Ustad Daman's Romantic Poetry | Dr. Amjad Bhatti YT | Punjab, Punjabi & Punjabiat
Nov 4, 2024
Ustad Daman was primarily a poet of political movements. Despite this, he also wrote romantic and mystical poetry. In romantic poetry, he has emphasized only alcohol instead of alcohol and youth. In it he addresses the Maulvi directly.
#Dr. Amjad Bhatti YT
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झाल
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अजय को
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कि डॉक्टर अमजद अली फटी एक नया मौजूद के
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साथ आखिर में हमारा आज का मौजूद दामन की
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रोमान वीएस है है
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हैं तो आईए अब ने मौजूदा आवाज करते हैं
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कि उक्त दामन इश्क के इजहार में बड़े देश
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भक्त थे और हनुमान उनकी शायरी में महबूबा
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से ज्यादा मोहब्बत का इजहार अहमद तैयार कर
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लेता है उनके यहां राजस्व आय मोहब्बत के
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इजहार में एक ऐसी व्यक्ति की बुद्धि और एक
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जज्बा हे बेच तैयार शौक है
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हुआ है
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हुआ है कि पढ़ने वालों का दिल आज खुद
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खींचता ही चला जाता है उसका दामन की
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रूमानी शायरी में एक शायराना रोशन है और
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यह शायराना कैफियत शायद इसी जज्बे
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बेरोजगार शौक की वजह से है जिसका इजहार को
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शहर को भी मतवाला बना देता है और उसके
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कार्य को भी प्रिवेंट जिगर का खून स्वराज
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मंगे मुंह बेबी गर्ल नहीं कह देना दूर रखो
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लोग डरना है क्षेत्र व छोड़ा से के लिए कि
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मैं दुखियां दुख बुलावे दारू का ख्याल विच
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मशीन तैयार और आप आया अनिल हफ्ते के बेर
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चल्या एंजिल धीरे नाल इश्क देख्या उस्ताद
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अहमद की शायरी की मजबूती पर एक थका देने
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वाली वेबसाइट छाए रहने के बावजूद उनकी
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रूमानियत की मुख्तलिफ और त्यौहार
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झाला तकरीबन तमाम रुमानी फनकारों की
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खूबसूरत है रुकनुद्दीन क्योंकि ज्यादातर
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बाबू खेल का अमीन होता है इसलिए अपने
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ख्वाबों की दुनिया की सैर को इस अंदाज में
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करता है जैसे यही उसकी ह की की दुनियां है
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लेकिन कोई शख्स हर वक्त खराब हो ख्याल की
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हसीन दुनिया में मस्त नहीं रह सकता जिंदगी
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कटती सुनाते उसके बनाए हुए शीशपाल को एक
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ही झटके में तस्बीर कर देती है और इस वक्त
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वह बीच आम इंसानों की तरह ज़मीन पर पहुंच
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जाता है ला पाठ ऐसा शुरू करें जख्मी दुख
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कल लाना बंदे नूरैन ज्यादा आ
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कि अवैध दुआ मांगे अरे यह दिलों बजा दो
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ए लिंक
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है एमएलए विनोद दुआ मांगे अरे यह दिलों
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भजनो आसमान ना तो कहीं बढ़कर एक देर
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किरदारों उस्ताद रावण की शायरी में समाज
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की बात पाबंदियों और रवायतों से खुलम खुला
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बगावत पाई जाती है उनकी दुनिया में समाधि
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फिर नहीं वह सामाजिक उज्जैन से मोहब्बत की
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रूठती मालूम ऑफिस है उनके गुस्से का
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निशाना बनते हैं उनकी गायन तेरे इश्क में
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तब के हैं ज़ोरदार पर जबरदस्त के मजाल में
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एक प्रसाद शर्मा आशीष जड़े हैं समाजी
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नाइंसाफियां हैं दुनिया गंदगियों
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बेईमानियों व्यापारियों से भरी मालूम होती
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है लेकिन यह किस किस्म की नाइंसाफियां और
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उगला सकते हैं क्या इनका कारण कोई सियासी
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नेता होता है क्या यह सब महसूस यूं ही
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बखूबी हो जाता है या इसके पीछे कोई क्लास
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भी काम करती है इसका उद्देश्य उस्ताद अहमद
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के यहां मौजूद है
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कौन समझ समझ गए हो रहा था कि मैं लेना है
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कि अपना आप बुझारत बढ़िया लुक बैंगल है जी
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हां निगल सुना देश भावना कुंअर
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हां हां कर दी गल सुन आदेश भावना बुलाना
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उसी सोच समझ दी ऐसी तैसी कूटकर के पी
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मैं मर जावा तेरे मयखाने झीनी हां
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देवेंद्र अपना जेकर करें गवाचा सज्जनों
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मैं खाने में चला रहा हूं मैं
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और उस्ताद अहमद दरअसल इंतहा पसंद है और यह
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तरफ सधी तमाम मामला दें ऊपर का लग रहती है
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साबिर हुसैन प्राप्ति का जज्बा हो तो यह
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लूजर कहीं का फरार का जज्बा हो या
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गुमशुदगी का हर जगह उनकी इन तरफ संदिग्ध
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आलम नजर आती है
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कि मैं खाने में अब याद रखना कारण बारदा
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हो गई नीलामी से यही वजह है कि कहीं उनकी
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शायरी में रवानी र वर्ष और मस्ती अधिकार
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का पोर्शन पैदा हो गया है तो कहीं-कहीं
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लज्जत किसी आ गई फैसले ते दारू ही काम वे
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जुड़ा उधम मेरे नए ट्रेंड देता है
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कि उनकी शायरी का रिश्ता ही अंदाज में नजर
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उनकी रवानगी शायरी को बेमिसाल नगमा बना
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देता है कुछ करने और कुछ कर गुजरने का
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हौसला जिंदगी और जिंदा भी कपडा हम दामन की
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जो मानवीय शायरी के अहम पहलू है जो किसी
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भी तरह नजरअंदाज नहीं किए जा सकते उठता
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दामन की शायरी इस मामले में अपनाया उस
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अपराधी रंग रखती है शाम हुई हॉट परिजन लगे
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चार जो हेयर उदासी दारू अधीन चल बे पर
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उतरते मेरी जिंद 82 कछुए बालों का झड़ना
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उठा लगे वर्गी मसीह माउद प्यार भी मस्ती
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देवे को वे कि मैं खुलासे अपने स्वाद के
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अनुसार के लिए उस्ताद दामन को मौजूद फाल्स
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और मौसर अंदाज-ए-बयां बादशाह नहीं मिल
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जाता है यह उसकी जुबानों बयान पर कुदरत की
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दलील है जो कार्यक्रम व केजरीवाल की
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तस्वीर का पास पड़ती है और खुद प्रकार की
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तरह
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अपने ताजगी शुरुआत हुई राजनयिकों दिलकशी
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और मृत पैदा करती दामन का सुविधा है उसकी
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तबीयत तो इस तरह रात उसके सारे और बनाए
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खूबसूरत उपवास का इस्तेमाल माहौल और
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मौजूदगी मुनासिबत के साथ जिला रोजगार और
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सुख रवि उसकी शायरी के असर को बढ़ावा देते
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हैं बाल पुणे तो मैं वापिंडा प्योर मेरा
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शेषा की उपयुक्त स्टे बैक पीने कर देना
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हुई नजर कि एक जैसी सोच साडी मस्त लग
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सिरोंज ए पी के चार दौड़े जीना कुछ नहीं
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रहना बहुत ही उस्ताद अहमद की शायरी में
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इंतजार की शिद्दत अपने कई रंगों और कैफीन
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हितों के साथ जलवागर है जिसके बाद इस उसकी
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शायरी में मोहब्बत की एक ऐसी सजा तस्वीर
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पाती है जिसमें खूबसूरत की का आलम आया था
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उस पर नजर आता है यह कैसा इंतजार जो पलकों
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पर स्तर
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क्वेश्चन का हृदय घर का यह आलम के
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दरोदीवार से भी महबूब के दीदार की हसरत
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टपक रही है धुंध व और दर खुले हुए हैं
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लेकिन जिसका इंतजार है वह अपने वादे के
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मुताबिक नहीं पहुंच पाता चाय ही कभी ऐसा
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मौका आता हूं जब दरवाजा खोलने पर अचानक
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महबूब सामने खड़ा हो हुआ नजर आ
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कि जो शख्स दिन भर किसी का रास्ता देखे
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यहां तक कि शाम हो जाए आंखें धो लिया जाए
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आंखें धुंधला जाएं और सुबह का भूला शाम को
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बिना लौटे तो जाहिर है इस कर दें मल यकीन
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है रोज तेरे दार आता के ढूंढ नामक व्यक्ति
7:31
साइकिल चलाकर दुनिया चार या ना कर तू भी
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धोखे अ जुबान पर उठा थोड़ी धुंधली िक कोई
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सारी पीनी मठ और तो सर्कल
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कि उसका दामन की शैली में जमा लिया का
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अवसर भी बदल जाए उच्चतम पाया जाता है यहां
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यह बात भी पेशे नजर रखना जरूरी है कि एक
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शायर जो समाज और समाजी मसायल को अपनी
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तकलीफ में जगह देता है वह जाती वारदात यह
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बात नहीं के छात्र कोश्यारी की मिराज करार
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नहीं देता है ऐसे शहर की जिम्मा लिया कि
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जो सदा मौजूद होगी वह उसके हवाले वतन
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साथियों और निजी तो जब बात और मुर्शिदाबाद
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की आईनादार नहीं होगी बिजली बिल स्कर्ट
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पहन दे चूम - आया कुत्तों ऐड समय वे सजना
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अ खान ने बताया जिंदगी दे रस्ते भिक्षा की
8:26
टो टेक खामियां एस वेल एस तू मैं खाने हूं
8:29
क्यों नहीं कुंडियां इंसान हक की जिस्म
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आधी दुनिया में जिंदा रहता है शायद इस
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दुनिया को मैं वैसा नहीं देखता जैसी के व
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होती है बल्कि वहां से कुछ इस अंदाज से
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देखता है तय
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कि वह कुछ ऐसी हो जाती है कि जिसकी तस्वीर
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शहर के दिन में बनती है इसके लिए मुझे
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आपका है तमाम खुद करता है और इसके रंगों
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की तरफ ब खुद मुक्त करता है ऐसा वो इसलिए
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करता है कि वह कहें कि माओवादी दुनिया के
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मत वाली माधुरी दुनिया की एक और दुनिया
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कायम करना चाहता है कि जिसकी खालक कोई मां
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वाराही को वक्त नहीं खुद शायर और फ़नकार य
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त असली हकदार है
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और मुलायम शराब के नहीं 3 लाख पर खून
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थेरेपी सकराई से
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को पूर्ण जमीन आसमान धरे चलता है गाने
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वांग इंसानों पी सक राय इतने जुल्म जुल्म
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हर पास एक तोती क्लब अनुशीर्षक राय बिना
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पीते हैं जहां अंदर कोई बेशर्मी कि वे
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तेजी लाएं हर्षितमुख साल अधिकारी यह पैक
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राशि के वसीले को अपने दैहिक भरता है किसी
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के यहां खूब सारा की कार फॉर माइ जरा
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नुमाया नजर आती है तो किसी के हाथ दूसरी
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ही से आती तस्वीरों को नमन की मिलती है
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उस्ताद अहमद के हवाले से यह बात बजा तौर
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पर कही जा सकती है कि उनके यहां पर कर्क
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राशि का इस्तेमाल कम हुआ है क्योंकि वह
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कार्य को जिस भाव एहसास की सदा ही विजय
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जैन और देनी अमल में शेयर करना चाहते हैं
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इसलिए उनके कलाम में जो तुम साले मिलती
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हैं वह बेहतरीन वह हल्की होने के बावजूद
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एक मखसूस रहनी अमल किया काशी करती हैं और
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यह अमल जज्बा की बजाय खेल की सतह पर मौजूद
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श्रोता रखो है
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कि मस्जिद मूर्तियां दीपांजलि हो गए नए
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हिंदू थे एक भी जाता मंदिर में इस पूरे
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चालक का बयान मुसलमान का एक नहीं जानता न
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हों तो जूड़े पैर रैंक लड़बे पड़ा उन्हें
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कहते कि ज्यादा चंगा सी में हानि बड़ा
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देंगे जीरा जी करदा को हैप्पी ज्यादा
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मजबूत और रिश्ता मजबूत और पर उस्ताद अहमद
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के युवक इश्क इश्क और वह इसकी रबड़ी में
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इस जहां पानी से बहुत दूर निकल जाते हैं
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यह की कड़ी धूप की तपिश की करने हैं वह
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घृणा और की में पहुंच जाते हैं जहां हर
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तरफ खुश नहीं है और जहां लुटा लुटा जा रहा
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है और भूषण की बिल्लियां लहराती हैं और
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जहां फैसला जन्नत की नंगी तारों की तरह
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क्वेश्चन है मैं अपनी और शराब जाना हर तीन
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गुना ज्यादा शुरू अरे सॉरी सामने हो गए थे
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साफ़ रखा उलटे में चढ़ना P1 सूरत उस्ताद
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रावण की शायरी में महत्व रखती दुनिया की
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निकासी नहीं मिलती है वह आरजू भी करते हैं
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और जुस्तजू भी प्रसिद्ध की बात भी करते
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हैं वह दयालपुरा जरूर है इसलिए अपने हवास
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किया सूद की भी तैयारी में ही कर लेते हैं
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यही वजह है कि उनकी हनुमान भी शायरी में
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गुड्डन नहीं है अब बाज़ार बेरोजगार है
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कोशिश करता सा चूर्ण देशभक्ति घोष मिला
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चीज चक्र बंद कर ऐसा है आप मंगी सकी पाक
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साफ निर्देश मिला
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में अंधश्रद्धा जुबेदा गला घोटे जगह आ
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जाइए बिकॉज़ मिला है करे मेला का मेला
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देखिए अगर किसी मिले थे राव समाज मिला अ
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तो यह थे कुछ इंदास उस्ताद रावण की रूमानी
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शायरी का उम्मीद है
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कि आपको हमारा पंजाबी शायरी के हवाले से
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से
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कि यह सिर्फ सलाह जरूर पसंद आएगा आपका
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बहुत शुक्रिया
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अजय को
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नई दिल्ली
12:41
झाल का
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