# Poetry of Dr. Inam ul Haq Javeid
# Political Poetry of Dr. Inam ul Haq Javed
# Punjabi Poetry
# Punjabi Poetry of Dr. Inam ul Haq Javed
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अजय को
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कर दो
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शो मोर
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कि आज मैं तंत्र विद्या के हवाले से आपको
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अपने वह शायरी सुनाऊंगा जो कमी सोच लो
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है और फिर हवाले से यह नियुक्त किया और
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तरफ जिसमें तल्खी अवतंश तक ज्यादातर
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की शोखी पिक्चर अमिताभ है यदि तबस्सुम
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ज़रीना की कैफियत तो हो सकती है लेकिन
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ज्यादातर हैरत आपको उसने नजर आएगी
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अच्छे-भले यकीन स्वभाव तक के अच्छे-भले
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यकीन से यह महान तक गए और इसके बाद मंत्र
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की अंजाम तक गए सैया रात को जो दे भी तो
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किस्मों से दोस्त हैं
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ए सईंया बाद को जोधी तो किस्मों से दोस्त
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दें हम पेड़ के आशियाने से खुद नाम तक गए
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हम आज उनके आशियाने से खुद जाम करते अब
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कोई रुक में पहुंचा क़याम से पहले
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का कोई रूप में पहुंचा पयाम से पहले किसी
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ने तोड़ दिया रोजगार शाम से पहले मुझे यह
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डर है कि मिल-जूल के फिर से गुजरात में
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शराब हथियार न दे हम किमाम से इलावा
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सलाउद्दीन अहमद ने अनुमान से पहले पूछते
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हो किस्सा क्या
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मैं अपनी बदहवासी कर दो
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में पूछते हो किस्सा क्या अपनी बदहवासी का
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मूल को दबाया है यों उद्धार के नीचे आ
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है बारिशों से बचने को भागकर कोई जैसे आ
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खड़ा हो सीधा ही आप शहर के में पुष्टि और
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दूसरा क्या आपने बदहवासी का मूल को दबाया
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है जो उद्धार के नीचे बारिशों से बचने को
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भांपकर कोई जैसे आप खड़ा हो सीधा ही आधार
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के नीचे फेरत है कि जो लोग उधर से वह इधर
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आ
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हुआ है दूं कि जो लोग उधर थे वह इधर हैं
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पहले भी जो शर्त पर थे वहीं आज विशाल हैं
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ऐसा यार सर है न कि जो लोग उधर से इधर है
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पहले भी उस पर थे आज सर हैं गांवों में
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अंडे से निकल कर हम लोग तो अंडे में आपके
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घर हैं जाएंगे यहां से निकल कर हम लोग
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घंटे में याद दिला दो
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कि वह और ठीक है झूठ बोल तोड़ने वाले बहुत
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ही मूल तोड़ने वाले मियां अब आए हैं इसको
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न छोड़ने हमारे बड़े भैया भोपाल स्कूल
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छोड़ने वाले नहीं कुछ भी नहीं यह जान तुम
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कहते हो सब कुछ बस में गुजारी कुछ होगा अब
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होगा लेकिन तो यूं लगता है मर जाएंगे मर
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जाएंगे तब अगरचे कि अगर ली है
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जो अलार्म को
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कि अदम साहब शायद जिससे उनका भी और अगर
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फिर भी अगर चेहरा भी खाली दीनदयाल पीना
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उठा लाया मगर वायर्स को देखो 6 किलो कितना
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उठाना है कि अगर शीघ्र कुछ और अगर खाली
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बीना अग्रवाल को देख लो अगर इसको 26 की
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निशानी है
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आज के टीवी शो है नहीं घर में पार्टी नाम
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था कि अतिथि है नहीं घर में एंटीना उठा
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मौलवी तुम्हारा
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मैं कहना बजाय है लेकिन मौलवी तुम्हारा
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कहना बजाय लेकिन बेरोजगार हो जो रोटी कहां
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से खाए कीड़े को रिस्ट देगा पत्थर में भी
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हो लेकिन यह तो बताओ कि डाकपत्थर में कैसे
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जाए और
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है और इसी पर मेज़पोश का दम का शेर याद आ
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जाता है कि सिर्फ मस्जिद में गिर जाता है
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वह जन्नत में काम तो दिमाग खूब दिमाग
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अश्लील के दिमाग में
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है एग्जेक्ट दिमाग अफसरी बेगम का हूं
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लेकिन परेशान दबा शुरू करें
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12 दिमाग आपस में गुफ्तगू कर रहे हैं दो
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दिमागों की कुछ गूगल
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कि यह तथा दो धमाकों की गुफ्तगू दिमाग एक
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अश्लील बेगम का लिखित परीक्षा है
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ही क्यों न चली जाती है और बैठक में यह
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सुनते ही दिमाग अफसर अरे ऑल यहां तक कि
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उठा यह सुनते ही दिमाग अब समय अलग चीज उठा
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मेरा भी हौसला देखो मैं गणेश्वर दे रहता
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सुनने जा रहा हूं हर एक बात उसकी सुनने जा
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रहा हूं हर एक बात उसकी वह जो में आए कहां
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जा रहा है
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कि करप्शन के मिलल के की टूटी नहीं है
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सुपारी मुसलसल बहरा है खरीदने खुश कि देखा
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कि ले आएंगे हवाले से जो अ तवा नहीं जोड़ी
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दवाई खरीदने खुश डिब्बे का के लिए आएंगे
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हवाले से अधिक बेनिफिट है जिससे तबीयत में
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ज्ञानी है खड़ी है दोराहे पर के बच्चे को
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पिलाएं क्या इधर है केमिकल कर डर उधर
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ज्यादा पानी प्रवेश करता है वह अ लेमन फेश
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करता है वह हर मेहमान को चाय अब चीनी की
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रखती के बगैर है
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कि महंगाई चीनी स्कैंडल्स पेश करता है वह
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हर मेहमान को चाहिए चीनी की शक्ति के बगैर
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जो बनी होती है आगे पुश से चकित देखिए आप
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देख खुश पेश करता है वह मेहमान को चाहिए
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चीनी की थी के बगैर जो बनी होती है खुश से
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दूध और चाय की पत्ती को सब्सक्राइब कीजिए
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और सब्सक्राइब 10 साल की जेल खानों से
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मिली पुलिस थानों से अली खान से मिले
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पुलिस थानों से मिली मुझको सारी बातें झूठ
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से मिलने से मिली पुलिस थानों से मिली
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मुझको सारी इजाजत दें इन दोनों कारणों से
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मिली थी
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लुट बाजारी समझ लें इन विस्फोटों की
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डालियां चोर बाजारी समलैंगिकों की डालियां
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जिंदगी की भावनाओं से यह चोर चोर बाजार
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अगले की जिंदगी की भावनाओं से सब्सक्राइब
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की टेंशन तक सबस्क्राइब बुखार तो यह
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अंग्रेजी तो यह अंग्रेजी और फिर आप रखने
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की खातिर बैठकर हम्म को धरने को अ
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कि अधिवेशन से फैजाबाद पार्क रखने की
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खातिर नहीं हूं बैठकर हम्म को धरने से
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रोको अगर रोक सकते हो तो लीडरों को
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धुआंधार तकरीर करने से रूपा पूरा अध्ययन
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कर दो
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का वध है
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झाल
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को पतला हो
#Humor
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