्सा था भरमाया है
9:53
कि इससे साफ जाहिर होता है कि यार परेशान
9:56
दोस्ती का सफर हो या निशानियां का सफर
10:00
इंसानियत को जो मुकाम इस्लाम ने
10:04
है अतः किया है वह सिर्फ किसी और ने शाम
10:07
कर्ज माफी है यह सफर्स पर ने नहीं बख्शा
10:10
या नहीं इस्लाम ने अस्मत ए आजम के तसव्वर
10:14
को महल ज़ुबानी आज तक नहीं रखा बल्कि ऐसा
10:17
ही देखो जिंदगी के हक में शामिल करके एक
10:21
आलमगीर इंसानी बिरादरी का तसव्वुर पेश
10:24
किया है पुरानी बात में अल्लाह तआला
10:27
फरमाते हैं लोगों तुम्हारा परवरदिगार एक
10:32
है और तुम्हारा बाप है क्या तुम सब भुला
10:35
दे आज हो और आदम मिट्टी से बने थे अल्लाह
10:38
के नजदीक तो मैं सबसे ज्यादा मॉल्स व है
10:42
कि तुम मैं सबसे ज्यादा पास है किसी अरबी
10:46
को अ जमीन पर तो जिल्लत नहीं मगर तक व की
10:49
बुनियाद पर एक दूसरी रवायत है
10:54
कि किसी अरबी को धीमी पर फजीलत नहीं और
10:57
किसी अजमेर को एबी पर प्रति रहते हैं तुम
11:00
सब मिला दिया गरम हो और आदम मिट्टी से बने
11:03
थे इस्लाम में स्पून उस पर फक्र करना
11:07
सख्ती से मना है
11:10
और अल्लाह ताला ने जाहिलियत के विरुद्ध पर
11:13
आईं जहां पर फक्र को खत्म कर दिया इंसान
11:16
या ह्यूमन पास है या फौज ब्रोशर कि तुम सब
11:21
पुलाव यादव को और आदम मिट्टी से बने थे
11:26
कि हम दिगर बताया की तारीख में पड़ चुके
11:28
हैं कि दुनिया के तमाम विधायक ने
11:30
अपने-अपने हित में इंसानियत को संवारने और
11:34
उसकी फल दुनिया भी फुला की कोशिश की है
11:36
मगर इस्लाम के अलावा किसी मजहब ने कायनात
11:40
मे इंसानियत का बिल अनुभव मरतबा होकर नहीं
11:43
किया यह इस्लाम ने दुनिया भर के मुताबिक
11:47
का जौहर अपने अकार में
11:50
में पेश किया है नबी सल्लल्लाहो अलैहे
11:53
वसल्लम ने इस बात की बहुत फरमाइश वह
11:56
इंसानों के लिए कोई नया पैगाम नहीं लेकर
11:59
आए बल्कि आप सल्लल्लाहू अलैहिवसल्लम उन
12:02
सच्चाइयों की ताली दो तलकीन करने के लिए
12:05
आए हैं जिनकी तालीम दूसरे अंबिग्राम पहले
12:10
दे चुके हैं
12:12
कि इस्लामियां कालेज की रोहित रॉय इंसान
12:15
दोस्ती के अवसर मुस्लिम मूसा बाद अदलखा
12:19
रात एहसान गुलाम और औरतों से अच्छा स्वरूप
12:22
अपने हम दिल्ली सबको तो और आए दोस्तों और
12:25
हम साथियों से अच्छा से भूख यतीमों के माल
12:28
की फादर यह सब क़ुरआने मजीद की आयत का
12:31
पोर्शन है बल्कि बार-बार इन की तलकीन की
12:35
गई है मसलन एक जगह अल्लाह तआला फरमाते हैं
12:39
का तर्जुमा खूब सारा कमाल इसी में नहीं आ
12:43
गया कि तुम अपना मुंह मशरक को कर लो या
12:46
मगर को लेकिन असली कमाल तो यह है कि कोई
12:50
शख्स अल्लाह ताला पथ यकीन रखिए पर किया
12:52
मतदान पर और वरिष्ठता और सब खुद बेशुमार
12:56
दिया पर और पैगंबरों पर और माल देता हूं
12:59
अल्लाह की मोहब्बत में रिश्तेदारों को और
13:02
यदि मोड़ को और होता है हमको और बे खर्च
13:05
मुसाफिरों पर सवाल करने वालों को पर गर्दन
13:09
छुड़ाने बालों को
13:12
के एनिमल की अवधि रखता हो और ज़कात अदा
13:15
करता हो और जो खास कि न खाएं तो हम आपके
13:19
साथ यह मालवीय रखती हूं कि अपनी बहनों को
13:22
पूरा करने वाले हो जब बहन कर लें और वह
13:26
लोग मुस्तक खन रहने वाले हो तंगदस्ती में
13:29
और बीमारी में और कत्ल यह लोग हैं जो
13:32
सच्चे कमाल के साथ मौजूद हैं और यही लोग
13:36
हैं जो सच्चे मुत्तक़ी कहे जा सकते हैं
13:41
मैं एक और मुकाम पर निशान डेढ बाहर निकाला
13:44
है लोगों को अपने परवरदिगार से डरो जिसने
13:47
तुमको एक जानदार से पराजित किया पुरुष
13:50
जानदार से वह उसका जोड़ा पैरा किया और उन
13:54
दोनों से बहुत से मर्द और औरतें फैलाई और
13:58
तुम खुद आए ताला से डरो जिसके नाम से एक
14:01
दूसरे से मुतालिबा किया करते हो और और
14:04
करावत से भी डरो बल यकीन अल्लाह तुम सब की
14:08
तुला रखते हैं और जिन बच्चों का बाप मर
14:10
जावे उनके माल उनको पहुंचाते रहो और तुम
14:14
अच्छी चीज से बुरी चीज को मत बदलो उनके
14:17
माल मत खाओ अपने मामलों के रहने ताकत ऐसी
14:20
कार्रवाई करना बड़ा गुनाह है आज की दुनिया
14:24
में किसी शख्स की मौत शक्ति हैसियत का
14:26
अंदाजा इस मामले में उसे हासिल सुविधा
14:29
बुनियादी अब रूप से लगाया जा सकता है कि
14:31
तमाम नियमों और वॉशरूम में लोगों को कुछ
14:34
ना कुछ अपना योग आसन हैं मगर इस्लाम ने
14:38
युवक को इंसान को दिए हैं वह आलम
14:41
यह की बुनियाद पर कायम हैं उनका इलाकों
14:43
पित्त लाख दुनिया के किसी भी इलाके के और
14:46
लोगों पर किया जा सकता है आप सल्लल्लाहो
14:49
अलैहे वसल्लम का उच्चतम फिदा के मौका पर
14:53
दिया गया खुदबा हकूके इंसानी कि अब लिंग
14:57
दस्तावेजात में से एक है आप सल्लल्लाहो
15:00
अलैहे वसल्लम ने फरमाया है
15:03
मैं तुम्हारा खून और तुम्हारा माल इस तरह
15:06
आराम है जैसे यह दिन यह महीना और यह शहर
15:09
यह याद रखो ज्यादा बात पर हम अपनी हर अमल
15:14
बात है और जाहिलियत के तमाम पूजन इंतकामी
15:18
हॉर्न बदल कर दिए गए हैं आगे चलकर आप
15:21
फ़रमाते हैं खबरदार जुल्म ना करना खबरदार
15:25
जुल्म ना करना खबरदार जो लोग ना करना किसी
15:30
मुसलमान के माल में से ना जायज हिस्सा ना
15:33
लेना चाहिए कि बेहतर तंजीम के लिए अल्लाह
15:37
इंसाफ का कयाम अमल में लाना जरूरी है जिन
15:41
वोटरों में अधिकांश अपना हो उस ज्यादा देर
15:44
तक कायम नहीं रहते बल्कि यह नियर मजबूत
15:48
बढ़ जाती है जब अल्लाह ताला इंसाफ करने
15:50
वालों को अपना दोस्त करार देता है
15:54
कि पुरानी मस्जिद में है
15:57
में तर्जुमा और अगर आप फैसला कर दे तो
16:00
उनमें अ दल के मुख्य फैसला की चाहिए बेशक
16:04
अल्लाह ताला हल करने वालों से मोहब्बत
16:07
करते हैं एक और मुकाम पर योर विशेज है तब
16:12
तुम हुआ था विमान वालों इंसाफ पर को कायम
16:16
रहने वाले अल्लाह के लिए गवाही देने वाले
16:18
रहो अगर चेतन अपनी इज्जत पर हो या के
16:22
वालिदैन और दूसरे अस्पतालों के मुकाबले
16:24
में हो
16:26
कि वह शख्स अगर अमीर है तो और अगर ग्रीस
16:30
है तो दोनों के साथ अल्लाह को ज्यादा
16:33
ताल्लुक है सो तुम फैशन शिकायत वह मत करना
16:37
कभी तुम हाथ से हट जाओ और अगर तुम करीब
16:42
यानि करोगे यह पहलू ही करोगे तो मिला शोभा
16:45
अल्लाह ताला तुम आए सब कमाल की पूरी खबर
16:48
रखते हैं
16:50
मैं इंसाफ करने के मामले में दोस्त और
16:53
दुश्मन का फर्क नहीं करना चाहिए क़ुरआने
16:55
मजीद जिसकी सख्त महान हेल्प करता है कि
16:57
इंसाफ काम करने में अपने और पराए का फर्क
17:00
प्रभार रखा जय हो
17:04
ओम शांति बाहर निकाला है तर्जुमा ईमान
17:08
वालों अलग-अलग के लिए पूरी पाबंदी करने
17:11
वाले इंसाफ के साथ शहादत अदा करने वाले
17:15
रहो और अगर किसी खास लोगों की अदावत तुमको
17:19
इस पर पास ना हो जावे कि तुम मदद ना करो
17:23
अगर किया करो कि वह तक वास ज्यादा करीब है
17:26
और अलार्म सेट करो विलास हुआ अल्लाह ताला
17:29
को तुम्हारे सब हमाल की पूरी इतला है
17:34
कि सलमान नाइंसाफी मुरम्मत के लायक है
17:36
इस्लाम ने जालिम की मुहम्मद और मुस्लिम कि
17:40
हमारे का ऐलान सरेआम यह है कि दुआ और
17:45
अल्लाह जालिमों को हदायत नहीं देता जेलों
17:49
के लिए 70 दैवीय जब प्यार किया गया है
17:52
फरमाते हैं और हमने जुर्म करने वालों के
17:56
लिए दर्द नाक अज़ाब तैयार कर रखा है
18:00
कि हज़रत अबू हुरैरा से रिवायत है की
18:02
रसूल्लल्लाह ने फ़रमाया जिसने अपने भाई पर
18:06
किसी तरह का जुर्म किया उसकी आबरू रेज़ी
18:08
की हो या कोई और जुर्म किया हो उसको चाहिए
18:12
कि आज उस दिन से पहले अपने जुर्म को माफ
18:16
कर वाले जब उसके पास दूसरों को देने के
18:19
लिए दिल मत देना यार कुछ पास ना होंगे
18:22
वरना उसके पास जो नैक कमर होंगे वह
18:26
बकरियां जल उससे छीन लिए जाएंगे और अगर नए
18:30
कमल कम होंगे तुम मजलूम के गुना लेकर उस
18:33
पर डाल दिए जाएंगे
18:35
कि इसके अलावा हम देखते हैं कि इस्लाम ने
18:37
वाले ध्यान क्या खूब लाभकारक औरतों के हक
18:41
मुसलमानों के बारे में मामलात गुलामों के
18:43
बारे में हुकुम हम सायों केहू त आके
18:46
जिंदगी का कोई शोभराज ऐसा नहीं छोड़ा
18:49
जिसके बारे में इसमें बजे यह दायित्व
18:53
दुगना हो इस्लाम की सबसे बड़ी खूबी इसका
18:56
इधर अध्ययन के अंतर्गत रवादारी का रवैया
18:59
और किसी से अपनी बात जबरदस्ती मनवाने की
19:03
घुमाने जाता है पुरानी मस्जिद में शिक्षा
19:06
अधिकारी ताला है
19:09
के दिन में जबरदस्ती
19:12
में काफ़ी नर्म से ही कई मौका नहीं है
19:17
मैं इग्नोर जगह है और आप कह दीजिए कि यह
19:20
दिन हक तुम्हारे रब की तरफ से आया है
19:25
मैं सूरज जिसका जी चाहे यह मान लिया वे और
19:28
जिसका जी चाहे का ऑफर रहे थे
19:31
कि इस्लाम जब से बाहर निकला तो उसे इराक
19:34
मिस्टर श्याम मोरे राम जैसी इन तहसीलों से
19:37
वास्ता पड़ता अर्पित ऐसी वह तो मतदान के
19:40
पास मंदिर में कबायली निजाम था जबकि यह
19:43
शहरी तर्ज पर थी जहां इस्लाम के सा 10 कार
19:47
को उस अहमद के मुताबिक ढाला गया इसके
19:51
नतीजे में वषरें में 63 लाख रुपए नजर
19:54
सामने आने लगे सादा तहजीब और पेचीदा तहजीब
19:58
की अपनी-अपनी जरूरी है आमतौर पर हाथ होते
20:01
हैं नतीजे में मुसलमानों में कई फिरके
20:04
वजूद में आ गए मगर इस्लामी तारीख में हम
20:08
देखते हैं कि अकलियत पर हम अपनी
20:11
नुक्ता-ए-नजर हमेशा मौजूद रहा है इस्लाम
20:14
की आमद से लेकर तेरहवीं सदी ईस्वी तक
20:17
मुस्लिम वषरे में ऐसी चकली की ताकत मौजूद
20:21
रही है जिसके वायरस मजहब फलसफा साइंस
20:25
उन्होंने लतीफा पर तहजीब बहुत मदन अपने
20:29
अरुण पर रहे हकीकत तो यह है
20:31
17 साल के अब से दर्द दुनिया भर की
20:35
इंसानियत की अजमत का सेहरा मुसलमानों के
20:38
शहर बंद रहा है वैसे तो शुरू ही से इस्लाम
20:42
ने अकलियत को संधि की हौंसला अफजाई की गई
20:44
है कुरान ए मजीद और आदि से मुबारका इसकी
20:48
गवाह है मगर इस्लाम के बिक्री ने राम की
20:51
नथ-1 हुआ में मौत जिला तहरीक का अहम
20:54
किरदार रहा है
20:56
कि अगर को संधि की इस तरीके से यह सर
20:59
मुसलमानों में अजीम फ़लसफ़ी और साइंस धान
21:03
पैदा हुए जिन्होने इंसान फिक्र और तहजीब
21:06
को नहाए तब्बू से आगे बढ़ाया पर इसके जरिए
21:11
इंसानियत पर वह एहसान किया जिसके तो हेल्प
21:15
किया और निशानियां से मुख्तार फुआ जिसकी
21:19
मिसाल आज हमारे सामने है
21:23
21 ऑक्ट मोजेरिला तहरीर के बारे में लिखते
21:27
हैं
21:29
कि वोट मोजिला तहरीर को मुसलमानों के
21:33
पिछली तगार में अकलियत पसंद थी कि तहरीक
21:35
कहा जा सकता है यह इस किस्म की इंतहा पसंद
21:39
जानकारी नहीं थी जो कि देव यूनान और 18वीं
21:42
सदी के यार अब में बाद यह क्रीम नहीं
21:45
करूंगी यानी यह के अ कल ही सब कुछ है अ कल
21:49
ही सब मिसाइल का हाल है विजन वहीं अक्षिता
21:53
वगैरह कोई चीज नहीं मोजेरिला और उसके हम
21:57
खाल में यह क्रीम की अक्ल यह तो संधि में
22:00
हिमांशु रखी देखिए हम इसको तस्लीम करने के
22:03
बाद अक्ल की अहमियत पर जोर दिया गया है
22:07
मैं इसी तरह दीनी तालिम के साथ अ क्लियर
22:10
रूम की तरफ वजह देने की जरूरत पा इसरार
22:13
किया गया था वह आपके स्किन का इस बात पर
22:17
इत्तेफाक है कि अरस्तु का बेहतरीन इशारे
22:20
तीव्र रोष था
22:23
500 ग्र भुने यूनिवर्सिटी जो या रफीक
22:26
तहरीर होता गहरा रही है जहां से जो आलिमों
22:30
फाजल रसूले इस्लाम के बाद फारुख होते थे
22:33
उनसे हेल्प लिया जाता था कि वह अरस्तू के
22:36
उपकारों तालीमात का दर्द देते वक्त वहीं
22:39
मानी थी
22:42
है और मतलब बयान करें जो इतने रोस्ट कि
22:45
शहरों में बयान किए हैं हकीकत तो यह है कि
22:49
यार अब में इसाइयों की अक्ल प्रसन्नधी और
22:52
दफ़्तरों जी वाला दास अपनाने में तकरीबन
22:55
15 बस लगे लेकिन इस्लाम में अकलियत पसंद
22:59
दी और फिर जब रोजी की बुनियादें शुरू ही
23:02
से कायम थी अकलियत पसंद की तहरीर का
23:05
बकायदा घुस जाऊं रे इस्लाम के बाद एक सदी
23:09
से भी कमर से में हो गया बेनेफिकरी देर तक
23:11
जो सफर की साथियों ने पंद्रह सौ वर्ष में
23:15
तय किया था वह मुसलमानों में 10 साल से भी
23:19
कम वक्त से में तय कर लिया मगर अफसोस कि
23:23
मशीन ही योरोप में तहरीक के अमल और रद्दे
23:26
अमल के बावजूद यह अंदाज और फिगर कायम रहा
23:30
और फलसफा और साइंस में तरक्की के बाद
23:34
समग्र आवाज मशरक को माली और फर्नीचर
23:37
मुद्दे रहा है मुसलमानों में यह दैहिक
23:41
तकरीबन चार
23:42
अनुसार जिंदा रहेगी और उसके बाद हद हो गई
23:45
आज यूरोप के बड़े मोफर क्रीम और रहनुमा
23:50
कार्यरत की तस्वीर भी और सिरी बदहाली पर
23:53
मातम करना है और यह कहने पर मजबूर हैं कि
23:56
अगर हर चीज कमर का जो मैं हर इंसान को
23:59
होना चाहिए था मगर सूरतेहाल इसके ऊपर आपसे
24:03
इंसान बेचारा अपनी दुनिया में अजनबी और
24:07
परिवर्तन दिखाई देता है यही वजह है कि वे
24:10
अपना साइंस की तरक्की के बावजूद कोई
24:13
अश्लील कितना जरूरी का शिकार है ज्यादा हम
24:17
समझते हैं कि इंसानियत को एक प्लेटफार्म
24:20
पर इकट्ठा करने के लिए इस्लाम की इंसान
24:23
दोस्त तालीमात का टी कर मजा है कि फिर से
24:29
इस तरह करके दुनिया को पुरअमन मुस्तकबिल
24:32
की रात भर गांव में जरूर किया जा सकता है
24:39
इस मामले की करें और लोगों को थामने की
24:43
करने की तलकीन कर दो
24:46
अजय को
24:48
अजय को
24:51
अजय को
#Religion & Belief
#Social Issues & Advocacy
#Social Sciences

