Sufi Thoughts in Ustad Daman's Poetry | Dr. Amjad Bhatti YT | Punjab, Punjabi & Punjabiat
Nov 4, 2024
The mystical ideas in Ustad Daman's poetry do not seem to be that he is considered one of the founders of modern poetry, but if we go a little deeper, he is also the trustee of the same tradition which was founded by Baba Farid. Ustad Daman did not teach indifference to the world but encouraged the ruling classes to take care of the poors. Ustad Daman, like Sufia, has presented the idea of death that this world is only a few days, so do not do things that will be difficult to answer on the Day of Judgment.
#Dr. Amjad Bhatti YT
#Ustad Daman
#Punjabi poetry
#Sufi Poetry of Punjabi
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झाल
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अजय को
0:12
कि डॉक्टर अमजद अली फटी एक नए मौजूद के
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साथ हाथ रख मत हमारा आज का मौजूद उस्ताद
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दामन की शायरी में सूफियाना है तो आइए
0:23
अपने मौजूदा खास करते हैं
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में योरोपीय किमाम खास तौर पर अंग्रेजों
0:30
की हिंदुस्तान आमद के नतीजे में मुकाम में
0:33
लोगों की सोच और फिकर ने पलटा खाया है
0:37
है पंजाबी शायरों ने इस्लामी यादव तो सब
0:41
वह लोग दास्तानों के अलावा भी मुल्क
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मौजूदा दर लिखना शुरू किया
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को देखकर हम मशहूर मसाइल और मौजूदा हालात
0:51
पर लिखने के अलावा
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अब हम देखते हैं कि उस्ताद दामन की शायरी
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में सूफियाना रंग की देखा जा सकता है
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अगरचे अवाम ने इन्हें कभी इस शब्द में
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शामिल नहीं किया यानी उस्ताद दामन एक
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जिद्दी शहर के तौर पर ही सामने आते हैं
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दिगर हम अस्तर मिसाइल और मौज़ूआत पर लिखने
1:13
के अलावा उस्ताद दामन की शायरी में
1:16
सूफियाना रंग भी देखा जा सकता है अगरचे
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अवाम ने कभी इस साथ में शामिल नहीं किया
1:23
किसी ना किसी सदा पर उस्ताद दामन भी उसी
1:26
सूफियाना रवायत के अमीन है जिसका आर्ट्स
1:30
बाबा फरीद कैंसर कैसे होता है पंजाबी
1:33
सूफियां के हाथ मौत का व्हात्सप्प पर
1:37
मौजूद है इसी तसव्वर और फिकर का दरअसल
1:40
हमें उस्ताद दामन के यहां भी मिलता है
1:43
जैसे
1:45
की मौतअज्ञात किसी दी जाए कोई नहीं जीते
1:48
जी चाय और फिर आप लंबी एंड उस तीर तलवार
1:52
दी लोड कोई नहीं है
1:54
कि शाहरुख खान ऑल एप्स ईरानी कप लूंगी अ
1:58
की मौत मालक कंट्री नगर होंगे हर उम्र दा
2:03
मक्कूमठ आप लंबी बिंदी नहीं है बेवा यतीम
2:06
बच्चे जिन्हें जी चाय कुन्नर प्लानिंग
2:10
बाबा फरीद कमज़ोर दिल तो हमारी अवाम के
2:14
लिए आखिरी यानि मिट्टी का इस तरह इस्तेमाल
2:16
करते हैं वह तबका इशराक जिया को बताना
2:20
चाहते हैं कि अवाम की अक्सरीयत कीचड़ से
2:22
लथपथ जानवरों किसी जिंदगी गुजार रही है जब
2:26
के वह अय्याशियों की जिंदगी गुजार रहे हैं
2:29
है लिहाजा उन्हें यह बात जरूर मद्दे नजर
2:32
रखनी चाहिए अगर आवाम उनके खिलाफ उठ खड़े
2:35
हुए तो फिर जंगल भैया बालों में भी उन्हें
2:37
बनाना मिलेगी इसकी वजह मैच यह होगी कि इस
2:41
तबके ने अवाम को जिल्लत भरी जिंदगी
2:43
गुजारने पर मजबूर कर रखा है जिससे आवाम के
2:48
लिए जिस्म और रूह का रिश्ता निभाना
2:50
मुश्किल बन चुका है लिहाजा एवं पुराणों
2:53
कीचड़ में लिपटी अवाम को कम-अज-कम इंसान
2:57
तो समझो बाबा जी फरमाते हैं फ्री दाख रन
3:01
दिए खोज घटना को अंजाम दिया पैरों तले
3:05
मुख्य ऊपर हो
3:07
कि अ यह उस्ताद अहमद की जाधव जो इसी
3:10
मजबूरी को इंफोसिस में बांधते हैं
3:13
का गारा टो के सिक्यॉर कर कोई तो कोई
3:17
भूकंप चलाए हम कार्देनाल मतदान दिया लिए
3:21
कई क्यों मारी वह अपना रूम मिल जाए प्यार
3:24
दे नाल
3:26
जी करदा खेल खैर आज यहां जूते हुकुम चले
3:31
ना सदा तलवार दे नाल हाथों चढ़े अरब बजे
3:34
राधारमन वहीं अमरुद मिट गए पहले बार बिना
3:38
उस्ताद दामन और तकरीबन सभी सूफियां का
3:42
जमाना था
3:44
और समाजी वर्षीय और सियासी लिहाज से
3:46
इंतजार तोड़फोड़ अथल पथल से भरपूर जमाना
3:50
था तब पंजाब मंगोल और तुर्क हमलों की
3:55
व्यथा
3:57
है और आप अंग्रेज़ उसके मुकामी वफादार
4:00
पंजाब का सत्यानाश कर रहे थे दोनों द्वार
4:05
में वाम अपने समाज और महर्षि मिसाइल में
4:08
घिरी हुई थी समाधि बदहाली और लूट-खसूट ने
4:11
आम आदमी का जीना दूभर किया हुआ था हर तरफ
4:15
पद्धति और नवमी के वाले इस इंसान ने खून
4:19
पानी की तरह बहाया जा रहा था यह सूरतेहाल
4:22
ने वषरे में पहले से जारी तब तक आती
4:25
ऊंच-नीच में बजे दबा कर दिया हल्के हुड्डा
4:29
की कमाई हुक्मरानों की लूटमार की नजर हो
4:32
जाती मुद्राओं की जिंदगी का मकसद महल
4:35
निर्धारित अमीर करना और दौलत की हवस में
4:37
जिंदा रहना ही रह गया था ड्यूटियां से
4:41
टैक्सों की शक्ल में लूटमार के मामलों
4:44
दौलत को इकट्ठा करना इशारा किया कि जिंदगी
4:46
का मकसद बन चुका था और आज भी है जबकि आवाम
4:51
मौत के साए तले जिंदगी गुजार रहे थे वे
4:54
नजरेला पर देखें तो उस्ताद दामन के
4:57
बिहार में भी उसी सौंफ का पता आसानी से
5:00
लगाया जा सकता है जो ब्रूनी हमलावरों के
5:03
22 पंजाब के चारों कोनों में फैला हुआ था
5:07
मृतकों के खिलाफ अवाम के दिलों में नफरत
5:10
की दीवार तमिल हो चुकी थी उसे आसानी से
5:14
गिरा नामुमकिन नहीं नफरत की शक्ल सूफियाना
5:19
शायरी में दिखाई देती है
5:23
ए सविता एक नाटा अगला एक ना ही लूंगी अब
5:29
दिए गए संजय ऑप्शन चोट आखिरी कौन पंजाब
5:34
में दो तब की आवाज है एक वह जिसके पास
5:37
खाने पीने की कोई कमी नहीं और दूसरा जो
5:40
इनके टुकड़ो और बची-खुची पर इशारा करता है
5:44
यह नुस्खा तक सीमित करने वालों को जल्द ही
5:48
मालूम हो कि इतने बड़े में जिंदगी गुजार
5:52
रहे थे मगर तब वक्त गुजर चुका होगा लिहाजा
5:56
ऐसे लोगों का बदला सब्सक्राइब की सूरत में
6:00
मिले थे
6:01
कि अब उसका दामन का सूफियाना रंग देखें
6:06
हैं कि द्वितीय चुकी
6:08
ए क खानी त्रिकुटी तिलक खाने की मेज़ लगे
6:13
ने रिकार्ड कि देशों के वर्ण विचार ये में
6:16
मोला दे रंग न्यारे उद्यान और बात से नफरत
6:21
करते हैं उनकी ख्वाहिश है कि वह शरीर में
6:24
ऐसी सब्जी की बुनियाद रखी जाए जहां लूटमार
6:28
करने वालों को खुली छूट मिल सके उनका
6:32
सब्सक्राइब है हर जायज और नाजायज तरीकों
6:36
से माल इकट्ठा करता है और आश्रमों में
6:41
इशरत की जिंदगी गुजारता है
6:46
के मारे करन उडीक के अवतारी बर्थडे खोल दे
6:50
थे एजेंसी सिन्हुआ ने जितेंद्र अंग्रेजों
6:53
में बाजार नहीं सानू मियां थे करंट
6:56
सिचुएशन है
6:58
है जैसा कि ऊपर अभी हमने जिक्र किया है कि
7:01
उसका दामन का जमाना संभाजी हो आशीष और
7:04
सियासी लिहाज से इंतजार टूट-फूट और बदनामी
7:07
से भरपूर था इसका लाभ भी नतीजा समाज एवं
7:11
मोक्ष जिंदगी पर पूरे गुजरात का पढ़ना था
7:13
समाज की बदहाली और लूट-खसूट ने आम आदमी का
7:17
जीना मुश्किल किया हुआ था और जहाज जाना
7:20
नवसारी नवसारी का आलम था यह व हालात है
7:23
जिन्हें उस्ताद अहमद ने अपनी आंखों से
7:25
देखा और उनके खिलाफ इजाद किया आवाज बुलंद
7:29
की उन्होंने मृतकों को खबरदार किया कि
7:32
गरीबों और बेकसूरों को लूटकर वह जो
7:34
मोहल्ला तबीर कर रहे हैं और जिन मामलों
7:37
दौलत की हवस ने
7:39
कि उन्हें तबाहो बर्बाद कर दिया है वह सब
7:43
यही धरे के धरे रह जाएंगे मौत का बयान पर
7:47
इन्हें एक लम्हे के लिए यह चांस न देगा कि
7:50
वह स्माल हजार को इकठ्ठा कर सके या अपने
7:53
साथ ले जा सके उसका दामन के अल्फाज में
7:57
कैन बे जिंदगी रब दी कर्म बख्शी अ
8:01
ने मेरे वास्ते वो आज़ाब गया वह स्टेज की
8:04
लव हैप्पीनेस जोगा जिद्द पोज घर कब आ गया
8:08
तेरी जन्नत है उधर नहीं दे पाऊंगा यह तो
8:11
पहले सीकरी जवाब हो या हजार रही है यात्री
8:15
ने बाद अंदर आ
8:17
कि आखिर दिल ना करें गुलाब हो या मेरे
8:21
दौलतखाने द की पूछते हो दलित जुट गई खाना
8:25
खराब हो गया उस्ताद अहमद ने जहालत व्रत और
8:30
पाए कुमारी अवाम की पसमांदगी का पायलट
8:33
बनने वालों की निशानदेही की है वहीं उनकी
8:37
मुरम्मत का कोई मौका हाथ से नहीं जाने
8:40
दिया उन्होंने अवाम को अपना आप पहचानने की
8:44
तलकीन की तास बात की नई करना सिखाया कि
8:48
जहालत और नाखून के 22 तो हम प्रस्तुत जन्म
8:51
लेती है जिसके बहस हुक्मरानों के लिए अवाम
8:55
को गुलामी और बताती रखना आसान हो जाता है
8:58
इसीलिए वह कहते हैं कि यह उसे खाली इंसान
9:01
पेरू और गैर सियासी होता है सच बात करना
9:05
है नहीं बात है मगर जहां हालात इस हद तक
9:08
बिगड़ चुके हो सच बोलने से गर्दन उड़ा दी
9:12
जाए वहां भी सच्ची बात करने पर जोर देते
9:15
हैं
9:16
है उसके तनु जी प्यार करता है कुछ कैंटों
9:19
भी पेट दर्द आए कुछ कहिए पागल कर देने
9:23
चोकर यह सीना सडकें कुछ कैन डू जी व्यक्त
9:27
कर गए कुछ कैंट में प्यार डरता 78 तो लिलन
9:32
कर नंगे जिस्म चंद ने इस मुद्दे सिर्फ कोई
9:37
वजूद नहीं लाउने खूब सजा तय करता है कि
9:46
व्यक्ति ने जगदीश उल्टी गंगा ब्रिज पर
9:51
क्लिक करता हूं तो भी दर्द दांत थे गीता
10:00
इन थे डॉक बदले हर कोई हंस हंसकर सूली चढ़
10:06
गए रिश्ते नाते मान थे घृत राम रहमान थे
10:16
यह तीनों को भंगड़े ने राता नू सूरज चढ़
10:21
गए कुछ कैन डू जी प्यार करदा ए कुछ कैंट
10:25
तो मी प्यार दर्द है इस लीडर पाषाण पुणे
10:28
के जी इसे लूट व मेज़ लेकर जी हर बंदा
10:33
मेहर भईले पैसे दा कलमा पढ़ जाए कुछ कैन
10:38
डू जी पर कर गए कुछ कैंट तो प्यार डरता है
10:42
ज्योतिष व्याख्याताओं ने इंसान दोस्ती के
10:46
अध्यक्षों से जन्म दिया इनके मुताबिक हर
10:50
जरूर में सिर्फ जाते खुदाबंदी ही समाई
10:52
होती है खुदा से मोहब्बत करने वाला किसी
10:55
इंसान से नफरत नहीं कर सकता इसकी नफरत की
10:59
बुनियाद रंग नस्ल जात पात पर नहीं होती
11:02
बुल्लेशाह की तरह उसका दामन भी फरमाते हैं
11:06
मैंने सीखा इल्म राजी ना मैं पंडित बुला
11:11
कारी ना मैदानी ना फैजी नात मैं चढ़ाकर कर
11:16
राजी
11:16
क्यों ना मैं मुर्शीद आलम पास जल ना मैं
11:19
राजेंद्र तेला होशियार मैन्नू पागलपन
11:22
दरगार मैं नहीं खानदान डोले रात जीवन लाश
11:28
को ले ML अवतार गिरावट चोले कोई बोले टेरा
11:33
कोई ना बोले मिले गले दादर करके करना अपना
11:38
आप सुधार मेनू पागलपन प्रकार से
11:41
है तो यह कुछ थोड़ा सा हमने उस्ताद दामन
11:46
की सूफियाना शायरी का किया कि उन्होंने
11:49
कला सीखी सूफिया की तरफ मन मोहब्बत सुलह ए
11:53
कुल और इंसान दोस्ती की बात करके खुद को
11:57
उसी रवायत की लड़ी में पिरोए लिया है जो
12:01
हमारी यह वाइट बाबा फरीद से शुरू होती है
12:05
और आज तक जारी है वह सारी है
12:09
कि आपका बहुत शुक्रिया
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कि को सलाम
12:13
अजय को
12:15
हुआ है
12:18
अजय को
#Religion & Belief

