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Tradition of Pro-Peace Punjabi Poetry | Dr. Amjad Bhatti YT | Punjab, Punjabi & Punjabiat
Nov 4, 2024
The need for peace in the world has never been greater than it is today. American hegemony has ruined world peace. The tradition of talking about peace in literature is centuries old, but talking about literature for peace became possible in modern times. In World War I and World War II, world powers killed tens of millions of people in order to gain markets and sell merchandise. Much has been written in Punjabi literature about this massacre. Punjabi poets have always supported peace, whether it is Baba Farid Ganj Shukar or Guru Nanak Ji, all poets and intellectuals have spoken of peace.
#Dr. Amjad Bhatti YT
#World Peace Movement
#World Peace
#Punjabi Poetry
#Propaganda Poetry
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0:00
झाल
0:09
कि डॉक्टर हम जिंदगी फटी एक नया मौजूद के
0:14
साथ लेकर में हमारा आज का मौजूद अमन की तहरीक और इंसान दोस्त पंजाबी शायरी ओं
0:21
कि इस कप चावल बयान करेंगे अमन समाज की उस कैफियत का नाम है जहां तमाम लाल महमूद के
0:29
मुताबिक बगैर किसी पर शिद्दत और इस प्लेटफार्म के चल रहे हो
0:35
मैं अमन का तसव्वर किसी भी वषरें में प्रसिद्ध की गैरमौजूदगी या फिर सेहतमंद
0:41
मुसीबत बहन अलग स्वामी या बहन इंसानी ताल्लुकात से तबीर किया जाता है इस कैफियत
0:48
में वषरे के तमाम अपराधों को क्षमा जी वाशी मूसा बाद और सियासी हकूमत वापस हासिल
0:56
होता है बैन अलग स्वामी ताल्लुकात में अमन
1:01
का दौर खिलाफत या जनतंत्र की सूरते हाल की गैरमौजूदगी से ताबीर किया जाता है अमन के
1:09
बारे में टेक्निक इसकी वेब मौजूदगी या तत्व की वजू हाथ का हाता भी करती है
1:17
कि हम उम्मीद तौर पर अमन तबाह करने में अमिताभ फस समाजी बिगाड़ वर्षीय ये मसावात
1:24
रहमत वजन से ऐसी हालत कांग्रेस थी नस्ल प्रति और मजहबी बुनियादों पर अब हम शामिल
1:33
होते हैं मैं अमन की मम्मी तारीख में कई मानी श्यामल होते हैं इसमें मजूरी तौर पर अमन
1:42
को तरह फस बेहतरीन अजुद्धी डिफा किस्मत और
1:47
फलों के नाम से भी जाना जाता है इन अपराधी तौर पर उनसे मुलाकात दूध से खाली एक ऐसी
1:54
तरह जिंदगी का तसव्वुर लिया जाता है इसकी मुख्तियार में अपराध का अदब इंसाफ और
2:02
इंसानियत मुराद जाती है वॉचमैन फर्जी तौर
2:07
पर अमन की हालत हर फर्क पर्यवसान लागू होती है जबकि मजबूत और पर किसी भी स्थिति
2:13
का पूरा माजरा मुराद लिया जाता है दुनिया की मौत लोग बालों में लव से अमन या सलामती
2:20
को खुशामदीद या ऑल विधायक अलमास के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है मिसाल के तौर पर
2:27
हवाई जुबान कर लव से अल्लू हुआ था या फिर अरबी ज़बान का लफ्ज़ सलाम अमन या सलामती
2:35
के मानो इस्तेमाल होते हैं यह डिफिकल्ट विदाई या कुछ आम देती कलमा आप के तौर पर इस्तेमाल
2:42
किए जाते हैं अंग्रेज बाद में पीसकर लव्स ऑल विद न इक्वल मात्रा में इस्तेमाल होता
2:48
है खासतौर पर मुर्दा अपराध कहीं विक्रय इस्तेमाल होता है जैसे रेस्ट इन पीस मौजूद
2:57
और एक बड़ा मसला अमन और शांति दो आलमी जन्मों के बाद वियतनाम की जाएंगी मौजूदा
3:03
दौर में इराक अफगानिस्तान और शाम में अमेरिकी जारी है दें जहां दुनिया में अमन
3:09
की कश्ती को डावांडोल किया हुआ है वहीं दूसरी ज्यादा व्यक्त पसंद खूब बातें इस
3:16
कश्ती को डुबोने के दर्द हैं कि कोई भी जुनूनियत का दावेदार बनकर आलमी
3:22
अमन को तबाह करने की ठानी बैठा है तो कोई मजहब के ठेकेदार बनकर वाश रेखा अमन
3:28
नेस्त-ओ-नाबूद कर रहा है डायलॉग की कमी से अपने बर्दाश्त कर भैया इस हद तक पनप चुका
3:35
है कि मुख्यालय नुक्ता ई नजर रखने वालों का वजूद एक बोझ महसूस होने लगा है आपको
3:41
जुनूनियत का दावेदार हो या किसी और ने राम का अगर वह दुनिया के अमन को तबाह करता है
3:47
तो वह इंसानियत का दुश्मन कहलाएगा इंसान दुश्मनों को वह तो हमने साइंस और
3:53
टेक्नोलॉजी के बलबूते पर मोहलत हथियार बना रखे हैं जिनसे मिनटों सेकंडों में दुनिया
3:59
का अमन तबाह किया जा सकता है अमेरिका में डॉनल्ड ट्रंप की आमद पर हिंदुस्तान की
4:06
बेजा सरपरस्ती से तीसरी दुनिया आलमी जान का खतरा सरों पर मंडल आते देख रही है
4:15
है अब मैं अमन की बात करना कि देश की देन या एक्स्ट्रा है कम से कम अगर भी दुनिया
4:21
में उन्नीसवीं सदी तक अमनपसंद अदब के हवाले खेल खेल ही मिलते हैं जंग को ही
4:28
आपसी झगड़ों के खात्मे का हाल समझा जाता था तीसरी दुनिया बल्कि तरक्की या हफ्ता
4:34
दुनिया तक यह नजरिया मौजूद है कि अमन की चाहत है तो जंग के लिए जरूरी हथियार तैयार
4:41
रखो जंग को बस पीठ पर कमी उन यादव पर शानो-शौकत का मौजूद बनाया जाता रहा है अगर
4:49
यह फ्रीज़र मुद्दा सब और मुकेश अद्भुत किस्म के लोगों के जिम्मा था मगर मौत दिल में राज और दरमियानी रात पर चलने वाले
4:56
कट्टरपन और ता सब का शिकार होते चले आए हैं और आदमी हैं 19वीं सदी के आखिर में
5:04
जंग के खिलाफ नफरत का इजहार खुल्लम-खुल्ला आना शुरू हो गया था वह सब और लड़ाई झगड़ा
5:09
करने वाले इशारा किया में भी यह सोच पैदा हो गई कि कहीं अवामी दवाओं के नतीजे में
5:15
उनकी गाड़ी जी खत्म ना हो जाए लिहाजा उन्होंने गंगा चैनल का एक नया अंदाज महाराज खोल
5:23
लिया है कि यह महाशय था मजनू आपकी फ्रॉक और हां
5:29
माल के रसूल के लिए नई मणियों और इलाकों की तलाश और उन पर कब्जा करना यूं पहली और
5:36
दूसरी जगह असीम मजनू आर्थ बेचने और नई मंडी ओं पर कब्जा करने के लिए लड़ी गई
5:42
जिसके नतीजे में लाखों करोड़ों मासूम और बेगुनाह कटिंग कर दिए गे इंसान जान क्यों
5:50
करता है यह बड़ा आम सवाल है इस बारे में डॉक्टर एंथनी स्टीवंस डॉक्टर थाम हाउस के
5:58
हवाले से लिखते हैं कि इंसान की फितरत में हम लड़ाई झगड़े की तीन वजह भाग तलाश कर
6:05
सकते हैं मैं पहले ही मुकाबला बाजी दूसरी बुद्धि और
6:10
तीसरी शानो-शौकत का इजहार पहले वजह इंसानों को मुफ्त के रसूल के लिए लड़ने पर
6:16
मजबूर करती है मुकाबला बाद दूसरी वजह अफसोस की ख्वाइश यानी इंसान बुजदिल होता
6:22
है तो वह अपना तापस जा रहा होता है पर तीसरी वजह मशहूर होने की ख्वाइश के पास
6:28
पहला मकसद हासिल करने के लिए प्रसिद्ध का इस्तेमाल किया जाता है ताकि दूसरे इंसानों
6:34
उनके बीवी बच्चों और मामलों दौलत का मालिक बन बना जाए तो
6:40
कि दूसरे मकसद में अपना दावा किया जाता है का इसके लिए दूसरे की जान ही क्यों न चली
6:46
जाए कि तीसरे मकसद में हेग लव से एक
6:52
मुस्कुराहट मामूली फ्राय ही क्यों ना हो लड़ाई मूवी जाती है यानि कि तू मेरे बल
6:59
बैठकर पूरा करवाएं कि मैं मेरे बल्कि जो भी महत्वपूर्ण केविन
7:05
है ये कभी हारकर नहीं किया यह लड़ाई की वजह बन जाती है
7:10
कि अगर यह शान-शौकत का इजहार होता है इन्हें दूसरे को अपना रोड चलना होता है
7:18
थे प्रोफेसर लुत्फी युनियन जन की गुहार
7:23
उनके स्वभाव के मुतलक यों पर मानते हैं जबकि बाजू में से एक वजन नस्लों का बानी
7:31
बना दो अदावत है बनिया दम क्लच नस्लों से पैदा हुए हैं उनके नखरों निगार शक व शुबह
7:39
त्रांग और जुबान और दस्तूर एक दूसरे से मुक्त लिखें तमाम बनी नो इंसान एक ही सूरत
7:46
में नहीं डाले गए बात सिर्फ़ हम है बास गंज मी बॉस जब रंग के होते हैं और बास
7:54
गोरे रंग के हार ए की एक ही जुबान और लुप्त नहीं और हर कौम और जवाब के दस्तूर
8:01
और रस्मों रिवाज नशा नहीं आ हैं इन्हीं बातों ने एक वाहन के दरमियान
8:08
अदावत तो यह तरफ पैदा कर दिया है जिसकी वजह से जगह जरूर मां हुए हैं आलमगिर सोलहो
8:15
अमन को कम करने के लिए इन बातों का इन सुधार जरूरी है फिर प्रयासरत और लेन-देन
8:22
के मामले में भी आलम की इस कला के मसला में रखना अंदाजी की है मजदूरों सरमायादारों और अमीरों और नारों के तमाम
8:30
भी जबरदस्त कशमकश बल के चपला रही है 1671
8:36
कि इसकी सिलाई जरूर है कि मुगलों पर गरीबों की हालत को बेहतर
8:43
बनाने और सरमायादारों और मजदूरों के धर्म अनुसार नंददास को कम करने की बेशुमार
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कोशिशें की गई है लेकिन यह मसला एक नहाए अहम और अजीब मसला है पर इसका पाए तक मेल
8:56
तक पहुंचना हर फर्द दें बशर का फर्ज है अब विलीन होना चाहिए
9:02
है जबकि इन वजूहात से अवाम दोस्त अधिक का फर्ज है कि वह अवाम को आगे है पंजाबी
9:09
अध्यापकों और शायरों ने अपनी यह जिम्मेदारी बेसन अदा की है इंसान दोस्त
9:16
पंजाबी शिकायत अमन कायम करने वाली ताकतों से सवाल करता है कि हमारे हीरो अमन के
9:22
दफ्तरों में काम करने वाले क्यों नहीं है क्यों गम बनाने वाले हमारे हीरो बना दिए
9:29
जाते हैं प्यार-मोहब्बत सुख-शांति को वषरे में बर्लिन नजरों से क्यों नहीं देखा जाता
9:35
है हैं प्यार-मोहब्बत सुख-शांति को वषरें में
9:41
बर्लिन नगरों से क्यों नहीं देखा जाता यह ऑरेंज ऐसे कई सवालों का जवाब न मिलने की
9:47
सूरत में शायद परेशान हो जाता है और कहता है मैनू अजय पीकर अगल समझ नहीं आई कि साथ
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ढेर सारे हीरो जंगली हीरो क्यों ने तेरे प्यार में गाउन वाले रंगा नसला डुबाना
10:03
व्यक्ति के हाथों को ऊपर वहां के लोग काफी हूं सीने लाड वाले शोध ने सिद्ध इतने
10:11
प्यारे अबे साले हीरो क्यों नहीं उठेंगे है पंजाबी शायरी अमन की हामी शायरी है
10:18
जहां के मिलाते हुए साहेब बेशक जितने मर्जी के हो जाएं इंसान दोस्त अमन की
10:26
अहमियत वजह करते रहते हैं अमन की अहमियत और तारीफ करते हुए शायरी लिखता है जेकर एक
10:34
कल बूते अवधेश कोई अमन को सकल बुद्धि जान जाते एक देश में फंसती रब्बा सारा अमन बाद
10:43
वीरान वीरान जावे मैं सूरज चलते अंबर देता ऋणों पर यह एक
10:49
कैप्सूल जहां-जहां पर अमन नूरदीन शमा देवांग रोशन सारे जग नामांतरण जहां पर फसल
10:57
गोलियां मारकर नहीं आऊंगा ना ही पलट देना लेकिन कैमरन का नाम दम आंख्या सुरक्षा ने
11:05
अमन का ट्विंकल यह कैमरा ऑन मैं एक और शायर अमृत की हिमायत करता है कि
11:13
सूर्या से इनके जज से उस वक्त परेशान है तो कहता है आप मिनट जित्थे सरहद राम मौत
11:21
हात दिया और उजड़े टॉक विच कंपनी हंसती लोई जिस दी लिरा लिरा लहू-लुहान
11:29
वक्त-बेवक्त ढेर सारे विच हाल अपने लिए मुखड़ा देख के सदाबहार आज ज़न्नत मुख दिया
11:37
जिला पानी देता है मंडियां है था बोर जग
11:43
तो उद्देश्य रावण उजड़े झुकें एग लांजरी सूखा मारे बगैर पीले सब गुलाबी रंग और
11:51
लावण जुल्म सितम का दायित्व आंख्या बत्तियां जिया खन गण
11:57
पंजे प्रेम सौहार्द के रिश्ते टूटे छातियां कुत्ते कपड़ा कधी टुडे खाधी कंपनी
12:04
हंसती और किया गया गलियां वे चौंक तकदीर अपनी बल नजदीक जावे संदिग्ध हालत में एकता
12:11
सुंदर चोट से चावला नाल दर्द मंदिर देश मे झूठ और उजड़े चौक भेजे थे कंपनी हंसती
12:20
हसरत पर व्याख्यान के इंसाफ वे मुस्करा उठते रख समाधि पर नजर चढ़ावे में
12:28
कि यह असल में सूरते हाल बयान किया जैन के दौरान यह जांच के बाद ही सूरत यौन होती है
12:33
बयान करने का मक़सद गाए का है का आगमन के हवाले से लोगों को में अगा ही
12:41
पैदा करना था कि ऐसे लोग जो मजबूत दिखा के लिए जंग की
12:47
हालत में रहना जरूरी समझते हैं वह इंसानियत के मुस्तकबिल के दुश्मन है यही
12:53
वजह है कि हम अक्सर पंजाबी शायर 24 घंटे जाएंगी हालत में रहने वाले नजरिए को
12:59
मुकम्मल तौर पर रद्द करते हैं वह समझते हैं कि मौजूदा दुनिया का इंसान आरज़ू सही
13:05
नहीं और तहजीब फीसद पर पहुंच चुका है जहां मैच ताकत के बलबूते पर दूसरों को अपना
13:11
गुलाम नहीं बनाया जा सकता मिसाल के तौर पर अमेरिका की अफगानिस्तान इराक और शाम में
13:18
मदाखलत को ही देख लें दूसरी तरफ जापान कोरिया मलेशिया इंडोनेशिया की मिसालें
13:24
हमारे सामने हैं जिन्होंने फैसले के तौर पर नहीं बल्कि एक तो शादी और वाशी ताकत की
13:30
बदौलत दुनिया में अपना सिक्का जमाया है हम समझते हैं कि दुनिया के जितने भी मिसाइल
13:35
है वह इंसान को इंसान ना समझने के बाद से ज्यादा पहले खुद इंसान बना जाए और फिर
13:42
दूसरों को इंसान समझा जाए या नहीं अलार्म जब हैवानियत से निकलेगा तो फिर दुनिया में अमन कायम होगा इक शायर ने क्या
13:50
खूब कहा है मुल्क कोई यह जार ना होवे वस्त्र धराकर बर्बाद ना हो गए फितना अगले
13:57
प्रसाद ना होवे हर था हुए अमन-अमान जुबान जावें तू इंसान कोई ना छेड़े जगह लड़ाई हर
14:05
था हुए 16 सफेद एक जैसा ब्राह्मण भाई कोई ना बन बैठे पर गांड जुबान जावण
14:14
का जेवण जावें तू इंसान कमज़ोर आधी स्पीड भंडार में का रुतबा इंसान जापान में जे तू
14:21
हर एक देख कम आने तेरा रह जाए सदा निशान यह बन जावें तू इंसान है
14:28
है पंजाबी शायरों ने ना सिर्फ अमन की बात की है बल्कि उन्होंने जंग की बट्टी का
14:33
ईंधन भरने वालों को मतलब मिसाइलों के जरिए यह समझाने की कोशिश भी की है कि गोली का
14:39
कोई मतलब नहीं आता मिसाइल यह नहीं देखता कि जिसने बनाया है उसी को लगेगा कि नहीं
14:45
लगेगा तो लगेगा अगर आप चलाएंगे तो बनाने वाला भी उसका शिकार होगा वह आंखों से अंधी
14:51
होती है यानि कि गोली और मिला लाखों से अंधे होते हैं वह यह नहीं देखते कि उसके
14:57
सामने का फर्क पड़ा है यह मुसलमान लिहाजा जो लोग अवाम को जंगली कारोबार के लिए बतौर
15:03
हथियार इस्तेमाल करना चाहते हैं ऐसे लोगों की पहचान की जानी चाहिए
15:09
मैं एक और शायद अपने एक नज़्म पक्के निशानची के जरिए मां के लाल और बहनों के
15:16
भाइयों को दहशतगर्दों की हवस का निशाना बनने से बचाना चाहता है और खबरदार करता है
15:23
इस तरह खाली उपकरणों की जुलाई हुई आग का इंधन ना बनो लिखते हैं कुछ गबरू जवान एक
15:31
बार डर से खूनी अखियां दे विच अखियां पाओगे रायफल व मोड होते सजाकर अपने पाने
15:39
एक दूजे सीने उठते फायर कर देता परिणाम बेवफा पर एक दूजे देसी न्यायाधीश था एक
15:46
दूजे दिया मां अपर्णा दे-दिला उद्देश क्षण कुछ ऐसे ही जज्बात और साथ पंजाबी के एक और
15:55
शायर ने अपनी नजर में वे उनके नज़दीक मौजूदा दौर में जंग जीत या हार को इस्लाम
16:02
का नहीं रह गई बल्कि इंसान को इंसान ना समझने का मामला दर्ज वह समझते हैं
16:09
चीन इंसान को इंसान तस्लीम कर लिया जाए तो तमाम मिसाइल मिल बैठकर हल किए जा सकते हैं
16:16
उनका जन्म से नफरत का यह खूबसूरत अंदाज देख लें वह बजी खुशी नलखेड़ा या सिद्ध
16:25
प्रसार विद बैठी अपनी बूढ़ी मां को लाया तो उन झपटा मारकर कैंट लगा मैं रेडियो से
16:31
सुनिए हमेशा डे हवाई ज्यादा ने दुश्मन दे शेयर ऊपर हमला करके डेढ़ सौ वेरी स्मार्ट
16:37
होते हैं मान है वह वाले अकबर इंटर कालेज के अनुसार हटाकर कैन लगी
16:44
इस पेड़ यात्रा वह भी ते मां जैसा कि
16:51
है दरअसल दुनिया में जितने भी जड़े जारी हैं उनका चालक लूट-खसूट वाले एग्जाम से है
16:57
अब हम को लूटने के लिए मल्टी नेशनल कंपनियां आप उसमें इत्यादि हैं और गठजोड़
17:03
किए हुए हैं वह अवाम को लूटने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देती हूं
17:11
को लेकर होने वाली सूरते हाल में देख लें जो दवाइयों की लूटमार दवाइयों के नाम पर
17:16
जो लूटमार की गई मांस के नाम पर लूटमार की गई वह आपके सामने है पहली और दूसरी आलमी
17:23
जाएंगे इश्क का बयान मशहूर है मौजूदा दौर में एक बार में मुताहिदा का किरदार बड़ा
17:29
अहम बन चुका है क्योंकि यह दुनिया का वाहिद इदारा है जिसके पास बस आयल भी हैं
17:35
पर अवाम तक अपनी बात पहुंचाने का तरीका भी मगर बदकिस्मती तो यह है कि इस पर चांद वह
17:42
सी और ना आखिरी दिन देश को वस्तुओं का कब्जा हो चुका है इंसान दोस्त शाहिद इस
17:49
सूरतेहाल को जवान लगदी कुड़ी कड जानता है वह समझता है कि सदा के बात बाहर हमारा उधर
17:57
जरूर बनेगी को लेकर इस बांध दिए लोगों ने समाचार चल
18:04
रहा गिर नहीं एब्सलूट तेरे पास जाता है एवं उत्तर उत्तर अंदर लंबा नहीं है छान है
18:11
शाहिद अख्तर ने झाला कि एप्पल नहीं तो प्ले लिस्ट करना अब वक्त
18:17
जुदाई से बिरहा रहा है मसल मलावदा वक्त नहीं अब मैं यह सूरत प्यार को इस वक्त
18:23
दुनिया में चल रही है उसके हवाले से होने का शायर ने यह सवाल खड़ी मनोरंजन का नारा
18:30
कब लगाना होता है इसका फैसला सिर्फ अपना नफा-नुकसान देखकर करती है कि अब उन्हें
18:38
उनकी गाड़ियों से होते जा रहे हैं तो अवाम का ध्यान बटाने के लिए को गर्म करना शुरू
18:46
कर देते हैं इसीलिए उस समय इस पर करते हुए
18:52
लिखता है की हकूमत अनुकरण वाले ज्यादा जेकर मतलब अ
18:57
मंदार नारायण निकलता हो गए थे कंडियाली तार वाली लकीर दो में पार्षद मुन्ना दे एक
19:05
इशारे थे टीवी रेडियो अखबार सियासी इतिहास की लोग प्यार दे गीत गांव लगते हैं तारीख
19:13
की जन्मस्थली सिताब चौक प्यार-मोहब्बत रवादारी इंसान दोस्ती दोपहर 4 ढेर हवाले
19:19
कंधे उन्मुक्त चिट्ठे पर आने वाले कबूतर उड़ाकर हवाओं से जुड़ा बनाना शुरू कर दी
19:26
मैंने तुझे कर बको मत आकर्षण वाले अनुभव अपना आपके अपना ताज चावल ही दूरी तय नफरत
19:33
दें पामगढ़ बोलने जरूरी होने से उन्हें गुजारे थे टीवी रेडियो अखबार सितंबर
19:41
उद्योग तारीख की तरफ बच्चों आग नफ़रत दूरी तय वर्दी झुकें हवाले करके उन्हें काले
19:51
सपना आगे दिलारु जान अजय रावत खिलार देंगे अ
19:58
कि एक घोषाल पर उड़ानों की मुनाफ कर दोगलेपन और अवाम कोई जंग का इंजन बनाने के
20:05
लिए तैयार करने वाले हर लोगों को बेनकाब करते हैं वह सरहदों पर लड़ते हुए उपायों
20:12
को वार्निंग देते हैं तो वह जिंदगी को की वित्तीय साख समझें और अमन और शांति से
20:17
रहने की कोशिश करें यहां पर मानते हैं को देख लें एक कल्लू अहिरवार बार तेरे अतः
20:25
बराबर मेरे तेरे सेनापति मेरे सेनापति आमने सामने बैठ दे दो
20:31
में आमने सामने बैठ के चलते जाम टकराने के देख एक-दूसरे में यह मुस्कान के अ
20:40
आज रात सादवी जी सिंह जी तरत वालियां ध्वनियां पाएंगे मेहता
20:45
कि उन दो खरीदा ही मेहमान आ बेटा कहते पैर अपराध तू अपनी विच आईएस रुकते ही ना कर
20:53
लें क्योंकि बार रुद्रों कोई अपने अपराधी प्रशिक्षण में हमिद
20:58
कि जनता बाजार गर्म रखने वालों की ख्वाहिश होती है कि वह हर वक्त कत्लोगारत और
21:03
लड़ाई-झगड़े की बातों को फ्रॉम थे एटम बम बनाकर वह अवाम को यकीन दिलाने की कोशिश
21:09
करते हैं कि आप अवाम के तमाम मिसाइल और दुख दर्द दूर हो जाएंगे यू हुक्मरान तो
21:16
लाख जान-बूझकर यह साबित करने की कोशिश करता है कि redmi ताकत बनने की वजह से और
21:22
बहुत बीमार ही लाचारी अखलाक और नागरिक खत्म हो गई है
21:27
कि शायद मिसाइलों के दिन यह नफरत की आग जलाने और और बच्चों को यतीम करने वाले
21:34
इशारा किया से उठा सकें तो आइए जानते हैं वह इंसान तो इंसान अभियां बस्तियां
21:41
तिब्बती हमेशा हृदय मेल मोहब्बत खुशियां दे मरकर हमें अश्लील दुनियां तो मिट जाए
21:48
यह नहीं तरह हिंदू बम इसाई बम केमिस्ट पंप यदि इस्लामी बम की तो उसी के नजदीक बनते
21:57
खुशियां मनाओ देव सूर्य देव और तीसरी दुनिया के ऊपर आने अशर्फियां को
22:04
जन्म के बुखार में मुब्तला रखना चाहती है है
22:09
कि ऐसा करने से अब आम अपनी भूल पर बीमारी और नामधारी का हिसाब मांगने के काबिल नहीं
22:16
रहते इस बात को तुरंत समझने के लिए यह तैयार हो जाएगा जबकि सीआरआर मुल्क के जरिए
22:22
अपनी तसल्ली की मेहनत की बदौलत फ़रावानी और खुशहाली एवं कलाकार होते हैं तो वह मन
22:27
की बुनियाद को मजबूत करते हैं इसी तरह जब किसी मैकू मूल के लोग अपनी आजादी के लिए
22:33
उड़ान कॉम के खिलाफ मारा होते हैं तो वह भी अमन के रास्ते पर गांव बनते हैं इसके
22:39
ब्राउज़र मेहनतकशों की जिद को दबाया जाता है उनकी या व्यक्ति को तोड़ने की कोशिश की
22:45
जाती है किसी मोलकिया कौन को महबूब बनाने या लूटने-खसोटने या इसकी तरक्की को रोकने
22:52
की कार्रवाई की जाती है तो यह फैट अमन के खिलाफ होता है फर्ज इंसान का हरमल किसी ना
22:59
किसी तरह मनपसंद खास होता है मैं अमन कबहुं बड़े बसी है इसमें इंसानी
23:06
जिंदगी की हर परत को समेटा जा सकता है इसलिए इंसान का इंफ्रा दी और एक तुम ही
23:12
अमल व शरीर पर असर छोड़ता है इसीलिए हम तो शायद वो आश्चर्य की तरक्की की राह में
23:18
रुकावट डालने वालों की मुरम्मत करता है उसे इस बात का दुख है कि एक राशियां में
23:23
आम आदमी के जीवन को अकाउंट सुबह इन रंग नस्ल और अलौकिकता आंसुओं से भर दिया है
23:29
ग्लोबलाइजेशन के नाम पर और बस बेबसी डे घोषित जहालत और व साल से मैं रूम में के
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टाइम बम इंसानी सोच को रेजा रेजा कर रहे हैं इंसानी बस्तियों में मौत के मेले लगे
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हुए हैं और त्यौहार जानत खून की बारिश बरस रही है इशारा किया से मिले हुए दानिश्वर
23:49
रेडियो और टेलीविजन और अखबारों रात और सोशल मीडिया के जरिए ऐसा प्रभाव घंटा करते
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हैं यह में आम आदमी तक रखिए कि मिसाइल से दूर इस तैयार कर लेता है शायद कहना है कि
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दर्द यह सभी इंसानों को अपनी पहचान रस्मों रिवाज है
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है और अकाउंट पर ज्यादा अमल न करने दिया गया तो 21वीं सदी भी अमन की क्या की
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ख्वाहिश रखने वालों के लिए शराब बन जाएगी बल्कि बनी हुई है इसीलिए शायद जुल्म जहां
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कहीं भी हो उस की मुरम्मत करता है कि शायद रिश्ता है एजेंसियां दे तनख्वाह
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धार दानिश्वर लिखारी के सहाफी नाले मार्किट आधे चंदा देने वाले सूर्यग्रहण
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गुलाम रब देख इस बंदे अपने-अपने करावे सूखने डाल दूंगी नींद सुनते रहेंगे
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कि ऐसे लोगों को मद्देनजर रखकर ही शायर सवाल करता है बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले
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शांति शांति नगर देख गिरजेश क्षण वाले अवैध की पर के कोई तस्वीर
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कि मौजूदा दौर मुक्त और दोगलेपन से भरपूर है के साथ जुड़ में फर्क करना मुश्किल हो
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चुका है चोर मचाए शोर बॉबी सूरत हाल दरपेश है
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कि शायद के शहर में अवाम के लिए तबाही और बर्बादी की ख्वाहिश रखने वाले यानि बम
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बांध बीटीसी दे बैठे ज्वलंत मुद्दे फिर उजाड़ आलमी साम्राज्य के अलंकार है
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मैं एक भारतीय अवाम को जंग का शोकीन और जिम्मेदार नहीं समझते उनके खेल में वह
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बेचारे तो दो वक्त की रोटी के चक्करों से ही नहीं निकल पाते तमाम उम्र उनकी इसी
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जद्दोजहद में उतर जाती है यह जुनून की बट्टी गर्म करने वालों की मुरम्मत करना आफ
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इंसान दोस्ती का बुनियादी फर्ज बन जाता है चाहे लिखता है तक कि दे अमन लेयर मन झाले
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टोंग रचाई जान देने वह अपने हाथी दुनिया का सुख-चैन बचाई जान देने नुक
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कि वह ना मानें एडम बांधते नाले मजा ज्यादा आ
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के पुनर्निमाण गौतम बुद्ध की नाले नाश मजा ज्यादा ताकत हम का दिन अच्छा लुट जाने
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लहरिया पर यह फैसला आते अगर आदमी वर्षा देंगे कि दावे भूख मिटा वन देखकर दीपक भाई
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जान दे रहे जिन्हें रैना सुर्खिया धरती-दिवस मानना देखी कर सकंे इंसान की
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हस्ती दे वेरी नफरत फैलाई जाने एक्टर जुनून एक-एक बूंद दो
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में एक मुर्गी को का मंजर अवार्ड तो आइए जानते हैं अहमदाबाद आणंद दाम ज्यादा गल
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पंढेर तो खुला मिला एक अर्ध ए कॉमन उपभोक्ता पढ़ाई ज्यादा ने
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है मगर शावा इन मजलूमों के सदियां दे मैं कुमांऊ जो अमन दिखातर पेड पार्किग यह जान
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लड़ाई जाने की खरीद सहित करना ही असल इंसानियत मगर इसका मतलब यह नहीं कि शराब
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पिया की जंग बुक्तान वाला बना जाए
27:08
मैं अमन की खातिर जिद्दोजहद करना ही असल इंसानियत है मगर इसका मतलब यह नहीं कि
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शराब पिया की जंग वाली बुक का तारने वाला बना जाए दुनिया में अमन का काम अब ही बनता
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जा रहा है इसीलिए तो पंजाबी शायद खुद को संधि के तहत यूटोपियाई दुनिया में गुम हो
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जाना चाहता है हो सकता है जी चांद है मौत तो पहला ऐसा नगर विकास जिस देवाशी तुझे चैनल जरा नफरत
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कर दे होगा जिसने हार का गम जरूर दे पीछे सपा मांगना लड़ने होगा जिससे लोगों की मरण
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तो पहला रोज नामर्द हूं शायद यह जज्बा कब्रिस्तान है कि वह मामले को पूरा मत
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देखना चाहता है वह समझता है कि जंग करने से अमन नसीब नहीं होगा इंसान की कदर की
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जानी चाहिए इसकी अहमियत खो तस्लीम किया जाना चाहिए क्योंकि जाने किसे नू सुख नहीं
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दे दी जाएंगी जोड़े महल भंडारे खराब देवबंदियों जंगलों को मौत मुआवजा मारण
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वाले व मौत से जूझ किया जानिए तो फंदे वह इंसान हाथों पर हटाओ रावण नाले बनते
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रेगुलेटर के रखो बंदे राहुल समझो जानू से ज्यादा अपने दिल विच प्यार रूपालो
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ज्वाइंट वेंचर मंदिर दिव्य वालों कि एक शहर जन्म के नुकसान आप तोरण के
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स्वायत्त की बात करते हुए एक हुक्मरान शराब पिया से पूछता है कि दुनिया साड़ी से
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अमन दराज आवेदक या सदा यह चॉप्ड थे लॉग नालई निर्देशक बनी रहती कि दुनिया के हर
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बंदा जितने साेनिज दे कुन्नू पूर्व सफेद अब यह खड़ी थी चौपाइयां दोनों मूलियां
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गजरा देवांग इन लटक रहे होंगे ऐसा कभी दुनिया अतिथि बंदूक में गोलियां छवियां
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सिगरेट तंबाकू यह फैसला मुकेश यॉर्क शारदा
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घाघरा लुगड़ी मीणा ना जाए या जिंदा रख ले
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समझा लेंगे यह दुनिया को विजय लोधी
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है या मलाई मार के लोकगीत सदा प्रदुषण दैनिक देखते रहते हैं जो आप अपने स्वाद
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आखरी हां बेच भी लंबे झाले में उसका ज्यादा देने पर कि रखनी चाहिए
29:34
रोक पाना चाहिए जतन करना चाहिए इंसान 24
29:40
जून के शौकीन और जो दूरियों से सवाल करते हैं कि अगर उसने तोप चलाने का शौक इतना ही शौक है तो फिर महंगाई बेरोजगारी और वक्त
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इस लाश और न देरी की जाए तो तोपों करो क्यों नहीं करते ताकि मास्टर ऐसे इनका
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खात्मा हो सके आपने सा मुखड़ा अवाम के दिन हिंदू पर किया हुआ है इन के दिन और रात का
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स्किन खराब किया हुआ है शायद समय तय है कि इन सवालों के जवाब उस ब्रांड तोड़ लेंगे पास मौजूद नहीं बल्कि के उल्टा वह को अपने
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ज़ुल्म का निशाना बनाने के लिए मौत लव हथकंडे पर हरदा इस्तेमाल करते रहते हैं
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है तो बालियां सुनी प्राण महंगाई पर तोप चलाने तेरा रोबदाब की हो या यह तेज तो
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मच्छर ना हो या मच्छर तभी तो चला लेंगे की बात करें तो वाले या सुनी प्राप्त सारे
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सिखण लिखना-पढ़ना फिल्म बीटीसी उत्तर चढ़ना ऐसा कोई सबूत पड़ा तो वाले वसुंधरा
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तो पर दीना रे जरूरत हर कोई यह थे करें अगर आप लोढ़ा खत्म करा तो वाले स्वर्ण
30:42
प्राप्त से ज्यादा करूं राम सबका महंगाई बेरोजगारी आलू की अनपढ़ता और अवाम के दूसरे मसले हल
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नहीं कर सकता तो उन्हें असली के ढेर भी नहीं लगाने चाहिए इंसान दोस्त पंजाबी शहर
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समय तय है कि इंसानियत अब वो आश्चर्य से रहना चाहती है यह स्लो शैतानी हथियार हैं
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जो इस लेकर शुक्र नीच राशियां ने अपने गुरु शैतान की पैरोकारी के लिए शुभ लिया
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इकट्ठे किए हुए हैं चाय लिखता है इंसान आधा मदर प्यारे मुड़े असलम के स्तर का है
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एटम बम शैतानी हत्यारे शैतानी अनुबंध कराओ वेलेन एवं धैर्य आओ
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में सक्रिय होकर पर ना हो या ज्यादा जीवन मरना होय म्हारो मोड़ की करना जियाउद्दीन
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पाव वैल्यू भंगार आओ हर जो हेयर दे से वैष्णव हर मूल की सरकार मुद्रणालय साड़ी
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मंगा अमन थी रहना अवधि राखी मैं अमन आधी राखी रखवाओ वेले ने मंगलवार
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या आओ और अगर ऐसा नहीं हो सकता तो फिर याद रखना दुनियां दे इंसानों अपनी लखन लाल
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अवधि रत्नों व्यक्ति लोगों प्रणव मिट्टी लौंग यह रात पीएम मोदी इस रा आदत पै गई बे
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दो साले बुलाते चीख सिमट के रह गई चार जो फ्रेजर का तिलक ने पके डेरे लाल है फिर
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सूरज नहीं चलना लोगों को फिर सूरज ने चढ़ना ज्वेलर जुल्मों तक के इंच अखियां नू
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टो जी बातें लगे हुए कैमरे तोड़ दी तो कुछ बोलो तो id छुपने खा लेते ने हंसते-हंसते
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अमरुद निर्णय वर्दियां मोटे यारा तेरी गलियां वर्ग के बच्चे सोचना वो ऐसा अनहोनी
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ने थे नियुक्त अ थे प्लेयर्स इन बमों के में जरूरत नहीं
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हमें तो हमारे ग्रह क्लास का इलाज चाहिए बम बांधी नहीं road आसान हों वो खुद
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राजस्व तोड़ा सानू क्यों है प्यार दी थोड़ा सा नू हर दिल बड़ी कुलावे बम ना कोई
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शाला बम ना कोई बनावे की सलाह
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को बांधना कोई बना वेधशाला आप ताकि पंजाबी शायरी के जाएंगे से यह बात नहीं कर कर
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सामने आती है कि पंजाबी शायरों ने जानकर फिर कवायद की मदद वाली हुक्मरान शराब पिया
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की तस्वीर फीसद अवाम को बुनियादी हक वह शुरुआत ए जिंदगी की तरह से महरूम रखने
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वाली पॉलिसियों को अर्ध वेतन की बनाया है मगर शायद उड़ानों का अवाम से चालक बस पाएं
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साल बाद इलेक्शन के दौरान मुलाकात पुस्तक का ही होता है इसी बस मंदिर में पंजाबी के
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मारू शायर ने इंसान दुश्मन सोच और स्पेशली तबके के सामने हाल दोहाई का नया अंदाज
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अपनाया है जब उन्होंने देखा कि स्पेशली जब का जन्म का शौकीन है तो वह मशहूर समाज से
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मायूस होकर आने वाली नस्लों से निकालना करते हैं अपनी बात को इशारा किया तक
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पहुंचाने का यह अंदाज अनोखा निराला है उनका कहना है कि उन्होंने शराब पिया कभी
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पैदा ना हुए बच्चों का पैदा होने से पहले मरना सोचकर ही शायद जंक्शन
33:55
अच्छा जाए लेते हैं सारे जग मे अंजाम देने वालों एक में देखोगे बीर
34:03
कि एक मेल्ट होकर बीमार 21 ठंडा क्यों जैसे था जड़ते नकली आई ट्रैक्टर्स नाल
34:11
दर्द को ऑन कर गई है वह मायावती को कि समुद्री को ऑफ बच्चों को अंग्रेजी जिन्नू
34:18
रियास्ती पोलीस आंटी न्यूक्लीयर क्यों जो करण दुश्वर गिलहरी है
34:25
कि पाकिस्तान के लिए यही कुछ किसी और मौजूद के साथ फिर हाजिर होंगे अपना ख्याल
34:30
रखिए और सामने की करने के तसव्वर को आम कीजिए और खास ने किया करने से परहेज करें
34:39
अस हुआ है
34:44
झाला का
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