Thara sa gaya ha vakth lo-fi song
Jan 6, 2026
“ठहर सा गया है वक़्त”
अंतरा 1
सुबह की हल्की सी धूप में,
ख़ामोशी कुछ कह जाती है,
बंद आँखों में सपनों की
एक नदी सी बह जाती है।
सांसों की इस आवाज़ में,
दिल अपना घर ढूँढता है,
भीड़ के इस शोर में अक्सर
मन खुद से ही रूठता है।
मुखड़ा (कोरस)
ठहर सा गया है वक़्त यहाँ,
ना कोई दौड़, ना कोई राह,
बस पलकों पर ठहरी हुई
एक मीठी सी सुकून की चाह।
ठहर सा गया है वक़्त यहाँ,
दिल ने ली है गहरी सांस,
आज ना कल की कोई फिक्र,
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