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NREGA Workers Protest in Delhi | Explained

Mar 27, 2023

groundreport.in

भारत में 27 करोड़ से ज्यादा लोग मनरेगा के तहत मिलने वाले काम से अपना जीवन यापन करते हैं, दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद इन मज़दूरों को 250 से 300 रुपए मिलते हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने सबकुछ डिजीटल करने के चक्कर में इन मज़दूरों की मुश्किल बढ़ा दी है, अब मनरेगा में आधार बेस्ड पेमेंट सिस्टम और ऑनलाईन अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया गया है, इसमें मज़दूरों को सुबह 11 बजे से पहले ई अटेंडेंस लगवानी होती है अपने फोटो के साथ, लेकिन कई गांवों में नेटवर्क की समस्या होने के कारण मज़दूर ऐसा नहीं कर पाते और उनकी एबसेंट लग जाती है, नेटवर्क न होना, फोटो समय पर अपलोड न होना, सर्वर का काम न करना , सिस्टम का हैंग हो जाना गरीबों की मज़दूरी को चबा जाता है। इन सभी समस्याओं को सरकार के कानों तक पहुंचाने के लिए नरेगा संघर्ष मोर्चा के बैनर तले मज़दूर पिछले 30 दिनों से दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट कर रहे हैं, आपको पता नहीं होगा...क्योंकि विरोध शांतिपूर्ण ढंग से किया जा रहा था...इसके लिए किसी सड़क को रोका नहीं गया था। इन्हें अभी तक सरकार की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला है। मजदूरों का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने भाजपा और आम आदमी पार्टी के कार्यक्रम के लिए उनसे जगह खाली करने को कहा है। शुक्रवार को दिल्ली युनीवर्सिटी की आर्ट्स फैकल्टी के सामने इसी मामले पर शांतीपूर्म ढंग से विरोध कर रहे कुछ स्टूडेंट्स और एक्टीविस्ट्स को डिटेन कर लिया गया। पुलिस का कहना है डीयू प्रशासन के मुताबिक यहां विरोध प्रदर्शन से कॉलेज का पीसफुल इंवायरमेंट खराब हो रहा था। कभी जो यूनिवर्सटीज़ देश के ज़रुरी मुद्दों पर बहसों से गूंजा करती थी, अब वहां पीसफुल इंवायरमेंट है... दूसरे शब्दों में कहें तो मुर्दा शांती है.... आपको बता दें कि अगर मिनिस्ट्री ऑफ रुरल डेवलपमेंट आधर बेस्ड पेमेंट सिस्टम को अनिवार्य करने के फैसले से पीछे नहीं हटती है तो 57 फीसदी नरेगा मज़दूरों की मज़दूरी पर तलवार लटक जाएगी। Follow @Groundreport
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