Hazrat Sultan Bahu & Mullah Dushmani | Dr. Amjad Bhatti YT | Punjab, Punjabi & Punjabiat
Nov 4, 2024
There is a strong tradition of animosity in the poetry of Sultan Bahu. They target hypocrisy and double standards. In his speech, he also forbade the rulers from spreading sectarianism. Sultan Bahoo is one of the Punjabi Sufi poets who has spoken in his poetry about the common man and fought for his human rights.
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# Sultan Bahu
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#Clergy
#Hypocrisy
#Punjab
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झाल
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हुआ है
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कि डॉक्टर अमजद अली भट्टी एक नए मौजूद के
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साथ रिश्तों में हमारा आज का मौजूद हजरत
0:18
सुल्तान बाहू की शायरी में शेव है
0:24
और अदरक सुल्तान बाहू 1631 में पैदा हुए
0:29
और आपकी वफात 1697 इस पीस में हुई
0:34
कि आपकी शायरी धीमे लहजे की शायरी होने के
0:38
बावजूद सूफियाना बगावत से मामू है वह
0:43
जयकार पर इस बार इंसान दोस्त शायरी मुलायम
0:47
दुश्मनी की उम्दा मिसाल है जो नामनेहाद
0:50
उलमा पर भी बर्फ उत्तंक करती है बाद
0:55
मुक़ामात पर सुल्तान बाहू ने औरंगज़ेब
0:58
आलमगीर के जमाना है बादशाहत को भी अधिकतम
1:01
की का निशाना बनाया है
1:03
कि आप पूर्णिमा की उदय परस्ती दुनिया भी
1:07
चाहत मजहबी तक नजरि और जहालत पर भरपूर
1:10
तरकीब करते हैं
1:13
मैं आपको इल्म था कि मुगल के इरादे आपस
1:15
में सिर्फ दुनियावी मामलों दौलत की खातिर
1:18
लड़ रहे हैं वरना उनके सामने जिंदगी का
1:21
कोई और मकसद नहीं अपनी कीमत और उनके
1:25
मोबाइल का हाल हुक्मरानों की दर्द हाथ में
1:28
शामिल नहीं है इसीलिए सुल्तान बाहू
1:30
दुनियावी मामलों दौलत की खातिर एक इंसान
1:33
को दूसरे इंसान के हाथों जलील होता ना देख
1:37
सके और पुकार उठे आदि लानत दुनिया की सारी
1:43
दुनिया द्वारा हूं
1:44
कि जेरा साहिब देख रचना की थी नैन गजब
1:49
दिया मारा हूं सेवा खोलो पुत्र को हाय बट
1:54
दुनियां मक्का राहतहुं जिन्ना तक दुनिया
1:57
देखी थी बाबू लहसुन बागबाहरा हूं यह
2:02
दुनिया आधी लानत की मानिंद है लेकिन
2:05
दुनियादार पूरी लागत के लायक है जिसने
2:09
अल्लाह की राह में माल और स्नान किया वहां
2:12
बेल्ट ही काम उन्हें गहरा ऐसी दुनिया भाड़
2:16
में जाए जो वाले ध्यान से हिप्स और लालच
2:19
की खातिर गुलाब जमा कराती है अब बहु जो
2:23
तारे के दुनियां हुए वहीं आश्रम में जन्नत
2:27
की बहारें लूटेंगे
2:29
के सुल्तान बाहू के मुताबिक नामनेहाद ओलमा
2:34
किताबें पढ़कर बादशाहों की खुशामद करते
2:37
हैं
2:38
है और उसे दुनिया भी वफादार था हासिल करते
2:41
हैं ऐसे हमसे क्या हाल फिल्म का मकसद
2:45
पहचाने खुदाबंदी है और यही इसका जो और है
2:49
जब लामा अपने एटीएम से रुपए इलाही की
2:53
विद्याएं दुनियावी मदद हासिल करने की ठान
2:56
लेते हैं तो फिर समझने में
2:59
है कि उनके इल्म का दूध खराब हो गया और
3:03
फिर उससे मारुति हक का मक्खन कभी हासिल
3:06
नहीं हो सकता
3:09
है यानी ऐसा एल्बम बाइक से वसूले मार फतेह
3:13
को हरगिज नहीं होता
3:15
के सुल्तान बाहू ऐसे आलम बेअमल को चंद्र
3:20
क्षेत्र तस्वीर देते हैं जो फसल गोल जमीन
3:24
से निकलते ही अपनी चोंच से उखाड़-उखाड़कर
3:28
तबाह कर देता है और ऐसा करने से उसे भी
3:31
कुछ हासिल नहीं होता इसी तरह दुनियादार और
3:35
बेअमल आलम अपने इनको बहुत और का रावण नहीं
3:38
होने देता ऐसे आलम से तो अनपढ़ खिदमतगार
3:42
अच्छा होता है जो अदब और खिदमत के जरिए कम
3:45
वक्त में ज्यादा संभाषण कर लेता है पर
3:49
मानते हैं पर एल्बम मलूक रजावन क्या हो या
3:53
इस बढ़िया हूं हरगिज़ मक्खन मूल ना आवे
3:57
मुद्दे खड़े हू आप चढ़ा
4:01
एक हाथ कि आयोग इस अंगूरी फटी हुई एक दिल
4:05
हंसता रखी राशि बाहु लें इबादत वर्य हूं
4:10
कि मखदूम जब वसूले इनका मकसद रॉ और
4:14
खूबसूरती यह बात शायद वक्त हो तो ऐसे
4:17
एल्बम का कोई फायदा नहीं बल्कि इससे फायदा
4:21
की उम्मीद जख्म शैली है जिस तरह खराब दूध
4:25
से मक्खन के रसूल की उम्मीद रखी जाए यह तो
4:28
ऐसे ही है दुनियादार शख्स जान ले जिस तरह
4:32
चंद्र को फसल उजाड़ने से कुछ हासिल नहीं
4:35
होता तुम्हारी मेहनत दी इसी तरह आएगा
4:38
जाएंगी हां अलबत्ता बाहु एक हफ्ता दिल को
4:42
खुश और राज़ी करने से कई सौ साल की इबादत
4:46
का सवाब हासिल किया जा सकता है सुल्तान
4:49
बाहू सूफी शायर थे और सूफी की पहचान यही
4:52
है कि उसका जहर बातंे एक होता है इसके
4:55
अलावा तसव्वुफ कि मैं जाणवत के बाद जो नया
4:59
रंग-रूप शहर हुआ उसमें पंजाब का मजहब के
5:03
मामले में सर्कुलर नुक्ता-ए-नजर आम आदमी
5:06
का जरूरतमंद आना इजहार ये खेल और अपने आप
5:09
की मुहिम
5:10
व्यक्ति और समाज जी जब से मुस्लिम होने की
5:13
एक अवाना शक्ल एक ऐसा पहलू है जो पंजाबी
5:18
सूफी शो और आपको इससे कपिल के तमाम सूफी
5:21
सिलसिलों बिताने खास अदमी उत्सव से मुफ्त
5:25
करता है
5:26
और यही वजह है कि सुल्तान बहु नाम ने हाथ
5:29
मुल्लाओं और उलेमा की रिहाई न को खूब
5:36
मरम्मत करने के साथ-साथ हुक्मरान तक के का
5:40
अवाम पर ज़ुल्म और नाइंसाफ़ी और दशरथ को
5:43
मजबूत के जरिए ताजा फल देने वाले प्रॉब्लम
5:46
आपको भी बुरा भला कहते हैं
5:49
कि एक जगह लिखते हैं इस जमाने में एक
5:52
किताबों में है और आलिम खबरों में है यह
5:56
जाहिर हो लिमा बादशाह ही हजरों कोर्ट के
5:59
मुक्ताकाशी चल बे वर्ष तक वे खुद धनुष में
6:02
लगे रहते हैं यह मंझला मजदूर है नव से
6:06
हमारा की कैद में है दुनिया विद्यार्थियों
6:09
के लिए न भूलें इस्तखारा पड़ते हैं लेकिन
6:11
इन लल्ला की मार्फत और जनाबे पैगंबर ए
6:14
खुदा की मजलिस का रुख नहीं करते और चेक
6:18
जमीन जरा बात फसलें रबी फसलें शरीफ के लिए
6:23
इस कदर अफसोस राहदारी करते हैं कि दुनिया
6:26
जहान को अपनी तरह बुला लेते हैं
6:29
वॉइस मेल खाता दुनिया की हो या दिन का
6:32
सुल्तान बाहू सिर्फ इल्म हासिल करने के
6:35
काबिल नहीं बल्कि के एल्बम को अमल की सूरत
6:38
में देखना चाहते हैं उन्होंने ऐसे वहां पर
6:41
कॉल कर तन की है जो अमल से मुख्य लक्षण आ
6:45
रही हैं उनका ऐसे लोगों पर संक्षिप्त करने
6:48
का यह मकसद हरगिज नहीं बोल की तस्वीर करना
6:51
चाहते हैं बल्कि असल मकसद उन खामियों की
6:54
निशानदेही करना है जो आश्रय की बेरा रवि
6:58
का वायरस हैं इस मंदिर में चंद्रशेखर
7:00
मिश्रा लें मुलायम रहा है
7:04
कि फिल्मों बाजुओं पकड़ कमाने का फार्म
7:07
अरे दीवाना हो सेवर यहां क्लिक करें इबादत
7:11
रहे अल्लाह क्यों बेगाना हो मासूम फिल्म
7:14
के बगैर जाते हद तक रह्यौ एक दीवानगी के
7:19
सिवा कुछ नहीं इस तरह तो सैकड़ों सालों तक
7:22
इबादत करने वाला भी अल्लाह से दूर और
7:25
बेगाना रहता है पड़ेगा एल्बम थे वहीं
7:28
मगरूरी अक्ल भी गया तो वहां तू बुला राहत
7:32
वाला न पाना का दोहराव
7:35
में बम जब दुनिया बी या बींधे लंप्स पड़ने
7:41
से एक बोइंग सारे की बजाय फसलों का व्रत
7:44
पड़ जाए तो यूं समझो इंसान की अगल गहरी
7:48
खाई में जा पड़ी इंसान रायत से दूर जाना
7:52
पड़ता है और यह उसे दुनिया और आखिरत में
7:55
कोई फायदा नहीं देता यह और जगह लिखते हैं
7:59
5 प्लीज ना उन्हें हर गिर पड़े रहने दे
8:03
विच पलीती हूं वह दूं यह जो चले इब दिल
8:07
सही ना कि तीनों अलग-अलग के पास और महबूब
8:11
अंदर दुनिया की अलग-अलग क्षेत्रों में
8:12
रहने की बावजूद इन से अलविदा नहीं होते
8:16
धन्यवाद अब हर वक्त जोश में है लेकिन
8:19
गारफील्ड इसमें अपने दिल को धो कर पाप
8:22
नहीं करते रहते हाथ से अपनी जहालत के बाय
8:25
फायदा नहीं उठाते सुल्तान बाहू के नजदीक
8:29
उलमा की मुखालफत का मकसद एल्बम को नापसंद
8:32
करना नहीं बल्कि के एल्बम बालों की
8:35
मुखालिफत
8:35
कुंग के दोगलेपन की वजह से है सुल्तान
8:38
बाहू पर मानते हैं उदास तक प्रेशर इल्म के
8:42
बगैर मुश्किल है जहर अपने नमस्कार गुलाम
8:45
होता है इसलिए वह अपनी दुनिया भी फैशन
8:48
आपसे वाला वह कर तलाशी यह की तरफ ध्यान
8:51
नहीं देता है लौंग दीन और दुनिया दोनों
8:55
में राह-ए-निजात के लिए जरूरी होता है
8:57
यानि कि हम यहां से इनकार नहीं किया जा
9:00
सकता मगर अमल के बगैर एल्बम दीवानगी है
9:04
इलू और आलम दोनों एक दूसरे की तक फील करते
9:07
हैं और एक दूसरे के बगैर बेईमानी तस्वीर
9:12
फ्री दिल ना फिर की लेना तस्वीर फाड़कर
9:15
तिलम पढ़े जाते अपना ख्याल की लेना एल्बम
9:19
पढ़कर हो छिले-कटे खोजने खटिया लेना जिले
9:24
के जावद जन्मदिन ही बाबू लाल गौड़ हो
9:31
ए ब्रूम तस्वीर के दामों पर सिगरेट अप्लाई
9:34
किया लेकिन इससे तेरे दिल की हालत ना बदली
9:37
तो यह जिक्र किस काम का इसी तरह इल्म
9:40
हासिल किया और उससे अदब इनका लेकर मखलूकात
9:44
राम ना सीखा तो यह एल्बे फायदा है
9:48
कोषाध्यक्ष नियुक्त यार की ओर फाइंस आप ना
9:51
हुआ तो ऐसी घोषणा ने चीनी पर मानी है यह
9:55
फ़िक्र जाम लोग जिस तरह अजुक के बगैर दूध
10:00
से मक्खन हासिल नहीं किया जा सकता इसी तरह
10:03
मुश्त की सोहबत के बगैर ताण रहेगा जाते
10:08
हैं सुल्तान बाहू ने ना सिर्फ नामनेहाद
10:12
प्रॉब्लम है पर बल्कि दुनिया दाग-धब्बे
10:14
आंखों और पीरों पर भी साथ अंकित की है
10:17
क्योंकि वह समझते हैं कि प्रभाष जोशी की
10:19
हत्या करने वालों की तक लीधो आम साधना लॉक
10:23
करते हैं
10:24
हैं और अगर भेज ही पर अमल हो तो वह खुद तो
10:28
टूटेगा ही दूसरों को भी जहां लत का शिकार
10:30
कर देगा
10:33
कि आपने तालाब हैंड कहीं दे लोग नुक्ता
10:36
लाभ कर रहे हो चावल के पास कर दे से पायल
10:40
लादे कहर तो ना ही डरते हो इश्क में दिल
10:44
धन बाजी पैर अगले तरद्दुद को शर्मिंदा
10:48
शोषण बाहु अंदर रोज हरदेव
10:51
ये दुनिया में ऐसे नामनेहाद रहनुमा मौजूद
10:54
हैं जो खुद तो तल पर हक नहीं करते लेकिन
10:56
दूसरों से शामिल की ख्वाइश करते हैं यह वह
11:00
लोग हैं जो दीनी और दुनियावी फिर मत का
11:02
मुआवजा तय करते हैं और अल्लाह के कहर से
11:05
नहीं डरते इस कि मुझे अभी तो एक फेयर और
11:08
शराब है वह इस राह पर नहाए बेइज्जती से
11:12
चलते हैं सच तो यह है कि ऐसे ही लोग क्या
11:15
मत करो आज अरब की बारगाह में अपने किए पर
11:19
ना दम होंगे है
11:21
कि इंसानों से मोहब्बत करने वाले लोग
11:26
बुजुर्ग शायर अपने किरदार निभाकर हालात से
11:29
आंखें बंद करके नहीं कह सकते जुल्म और
11:32
नाइंसाफी उन्हें अच्छी नहीं लगती थी
11:35
कि पूरे दबाइए मुक्त और यह कैरी जैसे सफल
11:38
का वह दिन से दुश्मन होते हैं यही वजह है
11:42
कि अब अपने हितों पर सुल्तान बाहू का एक
11:45
इत्र आज यह भी चाहेगी कि बद्री ने उन्हें
11:49
मगरूर बना दिया है पड़ताल करेगी हम तक
11:52
अकबर शैतान लहर उठे मुद्दों हो यानी एक
11:57
दुनिया ईद और बाहरी ईएस का रस रूई एक बार
12:01
उनका आखिरी ओवर तक कबर का बादशाह बनता है
12:05
पर इसी नहर एवं के विरुद्ध ने शैतान जैसे
12:09
आप दौड़ जाहिद को गुमराह कर दिया था ऐसे
12:12
लोग आगे आए तो इस्लाम की गिरफ्त से दूर हो
12:15
जाते हैं और लारा हिदायत वाला न कि का
12:18
दोहराव
12:20
है ऐसे लोग गहरी फिल्म के चक्कर में राहत
12:22
दूर हुए और दिनों दुनिया दोनों की कामयाबी
12:27
से मेहरूम दुनिया का ओल्मा ऐसे हैं जैसे
12:31
घरों पर किताब इलाज दी गई हो एल्बम का उन
12:34
पर कुछ भी असर नहीं होता गलियां दे विच
12:37
फिर न माने वतन किताब आ जाए हो लंबे अमल
12:43
बेचारे सिर्फ किताबों का बोझ उठाए गलियों
12:46
में मारे-मारे फिरते हैं
12:48
कि श्रावण माह बदलाव मांगो फ्रंट के
12:51
तापमान चाहिए और लिखते हैं जैसे सावन मास
12:55
में बरसात के बादलों की तरह बिन बुलाए
12:58
अपनी किताब में उठाए हर जगह आ धमकते हैं
13:02
जहां इन्हें अच्छा खाना और मशहूर मुआवजा
13:05
मिलने की तो आपको वहां किताब खोल कर अपने
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इलू का रौब जमाना शुरू कर देते हैं जैसे
13:12
लिखते हैं जाहिद जाणिव आयोजित टुकड़ा
13:16
व्यक्ति डू
13:19
यो यो हनी नर्स व जालिम है कि रिया आकार
13:22
शहद और दुनिया द्वारा आलम को वहां लाल
13:25
झुकाता है यह मरो गोम खाना का इंतजाम हो
13:28
जिद थे व्याकरण चंगा चोखा और थे पैटर्न
13:32
कलाम से हवाई हूं दुनियादार आलम जहां
13:35
खाने-पीने का आंवला इंतजाम देखते हैं वहां
13:38
कलावत एक अलार्म उभरी ज्यादा और तमाम और
13:41
खुशबू खुशबू के साथ करते हैं सच तो यह है
13:46
कि ऐसे लोग वह आपकी राशि दूर होते हैं और
13:48
अपने मैक्रो प्रेम के जाल में लोगों को
13:50
हंसाते रहते हैं सुल्तान बाहू उलेमा के
13:54
मुकाबले में फ़क़ीरों को आंवला इंसानी
13:56
दर्जे पर फेस देखते हैं यह सुल्तान बाहू
13:59
का इंसान दोस्त बंधा फकीर के रूप में नजर
14:03
आता है दुनिया द्वारा आलम और आखिरी इंसान
14:06
दोस्त में क्या फर्क है इसके बारे में
14:09
सुल्तान बाहू लिखते हैं सुकरा हमेशा जो
14:14
पोशाक पर को इस तरफ में रहते हैं और
14:18
उन्हें टेक्निक
14:19
कि के मसाइल और बेस मोबाइल सब मुझे रहते
14:23
हैं हेलो मोहन और मस्लोव मसाले कब्ज से
14:29
जुदा हो जाते हैं और यह बहुत ही हमेशा के
14:32
लिए फकीर के हमरा होती है और में भी इसकी
14:35
रफीक बनती है इससे जुदा नहीं होती फकीर
14:39
मार्फत और हमले तो होते हैं मुझे माफ
14:43
घाटशिला तीनों उम्र के हमनशीन होते हैं और
14:46
वह करा खुदा के हम निशान होते हैं
14:51
मैं अपने इस बांध में सुल्तान बाहू दुनिया
14:53
जालिम और फकीर का यूं बयान करते हैं
14:56
अल्लाह पड़े हो हफ्तों ना गया है जब ऊपर
15:01
दारू पढ़ पढ़ आलम फसल झुक तालाब हुए दर्द
15:05
हो सै हजार दाणा लुट किसी आलिम चोर अंदर
15:15
यानी इंसान अपने तौर पर तो तू उन्हें
15:19
अल्लाह के नाम का बनाया हुआ है और उसकी
15:23
इबादत में मशगूल रहता है लेकिन इस बात से
15:27
नहीं के बाद अपने अंदर गुरूवार को इसीलिए
15:32
तुम्हारे दिल में है
15:34
को शेयर करें इस तरफ वाली है कि दुनिया के
15:38
तमाम मामलों से वाकिफ है लेकिन तू क्या
15:40
जाने के तूने फिल्म के समंदर में से
15:44
चुल्लु भर इल्म हासिल नहीं किया क्या तुम
15:47
यह भी जानते हो कि तुम्हारे अंदर की कला
15:49
जत्थों ने तुम्हें गुमराह किया हुआ है ऐसी
15:52
हालत में तो लोग मर जाते हैं लेकिन हैरत
15:54
की बात है कि तू जिंदा है याद रख जब तक
15:57
मुर्शिदे कमल की सूची निभाना हो अंदर का
16:01
जो रिसेप्शन हमारा कभी नहीं मरता इंसान का
16:04
यह चोर अंदर ही अंदर तुझे लूट के इसके
16:07
अलावा इसे दूर कर देगा यह 13 अप्रैल बेकार
16:11
हो जाएगा इसी तरह सुल्तान बाहू के इंसान
16:14
दोस्ती का मॉडल इंसान फकीर के रूप में नजर
16:17
आता है फकीर फकीर के बारे में उनके चंद्र
16:20
मिश्र एवं लाइजर हूं नाम फ़क़ीर चिन्ह
16:23
अंदर बाहु जिन अलावा मकानी जाई हो
16:27
कि अ बहु फकीर कहलाने के पहल वह लोग हैं
16:31
जिन्होंने अल्लाह तक फ्राई हासिल कर ली है
16:34
नाम फ़क़ीर दिन आधा बाहु कवर जीना दी जीवे
16:38
हू फकीर कहलाने के लायक वह लोग हैं जो मर
16:42
कर भी जिंदा है
16:44
आ रहा कर रख मंजूर ओवन धब्बा हुवा माणिक
16:48
हां साधु अब उठाकर गिरा दुखों गई है लेकिन
16:53
लोग तो जिंदगी में हंसी-ख़ुशी को पसंद
16:55
करते हैं नाम फ़क़ीर तक सुंदर बाबू जगजीवन
17:00
दिया मर जावे हो अब बाहुक मक्का में फक्र
17:04
तब हासिल होता है जब मौत से पहले मर जाओ
17:07
नाम फ़क़ीर तन्हाइयां बाबू जरा हटा दो
17:11
मक्खन कि देव
17:13
है अब उठाकर कहलाने के लायक लोग हैं
17:19
है जो सख्त मशक्कत करके कुबलाई का सिला
17:22
पाते हैं नाम फ़क़ीर ते महानदा बाहुक
17:25
जुड़ा घाव यार खा लो अब उठ फकीर व है जो
17:30
जंगलों में सर गरदा फिरने की बजाय गर्म
17:34
हिस्सा ले यार करावे यह और जगह लिखते हैं
17:37
नाम फ़क़ीर तक थिंग्स आब जब बीच चल अबे मर
17:41
गए वह अ बहु फकीर नाम तब पड़ता है जब तक
17:45
बेदार में मौत आ जाए सुल्तान बहु फरमाते
17:49
हैं अगर तुम्हें मुलम्मा बामल हो सच बोलने
17:52
और इसके अलावा रखें और हफ्ते जायला ही
17:55
कैप्सूल के लिए इल्म हासिल करें और दूसरों
17:58
के लिए ने की तरफ का 22 बने तो इससे अच्छा
18:01
अमल और क्या हो सकता है यह लत से बड़ी
18:05
चीज़ दुनिया में कोई नहीं मगर अमल के बगैर
18:08
एल्बम बांझ औरत की मानिंद है
18:11
है अमन से सुल्तान बाहू की मुराद जारी अमल
18:14
नहीं इसे आप मना कर करार देते हुए मुस्तरद
18:17
करते हैं वह आलम और इल्म के दरमियान मजबूत
18:21
और ठोस तालक गायब होने की ख्वाइश करते हैं
18:24
जहां एल्बम ना तो तक वृद्धि रहता है और ना
18:28
ही फर्ज से इसका ताल्लुक शरीयत पर मबनी
18:31
होता है बल्कि वह इंसान हिसाब का हिस्सा
18:34
बनकर इस की तरक्की का बादशाह बनता है
18:36
दूसरी तरफ जो शक सिर्फ को हवस का शिकार हो
18:39
जाता है यूं समझिए वह उस जैसी नहीं जा
18:42
सकते हैं फंस गया जिससे जिस कदर क्यों न
18:45
दोहराया जाए दाग बाकी रहता है दुनिया संघ
18:51
स्प्लिटिंग कितनी मलमल तो धन खूब दुनिया
18:55
कारण आलम फादर गिव वन हु हु हु
19:03
को जिंदा तर्क दुनिया थी कीर्ति बाबू 150
19:07
निकल खेलो ओपन हो
19:09
ये दुनिया तो औरत के हेयर्स की नजाकत की
19:12
तरह है इसे जिस कर दिया जाए पार्क नहीं
19:14
होती इसके बावजूद दुनिया द्वारा लिमिट
19:17
इसकी मोहब्बत में रोते रहते हैं हालांकि
19:20
है जिसके पास ज्यादा दुनिया भी मालूम तो
19:22
हालात होता है उसे सुकून की दौलत नसीब
19:25
नहीं होती है बाहु जिन लोगों ने करके
19:28
दुनिया किया वहीं कामयाब ठहरे तूने अभी
19:31
मामलों के परस्तारों को ना तो दिन का चैन
19:35
नसीब होता है और ना रात का सुकून सुल्तान
19:38
बाहू ऐसे दुनियादारों को व्याध कहते हैं
19:41
और अपने खुरों से तस्वीर देते हैं बेअदब
19:45
अनुसार यदि गए अल्पावधि में नेहरू जुड़े
19:50
था मिट्टी पांडे करेंगे हो
19:54
से जुड़े मोड कदीम दे खड़े कर देना होंगे
19:57
और नेहरू ज्यादा हजूर नाम अज्ञात बावजूद
20:00
वे दो ही जाने व नेहरू यादव लोकेश यादव से
20:05
नावाकिफ होते हैं इसलिए यादव के वायरस
20:08
अश्वनी मलिक प्रकार से मेहरूम रहते हैं
20:11
जैसे मिट्टी के बर्तनों को जिस कदर भी साफ
20:15
किया जाए शीशे के बर्तन नहीं बन सकते जो
20:18
असलम ही खेड़े वह किस तरह राज्य बन सकते
20:21
हैं जो अशीष की अदालत से महरूम हो इसके
20:24
लाएगी चाशनी नहीं पा सकते हैं इसके देर
20:27
में कुबेला है कि ख्वाइश ना वह दोनों जहन
20:30
में मैं रूम रहता है इस बांध में ऐसे
20:33
लोगों की तरफ इशारा है यह हजार मुसीबतें
20:36
की जाए कुमार फतेह कुमार विषय वस्तु के
20:40
नहीं होते और न ही वालों की कल की नसीहत
20:44
और तालिका स कबूल करते हैं नतीजतन ऐसे लोग
20:48
दोनों जहां की नियुक्तियों से मेहरूम रहते
20:51
हैं उनकी मिसाल मिट्टी के ऐसे
20:54
छात्रों की होती है जो आजमाइश की थोड़ी सी
20:56
ही धूप में बर्दाश्त नहीं करते और टूट
20:58
जाते हैं और इन पर आपके नाम की कली भी
21:01
नहीं चलाई जा सकती ऐसे लोगों को मिसाल
21:04
सच्चे नायकों के मुखालिफ खेड़ों जैसी होती
21:07
है कि लाख चाहे राज्य नहीं बन सकते
21:11
सुल्तान बाहू की शाही का एक और
21:14
काबिल-ए-जिक्र पहलू अपने जमाने के नाम ने
21:16
मधुमक्खी मजहब के बारे में की गई तहरीर पर
21:19
तन की है
21:21
ए बाहु मजबूत किए जाने की रस्म से बाला
21:25
होकर दूसरे लोगों को इंसान समझना ही असल
21:28
में जब करार देते हैं क्योंकि वह समझते
21:30
हैं कि मजहब अल्लाह ताला तक रसोई का एक बस
21:34
शीला होता है और जो म बंदे को अपने हिसाब
21:37
से दूर कर दे वह मजहब नहीं हो सकता ना मैं
21:41
आलम ना मैं पागल ना मुक्ति ना काली हूं ना
21:45
दिल मेरा दोजख मांगे इतना शौक बेचती राजी
21:48
हो ना मैत्री है रोज से रखें ना मैं पार्क
21:53
निवासी हो बाद विशाल अल्लाह बहु दुनियां
21:57
कुड़ी बाजी हो मखदूम ना मैं आलू को फॉलो
22:02
और ना ही मुक्ति और काफी ना मेरे दिल में
22:05
दो जगह ऑफ है और नवमेश का ख्वाइश मांगू ना
22:09
मैंने रमजान के तीसरे रखिए और ना ही मैंने
22:12
मांस का पवन हो क्योंकि अ बहु जब तक
22:16
अलग-अलग विशाल और उसका कुल भाषण ना हो
22:19
दुनिया में किए जाने वाले
22:21
इस्तमाल बे फायदा है सुल्तान बाहू के हाथ
22:26
में शिया-सुन्नी का मसला गंभीर सूरत
22:28
अख्तियार कर चुका था अनुमति अधिकारों का
22:31
एक विरोध किया मतलब कि खुल्लम-खुल्ला
22:33
हिमायत करता था और दूसरा प्रो0 कायम रखने
22:37
वालों का दरपर्दा हमारी टीम सुल्तान बाहू
22:40
इस्तेमाल सूरतेहाल पर निगाह रखे हुए थे
22:44
औरंगजेब ने फिर का बनाना तक नजर पॉलिसी का
22:47
यह लाभ सिर्फ गैर मुस्लिमों पर ही नहीं
22:50
किया बल्कि रेट सुन्नी मुसलमान भी इसकी जद
22:53
में आए इस के दौर में शिया-सुन्नी अफवाह
22:55
ने खूनी फसादात की सूरत तैयार कर ली थी सो
23:00
सुल्तान बाहू ने शिया सुन्नी दोनों
23:02
गिरोहों से गारला काल की ना मैं सुननी ना
23:07
मैं सिया मेरा दो हां तो दिल सड़े बापू
23:10
मुख गए सब कुछ की vintage2 तयार रहमतगंज
23:14
बढ़िया खूब
23:16
ए परफ्यूम ना मैं सुन्नी हूं और मैं सिया
23:19
मेरा दिल दोनों गिरोहों से इनकी भला व्रत
23:22
तो संधि के बाद सूबेदार है या मैं अकेले
23:25
रहमत को देखता हूं तो इस फिरका परस्ती से
23:27
पास है तो मैं इत्मीनान हासिल कर लेता हूं
23:31
सुल्तान बहु शिया-सुन्नी तो पूजा सर्च गैर
23:35
हिंदुओं और नामनेहाद मुसलमानों से
23:37
बेरोजगारी का इजहार करते हैं तो हिंदू
23:40
नामों मोहम्मद नसरुद्दीन उल्टी हो दमदार
23:44
व्यक्ति मौजूद ना ज़ाणा की मासूम ना व
23:48
हिंदू हैं और न मुसलमान और मस्जिदों में
23:51
रहते हैं बल्कि यह तो वो लोग हैं जो अपने
23:55
मालिक की याद नहीं रहते इसके बाद इन्हें
23:59
हर व्यक्ति अरे यार रहता है सुल्तान बाहू
24:03
के भक्त और योगियों संतों और फ़कीरों
24:06
वगैरह कि मैं अपने मतलब की लिंग करती रहती
24:10
थी पंजाब पंजाब में अशोक
24:16
यो यो था इसलिए सुल्तान बाहू ने अपनी
24:18
शायरी में कर ज़िक्र भी किया है या फिर के
24:21
भी बहुत हद तक अपने असली मजा है ना
24:24
है और अकाउंट से दूर हो चुके थे क्योंकि
24:27
यह भी ना भूलें सो चुके थे इसलिए आपने
24:29
हमसे लाता लिखी का इजहार यूं फ़रमाया ना
24:33
मैं जोगी ना जंगम नाम कमाया नाम भी
24:40
है ना 10 बार खड़काया है
24:43
का नाम है जो कि और नामक घंटियां बजाने
24:45
वाला फकीर और ना ही मैंने चिला काटा है
24:48
नाम है मस्जिदों की तरफ भागा और ना ही मैं
24:52
बड़ी-बड़ी तस्वीरें लेकर के अधिकारी से
24:55
पड़ता सुल्तान बाहू लोगों को दिखाने के
24:58
लिए नवनिर्माण में उड़ने रोजे रखने और आज
25:01
करने वालों को उनका हक समझते उनके खेल में
25:03
बुलंद आवाज में आ जाने वालों की नीयत साफ
25:07
नहीं सच्चा व है जो खामोशी के साथ मुख्य
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अभियुक्त की मदद करता रहे नलिनी माझा कम
25:15
ज़नाना रोज सर फारुक के देवर समझा करो ना
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तो रोटी यहां जो 10 रोटी दो
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क्यों न अपनी बातें पढ़ना और तो वाला आर्म
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होल है और रोजा रखना रोटी की बचत का एक
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टांग है मक्का मदीना हज के लिए वह लोग
25:35
जाते हैं जो घर के काम-काज से पीछा
25:37
छुड़ाना चाहते हैं और बुलंद आवाज में अजान
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है वह देते हैं जिनकी नीयत साफ नहीं होती
25:43
सो सुल्तान बाहू ऐसी दुनिया में रहने से
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गुरेज है जहां आर्य समाज की बुनियाद पर
25:50
बढ़ाई और मलकीयत का दावेदार हो मजा बंद
25:54
दरवाजे उज्जैन रवाना मोरी हो पंडित आते
25:58
मूल वाणियां कोलोन छुप-छुप लग यह चोरी हो
26:00
पट्टियां मारण कर्म बखेड़े दर्द मंद देखो
26:05
लुटाएं दाणा किसे होर मजहब के बयानों वाला
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है लेकिन अल्लाह क्रश वाला रास्ता नाम ने
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पंडित और मौलवी से यह सब्सक्राइब और दूर
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रखने वालों के दुश्मन हो जाते हैं आपके
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कि नजर ऐप बाहुक चल वहां बसेरा करें जहां
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जाते हैं आपके सिवा कोई दावेदार न हो
26:35
सुल्तान बाहू के मुक्तसर से जे के बाद हम
26:38
यह कर सकते हैं इंसान दोस्तों की शायरी है
26:44
और उस मुहिम शुरू आपको जगह लगता है
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उन्होंने यहां अपने कि मदरसों के खिलाफ
26:52
आवाज बुलंद की उन्होंने की तरक्की की राह
26:57
में रोड़े अटकाने वाले व्यक्ति और उनके
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कारिंदों ने और मूल्यों की तरफ मुज़म्मत
27:07
की है
27:10
कि आपका बहुत शुक्रिया अस्सलाम ओ
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हुआ है
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अजय को
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