World's Minor Religions - African Religions | Dr. Amjad Bhatti YT | World of Cultures
Nov 4, 2024
It is said that the first humans settled in Africa. But the whole continent has been unfortunate that it has not reached the heights of civilization that the Western world has reached. Yet we see that in the absence of any divine religion in Africa, high human values have flourished. African peoples have somehow been part of civilizations around the world. Islam and Christianity have sought to establish a foothold in the continent, but traditional African religions and customs have not allowed them to flourish in the same way that Christianity in Europe and Islam in the Middle East have conveyed their message. This v-log, based on an introduction to African religions, covers something like this.
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#African Religions
#Dr. Bhatti
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झाल
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हुआ है
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कि इस मिलाए रहमानिर रहीम डॉक्टर अमजद अली
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भट्टी एक नए मौजूद के साथ आधुनिक जनमत
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है जैसे हमने दुनिया के बड़े मुजाहिद की
0:22
एक सीरीज की है
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मैं इसी तरह हम चार हैं कि दुनिया के छोटे
0:27
मजा योग के हवाले से भी बात की जाए ताकि
0:31
हमें मालूम हो सके कि दुनिया में कितनी
0:35
रंग-नारंगी है और दुनिया कैसे ख़ालिक़े
0:39
कायनात ने इस दुनिया के मालिक ने कैसे
0:42
दुनिया को मतलब रखा है लेकिन एक गुलदस्ते
0:46
में बांध रखा हुआ है
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हैं तो आज हम बात करेंगे दुनिया के छोटे
0:51
मुजाहिद सीरीज की
0:54
की पहली किस्त के लिए उसको अफ्रीकी
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मुजाहिद के हवाले से
1:00
कि अफ्रीका में 3000 से यह आयल महोदय हम
1:04
पूरे कॉन्टिनेंट की बात कर रहे हैं
1:09
तो हर एक अपना मखसूस मजहब है
1:14
कि अब मजहब धर्म बुनियादी तौर पर तो यह
1:17
व्यू आफ लाइफ होता है जिंदगी गुजारने का
1:20
ज्ञान होता है लेकिन इसके पीछे फील टेस्टी
1:23
होती है मजहब होता है उसके पीछे एक फैला
1:27
छुट्टी होती है मिला शोभा कोई एक अफ्रीकी
1:32
मजहब वजूद नहीं रखता था
1:35
कि इन कि हमको पॉइंट नहीं कर सकते हैं यह
1:37
जो मजहब है ना यह अफ्रीका का मतलब है
1:41
अलबत्ता
1:43
[संगीत]
1:44
कि अफ्रीकी मसाले के बावजूद रखते हैं मसलक
1:48
है
1:49
कि अब मसलक और मजहब में रह रही यह हमारे
1:52
उल्माए दीन उन लोगों का काम है कि इसकी
1:55
बारीकियों में जाए हम तो बुनियादी तौर पर
1:58
एक मालूम थी प्रोग्राम करने का हमारा मकसद
2:01
यह था कि हम यह ना समझें कि दुनिया में
2:04
सिर्फ हम ही खूब बहुत खूब आंवला चीज है
2:06
दुनिया में बहुत शरीफ दूसरे लोग भी मौजूद
2:09
हैं जो आपके वजूद का इंकार करते हुए जिंदा
2:14
है तो इसलिए उनके वजूद का इंकार करते हुए
2:18
आपको भी ज़िंदा रहना है या कम उन्हें
2:21
बर्दाश्त करना है
2:23
है तो मसलक असल में मजहब के नीचे
2:28
मैं अपना एक तरीका काढा होता है उसी मजाक
2:32
उड़ाया जादू नहीं होते हैं उसमें से रहते
2:34
तो उसी अंब्रेला के नीचे हैं लेकिन अपना
2:37
एक्स-रे का कार को ढूंढ लेते हैं कि नहीं
2:38
यार यह वाली लोग जो है ना यह मशहूर कि
2:42
पंजाब वाले इंसान कोई और तरीका कारण यह
2:44
मगर भी पंजाब वालों का और फिर एकाधिकार है
2:47
तो वह एक अपना रास्ता निकाल लेते हैं अलग
2:51
रहने का अलग जिंदगी गुजारने का तो इसलिए
2:55
उस पर मसाले एक बन जाते हैं फिर के बन
2:57
जाते हैं सेक्स बन जाते हैं तो इस वाले से
3:01
अफ्रीका में मजहब को बाकायदा दूसरा मौजूद
3:05
नहीं के को इल्हामी युद्ध हंसती आई हो को
3:09
पाक बुजुर्ग आया हो तो यह आसमानों से उतरा
3:12
और उन्होंने खुद ही अपने तो जब बाप से
3:16
मैं अपना एक मजहब जो तकलीफ किया उसके नीचे
3:20
फिर बाहर आकर में मुक्त लाइफ इस उसके
3:24
सेक्स बन गए हैं
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अब इन मसालों में से कई एक जैसे हैं इनके
3:31
बहुत थोड़ा फर्क है उनमें और एक दूसरे में
3:33
कट है और मुमताज़ क्लब भी रखते हैं लेकिन
3:36
फर्क बीच यौन में है तो इसलिए लेदर से
3:39
मसलक है वह अ
3:41
कि बुनियादी तौर पर हमारा मौजूद रहे बहस
3:44
मुख्य मुख्य अतिथि गृहों और उनके
3:46
इंफ्रारेड दिवाकांत केंद्र में अंतिम
3:49
त्यास करने का मुश्किल और नहाए मेहनत चल
3:53
अब काम नहीं आ
3:55
है यह हम उलेमा पर छोड़ते हैं बल्कि उनकी
3:58
मुश्किलें तो पर होगा यानी वह जो सब में
4:02
मुस्तक है सब में एक कॉमन है हम उनकी बात
4:05
करें तो
4:08
कि अफ्रीकी रवायती मुजाहिद साथी की बजाय
4:12
फिरका वाराना होते हैं
4:15
कि किसी शख्स का वजूद ग्रुप के मेंबर के
4:18
तौर पर होता है और इस गिरोह का महक जिंदगी
4:21
के तमाम पहलुओं में सफेद कार जाता है
4:26
कि एक हफ्ते एक जान एस मैं बीती ने लिखा
4:30
है
4:32
कि अफ्रीकी जहां भी जाता है अपने मजहब को
4:35
साथ ले जाता है वह सिगरेट तो में साथ ले
4:38
जाता है जहां वह बीच होता और फसल काटता है
4:42
शादी का इस्तेमा हो या किसी को दफनाना हो
4:45
इसका मजहब उसके साथ होता है अगर वह तालीम
4:49
याफ्ता है तो वह स्कूल या यूं बस्ती के
4:52
इम्तिहान के कमरे में अपने मजहब को साथ
4:55
रखता है अगर वह सियासतदान है तो
4:58
पार्लिमेंट हाउस में भी उसका मत हम उसके
5:00
हमरा होता है पदार्थ से पहले से लेकर आ
5:06
को मौज के बहुत बाद कि उसका मजहब उसके साथ
5:10
रहता है
5:13
कि ऐसा कोई तरीका नहीं है कि कोई शख्स
5:16
अपने गुरु ही मजहब से अलग हो जाएंगे
5:19
है और फिर भी उस गुरु का ढक्कन को इसके
5:22
मैंने यह है कि यह तरह से अफ्रीकी मजहब
5:25
हमारी तरफ से जिंदगी से मुक्त लव तरीकों
5:28
से वजूद रखता है मजहब का तिलक किसी इमारत
5:32
जमा खन्ना चर्च या मस्जिद से या फिर हफ्ते
5:37
में एक बार किसी मीटिंग में हाजरी लगवाने
5:40
से नहीं होता आ
5:42
कि अफ्रीकियों की मुकम्मल जिंदगी में मजहब
5:45
का अमल दखल जरूरी होता है कोई मुसलमान अ
5:51
कैद या पा कायदा मसाले पीछे मौजूद नहीं
5:54
रखते मजहब के बानियों या ऐसे मोबाइल रेंज
5:58
का भी कोई वजूद नहीं मिलता जो दूसरों को
6:01
किसी मजहब को कबूल करवाने का काम करते हो
6:07
कि ऐसे कोई इस्लाम करने वाले अपराध भी
6:10
नहीं होते जो तब व्हीलर से से मुसलमान
6:13
अक़ाइद यह सोमवार को चैलेंज करने या
6:16
उन्हें मुदाख़िलत करने का काम करते हो
6:19
है ऐसे हीरो या लीडरों की मोहतरम यादें
6:24
जुरूर मौजूद हैं जिन्हें रोल मॉडल के तौर
6:27
पर देखा जाता है या फिर नींद देवताओं जैसा
6:30
दर्जा दिया जाता है लेकिन कोई एक मसीहा या
6:34
निजात जिंदा नहीं है
6:38
कि 1962 में प्लान तैयार में मुक्त होने
6:42
वाले एकनामिक सिंपोजियम में मलावे के सांप
6:46
का बजे खजाना के पारलीमानी फैक्ट्री में
6:51
कि डॉव जोंस पेशवा ने कहा था
6:56
की मशहूर हस्तियों जो के मुरख पर या मगर
6:59
भाइयों जो कि तहरीक पसंद जैन रखते हैं कि
7:03
बराक हम फिर की मशहूर की या मगर भी किसी
7:07
से ताल्लुक नहीं रखते बल के हम बुनियादी
7:11
तौर पर दलील की बजाय वरदान इलहाम पर भरोसा
7:15
करते हैं हमारा शोभा रूहानियत का नहीं है
7:19
जो मशरक से ताल्लुक रखता है और ना ही हम
7:22
साइंस और टेक्नॉलजी से ताल्लुक रखते हैं
7:24
जो कि समग्र का पसंद शुक्र है हम इंसान
7:29
इतना लगाव पर यकीन रखते हैं हमारे लिए
7:31
जिंदगी है मैं नहीं खूबसूरती या सच्चाई की
7:35
बजाय हमेशा से खुशी की तलाश में रहा है हम
7:38
एक जानत तन्हाई इन प्रतिशत मन की जज्बात
7:42
और परेशानी को दबाकर और दूसरी जानत फिरका
7:46
वाराना कर जिंदगी भर जोर देकर मुक्तिपथ
7:50
जज्बात और स्पून को अपनी आदत बनाने की
7:53
हौसलाअफजाई करके और अपनी खाए शार्क
7:56
कि महबूब रखकर खुशी की तलाश करते हैं
8:00
कि मजहब के लिए हमारा रवैया अक्सर हमारी
8:03
तब्दीली की ख्वाहिश के मातहत होता है हम
8:07
अब से इतने अरसे से इस कदर जुड़े रहते हैं
8:10
कि यही वह वाहिद अकीदा है जिसे हम हमेशा
8:15
से जानते हैं अगर कोई दूसरा मजहब हमारे
8:18
रास्ते में आता है तो हम अपने आपको इसकी
8:22
शराब से दूर नहीं कर लेते हमारे इस तरह के
8:26
रवैए से यह नहीं समझा जाना चाहिए कि हम
8:30
फ्री हैं
8:31
कि अति विशिष्ट बल्कि इस बात की अलामत है
8:35
कि हमारे सामने जो भी मजबूरियां खाए जाते
8:38
हैं उनमें खुदा की हकीकत सच्चाई का ऐसा उन
8:42
असर होता है जिसके खिलाफ मजाक मत में हम
8:46
नाकाम हो जाते हैं और होना भी ऐसा ही
8:49
चाहिए क्योंकि मजहब असल में एक ही है
8:55
कि अफ्रीकी मजाहिर कि इंसान दोस्ती में
8:57
खानदानी ताल्लुकात फिरका वाराना ताल्लुकात
9:00
एक दूसरे का ख्याल रखने मजा बर्दाश्त
9:04
तांबूल फ़ैज़ी हु दरगुजर रहमदिली मौसी की
9:09
रिदम और रक्त से मोहब्बत पर जोर दिया जाता
9:13
है और अपने आकाश को दूसरों पर थोपने को
9:17
शक्ति से ना पसंद किया जाता है
9:22
कि बच्चा पैदा होता है और जल्द ही फिरका
9:24
वाराना मजहब या कायदा और रसूमात को जज कर
9:28
लेता है
9:29
कि अगर जिंदगी के हालात तब्दील हो जाए तो
9:32
अपनी तरफ से जिंदगी या मजहब को उन
9:35
तब्दीलियों से हम पहन कर लेता है अफ्रीकी
9:38
कबायली मजहब गहरी नहीं बल्कि जुबानी वजूद
9:42
रखता है और उसका तक दिया नहीं किया जाता
9:45
बल्कि उस पर अमल किया जाता है यह जिस्मानी
9:48
अतिरिक्त को रोहानी अतिरिक्त से जुदा नहीं
9:51
करता है इसी वजह से मौत के बाद की जिंदगी
9:54
के तसव्वर में जलसमाधि तब ही तसव्वुरात
9:58
शामिल होते हैं जन्नत या जहन्नम या खुद
10:02
आखिरी होने के तसव्वुरात और मशीनी हारना
10:05
या इलहामी ख्वाबों का कोई वजूद नहीं है
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मजहब हम ली अफ़ादीयत पसंद और इंसान को मृत
10:13
दी नसीहत देने वाला है
10:16
कि बच्चों के अफ्रीकी मजहब का मरकज इंसान
10:19
है इस वजह से मजहब के तमाम पहलुओं को उनके
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इंसानी कम्यूनिटी श्वेता हालत के बस मंदिर
10:27
में देखा जाता है
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ये कायनात और उसका इंसान से तिलक हर एक है
10:33
मजहब कबायली या औषधि ग्रो और फर्क की तमाम
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दुनिया वालों को अपने हिसाब में लेता है
10:40
हर चीज आप उसमें ताल्लुक रखती है और हर
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चीज को इंसान के नुक्ता ई नजर से देखा
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जाता है बुनियादी तौर पर हर रोज रखने वाली
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शहर में शरारत करने वाली एक आसान सी
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तवानाई के बारे में आगे ही मौजूद है इस
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ताकत का लंबा और कंट्रोलर खुदा है लेकिन
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खुदा वह तत्व नहीं या ताकत नहीं है
11:06
कि इंसान को मरकरी नसीहत देने वाले मजहब
11:09
में खुदा का हम करता है क्योंकि खुदा
11:12
इंसानों सुमित हर शहर को पैदा करता और
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जिंदा रखता है सुविधा हर जगह मौजूद भी है
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और हर शहर पर अकादमी हवा और बारिश जैसी
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क्षेत्रीय ताकतें उसके कंट्रोल में है
11:24
सुलझा लिया वाकया हुआ है हर उस 6 से जो
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वजूद रखती है और आसमान पर रहता है इन खुदा
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उस आसमान पर रहता है लेकिन वह नजदीक दी है
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और अग्रानुक्रम मंत्रों और दुआओं के रश्मि
11:40
हमलों के जरिए उस तक पहुंचा जा सकता है यह
11:44
बात वजूद का सफर नहीं है क्योंकि खुद अपना
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फर्क कायम रखता है और तुम आम दुनिया वालों
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की चीजों में मौजूद नहीं है उसे रुके शक्ल
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में तसव्वर किया जाता है इसके साथ दूसरे
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देवता या रूहें भी होती हैं
12:01
और अच्छी किस्मत जानवरों की सेहत और फसलों
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की तरफ जी को उससे महसूस किया जाता है
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लेकिन बदकिस्मती को भी खुदा से मंजूर किया
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जाता है जो सरदार या खुदा के गुस्से का
12:14
इजहार समझी जाती है
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कि दूसरे लिबास में अफ्रीकी खुदा की
12:20
शख्सीयत और 1 लाख वार को अपने आप को मध्य
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नजर रखते हुए देखते हैं
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कि अफ्रीकी मजहब का यही पहले होता इसका
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सामना पोप जान पाल दोनों को उस वक्त हुआ
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जब उन्होंने फरवरी 1994 में कांड दोनों
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बहनों का दौरा किया बैंगन मूर्ख एसोसिएटेड
12:44
प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व वह
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ज्ञान पाल ने वीर डॉन जैसा के फूल जुबान
12:52
प्वाइंट्स 141 में अब वही दाल के देवताओं
12:56
को कहा जाता है कि डोंट ऊ
13:00
कि के पुजारियों और पुरोहितों से मुलाकात
13:03
की
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ए would-be पर यकीन रखने वाले एक उदार के
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तसव्वर को कबूल करते हैं लेकिन वह इसके
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अलावा छोटी देवताओं और ऐसी रसूमात को भी
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मानते हैं यह में सांपो और इसरार को बूथों
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का इस्तेमाल होता है वह अपने इन लोगों को
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इस आयत की जानक राघव करने की कोशिश की और
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कहा कि जैसे वह लोग अपने मस्तियां कैद के
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लिए अपने अरे बावजूद और को देखते थे इसी
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तरह इस आई पिल नंबरों से लेकर मिशनरियों
13:34
तक मजहब में अपने अब बावजूद को मोहतरम
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समझते हैं क्योंकि मिशनरियों के गद्दार के
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ईसाई बनने से कंबल अपने अकाउंट थे और
13:44
उन्होंने इस आयत कबूल करके कुछ खोया ना
13:48
इसलिए को के बगल वार्डो के मानने वाले भी
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इस आयत कबूल करके अपने रवायती मजहब से
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रंगदारी के पुस्तकें ना होंगे
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कि अगर मजहब की ऐसी तब्दीलियां रूनुमा हुई
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तो हम अंदाजा कर सकते हैं फिर वही होगा जो
14:04
उधर दूसरी तहसीलों में हुआ था यानी के
14:07
पुराना मजहब इस आयत के साए में जारी रहेगा
14:11
और ऊपर सिर्फ एक खोखला साथ इस आयत का लेवल
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रह जाएगा और
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कि अफ्रीकी मतलब कि इंसान दोस्तों तत्पर
14:21
चैंपियन के सर्जक होंडा ने युक्त अप्सरा
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किया था
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कि यह उसी बस मंदिर में है वह के प्रबंध
14:30
कि अमेरिका में रहने वालों को किसी हद तक
14:33
हमेशा इंसान से उत्पन्न दोष होने का तोहफा
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हासिल रहा है यह हमारी दवाई की तहजीब
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कमरकस है लेकिन अब हमें पूरी दुनिया के
14:43
सामने मिसाल बनकर अपनी इस तरह आपको बड़े
14:46
पैमाने पर गुस्सा देने का इमकान नजर आता
14:49
है मगर अब को अपनी टेक्नोलॉजी और मशरक को
14:53
अपना तसव्वुफ मुबारक हो अफ्रीका का आर्मी
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तहसील के लिए तोहफे इंसानी रिश्तो के तनाव
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जब में होगा
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का नौवां शिकार इनके सारी से उन चीजों के
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बारे में बात कर सकते हैं जो उन्होंने
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हमें सिखाई थी लेकिन मैं दयानतदारी से इस
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बात पर यकीन रखता हूं कि हम हमेशा से अपने
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मगर भी सिखाने वालों से ज्यादा असल मामला
15:21
के करीब रहे हैं
15:23
कि क्या संस्थान हमें यह नहीं बताते रहे
15:26
कि अफ़्रीका इंसान की तरह ही जिंदगी का
15:30
मक्खन रहा है जिस तरह दुनियां तरक्की कर
15:33
रही है उनसे यही मालूम होता है कि अफ्रीका
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ही वह आखिरी जगह होगी जहां इंसान इंसान ही
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रहेगा मेरा मानना है कि दुनिया बुनियादी
15:44
तौर पर अच्छी है और इसके अंदर अच्छी
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ताकतें तमाम जिंदा चीजों के दरमियान बेहतर
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यह पैदा करने के लिए कार परमार है इन
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ताकतों के साथ सेवन करने से ही इंसान उसे
15:58
भाषण कर सकता है जिसकी वह इस प्रकार रखता
16:02
है बाय फादर दीगर गोंडा वह की दावत को
16:05
उल्टा करके यह तस्वीर देता है कि इस आई
16:09
अगर अफ्रीकी मजहब के इंसान दोस्त पहलों को
16:12
कबूल कर लें तो वह कुछ ना खोलेंगे
16:17
कि अफ्रीकी मतलब में बेशुमार रूटों पर
16:19
यकीन रखा जाता है
16:22
यो यो और बॉस 17000 रूटों पर यकीन रखते
16:26
हैं दूसरे ग्रुप कमरों को मानते हैं यह
16:29
रूहें मौत बीमारी जंग सेहत मौसम वगैरह की
16:33
जिम्मेदार होती हैं जिलों और पहाड़ों पर
16:37
ग्रहों जैसी क्षेत्रीय ताकतों को गुरुओं
16:39
से मनसुख किया जाता है इसके नतीजे में इन
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ताकतों में से चंद के मानने वालों के
16:46
मसाले एक बन गए हैं जिन लोगों के बारे में
16:49
यह यकीन रखा जाता है कि वह मासूक अली
16:53
पुत्र पैदा की गई थी दूसरी हुए उन लोगों
16:57
की होती हैं जो एक अरसा कबल मर चुके हैं
17:00
या फिर गाल बंधु इंसानों के ऐसे हीरो है
17:03
जिनका रुतबा दूसरों से बुलंद माना जाता था
17:07
यह जो है हम है क्योंकि उनकी पहुंच दूसरी
17:11
दुनिया वालों की मर्जी ताकतों तक होती है
17:16
कि वह इंसान किस्मत की भी तो जीपीएस करते
17:18
हैं क्योंकि जैसा कि हम आगे देखते हैं
17:22
आखिर कि हर इंसान मौत के वक्त रूप बन जाता
17:25
है और वह अपनी सलाह पर शक्शियत कायम रखता
17:29
है यह रूहें खुद को ख्वाबों और गहनों के
17:32
सामने जाहिर कर सकती हैं और उनका इस तरह
17:37
जाहिर होना इंसान हैवान या ना बता दूं
17:40
किसी भी शक्ल में हो सकता है वह तैयार
17:44
होते हैं और वह बांधना अंदाज में अमल कर
17:48
सकते हैं इंसान हम होते हैं क्योंकि वह
17:52
मजबूत कमर कर लेते हैं चांद इंसानों को यह
17:55
तो वहां फल होता है कि वह मर्कज़ी हुकूमत
17:58
में कुछ कर सकने की सलाहियत रखते हैं यह
18:01
दुश्मन भारत लाने वाले और वह इंसान होते
18:05
हैं जो ताकत को अच्छे और बुरे मकसद के लिए
18:08
इस्तेमाल कर सकते हैं ऐसे अपराध कम्यूनिटी
18:11
में बेपनाह ताकत के हम लेते हैं उनसे
18:14
मशविरा करने खबरों की कर
18:16
यह बताने सफल करने और बदरु होंगे उस रात
18:20
दूर करने के लिए मदद दी जाती है इनमें से
18:23
चंद ऐसी जड़ी बूटियों और पौधों के
18:25
इस्तेमाल से मुक्त ल बीमारियों का इलाज
18:28
करते हैं जो सदियों इलाज करने के खुशियां
18:32
तरीकों का हिस्सा रही हैं आज जयदीप ज़राए
18:36
इबलाग़ ने इन तस्बीर जादूगरों की हैसियत
18:39
और दौलत में बेहद रेफर कर दिया है यह
18:43
टेलीफोन को उसी तरह इस्तेमाल करते हैं जिस
18:45
तरह अमेरिका ने मारी ने न सुहात और नजूमी
18:49
अग्रावत 90 मिनटों के हिसाब से कीमत अदा
18:54
करें को इस्तेमाल करते हैं
18:58
है लेकिन अफ्रीकी मतलब में मौजूद आती
19:01
तकनीक का असर तो जीत एहसास पाया जाता है
19:04
ना बहुत हैवानात बल्कि हकीकत में जिंदगी
19:08
की हर शक्ल अहम है क्योंकि वह जिंदा रहने
19:11
की दुनिया भी जरूरी बात पूरी करते हैं और
19:14
बेजान श्याम और मजहर के साथ मिलकर इंसानों
19:18
के लिए दूसरी दुनिया वालों की तस्वीर करते
19:21
हैं पितृ दुनिया के साथ खुफिया रोहानी ताल
19:25
रख कायम करना मुमकिन है दूसरी की बजाय के
19:29
कई पहलू हैं और इन तमाम को कबूल करना हम्म
19:33
हम्म करना और मितवा ध्यान रखना इसकी शरारत
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में से है इंसान को मरकजी सीरत देने वाला
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यह मजा है वितरक में एक ऐसा अब दी तथा धन
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तलाश करते हैं जिसका पर यह रास्ता अलग पर
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से होता है
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मैं इसमें बाद अंतरिक्ष में पैदाइश बलूगत
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आकाश शेती बच्चे पैदा करना पूरा होना और
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बुढ़ापा मौत मरे हुए लोगों की कमेटी में
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शामिल होना और फिर पिलाकर रूहों के साथ
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शामिल होना शामिल है इस बार दिन के अंदर
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किसी पद की जिंदगी में आम तब्दीलियों को
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रसूमात के जरिए जाहिर किया जाता है मिसाल
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के तौर पर एक मुकम्मल इंसान बनने के लिए
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नाम रखे जाने बलूगत और दाखिले की रसूमात
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से उतरना छाती और कभी-कभार वाले दिन बनना
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जरूरी होता है शादी और खानदान मरे हुए
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लोगों के लिए अहम हैसियत रखते हैं जख्म
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शुभ मर जाता है तो वह मरे हुए लोगों की
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कमेटी में एक अलग वजूद का तालमेल हो जाता
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है यानी दूसरे हॉफ में वह फर्द अपने
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इंसानी खानदान में मरने के बाद भी मजबूत
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रखता है
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कि उसका इस तरह जिंदा होना और मौजूद रखना
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उन लोगों की यादों और रस्मों से जाहिर
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होता है जो मरे हुए शख्स के लिए शराब या
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दूध डालकर या फिर उसके लिए खाना रखकर इसका
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इजहार करते हैं खानदानी दुश्मनी किसी शख्स
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की by के लिए इस तरह ग्रंटी फिर हम करती
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है कि मरे हुए शख्स को चार या पांच नस्लों
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का की याद रखा जाए गिला शिकवा बड़े शानदार
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कि यह नियत होती है क्योंकि मरा हुआ शख्स
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अपने पीछे जितने रिश्तेदार छोड़ता है तो
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इस बात का इमकान उतना ही बढ़ जाता है
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क्यों सिर्फ बस श्वेता की याद रखा जाएगा
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मरने के बाद बुला दिया जाना ऐसे ही है
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जैसे कभी उच्च का वजूद ही ना था यह बात
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जरूरी है कि अमरेश कुमार में अपने अवॉइड
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बात की प्रस्तुत नहीं की जाती बल्कि यह
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खानदानी कम्युनिटी का इजहार हैं जब ऐसा
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वक्त आ जाएगी किसी शख्स को मस्जिद याद ना
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किया जाए तो वह
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गुरुओं की कमिटी में दाखिल हो जाता है
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जहां रूप को एक तरह की इज्जत माई अवधि था
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सफल हो जाती है
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कि भाषाओं का खानदान की तमाम रूप में
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जिंदा रहने वालों के साथ तरह हम दिलाना
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सलूक नहीं करती और ना ही जिंदा रहने वाले
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हमेशा मरे हुए को अच्छी तरह याद रखते हैं
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जैसा के गाना कि एक नौजवान ने
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में एक जगह लिखा है
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कि हम अपने गांव में मरने वालों को दफनाते
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वक्त उनके पैर गांव की मुख़ालिफ़त सीमित
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रखते हैं ताकि जब उसकी रूह निकले तो वह
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हमसे दूर हो जाए
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ए कम्युनिटी के दर्जे पर पितृ तथा वजन
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मौसमी चक्रों और शिकार या बीच बूंदें और
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फसल काटने की सरगर्मियों से जुड़ा होता है
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कि व्रत खुद ग्रहणों
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एक कहावत अक्षर आदर्श के हम लोग वगैरह के
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जरिए इस तवा जन को खराब कर सकती है वह
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दाखिल करने वाले इन वह याद का कमिटी की
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सतह पर मजबूत शक्ति में जो आप दिया जाता
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है यह बात याद रखना अहम है कि रवायती
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कबायली या मोहलत दी मुलायम को मशहूर के
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गुप्ता और मगरिब की मजबूरी सोच अवश्य मूल
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इस्लाम और ईसाइयत में मुदस्सर किया है
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हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के
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मजहब पर जो पहला फ्री कि यह मामला आया वह
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मिला ले हम शुभ थे जो पैगंबर के मौजन पड़े
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जब स्माइली अफ़्रीका में इस्लाम फैला तो
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हम खुशियों ने इस्लाम कबूल किया और वह
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गुलाबी बनाए कि हिमालय अफ़्रीका के मोरों
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ने स्पेन पर हमले और पता में शमूलियत की
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थी उसके बाद से इस्लाम अफ्रीका में फैलता
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चला गया था
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है और एक मुश्तरका जुबान और फीडबैक के
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जरिए एक तरह की कमी यह जाती पिलाता किया
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लेकिन जहां ईसाईयत और इस्लाम जैसे बेरूनी
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मजा है बेल्ट तैयार किए गए हैं वहां भी एक
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दिन मकसद का अहम हिस्सा करें और मौसम है
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कैद के नतीजे में होने वाली नकल मकान जैसी
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तबीजी अल्लाह तो रियासत के इंजमाम का सबब
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बने हैं लेकिन इसके बावजूद कब आएगी
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मुजाहिद का अहम हिस्सा कायम है
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तो यह थे कुछ सवाल और कुछ चीजों का जो
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नुक्ते या सेलियंट फीचर्स आफ थे एप फ्री
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की बजाय के उनका में जिक्र किया है
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में आकर में हम एक ही गुजारिश करते हैं कि
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सामने की करें और दूसरों को थामने की करने
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की तलकीन कर आ चुकी है
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अजय को
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को टर्न
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कि बच्चों को
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