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নিজের স্বদেশে । কবি আবুল হাসান । আবৃত্তি- সেলিনা জাহান
Dec 13, 2025
কবিতা- নিজের স্বদেশে
কবি আবুল হাসান
আবৃত্তি- সেলিনা জাহান
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स्वदेश तुम झलसे जावा गुलाब कुड़ी शेड़ काछे
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भर दुप हमारे घरे एगिए आशो दुख जुड़े किस
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दृश्य भोबाशो स्वदेश तुम एक नदी नारी रात
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दुपरे किसिर घरे अमन तुम तीख हसो ता दे
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काछे जेते भोबाशो शहर जुड़े फूल मोरा गंध
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छड़ाए शहर जुड़े बसंत तार बाश बड़ाए बक्ष
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बक्ष जुड़े से बाश बसता
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से बाश पाछे पाछे सदेश तुम कि तारा घो
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सदिश तुम बुके काछे आर घो ना चतुर दिके
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नष्ट जले आर भो ना सदिश तुम घरे थाको बरे