Akbar The Great Part 2 | Conspiracies in Mughal Courts |#mughalempire #india #indianhistory #indian
Nov 4, 2024
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[संगीत]
0:08
अकबर के बाद मुगल बादशाहों का राजवंश भारतीय बन गया
0:14
कहते हैं की महान पुरुषों में एक आकर्षण होता है जो लोगों को उनकी ओर खींचना है
0:21
अकबर में यह आकर्षण और दिल फरेबी बहुत ज्यादा mikedar में द जिसमें पादरियों ने
0:27
एक बेहतरीन विवरण दिया अकबर की आंखों में इतनी चमक थी जितनी धूप भरे समंदर में
0:36
आज भी लोग भगति है और उसका शानदार और मर्दाना स्वरूप सबसे बुलंद
0:46
लाहौर से राजा टोडरमल का खत है सेहत खराब रहने लगी है बाकी जिंदगी हरिद्वार में
0:52
बिताने की इजाजत चाहते हैं राजा टोडरमल दरबार से अलग होना चाहते हैं
0:58
उम्र का तकाजा ससुर
1:06
ए गया था जिसे भरने में काफी वक्त लगा और राजा टोडरमल हमें छोड़कर हरिद्वार में
1:15
बसाना चाहते हैं उनकी जरूरत है
1:23
खुदा के बंदों की खिदमत खुदा की खिदमत से कम नहीं हुजूर की बात वो नहीं दल सकते हैं
1:40
हुजूर आपने मुझे याद फरमाया की मौसी की से हमें बहुत रात मिलती है
1:49
आज कुछ बेचैनी सी हो रही है कुछ सुनाइए ना
2:00
दादा
2:26
देखो बाबा
2:48
मेहरबानी करके आप पेट के बल्ले
2:54
मगर ऐसा कौन कर सकता है देखो शेखू बाबा
2:59
अरे तुझे तक चाहिए था तो वैसे ही दे देता हूं
3:22
अजमेर
3:38
वैसे हुजूर बेहतर है लगता है
3:45
जनाब
4:03
कल रात का जो आदमखोर
4:12
जंगल है भाई तुम कहां द अब मैं हुजूर पेड़ पर चढ़ गया पेड़ पर चढ़
4:22
गया और एकदम [हंसी]
4:29
मानसिंह यहां तो आओ बेटा खुश रहो
4:36
खैरियत तो है क्या बात है आप लोग तो यूं बुझे हुए हैं
4:42
जैसे दुनिया ही उजड़ गई हो क्या बात है राजा मानसिंह
4:48
आज आज
4:58
राजा साहब हमने अपना ख्याल बदल दिया है अब हम बंगाल नहीं जा रहे हैं
5:16
तो अभी चले जाइए मानसिंह जी इसमें बिगड़ा क्या है जनाब हम तो यही रहेंगे आगरा के करीब
5:24
समझ गए ना आप सुधार हो गया है मतलब वो बीमार द इस बात
5:33
की मुझे इतना तक नहीं गई सच सच बताइए क्या हुआ था उन्हें पेट में घाना दर्द की बात सुनी थी
5:40
बड़ा भगवान नहीं होनी चाहिए
5:47
अल हज़रत साख बीमार द और इस बात की मुझे खबर तक नहीं खुदा एन करें उन्हें कुछ हो
5:52
जाता तो ऐसे में तो मेरा आगरा के आसपास रहना बहुत
5:58
जरूरी है ना जाने उन्हें कब मेरी जरूरत पद जाए हुजूर मगर मारा ख्याल तो ये है की इस समय आप
6:06
बंगाल में उठ रही बगावत ने जा के चित्रा काफी शांति मिलेगी
6:11
[संगीत] राजा साहब मैं कहां रहूं कहां नहीं इसका फैसला आप
6:19
मुझमें पर छोड़ दें तो बेहतर बंगाल में उतरी बगावत ने रोकना है तो फौरन
6:25
कुछ की तैयारी कीजिए साथ में है मेरे बेटे खुसरो को भी ले जाइए आपकी सोबत में बहुत कुछ सीखने को मिलेगा
6:33
जनाब ने तो मैं आगरा बादशाह सलामत रहे पास
6:38
भेजने की सोच रहा था जनाब मेरे पास फालतू बहस के लिए वक्त नहीं
6:44
दूसरों को अपने साथ ले जाइए सियासत के तौर तरीके सिखाए बंगाल की तैयारी कीजिए
6:51
समझ गए ना आप जी जी हान बेटा खुश रहो
7:02
[संगीत] [प्रशंसा]
7:15
लगता है बीमारी की बात पोशीदा राखी गई
7:25
ताकि खुदा ना करें अलांपनाह का इंतकाल हो जाए और खुसरो को तख्त पर बिठा दिया जाए
7:31
हमें बंगाल भेजकर हमारी गैर मौजूदगी का फायदा उठाया जाए 30 बरस की उम्र है हमारी और हमें अभी तक
7:38
तो ताज नसीब नहीं हुआ ये कहां का इंसाफ है आपका फैसला हरमेन में सही है अभी बंगाल
7:44
नाजा कर आप यही सही मौके का इंतजार कर सकते हैं अजमेर में यहां गुरबत के शिव रखा है क्या
7:52
है हमें ताकत के लिए daulatkar है जो यहां से नहीं की जा सकती अगर हम इलाहाबाद चलें
7:58
वहां बिहार की सारी मालगुजारी वसूल कर सकेंगे
8:03
बिल्कुल सही इलाहाबाद
8:09
खान मौत के द्वारा खड़े हैं एक और धनी का सहारा छूट जाएगा वो नहीं मिले तो क्या उनकी दौलत तो मिल
8:16
जाएगी [संगीत] मानसिंह के चने के बाद
8:22
फौरन हम कुछ करेंगे क्या हाल हैं हुजूर पता है पानी का सही
8:30
वक्त ए चुका है वहां पे हुक्मरान आपसे झगड़ो में उलझे हैं saltnatyam
8:44
हाल फिलहाल
8:49
कब क्या हो जाएगा
9:21
शहजादा मुराद को पैगाम भिजवा दो खाने खाना अब्दुर रहीम उनके संगे बाजू रहेंगे
9:40
शहजादा सलीम ने खत भेज कर पादरी सेवियर को अपने पास बुलवाया है और हुजूर वो खत
9:46
इलाहाबाद से भेजा गया है इलाहाबाद सलीम इलाहाबाद में क्या कर रहा है हमने
9:52
उसे अजमेर में बने रहने के लिए कहा था ये हम
10:12
इलाहाबाद में बने रहने की कोशिश की तो हमें अपना समझे
10:19
और उसने कोई उल्टी सीधी मांग की तो उसकी भी तलाक हमें फौरन की जाए
11:00
[प्रशंसा] तुम्हारे दिल में उसके लिए प्यार ना हो
11:06
मगर हमसे चाहते हैं प्यार से क्यों महरूम रहे कानून वो हमारी मोहब्बत का नाजायज फायदा उठा रहा है मगर
11:14
वह हमारा पोता है हमारा खून है हम कुछ नहीं कहेंगे फिर बताइए उसके मंसूबे
11:21
क्या है हमको तो कुछ बताता ही नहीं उसने मुझसे भी कुछ नहीं कहा फिर भी कुछ तो कहा
11:27
होगा हमारे लिए उसके मंसूबे जाना बहुत जरूरी है क्या कहा उसने
11:46
मुलाकात नहीं की एकू बाबा के खेमे की तरफ पहुंचकर मैंने
11:51
खबर भेजी की मैं ए रही हूं मगर जब मैं वहां पहुंची तो खेमा तू ए जा रहा था उसके
11:59
खादिम ने बताया की जैसे ही तालीम ने सुना की मैं ए रही हूं और कुछ कर गया फिर भी आप
12:06
आप उसकी तरफदारी करती हैं आप नहीं जानती वो क्यों आपने मामू के साथ
12:12
किस तरह पेश आता है कभी सोचा आप इतना बिगड़ क्यों गया है
12:19
काश वो अपने बेटे खुसरो की तरह नेक और शरीफ इंसान होता
12:30
है जो इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं सुनना चाहती है
12:42
हमेशा सलीम बना रही तरफदारी की और वहां की सारी गलतियां नजर अंदाज़ कर दिया
12:49
और आप जोधा भाई की बातें कुछ मतलब नहीं रखती जोधाबाई की तहजीब उन्हें अपने बेटे
12:55
के हाथ में कुछ भी कहने की इजाजत नहीं देती सलीम को थोड़ा वक्त दिया जाए मुझे पूरा
13:01
यकीन है की वह अपने रास्ते बदल देगा
13:16
पर वो दोनों सलीम से किस बात पर बेहतर निकले
13:24
करने लग गया और डेनियल महल में बैठा उल्टी-सीधी हरकतें करता रहता है किसका
13:30
जिक्र करते हुए भी पता नहीं कहां और किस बात में कमी रह
13:35
गई हमने तो हर खुशियां महिया की अच्छे से अच्छे उस्ताद दिलाई उन्हें जो उन्होंने
13:42
कहा वो दिया फिर भी वो इतने पद निकले
14:09
अहमदनगर इंतजार
14:35
से कुछ ज्यादा कुछ नहीं है और उन्होंने हमें फौरन आगरा बुलाने के लिए एलसीडी भेज दिया सब तुम्हारी वजह से हो रहा है अब तो
14:41
नहीं अगर तुम हर कदम पर हमारी मुखालफत ना करते तो अब तलाक हम सारे दक्षिण पर फतेह
14:46
हासिल कर चुके होते मगर तुमने माफ कीजिएगा
14:51
तुमने हमेशा वही किया जिससे डाकिनी सुल्ताने का फायदा हो तुमने जानबूझकर वो
14:56
कम किया जिसकी वजह से हम कामयाब ना हो सके और उसे अभी इसलिए की तुम भी उसी मजहबी फिर कैसे ताल्लुक रखते हो जैसे की सुल्तान
15:05
अब हमें और बेवकूफ मत बनाओ दूर रहीम तुम्हारी बातों से तुम्हारी हरकतों से टॉप सोंग्स होता है की तुम किसके साथ हो
15:13
अब हमें तुम पर करता ही भरोसा नहीं है समझे कराने पाक की कसम खा कर कहता हूं की मैंने
15:19
कभी आपके साथ दगाबाजी नहीं की और अगर फिर भी आपको मेरी बात पर यकीन नहीं है तो मैं अभी अभी हम लोग यहां से आगरा लौट चलते हैं
15:25
नहीं और बादशाह हुजूर इस बात का फैसला करेंगे की क्या कभी मैंने आपके और उनके लिए किसी का महल अपने दिल में रखा नहीं
15:31
नहीं हम हम आगरा वापस नहीं जाना चाहते बादशाह हमारी बात पर यकीन ही नहीं कहेंगे
15:37
वो कहेंगे की हम छोटे subhut पेश कर रहे हैं नहीं नहीं हम यह नहीं चाहते हैं
15:45
लेकिन हम हम करें क्या
15:50
बस अब एक यही चीज बची है जो हमें ताकत देती
15:56
है हम बादशाह हुजूर को यकीन दिलाना चाहते द
16:04
की हम गद्दी मशीन होने के लिए सलीम से कहीं ज्यादा काबिल है
16:18
वैसा कम भेजो पर खुदा के लिए हमें ताला हाथ छोड़ दो
16:23
अब हमें कितनी बार की कोई जरूरत नहीं है हमें किसी के लिए कोई परवाह नहीं है
16:28
[संगीत]
16:37
[संगीत]
16:47
लगता है मौत के करीब है
16:58
अब तो खुदा ही मददगार हो सकता है
17:07
एक और अज़ीज़ दोस्त हमसे विदा ले रहा है
17:14
हमें उसकी कमी हमेशा महसूस होगी
17:24
[प्रशंसा]
17:37
और वहां से शहजादा बर्बाद को वापस लेकर आओगे हमारी बुलाएगा तो उसमें कोई ख्याल नहीं
17:44
किया कोई जवाब नहीं दिया लोग कहते हैं वो दिन-रात शराब में डूबा
17:49
रहता है शायद हमारे सामने आने पर बहुत खाता हो पर
17:55
मुझसे कहना हम उससे नाराज नहीं है बिल्कुल नाराज नहीं है
18:01
मुझसे शराब से बाहर आने में मदद करेंगे तुम्हारी बात जरूर मानेगा
18:28
[संगीत]
18:36
आरोप मोर जान
18:44
[संगीत]
18:51
[संगीत]
18:58
क्या बात है
19:08
[संगीत]
19:13
[संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]
19:33
[संगीत]
19:41
[संगीत]
20:10
आप लोग जा सकते हैं
20:53
हम आपको कुछ दिखाने ले हैं
21:06
ऐसी बात नहीं थी
21:19
अब हम दन्याल को ढक्कन भेजना
21:49
जी हान हज़रत
21:55
[प्रशंसा]
22:19
बल्कि एक चीज भेज दिया वह अपनी 70 हजार फौजियों के साथ आगरा आना
22:26
चाहता इतनी बड़ी फौज को लेकर यहां आने की इजाजत उसे कैसे दे सकते हैं
22:57
लेकिन वह फसल भी तो हैं [संगीत]
23:05
[प्रशंसा]
23:12
बहुत अच्छे के बाद कोई अच्छी खबर सुनी है
23:17
[संगीत] अहमदनगर के किले पर शहजादे का कब्जा है और
23:25
जनाब अबुल फजल ने कुछ और पाजी टुकड़ियों की मांग की है खाना वो हम आप पर छोड़ते हैं
23:30
पर अब हम आगरा में हाथ पर हाथ भरे बैठे रहने में कोई दुख नहीं समझते हम ढक्कन
23:36
जाएंगे जिस मुहिम की ऐसी शानदार शुरुआत हमारे बहादुर बेटे ने की है उसे अंजाम
23:42
देना हम अपना फर्ज समझते हैं क्यों बेशक [संगीत]
23:56
खाना असीरगढ़ केले के अंदर चलें अभी नहीं हुजूर सफाई होने दीजिए मैं सुबह खुद केले के
24:03
अंदर गया था लाश है जहां तहां फूली और छड़ी पड़ी हैं हमारे सिपाहियों ने कर बरपा
24:08
किया हुजूर अगर पुर्तगाली टॉप की भी साथ में हो तो चढ़ाई का पिछड़ी मजा होता लेकिन पुर्तगाली हम से हमारे लिए आपके महबूब
24:15
कादरी ने सिफारिश करने से साफ इनकार कर दिया उसे इसलिए तो हम कहते हैं की किसी से ज्यादा उम्मीद करना ठीक नहीं इससे मायूसी
24:22
नहीं होती है
24:28
आगरे से खाना है आज़म मियां अज़ीज़ कोका का खत है पढ़िए लिखते हैं शहजादे सलीम
24:34
बड़ी तादाद में घुसार फौज के साथ लड़ाई का मानसून लेकर आगरे की तरफ बढ़ रहे हैं उन्होंने फौरन आपसे आग्रह आने की इज्जत की
24:41
उन्होंने कुछ सिक्के भी भेजें सलीम के नाम से जारी किया गया है सलीम
24:48
अपनी हद से बाहर जा चुका है हम उसकी पेड़ अब और खुदगर्ज हरकत से तंग ए चुके हैं उसे
24:55
रास्ते पर लाना ही पड़ेगा असत तुम सलीम के पास जाओ और उससे कहो की हमें बाबर खान के
25:02
बाप उसूलों की हिफाजत के लिए अगर अपने बेटे के सामने भी खड़ा होना पड़ा तो हम
25:07
उसे अपनी जिंदगी का सबसे बेहतरीन लम्हा समझेंगे और सेबी का नाम अगर हिफाजत चाहता
25:13
है तो इलाहाबाद वापस लौट जाए [संगीत] आगरा लौट आएं हम चाहते हैं की जब हम सलीम
25:22
से मुकाबला करें तो हमारे साथ रहे हम देखते हैं की बाकी शहजादा हमारे सामने
25:28
कैसे के पता है आगरा से हम सिर्फ चार कोस दूर हैं अब हमें आगे बढ़ाना चाहिए
25:36
क्या आप में बादशाह हुजूर के खिलाफ लड़ने की हिम्मत है मुझमें में तो नहीं अब अगर हम पीते हैं तो
25:43
ये तो लाइव शुरू होने से पहले ही अपनी हर काबुल कर लेने वाली बात होगी तुम हमेशा बेवकूफी की बात करते हो अल्लाह देख
25:49
तुम्हारी बहादुर का कोई माने ही नहीं जबकि मैदान में जंग में तुम्हारी लास्ट मिलेगी
25:56
बादशाह सलामत की किसी भी जंग में शिकस्त नहीं हुई तो कोई वजह नहीं की वह यह जंग में नहीं जीतेंगे अबुल फसल के आगरा
26:03
पहुंचने ही हालत और बिगड़ जाएंगे हो सकता है वो बादशाह को हम पर हमले की सलाह दें वही मेरा दुश्मन है सबसे खतरनाक आदमी हूं
26:11
इसलिए की बादशाह सलामत उसकी हर बात मानते हैं और अगर अबुल फजल आगरा पहुंच ही ना पाए तो
26:18
मतलब दक्कन से आने वाला रास्ता हमारे राज्य से होकर निकलता है अगर हम रास्ते में ही अबुल फजल को और बादशाह वैसे भी
26:24
आपको माफ करने से रहे मैं तो सिर्फ इतना चाहता हूं की बादशाह
26:31
सलामत मुझे अपना जानशीन ऐलान करें तब तो बादशाह से लड़ने से ज्यादा जरूरी है अबुल फजल को खत्म करना
26:38
ऐसा ही करना चाहिए तुम फौरन फौज को इलाहाबाद लौटने का हम जारी करो ऐसा लगना चाहिए की हम बादशाह
26:47
सलामत के हम की तामीर कर रहे हैं इसी से उनके दिल में हमारी जगह बनेगी
26:52
[संगीत] गदर खान भाषण मुझे फॉरेन बुलवाया है
26:58
और हम लंबा घूम कर आगरा पहुंचने के हक में नहीं है मगर ये मेरे जिम्मेदारी है की मैं आपको पुरी हिफाजत के साथ आगरा पहुंचा हूं
27:05
अभी मेरी बात मैन ले और यहां रास्ता छोड़ दे कुछ भी हो मेरा पहुंचना बहुत जरूरी है
27:34
यह सब क्या है हुजूर आप यहां से निकल जाइए मैं इन लोगों को संभालता हूं आप निकल जाइए
28:00
[संगीत]
28:10
तेरे सर को बेड़ा [संगीत]
28:15
[प्रशंसा] पार
28:30
को अपना बेटा कहते हमें शर्म आती है
28:50
हम उसे कभी माफ नहीं कर सकते उसकी बेरहम पर बदसलूकी दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है
28:56
नहीं नहीं रोज खबरें ए रही हैं जानती है उसके नए शौक क्या है वो शराब पिता है और
29:02
जिंदा आदमी की खाल उतरते हुए देखते बैठा रहता है ये हो गई उसकी हालत इसके बाद भी
29:07
आपको कुछ कहना है वो आगरा वापस आना चाहता है आपसे गिड़गिड़ा
29:14
कर माफी मांगना चाहता है आपकी बेरुखी उसे दीवाना बनाती जा रही है
29:23
अरे वो ऐसा इंसान ही नहीं है जो मोहब्बत और नफरत को समझ सके हम तो उसकी शकल भी
29:29
नहीं देखना चाहते आपका यही बर्ताव तो उसे बुरे रास्ते पर लेते जा रहा है आप हमेशा सलीम की बुराई
29:36
करते रहते हैं और उसके बेटे खुसरो को फिर आंखों पर बिठा रखते हैं मेहरबानी करके ऐसा
29:41
ना करें बेटे को बाप के खिलाफ खड़ा करना ठीक नहीं अब भी सलीम को वापस बुलवा लें एक
29:48
ही तो बेटे रह गए हैं आपके तानिया के बारे में जो कुछ सुना है क्या
29:55
ठीक है
30:08
मारा जा रहा है हमने हम भेज दिया है
31:06
अकेला हमारे सामने आएगा
31:18
[संगीत]
31:29
[संगीत]
31:35
[प्रशंसा] [संगीत]
31:42
[प्रशंसा]
31:47
[संगीत]
32:29
उसे दिल ₹70000
33:04
शराब और अफीम ने तुम्हारे दिमाग को खराब कर दिया है तुम बर्बाद हो चुके हो
33:13
लेकिन तुमने हमेशा सुनी की हमेशा hukmuri की हमारी और अपने नालायक साथियों के कहने
33:20
पर अपने बाप के खिलाफ बगावत करने पर तैयार हो गए
33:25
अज़ीज़ दोस्त फसल तक को नहीं छोड़ा तुमने कान खोल कर सन लो
33:31
आज से तुम्हारी शराब और हकीम बिल्कुल बंद हम तुम्हें ताली में बंद करके रखेंगे और
33:37
हम देखेंगे की तुम इस नशे की लैब से बाहर कैसे नहीं आते
33:43
ना अब ए गए हो वही होगा जो हम चाहेंगे
33:49
समझे तुम्हारी फोजन पर पापन भी लगा देंगे और तुम्हारे नालायक साथियों
34:17
कौन है कौन है
34:30
तो वह मुझे जिंदा नहीं छोड़ेंगे अपनी
34:42
जल्दी कर [संगीत]
34:49
बंदूक की नाली में जमा बारूद शराब में मिल गया लगता है
34:56
[संगीत]
35:05
कभी मिले [संगीत]
35:13
[संगीत]
35:20
[संगीत]
35:30
शहजादे [संगीत]
35:57
एक ही बेटा बाकी बचा है शेखू बाबा हो
36:26
हमारी कोई ख्वाइश नहीं की हम उसके
36:31
या अपने मुकद्दर से लड़े बस
36:37
एक उम्मीद थी की कम से कम एक ऐसा बेटा होता
36:42
तो समझ सकता की अपने दौर में उसके वालिद में क्या-क्या
36:48
किया लेकिन ऐसा नहीं हुआ
36:57
हम अपने अज़ीज़ से ही हर गए
37:04
कोई लड़ाई बाकी नहीं रही अब तो जो भी करूं
37:12
कोई फर्क नहीं पड़ता
37:26
भला और कितनी दावा दी जाए उनके जिसमें रोग से लड़ने की ताकत ही नहीं रही
37:32
[संगीत]
37:38
[संगीत] फसल को याद कर रहे हैं
38:07
पहुंचे
38:19
हमें भविष्य के बारे में सोचना चाहिए
38:34
कैसा ज्यादा खुसरो ने ही गद्दी पर बिठा हो जाए राजा मानसिंह शहजादा सलीम के जीते जी
38:40
उसके बेटे खुसरो को तख्त ऋषि किया जाए तार के कायदे के खिलाफ है ऐसा नहीं हो सकता
38:45
शेख बुखारी क्या आप नहीं समझते क्या गद्दी के लिए खुश रहो शहजादे सलीम से ज्यादा
38:50
काबिल है शहजादा सलीम के साथ हम सब हैं
39:01
सिपाहियों ने शहजादा सलीम का वास्ते शाही खजाना मानसिंह हमारा मशवरा है की आप शहजादा
39:10
खुसरो के साथ जल्द से जल्द दारुल सल्तनत छोड़ दें अब यह जगह आप दोनों के लिए महफूज
39:16
नहीं ला इलाहा इल्लल्लाह
39:25
हुजूर आखिरी वक्त में खुदा का नाम लें
39:30
अपने गुनाहों के लिए माफी मांगने हुजूर [संगीत]
39:51
सलीम हमारे साथ चलें
40:04
लेकिन इससे पहले के आगे के कार्यवाही हो आपको यकीन देना होगा की मजहब की तरक्की के
40:10
लिए आप कम करेंगे और अपने दुश्मन मानसिंह और बेटे खुसरो से किसी भी किस्म का बदला
40:16
नहीं लेंगे वादा है ना
40:35
हमारे
40:40
बाबा बाबा
41:00
बाबा बाबा
41:20
[संगीत]
41:30
सारा करत
41:38
साधना कर
41:44
[संगीत]
41:51
[संगीत]
41:58
[संगीत] प्रभु
42:06
साधना है
42:14
[संगीत] [प्रशंसा]
42:24
[संगीत] आयो रे गोरे गोरे
42:32
साधना [संगीत]
42:45
[संगीत] 50 साल तक अकबर ने हिंदुस्तान पर राज किया
42:54
1556 ई की शुरुआत से लेकर 1605 ई के अंत तक
43:08
अजीब बात है की ईशा के 300 साल पहले का एक बौद्ध सम्राट और ईशा से 1600 साल बाद का
43:16
एक मुसलमान बादशाह दोनों एक ही तर्ज और तकरीबन एक ही आवाज़ में बोलते हो
43:24
शायद ये खुद भारत की आवाज़ है जो अपने महान पुत्रों के माध्यम से बोल रही हो
43:38
[संगीत]

