0:00
तो भाई साहब आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत
0:02
और आज एक बहुत ही इंपॉर्टेंट सब्जेक्ट है
0:06
वो है सेक्शन 138 नेगोशिएबल
0:08
इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट का यानी कि आप जानते
0:10
हैं चेक बाउंस की बात यहां पे हो रही है।
0:12
सो बहुत सारी क्वेरीज ऐसी होती हैं कि चेक
0:15
बाउंस एग्जैक्टली है क्या? लीगली किसको
0:17
चेक बाउंस कहेंगे? उसका लीगल नोटिस का
0:20
क्या प्रोटोकॉल्स है? प्रोसीजर्स है? उसके
0:24
बाद क्या प्रोसीजर्स हैं? सो आज ये सारी
0:26
चीजें कवर करेंगे। व्हाट द हेल इज सेक्शन
0:29
138 ऑफ द नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट।
0:32
बिना वक्त की बर्बादी के शुरू करते हैं।
0:40
सी एक बेसिक बात है आज के टाइम में चाहे
0:43
बिनेस हो, पर्सनल ट्रांजैक्शन हो सिर्फ यू
0:46
नो चेक सिर्फ एक कागज का टुकड़ा तो होता
0:48
नहीं है। चेक एक टाइप का ट्रस्ट है,
0:51
कमिटमेंट है। पेमेंट इंश्योरेंस होता है।
0:55
एंड एज दे कॉल इट, मनी इज़ अ सेंस ऑफ़
0:57
सीरियसनेस। तुम में तो वैसे भी नहीं है।
0:59
बट खैर लेकिन जब यह चेक बैंक में प्रेजेंट
1:04
करने पर बाउंस हो जाता है। मतलब कि आपने
1:07
चेक सबमिट करा, डिपॉजिट करा और फिर चेक
1:10
बाउंस हो गया। यानी कि अमाउंट सामने वाले
1:12
के उससे डेबिट हो के आपके इसमें क्रेडिट
1:15
नहीं हुई है। चेक बाउंस हो चुका है। तो
1:17
बात सिर्फ पैसों की नहीं रहती। यह
1:21
क्रिमिनल लायबिलिटी का मैटर बन जाता है।
1:23
इसीलिए आज हम बात करेंगे सेक्शन 138 के
1:26
नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट में जो 138
1:30
है 1881 के बारे में जो चेक बाउंस को
1:33
क्रिमिनल ऑफेंस बनाता है। ये भी एक बहुत
1:35
इंपॉर्टेंट चीज है कि ये क्रिमिनल ऑफेंस
1:38
क्यों है? अब इसमें हम क्या-क्या कवर करने
1:40
वाले हैं? भाई पहली बात तो चेक बाउंस कब
1:41
क्राइम बनता है? ये बहुत इंपॉर्टेंट है
1:43
समझना कि चेक बाउंस क्राइम कब बन जाता है?
1:46
लीगल नोटिस का क्या रोल होता है? प्रॉपर
1:48
प्रोसीजर क्या होते हैं? और चेक बाउंस
1:51
नोटिस कैसे वैलिड होता है? ये भी काफी
1:54
लोगों को पता नहीं है। मैंने बहुत सारे
1:55
एडवोकेट्स को सुना है। ऐसी भोंडी बातें
1:58
करते हैं। उन्हें खुद को नहीं मालूम कि
2:00
चेक बाउंस का नोटिस जो है वो वैलिड कब हो
2:02
जाएगा। ठीक है? तो पहले तो सेक्शन 138 को
2:05
बेसिक समझ लो। ठीक है? सेक्शन 138 कहता है
2:10
कि अगर कोई पर्सन चेक इशू करता है और वो
2:15
चेक इनसफिशिएंट फंड्स अकाउंट क्लोज्ड या
2:19
बैंक अरेंजमेंट एक्सीड होने की वजह से
2:22
बाउंस हो जाता है। किसकी वजह से?
2:23
इनसफिशिएंट फंड्स अकाउंट क्लोज्ड या बैंक
2:26
अरेंजमेंट एक्सीड होने की वजह से बाउंस हो
2:28
जाता है। तो वो पर्सनल क्रिमिनल ऑफेंस
2:31
कमिट करता है। लेकिन डायरेक्टली नहीं
2:36
वो पर्सन क्रिमिनल ऑफेंस कमिट कर रहा है।
2:39
पर्सनली क्रिमिनल ऑफेंस एक तरीके से कमिट
2:41
कर रहा है। डायरेक्टली नहीं कर रहा है। लॉ
2:43
एक फेयर अपॉर्चुनिटी देता है ड्रॉर को
2:46
पेमेंट करने का और इसीलिए लीगल नोटिस का
2:49
कांसेप्ट आता है। ठीक है? सुप्रीम कोर्ट
2:53
का एक बहुत इंपॉर्टेंट ऑब्जरवेशन है।
2:55
शक्ति ट्रैवल केस हुआ था 2002 में।
2:57
सुप्रीम कोर्ट ने शक्ति ट्रैवल एंड टूर्स
3:00
वर्सेस स्टेट ऑफ बिहार 2002 के जो केस है
3:03
उसमें क्लियरली बोला था आपसे कि सेक्शन
3:05
138 का बेस ही लीगल नोटिस है। कोर्ट ने
3:10
कहा प्रॉपर्ली सर्व लीगल नोटिस के बिना
3:13
सेक्शन 138 का कंप्लेंट मेंटेनेबल ही नहीं
3:16
है। और कई एडवोकेट्स हैं जो यह मिस कर
3:21
प्रॉपर सर्विस ऑफ लीगल नोटिस अगर नहीं
3:24
होगी तो 138 का कंप्लेंट मेंटनेबल है ही
3:26
नहीं। लीगल नोटिस सिर्फ फॉर्मेलिटी नहीं
3:29
है बल्कि स्टटरी सेफगार्ड है। यह ड्रर को
3:32
लास्ट चांस देता है पेमेंट करने का बिना
3:35
क्रिमिनल केस फेस किए। सिंपल
3:40
रिसेंट सुप्रीम कोर्ट का शिफ्ट था। एक यह
3:45
धन सिंह प्रभु का केस हुआ था 2025 में। तो
3:48
जो धन सिंह प्रभु वर्सेस चंद्रशेखर 2025
3:51
केस में सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 138 और
3:54
141 एनआई एक्ट जो है एस्पेशली पार्टनरशिप
3:57
फर्म्स के चेक बाउंस केसेस। ठीक है? इसके
4:00
स्कोप को दोबारा एग्जामिन किया है। इस
4:03
जजमेंट ने पार्टनरशिप रिलेटेड लायबिलिटी
4:06
को और क्लियरली डिफाइन किया जो आने वाले
4:09
केसेस में काफी इंपैक्ट डालेगा।
4:12
चेक बाउंस नोटिस की बात करें। इसके लॉ
4:14
औरेंस की बात करें तो बहुत लोग यह सोचते
4:16
हैं कि चेक बाउंस हो गया मतलब केस हो
4:19
जाएगा। ठीक है? ऐसा नहीं होता। क्रिमिनल
4:23
लायबिलिटी तब बनती है जब चेक बाउंस हो और
4:25
ड्रर लीगल नोटिस के बाद भी पेमेंट ना करे।
4:28
मैं इसको रिपीट कर रहा हूं। चेक बाउंस हो
4:31
गया और ड्रर ने लीगल नोटिस के बाद भी
4:33
पेमेंट नहीं किया। तो सेक्शन 138 बी के
4:37
अकॉर्डिंग पेई को 30 दिन के अंदर लीगल
4:41
नोटिस भेजना होता है। यह 30 डे काउंट
4:44
होंगे बैंक से डिसऑनर इंफॉर्मेशन मिलने के
4:47
बाद तब ये लिमिटेशन वाली चीज घुस जाती है।
4:51
30 डे काउंट होंगे आपके बैंक से डिसऑनर
4:54
इंफॉर्मेशन मिलने के बाद शुरू होगा। नोटिस
4:57
में क्लियर डिमांड होनी चाहिए। चेक का
4:59
अमाउंट मेंशंड होना चाहिए। और 15 दिन का
5:02
टाइम दिया जाता है पेमेंट के लिए। अगर 15
5:05
दिन में पेमेंट नहीं होती मान लेते हैं।
5:08
ठीक है? किसी भी रीजन से 15 दिन में
5:09
पेमेंट नहीं हो रही है तब ऑफेंस कंप्लीट
5:13
माना जाता है। ये समझ में आया?
5:16
तो चेक आपने लीगल नोटिस दिया। चेक बाउंस
5:20
हुआ। लीगल नोटिस के बाद भी पेमेंट नहीं हो
5:23
रहा है। तब वो कंप्लीट माना जाता है। और
5:25
ये सारी टाइमलाइंस याद रखनी जरूरी है। ठीक
5:28
है? लीगल नोटिस की अगर बात करेंगे तो
5:31
सिविल से क्रिमिनल का ब्रिज है। लीगल
5:34
नोटिस सिविल ट्रांजैक्शन को क्रिमिनल
5:37
लायबिलिटी में कन्वर्ट करने का ब्रिज है।
5:39
इतना आप समझ लो। इसके बिना चाहे चेक कितना
5:44
भी जेन्युइन हो प्रोसीक्यूशन नहीं हो
5:49
ठीक है? सुप्रीम कोर्ट ने शक्ति ट्रेवल
5:52
केस में बोला था कि नेगोशिएबल
5:54
इंस्ट्रूमेंट एक्ट नॉन पेमेंट को पनिश
5:56
नहीं करता बल्कि नोटिस के बाद विलफुल नॉन
6:00
पेमेंट को पनिश करता है। ये समझो इस बात
6:03
को समझना इसको इंटरप्रेट करना बहुत ज्यादा
6:08
एनआई एक्ट नॉन पेमेंट को पनिश करेगा ही
6:11
नहीं। बाप ने भाई नोटिस दिया नोटिस के बाद
6:14
भी विलफुल नॉन पेमेंट है उसको पनिश करता
6:16
है। तो एनआई एक्ट का जो चैप्टर है वो
6:21
क्यों आया? 1988 से पहले क्या था? चेक
6:24
बाउंड सिर्फ सिविल डिस्प्यूट था। रिकवरी
6:26
स्लो और बहुत इनफेक्टिव थी। इसके लिए
6:29
पार्लियामेंट ने बैंकिंग एंड नेगोशिएबल
6:31
इंस्ट्रूमेंट्स लॉज़ अमेंडमेंट एक्ट 1988
6:34
के थ्रू सेक्शन 138 से 142 इंट्रोड्यूस
6:36
किए। इसका पर्पस बहुत सिंपल था। चेक की
6:39
क्रेडिबिलिटी को बढ़ा देना, डेलीिबेरेट
6:41
डिफॉल्टर्स को डेटर करना, ऑनेस्ट
6:42
बिज़नेसमैन को प्रोटेक्शन देना। इतना बेसिक
6:48
अब चेक बाउंस नोटिस का पपस सिंपल वर्ड्स
6:52
में अगर मैं बोलूं आपको तो देखो चेक बाउंस
6:55
नोटिस तीन काम करता है। पहला तो ये कि वो
6:59
ड्रर को बताता है कि चेक बाउंस हो गया है।
7:02
सेकंड पेमेंट का भाई तुझे लास्ट एक लास्ट
7:05
चांस दे रहा है। ठीक है? और सेक्शन 138
7:09
कंप्लेंट फाइल करने का लीगल फाउंडेशन
7:12
बनाता है। सिंपल। पहले तो ड्रर को बताएगा
7:16
कि भाई चेक बाउंस हो गया। दूसरा पेमेंट का
7:18
लास्ट चांस देता है। और थर्ड सेक्शन 138
7:20
कंप्लेंट फाइल करने का लीगल फाउंडेशन
7:23
बनाता है। ओके? इसी बैलेंस की वजह से
7:26
स्ट्रिक्ट लॉज़ भी हैं और फेयर। ठीक है? ये
7:31
सिंपल सी बात है। तो चेक बाउंस क्राइम
7:33
क्यों बन जाता है? चेक एक रिटन लीगल
7:36
प्रॉमिस होता है कि अकाउंट में पैसा
7:38
अवेलेबल है। इसको प्लीज समझो। नहीं मतलब
7:41
तुम्हारे अकाउंट में नहीं है। तुम रोको तो
7:42
उसमें मैं कुछ नहीं कर सकता। ठीक है? दिल
7:45
पे मत लो। तो चेक क्या है? एक रिटन लीगल
7:48
प्रॉमिस होता है कि अकाउंट में पैसा
7:50
अवेलेबल है। जब चेक इनसफिशिएंट फंड्स की
7:54
वजह से बाउंस होता है, बिजनेस ट्रस्ट
7:57
टूटता है। बैंकिंग सिस्टम की क्रेडिबिलिटी
8:00
अफेक्ट होती है। सुप्रीम कोर्ट ने बोला कि
8:04
सेक्शन 138 का मेन एम है फाइनेंशियल
8:09
तो, यह सब तो इंपैक्ट हो जाएगा। क्यों?
8:12
क्योंकि जब चेक इनसफिशिएंट फंड की वजह से
8:14
बाउंस हो जा रहा है तो क्या हो रहा है? जो
8:15
आपका एक बिज़नेस ट्रस्ट है एक तो पहली बात
8:17
ये है कि तुम फक्कड़ हो। दूसरा कि बिज़नेस
8:20
ट्रस्ट इंपैक्ट हो गया। बैंकिंग सिस्टम की
8:22
क्रेडिबिलिटी इंपैक्ट हो गई। ठीक है? यहां
8:24
पे मैं एक मोदी सीमेंट मोदी सीमेंट केस था
8:28
कुछ आई थिंक 98 या 99 का कुछ केस था। तो
8:31
मोदी सीमेंट्स लिमिटेड वर्सेस आई थिंक
8:34
कुचिल कुमार समथिंग उसमें सुप्रीम कोर्ट
8:37
ने क्लियरली बोला था मुझे याद है कि चेक
8:40
इशू होने का मतलब ही है लीगली एनफोर्सिएबल
8:47
बाद में पेमेंट स्टॉप कर देना या
8:49
एक्सक्यूज देना ये क्रिमिनल लायबिलिटी से
8:52
बचने का ऑप्शन नहीं है ये बहुत सिंपल चीज
8:55
है। ठीक है? तो चेक बाउंस नोटिस का चेक
8:59
बाउंस नोटिस कब वैलिड माना जाता है? यह
9:01
इसके लिए बहुत जरूरी है समझना। लीगल नोटिस
9:04
ड्राफ्टिंग सबसे क्रिटिकल स्टेप है। अगर
9:07
नोटिस में मिस्टेक हुई पूरा केस फेल हो
9:10
सकता है। ठीक है? तो सेक्शन 138 के
9:15
मैंडेटरी कंडीशंस ये है कि ऑफेंस तब ही
9:18
बनता है जब चेक किसी डे या लायबिलिटी के
9:21
डिस्चार्ज के लिए दिया गया हो। चेक बाउंस
9:24
हो। यानी इनसफिशिएंट फंड है या अकाउंट
9:26
क्लोज या जो हमने बोला था पेई 30 दिन के
9:29
अंदर नोटिस भेजें और ड्रॉर 15 दिन में
9:31
पेमेंट ना करे नोटिस ही लीगल ट्रिगर है
9:34
यहां पे सिंपल सी बात है तो चेक बाउंस के
9:37
चेक बाउंस नोटिस के जो की कॉम्पोनेंट्स है
9:39
ये समझ लो आप एडवोकेट हो तो बहुत ज्यादा
9:42
जरूरी है समझना नोटिस में क्लियर होना
9:44
चाहिए पार्टीज के डिटेल क्या ड्रर का क्या
9:47
नाम है एड्रेस क्या है पेई या होल्डर का
9:49
क्या नाम है उसका क्या एड्रेस है चेक के
9:51
डिटेल्स यानी चेक नंबर डेट बैंक बैंक
9:54
ब्रांच अमाउंट वर्ड्स में और फिगर दोनों
9:58
में प्रेजेंटेशन एंड डिसऑनर भी होना जरूरी
10:01
है कि चेक कब प्रेजेंट हुआ? कब रिटर्न
10:04
हुआ? बैंक मेमो एंड रीज़ क्या है? नेचर ऑफ
10:07
लायबिलिटी मेंशन करो। किस डे या ऑब्लिगेशन
10:10
के लिए चेक दिया गया?
10:13
लीगल डिमांड उसकी करो। क्लियर डिमांड करो
10:16
एग्जैक्ट चेक अमाउंट की। 15 दिन का टाइम
10:19
है। ठीक है? मोड ऑफ सर्विस रजिस्टर्ड
10:22
पोस्ट यानी कि अपन उसको रजिस्टर्ड पोस्ट
10:25
आरपीएडी भी बोलते हैं कई लोग ठीक है स्पीड
10:28
पोस्ट करो कोरियर करो ईमेल करो सपोर्टिंग
10:31
प्रूफ के साथ आता है भाई ऐसा रैंडम नहीं
10:34
सिग्नेचर और डेट भाई पे या एडवोकेट का
10:36
सिग्नेचर लगता है एडवोकेट के थ्रू भेजा
10:38
गया नोटिस फुल्ली वैलिड होता है यह भी समझ
10:41
लो अब सबसे कॉमन मिस्टेक क्या होती है मैं
10:44
आप लोग को वो क्लियरली बताता हूं गलत
10:45
अमाउंट डिमांड करना है बहुत कॉमन एरर है
10:49
चेक अमाउंट के अलावा अलावा इंटरेस्ट
10:52
पेनल्टी या एक्स्ट्रा चार्ज ऐड कर देना।
10:56
ठीक है? लॉ कहता है डिमांड सिर्फ चेक
10:59
अमाउंट का होना चाहिए। ठीक है? डिमांड
11:01
सिर्फ चेक अमाउंट का होना चाहिए। इसमें
11:05
सुमन सेठी का केस था 2000 का। सुप्रीम
11:07
कोर्ट ने क्लेरिफाई किया था। अगर चेक
11:09
अमाउंट अलग क्लियरली मेंशंड हो। ठीक है?
11:13
और इंटरेस्ट सेपरेटली इंडिकेटेड हो तो
11:16
नोटिस इनवैलिड नहीं होता। ठीक है? अब
11:20
नोटिस का तो चलो सारा हो गया। अब नोटिस के
11:22
बाद क्या होना है? 15 दिन का पेमेंट विंडो
11:25
है। अगर ड्रर पेमेंट कर देता है केस में
11:28
ही खत्म। लॉ का पर्पस क्या है? रिकवरी।
11:31
पनिशमेंट नहीं है। रिकवरी है। कॉज ऑफ़
11:34
एक्शन कब बनता है? 15 दिन कंप्लीट होने के
11:37
बाद 16th डे से कॉज ऑफ एक्शन अराइज हो
11:40
जाएगा। पेई के पास एक मंथ होता है
11:42
कंप्लेंट फाइल करने का। उसके बाद में
11:44
जुरिसडिक्शन की अगर बात करें तो केस फाइल
11:46
कहां होगा? कहीं टट्ट होगा को नहीं मालूम
11:49
दशरथ रूप सिंह राठौड़ का केस उठा के पढ़ो।
11:53
2014 का केस था उठाकर पढ़ो। उसके बाद और
11:56
2015 अमेंडमेंट के बाद क्लियर है केस वहीं
12:00
फाइल होगा जहां पे का बैंक अकाउंट है। पेई
12:03
का बैंक अकाउंट है। पेयर का नहीं यहां या
12:06
जहां पे चेक प्रेजेंट हुआ। तो जहां पे का
12:09
बैंक अकाउंट है या जहां चेक प्रेजेंट हुआ।
12:12
अब अगर मैं इसके ट्रायल प्रोसीजर्स की बात
12:15
करूं। वाह फास्ट ट्रैक सिस्टम है। सेक्शन
12:17
143 जो है एनआई एक्ट का
12:21
चेक बाउंस केस समरी ट्रायल होते हैं। आई
12:25
रिपीट चेक बाउंस केसेस समरी ट्रायल होते
12:27
हैं। इंडियन बैंक एसोसिएशन के हिस्सा था
12:31
2014 में सुप्रीम कोर्ट ने गाइडलाइंस दी
12:34
थी कि भाई डे टू डे हियरिंग एफिडेविट
12:36
एविडेंस क्लियर और अर्ली सेटलमेंट एनकरेज
12:40
करना। यह क्लियरली बोला था। सेटलमेंट और
12:43
कंपाउंडिंग की अगर इसमें मैं बात करूं इसी
12:45
से कनेक्ट करते हुए तो सेक्शन 138 ऑफेंस
12:52
मीटर्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स वर्सेस आई थिंक
12:55
कंचन मेहता था 2018 में। सुप्रीम कोर्ट ने
12:57
तब बोला था लॉ का ऑब्जेक्टिव कंपनसेशन है।
13:02
सेटलमेंट किसी भी स्टेज पर हो सकता है।
13:05
अगर पेमेंट नहीं हुई तो सजा क्या मिलेगी
13:08
भाई? नहीं तो कन्विक्शन के बाद दो साल तक
13:10
की सजा है या चेक अमाउंट का डबल फाइन है
13:13
या दोनों भी हो सकता है। आपको जेल भी हो
13:15
सकती है। पेनल्टी भी इतनी भारी पड़ सकती
13:16
है। सिंपल एस दैट कोर्ट कंपनसेशन ऑर्डर भी
13:21
दे सकती है। ठीक है? सेक्शन
13:25
आई थिंक 395 इफ आई एम नॉट रोंग ऑफ नागरिक
13:29
सुरक्षा सही था अपना डीएनएसएस उस 2023 के
13:33
अंडर में ये हो सकता है। अब इसमें कुछ
13:34
एफएक्यूस हैं। भाई आप लोग ने कुछ सवाल
13:38
इसके रिगार्डिंग मुझे पूछे थे तो मैं आंसर
13:40
करता हूं तो कि 30 दिन के बाद नोटिस भेजा
13:42
तो मतलब जो 30 दिन का टाइम है तो भाई सीधी
13:44
बात है केस टाइम बाहर हो जाएगा। टाइम बाढ़
13:47
होता है ना लिमिटेशन होता है हर चीज का
13:48
लिमिटेशन पीरियड लगता है। लेकिन चेक वैलिड
13:51
है तो रिप्रेजेंट कर सकते हो। उसको
13:54
रिप्रेजेंट आप कर सकते हो। अच्छा एक और ये
13:57
पूछा था कि ईमेल या WhatsApp से नोटिस भेज
13:59
सकते हैं क्या? हां कोर्ट्स अलऊ करते हैं
14:01
भाई। लेकिन रजिस्टर्ड या स्पीड पोस्ट या
14:04
रजिस्टर्ड पोस्ट जो है वो सेफेस्ट है। ठीक
14:06
है? फिर एक सवाल और है कि ड्रर नोटिस
14:11
रिफ्यूजल इज इक्वल टू डीम्ड सर्विस। सिंपल
14:15
सी बात है। केस प्रोसीड करेगा। आपने नहीं
14:16
लिया कोई फर्क नहीं होता। केस तो प्रोसीड
14:18
करेगा। चेक बाउंस की पनिशमेंट क्या है? तो
14:21
2 साल की जेल है। डबल फाइन है या दोनों हो
14:23
सकता है। अच्छा कंप्लेंट फाइल करने का
14:25
टाइम तो भाई हमने अभी बताया था। 15 दिन के
14:27
बाद है एक महीने के अंदर। ठीक है? मतलब जब
14:30
वह टाइम निकल जाए 15 फिर एक महीने के अंदर
14:33
तो चेक बाउंड सिर्फ पैसों का इशू नहीं है
14:36
मेरे भाई यह ट्रस्ट क्रेडिबिलिटी और
14:38
फाइनेंसियल डिसिप्लिन का भी इशू है तो
14:39
सेक्शन 138 नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट
14:42
ऑनेस्ट पेई को प्रोटेक्ट करता है और
14:44
विलफुल डिफॉल्ट इसको पनिश करता है लेकिन
14:47
प्रॉपर नोटिस करेक्ट प्रोसीजर एक्यूरेट
14:50
ड्राफ्टिंग ये तीन चीजें केस जीतने का
14:53
फाउंडेशन होती है तो अगर आप बडिंग लॉयर हो
14:55
एडवोकेट हो या अगर आपके साथ यह हुआ है वो
14:59
प्लीज इन चीजों का बहुत-बहुत ध्यान रखना
15:02
और अगर आप चाहते हो कि ऐसे ही सब्जेक्ट्स
15:04
में आपकी एक्सपर्टीज बने तो जाके कमर्शियन
15:06
की वेबसाइट चेक करो। हमने इन्हीं
15:08
सब्जेक्ट्स को लेकर फॉर द फर्स्ट टाइम इन
15:11
इंडिया वन ऑफ़ अ काइंड कोर्सेस हमने डिज़
15:13
करे हैं आप ही लोगों के लिए। भाई उसमें
15:16
आपको अ मिनी कोर्सर्सेस भी मिलेंगे, फुल
15:19
कोर्सर्सेस भी मिलेंगे, डिप्लोमाज़ भी
15:20
मिलेंगे। ओके? ऑब्वियसली उसके पैसे हैं और
15:24
अगर तुमने हमें फी पे की चेक में और अगर
15:26
वह बाउंस हुआ तो तुम्हारा क्या होना है
15:28
तुम जानते हो। ठीक है? चलो भागो और यह
15:31
वीडियो के साथ शेयर करो जिसे जानने की
15:33
सख्त जरूरत है। टेक केयर। हैव अ गुड डे
15:35
एंड स्टे ट्यून विसलजिकल।