Serious Ghazals by Dr. Inam ul Haq Javeid | ڈاکٹر انعام الحق جاوید کی سنجیدہ غزلیات
Nov 4, 2024
# Dr. Inam ul Haq Javeid
# Dr. Amjad Bhatti YT
# Serious Poetry of Dr. Inam ul Haq Javeid
# Ghazals by Dr. Inam ul Haq Javeid
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अजय को
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कर दो
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शो मोर
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कि जिन उर्दू का नजीता क्लासिफिकेशन मत
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सबसे पहले बदल हर लफ्ज़ को कागज पर उतारा
0:16
नहीं चाहता हूं
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कि हर लफ्ज़ को कागज पर उतारा नहीं जाता
0:20
हक नाम सरे आम पुकारा दिन जाता
0:25
भी होती है मोहब्बत ने कई लाभ की बात है
0:30
है वैसे ही तो इस खेल में आ रहा नहीं जा
0:35
के हाथों में लगाया नहीं जाता युग में
0:38
काजल है
0:41
की जुल्फों को बिलावत है सवालात नहीं
0:44
जानता प्रभाव
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कि हर शख्स को तूफान बचाने
0:50
कि हर गांव के हमरा किनारा नहीं जाता तब
0:56
तक नहीं खुलते कभी स्नान मोहब्बत जब तक
1:01
कोई इस राह में मारा हत्या करवा दी
1:07
का रिकॉर्ड फसल
1:09
कि खुद नहीं बोलता मैं
1:12
में अंधकार का फंदा
1:17
मैं कुछ नहीं बोलता फनकार कफन बोलता है
1:21
जिस रहे हुस्न का पेशा तपन है
1:27
है इसके शहर की अपनी ही दुकान थी इसके शहर
1:33
की अपनी ही स्वादिष्ट होती है और चाहे न
1:39
लें चाहे पसंद होता है है
1:43
कि जस्टिस इजरत ने सरेश तराशा दस्ते फितरत
1:51
में श्रेष्ठ एक तराशा हो जिसे सात पर्दों
1:55
में दी उस बुद्ध का पतन बोलता है दशरथ ने
2:01
श्रेष्ठ नौकरशाहों जिसे सात परतों में भी
2:04
उसकी मौत का पलंग बोलता है रातुंज्य बाद
2:08
खुशबू की जो आ जाए तो उसके हक में जब बात
2:13
हुई मूर्ति जो आ जाए तो इसके हक में सिर्फ
2:16
एक फूल नहीं सारा चमन सिर्फ फूल नहीं सारा
2:23
चमक
2:25
ए ए गजल किचन शेड भ्रम रास्ता फिर फसलों
2:30
के बोर्ड पर आने को है रास्ता फिर फसलों
2:35
के मोड़ पर आने को है और पहले कारवां कुछ
2:40
हैं कि घाघरे
2:42
कि किसके हाथों में पकड़ रखे हैं पावर ऑफ
2:46
में किसके हाथों में पकड़ रखे हैं पांव
2:50
गाने सुन रहे हैं एक गुप्त से शहर आने को
2:57
आप सुन रहे है एक मुद्दत से शहर आने को है
3:01
और शार्प ज्योति जा रहे हैं
3:05
अपने पूर्वजों के पोर्स से
3:08
के साथ जुड़ती जा रही है पूर्वजों के पूछे
3:12
अ पेड़ पर करके ताल्लुक का समर्थ
3:18
और भाई क्या होती जा रही है बास पूर्वजों
3:21
के पोर्स से पेड़ पर तक के तांत्रिक का
3:26
समर्थन में
3:33
अजय देवगन के साथ
3:37
कि यह किसने उड़ाई है कि आप कुछ नहीं हुआ
3:41
था यह किसने उड़ाई है कि आप कुछ नहीं होगा
3:45
हां इतनी सदाकत है कि सब कुछ नहीं होगा
3:49
कि यह किसने उड़ाई है कि आप कुछ नहीं होगा
3:53
आ हां इतनी सदाकत है कि सब कुछ नहीं होगा
3:57
करना है अगर कुछ तो करो जल्द कि पानी
4:04
कॉल करना है अगर कुछ तो करो जल्द के पानी
4:07
जब सर से गुजर जाएगा तब कुछ नहीं ऊपर
4:13
कॉल करना है अगर कुछ तो करो जल्द कि पानी
4:16
जब सर से गुजर जाएगा तब कुछ नहीं होगा
4:21
सोचा ही नहीं था कि तभी रफी होंगे
4:25
कुछ सोचा ही नहीं था कि तभी कत्ल की होंगे
4:28
और कत्ल कर दिया अपने सभा कुछ नहीं होगा
4:33
है और तत्व कर दिया अपने सब कुछ नहीं होगा
4:36
फर्क पड़ा कि नहीं फिर किसी को भी यहां पर
4:40
कि सरदार की नहीं स्थित किसी को भी यहां
4:44
पर सब कुछ हैं कि बस आज की शपथ कुछ नहीं
4:48
हुआ सब कुछ है तो बस आज की सब कुछ नहीं
4:53
होगा और खामोशी से मिल सकती है हम उसी की
4:57
कीमत है
4:59
जी हां कोशिश से मिल सकती है का मोची की
5:02
कीमत पर बोल के या खोल के लव कुछ
5:07
आधार पर बोल के भेजा खोल के लब कुछ
5:14
क्या हुआ ब्रदर प्रश्नपत्र
5:18
मैं तेरे सर्कस की तरह नाम बदल
5:23
पेश-ए-खिदमत तीसरे सर्कस की तरह अवतार यह
5:27
कहां से निकला तीर तरकश की तरह तारीख कहां
5:33
से निकला कितना बेहतर सुगंध तेरी जुबान से
5:38
निर्णय है भारतीय सर्कस की तरफ तारे कहां
5:42
से निकला कितना बेदर्द सुगंध तेरी जुबान
5:46
से निकला लगने वाली ही थी बस जाकर खिला
5:51
रहें कष्ट है लगने वाली की बजाय किनारे
5:56
कश्ती अथवा हाय किस वक्त भंवर भैरहवा से
6:01
अधिक लाभ लेने वाली ही थी वह जाकर किनारे
6:06
क्षीण हाय किस वक्त हर आधे रवा से निकला
6:12
पूरी शिद्दत से तेरी याद में जख्या मैं
6:16
को पूरी शिद्दत से तेरी याद में जब खोया
6:19
मैं तब कहीं जाकर गांव में वसूलों से यहां
6:24
से निकला
6:26
को पूरी शिद्दत से तेरी याद में जब पोया
6:28
मैं तब कहीं जाकर रमेश सूद और श्याम से
6:33
लाभ - अिववािहत
6:38
कि अगर किसी शपथ की यह सितम जो फलक ने
6:43
पसंद नियुक्त किए सितम जो फलक ने पसंद
6:48
मेरे लिए बढ़ाएं इन उसमें जमीने भी चंद
6:54
मेज़
6:56
कि यह सितम जो फलक ने पसंद मेरे लिए
6:59
बढ़ाएं इन्हें जमीने भी चंद मेरे लिए कफस
7:04
में पहुंचा तो मेरा खयाल था शायद कफस में
7:10
पहुंचा तो मेरा खयाल था शायद चमन से होंगी
7:15
सदाएं बुलंद मेरे लिए कहा उसने पहुंचा तो
7:20
मेरा ख्याल था शायद चमन से होंगी सदाएं
7:23
बुलंद मेरे लिए
7:25
में पूरे में गूंजती आवाज सुन रहे थे सभी
7:30
कि मुझे में गूंजती आवाज सुन रहे थे सभी
7:35
किसी ने भी न तिराइ कम अंधेरे वाला
7:40
व्यक्ति या पशु रहे थे सगी किसी ने भी न
7:46
गिराई कम आप मेरे लिए जो लोग कत्ल तो क्या
7:50
तेल से न थी वाक्य
7:53
है जो लोकतंत्र तो क्या पेयर से न थे वाइफ
7:58
इस खनन से हुए बहराम अंधेरे लाभ को इस
8:04
होने से हुए वह रामानुज राय मेरे लिए वह
8:09
दिन भी थे कि मैं आवाज बंद करुं
8:13
थे बुद्ध इन थे कि मैं आवाज बंद क्यों करा
8:16
था यह वक्त है कि है सब होंगे बंद देंगे
8:23
वाह यह वक्त है कि यह सब हम बंद मेरे लिए
8:28
आप राष्ट्रीय कि दिए कि दोगुनी दाणा हो
8:32
सकी जावेद दिए की लौ गिनवाया ना हो सकी
8:37
जावेद भरी हवा नित्य कैसी जख्म
8:43
ई वास भरी हवा में एक ऐसी सकंध मेरे लिए
8:47
कि यह सितम जो फलक ने पसंद मेरे वाह
8:52
बढ़ाएं इन उसमें जमीने कि चंद दिन शुभ
8:58
मुहूर्त
9:01
मैं जब भी मैं अपनी तबाही का सबब सोचता
9:04
हूं
9:05
मैं जब भी मैं अपनी तबाही का सबब सोचता
9:08
हूं वक्त जिस वक्त गुजर जाता है तब हम पाई
9:13
दवा वक्त जिस वक्त गुजर जाता है तब सोचता
9:18
हूं आपने कह दिया चलना है तो बस चलना
9:22
कि आपने कह दिया चलना है तो बस चलना है
9:25
ऐसे मौकों पर मेरी जान कब सोचता ऐसे मौकों
9:30
के मेरी जान मैं कब सोचता हूं इससे पहले
9:34
कभी आया ही न था दिल का हकदार इससे पहले
9:39
कभी आया ही न था दिल का अभाव आपने याद
9:43
दिलाई है तो अब सोचता है भारत अपने याद
9:49
दिलाई है तो आप सोचता हूं तुम में और मुझ
9:52
में कुछ फर्क तो बस इतना है
9:55
कि तुमने और मुझ में हैं कुछ फर्क तो बस
9:58
इतना है तुम अदब और मेहता हद जब कुछ वाइफ
10:04
मदर पॉर्न नेता हद जब स्कूल
10:08
ई वास
10:10
हुआ है
10:13
में बदलते तिजारा क्षेत्र मेरी या बाय
10:17
तलवारों के दस्ते बेचता है मेरी या बाइक
10:22
सवारों के दस्ते बेच डाले हैं बहुत महंगी
10:26
थे यह हीरे जो सबसे देता है
10:30
एक बुजुर्ग पर चलकर मंजिल तक पहुंचना था
10:34
गरीबों है
10:36
कि पुतिन पर चल के मंजिल तक पहुंचना तरफ
10:39
गरीबों है अमीर देश अपने वह सारे रिश्ते
10:43
बेचता दिए हैं जिन पर चलकर मंजिल तक
10:47
पहुंचना था एवरी मोंठ हैं अभिलेख शहर में
10:51
वह सारे रास्ते पर जा रहे हैं मेरे तरियां
10:55
का पानी उठा डाला है ठेके मेरे घर यार का
11:00
पानी उठा डाला है ठेके पर वह बोतल भेजो
11:04
खेतों पर बरसते देखदा देखड़ा बवारी से भरे
11:10
इधर के लिए मुश्किल थी सांपों की खरीदारी
11:15
में भरे घर के लिए मुश्किल कि ग्राहकों की
11:18
खरीदारी जिला युवा अपने बच्चों के बस्ते
11:23
धुव्वा अरे घर के लिए मुश्किल तीन फलों की
11:27
खरीदारी अभिलाष साहेब बाबा अपने बच्चों के
11:31
बस्ते पेज तरफ यह दर्द बहुत उस तरीके से
11:38
वह दिन को रात करता है बहुत मुश्किल तरीके
11:43
से वह दिन को रात करता है आखिर को बुलाकर
11:48
रोशनी की बात करता है दिखाता है अंधेरे
11:53
में हजारों वास्ते लेकिन
11:56
मैं दिखाता है अंधेरे में हजारों रास्ते
12:00
लेकिन सफर का नाम लें तो हौसलों को बात
12:05
करता है अब संभल कर चलना पाए कोई भी ख़ुद
12:10
अपनी मर्ज़ी से
12:11
कि संभल कर चलना पाए कोई भी ख़ुद अपनी
12:15
मर्ज़ी से
12:18
कि वह कहता इस तरह के पुत्र दिही घात करता
12:22
है राशि के बुझा देता है सूरज और फिर यह
12:30
फ्रिल में आते ही दिए की लौ में शामिल
12:34
दर्द की घृणा करता है आप बहुत मजबूत तरीके
12:39
से पुतिन को लांघते फ्री को बुलाकर रोशनी
12:44
की बात करता हूं आफ रफ
12:48
कि यह गंध सी नोएडा आशिक के अंदर दर्द
12:53
ठहराब पाप
12:56
ए सी एन राव ने आशिक के अंतर्गत दिल ठहरा
12:59
हुआ एक ब्लूटूथ स्विच हर साल यह मुस्तकिल
13:03
है शहनाई आशिक के अंदर दर्द दिल ठहराव्ा
13:08
एक बूंद शहद साले मुस्तकिल ठहरा हुआ था
13:13
करना दे मैं एवं एक दिन जल प्रलय धारसूल
13:18
करना दे महमूद दिन जल गद्दार से भारत के
13:24
फिल्म में तेरे चेहरे के तिल ठहरा हुआ था
13:29
महमूद दिन जलवेदार से आमखेड़े तिल में
13:34
तेरे चेहरे का तेल खराब हुआ था कि व्रत
13:38
देखो मैं ठिठक कर बस में अंजुम में उसे
13:42
तो क्यों ना देखो मैं ठिठक कर बस में
13:45
अंजूम उसे चावल जिसको देखता हूं पागल ठहरा
13:51
माफ प्राख्यात झील के पानी की सूरत हूं
13:55
मैं उसके इश्क दा जी के पाने की सूरत हूं
13:59
मैं उसके इश्क में ब्रिटिशों वर्क पर जमीन
14:04
पर मुज़महिल अहसास वाली हवा बहुत जचेगा
14:10
श्रीयंत्र उत्तर तेज हवा के उधर से यह
14:15
जालिम पुस्तक कृष्ण अधिक
14:22
कि डा
14:24
कि भाड़ है
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