World's Major Religions - Hinduism | World of Cultures | #hindu #hinduism #hindustan
Nov 4, 2024
The number of Hindus is in the millions. The greatest virtue of this religion is that it is the greatest of the religions born of the earth. It has not allowed any other religion to stand in front of it since its inception in India. Today, Islam also has a number of rituals related to the Hindu religion. This V-log details Hinduism and those who do not know this religion will avoid reading dozens of books by watching this Vlog.
#Dr. Amjad Bhatti YT
#Dr. Amjad YT
#Dr. Bhatti YT
#World's Biggest Religions
#World's Major Religions
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हुआ है
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कि भगवान टमाटर सदाकत तमाम करे l और तमाम
0:12
तरह अत है इसका कोई जिस्मानी भूख नहीं वह
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पत्थर है पागल है कि रेमो क्रीम है वह सब को पैदा करने वाला है लेकिन उसे किसी ने
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पैदा नहीं किया बोला महमूद और अटल है जिसका ना कोई आवाज है
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बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम डॉक्टर अमजद अली भट्टी कि एक नए मौजूद के साथ-साथ रहित मत आ
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जो हमारा आज का मौजू दुनिया के बड़े मजा है अब
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कि हिंदू धर्म की रवायत कि हिंदू धर्म की कोई मुनज़्ज़म तारीफ
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नहीं के हिंदुओं को तारीख लिखने से कभी भी दिलचस्पी नहीं रही
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जो आर्म होल है कि जब आर्य हिंदुस्तानी इलाकों पर काबिज हो गए तो उन्होंने मुकामी
1:05
लोगों से मिलकर हिंदू धर्म की व्याख्या की है अलबत्ता इस पर तमाम मौर्य के मुताबिक
1:13
हैं तो यह दुनिया के कदीम तरीके मजा ही मे से एक है
1:19
कि हिंदू धर्म में किसी एक इंसान या फिर के की तालीम बात नहीं बल्कि के इसकी
1:26
बुनियाद मुस्तफा दो अफ़कार पर रखी गई है
1:32
कि इस कसी रंगी से हिंदू धर्म के पैरोकारों ने बहुत फायदा उठाया है हिंदुओं
1:39
की मुकद्दस पुस्तक में व्यर्थ रुक शर्त महाभारत और भागवत गीता ज्यादा मशहूर है
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कि एक काम खेल है है कि यह 500 कमल मसीह इस है 400
1:56
धर्म-ध्यान यह कुतकपुर अब तक हुए हैं
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कि एक काम खेल है कि हिंदू धर्म में जिंदगी और जमाने के बदलते हुए तक हादसों
2:07
और जरूर आपसे बहुत जल्द हम आ हम हो जाने की सलाहियत मजबूर है यही वजह है कि यह
2:14
मजहब आज भी अपने अंदर इतनी ही मानवीयत रखता है जितनी इसमें सदियों पहले मौजूद थी
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अ है क्योंकि यह मजहब रोजमर्रा जिंदगी के तजुर्बा तो मैं शायद आप से तृतीय दिया गया
2:28
है इसलिए इसकी कोई विपदा है और ना ही इंतहा क्योंकि यह मजहब इंसानी फितरत इसकी
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जरूरी हुआ था और इसकी उस अब के मुखतलिब दर्स ओं से मुक्त रखता है निकले हाजरा
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इसका मजा आज साइंटिफिक कहा जा सकता है कर्मा आवागमन और आत्मा हिंदू धर्म की
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बुनियाद आते हैं इंसान जो कुछ करता है वह कर्मा है यह कबूतर आदि रखने वाली मखलूक है
2:58
वह जो कुछ बोएगा वही काटेगा इसीलिए आवागमन
3:03
यानि दूसरी जिंदगी से निजाद यानि मुक्ति पाने की राह सिर्फ ने कमाल से ही मुमकिन
3:10
है आत्मा थ्रू है जिसकी असल ब्रह्म ज्ञानी खुदा की जाते पार्क है
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में हिंदुओं में मुक्ति या नज्ार के तीन मार्ग यही रास्ते हैं
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कि अलिफ जनाना मार्क ई-मेल गिरा बैक कर्म मार्ग यानि अमल किया
3:34
जीव भक्तिमार्ग यह इश्क की राह अली अब्बास
3:39
जलालपुरी हिंदू धर्म के यह तक आपको चार जवानों में तक्सीम करते हैं नंबर एक
3:45
वैद्यों का जमाना इस जमाने में चार व बाल
3:51
मन और आर्मी एक प्रति दिए नंबर दो
3:56
उपनिषदों का जमाना इसमें एक तिहाई उक्त इकट्ठे किए गए दर्शनों को मुक्त किया गया
4:05
रामायण महाभारत और मनुष्य का स्तर लिखी गई यही बोल ज़माना है जब बुद्धि मात्र जैनमत
4:13
और शैव मत का आगाज हुआ था फोन नंबर 3 सूत्रों का जमाना जब मशीन शायद
4:21
और फ़लसफ़ी आना प्रकार को सुलझे हुए अंदाज में सूत्रों की शक्ल में करती दिया गया यह
4:28
वह माना है नंबर चार पुराणों का जमाना 500
4:33
विश्व तक 18 पुराण लिखे जा चुके थे इसमें कमोबेश 400004 हैं दौरे हाजि़र में
4:42
हिंदुओं की अक्सरीयत पुराणों को ही तस्लीम करती है
4:48
कि हिंदू फ़लसफ़ी के 6 मा कस बयान किए जाते हैं नंबर 1 शुरू होती इसमें 4 व्यर्थ
4:57
यानि ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद और अथर्ववेद
5:03
शामिल है हिंदू मत के सुनहरे दौर में डुबी अदब इस रवायत के जरिए असर तकलीफ हुआ वह
5:11
सारे का सारा व्यक्ति ने चावल है और इसे चुनौती कहा जाता है वैद्य को शुरुआती यानि
5:20
इस्लामिक करार देने की वजह यह हो सकती है कि इसमें चावल मजहबी हक को किसी आदमी की
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तकलीफ नहीं समझा जाता इसमें बयान की गई सचाइयां अपनी हक है जो अपना एक व्रत मुकाम
5:35
रखती हैं क्रीम दृष्टियों योनी रूहानी शक्तियां ने अपने आला रूहानी मकाम मरतबा
5:43
के वायरस इन्हें सुई लिया था और कर इन्हें अल्फा कर दिया था आयुर्वेद के तीन हिस्से हैं
5:51
मंत्र ब्राह्मण और कुरुक्षेत्र कुरुक्षेत्र वैद्यों का आखिरी हिस्सा है
5:57
नंबर 2 स्मृति यानि - लगाकर याद किया हुआ वह मजबूर ह्यूमर रिवाज जिनकी शुरुआत
6:05
वैद्यों पर रखी गई है यह उन क़वानीन का मजबूर है जो फर्थ गार्डन समाज रहन-सहन और
6:12
उस उम्र वाच की रहनुमाई करते हैं वक्त के अधिकारियों के मुताबिक मजहबी रहनुमाओं
6:18
साधुओं और संतों ने इन रसों में तब्दीलियां की हुई हैं क्योंकि इसमें
6:25
अच्छे अमल की तरह आप देना और बुरे काम से मना करना एक खास संभाजी महाराज की तरफ
6:32
माधुरी करता है नंबर 3 इतिहास या तिवारी यह रामायण और महाभारत के दो मशहूर जंग
6:42
नामों पर मुश्तमिल हैं इन में वेदों का मजहब पर समृद्धि के कवर नहीं
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अजीम लोगों के रिम कारनामों के जरिए आम आदमी को जैनुद्दीन कराए गए हैं
6:55
मैं क्यों के उन शब्दों का फलसफा आम आदमियों की समय से पहले आता है इसलिए यह
7:02
जानना में आम इंसानों की भलाई की खातिर लिखे गए हैं
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फोन नंबर चार कुरान यह भी इतिहास ही है यह भी तरीके है इसमें किस्से कहानियों के
7:14
जरिए वे दोनों कमर जब लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है उन भाषाओं साधुओं और
7:20
संतों के किस्से बयान किए हैं जिनकी तादाद 18 है लेकिन ज्यादा मशहूर विष्णु प्रांत
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और भगवत पुराण है फोन नंबर पांच आगम यह हिंदुओं की मारूफ
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खिलाफ है अलग गैस की मनुहार की ज्यादातर वैभव कार को बनाया गया है लेकिन यह राशि
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राजस्व वादों से मायूस नहीं है यानी यह पूजा-पाठ के तरीके हैं हिंदू मत के तीन
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मशहूर फिर थे शिव विष्णु और शक्ति अपने अखबार की वृहद इन्हीं हुई तस्लीम करते हैं
7:56
नंबर छह दृश्य ना अ तो इसका मतलब रोशनी या नजर है हफ्ते के छह
8:03
मकान तक सच्चाई और हकीकत तक पहुंचाने के फलसफे हैं
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कि अ यह कि कल तक पहुंचाने के छह अलग-अलग रास्ते हैं हम वैद्य कार को हिंदुओं के
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समाजी व शक्ति कानूनी घरेलू और मजहबी रस्मों रिवाज को एक लड़ी में पिरोने वाले
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कवर नीम कह सकते हैं वैद्य हिंदुस्तानी अदरक का क्रीम क्रीम वापस हैं एक मोहक
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लिखते हैं वेदों के बारे में लिखते हैं एक मुफ्त दी जिसे पहले-पहल संस्कृत लिटरेचर
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से मुक्त कराया जाए यह देखकर परेशानी महसूस करेगा कि मूड साथ मुतालब और मौज़ूआत
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पर मुक्त लेफ्ट मुस्तनद किताबे हैं लेकिन सबका नाम वैद्य श्रुति यानि सुनी-सुनाई
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बातें ही है यह इसलिए है कि वह अपने वसीम अकरम के ऐतबार से किसी ख़ास किताब का नाम
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नहीं बल्कि यह नाम है करीब 2,000 साल के कवि ललसा पर फैले हुए लिटरेचर का जो कि यह
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लिटरेचर मजहर है इस फिल्म संयुक्त राष्ट्र के महासचिव का
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है जो हिंदुस्तान के रहने वालों ने मुक्त लव इतना खोज - से इस कदर तमिल भाषा में
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जमा किया इसलिए लाज मन इसे मुद्दा बना सका मजमूआ होना चाहिए
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कि वह खुदा के पास हैं जो आलम के वजूद में आने के वक्त जहर किए गए थे ताकि आने वाली
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नस्लें इनसे फेस याद हो सके सिर्फ यही अल्फाज इलहामी हैसियत रखते हैं इसलिए उनकी
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जानकारी हासिल करना हर इंसान का फर्ज है इन वेदों से ही हिंदू मत के रंग-बिरंगे
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आकार और आयत जन्म लेते हैं चार वेदों की तस्वीर कुछ इस तरह से ही जाती है नंबर एक
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व्यर्थ इसके 10,000 मंतर हैं इसमें खुदाओं की तारीफ और उनकी बुजुर्ग की के गीत और
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देवी देवताओं को मुक्त अप करके उनसे दुआएं मांगी जाती हैं नंबर दो यह व्रत यह सारे
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का सारा व्याध व्याध से महफ़ूज़ है इन्हें जुर्माने के मौकों पर गाया जाता है इसमें
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यज्ञा में काम आने वाली 16 आपको मुकदमा दर्ज किया गया है नंबर 3 शाम वे
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कि इसमें सिर्फ राघव और गीत फोन नंबर चार अक्षर अवैध इसमें कुल 6000
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मंत्र हैं जिन्हें 24 हिस्सों में तकसीम किया गया है इन में 1200 मंत्र ऋग्वेद से
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महफूज हैं तादाद में तकरीबन आधे मंत्र नजर में है ज्यादातर हिस्सा जादू-टोनों के
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बारे में है कि जिस तरह इंसान दूध फलसफा इंसान को हर
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चीज का बाहर मानता है उसी तरह हिंदू फलसफा भी आत्मा को हर्ष है कि दुनियां समझता है
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कि वेदों का काबिल-ए-जिक्र अ पहलू आरंभ काल यानी कि जब का इल्म है आत्मा एक ऐसी
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रोशनी है जो हर शहर को मुनव्वर करती है सुधार तो मोहब्बत इल्मों इरफान और सब
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स्कूल सब खूबियों का सच चश्मा यही आत्मा या नहीं इंसानी जज्बात है जो इंसान अपने
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हिसाब से बेखबर हो वह दूसरे शहर का एल्बम क्यों कर हासिल कर सकता है इसलिए तमाम
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मामलों की बुनियाद आतम ज्ञान पर ही रखी जा सकती है इंसान का मौजूद होना पहला सच है
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और खुद असली इंसान का व्याधि खरीदना है क्योंकि अपनी जात के इरफान के बगैर जिंदगी
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बेमकसद होकर रह जाती है जैसा कि अपने घर में मौजूद कि शहला मसूद इंच ही आसान होता
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है वैसे ही यह सवाल मैं कौन हूं आसान तरीके सवाल है लेकिन यही सवाल सबसे
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मुश्किल बन जाता है क्योंकि हमारा मैं अपने घर से बाहर आवारागर्दी का आदी हो
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चुका हुआ है आतम ज्ञान दुनिया के सारे आलू हमसे ज़्यादा पितृ और यकीन है
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को अपनी आंखों की तलाश में इधर-उधर दौड़ने की जरूरत नहीं होती यह तो तमाशा को देखने
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से पहले खुद मौजूद होती है इसी तरह हमारी हर किस्म की तस्दीक में खुर्द निवासी और
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अपनी जाओगे इरफान का इल्म मौजूद होता है कि मैं ही तो हर कसम के एल्बम और तजुर्बे
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की तस्दीक करती है अपनी जेब के इरफान का एल्बम हर किस्म के ज्ञान के लिए लाजमी
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शर्त है तो उक्त जो व्यक्ति का आखिरी हिस्सा है शायराना अंदाज में सच्चाई का
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इजहार करते हैं कुरुक्षेत् का लवजी मतलब कि दृष्टया उत्सव या ऐसे ही पुरस्कार
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अलार्म का दर्द देने वाले मोहर्रम के कदमों में बैठना होता है उन क्षेत्रों की
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मजबूरी करात 108 बताई जाती है वेदों के वजन उन अग्रिम शहर आ कि जिन्हें खतरा है
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जो व्यक्ति मनोज है और फिर हुसैन के करिश्मों से मुतास्सिर होकर लिखे गए हैं
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कि एक मौका की राय में वेदों का एक बड़ा हिस्सा उन गीतों पर मुश्किल है जिनकी ढूंढ
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तैयार करके उनको गाया जाता था और उनके शेयरों के जरिए की सुनने वालों को इल्म
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दिया गया था उन गीतों को लिखने की बजाय उनके बोल और उन्हें याद करा कर दूसरों तक
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मुरथल की जाती थी बाद में उनके शेयरों को लिखने का तरीका तो कि जब कर लिया गया
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लेकिन गीतों की धुनों को लिखने का तरीका तो आज तक भी पूरी तरह बताया नहीं जा सकता
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इन गीतों पर उत्पन्न कलाम को श्रुति का नाम दिया जाता था इसका मतलब है वह आवाज या
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कॉल या बाद जो सुनी जा सकेगी
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कि हमारा मकसद इस दुनिया के बड़े मजा है बाकी जो हमने सीरीज शुरू की है इसका मकसद
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यह बताना है कि दुनिया ना तो किसी एक मतलब पर अभी इकट्ठा होना चाहती है ना अभी होगी
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इसलिए जो जिस्म अब में जहां मौजूद है वह उसी में रहेगा लेकिन आपसी ताल्लुकत
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इंसानों का ग्लोब जो दुनिया जो निकलो बल बल जईएं जाती है इग्नोर में रहते हुए एक
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दूसरे के मजहब का एहतराम कैसे किया जाए अगर आप उसकी मदद की रवायत उसके मृतका के
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मुल्क नहीं जानते तो आप बहुत सारी गलतियां कर जाते हैं इसलिए हम यह इसलिए सिलसिला
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शुरू किया है यह दुनिया के बड़े अज़ाब का ताकि जिस हद तक मुकन हो हम दूसरे मजा
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हेल्प को भी जान सके यदि हम अपने मजहब में ही रहे लेकिन दूसरे मुसाफिर के बारे में
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थोड़ा बाप जो कृपया मालूमात है वह हम हो सके तो इसी हवाले से और फिर हमने खास
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कोशिश की है कि दुनिया के हर मजहब में इंसानों से मुतलक जो मिसालें हैं वह हमने
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लाने की कोशिश की है उनको इकट्ठा किया है ताकि हम यह बता सकेंगे कि दुनिया का हर
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मर्ज़ अपने-अपने दौर में या आज भी जो उसके मानने वाले हैं उसको समझते हैं तो जाहिर
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है उस पर अमल कर रहे हैं वरना वह छोड़ क्यों ना दें तो आज भी दुनिया में
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जहां-जहां जूस जिसमें जब के जो जो पैरोकार हैं वह क्यों अपने मजहब पर कायम है उनके
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नजदीक उसमें इंसानियत है इंसान दोस्ती है तो हमने उस इंसान दोस्ती को खोजने की भी
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कोशिश की है तो इसी हवाले से पहले भी जिक्र हम कर चुके हैं मजाक का उनमें भी
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हमने इंसान दोस्ती की मिसाल है ढाई आप हिंदू धर्म में भी हम कुछ मिसालें देख
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लेते हैं है जैसा कि हम पहले बताए हैं जिगर कि यह
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हमने कि हिंदू धर्म दुनिया के कदम और बड़े मिला है में से एक है इलहामी मजहब ना होने
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की वजह से इसके और तक काम है मतलब समाजी से आशीष शर्मा शीतल आपने गहरा असर डाला है
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इस मजहब ने खुद को लोगों में मकबूल बनाने के लिए बदलते हुए समाज की हर बुरी रस्म को
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मुस्तरद और हर अच्छी खासियत को खुद में जज कर लिया है
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है क्योंकि हिंदू धर्म हिंदुस्तान की एक बड़ी आबादी का मतलब है और सदियों से लोग
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इस से अपनी खाए शांत तो एक बात और जरूर लिया तो वफादार की तक फील करते आए हैं
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लिहाजा हम समझते हैं कि अब कार में इंसान दोस्ती के बेशुमार फूल खिले होने चाहिए हो
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सकता है कि इसके कुछ हवाले मौजूदा इंसान दोस्ती कि मैं और पर पूरे ना उतरते हो
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लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ऐसे इंसान दोस्ती के दायरे से खारिज कर दिया जाए बार
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मौके की टीम ने हिंदू धर्म की पुस्तक में से कुछ ऐसे हवाले तलाश किए हैं जिन्हें वह
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मौजूदा इंसान दोस्ती के मेयर के मुताबित हल नहीं करते जैसे एक मोहक
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ने अपनी किताब इकबाल और इंसान दोस्ती में लिखते हैं हिंदू लिटरेचर में इंसान के
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अशरफुल मखलूकात होने का कोई कसर नहीं मिलता हिंदुइज्म मुहब्बत इंसानी से खाली
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है बल्कि इसके बरअक्स जात पात पर यकीन हिंदू मत का बुनियादी अंतर है कुछ इसी तरह
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के सैलाब का इजहार मैं एक और मुक्त ने अपनी किताब हिंदू संगम
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विहार में किया है पर मानते हैं अगर हिंदू मत आ मिथिला की रवादारी और दरगुजर की तरफ
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मेलान रखता था लेकिन इसमें मूसा बाद का कोई सा एक बार तक ना था मगर जब हम ऋग्वेद
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का मुकाबला करते हैं तो इसमें इंसानी अनुसार बात का भरपूर से कर दिखाई देता है
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यह जो हमने जिगर किए हैं मौके की टीम कि इनकी बातों को एक साइड में रखते हैं और
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हम विख्यात का पुतला करते हैं तो हमें इसमें इंसानी अनुसार बात का जिक्र दिखाई
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देता है जैसे अ से कदम मिलाकर चलो हम्म आवाज होकर बोलो
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तुम सब के सोचने का ढंग एक हो मकसद उस स्ट्रिप को उठना-बैठना इकट्ठा होना ज़हन
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एक जैसे हो के हालात में या वसा नियत हो मैं तुम्हारे सामने एक पुस्तक का मकसद और
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प्रस्तुत का नजराना पेश करता हूं तुम्हारे फैसलें युक्त फीका हो और तुम्हारे चरणों
18:52
में हम आऊंगी और खेलों में यह जाती हो ता के तुम सब में एक खुशगवार इतफाक के रहे हो
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तो यह मैंने एक मिसाल पेश लिए इंसान दोस्ती के हवाले से इंसानों को मुश्किल में और इक्कठा रखने के हवाले से इस पूरे
19:09
में हमें कईं जात-पात नजर नहीं आती इसी तरह से हिंदू मत में इंसानी हमदर्दी और
19:16
मुहब्बत के बारे में एक मौके लिखते हैं और हिंदू मत में जिंदगी का एक मत वजन
19:22
नजरिया पेश किया गया है एक इंसान को दिन में पांच को गंदा करने होते हैं नंबर एक
19:29
ख़ुदा क्या खूब नंबर दो ऋषि गुरु और साधु के वर्क नंबर 3 अपने बुजुर्गों के रख नंबर
19:38
चार हैवनाथ और बता खूब और नंबर पांच इंसानियत की भूख
19:44
कि यह को खुदा इंसान हैवान हाथों ना बता दूं और वक्त के मुख़्तलिफ़ इस सौम्या नीमा
19:51
जी हां और मुस्तकबिल में एक उसने तथा जन मुकर्रर करते हैं इंसान कोई नापाक चैन
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नहीं बल्कि वह अच्छे मार्ग के जरिए इसी दुनिया में हकीकत अफ्रीका इरफान हल कर
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सकता है इंसानी जिंदगी के चार वर्षीय खा सकते हैं अर्थ यानि दुनियावी खुशाली काम
20:12
यानि जिस्मानी लोग संतोषी दरम्यानी अच्छे आहार और मुकश यानि कि जात
20:20
है सच तो यह है कि हिंदू धर्म में सच्चाई की इतनी मिसालें पेश की जा सकती हैं यह
20:26
आर्थिक ना रूप अपनी तस्कीन का समाधान पा लेती है उन क्षेत्र में फलसफा इंसान
20:32
दोस्ती की तरह इंसानी जिंदगी के रोजमर्रा के मसाइल को धीरे बहस लाया गया है और इन
20:39
मसालों के हल के मुख़्तलिफ़ रास्ते बताएंगे हम कहां से आए हैं कहां जा रहे
20:45
हैं हमें कहां जाना है कि आप वितरित को इंसान की पैदाइश का स्वभाव समझना चाहिए या
20:53
खुद इंसान की रात को जो कि हर चीज का मरकज़ है खुशी क्या है और कैसे हासिल होती
20:59
है आत्मा अपनी असल ब्रह्मा तक क्यों कर पहन सकती है यह और ऐसे बेशुमार सवाल आती
21:07
थी हिंदू धर्म में मौजूद बहस बने हैं और इनका जवाब दिया गया है
21:13
थे उपनिषद वेदों के ऋषि दुनिया को आदि समझने की बजाय मोहब्बत और कुशन की
21:20
जीती-जागती मिसाल तस्लीम करते हैं वह जिंदगी की मुश्किलों से अगाध थे उनके
21:26
नजदीक जाते वहां तक प्रेशर ही जिंदगी का मकसद है और यह मकसद अपने फर्ज की तकनीक से
21:34
हासिल हो सकता है कि हमला किया जिसमें गर्ल की हैसियत रखती है
21:40
कि इंसानी जिंदगी के लिए बेलौस और बेइंतहा प्यार यही वह जज्बा है जो इंसान को
21:48
इंसानियत के मुकाम से अगर आप करता है सर चित और आनंद जिंदगी की तीन अहम जरूर पर
21:56
हैं और यह खुदगर्जी फाउंटेन आफ और हवस को काबू रखने में मदद देती हैं
22:08
आज समाज अखबार को जाती वहा पर तरजीह देना बुराई से बचने का वाहिद रास्ता है क्योंकि
22:14
इंसान है शबनम-सी पोलार्ड और जायदाद के जरिए इस दुनिया में अमर नहीं हो सकता
22:20
बल्कि बेलौस कुर्बानी और दुनिया में रहते हुए दुनिया से बेपरवाह होकर ही वह अमर हो
22:27
सकता है कि अगर इंसान समाज से अलग होकर जंगल की हाले या वषरें में रहते हुए एक दूसरे से
22:35
तावन ना करें तो समाज में उसकी हैसियत एक नाकारा मशीन जैसी होकर रह जाएगी अगर इंसान
22:44
अपनी सलाह तत्वों को गुरु ए कार चलाते हुए दूसरों से तावन करें और उनकी मदद करें तो
22:50
फिर समाज तरक्की की राह पर रामजन हो जाएगा इंसान से मोहब्बत और इंसान दोस्ती एक
22:58
फलाही समाज के लिए जरूरी हैं और गोशा ने चीनी से समाज का हिस्सा बनकर रहना अच्छा
23:05
अमल है कि रेलवे आदमी इसकी हमारे यू की गई है
23:12
हुआ है न पियर्सिंग हुआ है लड़की असीम हमें ना दोस्तों से
23:18
आखिरी फॉर दुश्मनों से हमने अपने जानने वालों से डरें और ना आज नदियों से हमें ना
23:24
दिन में कोई सौंफ हो और ना रात में हर तरफ हमारे लिए दोस्ताना माहौल को
23:31
कि हिंदू धर्म इंसान को उसकी जाति खासियतों और खूबियों के मुताबक चार
23:36
हिस्सों में तक टीम करता है इसका मतलब हरगिज़ यह नहीं कि वह जात-पात की तब चीन
23:42
को खुदा की तरफ से की गई तक चीन का दर्जा देता है
23:47
हुआ है कि गीता में मौरूसी राजपाल की तक चीन की
23:54
शक्ति से मुहाल रखी गई है इंसान को पहचानने का जरिया उसका किरदार और उसकी
24:00
जाति खुशियां हैं जो इंसान माया से मुंह मोड़कर मजबूत आलू को हासिल करता है न उसको
24:07
तांबे करके अल्लाह लाख का मालिक हो जाता है हिंदू धर्म पर एक बड़ा एक राज जात पात
24:15
की जाल माना हद तक टीम का किया जाता है क्योंकि दुनिया के दूसरे राज्यों की तरह
24:21
हिंदू धर्म में भी इस्लामाबाद की जाती रही हैं लिहाजा हम समझते हैं कि दौरे-हाज़िर
24:27
में जात-पात की पहले की तरह शक्ति मौजूद नहीं रही थी
24:35
कि लाला लाजपतराय हिंदू जात-पात के इंतजाम कि हमारे करते हुए लिखते हैं
24:42
में जात-पात का निशान हम हिंदुओं के लिए लाना भी रहा है और नीमच की एक तरफ अगर यह
24:48
आम हिंदुओं की समाजी और सियासी गिरावट का एक बड़ा सब बना तो दूसरी जान आप एक समाजी
24:55
और कौमी तंजीम के इस बार से हिंदुओं को मुकम्मल इंतजार और तबाही से बचाने का
25:02
वायरस भी यही नियम था इसी नजाम ने हिंदुओं
25:07
को तारीफ हिंद के मुख्य द्वार में बरेली तथा आने वाले समाजी और मजबूती मिल राहों
25:13
में मदद कम होने से बचा लिया सुलगता 2000
25:19
बरस से जात-पात का निदान हिंदू धर्म के लिए कमोबेश एक डिफाई गले का काम देता रहा
25:26
है आर्य समाज पैदाइश के लिहाज से इंसानों की जात पात में तक टीम को तस्लीम नहीं
25:32
करता है के साथ दर्ज़ा तक टीम की बिना पर हिंदू समाज के मुख्य शाखाओं में मुक्त संपन्न हो
25:40
जाने की आर्यसमाज मुज़म्मत करता है आर्य समाज की नजर में इंसान को इंसान से जुदा
25:49
करने वाली हद धनियां जो जात-पात के निजाम का नतीजा है न सलीम दास के मुद्रा दबाएं
25:55
है कि आर्य समाज के नजदीक समाज की इस कदर मजबूर हिस्सों में तक्सीम या 1000 के
26:03
लोगों के दूसरी राशि वालों के साथ समाधि तरह का प्रबंध ई गैर कुदरती है तब हम आर्य
26:12
समाज जिंदगी के हक से आंखें नहीं मूंद सकता और वह यह तस्लीम करने पर मजबूर है कि
26:19
तमाम इंसान पैदाइशी तौर पर यह सा नहीं है और यह के वह जिस माणिक व जूनियर और दवाई
26:27
सलाहियतों इस्लाम की मेला नात और रूहानी इस तरह के बाहर से एक दूसरे से मुख्तलिफ
26:33
हैं और मुख्तार अपना हाल में पैदा होने की वजह से जिंदगी में इंसानों के मुकाम और
26:39
किरदार पर मौजूद का लाजमी असर होता है और यह के उनकी शख्सियत को डालने में वृषभ का
26:46
भी का भी दखल है 275 के हवाले से महाभारत में लिखा है ना
26:52
पैदाइश नाक मुका 10 है कामना तालीम और विरासत ही यह फैसला कर सकते हैं कि कोई
26:59
शख्स दो जिस्म है और अगर है तो वह दो जिस्म की तीन में से किसी किस्म से दार
27:07
लगता है से जिस्मानी प्रदेश पहला जन्म और उज्जैनी
27:14
और वहा नीर तक का दूसरा जन्म तस्लीम किया जाता है इस बात का फैसला किसी इंसान का
27:20
किरदार और तर्ज़े अमल ही कर सकता है जात-पात के बारे में हिंदुओं के रहनुमा
27:28
मनु के हालात कुछ यूं हैं तो किसी एक जाति में पैदा होने वाले अपराध
27:34
अपने आलुओं साहब के पास आ कर रात में शामिल हो सकते हैं या नवगछिया के भरा
27:41
स्थान पर वृक्ष और खुदगर्जी की बदौलत कम कर दीजिए कि साथ में गिर सकते हैं पास पुल
27:48
हंद्स्फ्री गुप्तार और थप्पड़ से पाक जो ब्राह्मणों और दूसरी अलग रास्तों के अपराध
27:56
जैसी जिंदगी बसर करते हैं ऐसे शूद्र की अलार्मस हाथों में शामिल होने के होते हैं
28:04
हुआ है थे हिंदुइज्म के एक माहिर डाक्टर हामिद हुसैन की राय में जात-पात की शक्ति का
28:11
निजाम मुक्त प्लस कब आयल के एक दूसरे से अलग होने और एक दूसरे के समय श्राद्ध
28:18
कबूलना करने के बावजूद में आया वरना जाते हैं दरअसल इन 1 लाख रात को बार रास्ता
28:26
बनाकर इन में इस तरह की अमल पैदा करने का एक व शीला है जो मुख समाजी ग्रहों में पाए
28:33
जाते हैं कि जाटों के बारे में कदम स्क्रीन हवाला
28:38
पर शौकत में मिलता है जिसमें समाज को एक जिंदा जिस्म की हैसियत और मुकुल असमाजिक
28:45
तत्वों को इस जिस्म के आधार ही वसीयत से पेश किया गया है और जिस और जिस तरह
28:52
कि किसी जिसमे मुक्त लहंगा एक दूसरे से इस तरह मुस्लिम रहते हैं कि हर डुब अपने
28:58
मखसूस फसल की अदायगी में दूसरे बजाय फेल से असर कबूल करता है इसी तरह समाज ई फील
29:05
भी मुक्त लपका आपके फेल से मृतक होता है इस लिहाज से हर जूस में कुल मौजूद है या
29:12
आपके कॉल के लिए हार जूस ना गुजर है हर समाज ऐसे ग्रहों पर मुश्तमिल होता है जो
29:19
समाज की मुफ्त इलाज जरूरी है आपको अपने अपने खुशी अमल से पूरा करने में महावन
29:25
होते हैं क्योंकि यह मतलब गुरु एक पुस्तक का मकसद के लिए अमल करते हैं इसलिए वह
29:31
दूसरे के साथ बुध हित रहते हैं और अपनी इंफ्रा की समाधि है तो रखते हुए एक मजकूरी
29:38
समाजी मानवीयत का हिस्सा होते हैं कि इस बात से साबित हुआ कि हिंदुस्तानी
29:44
समाज जात-पात के निलाम को एक समाज जरूरत के तहत कबूल करता था क्योंकि जात-पात का
29:52
निजाम मुक्त लखन असली ग्रहों के इस तरफ और उनके धर्म ध्यान सकौती हम मांगी के नतीजे
29:58
में वजूद में आया था हिंदू मत में इंसानी जिंदगी के चार समाधानों का जिक्र किया गया
30:06
है ब्रह्मचारी यानि ताले भूमिका जमाना गृहस्थी या यानि ग्रेट यू जिंदगी वन
30:14
प्रस्तुतियां यानि जंगलों का वासी होना और स्नेहाशीष यानि करके दुनिया दुनिया को तर
30:20
कर देने का मतलब यह नहीं कि इंसान राहे बन जाए बल्कि कारोबार जिंदगी में शिरकत के
30:26
बावजूद भी दुनियां से ताला का लगा हुआ जा सकता है इंसान को हाय शायद का गुलाम नहीं
30:33
होना चाहिए यह लाख या दूध के अंदर रहकर उस जिंदगी से उत्पन्न दोष को सकता है
30:40
कि हिंदू मजहब में शादी एक मादा नहीं बल्कि मुकद्दस बंधन है और भरत की श्री के
30:46
आयात है में हिंदुओं की मुकद्दस किताब भगवत गीता में इंसान दोस्ती के हवाले जगह-जगह फैले
30:54
हुए मिलते हैं भगवत गीता के बारे में एक मौके लिखते हैं
31:00
कि भगवत गीता दरअसल एक मुसलमान है जो कृष्ण और अर्जुन केंद्र में आपको यह निकाल
31:07
मावा इस्लामिक के दो मकतबा है फिकर से ताल्लुक रखता है एक मत बिछड जिसमें इंसान
31:13
बदी युवकों के साथ जंग करके इन्हें रास्ते से हटाने की कोशिश करता है दूसरा मत वाली
31:21
फिगर इन सुबूतों से प्रेस करके जाती इस्लाम पर ज़ोर देता है यह मत बार फिकर
31:27
इंफ्रा अधीन जॉब का कायल है मैं भगवत गीता का असल मौजूद इंसान है
31:34
कि गीता के मुख्य अंश का असल मौजूद इंसान और उसकी साधना तो शिकायत है
31:41
हां यह सही है कि तमाम कायनात बेजान और जानदार खुदा के मुजाहिर हैं
31:47
है लेकिन इंसान इस कायनात का सरताज और तमाम मखलूकात में से अफजल क्रीम है वह
31:53
सिर्फ इंसान ही है जिसको तो एक तैयार दिया गया है जिसकी मदद से अगर वह चाहे तो फल
31:59
हासिल कर सकता है और अगर वह चाहे तो अपने लिए मुसीबत और अगर आपके दरवाजे खोल सकता
32:05
है इसमें कोई शक नहीं कि गीता के मुख्य फसलों का मजा लिया करते वक्त बास जगह
32:11
इश्वर की मुल्क कुदरत का इजहार ऐसे लोगों ने किया गया है ज्यादा होता है कि इंसान
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कायनात में महज एक यह जानते इनका है इसको हवा 10 और कलाओं कलर की आवाज जिस तरह
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चाहती है उड़ा ले जाती है एक ना खत्म होने वाली हरकत उसे एक बेरोजगार मशीन की तरह
32:32
मिला मकसद घुमाए रखती है कि इंसानी नवस महज एक विशेष महत्त्व का
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अधिकार है है और जो कुछ इस से जरूरी होता है इसके
32:44
लिए बिल्कुल मजबूर है क्योंकि इसमें इसकी अपनी मर्जी या इरादा का कोई दखल नहीं होता
32:51
लेकिन इन फंसे जो कुछ गलतफहमी पैदा होती है वह असल के शौकीन हुई है तो और इसके
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मकसद से दूर ले जाती है चुनांचे जब श्री कृष्ण तमाम वास खत्म करते हैं तो आकर में
33:05
अर्जुन से युद्ध मुखातिब होते हैं जो मैंने तुम्हें इल्म सिखाया है जो तमाम
33:10
रिमूव से बचता का सरताज है इस पर गौरव तो बब्बर और इसके बाद जो तुम्हारे जी न्याय
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करो आखिरी अफवाह या हकीकत का ऐलान है कि गीता के मुशर्रफ के नजदीक इंसान बात यार
33:25
और मशहूर हस्ती है जो नेकी और बदी के रास्तों में तमीज करने की सलाहियत रखती है
33:30
और अपने इरादा को इस प्रकार से जिस रास्ता पर गांव धन होना चाहे हो सकती है खुद्दार
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का कार्य मुथलिक होना और इंसान का साहिबे इख़्तियार होना दोनों बातें अमली तौर पर
33:43
अपनी-अपनी जगह सही हैं लेकिन उनमें मंत्र की रक्त पैदा होना अगले इंसानी से मावरा
33:50
है और इसीलिए अकसर मस्से भी सही में इस किस्म का आतंकवाद नुमाया तौर पर नजर आता
33:56
है मैं अर्जुन क्षत्रिय है बहादुर है अमली इंसान है उसके लिए विष्णु पर सवालों की
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बौछार कर देता है ताकि हर सवाल को बिला शक और बात को अमली तौर पर समझले और सच्चाई
34:10
क्या है कि तह तक पहुंच सके यहां तक हमने हिंदुइज्म के हवाले से जो बातें कि है
34:17
उसकी कुतर्क कि उसके नजरिया कि उसकी मां इश्वरी में हैसियत की जात पात के हवाले से
34:22
इससे एक आम आदमी भूल जाता है
34:27
मैं इसी भूल जाओ को हम देखते हैं कि जब यहां अंग्रेज द्वारा धोते हैं तो उसकी
34:34
कॉम्प्लिकेशंस हैं जाएंगे तो यहां के मुताबिक का बड़ा बगैर जायजा लिया और
34:40
इसीलिए तो वह इतने साल इतनी थोड़ी तादाद में होते हुए भी हम पप्पू मत कर गए तो इसकी एक वजह तो यह थी कि उन्हों ने हमारे
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यहां जो सियासी समाजी और मजहबी निजाम राइज था उसका बगैर उठा लिया था और उन्होंने
34:57
कोशिश की कि सोसायटी को थोड़ा सा आगे बढ़ाया जाए उन्हें की कोशिशों से हम देखते
35:02
हैं कि मुसलमानों में भी हिंदुओं में भी प्रति घर मजा है मैं भी इस्लामी तरीके भी
35:08
चाहिए कि हमारे यहां तो कहा जाता है कि जितनी फिरकाबंदी मौजूद है यह उन्हीं की देन और
35:16
उनकी प्रकार से तो हम बात कर रहे थे हिंदू धर्म की किस्में भी इस्लामिक तरीके चलती
35:22
रही दुनिया के दिग्गज आप की तरफ से थे लेकिन वक्त गुजरने के साथ साथ हम देखते
35:28
हैं कि हिंदू धर्म की रस में 25000 गूंज लें तो होती गई इसमें पर यदि से फायदा
35:34
उठाते हुए प्रवक्ताओं ने जो इन रस्मों के अकार से अज्ञात है वह शरीर पर अपना
35:40
तसल्लुत भी काम कर लिया हम देखते हैं कि हिंदू धर्म पर अरुण उबाल आता रहा और हर
35:46
दौर में इसमें इस्लाम की रोशनी होती है कहा जाता है कि किसी मतलब के है यह की
35:51
कोशिश इस बात का सबूत है कि वह मजहब बहती रहेगी फालतू मत के बाकी नहीं रहा हिंदू
35:58
धर्म का ह्रास इस हकीकत की निशानदेही करता है कि वेदों और गीता का अमली मजहब शायद
36:04
अपनी यह की की तासीर खोज चुका था एक पैकेट से पता चलता है कि हिंदू धर्म
36:10
में इस लोहे की पहली कोशिश आठवीं सदी ईस्वी में शंकराचार्य ने की थी
36:16
कि उन्होंने तमाम हिंदू धर्म को-1 वैदिक धर्म पर मुत्तफिक होने की दावत दी और कहा
36:23
खुदा एक है वहीं अधिकृत है बाकी सब कुछ प्रेम है दुनिया माया है इस हक़ीक़त
36:31
[संगीत] कि इसकी हकीकत ब्रह्म है और इंसान हकीकत का हिस्सा हैं
36:38
कि उनका सबसे बड़ा कारनामा यह है कि क्यों उन्होंने उक्त शब्दों के मूर्ति
36:44
शेयर और मुकेश यादव कार को मुफ्त कल और मनन धाम शक्ल दी
36:50
कि 19वीं सदी में राजा राममोहन राय ने लोगों के लिए हिंदू मत को जगदीश कुमार ने
36:57
से आशना कराकर 1828 में ब्रह्म समाज की व्याख्या जिसका मकसद वेदों की अस्मत और
37:05
उसके मेहता नियर कि देश की निगेहबानी करना था यह वह वक्त था जब तक सब चित्र संधि
37:12
जात-पात तो हम प्रति और जो हाल पुत्र रस्म-रिवाज हिंदुस्तानी समाज की तरक्की की
37:19
राह में रुकावट बने हुए थे राजा राममोहन राय ने मूसा बाद कि रोजाना रात को परवान
37:25
चढ़ाकर बुत परस्ती जात-पात और तो हम प्रकृति के खात्मे के लिए जद्दोजहद की
37:31
उन्होंने अपनी दानिशमंदी से तमाम बुद्रुक के खात्मे की कोशिश की अपनी किताब तो अतुल
37:39
मोहिद्दीन के एक मुकाम पर लिखते हैं मस्जिद भी पेशवाओं की उक्त साहब का रसूम
37:46
जिन्होंने आम लोगों को ताक़तवर गुलामी कि जंजीरों में जकड़ा हुआ था मजबूत किया
37:53
को फकीर की हुई को जाया कर दिया था और लोगों को मुफ्त लग्नों में तकसीम किया हुआ
37:59
था आल्हा के मजहब का असल कारनामा यह है कि रंग नस्ल और अ कीजिएगा पर किए बगैर तमाम
38:07
इंसानों के दिलों में मम्मी मोहब्बत और शपथ के वायरस इत्तेहाद पैदा हो पर यही
38:13
ख़ालिक़े कायनात यानि खुदा के नजदीक एक मकबूल इबादत है रविंद्र नाथ टैगोर के
38:21
बौद्ध रवींद्र नाथ टैगोर ने 1842 में ब्रह्म समाज की क्या दशा है वह दोनों को
38:28
गलतियों से पांच समझते थे इसके अलावा केशव चंद्र सेन ने भी हिंदू धर्म के यह के लिए
38:35
भरपूर कोशिशें की स्वामी दयानंद ऐसी शख्सियत थे जिन्होंने हिंदुस्तानी मोह
38:41
लेगी इस लाख और इंसानियत की सर बुलंदी और बेहतरी के लिए आर्य समाज की बुनियाद दास
38:48
अप्रैल 1872 को रख दें कि इस गेम के दास बुनियादी उसूल थे यह
38:54
नस्लों को आज की जुबान में हिंदू धर्म का इंसान दोस्ती का मशहूर कहा जा सकता है
39:01
और मुलायम ही असूल फोन नंबर एक हकीक की एल्बम पर इस फिल्म के
39:07
जरिए जिस किसी चीज की थी गायब हम कौन हो इसका ममता ब्रह्म है
39:14
फोन नंबर 2 भगवान टमाटर सदाकत तमाम कर एल्बम और तमाम कर राहत है इसका कोई
39:23
जिस्मानी मजबूत नहीं वह बेहतर है पागल है कि रेमो क्रीम है वह सब को पैदा करने वाला
39:29
है लेकिन उसे किसी ने पैदा नहीं किया वह महमूद और अटल है इसका ना कोई आवाज है नाइन
39:36
जा बोला खानी है वह शहर का मालिक और सहारा है जो हमारा भी है और हर जगह मौजूद है जो
39:45
लाफ़ानी है और जिसे किसी का सौंफ नहीं जो वसूली और जाते बॉक्स है और कुल कायनात का
39:52
साले हैं सिर्फ इस ब्रह्मा की इबादत की जानी चाहिए तीसरा सूल
39:58
कि वे तरह की की एल्बम की मुकद्दस उत्तम है और हरियाणा का अव्वलीन फर्ज है कि
40:05
वेदों को पढ़ें और सुनें और दूसरों को चढ़ाए और पढ़कर सुनाए है
40:10
फोन नंबर 4 हरी या को सच्चाई को तस्लीम करने और झूठ को तर्क करने के लिए हर वक्त
40:18
मुस्तैद रहना चाहिए नंबर पांच अमाल ने की के मुताबिक होने चाहिए यानि कमाल नेकी और
40:25
बदी की अच्छी तरह छानबीन करके किए जाने चाहिए नंबर 66 समाज का बुनियादी मकसद मनी
40:33
नो इंसान के मात्र हानि और समाधि हालात को बेहतर बनाकर पूरी दुनिया को फैसला करना है
40:39
नंबर साथ हरेक के साथ प्यार रवादारी और मुचलका शख्स की खूबियों के मुताबिक सलूक
40:46
किया जाना चाहिए नंबर 8 जहलक को दूर और इनकी पेशाब की जानी चाहिए
40:56
फोन नंबर 9 सिर्फ अपनी ही भलाई पर कना करते हुए हर शख्स को चाहिए कि वो अपनी
41:02
फलाह ओ बहबूद को दूसरों की सलाहों पर बहुत से मुकरे समझें नंबर 10 ऐसे मामलों में
41:09
इनका गलत अवाम की सब्जी बहुत से हो किसी भी शख्स को ना आवाज अब दखल देने से प्रेस
41:15
करना चाहिए लेकिन खास जाति मामलात में हर शख्स अलार्म दाना अमल काम न जायज है
41:23
कि इस तमाम बेस्ट से हम यह नतीजा एप्स कर सकते हैं कि हिंदू धर्म में इंसान दोस्ती
41:30
के कई ऐसे हवाले मौजूद हैं जिनकी मदद से ग्लोबल विलेज की जाना पेशकदमी में मदद मिल
41:37
सकती है कि हमें इसको इसी उठता नजर के हवाले से देखना चाहिए जो मैंने पीछे बयान किया है
41:45
कि दुनिया का हर मजहब अपने अंदर सच्चाइयां रखता है इसीलिए तो उसके मानने वाले उसे उस
41:54
पर कार बंद हैं तो हमें दूसरों के मजहब में दखल अंदाजी कार के उसमें कीड़े निकाल
42:01
के अमित और पर एक बहस सुनीता व्यास हो तो वह तो एक अलग वालों का मसला है वह आलम
42:07
जाने और हमारे मजहबी रहनुमा जाने हम तो बात कर रहे हैं कि आम आदमी को किसानों से
42:14
नफरत कैसे दूर की जा सकती है इसका तरीका यही है कि जियो और जीने दो सामने की करें
42:22
है और दूसरों को थामने की करने की तरह जीते हैं
42:27
कर दो नई दिल्ली
42:33
झाल का
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