Political & Social Consciousness of Baba Farid | Dr. Amjad Bhatti | Punjab, Punjabi & Punjabiat
Nov 4, 2024
Political & Social Consciousness of Baba Farid Ganj Shukar is reflected in his poetry. In addition to condemning the Mongol invaders, they have also criticized local rulers. He is well aware of the unjust resource allocation of the system. He is poineer of Punjabi Poetry.
#Dr.Amjad Bhatti YT
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झाल
0:09
कि डॉक्टर अमजद अली पट्टी एक नया मौजूद के
0:14
साथ लिखित मर हमारा आज का मौजूद लोग बाबा
0:19
फरीद गंज शकर बतौर इंसान दोस्त शायर डा
0:24
है पंजाबी सूफियाना शायरी में इंसान दोस्त
0:28
इस प्रकार का हद अब अपने अहद की तब तक आती
0:32
करें और स्पेशली तबके के खिलाफ मोस्ट एवं
0:36
कि हमारे बीच में खड़ा होना था
0:39
है मगर जैसा बुद्धिमान में होता आया है इस
0:44
राशियां ने इंसान दोस्त अपकार को एग्जाम
0:48
व्यक्ति थे में बदलकर रख दिया इसके बाद
0:51
जिस इंसान दोस्ती के फलसफे करो तब कांति
0:55
प्रसाद हम से हटकर तब कार के दरमियान
0:57
मसाले हाथों मुंह में की तरफ मुड़ गया
1:01
नतीजतन अवाम में एक जो एक साड़ी और दुनिया
1:04
से लाल की पैदा करने के लिए इंसान दोस्ती
1:08
को इस्तमाल किया गया इस प्रॉब्लम यह हुआ
1:11
कि अब हम अपने हकों के रसूल की इज्जत करने
1:14
की बजाय उनसे 10 प्रकार हो गए थे
1:18
कि सूफिया का मकसद लोगों में लाखों तो
1:20
मोहब्बत अक्षरा में आदमीयत और इंसान
1:23
दोस्ती को आम करना था चुनांचे उन्होंने
1:26
अपने माहौल में नस्ल प्रति और सिरका बंदी
1:30
से किनाराकशी होकर बानी मोहब्बत की तबले
1:33
की लेखन हुक्मरानों ने मंसूबा बंदी के तहत
1:37
इस फीचर को फलने-फूलने ना मिला
1:40
मैं इसी पर इस मंदिर में आइए
1:44
है पंजाबी के अव्वलीन शायर बाबा फरीद गंज
1:48
शकर के कलाम में से इंसान दोस्त हवाओं का
1:52
मजा लिया करते हैं
1:55
में बाबा फरीद शकर 1188 पीठ में पैदा हुए
2:00
जबकि उनके वफात 1280 ईस्वी में हुई है
2:06
में बाबा फरीद ने इंसान दोस्ती की बात उस
2:09
दौर में कि जब इस मौजू पर गिवर करना अमली
2:13
तौर पर नामुमकिन था
2:15
है यानी उन दिनों दौरे-हाज़िर की तरह जो
2:19
रिश्वत और अजय की बात नहीं की जाती थी
2:23
यह पैसे लो आज भी नहीं की जा रही आज भी
2:26
यही हाल है लेकिन उस दौर में बहराहल
2:29
जम्हूरियत और राधे राधे की बात नहीं की
2:32
जाती थी 12वीं सदी के दाम और 13वीं सदी के
2:36
अभाव में बरी शरीर की पुरानी एक तार की
2:39
तस्दीक होती दिखाई देती है अब हम मैं
2:42
आदमियों से चलि जात पात की तक़सीम शुद्ध
2:46
तैयार कर जाती है सूजी अपने स्वाद और व
2:51
साल की उम्र तक टीम के उस दौर में सूफी
2:55
में अपना रुख से जुड़ा और उनके दुख-दर्द
2:58
में बराबर के शरीक बने इस क्लास की अपने
3:03
कलाम ने भरपूर जवानी की सूफियों ने इस
3:07
राशि को वापस गांव में कहा कि गरीबों और
3:12
बेसहारा लोगों को लूटकर मोहल्ला तमिल कर
3:17
रहे हैं सब इसी दुनिया में रह जाएंगे
3:20
इन्हें के लिए दिए
3:23
सूचना देगा कि वह अपने माल को इकठ्ठा कर
3:27
सके या अपने साथ ले जा सके बाबा फरीद के
3:31
बकौल फरीदा कोठे मंडप मणियां अनुसार हिंदी
3:36
भी गए कूड़ा सुधार कर गए * आधे नींबू पर
3:42
सारा लोगों का इस्तेमाल करके यह दोनों
3:44
बाला अमानतें तमिल करने वाले दरअसल झूठी
3:49
तिजारत करते रहे
3:50
को अंजाम यह हुआ कि खुद खबरों में आन पड़े
3:54
और मालो दौलत और शान व शौकत सब वहीं पड़ा
3:57
रहा है
3:58
हां बाबा जी का एक और लोग मलागा शर्माए
4:01
सूर्य खून दिए खोजी घटना को अंजाम दिया
4:07
पैरों तले व ऊपर हो यह श्लोक में बाबा
4:12
फरीद ने कमजोर और बेसहारा लोगों के लिए
4:15
आखिरी का इस तरह इस्तेमाल किया है वह
4:18
अशरफी आपको बताना चाहते हैं कि हम आखिरी
4:22
से भी कम तक दर्जे पर जिंदगी गुजारने पर
4:24
मजबूर है तुम लोग अशरफ की जिंदगी बसर करते
4:28
हो यह बात जैन श्याम कर लेनी चाहिए कि अगर
4:31
आवाम हुक्मरानों के खिलाफ उठ खड़े हुए तो
4:35
उन्हें कहीं बनाना मिलेगी वैसे भी अगर
4:38
अवाम बदहाल और जानवरों से भी बदतर जिंदगी
4:41
गुजारेंगे तो उन्हें जिस्म और रूह का
4:44
रिश्ता कायम रखना मुश्किल हो जाएगा लिहाजा
4:47
यह हुक्मरानों मिट्टी और कीचड़ में लथपथ
4:50
अवाम को कम-अज-कम इंसान तो समझो बाबा फरीद
4:55
का सुनाना
4:56
और समाजी वाशी और सियासी लिहाज से इंतजार
5:00
टूट फूड और बेचैनी का जमाना था पंजाब
5:04
मंगोल हमलावरों की तादाद में लोग समाज और
5:08
राष्ट्र का शिकार थे समझा लिए और लूट-खसूट
5:13
ने आम आदमी का जीना दूभर कर रखा था हर तरफ
5:17
सब्सक्राइब को पानी की तरह बहाया जा रहा
5:22
था इस सूरत में पहले से मौजूद सबका मुंह
5:27
में दबा कर समझा एक तरफ के थी जिसका हमलों
5:35
के मुख्य अभियुक्त की लूटमार की नजर हो
5:39
रहा था तो दूसरी तरफ मिश्रा थी जिन्होंने
5:42
महिला की तामीर और करना सब्सक्राइब कर रखा
5:52
मौत के साए में जिंदगी बसर कर रहे थे इन
5:56
विचारों को
5:56
अंदरूनी और पैरों में लुटेरों की दावत की
5:59
हवस का निशाना बनने के लिए बदहाली की
6:02
जिंदगी गुजारने पर मजबूर कर दिया गया था अ
6:07
कि थोड़ा गहरी नजर से मुकाबला करें तो व
6:09
खरीद के तहत की तहरीर में और आखिरी का पता
6:12
चलता है जो ब्रूनी हम लोग नतीजे मैं पूरे
6:15
पंजाब में फैला हुआ था उसके साथ-साथ हिंदू
6:19
राजाओं और मुसलमान बादशाहों के खिलाफ अवाम
6:22
के दिलों में जो नफरत पैदा हो चुकी थी वह
6:24
बढ़ते-बढ़ते एक तुम्हारी सूरत में बाबा
6:27
फरीद की शायरी में झलकने लगती है फिर भी
6:30
सभी में जहां पर आप बिरूनी हमलावरों की
6:33
जल्द ही था वही मुकामी किसानों पर
6:36
जिम्मेदारों और दिल्ली दरबार से वाबस्ता
6:39
सरदारों ने जुर्म की हाथ कर रखी थी
6:42
वो मुकाम लुटेरे ब्रूनी हक मराठियों को
6:46
जमीन के तो फ्रेश महसूस की सूरत में पेश
6:49
करते थे आखिरी वह इसके नतीजे में मुकामी
6:53
को संतों को दो वक्त की रोटी के लिए ही
6:55
क्यों न तरसें मुकामी रिमाइंडर टैक्सेस
6:59
बाएं से ब्रूनी और मराठों का हिस्सा लिया
7:03
था करने के बाद अपने लिए भी बचाने की गरज
7:05
से मुकामी किसानों और काश्तकारों से हाथ
7:09
श्यामला वसूलियां करते थे यू आस्था वह भी
7:14
ताकतवर बनते गए यह सूरत-ए-हाल ब्रूनी और
7:17
मराठों के लिए भी परेशान को थी उन्होंने
7:19
मुकामी दलालों को कमज़ोर करने के लिए
7:23
पैदावार पर लगा उनकी हदरूक रखकर भी अगर कि
7:26
इससे मकान में का शिकार मजबूत जनाधार होने
7:30
लगे लेकिन इस तरह से मुकामी जिम्मेदार
7:33
कारकों का जोर भी टूटा
7:35
में बाबा फरीद की शायरी का तय करते वक्त
7:38
मौत की दशरथ का एहसास भी होता है उनका
7:42
कलाम एक तरफ उन लोगों के लिए नसीहत है जो
7:45
मसलों के खुदा को तंग करते हैं और उनका
7:47
माल लूटकर उन पर तेजधार करते हैं तो दूसरी
7:51
जाना वह विरुद्ध हमलावरों और मौसमी
7:54
उड़ानों के लिए भी नसीहत है जिन्होंने
7:56
गरीब अवाम को खून के दरिया में धकेल दिया
8:00
है बाबा फरीद के कलाम में जगह-जगह मंगोल
8:03
हमलों के बाद यह शायरी मिलते हैं मसलन
8:06
फ्री तय करने बगुला बैठक खेल करें क्लिक
8:11
करें यह नैनो उच्चतम थेरे वास ए
8:15
है fd दरिया के किनारे खुश भी बैठा हुआ
8:19
बगदाद में निकाल रहा है लेकिन इस मस्त
8:23
बैठे अब अगले को अचानक तेज तरह पास दबोच
8:27
लेता बाहरी दबाव को खोलें और हमलावरों को
8:32
सब्सक्राइब कीजिए को अपने सांस लेते थे
8:39
सब्सक्राइब की वजह से अब हम दोस्तों चैनल
8:42
के मालिक ने पंजाब में भारत का बाजार गर्म
8:47
कर रखा था यह और बात है कि उन्हें हर दफा
8:50
यहां से लौटना पड़ता है जैसे इंसान
8:54
दोस्तों अब हम इस में
8:57
का कत्लेआम पर खामोश नहीं रह सकते थे
9:01
उन्होंने अपनी शायरी में अवाम की बर्बादी
9:04
के पहलुओं को तबका तिफर के जरिए वापसी
9:07
करने की कोशिश की और अपने बहुत क्षेत्र
9:11
में यह वाले किया कि दुनिया का मालो दौलत
9:13
किसी काम ना आए का या
9:16
की सुविधा इतना आटा गल्ला एक ना ही लोन
9:21
ठगे गए संजय भूषण चोटा खासी कोण फ्रिल एक
9:26
के पास खाने-पीने की शौकीन फ़रावानी है और
9:29
दूसरे के पास नमक तक नहीं यह तो रोज
9:32
मिक्सचर पता चलेगा कि चोट 13 नसीब में है
9:35
यह वास्तव में एक ऐसा तबका मौजूद है जिसके
9:39
पास खाने-पीने की चीजों की बहुत आदत है
9:41
जबकि दूसरी जान आप बेशुमार लोग ऐसे हैं
9:44
जिनके पास नमक जैसी मामूली चीज भी नहीं यह
9:47
सारा कुछ बाकायदा किसी नाम का शख्स आना है
9:51
नाइंसाफी करने वाले जल्द जान जाएंगे यह
9:55
उन्हें खुदाताला के हजूर पेश किया जाएगा
9:58
तो उन्हें दुनिया की में की जाने वाली
10:01
नाइंसाफियों की सलाह बुगतना पड़ेगी अगर उस
10:05
वक्त कुछ हाथ आएगा सिवाय पछतावे और नदामत
10:09
के ऐसे लोगों का बदला शख्स अज़ाब ही होगा
10:13
गौर स्लॉट में मलाई जो करें
10:16
हु इज द रोटी मेरी काट की लावण मेरी बुक
10:21
जिन्ना खादी चौपड़ी गणेश महंगे दुख एवरीवन
10:25
मेरे रोटी लकड़ी की तरह खुश है और भूख
10:28
मेरा सालन है जिन्होंने कि मैं अपनी रोटी
10:31
नरम गंगाखेड़ी वह इस ज्यादा दुख जी लेंगे
10:36
मासूम यह के है शार्क मैं दूर रखने वाले
10:39
आश्रम में परेशान ना होंगे जबकि दूसरों का
10:42
सुकून तबाह करके खुद को स्कूल पहुंचाने
10:44
वाले ही दरअसल साथ हिसाब से बॉईल से
10:48
गुजरेंगे बाबा फरीद उर्फ पप्पू को अच्छी
10:51
नजर से नहीं देखते उनका कहना है कि ऐसी
10:54
समाधि मुहब्बत की बुनियाद रखी है जहां
10:57
लूटमार करने वालों को अब काफी अदालत जमा
11:00
करने से मना किया जा सके
11:03
कि उन्होंने रोटी को दी टीम का छठा स्थान
11:07
करार दिया है यही वजह है कि मौत के हवाले
11:10
से उनका मुखातिब सिर्फ राशियां का तक है
11:13
जिसने नाजायज तरीकों से माल और दौलत को
11:17
इकट्ठा किया हुआ है ऐसे तबके ने खुद को
11:21
दुनिया भी आराम और सुकून का घर भी था बना
11:23
रखा है ऐसे लोगों के पास मालिक गुलाम और
11:26
हीरे मोतियों के ढेर लगे हैं और यही उनका
11:29
मकसद यह जात है बॉईल यदि घर इस तबके ने
11:33
खुद को दुनियावी अश्व इशरत का गुलाम बना
11:36
रखा है मगर सच तो यह है कि दुनिया भी
11:39
इसलिए आप कि वह लावणी आइटम सामने की मौत
11:42
है कला में फ्री में से एक और नमूना मिल
11:46
जाएगा तो
11:47
की सुविधा महल निशर खन रह गए वासाया तल
11:54
गोरा से इन मान्य वेज संगरूर हामल लाख व
11:59
बंदगी चलन आज के कर
12:05
है अफ्रीका भ्रम महल चौबारे विरान हो गए
12:09
हैं
12:11
हैं इनमें रहने वाले जमीन के नीचे कमरों
12:14
में चले गए
12:15
कि इन बेचारों की कब्रों में रुक नाराज
12:18
होगा यश लौंग ले तू भी नहीं जा रहे हो
12:22
इसलिए हमारा सलाम वहां पहुंचा देना उन
12:26
कपड़ों के मकानों से कहना कि हम भी आज या
12:29
कल में यही जल दिया बदेर उनके पास पहुंच
12:33
जाएंगे
12:35
कि जब इंसान इंसानियत के यार पर जिंदगी
12:37
बसर ना करें तो धर्मेंद्र और जानवरों की
12:40
सतह पर आ जाता है यों उसके सामने जिंदगी
12:43
का मकसद सिर्फ मौत हो जाता है नियुक्तियां
12:46
की गुलामी को बाबा फरीद मौत से पृथ्वी
12:49
देते हैं यानी दुनिया वाले इस चीज को
12:53
जिंदगी समझते हैं बाहरी उसे मौत करार देते
12:56
हैं मिट्टी बाबा फरीद के यह मलामत के तौर
13:00
पर इस्तेमाल हुई है कभी पैरों तले पर कभी
13:03
सर पर पर यही मटि
13:07
है और कब्ज की जारी सूरत दरअसल तंज़ है उन
13:11
बड़ी-बड़ी हवेलियों और महिला पर जो
13:13
अशर्फियां ने अपने लिए समीर किए हैं
13:16
बाबूजी का ख्याल है कि मामला कि इस तस्वीर
13:19
में द्वारा की कर देख तसरीफ पोशीदा है यह
13:22
इंसान के बुनियादी मकसद यह जीत की तकरीब
13:24
है इस तक खरीदने इंसानों के दरमियान नफरत
13:27
की दीवार में काम कर रखे हैं और इंसानों
13:30
को दूसरे से जुदा कर दिया है बाबा फरीद ने
13:33
अपने कलाम में इस पर नाराज होने की बजाय
13:35
दुख का इजहार किया है उन्होंने मुस्तकबिल
13:38
के खतरे से आगाह करते हुए महिला की तामीर
13:42
को तसरीफ करार दिया है क्यों के एक रोष
13:46
जिद रोटी मरण वक्त ले जासी पर ना आए आप अ
13:51
फिजूल के केमिकल लगे था े े
13:54
कि यह जिंदगी दुल्हन की मां ने है जो
13:57
मोक्ष एक ही जाएगी
14:00
कि खुद अपने हाथों रुखसत करके अब किसके
14:03
गले लगकर इजहार ए राजा मंडी करें एक और
14:06
देखिए इसमें उन्होंने इशारा किया कि मौत
14:09
की जान आप इशारा किया है सुनीता जैन उन
14:13
जख़्मो या 100ml डिजिट का जनरेट नाश या
14:17
सैफरन कि शो एडिट यह नाखून ने सारी दुनिया
14:23
को अपना दीवाना बना रखा था और वह सुर में
14:26
का बोझ पीना उठा सकती थी यह नजारा मैंने
14:29
अपनी आंखों से देखा है कि बाद अजमोद इन
14:32
आंखों के हॉल में प्रेम दोनों ने बढचढ हुए
14:36
थे
14:38
को लाइक और शेयर देखें बाबा फरीद ने
14:40
मॉस्को आंखों के चिराग बुझने से तस्वीर दी
14:43
है आंखों में अभी रोशनी बाकी होती है कि
14:46
मलकर मौत आ जाता है और इंसानी जान कब्ज
14:49
करके ले जाता है और जाते हुए आंखों के दो
14:52
जरा भी बुझा लेता है
14:56
की सुविधा दो देवी बुलंदियां
14:59
है मतलब बैठा आ
15:02
में गड़बड़ी का घाट लुटिया डूब गया बजा दो
15:08
कि ऐप आंखों के do ज़रा इक अभी झेल रहे थे
15:12
कि मौत का फरिश्ता आप ऊंचा किला सर किया
15:15
गार्ड को लूटा और जरा गुजारा कर चल दिया
15:18
अगर मरना ही अनुसार काम करता है तो फिर
15:21
मालिक मकसद अहमियत नहीं बनाना चाहिए मरने
15:24
के बाद डेरों में घी
15:27
कि उस पर डाल दी जाएगी और दुनियावी मामलों
15:30
तो हर किसी का अपना आएगा
15:33
मैं एक और मुलायम हो जिसमें बाबा जी हृदय
15:37
से मुराद इंसान लेते हैं और इस तारीख की
15:40
जान बचाना करते हैं जो कदम-कदम पर इंसान
15:43
को खौफजदा कर रहा है फरमाते हैं पानी पर
15:46
बगुला के अलग तैर रहा है और 50 शिकारी जाल
15:49
लेकर उस किताब में हैं यह परिंदा यानी
15:53
इंसान जसु जो पानी से यह जुनून हो चुका है
15:58
यानी दुनिया भी मामला में मुकम्मल तौर पर
16:01
फंस चुका है अल्लाह इसे सिर्फ तेरी जात का
16:05
ही भरोसा है तो इसे किस तरह लहरों किया ने
16:08
लुटेरों शिकारियों से बचाता है सरवर पंखी
16:11
है करो फायरवॉल 50 ऐ वतन लहरी गठिया सच्ची
16:16
तेरी आस
16:17
यो यो हनी नदी में सिर्फ एक प्रिंस आफ तैर
16:20
रहा था मगर उसे पकड़ने के लिए 50 के करीब
16:22
शिकारी घात लगाए बैठे थे वह वृंदा पानी
16:26
छोड़ना नहीं जाता यानी दुनिया की मोहब्बत
16:28
में गिरफ्तार है सूरत हाल में एक सच्चे
16:31
अरब का ही सहारा है जो उसे इन शिकारियों
16:33
से बचा सकता हम जानते हैं कि मुसलमान जब
16:38
हिंदुस्तान में आए तो उन्होंने सिंध और
16:40
पंजाब मेरा एग्जाम में कोई बुनियादी
16:42
तब्दीली ना कि हिंदुस्तान के इस्लामी जो
16:46
में कुराने पाक का इस्लामी व्यक्ति तो
16:49
संवर तब्दील होकर वजह तो आप बंगलों कि छत
16:52
पर मुलायम जैसे दो हिस्सों में तक टीम हो
16:54
चुका था
16:56
हैं जूही इस्लाम कैप्सूल्स और है उसमें
17:00
सिर्फ और सिर्फ कुरान का निजाम नव था
17:05
कि यह बात के दौर में आकर मुलायम इधर में
17:08
आज में प्रमुख किया कर बुला यह घाटी और हो
17:10
गया इशारा किया कि रैम और सिर्फ आना
17:13
मुनासिब पॉलिसियों के बाद सभी रॉक गरीब का
17:15
घर में आना फर्क कामना हो सका इस अद्वैता
17:20
वजन और ना साफ माहौल में बाबा फरीद के
17:24
अकार सदियों कि धोनी और सूफियाना हिकमत की
17:27
सूरत में मनचले रात है बाबा जी ने इस्लामी
17:31
पिछली विरसे को ना सिर्फ महफूज रखा बल्कि
17:34
इसमें भरपूर आप आकार के अंदर नस्ल को भी
17:37
मुक्त किया है
17:40
का कद तेरा खड़ा कर अदरक बने धीर फ़्रीदा
17:43
खर्चे पांडे रखिए गजब बातें नीर
17:48
का दरिया किनारे दृश्य कब तक खड़ा रह सकता
17:51
है प्रीसर्व कर चेक घड़े में कब तक पानी
17:54
में पूछ रखा जा सकता है बाबा के शेयर में
17:57
जाहिरी तौर पर मायूसी झलक रही है मगर
18:00
थोड़ा सा गौर करें तो मालूम होता है कि
18:02
पापा जी ने शहर में बेसहारों और कमज़ोरों
18:05
के लिए जबरदस्त पैगाम दिया है फरमाते हैं
18:08
दरिया के किनारे उगने वाला तरफ जून हो
18:11
जाता है मगर यह बलम धीमा ही रखे स्पेशल को
18:15
संतों के जूते व कार की तरह होती है जो
18:18
पैरासाइट यह तो पहली बंद कर मोक्ष अरे खून
18:21
चूसते हैं
18:23
कि जुर्म यह है केवल उन्हें ही शक खुर्दा
18:27
समिति हैं जिनका वह खून चूसते हैं बाबूजी
18:30
कहते हैं अवामी ताकत बगावत पर उतर आएगी तो
18:34
फिर किनारे पर उनका यह कृत्य नहीं तो फिर
18:36
या एक झटके में ख़स-ओ-ख़ाशाक की तरफ बह
18:40
जाएगा लिहाजा हुक्मरानों को यह जान लेना
18:43
चाहिए कि एक न एक दिन यह सूरतेहाल उनके
18:46
सामने आ सकती है पंजाब में तो सब फ्री
18:50
दर्द अगर सूफिया की वजह से स्वामी वसीयत
18:53
तैयार कर चुका था उन्होंने दूसरे चिट्ठी
18:56
मोहक स्क्रीन की तरह श्री यह तौर तरीके घर
18:58
में हम आपकी पैदा करने की कोशिश की सच तो
19:02
यह है कि बाबा जी की शायरी जरूरतमंद दी और
19:05
राजावत की शायरी है जिसके जरिए उन्होंने
19:08
जिंदगी का जौहर पेश किया है बाबा प्रीत
19:12
इंसान दोस्ती के बारे में एक व्याख्यान
19:15
मसूद के अल्फाबेट्स
19:17
में काट लें इसे करें कोर्ट तत्कालीन
19:20
वायसराय जब बिल मोहन कानून से आश्रम अब का
19:24
मनसब वाला दस्तखत के वफादार आपका ताकतवर
19:27
हो जाता रहा पूरी जिंदगी क्या कमाल
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सरगर्मियां और दोस्तों का मैं वर्क वाला
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10th का आपको फायदा पहुंचाना ठहराव एवं
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बाला दस्तखत किए मोहल्ला आपको तरफ बढता
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रहा तो उस के मध्य मुकाबला रोजगार दफ्तरों
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के वफादार अगर आप भी मुहब्बत और नजीब के
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खिलाफ आप ने जन्म लिया फिर दहन में इनके
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अलावा के सबसे बड़े सारे हजरत बाबा फरीद
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थे जिन्होंने अरबी-फारसी इस्टैब्लिशमेंट
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के दौर में अरबी-फारसी के अराइज होने के
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बावजूद इस्टैब्लिशमेंट को तकलीफ पहुंचाने
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की बजाय जम्हूर में बेदारी और फिर दब
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रोजगार पैदा की इन्हें मूसा बातें इंसानी
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और तकड़ी में इंसानियत का पैगाम उन्ही की
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जुबान में दिया कि उनके फलक पैटर्न रॉक और
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वेनेजुएला यह फोंट को नहीं बल्कि के
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ह्यूमनिज्म के सब
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अपने सारे है
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कि हजरत बाबा फरीद का शक्कर है अंधा
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बुद्धि के समय तक पंजाब में मुकामी यादव
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का भुगतान दिखाई देता है बल्कि आने वाले
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सदियों में भी इसके बाद यशराज टाइम रहे
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यही वजह है कि आदत कि इस कला को पूरा करने
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के लिए बाय से हमलावर आते रहे मुकामी की
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आदत के नाम होने के बाद इस वाउचर में हर
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तरफ मंदसौर और लूटमार का बाजार गर्म रहा
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जहर है ऐसे हालात में 1 लाख वी आर मॉल
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शक्ति तक राज्यों के मातहत हो जाती है यह
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नी मौकापरस्ती लूट-खसूट बेयकीनी अभिनेता
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बस जैसे हालात के साथ सड़कों पर मौत मंडल
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आने लगती है बाबा फरीद का वजूद उस दौर में
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नेमतें खुदाबंदी से कम न था आपने खुद को
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उस दौर की मशहूर अभिनेत्री में गुम करने
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की बजाय रे हंसा और तजुर्बा कार नजाकत
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चिंता का किरदार अदा किया है
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अब हम देखते हैं कि बाबा फरीद के बाद कि
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पंजाब के हालात नहीं बदले बल्कि उनमें
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मुजीब बिगाड़ पैदा हुआ था इसी लिए भगत
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कबीर बाबा जी गुरु नानक शाह हुसैन वर्ष या
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सुल्तान बाहू सचल सरमस्त अली हैदर काजमी
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और मियां मोहम्मद बख्श के यहां भी मौत का
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बाबा जी वाला एहसास ही पाया जाता है यह
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सूफिया अपने एबीईएस मौत की नींद और ढंग से
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आप लोगों को मेरे तरफ देख रहे थे यह सब
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कुछ सवाल हजरत बाबा सब्सक्राइब टो
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में आकर हमारा एक ही पैगाम है कि आम देखी
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करें और दूसरों को भी सामने की करने की
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तरफ बीते थे
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कि आपका बहुत-बहुत बधाई
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हुआ है
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झाला का
#Poetry
#Human Rights & Liberties
#Poverty & Hunger

